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  • MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….

    MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बालाघाट (Balaghat) के बैगा अंचल में 19 बच्चों की मौत ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है. शुरुआत में इन बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण (Malnutrition) को वजह माना गया था, लेकिन ICMR और दूसरे प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों की जांच रिपोर्ट में मौतों की मुख्य वजह मलेरिया और मीजल्स (Malaria and Measles) यानी खसरा संक्रमण (Measles infection) सामने आया है. जांच में खसरा और मलेरिया संक्रमण को बच्चों की मौत की प्रमुख वजह बताया गया है. लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामला खत्म नहीं हुआ है. इसके बजाय बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

    जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे सभी नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. यानी संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी टीकाकरण इन बच्चों तक नहीं पहुंच पाया था. बालाघाट में हुई 19 बच्चों की मौतें संक्रमण से जुड़ी बताई गई हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों में बच्चों के सामने सिर्फ संक्रमण का खतरा नहीं है. इन इलाकों में कुपोषण भी बच्चों के स्वास्थ्य को लगातार कमजोर कर रहा है. एक तरफ मलेरिया और खसरे जैसे संक्रमण हैं और दूसरी तरफ कुपोषण की समस्या. इन दोनों के बीच आदिवासी बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    एक तरफ बीमारी, दूसरी तरफ कुपोषण

    ग्रामीण मध्य प्रदेश में बच्चों की पोषण स्थिति को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा 33 फीसदी से बढ़कर 42 फीसदी से ज्यादा हो गया है. इस स्थिति में सवाल यह है कि बच्चों को बीमारी से बचाने वाली वैक्सीन और कुपोषण से बचाने वाला पोषण दोनों की व्यवस्था में कमी कहां रह गई. बालाघाट में सामने आई 19 बच्चों की मौतों ने इन दोनों व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एक ओर अगर बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें पर्याप्त पोषण भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में संक्रमण और कुपोषण दोनों बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रहे हैं. केंद्र के मिशन पोषण 2.0 के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के साथ 6 साल तक के बच्चों को साल में कम से कम 300 दिन पोषण आहार दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन मध्य प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनबाड़ियों में एक साल में जुलाई तक करीब 260 दिन ही नियमित पोषण आहार मिलने के आरोप लगाए गए हैं. यानी जिस व्यवस्था के तहत बच्चों और महिलाओं तक पूरे साल पोषण पहुंचाने की बात है, वहां नियमित सप्लाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इसी बीच प्रदेश में पोषण आहार बनाने वाले रीवा, सागर, देवास, शिवपुरी और होशंगाबाद सहित जिलों के सभी 7 प्लांट बंद किए जा चुके हैं. पोषण आहार की व्यवस्था में हुए बदलाव ने भी सवाल खड़े किए हैं. जिस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों तक लगातार पोषण पहुंचाना था, वही व्यवस्था बदलाव के दौरान प्रभावित हुई. ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की नियमितता को लेकर चिंता सामने आई है।


    सरकार ने माना, व्यवस्था बदलने के दौरान सप्लाई प्रभावित हुई

    महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री निर्मला भूरिया के मुताबिक पुरानी व्यवस्था में ग्रामीण एवं पंचायत विकास विभाग की ओर से पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा था. मंत्री के अनुसार यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके बाद इसमें बदलाव किया गया. नए टेंडर जारी होने तक स्थानीय स्तर पर विभाग स्वसहायता समूहों के जरिए बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध करा रहा है. हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि व्यवस्था बदलने के दौरान कुछ दिनों तक पोषण आहार की सप्लाई प्रभावित हुई थी. इससे यह सवाल और अहम हो जाता है कि व्यवस्था बदलने के बीच बच्चों तक पोषण आहार की नियमित पहुंच कैसे सुनिश्चित की गई. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति चुनौतीपूर्ण है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विभाग की सचिव को बालाघाट जाने के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य वहां के हालात पर नजर रखना और स्थिति की जानकारी लेना है. बालाघाट के बैगा अंचल में हुई 19 बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने रख दिए हैं. जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण मौतों की मुख्य वजह सामने आने के बाद अब नियमित टीकाकरण भी चर्चा के केंद्र में है. क्योंकि जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों की संख्या बढ़ने का आंकड़ा भी सामने है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    मध्य प्रदेश की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि देश की कमजोर जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा इसी राज्य में रहता है. देश में 75 जनजातीय समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह घोषित किया गया है. मध्य प्रदेश में डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया, श्योपुर और छिंदवाड़ा के जनजातीय समुदाय इस श्रेणी में शामिल हैं. ऐसे में बालाघाट की 19 बच्चों की मौत केवल एक इलाके की घटना नहीं रह जाती, बल्कि यह सवाल उठाती है कि कमजोर जनजातीय इलाकों में बच्चों तक स्वास्थ्य और पोषण की सुविधाएं कितनी नियमित और प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं।

    बालाघाट में बच्चों की मौत की जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण सामने आया है. खसरे से संक्रमित बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हुआ था. दूसरी ओर ग्रामीण मध्य प्रदेश में कुपोषण के आंकड़े बढ़े हैं और पोषण आहार की सप्लाई में भी व्यवधान की बात सरकार ने स्वीकार की है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आदिवासी बच्चों को एक साथ बीमारी और कुपोषण से कैसे बचाया जाए. टीकाकरण और पोषण दोनों की नियमित व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. बालाघाट की घटना ने इस पूरी व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी

    MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी


    कटनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राज्य के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाने वाले और कटनी जिले (Katni district) के विजयराघवगढ़ (Vijayraghavgarh) से विधायक संजय पाठक (MLA Sanjay Pathak) की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी का मामला सामने आया है. शातिर साइबर ठगों ने कंपनी के सीनियर डायरेक्टर के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को चकमा दिया और बड़ी आसानी से पैसे ट्रांसफर करवा लिया।

    पूरी घटना बुधवार 12 अगस्त दोपहर करीब 2 बजे की है. विधायक संजय पाठक की कंपनी के सीनियर अकाउंटेंट शैलेश तिवारी के पास एक मैसेज आया. यह मैसेज कंपनी के ही एक सीनियर डायरेक्टर के मोबाइल नंबर से आया था, जिस पर उनकी फोटो भी लगी हुई थी. मैसेज में अकाउंटेंट को तुरंत किसी दूसरे बैंक खाते में डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया।

    चूंकि मैसेज सीधे सीनियर डायरेक्टर के नंबर और उनकी प्रोफाइल फोटो के साथ आया था, इसलिए अकाउंटेंट को किसी भी तरह का कोई शक नहीं हुआ. बिना देर किए अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए. दो बार में ट्रांजेक्शन किए गए, जिसमें एक बार 1 करोड़ 16 लाख और दूसरी बार करीब 33 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. इस तरह कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये ठगों के खाते में चले गए।


    फ्लाइट से उतरते ही विधायक को मिली जानकारी

    दिलचस्प बात यह है कि जिस समय यह फ्रॉड हो रहा था, विधायक संजय पाठक फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे. जैसे ही वह प्लेन से उतरे, उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक संजय पाठक ने तुरंत कटनी के पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को पूरी घटना की जानकारी दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने कुछ राशि को होल्ड कराने के निर्देश दिए. कंपनी के अकाउंटेंट की शिकायत पर रंगनाथ नगर थाने में साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है।


    ‘बॉस स्कैम’ का शिकार हुई कंपनी

    कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कमल मौर्य ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि यह एक टिपिकल साइबर फ्रॉड है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ कहा जाता है. इसमें ठग बड़े अधिकारियों की नकली प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को झांसे में लेते हैं।

    एएसपी ने बताया कि साइबर ठगों ने मात्र दो-तीन घंटे के अंदर ही पूरी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर साफ कर दिया. ठगी गई रकम को करीब 200 अलग-अलग जगहों पर डिस्ट्रीब्यूट किया गया, जिसे एटीएम और चेक के माध्यम से निकाला जा रहा है।

    पुलिस और साइबर सेल की टीम ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए ठगों के खातों से अब तक करीब 23 लाख रुपये की राशि को होल्ड (फ्रीज) करवा लिया है. फिलहाल, साइबर सेल की टीम तकनीकी जांच में जुटी हुई है और ठगों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

  • MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…

    MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…


    इंदौर।
    अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) और सौरव दास (Sourav Das) समेत उनके अन्य साथियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बताने वाले एक शख्स ने इंदौर पुलिस में इनकी भूमिकाओं की जांच की मांग उठाई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के प्रदर्शन में नाबालिग लड़के-लड़कियों को बरगलाकर जमावड़ा कराने में इनकी कथित भूमिका साबित होती हो और पॉक्सो के तहत अपराध पाए जाएं तो FIR दर्ज किया जाना चाहिए।


    किसने दी शिकायत?

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस की अपराध निरोधक शाखा में दी गई अपनी शिकायत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित मौजूदगी का दावा करते हुए अभिजीत दीपके और सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।


    अभिजीत दीपके, सौरभ दास और अन्य की भूमिकाओं की हो जांच

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने शिकायत में कहा कि जांच के जरिये इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि अभिजीत दीपके, सौरभ दास या समूह के अन्य सदस्य नाबालिगों को प्रदर्शन में लाने में कहीं शामिल तो नहीं थे। क्या ये लोग नाबालिगों को भड़काने में शामिल तो नहीं थे।


    इन सुबूतों को सुरक्षित किए जाने की भी मांग

    फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस क्राइम ब्रांच से विरोध प्रदर्शन के फोटो-वीडियो, मीडिया इंटरव्यू, सार्वजनिक बयान, प्रदर्शन स्थल और इसके आस-पास के सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संरक्षित करके उनकी जांच का अनुरोध किया है।


    जांच में पॉक्सो का अपराध मिले हो तो करें FIR

    शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का संज्ञेय अपराध सामने आता है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।


    इंदौर पुलिस ने भी शुरू की जांच

    अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि हमें अंसारी की शिकायत मिली है जो खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बता रहे हैं। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    दिल्ली पुलिस की भी भूमिका हो जाएगी अहम

    गौरतलब है कि कथित नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च की कोशिश थी तब पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुई थीं। इसमें कई आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए थे। ऐसे में इस शिकायत के सामने आने से पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। यदि इंदौर पुलिस उक्त शिकायत पर आगे बढ़ती है तब जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी।

  • BJP अध्यक्ष नवीन की नई टीम में MP के इन 4 नेताओं को मिल सकती है जगह… सुगबुगाहट हुई तेज

    BJP अध्यक्ष नवीन की नई टीम में MP के इन 4 नेताओं को मिल सकती है जगह… सुगबुगाहट हुई तेज


    भोपाल।
    भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Navin) की नई टीम के गठन की कवायद के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से भी राष्ट्रीय संगठन में जगह पाने वाले संभावित चेहरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद विष्णुदत्त शर्मा (वीडी शर्मा) की हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से हुई मुलाकात के बाद उनके नाम को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें और तेज हुई हैं। भाजपा के सामने राष्ट्रीय टीम में नए चेहरों को जगह देने के साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की चुनौती है। ऐसे में मध्यप्रदेश से ब्राह्मण, ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के चेहरों को प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो सकता है। संभावित नामों में वीडी शर्मा, राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, सांसद गजेंद्र पटेल और वरिष्ठ नेता लालसिंह आर्य की चर्चा है। हालांकि, अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा और इसमें जातीय समीकरण के अलावा संगठन में पकड़, चुनावी प्रबंधन, अनुभव और राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता अहम होगी।


    पीएम से मुलाकात के बाद चर्चा तेज

    पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम संभावित दावेदारों में सबसे प्रमुख माना जा रहा है। वे लंबे समय तक मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और संगठन को बूथ स्तर से लेकर चुनावी प्रबंधन तक संभालने का अनुभव रखते हैं। प्रदेश में भाजपा को लगातार मजबूत करने के दौर में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात ने भी उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाओं को हवा दी है। वीडी शर्मा के पक्ष में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के साथ संगठनात्मक अनुभव भी जाता है। यदि भाजपा राष्ट्रीय टीम में अनुभवी और संगठन को समझने वाले नेताओं को बड़ी भूमिका देने की रणनीति अपनाती है, तो उनका नाम मजबूत दावेदारों में रह सकता है।


    कविता पाटीदार : महिला और ओबीसी का समीकरण

    राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार भी राष्ट्रीय संगठन के लिए संभावित चेहरों में हैं। प्रदेश भाजपा संगठन में महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुकी पाटीदार के पास संगठन के साथ संसदीय राजनीति का अनुभव भी है। उनके नाम के साथ महिला और ओबीसी दोनों समीकरण जुड़ते हैं। भाजपा के लिए महिला मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक भूमिका को देखते हुए राष्ट्रीय टीम में किसी महिला नेता को प्रमुख जिम्मेदारी देना महत्वपूर्ण संदेश हो सकता है। वहीं ओबीसी प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी उनका नाम पार्टी के सामाजिक विस्तार की रणनीति में फिट बैठता है।


    गजेंद्र पटेल : आदिवासी चेहरे पर दांव

    राष्ट्रीय संगठन में आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति बनी तो सांसद गजेंद्र पटेल का नाम भी महत्वपूर्ण हो सकता है। मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में संगठनात्मक और राजनीतिक काम का अनुभव रखने वाले पटेल इस वर्ग के प्रतिनिधि चेहरे के रूप में देखे जा सकते हैं। भाजपा के लिए आदिवासी राजनीति केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश के साथ आसपास के राज्यों में भी आदिवासी मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में आदिवासी चेहरे को जगह देना पार्टी की व्यापक सामाजिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।


    लालसिंह आर्य : दलित प्रतिनिधित्व का विकल्प

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ नेता लालसिंह आर्य भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। वे भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चे की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। राष्ट्रीय संगठन में उन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो इससे दलित प्रतिनिधित्व का संदेश जाएगा। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में दलित वोट महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में इस वर्ग के अनुभवी चेहरे को प्रमुख भूमिका देना राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से उपयोगी हो सकता है।

    दतिया की हार के बाद संगठनात्मक प्रदर्शन भी कसौटी
    प्रदेश में हालिया दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर भी मंथन का दौर है। ऐसे में राष्ट्रीय टीम के लिए प्रदेश से चेहरों के चयन में केंद्रीय नेतृत्व संगठनात्मक प्रदर्शन, चुनावी प्रबंधन और नेताओं की स्वीकार्यता को भी ध्यान में रख सकता है। दतिया के नतीजे ने प्रदेश संगठन के सामने 2028 की तैयारियों को लेकर भी चुनौती बढ़ाई है। ऐसे में राष्ट्रीय जिम्मेदारी पाने वाले नेताओं की उपयोगिता केवल सामाजिक समीकरण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन को मजबूत करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

  • MP: ग्वालियर में अवैध खनन को लेकर HC सख्त…. वेतन और बेटे की स्कूल फीस समेत अफसरों से पूछे तीखे सवाल

    MP: ग्वालियर में अवैध खनन को लेकर HC सख्त…. वेतन और बेटे की स्कूल फीस समेत अफसरों से पूछे तीखे सवाल


    ग्वालियर।
    ग्वालियर (Gwalior) के बिलौआ में अवैध खनन (Illegal mining) को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर बेंच में सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने अफसरों पर तीखे प्रहार किए. करीब ढाई घंटे तक कलेक्टर रुचिका चौहान (Collector Ruchika Chauhan) कोर्ट में रहीं, वहीं प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की सैलरी और उनके बेटे के स्कूल की फीस को लेकर कोर्ट ने सीधा हिसाब मांगा गया।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में बिलौआ खदानों का ड्रोन वीडियो चलाया गया. जस्टिस ने वीडियो पॉज करवाकर कलेक्टर रुचिका चौहान से सीधे सवाल पूछे कि ”यह कौन सी जगह है? किसकी जमीन है? सर्वे नंबर क्या है? कितना क्षेत्र स्वीकृत है और कितनी खुदाई हो चुकी है?”


    जवाब न मिलने पर तल्खी

    जब तत्काल स्पष्ट जानकारी नहीं मिली तो कोर्ट ने 30 सितंबर तक का समय देते हुए कहा कि जितना समय चाहें ले लीजिए, लेकिन अगली सुनवाई पर एक-एक सवाल का स्पष्ट और सटीक जवाब देना होगा।


    10 साल का माल 1 साल में निकालने पर सवाल

    कोर्ट ने खनन की गति पर टिप्पणी करते हुए कहा, ”अगर 10 साल की लीज का माल 1 साल में ही निकाल लिया, तो बाकी 9 साल क्या करोगे?”


    51 हजार सैलरी, 9 लाख स्कूल फीस

    इसके बाद कोर्ट का रुख प्रभारी खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की तरफ मुड़ा. कोर्ट ने माइनिंग अधिकारी से पूछा कि उनके बेटे की सिंधिया स्कूल में फीस कितनी है? जवाब मिला- ‘करीब 9 लाख रुपये साल.’ जब कोर्ट ने पूछा कि आपकी महीने की तनख्वाह कितनी है? तो उन्होंने बताया- ‘करीब 51 हजार रुपये महीना.’

    कोर्ट ने 51 हजार मासिक वेतन और 9 लाख सालाना फीस के अंतर पर सवाल उठाए, जिस पर माइनिंग अफसर ने सफाई दी कि बेटे की पढ़ाई का खर्च उनकी पत्नी के मामा उठाते हैं. इसको लेकर अदालत ने टिप्पणी की।

    वहीं, माइनिंग अफसर की ओर से लोकायुक्त के आदेश को ‘क्लीन चिट’ बताकर पेश करने की कोशिश की गई, लेकिन जज ने खुद आदेश पढ़ा और साफ किया कि FIR दर्ज होने के कारण लोकायुक्त ने केस बंद किया था, जिसे ‘दोषमुक्ति’ या ‘क्लीन चिट’ नहीं कहा जा सकता।

    दरअसल, इससे पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने ग्वालियर के खनिज अधिकारी घनश्याम यादव को जिले में काम करने से रोक दिया था और उनके आचरण पर गंभीर टिप्पणी की थी. राज्य सरकार को निर्देश दिए कि ग्वालियर में तत्काल ईमानदार और सक्षम खनिज अधिकारी की पोस्टिंग की जाए, तब तक पूरे खनिज विभाग की जिम्मेदारी कलेक्टर संभालेंगे।

    इसके बाद सरकार ने भिंड में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा को ग्वालियर भेजा तो उनकी नियुक्ति और पहले की पोस्टिंग को लेकर सवाल किए गए थे।


    AAG विवेक खेड़कर की खिंचाई

    सुनवाई के दौरान जब अपर महाधिवक्ता (AAG) विवेक खेड़कर ने माइनिंग अफसर का पक्ष रखने का प्रयास किया, तो अदालत ने उन पर भी कड़ा एतराज जताया. कोर्ट ने सख्त लहजे में टिप्पणी की कि अगर आप शासन का पक्ष छोड़कर अधिकारी का व्यक्तिगत बचाव करना चाहते हैं, तो फिर शासन का पक्ष छोड़ दीजिए। इस दौरान AAG कोर्ट में कई बार माफी मांगते और ‘सॉरी’ बोलते नजर आए. हाईकोर्ट ने मामले में विस्तृत अध्ययन और पूरी जानकारी के साथ 30 सितंबर को अगली रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

  • मप्र: मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वतंत्रता दिवस पर भोपाल और विधानसभा अध्यक्ष तोमर ग्वालियर में करेंगे ध्वजारोहण

    मप्र: मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वतंत्रता दिवस पर भोपाल और विधानसभा अध्यक्ष तोमर ग्वालियर में करेंगे ध्वजारोहण


    – उप मुख्यमंत्री देवड़ा मंदसौर, उप मुख्यमंत्री शुक्ल रीवा और जिला मुख्यालयों पर मंत्रीगण करेंगे ध्वजारोहण

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को राजधानी भोपाल में आयोजित राज्य-स्तरीय समारोह में ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों के नाम संदेश देंगे। इस अवसर पर राजधानी भोपाल सहित जिला मुख्यालयों पर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां भी होंगी। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर में ध्वजारोहण करेंगे।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंगलवार को जारी आदेश के अनुसार, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल रीवा में ध्वजारोहण करेंगे। मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह खण्डवा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय देवास, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर, मंत्री राकेश सिंह जबलपुर, मंत्री करन सिंह वर्मा सीहोर, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह छिंदवाड़ा, मंत्री सम्पतिया उइके मंडला, मंत्री तुलसीराम सिलावट इंदौर, मंत्री एदल सिंह कंषाना मुरैना, मंत्री निर्मला भूरिया झाबुआ, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत सागर, मंत्री विश्वास कैलाश सारंग खरगौन, मंत्री नारायण सिंह कुशवाह दतिया, मंत्री नागर सिंह चौहान अलीराजपुर, मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर शिवपुरी, मंत्री राकेश शुक्ला श्योपुर और मंत्री इन्दर सिंह परमार शाजापुर में ध्वजारोहण करेंगे।

    राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर टीकमगढ़, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी दमोह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल अनूपपुर, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उज्जैन, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल विदिशा, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार राजगढ़, राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल रायसेन, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी सतना, राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार छतरपुर और राज्यमंत्री राधा सिंह सिंगरौली में ध्वजारोहण करेंगी।

    रतलाम, शहडोल, नर्मदापुरम, धार, बालाघाट, पांढुर्णा, सिवनी, निवाड़ी, सीधी, बड़वानी, मउगंज, गुना, उमरिया, आगर-मालवा, हरदा, नीमच, अशोकनगर, कटनी, भिण्ड, पन्ना, बैतूल, डिण्डौरी, मैहर और बुरहानपुर जिले में संबंधित जिले के कलेक्टर ध्वजारोहण करेंगे।

  • MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे

    MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे


    इंदौर।
    नगर निगम (Municipal council) द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए जा रहे फोर लेयर रंबल स्ट्रिप (Four-layer rumble strip) वाहन चालकों के लिए हादसों का सबब बन रहे हैं। स्पीड ब्रेकर (Speed ​​breaker) के स्थान पर लगाई जाने वाली यह प्लास्टिक व रबर की रंबल स्ट्रिप लगने के कुछ ही दिनों बाद टूट रही हैं। शहर में अधिकांश स्थानों पर जहां इन्हें स्थापित किया गया था, वहां से ये स्ट्रिप पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। इन स्ट्रिप को मजबूत पकड़ देने के लिए लोहे की कीलों से सड़क पर ठोका गया था। अब स्ट्रिप के टूटने और उखड़ने के बाद सड़क पर उभरी हुई नुकीली कीलें राहगीरों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। इन उभरी कीलों के कारण आए दिन वाहनों के टायर पंक्चर हो रहे हैं। अचानक सामने दिखने वाली कीलों से बचने की कोशिश में वाहन चालक अनियंत्रित होकर एक-दूसरे से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।


    प्रमुख मार्गों पर उखड़े स्पीड ब्रेकर और फैली कीलें

    एलआईजी चौराहा से लेकर कलश चौराहा तक 4 से ज्यादा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जिनकी ऊंचाई सामान्य मानकों से काफी अधिक है। इन रबर के स्पीड ब्रेकरों को लगाते समय लोहे की कीलें ठोकी गई थीं। समय के साथ रबर के पल्ले उखड़ गए और अब केवल खतरनाक कीलें ही सड़क पर शेष बची हैं। उल्लेखनीय है कि एक पल्ले को कसने के लिए 4 से 6 कीलें ठोकी गई थीं, जो अब बाहर निकल आई हैं। इसी प्रकार पोलो ग्राउंड स्थित सांदिपनी स्कूल के सामने लगाया गया डबल स्पीड ब्रेकर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और उसके बीच के बॉक्स पूरी तरह उखड़ गए हैं। एमआर 4 तथा मरीमाता लिंक रोड पर 2 स्थानों पर लगाए गए रंबल स्ट्रिप लगभग पूरी तरह उखड़ चुके हैं। बाणगंगा क्षेत्र में मनोचिकित्सालय से लेकर ओवरब्रिज के बीच 2 स्थानों पर लगे रंबल स्ट्रिप का बड़ा हिस्सा टूट गया है। इसके अलावा एमटीएच कंपाउंड स्थित यातायात थाना के पास और मालवा ब्रिज से लेकर परदेशीपुरा तक 2 स्थानों पर लगाए गए स्पीड ब्रेकर भी उखड़कर जर्जर हो चुके हैं।


    आईडीए चौराहे पर रंबल स्ट्रिप टूटी और वाहन चालक परेशान

    रेसकोर्स रोड पर स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) चौराहे पर नगर निगम द्वारा फोर लेयर रंबल स्ट्रिप लगाई गई थी, जो घटिया निर्माण के कारण कुछ ही दिनों में टूटने लगी। वर्तमान में यहां की अधिकांश स्ट्रिप टूट चुकी हैं और केवल नुकीली कीलें सड़क पर बाहर निकली हुई हैं। स्थानीय वाहन चालक मुकेश बरोले ने बताया कि रंबल स्ट्रिप की इन उभरी कीलों के कारण उनकी गाड़ी का टायर 3 बार पंक्चर हो चुका है। क्षेत्रीय रहवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर फोर लेयर रंबल स्ट्रिप की आवश्यकता ही नहीं थी। लैंटर्न चौराहे और जंजीरावाला चौराहे से आने-जाने वाले यातायात की गति को सामान्य स्पीड ब्रेकर के माध्यम से भी आसानी से नियंत्रित किया जा सकता था। रंबल स्ट्रिप पर वाहन अत्यंत धीमी गति से गुजरते हैं, फिर भी इनका इतनी जल्दी टूट जाना घटिया निर्माण गुणवत्ता की ओर सीधा इशारा करता है।


    नियमों की अनदेखी और सड़क सुरक्षा समिति के निर्णयों पर अमल नहीं

    आर्किटेक्ट अतुल शेठ के अनुसार शहर में स्पीड ब्रेकर का निर्माण करते समय किसी भी निर्धारित तकनीकी नियम व मानक का पालन नहीं किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप न केवल आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, बल्कि वाहनों के झटकों से लोगों को कमर दर्द व अन्य शारीरिक परेशानियां भी झेलनी पड़ रही हैं। अगस्त 2025 में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की आधिकारिक बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि शहर की कॉलोनियों और मुख्य सड़कों से सभी अवैध स्पीड ब्रेकर तत्काल हटाए जाएंगे, परंतु इस निर्णय पर आज तक अमल नहीं हो सका। समिति ने यह प्रावधान भी किया था कि सड़क सुरक्षा समिति की पूर्व मंजूरी के बिना कहीं भी नया स्पीड ब्रेकर नहीं बनाया जा सकेगा और यदि कोई निर्माण होता है तो उसकी संपूर्ण राशि संबंधित निर्माण एजेंसी से वसूल की जाएगी। इस आदेश को पारित हुए 1 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

  • मप्रः दतिया उपचुनाव में हार के बाद भाजपा की बड़ी कार्रवाई, जिला-मंडल से बूथ तक की कार्यकारिणी भंग

    मप्रः दतिया उपचुनाव में हार के बाद भाजपा की बड़ी कार्रवाई, जिला-मंडल से बूथ तक की कार्यकारिणी भंग


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उप चुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी नेतृत्व ने जिला कार्यकारिणी समेत दतिया के सभी मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों की इकाइयों को भंग कर दिया है।

    पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंगलवार की रात दतिया उपचुनाव में हार की समीक्षा के लिए बनाई गई विशेष समिति की अनुशंसा यह कार्रवाई की है। दरअसल, मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित वरिष्ठ नेताओं की उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। बैठक के बाद दतिया उप चुनाव के परिणाम की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।

    समिति गठन के छह घंटे बाद ही भाजपा संगठन ने दतिया जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित जिला पदाधिकारियों, जिला कार्य समिति, मंडल मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प एवं विभागों की समस्त वर्तमान संगठनात्मक इकाइयां तत्काल प्रभार से पदमुक्त कर दीं। समिति की जांच रिपोर्ट से पार्टी संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व को भी अवगत कराया और इसके बाद मंगलवार देर रात कार्रवाई की गई।

    गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था। जिसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने तीखे विरोध प्रदर्शन किए। कई कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किए गए थे। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा को खुद सामने आकर समर्थकों से तिवारी का समर्थन करने की अपील करनी पड़ी थी। दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद जिला अध्यक्ष रघुवीर शरण कुशवाह समेत कई पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए थे। इस पर संगठन ने कहा था कि कोई भी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन अब उपचुनाव हारने के बाद जिले की पूरी टीम को हटा दिया गया है।

    भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने बैठक में दिए भितरघात के प्रमाण

    मुख्यमंत्री आवास पर हार के कारणों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, उपचुनाव प्रभारी और सांसद भारत सिंह कुशवाह, कई मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी शिकायतों की आडियो रिकार्डिंग लेकर पहुंचे थे। उन्होंने भावुक होते हुए अपनी बात रखी और चुनाव के दौरान भितरघात संबंधी वाट्सएप चैट के स्क्रीनशाट भी दिखाए। बैठक में हार के कारणों, संगठन की भूमिका, भितरघात की शिकायतों पर चर्चा के बाद परिणाम की समीक्षा करने के लिए दो सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया था। इसमें प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे एवं वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को सदस्य बनाया गया।

    पार्टी ने हार का ठीकरा सबसे पहले नरोत्तम समर्थकों की टीम मानी जाने वाली भाजपा कार्यकारिणी पर ही फोड़ा। इस कार्यकारिणी में जिलाध्यक्ष रघुवीरसिंह कुशवाह, नरोत्तम मिश्रा के ही समर्थक माने जाते हैं। इसके अलावा कार्यकारिणी में महामंत्री से लेकर उपाध्यक्ष व सभी मंडल अध्यक्ष, मोर्चा प्रभारी भी नरोत्तम टीम के ही बताए जाते हैं। यही कारण रहा कि जब पार्टी आलाकमान ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. मिश्रा का टिकट बदला तो यह पूरी कार्यकारिणी सामूहिक तौर पर इस्तीफा देने को खड़ी हो गई।

    इतना ही नहीं भाजपा के जिला कार्यालय को ही समर्थकों ने अपने उपद्रव का अखाड़ा बनाया था। यहां पर मात्र डॉ. मिश्रा की एक मात्र कार्यकर्ता बैठक के अलावा कोई भी चुनावी गतिविधि नहीं हुई। पूरे चुनाव में वहां सन्नाटा पसरा रहा।

    हालांकि उपचुनाव सिर पर देख प्रदेश आलाकमान ने इतने बड़े विरोध को शांत करने के लिए उस समय इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाने की रणनीति अपनाई थी, ताकि पार्टी का डैमेज कंट्रोल किसी तरह रोका जा सके। यही कारण रहा कि प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित मुख्यमंत्री मोहन यादव व प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने दतिया में ही लगातार आकर चुनावी कमान पर निगरानी बनाए रखी। जिसके चलते ही भाजपा की हार का आंकड़ा चार अंकों में रह पाया।

    इधर पार्टी सूत्रों की मानें तो इस उपचुनाव में भीतरघाती इस स्तर पर सक्रिय थे कि वह हार का आंकड़ा 20 हजार तक पहुंचाने के लिए ताकत लगा रहे थे। कांग्रेस की दतिया में जीत का यही सबसे बड़ा कारण भी रहा। वहीं चुनाव परिणाम आने के बाद जहां कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल है, वहीं भाजपा के कई स्थानीय खेमों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

    पार्टी ने हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित कर संगठनात्मक मंथन का दौर जारी है। इस बीच जिला कार्यकारिणी भंग होने और भीतरघात के आरोपों ने दतिया के राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को समीक्षा समिति में शामिल किया है। समिति चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से दतिया में चर्चा कर यह पता लगाएगी कि किन कारणों से पार्टी उपचुनाव में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी।

  • मप्रः सावन में उज्जैन, ओंकारेश्वर एवं महेश्वर स्थित होटलों में विशेष फलाहारी थाली की व्यवस्था

    मप्रः सावन में उज्जैन, ओंकारेश्वर एवं महेश्वर स्थित होटलों में विशेष फलाहारी थाली की व्यवस्था


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपी टूरिज्म) द्वारा पवित्र श्रावण (सावन) माह के अवसर पर श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए उज्जैन, ओंकारेश्वर एवं महेश्वर स्थित अपने होटल एवं पर्यटन इकाइयों में विशेष फलाहारी भोजन की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु निर्धारित समय पर पौष्टिक एवं स्वादिष्ट फलाहारी व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे।

    मप्र टूरिज्म के मैनेजर श्याम तिवारी ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि उज्जैन शहर के तीन इकाई जिसमें सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज होटल, शिप्रा रेजिडेंसी, होटल उज्जैनी शामिल है। इसी प्रकार खरगोन में नर्मदा रिसोर्ट महेश्वर और खंडवा जिले के टेम्पल व्यू ओंकारेश्वर सहित कुल पांच स्थानों पर कावड़ यात्रियों (श्रद्धालु) के लिए फलाहारी की व्यवस्था उपलब्ध करायी जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि एमपी टूरिज्म की इन इकाइयों में फलाहारी नाश्ता प्रातः 8 बजे से 10 बजे तक, फलाहारी दोपहर का भोजन (लंच) दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक तथा फलाहारी रात्रि भोजन (डिनर) शाम 7 बजे से रात्रि 10:30 बजे तक उपलब्ध रहेगा। फलाहारी लंच थाली में भगर उपमा, साबूदाना वड़ा, आलू जीरा, सिंघाड़े की पुड़ी, तली हुई मूंगफली, फलाहारी चिप्स, हरी एवं लाल चटनी, दो प्रकार के मौसमी फल तथा लौकी का हलवा परोसा जाएगा। वहीं फलाहारी डिनर थाली में पतली ग्रेवी वाली आलू की सब्जी, कुट्टू की पुड़ी, साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा, तली हुई मूंगफली, फलाहारी नमकीन, हरी एवं लाल चटनी, सांवा की खीर तथा दो प्रकार के मौसमी फल शामिल रहेंगे।

    एमपी टूरिज्म ने कावड़ यात्रियों (श्रद्धालु) से अपील की है कि वे सावन माह में धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर स्थित एमपी टूरिज्म की इकाइयों में उपलब्ध विशेष फलाहारी का लाभ प्राप्त करें।

  • मप्रः दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती 6 साल के लिए निष्कासित

    मप्रः दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती 6 साल के लिए निष्कासित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले कांग्रेस आलाकमान ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। इस संबंध में रविवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।

    उपचुनाव के नतीजों के ठीक मुहाने पर पूर्व विधायक पर की गई इस अनुशासनात्मक कार्रवाई से पार्टी के आंतरिक घटनाक्रम और स्थानीय समीकरणों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दतिया उपचुनाव के लिए मतों की गिनती 3 अगस्त को होगी। मतगणना से ठीक 24 घंटे पहले पार्टी द्वारा अपने ही वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक को बाहर का रास्ता दिखाने के इस फैसले को राजनीतिक दृष्टि से काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह लगातार राजेंद्र भारती पर चुनाव में भीतरघात और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगा रहे थे। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप खुले तौर पर सामने आए थे।

    राजेंद्र भारती दतिया की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। वे तीन बार विधायक रह चुके हैं और वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर पूरे प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गए थे। उनके पिता स्वर्गीय श्याम सुंदर श्याम भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक रहे थे, जिससे दतिया में भारती परिवार का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है।

    हालांकि, इसी वर्ष एक पुराने सहकारी बैंक धोखाधड़ी मामले में विशेष अदालत से तीन वर्ष की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। इसी कारण दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया। बाद में दोषसिद्धि पर रोक पाने की उनकी कोशिशों के बीच मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन वे चुनाव नहीं लड़ सके।

    उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। मतदान के बाद घनश्याम सिंह ने राजेंद्र भारती पर भाजपा के साथ मिलकर भीतरघात करने और कांग्रेस प्रत्याशी को हराने की कोशिश करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के बाद पार्टी में अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो गई थी। अब मतगणना से पहले कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को छह साल के लिए निष्कासित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।