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  • MP: निकायों में सामग्री खरीद मामले में 392 अधिकारी-कर्मचारियों पर सरकार का सख्त एक्शन…., 7 निलंबित

    MP: निकायों में सामग्री खरीद मामले में 392 अधिकारी-कर्मचारियों पर सरकार का सख्त एक्शन…., 7 निलंबित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नगरीय निकायों (Urban Local Bodies) में सरकारी खरीद (Public Procurement) के दौरान वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) के मामलों में कार्रवाई की गई है. नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे के मुताबिक, अलग-अलग स्तर के 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है. इनमें करीब 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) भी शामिल हैं. अब तक सात अधिकारियों-कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि करीब 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।

    विभाग ने गलत दरों पर सामग्री उपलब्ध कराने के मामलों में 80 से ज्यादा ठेकेदारों और सप्लायर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की है. संजय दुबे ने कहा कि अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों में कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    392 अधिकारियों-कर्मचारियों पर अलग-अलग कार्रवाई
    ACS संजय दुबे के अनुसार, कार्रवाई में अलग-अलग स्तर के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं. मामलों की गंभीरता के आधार पर संबंधित लोगों की वेतन वृद्धि रोकने, पदावनति, बर्खास्तगी और सरकारी नुकसान की वसूली जैसे कदम उठाए गए हैं.

    उन्होंने कहा कि जिस मामले में जितनी बड़ी अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाती है. विभाग का कहना है कि सरकारी धन के उपयोग में नियमों का पालन करना और जवाबदेही तय करना प्राथमिकता है.


    80 से ज्यादा ठेकेदारों और सप्लायर्स पर भी एक्शन

    कार्रवाई केवल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं है. विभाग के मुताबिक, गलत दरों पर सामान उपलब्ध कराने से जुड़े मामलों में 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स के खिलाफ भी कदम उठाए गए हैं.

    नगरीय निकायों की खरीद प्रक्रिया में सामने आए मूल्य अंतर और वित्तीय अनियमितताओं की पहचान के लिए विभाग डिजिटल रिकॉर्ड और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के आंकड़ों का इस्तेमाल कर रहा है. विभागीय निगरानी में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी सहारा लिया जा रहा है.


    सरकारी खरीद में पारदर्शिता पर जोर

    ACS संजय दुबे के मुताबिक, उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नगरीय निकायों के पास उपलब्ध सरकारी धन और उनकी आय का इस्तेमाल नागरिकों के हित में हो. खरीद और भुगतान की प्रक्रिया में अनियमितता मिलने पर जांच और कार्रवाई की जाती है. तकनीक और AI से निगरानी जारी है. सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि जनता के पैसे का पारदर्शी उपयोग और नागरिकों तक उसका पूरा लाभ पहुंचे.

  • MP: विस्थापित आदिवासी परिवारों को 15 लाख की मदद देंगे शिवराज….5 एकड़ जमीन देने का भी किया ऐलान

    MP: विस्थापित आदिवासी परिवारों को 15 लाख की मदद देंगे शिवराज….5 एकड़ जमीन देने का भी किया ऐलान


    रायसेन।
    बीते दिनों मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीलगढ़ में कई आदिवासी परिवारों (Tribal Families) को विस्थापित कर दिया गया था, जिसपर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने नाराजगी जताई थी। इस मामले को लेकर अब शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान किया है। चौहान विस्थापित हुए सभी परिवारों के लिए 15 लाख रुपए राहत कोष से देने का ऐलान किया है। शिवराज सिंह ने 15 लाख रुपए के साथ आदिवासी परिवारों को 5 एकड़ खेती की जमीन भी देने का ऐलान किया है।


    क्या बोले शिवराज सिंह चौहान

    नीलगढ़ के विस्थापित आदिवासी परिवारों के लिए ऐलान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये आदिवासी परिवार नीलगढ़ में सालों से रहते आ रहे हैं और जंगल बचाने के लिए अपनी जमीन, अपनी घर और अपना गांव छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं, इसके लिए मैं उनके लिए सम्मान प्रकट करना चाहता हूं। उन्होंने कहा आदिवासी परिवारों का ये त्याग जंगल को बचाने के लिए है।

    इस मामले पर बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब वो मुख्यमंत्री थे, तभी उनके लिए राहत पैकेज का ऐलान किया गया था। चौहान ने कहा कि अब इन परिवारों को नया नीलगढ़ में विस्थापित किया जा रहा है, जहां उन्हें 15 लाख रुपए और खेती करने के लिए हाईवे से लगी हुई 5 एकड़ जमीन दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ये सभी ऐलान विस्थापित परिवारों की राहत के लिए किए जा रहे हैं।


    विस्थापित परिवारों ने दिया न्योता

    विस्थापित परिवारों के लिए ऐलान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इन आदिवासी परिवार के लोगों ने उन्हें नया नीलगढ़ में विस्थापित होने से पहले उन्हें और स्थानीय विधायक को अपने प्रोग्राम में आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि आदिवासी परिवार ये प्रोग्राम सालों से करते आ रहे हैं।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन परिवारों के बीच प्रोग्राम में जाना बहुत ही भावुक पल होगा। उन्होंने कहा कि जंगल बचाने के लिए गांव के लोग अपना घर, अपना गांव सब छोड़कर दूसरी जगह जा रहे होंगे। ऐसे में उनके साथ रहना एक भावुक पल होगा। चौहान ने कहा कि वो इन परिवारों के साथ बैठेंगे और उनकी विस्थापन के लिए हरसंभव मदद के लिए तैयार हैं।

  • MP: हाथियों से टूटे घरों को पक्का बनाकर देगी सरकार… CM मोहन यादव ने किया ऐलान

    MP: हाथियों से टूटे घरों को पक्का बनाकर देगी सरकार… CM मोहन यादव ने किया ऐलान


    शहडोल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने 2024 के संग्रह वर्ष के लिए तेंदू पत्ता (Tendu leaves) इकट्ठा करने वाले 9.77 लाख लोगों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 22.89 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जिन परिवारों के घर हाथियों के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें ‘पक्के’ घर दिए जाएंगे. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऐसी खबरें हैं कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) से 37 और जंगली हाथी शहडोल में आ गए हैं, जिससे हाथियों की कुल संख्या 62 हो गई है।

    शहडोल में तेंदू पत्ता बोनस वितरण और विकास कार्यों से जुड़े एक कार्यक्रम में यादव ने कहा, “हमारी सरकार फाइलों से नहीं, बल्कि फैसलों से चलती है. यह जन कल्याण, विकास और समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम कर रही है. विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और हर परिवार को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।

    अपने दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री ने शहडोल जिले में 461.73 करोड़ रुपये की लागत वाले 134 विकास कार्यों की आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया. उन्होंने 22.14 करोड़ रुपये की लागत से बनी वन विभाग की एक कार्यालय इमारत का भी उद्घाटन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बोनस का वितरण इस बात को दर्शाता है कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि तेंदू पत्ता इकट्ठा करने वालों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिले।


    शहडोल में तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण

    उन्होंने उन लोगों के लिए ‘पक्के’ घरों की घोषणा की, जिनके घर जंगली हाथियों के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे। यादव ने कहा कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पास ‘रेस्क्यू ज़ू सेंटर’ (बचाव चिड़ियाघर केंद्र) स्थापित किए जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि सरकार ‘होमस्टे’ (पर्यटकों के ठहरने की जगह) बनाने के लिए 2 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी देगी।

    यादव ने कहा, “सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और वन उत्पादों पर निर्भर परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए काम कर रही है.” शहडोल संभाग में फुटबॉल के प्रति लोगों की रुचि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में युवा खेल प्रतिभाओं को निखारने की काफी संभावनाएं हैं. उन्होंने बताया कि 5.10 करोड़ रुपये की लागत से खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. यादव ने शहडोल में एक इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इससे बच्चों और युवाओं को अलग-अलग खेलों का अभ्यास करने और प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने के बेहतर अवसर मिलेंगे.

    शहडोल में प्रस्तावित स्टील प्लांट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके शुरू होने पर लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिल सकेगा। विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों से कांग्रेस नेता असहज हैं. अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों का भी जिक्र किया।

    इस बीच, शहडोल दौरे के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की. कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी के नेतृत्व में आए इन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कार्यक्रम स्थल से कुछ दूरी पर ही रोक दिया। हाथापाई के बाद, पुलिस ने कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. अवस्थी ने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी।

  • खरगोन के नर्मदा किनारे मिले हजारों वोटर ID कार्ड, ज्यादातर राऊ विधानसभा के, कांग्रेस ने की FIR की मांग

    खरगोन के नर्मदा किनारे मिले हजारों वोटर ID कार्ड, ज्यादातर राऊ विधानसभा के, कांग्रेस ने की FIR की मांग


    खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र मिलने से हड़कंप मच गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इनमें ज्यादातर कार्ड इंदौर जिले की राऊ विधानसभा क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंडलेश्वर थाने के सामने प्रदर्शन कर एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रशासन ने कार्ड जब्त कर लिए हैं और पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। हालांकि, ये कार्ड नदी किनारे कैसे और कब पहुंचे, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है।

    सफाई अभियान के दौरान मिले वोटर ID कार्ड

    मामला रविवार सुबह का है। मंडलेश्वर के नर्मदा घाट पर निस्वार्थ सेवा समिति की ओर से सफाई अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान नदी किनारे लावारिस हालत में बड़ी संख्या में वोटर ID कार्ड दिखाई दिए। इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी गई।

    जानकारी मिलते ही राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार्ड एकत्रित किए। अधिकारियों ने मौके पर पंचनामा भी तैयार किया। शुरुआती जानकारी में इन मतदाता पहचान पत्रों का संबंध इंदौर की राऊ विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है। हालांकि, कार्डों की कुल संख्या और उनके वहां पहुंचने की परिस्थितियों को लेकर जांच जारी है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इतने सारे मतदाता पहचान पत्र नर्मदा किनारे किसने और किस वजह से छोड़े। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि कार्ड वहां कब पहुंचे और इस मामले में किसी की लापरवाही की भूमिका रही है या नहीं।

    कांग्रेस ने थाने के सामने किया प्रदर्शन

    वोटर ID कार्ड मिलने की जानकारी सामने आने के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नायक के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता मंडलेश्वर थाने पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदर्शन किया और पुलिस को आवेदन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

    रवि नायक ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र नदी किनारे कैसे पहुंचे। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    कांग्रेस ने नर्मदा नदी के आसपास तलाशी अभियान चलाने की मांग भी की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां और मतदाता पहचान पत्र तो नहीं पड़े हैं। पार्टी का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

    हालांकि, कार्डों के नदी किनारे मिलने के पीछे क्या कारण है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।

    प्रशासन ने कार्ड जब्त किए, अधिकारियों को सौंपी जांच

    महेश्वर की एसडीएम पूर्वा मंडलोई ने बताया कि मामले की जांच के लिए तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजा गया था। वहां पंचनामा तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल कार्डों की संख्या के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    मंडलेश्वर की एसडीओपी श्वेता शुक्ला के मुताबिक, नर्मदा घाट पर सफाई के दौरान मतदाता पहचान पत्र मिलने की सूचना मिली थी। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम ने कार्ड जब्त किए। पुलिस को कांग्रेस की ओर से भी आवेदन मिला है और मामले की जांच थाना प्रभारी को सौंपी गई है। जांच के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मतदाता पहचान पत्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल

    नर्मदा किनारे बड़ी संख्या में वोटर ID कार्ड मिलने के मामले ने मतदाता पहचान पत्रों के रखरखाव और उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर शुरुआती जानकारी में कार्डों का संबंध इंदौर की राऊ विधानसभा क्षेत्र से बताए जाने के बाद मामले पर ध्यान केंद्रित हुआ है।

    फिलहाल प्रशासन और पुलिस यह पता लगाने में जुटे हैं कि ये कार्ड किसके हैं, नदी किनारे कैसे पहुंचे और इन्हें वहां छोड़ने के पीछे क्या वजह थी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • MP: धार-झाबुआ जिले को बड़ी सौगात…. 260 गांवों के 72 हजार किसानों के खेतों में नर्मदा के पानी से होगी सिंचाई

    MP: धार-झाबुआ जिले को बड़ी सौगात…. 260 गांवों के 72 हजार किसानों के खेतों में नर्मदा के पानी से होगी सिंचाई


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने धार और झाबुआ (Dhar and Jhabua) जिले के किसानों को बड़ी सौगात दी. उन्होंने 2387.60 करोड़ रुपये की लागत वाली नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना (Narmada-Jhabua-Petlawad-Thandla-Sardarpur Micro Lift Irrigation Project) का उद्घाटन किया. इस परियोजना से दोनों जिलों के 260 गांवों में 57 हजार 422 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी. इससे करीब 72 हजार किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान परियोजना के रूट मैप की समीक्षा की और शिलान्यास किया. इसके साथ ही 188 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लाभार्थियों के खातों में 317.86 करोड़ रुपये भी ट्रांसफर किए गए।


    72 हजार किसानों को मिलेगा फायदा

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरदार सरोवर बांध के बाद धार-झाबुआ क्षेत्र को विभिन्न परियोजनाओं के जरिए नर्मदा का पानी मिल रहा है. इसी कड़ी में माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी. उन्होंने कहा कि सूखे खेतों को पानी मिलने से फसलों की पैदावार और किसानों की समृद्धि बढ़ेगी. राज्य सरकार का लक्ष्य कृषि और उद्योग सहित हर क्षेत्र में विकास करना है.


    मध्य प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2002-03 तक मध्य प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी. उनके मुताबिक, भाजपा सरकार बनने के बाद वर्ष 2023 तक यह क्षेत्र बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर हो गया. उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 60 लाख हेक्टेयर किया गया है. अब सरकार इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है।


    पीएम मित्र पार्क से 6 लाख कपास किसानों को फायदा

    मुख्यमंत्री ने धार में प्रस्तावित पीएम मित्र पार्क का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस परियोजना से निमाड़-मालवा क्षेत्र के करीब 6 लाख कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा. पीएम मित्र पार्क में एक ही जगह कपास से धागा, धागे से कपड़ा और कपड़े से रेडीमेड गारमेंट्स बनाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी. मुख्यमंत्री के मुताबिक, इससे 3 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि इससे धार और झाबुआ के युवाओं, किसानों और महिलाओं को रोजगार के लिए पलायन करने की मजबूरी कम करने में मदद मिलेगी।


    धार को मिली सड़क, पुल और स्वास्थ्य सुविधाओं की सौगात

    मुख्यमंत्री ने बताया कि धार जिले में करीब 2,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई है. इनमें माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना, 25 करोड़ रुपये की लागत वाले चार पुल, 15 करोड़ रुपये की स्कूल इमारत और 50 बिस्तरों वाला अस्पताल शामिल हैं. इसके अलावा 188 करोड़ रुपये की लागत वाली 35 नई परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि धार को जल्द ही मेडिकल कॉलेज की सुविधा भी मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि जिले में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है।


    अमका-झमका माता स्थल को तीर्थ के रूप में विकसित करने की तैयारी

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने धार जिले के अमका-झमका माता स्थल का भी उल्लेख किया. मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने इसी स्थान पर रुक्मिणी से विवाह किया था. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्थल को श्री कृष्ण पाथेय योजना में शामिल कर तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।


    किसानों को मिलेंगी साल में तीन फसलें: कैलाश विजयवर्गीय

    शहरी विकास एवं आवास मंत्री और धार जिले के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य में 100 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य तय किया है. उन्होंने दावा किया कि माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना से क्षेत्र के किसान नर्मदा और माही नदियों के पानी का इस्तेमाल कर साल में एक के बजाय तीन फसलें ले सकेंगे।

    केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण और युवाओं के कौशल विकास सहित तमाम क्षेत्रों में काम कर रही है।

    महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि परियोजना के माध्यम से झाबुआ, पेटलावद, थांदला और सरदारपुर में नर्मदा का पानी उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि कुछ इलाके अभी परियोजना से छूट गए हैं, जिन्हें जल्द ही इसमें शामिल किया जाएगा।

  • MP को बड़ी सौगात… रेल मंत्री आज देवेंद्रनगर–चुरहट ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी… आजादी के बाद पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेगा सीधी जिला

    MP को बड़ी सौगात… रेल मंत्री आज देवेंद्रनगर–चुरहट ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी… आजादी के बाद पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेगा सीधी जिला


    सतना/रीवा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विंध्य क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnaw) शनिवार को सतना-देवेंद्रनगर और रीवा-चुरहट नए रेलखंडों का वर्चुअली उद्घाटन करेंगे. इस अहम अवसर पर देवेंद्रनगर-चुरहट ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा. इस परियोजना के शुरू होने से विंध्य क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलने की उम्मीद है।

    इस पूरे रेल विस्तार में सबसे बड़ी उपलब्धि सीधी जिले का रेल नेटवर्क से जुड़ना है. आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब सीधी जिला सीधे तौर पर देश के रेल मानचित्र और मुख्य रेल संपर्क से जुड़ रहा है।

    इस ऐतिहासिक बदलाव से जिले के नागरिकों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा कर्मचारियों, व्यापारियों और मरीजों को आवागमन में बहुत बड़ी राहत मिलेगी. अब क्षेत्रीय नागरिकों को बड़े शहरों और प्रमुख बाजारों तक पहुंचने के लिए सुगम और सुरक्षित परिवहन विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे सड़क मार्ग पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।

    सतना-देवेंद्रनगर रेलखंड: इस नवनिर्मित रेलखंड की कुल लंबाई 53 किलोमीटर है. रीवा-चुरहट रेलखंड: इस रेलखंड की कुल लंबाई 65 किलोमीटर है। इन दोनों रेलखंडों के शुरू होने से सतना, देवेंद्रनगर, रीवा, चुरहट और आसपास के तमाम क्षेत्रों के बीच सीधा और तीव्र संपर्क स्थापित हो जाएगा, जिससे यात्रियों के समय और यात्रा लागत दोनों में भारी कमी आएगी।


    उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेल नेटवर्क का यह चौमुखी विस्तार विंध्य क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक कायाकल्प में मील का पत्थर साबित होगा बेहतर रेल परिवहन से उद्योगों की स्थापना, व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार, कृषि उत्पादों की आवाजाही और स्थानीय बाजारों को नया प्रोत्साहन मिलेगा. क्षेत्र के खनिज व कृषि उत्पादों को देश के अन्य हिस्सों तक भेजना आसान होगा।


    पर्यटन और आतिथ्य सत्कार

    इस क्षेत्र के ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच सुगम होगी. इससे होटल, परिवहन, खान-पान और हस्तशिल्प क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा. निर्माण, रखरखाव, व्यापार और सेवा क्षेत्र में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा।

  • MP में निकायों में सामान खरीदी में बड़ी गड़बडी… कहीं 2 लाख का कचरा वाहन तो 6 लाख में!

    MP में निकायों में सामान खरीदी में बड़ी गड़बडी… कहीं 2 लाख का कचरा वाहन तो 6 लाख में!


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के नगरीय निकायों (Urban Local Bodies) में सरकारी सामान की खरीदी में कीमतों के भारी अंतर का मामला सामने आया है। कहीं कचरा वाहन (Garbage Vehicle) दो लाख रुपये में खरीदा गया, तो कहीं उसी वाहन के साथ चार डस्टबिन (Four Dustbins) के लिए छह लाख रुपये खर्च किए गए। एलईडी लाइट और केमिकल की खरीदी में भी कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है। इन मामलों को लेकर नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे (Additional Chief Secretary Sanjay Dubey) ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग निकायों की खरीदी और उन पर खर्च की गई राशि की जानकारी जुटा रहा है।

    इस साल अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। कुछ दिन पहले भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा नगरीय विकास प्रशिक्षण संस्थान में नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। इस बैठक का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें संजय दुबे खरीदी में कीमतों के अंतर और कथित अनियमितताओं को लेकर अधिकारियों को चेतावनी देते सुनाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह न समझें कि उनकी गतिविधियों पर किसी की नजर नहीं है। विभाग को पता है कि किस निकाय ने क्या खरीदा और किस दर पर खरीदा।


    दो लाख का वाहन, दूसरे निकाय में छह लाख खर्च

    संजय दुबे ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक नगरीय निकाय ने कचरा वाहन दो लाख रुपये में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने उसी वाहन के साथ चार डस्टबिन के लिए छह लाख रुपये खर्च किए। उन्होंने कुछ निकायों में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाले वाहन खरीदे जाने का भी जिक्र किया। सवाल उठाया कि जिन निकायों में पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं, वहां इतने महंगे वाहनों की जरूरत क्यों पड़ी।


    एलईडी लाइट की कीमत में भी भारी अंतर

    मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के अतिरिक्त प्रबंध संचालक अंशुमान राज ने भी खरीदी की दरों में अंतर के उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि एसडीएम के पद पर रहते हुए उन्हें 200 एलईडी बल्ब की खरीदी पर 60 लाख रुपये खर्च किए जाने की शिकायत मिली थी। उन्होंने 60 वॉट की एलईडी लाइट का उदाहरण देते हुए बताया कि एक स्थान पर इसकी कीमत 306 रुपये थी, जबकि भोपाल में इसकी कीमत 11,800 रुपये दर्ज की गई। इसी तरह फिनोलिक डिसइन्फेक्टेंट (कीटाणुनाशक) की कीमत में भी असामान्य अंतर बताया गया। एक स्थान पर इसकी कीमत पांच रुपये प्रति लीटर, जबकि दूसरी जगह 33,500 रुपये लीटर में खरीदी की गई हैं।


    250 करोड़ रुपये बचाने की संभावना

    अंशुमान राज के अनुसार, सरदारपुर नगरीय निकाय ने 2,500 लीटर डिसइन्फेक्टेंट 1.35 लाख रुपये में खरीदा था। उन्होंने कहा कि यदि नगरीय निकाय औसत दरों पर खरीदी करें, तो विभाग करीब 250 करोड़ रुपये की बचत कर सकता है।


    2500 यूजर आईडी-पासपर्ड लीक होने की जानकारी

    प्रजेटेंशन में साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक गंभी चिता भी सामने आई। नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि गुगल पर पासवर्ड सर्कुलेट हो रहे थे। मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) में अतिरिक्त प्रबंध निदेशक ने बताया कि 2500 यूजर आईडी पासवर्ड लीक हुए। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि कुछ कंम्प्यूटरों में इन्फो-स्टीलर मैलवेयर मौजूद होने की आशंका हैं। अधिकारियों को सुरक्षा जांच कराने, एंटीवायरस का उपयोग करने की सलाह दी गई। साथ ही सरकारी और कार्यालयीन कंप्यूटरों पर अनधिकृत टोरेंट डाउनलोड, संदिग्ध ई-मेल और फिशिंग वेबसाइटों से बचने को कहा गया हैं।


    इस साल शिकायतों पर कार्रवाई की चेतावनी

    संजय दुबे ने कहा कि पिछले साल उन्होंने ऐसे मामलों पर अधिक ध्यान नहीं दिया था, लेकिन इस साल अनियमितताओं की शिकायतें मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग अलग-अलग निकायों की खरीदी और उनकी दरों की जानकारी एकत्र कर रहा है। हालांकि, सामने आए उदाहरणों में बताई गई कीमतों के अंतर के कारणों और संबंधित खरीदी में किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में संजय दुबे से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

  • MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे

    MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे


    खंडवा।
    ओंकारेश्वर (Omkareshwar) में सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) की तैयारियों के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट्स से प्रभावित हो रहे स्थानीय लोग अब लामबंद हो गए हैं. जिला प्रशासन से अपनी मांगों पर सहमति नहीं बनने के विरोध में नगरवासियों ने दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का फैसला किया है।

    19 अक्टूबर से बंद के पहले दिन ओंकारेश्वर में लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहीं. यहां तक कि फुटपाथ पर फूल-माला, प्रसाद आदि बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने भी अपना कारोबार बंद (Business Closed) रखा. इधर, प्रशासन ने कहा है कि स्थानीय लोगों से बातचीत चल रही है और उनकी लगभग सभी मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं. इस विस्तारीकरण योजना के तहत सड़कों और रास्तों के किनारे दुकानें, मकान एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने वालों को विस्थापित किया जा रहा है. इसके लिए पूरी कार्ययोजना बनाई गई है.


    प्रशासन के सामने 19 मांगे रखी

    स्थानीय लोगों की समिति ने पिछले महीने जिला प्रशासन के सामने अपनी 19 मांगें रखी थीं. उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, इसलिए दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का निर्णय लिया गया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जिनकी दुकानें, मकान एवं रोजगार से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, उन्हें इसके बदले बेहतर पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए।

    ओंकारेश्वर बंद को स्थानीय लोगों के साथ साधु-संतों का भी समर्थन मिला. उनका कहना है कि पिछले साल भी जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अब वे पक्का और भरोसेमंद आश्वासन चाहते हैं.


    छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद

    ओंकारेश्वर बंद के दौरान छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद रहीं. यहां तक कि होटल और स्थानीय परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं. इस कारण बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी हुई. श्रद्धालुओं का भी कहना है कि स्थानीय लोगों के रोजगार और आजीविका का ध्यान रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

    इधर, जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय लोगों से लगातार बातचीत जारी है. उनकी ओर से रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया है और 19 में से 17 मांगें मानी जा चुकी हैं. पुनर्वास के लिए स्थान तय करने को लेकर थोड़ी दिक्कत आ रही है, जिसे भी जल्द सुलझा लिया जाएगा. जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्थानीय लोगों का बेहतर पुनर्वास किया जाए, ताकि उनकी आजीविका पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

  • ट्रेन में आंख लगी तो 10 लाख से भरा बैग गायब, विदिशा में CCTV फुटेज खंगालकर चोर तक पहुंची GRP

    ट्रेन में आंख लगी तो 10 लाख से भरा बैग गायब, विदिशा में CCTV फुटेज खंगालकर चोर तक पहुंची GRP


    भोपाल। ट्रेन में सफर के दौरान थोड़ी सी लापरवाही एक यात्री को भारी पड़ गई। बीना से 10 लाख रुपये लेकर भोपाल जा रहे युवक ने नकदी से भरा बैग सीट के ऊपर लगी रेलिंग पर रख दिया और उसे नींद आ गई। जब विदिशा रेलवे स्टेशन पर आंख खुली तो बैग गायब था। शिकायत मिलने के बाद रेलवे पुलिस (GRP) ने जांच शुरू की और करीब 200 CCTV कैमरों के फुटेज खंगालते हुए चोरी के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    मालिक के कहने पर लेने गया था 10 लाख रुपये

    पुलिस के मुताबिक, चोरी की यह घटना 6 अक्टूबर की है। फरियादी अपने मालिक के निर्देश पर बीना स्थित एक प्लायवुड दुकान से 10 लाख रुपये लेने गया था। रकम मिलने के बाद उसने 500-500 रुपये के नोटों की 20 गड्डियां काले रंग के पिट्ठू बैग में रखीं और बीना से भोपाल जाने वाली मेमो ट्रेन में सवार हो गया।

    रास्ते में गंजबासौदा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के डिब्बे में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। इसी दौरान युवक ने रुपयों से भरा बैग सीट के ऊपर लगी रेलिंग पर रख दिया। कुछ देर बाद उसे नींद आ गई। जब ट्रेन विदिशा पहुंची और उसकी नींद खुली, तब तक बैग गायब हो चुका था। काफी तलाश करने के बाद भी बैग नहीं मिला तो उसने विदिशा GRP थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

    200 CCTV कैमरों के फुटेज से मिला सुराग

    10 लाख रुपये की चोरी का मामला सामने आने के बाद रेल पुलिस ने जांच के लिए विशेष टीम गठित की। पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल अंकित जायसवाल के निर्देशन में टीम ने फरियादी के आने-जाने के रास्तों और घटना से जुड़े संभावित स्थानों पर लगे करीब 200 CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली।

    जांच के दौरान फुटेज में नजर आए संदिग्ध के हुलिए का मिलान रेल इकाई भोपाल के विभिन्न थानों में पहले दर्ज मामलों में शामिल आरोपियों के रिकॉर्ड से किया गया। पुलिस ने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया और संदिग्धों से पूछताछ की। तकनीकी साक्ष्यों और मैदानी जांच के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई और उसे दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया।

    बैग, नकदी और मोबाइल फोन बरामद

    पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने चोरी की वारदात करना स्वीकार किया। उसकी निशानदेही पर काला बैग, 9 लाख 36 हजार रुपये नकद और फरियादी का मोबाइल चार्जर बरामद किया गया। इसके अलावा चोरी की रकम से खरीदा गया एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है।

    पुलिस ने इस मामले में कुल करीब 9 लाख 43 हजार रुपये की संपत्ति बरामद की है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    रेल पुलिस ने यात्रियों को किया सतर्क

    घटना के बाद मध्य प्रदेश रेल पुलिस ने यात्रियों से ट्रेन में सफर के दौरान नकदी और कीमती सामान की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि बैग या कीमती सामान को खुला अथवा खुद से दूर न रखें। सामान को ऐसी जगह रखें, जहां उस पर लगातार नजर बनी रहे। ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत रेलवे पुलिस को सूचना दें।

  • एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण पर घमासान, विवेक तन्खा ने सरकार से मांगे ठोस आंकड़े, राकेश सिंह ने कांग्रेस को घेरा

    एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण पर घमासान, विवेक तन्खा ने सरकार से मांगे ठोस आंकड़े, राकेश सिंह ने कांग्रेस को घेरा


    मध्य प्रदेश। में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया रुख के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने राज्य सरकार से आरक्षण के समर्थन में ठोस आंकड़े जुटाकर सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की मांग की है। वहीं, प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश सिंह ने इस विवाद के लिए कांग्रेस की तत्कालीन सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

    जबलपुर पहुंचे विवेक तन्खा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया, लेकिन कानून का बचाव करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की बनी रही। तन्खा के मुताबिक, वर्तमान सरकार को अदालत में इस व्यवस्था के समर्थन में पर्याप्त तथ्य और आंकड़े प्रस्तुत करने चाहिए थे।

    तन्खा ने हाईकोर्ट की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त और ठोस आंकड़े पेश नहीं किए जाने के कारण आरक्षण के पक्ष को मजबूती से रखने में कठिनाई हुई। उनका मानना है कि यदि अदालत के सामने समय रहते जरूरी आंकड़े रखे जाते, तो मामले की स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि, यह उनका आकलन है और अदालत के निर्णय का अंतिम आधार संबंधित कानूनी तथ्यों तथा न्यायिक निष्कर्षों पर निर्भर करता है।

    आरक्षण की सीमा को लेकर विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सामान्य परिस्थितियों में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की थी। इस सीमा से आगे जाने के लिए असाधारण परिस्थितियों को प्रमाणित करना आवश्यक है। इसके लिए राज्य सरकार को पिछड़ेपन और संबंधित परिस्थितियों के समर्थन में प्रामाणिक मात्रात्मक आंकड़े अदालत के सामने रखने होते हैं।

    तन्खा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अभी भी राज्य सरकार के पास अपना पक्ष रखने का रास्ता है। यदि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है, तो उसे पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, आरक्षण से जुड़े मामले में आंकड़ों और कानूनी आधार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सरकार को उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी और संबंधित तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सरकारी अध्यादेश या कानून का बचाव करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप या सहयोग कर सकते हैं, लेकिन सरकार के पास उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों और प्रशासनिक रिकॉर्ड को अदालत में पेश करने का दायित्व सरकार का ही है।

    दूसरी ओर, मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पर्याप्त तैयारी के बिना ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का कदम उठाया था। उनके अनुसार, संबंधित विधेयक में तकनीकी और कानूनी कमियां थीं, जिनके कारण मामला विवादों में उलझा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग के हितों के नाम पर ऐसा निर्णय लिया, जिसका कानूनी आधार पर्याप्त मजबूत नहीं था।

    राकेश सिंह ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार ओबीसी सहित सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार कानूनी मंचों पर अपना पक्ष रखेगी और ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास करेगी, जिससे किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।इस पूरे विवाद में अब राज्य सरकार की कानूनी रणनीति और सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने वाले तथ्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। एक ओर विवेक तन्खा ने आंकड़ों के आधार पर मजबूत पैरवी की जरूरत बताई है, वहीं भाजपा ने आरक्षण से जुड़ी मौजूदा कानूनी स्थिति के लिए कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।