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  • MP: बैतूल जिले के भीमपुर में दूध और केला के सेवन के बाद अचानक बीमार पड़े 32 बच्चे

    MP: बैतूल जिले के भीमपुर में दूध और केला के सेवन के बाद अचानक बीमार पड़े 32 बच्चे


    बैतूल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले (Betul district) में दूध और केला (Milk and Banana) का सेवन करने के बाद 32 बच्चों की तबीयत खराब (32 Children ill) हो गई है. बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. परिजनों का कहना है कि उनके बच्चों को परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले, बरबटी के बीज दिया गया था।

    मामला बैतूल के भीमपुर क्षेत्र का है जहां एक साथ 32 बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया. दूध और केले का सेवन करने के बाद बच्चों को अचानक उल्टियां होने लगीं, जिसके बाद सभी को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया।

    भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चिखली के ग्राम भाडरी का है. यहां परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले,.बरबटी के बीज दिया गया था. इनके सेवन के बाद 32 बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया।

    SDM और CMHO सहित सीनियर अधिकारी भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और बच्चों के उपचार की जानकारी ली. राहत की खबर यह है कि फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है. बैतूल सीएमएचओ संजीव शर्मा का कहना है कि परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले, बरबटी के बीज दिए गए थे। इसके सेवन के बाद बच्चों को उल्टियां होने लगीं, उन्हें भी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया है. फिलहाल सभी की स्थिति स्थिर है और दूध का सैंपल ले लिया गया है।

    अपने बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे सुमरत कास्दे का कहना है कि उसका बच्चा कुटीर गया था, जहां उसे दूध और केला दिया गया था. इसके बाद स्कूल गया, वहां उसने कुछ नहीं खाया और स्कूल से पता चला कि बच्चों को उल्टियां हो रही हैं तो उन्हें अस्पताल लेकर आए।

  • MP में दो सड़क हादसे: उज्जैन में बस खाई में गिरी, दो बाइक सवारों की मौत, मैहर में ट्रक चालक ने तोड़ा दम

    MP में दो सड़क हादसे: उज्जैन में बस खाई में गिरी, दो बाइक सवारों की मौत, मैहर में ट्रक चालक ने तोड़ा दम


    उज्जैन। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई। उज्जैन के पास माकड़ोन फंटे पर बाइक सवारों को बचाने के प्रयास में शर्मा ट्रैवल्स की बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में उतर गई। हादसे में दो बाइक सवारों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। बस में सवार चार महिलाएं और तीन पुरुष भी घायल हुए हैं। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    वहीं, मैहर जिले में शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे एक ट्रक चालक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इससे ट्रक बेकाबू होकर सड़क किनारे खड़ी बस से टकरा गया। हादसे में चालक की मौत हो गई।

    उज्जैन में बाइक सवारों को बचाने में खाई में उतरी बस
    जानकारी के अनुसार, बस क्रमांक MP-70-P-0161 आगर से उज्जैन आ रही थी। बस माकड़ोन फंटे के पास पहुंची, तभी उज्जैन से माकड़ोन की ओर जा रहे एक बाइक सवार ने अचानक मोड़ ले लिया। उसे बचाने के प्रयास में बस बाइक से टकरा गई और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके बाद बस सड़क किनारे खाई में जा गिरी। इस दौरान एक अन्य बाइक सवार भी बस की चपेट में आ गया।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही घोंसला क्षेत्र के ग्रामीण और राघवी थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। घायलों को एंबुलेंस की मदद से घट्टिया अस्पताल पहुंचाया गया।

    दो बाइक सवारों की मौके पर मौत, कई यात्री घायल
    हादसे में जान गंवाने वाले बाइक सवारों की पहचान महेश, पिता बापू, और मोहन, पिता मांगीलाल, के रूप में हुई है। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, गोपाल सिंह नाम का एक अन्य बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हुआ है। बस में सवार चार महिलाएं और तीन पुरुष भी घायल हुए हैं। सभी घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। राघवी थाना पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

    मैहर में चालक की तबीयत बिगड़ी, खड़ी बस से टकराया ट्रक
    दूसरा हादसा शुक्रवार शाम मैहर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में हुआ। सीमेंट फैक्ट्री से क्लिंकर लेकर उत्तर प्रदेश के रायबरेली जा रहा ट्रक रामवन पथ गमन रोड पर उमरी पैला के पास पहुंचा था। इसी दौरान चालक नीरज सिंह (33) की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इससे वाहन पर से उसका नियंत्रण हट गया और ट्रक सड़क किनारे खड़ी बस से जा टकराया। हादसे में ट्रक चालक की मौत हो गई। मृतक उत्तर प्रदेश के रायबरेली का निवासी था।

    टायर पंचर होने के कारण सड़क किनारे खड़ी थी बस
    जानकारी के मुताबिक, बस डिंडौरी की ओर जा रही थी। उसमें सवार यात्री चित्रकूट से आंखों का इलाज कराकर लौट रहे थे। रास्ते में बस का टायर पंचर हो गया था, जिसके कारण चालक ने उसे सड़क किनारे रोक दिया था। टायर बदले जाने के दौरान ही बेकाबू ट्रक बस से टकरा गया।

    दोनों हादसों में पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की। उज्जैन में बस हादसे के कारणों की जांच की जा रही है, जबकि मैहर में ट्रक चालक की तबीयत अचानक बिगड़ने को दुर्घटना की वजह बताया जा रहा है।

  • MP: लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित महिलाओं के लिए खुशखबरी, खुलेगा पोर्टल… मंत्री ने दिए संकेत

    MP: लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित महिलाओं के लिए खुशखबरी, खुलेगा पोर्टल… मंत्री ने दिए संकेत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Chief Minister’s Ladli Behna Yojana) का लाभ पाने से वंचित रह गई महिलाओं (Women) के लिए राहत की उम्मीद जगी है. राज्य सरकार योजना से छूटी हुई महिलाओं के नाम जोड़ने के लिए पोर्टल दोबारा खोलने पर विचार कर सकती है. स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस संबंध में संकेत दिए हैं।

    बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल (Minister Narendra Shivaji Patel) ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने निकट भविष्य में लाड़ली बहना योजना से छूटी हुई महिलाओं के नाम जोड़ने की बात कही है. इसके लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजना के दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन करने के निर्देश दिए हैं. मंत्री के इस बयान के बाद उन महिलाओं को उम्मीद बंधी है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक योजना में अपना नाम नहीं जुड़वा सकी हैं. हालांकि, अभी पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।


    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए आकलन के निर्देश

    मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह नहीं बताया जा सकता कि लाड़ली बहना योजना का पोर्टल कब खोला जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पहले यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि योजना के लाभ से कितनी महिलाएं बाहर रह गई हैं. सरकार की ओर से इस आकलन के बाद आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जा सकता है. यदि पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला होता है, तो योजना से वंचित रह गई महिलाओं को आवेदन करने का अवसर मिल सकता है।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नए आवेदन कब से लिए जाएंगे, आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी और पात्रता की शर्तों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं. इन सभी बातों पर सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है. 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में आई 41वीं किस्त लाड़ली बहना योजना को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है, जब बुधवार, 14 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उमरिया जिले के गुरुवाही ग्राम में आयोजित राज्य स्तरीय लाड़ली बहना सम्मेलन में योजना की 41वीं किस्त जारी की।

    मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए योजना की 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर की. इस दौरान करीब 1834 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई. इस कार्यक्रम के साथ ही योजना से जुड़ी महिलाओं के खातों में किस्त पहुंचने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. वहीं, अब योजना से बाहर रह गई महिलाओं के नाम जोड़ने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।


    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट

    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है. योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है. अब सरकार की ओर से योजना के दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन कराया जा रहा है. इस प्रक्रिया के बाद पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर फैसला लिए जाने की संभावना है. फिलहाल महिलाओं को आवेदन शुरू होने की तारीख और पात्रता से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा. मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के बयान से पोर्टल दोबारा खुलने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अभी इसे लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

  • MP: बांधवगढ़ रिजर्व में मानसून में शुरू हुआ प्रयोग हुआ हिट… 100 दिनों में पहुंचे 3780 पर्यटक

    MP: बांधवगढ़ रिजर्व में मानसून में शुरू हुआ प्रयोग हुआ हिट… 100 दिनों में पहुंचे 3780 पर्यटक


    उमरिया।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) में वन्यजीव पर्यटन (Wildlife tourism) को लेकर सैलानियों का उत्साह लगातार चरम पर है. कोर जोन के साथ-साथ अब बफर जोन पर्यटन (Bandhavgarh Buffer Zone Safari) भी भारी लोकप्रियता हासिल कर रहा है. मानसून के दौरान जब कोर जोन में सफारी पूरी तरह बंद रहती है, तब बफर क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां शुरू की गई थीं. यह प्रयोग इतना सफल रहा कि चालू पर्यटन सत्र (2026-27) के शुरुआती 100 दिनों के भीतर परासी और पचपेड़ी बफर जोन में 3,780 पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई से 8 अक्टूबर तक कुल 802 वाहनों के माध्यम से पर्यटकों ने बफर जोन का भ्रमण किया. इसमें 3,758 भारतीय और 22 विदेशी पर्यटक शामिल रहे।

    परासी बफर जोन: यहां 550 वाहनों से 2,588 पर्यटकों ने भ्रमण किया. पचपेड़ी बफर जोन: यहां 252 वाहनों के जरिए 1,192 पर्यटक जंगल सफारी के लिए पहुंचे। महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई में 243 वाहनों से 1,109, अगस्त में 265 वाहनों से 1,247 और सितंबर में 168 वाहनों से 780 पर्यटक आए. वहीं 1 से 8 अक्टूबर के दौरान 126 वाहनों से 644 सैलानी बफर जोन पहुंचे. पूरी अवधि में अगस्त माह में सबसे अधिक सैलानियों का आगमन दर्ज किया गया.


    प्राकृतिक परिवेश में बाघों के दीदार और स्थानीय रोजगार

    बफर जोन में पर्यटकों को बाघ (टाइगर) सहित अन्य दुर्लभ वन्यप्राणियों के उनके प्राकृतिक परिवेश में नियमित दीदार हो रहे हैं. कोर जोन खुलने के बाद भी बफर जोन के प्रति पर्यटकों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। बफर क्षेत्र में पर्यटन संचालन का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय आदिवासी और आसपास के समुदायों को मिला है. जिप्सी संचालन, गाइड सेवा, होमस्टे और स्थानीय हस्तशिल्प के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

  • MP: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की मची होड़…. अक्टूबर के शुरुआती 13 दिन में 4 लाख से ज्यादा आवेदन

    MP: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की मची होड़…. अक्टूबर के शुरुआती 13 दिन में 4 लाख से ज्यादा आवेदन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मतदाता सूची (Voter List) में नाम जुड़वाने के लिए 1 अक्टूबर से अब तक Form 6 के 4,06,338 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 18 से 19 वर्ष की उम्र के युवाओं के 1,92,851 आवेदन शामिल हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) संजीव कुमार झा ने यह जानकारी दी।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा (Chief Electoral Officer Sanjeev Kumar Jha) के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के निर्देशों के तहत प्रदेशभर में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) Form 6 के आवेदन एकत्र कर रहे हैं. पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य पात्र नागरिकों को आवेदन जमा करने में मदद करना और उनका नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।


    क्या है Form 6 और कौन कर सकता है आवेदन?

    Form 6 भारतीय नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने का निर्धारित आवेदन पत्र है. इसके लिए आवेदक की उम्र निर्धारित अर्हता तिथि पर कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए. साथ ही, उसे उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना जरूरी है, जहां वह मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहता है।

    ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं आवेदन
    भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, पात्र नागरिक Form 6 के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं.
    ऑनलाइन: निर्वाचन आयोग के Voter Services Portal के माध्यम से.
    ऑफलाइन: संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) या बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास आवेदन जमा करके।

    Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
    इस बीच, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत ने नए Form 6 को न तो मंजूरी दी है और न ही उसे खारिज किया है। पीठ के अनुसार, बिहार में SIR से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया था.

    दरअसल, निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में संकेत दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 के बिहार SIR से संबंधित फैसले में Form 6 के घोषणा-पत्र को बरकरार रखा था. अब शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि उस सुनवाई में नए Form 6 की वैधता या स्वीकार्यता पर फैसला नहीं हुआ था।

    युवाओं के लिए मतदाता बनने का अवसर
    मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से अब तक मिले कुल 4,06,338 आवेदनों में करीब 47.45 प्रतिशत आवेदन 18 से 19 वर्ष के युवाओं के हैं. यह आंकड़ा नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी को दर्शाता है. पात्र नागरिक Form 6 के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने से पहले निर्धारित पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल से प्राप्त की जा सकती है।

  • MP: उज्जैन पुलिस ने पकड़े 2 करोड़ रुपये के तांबे स्क्रैप से भरे पांच वाहन, 5 तस्कर गिरफ्तार

    MP: उज्जैन पुलिस ने पकड़े 2 करोड़ रुपये के तांबे स्क्रैप से भरे पांच वाहन, 5 तस्कर गिरफ्तार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) में अवैध गतिविधियों और संदिग्ध मामलों पर नकेल कसते हुए उज्जैन पुलिस (Ujjain Police) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने चेकिंग के दौरान तांबे के चूरे स्क्रैप से भरे पांच लोडिंग वाहनों को पकड़ा है। जब्त किए गए वाहनों और उनमें भरे माल की कुल अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ रुपये आंकी गई है।

    पुलिस को मिली खास सूचना के आधार पर रणकेश्वर मंदिर के पास ब्रिज के नीचे यह कार्रवाई की गई। पकड़े गए पांचों टाटा एस लोडिंग वाहनों के चालकों से जब माल से संबंधित वैध बिल, बिल्टी और परिवहन दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई भी वैध कागजात या संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद चोरी के माल के संदेह में पुलिस ने माल और वाहनों को विधिवत जब्त कर लिया।

    बताया जाता है कि पुलिस ने श्री हरिओम धर्मकांटा पर टाटा एस (MP-09-AX-5704): वजन – 4,165 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (नया वाहन, बिना नंबर): वजन – 2,335 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-AJ-2175): वजन – 4,035 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-BK-4988): वजन – 2,965 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-BR-4162): वजन – 3,075 किलोग्राम है पांचों वाहनों का कुल ग्रॉस वजन 16,575 किलोग्राम है, जिसमें लगभग 11 टन तांबे का स्क्रैप (कीमत करीब 2 करोड़ रुपए) शामिल है।

    पुलिस ने मौके से पांचों वाहन चालकों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान सुरेश पिता मोहनलाल सोलंकी (निवासी – इंदौर), राहुल पिता राधेश्याम चौहान (निवासी – इंदौर), शंकर पिता कैलाश सिंह ढाला (निवासी – इंदौर), रामकिशन पिता मांगीलाल पंवार (निवासी – इंदौर), विनायक पिता रमेश राठौर (निवासी – इंदौर) के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1)(e)/106 के तहत इस्तगासा पंजीबद्ध कर लिया है। जब्त वाहनों और माल को थाने में सुरक्षित रखवाया गया है। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह तांबे का चूरा कहां से लाया गया था और इसके तार किन चोरियों या अवैध नेटवर्क से जुड़े हैं।

  • MP: गरीबों के घर तोड़ने पर भड़के शिवराज…. मुख्य सचिव को लगाया फोन, बोले- जुल्म की हो गई इंतहा

    MP: गरीबों के घर तोड़ने पर भड़के शिवराज…. मुख्य सचिव को लगाया फोन, बोले- जुल्म की हो गई इंतहा


    सीहोर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की हाई-प्रोफाइल बुधनी विधानसभा (Budhni Assembly ) इलाके के कोसमी गांव (Kosmi Village) में गरीब परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने के मामले ने बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) रविवार को खुद मौके पर पहुंचे. वहां उजाड़े गए गरीब परिवारों की आपबीती सुनकर और तबाही का मंजर देखकर शिवराज सिंह चौहान का गुस्सा फूट पड़ा।

    केंद्रीय मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए साफ कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने, उनकी फसलें चौपट करने और पीने के पानी के कुएं को मिट्टी से भरने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।


    मुख्य सचिव और प्रदेशाध्यक्ष को लगाया फोन

    घटनास्थल पर निरीक्षण के दौरान वन विभाग और जिला प्रशासन का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने गहरा आक्रोश जताया. उन्होंने मौके से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर पूरी स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने साफ किया कि वह इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री मोहन यादव से व्यक्तिगत रूप से बात कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

    प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर हुई तबाही का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ”गरीबों के आशियाने उजाड़ने के साथ-साथ उनके खेतों में खड़ी मक्के और तुअर की फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया. हद तो यह हो गई कि उनके सिंचाई और पीने के पानी के एकमात्र साधन कुएं को भी मिट्टी से भर दिया गया. यह बेहद शर्मनाक और अमानवीय कृत्य है.”

    केंद्रीय मंत्री शिवराज ने प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए ऐलान किया कि जिन गरीब परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें नया पक्का घर बनाकर दिया जाएगा. जब तक उनके रहने की स्थाई व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने का अस्थायी इंतजाम तुरंत किया जाएगा।


    ‘यह पार्टी को बदनाम करने की साजिश’

    पीड़ितों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र और अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ”ये जो अन्याय हुआ है, उसकी पूरी जानकारी मुझे मुख्यमंत्री महोदय को देनी है. सिसकती हुई इनकी सिसकियां, इनकी आंखों के आंसू, इनके कुचले हुए खेत और इनका चौपट किया हुआ भविष्य… यह सब मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को बताऊंगा. मुझे तो यह मुख्यमंत्री जी को भी बदनाम करने की साजिश लगती है।

    अच्छा, ये वो लोग हैं जो हमेशा बीजेपी को ही वोट देते हैं. इन्होंने लोकसभा में भी वोट दिए और विधानसभा में भी दिए. यह तो पार्टी को बदनाम करने की कुछ अधिकारियों की साजिश है. इन्हीं के वोट से हम लोग जीतते हैं और इन्हीं के वोट से मोहन जी मुख्यमंत्री बने. यह सचमुच में मेरे लिए बहुत दुखद है. मैंने पहले भी निवेदन किया था कि वर्षों से इनका जमीन पर कब्जा है, इसलिए इन्हें तंग न किया जाए.”

  • MP में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी…. CM ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को कान्हा रिवर्ज में छोड़ा

    MP में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी…. CM ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को कान्हा रिवर्ज में छोड़ा


    मंडला/बालाघाट।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों (Wild buffaloes) को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने की दिशा में रविवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके आठ जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित बड़े बाड़े में विमुक्त किया। इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को क्षेत्र की आबोहवा और पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। लगभग सौ वर्षों बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण प्रारंभ हो रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

    दो चरणों में काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसे

    जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से निर्मित एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को इसी बाड़े में रखा गया।

    कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन कर रखा गया, ताकि वे यहां के वातावरण और जलवायु के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर विमुक्त किया।

    तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य

    मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लगभग सौ वर्ष पहले विलुप्त हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से वन विभाग ने इस प्रजाति को पुनः स्थापित करने के लिए विशेष योजना तैयार की है। सूपखार क्षेत्र में पूर्व में जंगली भैंसों की उपस्थिति के प्रमाण मिलने के आधार पर यहां पुनर्स्थापना परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल मध्यप्रदेश में जैव-विविधता के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत बनाने और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनः स्थापित कर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाकर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।

  • MP: फसलें बचाने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू… पहले दिन पकड़े 97 कृष्ण मृग

    MP: फसलें बचाने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू… पहले दिन पकड़े 97 कृष्ण मृग


    शाजापुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शाजापुर जिले (Shajapur district) में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए वन विभाग ने अनोखा तरीका अपनाया है. शुजालपुर, कालापीपल और उज्जैन जिले के सीमावर्ती इलाकों में कृष्णमृग और नीलगाय (Blackbuck and Nilgai) को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation) चलाया जा रहा है. अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी गांव में बोमा पद्धति से 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया.

    शाजापुर–शुजालपुर क्षेत्र में कृष्ण-मृगों (ब्लैकबक) को पकड़ने और स्थानांतरित करने के अभियान का दूसरे चरण का शनिवार को प्रारंभ किया गया। अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी में 97 कृष्णमृगों को सफलतापूर्वक पकड़ा गया। इन्हें अनुकूल वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान रवाना किया गया। इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से फसलों को नुकसान पहुंचा रहे वन्य प्राणियों के कारण किसानों और ग्रामीणों को होने वाली परेशानियों को कम करना है।

    कृष्ण-मृगों को उनके अनुकूल वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। दूसरे चरण में कुल 2 हजार कृष्ण-मृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल वन्य प्राणियों के संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में मध्य प्रदेश वन विभाग दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम का सहयोग ले रहा है. अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से निर्धारित क्षेत्रों में भेजना है, ताकि किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।


    हेलीकॉप्टर से हांका, बोमा तकनीक से पकड़े कृष्णमृग

    रेस्क्यू ऑपरेशन के पहले चरण में हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को हांका देकर एक निर्धारित घेरे की ओर पहुंचाया गया. इसके बाद बोमा तकनीक से उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया. अभियान के दौरान दोपहर में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर विशेषज्ञों की सलाह के बाद रेस्क्यू रोक दिया गया. अगले चरण को शनिवार देर शाम या रविवार सुबह शुरू करने की योजना बताई गई।

    आयोजकों के अनुसार, हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा पद्धति के जरिए वन्यजीवों को रेस्क्यू करने की शुरुआत लगातार दूसरे वर्ष शुजालपुर क्षेत्र से की गई है. पिछले साल भी इसी इलाके में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था।


    दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञ, करीब 200 कर्मचारी तैनात

    इस विशेष अभियान में दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं. इनके अलावा वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं. भोपाल सहित दूसरे जिलों से पहुंचे कर्मचारियों को मिलाकर करीब 200 लोगों की टीम अभियान में जुटी है।

    इससे पहले ग्राम हन्नूखेड़ी में अभियान की तैयारियों का निरीक्षण वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभांजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, कलेक्टर ऋजु बाफना और अभियान की नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन समेत अन्य अधिकारियों ने किया. अधिकारियों ने दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम से चर्चा कर तैयारियों और अभियान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।


    ग्रामीणों के लिए जारी किए गए सुरक्षा निर्देश

    वन विभाग और जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अभियान के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. अधिकारियों के मुताबिक, वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी प्राथमिकता है। ग्रामीणों से कहा गया है कि अभियान की सूचना वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और ऑपरेशन समाप्त होने की सूचना मिलने तक खेतों में कृषि कार्य, सिंचाई या अन्य गतिविधियां न करें. बच्चों को खेतों, सड़कों और बोमा स्थल से दूर रखने तथा गाय, भैंस, बकरी और कुत्तों सहित पालतू पशुओं को खुले में नहीं छोड़ने की सलाह दी गई है।

    वन विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि वे वन्यजीवों का पीछा न करें, उन्हें घेरने या भगाने की कोशिश न करें और हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर बाहर निकलकर भीड़ न लगाएं. निर्धारित सुरक्षा क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


    पहले चरण में 913 वन्यप्राणियों का हुआ था स्थानांतरण

    कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का पहला चरण पिछले वर्ष संचालित किया गया था। इस दौरान 846 कृष्ण-मृग और 67 नीलगाय सहित कुल 913 वन्य प्राणियों को पकड़ा गया था। पहले चरण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण को बेहतर समन्वय के साथ संचालित किया जा रहा है।

    किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए जनसहयोग की अपील

    अभियान में जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। वन विभाग ने वन्य प्राणी संरक्षण और किसानों की फसलों की सुरक्षा के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए आमजन से निरंतर सहयोग की अपील की है।

  • MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका

    MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका


    शहडोल।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवा कांग्रेस नेताओं (Youth Congress leaders) को शनिवार को शहडोल रेलवे स्टेशन (Shahdol Railway Station) पर पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम, प्रदेश सचिव अभिषेक शुक्ला, जिला महासचिव शेख आबिद, जयसिंहनगर विधानसभा अध्यक्ष शेख साजिल और सत्यम प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सभी को सिटी कोतवाली ले गई, जहां कुछ घंटे रखने के बाद देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया।

    युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता दिल्ली में आयोजित आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर उन्हें रोककर कार्रवाई की। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल रही। युवा कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे सरकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं और आंदोलन में शामिल होने का प्रयास जारी रखेंगे।


    ‘कितनी बार गिरफ्तार करोगे, आंदोलन में जरूर जाएंगे’

    युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम ने कहा कि युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता राहुल गांधी के बब्बर शेर हैं और दमनकारी सरकार से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ता दिल्ली जा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें कितनी बार गिरफ्तार किया जाएगा। गौतम ने कहा कि कुछ कार्यकर्ता एक रास्ते से जाएंगे, तो दूसरे कार्यकर्ता अन्य रास्तों से दिल्ली पहुंचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आंदोलन में शामिल होकर रहेंगे।


    रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ भी अलर्ट

    दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए शहडोल रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) भी सतर्क नजर आया। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में आंदोलन में शामिल होने जा रहे लोगों की संख्या की जानकारी हर दो घंटे में मुख्यालय को भेजने के निर्देश मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।