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  • राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    नई दिल्ली । देश के पहले गृहमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर गुजरात के नर्मदा जिले स्थित एकता नगर (केवड़िया) में मुख्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पहुंचकर दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम के साथ ही प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास को गति देने के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एकता नगर में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़ी योजनाओं की शुरुआत की। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। विकास योजनाओं में स्मार्ट परिवहन संपर्क व्यवस्था, हरित ऊर्जा से जुड़ी पहल, पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाने के लिए नए वॉकवे और सुरक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण शामिल है। इसके अलावा स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़ी योजनाएं भी इन परियोजनाओं का हिस्सा हैं।

    प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास और उसकी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह स्थान अब केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के अनुकूल विकास के वैश्विक मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी और सुविधाओं को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

    विकास परियोजनाओं के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने एकता नगर में तैयार किए गए रेन फॉरेस्ट और वामन वृक्ष वाटिका का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद जैव विविधता, दुर्लभ वनस्पतियों और विभिन्न पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें इन हरित क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रबंधों के बारे में बताया।

    नर्मदा नदी के साधु बेट द्वीप पर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित स्मारक है। इसकी मुख्य प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर यानी 597 फीट है। आधार सहित इसकी कुल ऊंचाई लगभग 240 मीटर बताई जाती है। यह अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊंची है। प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार ने इस प्रतिमा को डिजाइन किया था, जबकि इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने किया। निर्माण कार्य 33 महीने में पूरा किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल की 143वीं जयंती के अवसर पर इस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया था।

    राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के दौरान भव्य परेड का भी आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री ने परेड की सलामी ली। इसमें सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और गुजरात पुलिस के जवानों ने हिस्सा लिया। सुरक्षा बलों के दस्तों ने अनुशासन और शौर्य का प्रदर्शन किया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक नृत्यों और डेयरडेविल्स जवानों के हैरतअंगेज करतबों ने समारोह को विशेष बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।

    समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से सरदार पटेल के आदर्शों पर चलने और देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने 562 से अधिक देसी रियासतों का विलय कर भारत को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों से संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करने का संकल्प दोहराने की अपील की।

  • जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पहुंचकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का समर्थन करने वाली अभिनेत्री और मॉडल पूनम पांडे अब पार्टी के नए आंदोलन के विरोध में नजर आ रही हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाए हैं। पूनम का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का अपनी इच्छा से प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगना उचित नहीं है। उन्होंने मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को देश के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से देश की छवि प्रभावित होती है।

    नीट पेपर लीक के खिलाफ जून और जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान सीजेपी को कई लोगों का समर्थन मिला था। छात्रों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर आम लोगों के साथ कुछ चर्चित हस्तियां भी प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ गई थी। इसी दौरान पूनम पांडे भी वहां पहुंची थीं। उन्होंने छात्रों की समस्याओं पर सरकार से जल्द ध्यान देने और उनकी मांगों को सुनने की अपील की थी।

    हालांकि, अब पार्टी की ओर से चलाए जा रहे नए आंदोलन को लेकर पूनम का रुख बदल गया है। सीजेपी इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके साथ ही पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे और व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग भी उठाई जा रही है। पूनम पांडे ने इन मांगों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि देश में विरोध के नाम पर जिस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, वे उचित नहीं हैं।

    पूनम ने कहा कि किसी के भी प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने का तरीका ऐसा नहीं हो सकता कि जब मन हुआ, सीधे पद छोड़ने की मांग कर दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के पद की अहमियत का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि आखिर इस तरह की मांगें किस आधार पर की जा रही हैं। उनके अनुसार, देश का संचालन इस तरीके से नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री कोई पड़ोसी या निजी परिचित नहीं हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर आसीन व्यक्ति हैं।

    पूनम पांडे ने आंदोलन में शामिल युवाओं की समझ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं है कि वे किस उद्देश्य से आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ छात्र और युवा बिना पूरी जानकारी के प्रदर्शन का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने इसे देश के लिए अस्वस्थ माहौल बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रीय हित में नहीं हैं।

    इसी बातचीत के दौरान पूनम ने इमरान खान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिक होने के कारण उन्हें देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए था। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने देश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।

    इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली में विरोध का भी सामना करना पड़ा। शुक्रवार को पार्टी ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित करने के लिए समर्थकों को बुलाया था। हालांकि, वहां बड़ी संख्या में विरोध करने वाले लोग भी जुट गए। कनॉट प्लेस के कई कारोबारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली पुलिस के समर्थन में नारे लगाए तथा सीजेपी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

    कार्यक्रम से पहले पार्टी के युवा नेताओं अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई। इसके बाद कार्यक्रम में पार्टी समर्थकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इस घटनाक्रम के बीच सीजेपी को एक ओर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पहले समर्थन कर चुकी पूनम पांडे की आलोचना भी उसके लिए चर्चा का विषय बन गई है।

  • लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का 15 अक्टूबर को उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुआ निर्माण

    लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का 15 अक्टूबर को उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुआ निर्माण

    नई दिल्ली: लद्दाख के लेह स्थित कुशोक बकुला रिम्पोचे (केबीआर) एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अक्टूबर को इस आधुनिक टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन कर सकते हैं। इसके लिए जमीन पर जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अब कार्यक्रम के समय को लेकर अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इस नई सुविधा के शुरू होने से हवाई अड्डे की यात्री क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को पहले के मुकाबले बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने उद्घाटन कार्यक्रम से पहले निर्माण स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने नए टर्मिनल के विभिन्न हिस्सों को देखा, जिनमें प्रस्थान लाउंज, आगमन लाउंज, प्रतीक्षालय, यात्रियों की जांच के लिए निर्धारित क्षेत्र और फूड लाउंज शामिल हैं। उन्होंने यात्रियों को दी जाने वाली दूसरी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। साथ ही, टर्मिनल को पूरी तरह चालू करने के लिए शेष कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों के अनुसार, भवन से जुड़ी संरचनात्मक और परिचालन तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उम्मीद है कि उद्घाटन के तुरंत बाद नए टर्मिनल को यात्रियों के इस्तेमाल के लिए खोल दिया जाएगा।

    भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने इस परियोजना को 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया है। लगभग 23,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली यह तीन मंजिला इमारत सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके अलावा, यहां प्रतिदिन 54 उड़ानों के संचालन को ध्यान में रखकर सुविधाएं विकसित की गई हैं। नए टर्मिनल में यात्रियों की आवाजाही और विमान सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें 20 चेक-इन काउंटर, इनलाइन बैगेज हैंडलिंग सिस्टम, सामान प्राप्त करने के लिए दो कैरोसेल, 15 लिफ्ट और 12 एस्केलेटर शामिल हैं। इन सुविधाओं से यात्रियों के चेक-इन, सामान प्रबंधन और टर्मिनल के भीतर आवागमन में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नई टर्मिनल बिल्डिंग को ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल तकनीक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें 700 किलोवाट पीक क्षमता का रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। इसके साथ ही, अत्यधिक ठंड वाले मौसम में इमारत को गर्म रखने के लिए भू-तापीय तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। इस परियोजना में शून्य से नीचे तापमान वाले सर्दियों के मौसम की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। भू-तापीय तकनीक के उपयोग को भारत में इस तरह की व्यवस्था के शुरुआती बड़े पैमाने के इस्तेमाल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे लेह जैसे ठंडे क्षेत्र में हवाई अड्डे के संचालन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    टर्मिनल के उद्घाटन के बाद परियोजना के दूसरे चरण के तहत पुराने टर्मिनल को गिराने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे हवाई अड्डे के एप्रन का विस्तार करने और विमानों के संचालन से जुड़ी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने का रास्ता साफ होगा। योजना में तीन एयरोब्रिज और विमानों की पार्किंग के लिए चार अतिरिक्त बे बनाने का प्रस्ताव शामिल है। इन बदलावों से यात्रियों को विमान तक पहुंचने में सुविधा मिलने के साथ विमानों की पार्किंग और परिचालन व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे पहले 11 अगस्त को मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण और नुब्रा क्षेत्र के थॉइस एयरपोर्ट से नागरिक उड़ान सेवाएं शुरू करने की प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक की थी। उस बैठक में एएआई के एयरपोर्ट निदेशक और परियोजना महाप्रबंधक ए. उमाशंकर ने निर्माण कार्य की स्थिति की जानकारी दी थी। अब नई टर्मिनल बिल्डिंग तैयार होने के बाद इसके उद्घाटन और यात्रियों के लिए संचालन शुरू होने पर ध्यान केंद्रित है।

  • उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की तारीफ की, INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया

    उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की तारीफ की, INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई दी है। श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 25 साल तक लगातार चुनाव जीतते रहना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी सफलता प्रधानमंत्री मोदी के मतदाताओं के साथ मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को दर्शाती है। उमर अब्दुल्ला ने अपनी और अपनी सरकार के सहयोगियों की ओर से प्रधानमंत्री को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 साल तक लगातार चुनाव जीतना आसान नहीं है। यह सफर पहले राज्य स्तर पर और फिर केंद्र स्तर पर जारी रहा है। उन्होंने लगातार जीत के सिलसिले को आधुनिक राजनीति में एक असाधारण उपलब्धि बताया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इतने लंबे समय तक चुनावी सफलता बनाए रखना अपने आप में महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वे देश के प्रधानमंत्री बने और अब सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे कर चुके हैं।

    उमर अब्दुल्ला ने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर दिए गए बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ INDIA गठबंधन की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि यह विरोध पिछले दिनों दिल्ली में हुई गठबंधन की बैठक का नतीजा है। उन्होंने प्रदर्शन को मनगढ़ंत और फर्जी बताए जाने के दावों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने इस मुद्दे को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी सार्वजनिक विरोध और राजनीतिक विवाद पर उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के उस दावे को चुनौती दी, जिसमें खोजी पत्रकारिता की रिपोर्टों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया गया है। उन्होंने प्रदर्शन के संदर्भ में कहा कि अगर यह मामला फर्जी होता तो सबसे पहले उस अखबार के खिलाफ कार्रवाई की जाती, जिसकी रिपोर्ट के जरिए यह पूरा मामला सामने आया है। उमर अब्दुल्ला ने इस आधार पर प्रदर्शन को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।

    श्रीनगर में कश्मीर घाटी के एक बड़े खेल आयोजन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 साल की राजनीतिक यात्रा के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी जीत हासिल करना आसान नहीं है और लंबे समय तक मतदाताओं के साथ जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध को लेकर भी अपना पक्ष रखा।

  • फ्लाईदुबई फ्लाइट में 174 यात्रियों को बचाने वाले घायल पायलट स्मित मच्छार से पीएम मोदी ने की बात

    फ्लाईदुबई फ्लाइट में 174 यात्रियों को बचाने वाले घायल पायलट स्मित मच्छार से पीएम मोदी ने की बात

    नई दिल्ली। फ्लाईदुबई की फ्लाइट में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित से बातचीत कर मुश्किल समय में उनके साहस की तारीफ की और उन्हें हीरो बताया। पीएम मोदी ने कहा कि गंभीर परिस्थिति में स्मित ने जिस तरह हिम्मत दिखाई, वह काबिले-तारीफ है। प्रधानमंत्री ने घायल भारतीय पायलट के परिवार से भी बातचीत की। फ्लाइट में हुई इस घटना के दौरान स्मित ने घायल होने के बावजूद हालात संभालने की कोशिश की और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद का रास्ता बनाया।

    इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पायलट ने अपने ही साथी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया। हमला गंभीर था और इसके बाद विमान के हालात बिगड़ने लगे। फ्लाइट अचानक नीचे जाने लगी। घायल होने के बावजूद स्मित ने स्थिति को संभालने की कोशिश जारी रखी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद मांगी। इसके बाद एक यात्री कॉकपिट के अंदर पहुंचा और स्थिति को संभालने में मदद की। वहीं, दूसरे यात्रियों और क्रू मेंबर ने आरोपी पायलट को काबू करने की कोशिश की।

    हमले के बाद विमान को संभालने में यात्रियों और क्रू की भूमिका सामने आई। कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद इजरायली यात्री यानिव हयून अंदर पहुंचे। हयून पेशे से प्लंबर हैं। उन्होंने कॉकपिट में पहुंचकर देखा कि आरोपी पायलट विमान के कंट्रोल से छेड़छाड़ कर रहा था। इसके बाद हयून ने तुरंत विमान के कंट्रोल को पीछे की तरफ खींचा। इसी दौरान एक अन्य यात्री और क्रू मेंबर ने आरोपी पायलट को काबू कर लिया। स्थिति को नियंत्रित करने के बाद रिजर्व पायलट कॉकपिट में पहुंचे और विमान का कंट्रोल संभाल लिया।

    यानिव हयून की भूमिका भी इस घटनाक्रम में सामने आई। घटना के बाद एयरपोर्ट पर उनकी मुलाकात हुई। बताया गया कि हयून के कपड़ों पर घायल भारतीय पायलट का काफी खून लगा हुआ था। उन्होंने कॉकपिट में पहुंचने के बाद आरोपी पायलट को विमान के कंट्रोल से छेड़छाड़ करते देखा था और तत्काल कंट्रोल को पीछे की ओर खींचा था। इसके बाद दूसरे यात्री और क्रू मेंबर ने आरोपी पायलट को काबू किया, जबकि रिजर्व पायलट ने विमान को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभाली। इस पूरे घटनाक्रम में घायल कैप्टन स्मित मच्छार ने भी कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद का रास्ता बनाया था।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार से बातचीत के दौरान उनकी हिम्मत की सराहना की। उन्होंने मुश्किल हालात में दिखाई गई बहादुरी के लिए भारतीय पायलट को हीरो बताया। पीएम मोदी ने स्मित के परिवार से भी बातचीत की। फ्लाइट में मौजूद 174 यात्रियों की जान बचाने की कोशिश के दौरान कैप्टन स्मित घायल हुए थे। घटना के दौरान यात्रियों और क्रू ने आरोपी पायलट को काबू करने में मदद की, जबकि रिजर्व पायलट ने बाद में विमान का नियंत्रण संभाला। इस तरह घायल भारतीय पायलट द्वारा मदद का रास्ता खोलने और यात्रियों तथा क्रू की मदद से विमान को संभालने का घटनाक्रम सामने आया।

  • केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला, अडानी को ‘भाई’ और जय शाह को ‘भतीजा’ बताते हुए लगाए कई गंभीर आरोप

    केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला, अडानी को ‘भाई’ और जय शाह को ‘भतीजा’ बताते हुए लगाए कई गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि नई सरकार के आने के बाद भाई-भतीजावाद खत्म होगा और देश में बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केजरीवाल ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भाई-भतीजावाद का सबसे बड़ा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद हैं।

    केजरीवाल ने कहा कि मोदी का एक ‘भाई’ है, जिसका नाम अडानी है। उनके मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में अगर किसी एक व्यक्ति ने सबसे ज्यादा आर्थिक तरक्की की है तो वह अडानी हैं। इसी तरह उन्होंने जय शाह को प्रधानमंत्री का ‘भतीजा’ बताते हुए कहा कि इस अवधि में किसी युवा ने सबसे ज्यादा तरक्की की है तो वह जय शाह हैं। केजरीवाल ने इन उदाहरणों के आधार पर मोदी सरकार पर भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

    उन्होंने कहा कि 12 साल के शासन के बाद जनता को यह देखना चाहिए कि उसे क्या हासिल हुआ। केजरीवाल ने दावा किया कि इस दौरान मीडिया और चुनाव व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। उन्होंने राजनीतिक दल बदलने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले विधायक या नेता के पार्टी बदलने को अनैतिक माना जाता था, लेकिन अब बड़े पैमाने पर दल-बदल और सरकारें गिराने की घटनाओं को राजनीतिक रणनीति के रूप में पेश किया जाता है।

    केजरीवाल ने कहा कि विधायकों और सांसदों के दल बदलने तथा सरकारों को गिराने की घटनाओं को ‘चाणक्य नीति’ बताना गलत है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई और इसके लिए पैसे तथा केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों को रणनीति नहीं बल्कि देश के साथ विश्वासघात के रूप में देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त की नौकरी छोड़कर झुग्गियों में काम किया और करीब 10 साल वहां लोगों के बीच बिताए। केजरीवाल ने कहा कि उनका उद्देश्य व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि देश में बदलाव लाना था। उन्होंने कहा कि अगर लोकपाल आंदोलन के समय ही लोकपाल कानून बना दिया जाता तो राजनीतिक दल बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    एसआईआर और मतदाता सूची के मुद्दे पर भी केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में बैठे अधिकारी पूरे देश की मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की शक्ति रखते हैं और बिना पर्याप्त जांच के किसी मतदाता का नाम हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    केजरीवाल ने कहा कि 12 साल किसी भी देश के इतिहास में कम अवधि नहीं होती। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिली सीटों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने लंबे समय में देश को विकास के अलग स्तर पर पहुंचाया जा सकता था। उन्होंने अर्थव्यवस्था, बैंकिंग, रेलवे और विमानन क्षेत्र को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और दावा किया कि कई क्षेत्रों की स्थिति खराब हुई है।

    अंत में केजरीवाल ने कहा कि देश के सामने मौजूद मुद्दों पर जनता को सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में अपेक्षित काम नहीं किया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी नुकसान पहुंचा है।

  • BJP से अलग होने के बाद खुलकर बोले शहजाद पूनावाला: मोदी से राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर रखी अपनी बात

    BJP से अलग होने के बाद खुलकर बोले शहजाद पूनावाला: मोदी से राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर रखी अपनी बात


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद शहजाद पूनावाला एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। एक पॉडकास्ट में उन्होंने भाजपा छोड़ने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा से अलग होने के बाद अब पार्टी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह भाजपा को दूसरी पार्टियों की तुलना में बेहतर मानते हैं।

    वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के साथ इनसाइड आउट पॉडकास्ट में शहजाद पूनावाला ने अपने राजनीतिक सफर और भाजपा छोड़ने के फैसले को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अब जब वह भाजपा में नहीं हैं तो अपनी बात खुलकर रख सकते हैं। इसी दौरान उन्होंने पार्टी के काम करने के तरीके और कुछ राजनीतिक मुद्दों पर अपनी असहमति भी सामने रखी।

    शहजाद पूनावाला ने कहा कि भाजपा छोड़ने के बाद पार्टी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब उन्हें भाजपा की ओर से कोई पैसा नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि भाजपा में अभी भी कुछ जवाबदेही दिखाई देती है। उन्होंने अपने तर्क के तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख किया।

    पूनावाला ने पेपर लीक के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कर्नाटक पंजाब और झारखंड में पेपर लीक से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां संबंधित शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया। उनका कहना था कि अलग अलग राज्यों में सामने आए ऐसे मामलों पर राजनीतिक जवाबदेही का सवाल उठना स्वाभाविक है।

    पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। पूनावाला ने मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग से जुड़ी बात कही। उन्होंने प्रधानमंत्री की तुलना देश के अलग अलग दौर के नेताओं के संदर्भ में करते हुए अपनी राजनीतिक राय रखी। यह टिप्पणी उनके निजी राजनीतिक आकलन के तौर पर सामने आई है।

    राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर भी शहजाद पूनावाला ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 से 2026 के बीच राहुल गांधी में बदलाव आया है और उन्होंने खुद में कुछ सुधार किए हैं। हालांकि उनके मुताबिक अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली में निरंतरता की कमी होने की बात भी कही।

    पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी को कई मुद्दों पर लगता है कि उन्हें सब कुछ पता है। उन्होंने अपने और राहुल गांधी के बीच एक समानता का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने कुछ आंदोलनों और उनके कथित फंडिंग से जुड़े दावों का जिक्र किया।

    शहजाद पूनावाला का यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा से उनके अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा जारी है। जुलाई में भाजपा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे आर्थिक कारणों का उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी के प्रवक्ताओं को वेतन नहीं मिलता है। अब पॉडकास्ट में दिए गए उनके बयान से साफ है कि भाजपा से अलग होने के बावजूद वह राष्ट्रीय राजनीति और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रख रहे हैं।

  • PM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर BJP का बड़ा अभियान: भारत रत्न के सवाल पर नड्डा ने दिया जवाब

    PM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर BJP का बड़ा अभियान: भारत रत्न के सवाल पर नड्डा ने दिया जवाब


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत रत्न दिए जाने की चर्चाओं के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का बयान सामने आया है। भाजपा की ओर से 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान शुरू किया जा रहा है। इसी अभियान को लेकर यह सवाल उठाया गया कि क्या अभियान के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने का कोई प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस सवाल पर जेपी नड्डा ने कहा कि इस संबंध में अभी तक पार्टी के भीतर कोई चर्चा नहीं हुई है।

    बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान नड्डा से प्रधानमंत्री मोदी को भारत रत्न दिए जाने की संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने कहा कि सर्वोच्च नागरिक सम्मान से जुड़े मामलों पर पार्टी उचित समय पर फैसला करती है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है। हालांकि पूछे गए सुझाव को उन्होंने अच्छा बताया। नड्डा के इस बयान के बाद भारत रत्न को लेकर चल रही अटकलों को लेकर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है।

    दरअसल भाजपा 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान 17 अक्टूबर तक चलेगा। पार्टी के अनुसार अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विभिन्न सेवा गतिविधियों का आयोजन करना है। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से देशभर में सफाई अभियान रक्तदान शिविर मेडिकल कैंप और अन्य सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का यह पड़ाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद उन्होंने गुजरात की राजनीति में लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। वर्ष 2014 में भाजपा की लोकसभा चुनाव में जीत के बाद नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वह लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद पर बने रहे।

    प्रधानमंत्री मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। ऐसे में 17 सितंबर को उनका जन्मदिन भी है और इसी दिन भाजपा अपने सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत करने जा रही है। पार्टी की ओर से इस दौरान अलग अलग राज्यों और शहरों में सेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

    नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुई थी। वर्ष 1970 के दशक में वह संघ से जुड़े और बाद में प्रचारक की भूमिका में काम किया। इसके बाद वर्ष 1987 में वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और गुजरात संगठन में जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2001 में उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्होंने कई चुनावों में पार्टी का नेतृत्व किया।

    अब भारत रत्न को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच जेपी नड्डा के बयान से इतना स्पष्ट है कि फिलहाल भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान देने को लेकर किसी चर्चा की पुष्टि नहीं की गई है। वहीं सेवा संकल्प अभियान के जरिए भाजपा प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों को अलग अलग सेवा कार्यक्रमों के माध्यम से चिह्नित करने जा रही है।

  • PM मोदी से मिले असगर अली तो कुछ ही दिनों में बदली तस्वीर: 15 साल पुराने जमीन विवाद में आया नया मोड़

    PM मोदी से मिले असगर अली तो कुछ ही दिनों में बदली तस्वीर: 15 साल पुराने जमीन विवाद में आया नया मोड़


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद मुंबई के पास रहने वाले 81 वर्षीय असगर अली वोरा के करीब 15 साल पुराने जमीन विवाद में नया मोड़ सामने आया है। असगर अली वोरा ने अपनी जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में स्थित उनकी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अब इस मामले में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और जमीन से जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की जानकारी भी दी है।

    असगर अली वोरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात 8 सितंबर को हुई थी। दोनों गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ चुके हैं। मुलाकात के दौरान वोरा ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी जमीन से जुड़े पुराने विवाद को रखा था। उन्होंने बताया था कि उन्होंने वर्ष 1989 में करीब 2810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनके अनुसार वर्ष 2011 में इस जमीन पर कब्जे का विवाद शुरू हुआ था। वोरा का आरोप था कि स्वयम् बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस से जुड़े लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया था।

    वोरा का कहना था कि वह लंबे समय से इस मामले को लेकर अलग अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगा रहे थे। करीब 15 वर्षों तक मामला अधिकारियों के सामने उठाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिला। इसी बीच प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई और उन्होंने अपनी समस्या सीधे उनके सामने रखी। मुलाकात के बाद वोरा ने सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात कही थी।

    मामला सामने आने के बाद महाराष्ट्र मंत्रालय में भी इस विवाद को लेकर बैठक हुई। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में अधिकारियों और दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई। बैठक में असगर अली वोरा और नरेंद्र मेहता के साथ मीरा भायंदर नगर निगम के नगर आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे भी मौजूद रहे।

    बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट के लिए मिली निर्माण अनुमति को सरेंडर करने की बात कही। मेहता के अनुसार उन्होंने यह जमीन वर्ष 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी। जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।

    इस मामले में भाजपा विधायक ने पुलिस कमिश्नर को भी अलग पत्र दिया है। इसमें उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की जानकारी दी। मेहता ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद करीब डेढ़ दशक से जमीन विवाद को लेकर संघर्ष कर रहे असगर अली वोरा को राहत मिलने की उम्मीद बनी है।

    अब इस पूरे मामले में आगे की प्रक्रिया जमीन के कब्जे और निर्माण अनुमति से जुड़े प्रशासनिक कदमों पर निर्भर करेगी। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद विवाद में आए इस बदलाव ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

  • उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी

    उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी


    नई दिल्ली। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों ने रविवार को एक नई ऊंचाई हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद में ऐलान किया कि दोनों देशों के बीच संबंध अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ओली दराजली दोस्तलिक से सम्मानित किए जाने के बाद यह घोषणा की गई। इस मौके पर पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की भावना की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं और अब यह साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध केवल आधुनिक कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती और साझा विरासत जुड़ी हुई है। उन्होंने उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत सम्मान के बजाय भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोस्तलिक का अर्थ दोस्ती है और यही शब्द भारत तथा उज्बेकिस्तान के रिश्तों की वास्तविक भावना को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है।

    पीएम मोदी ने सम्मान को स्वीकार करते हुए उज्बेकिस्तान की जनता सरकार और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों की ऐतिहासिक दोस्ती और साझा विरासत को समर्पित है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।

    भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का नया स्तर दोनों देशों के लिए आर्थिक कूटनीतिक सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान की अहम भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति है और भारत के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत संबंध लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के संबंधों को नई श्रेणी मिलना भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर भारत की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपनी मित्रता को हमेशा मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटेगा और दोनों देशों की दोस्ती को मजबूती से आगे बढ़ाता रहेगा।

    पीएम मोदी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी को ग्लोबल साउथ के व्यापक हितों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज बनने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों का प्रयास होगा कि ग्लोबल साउथ के लोगों के कल्याण और पूरी मानवता के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम किया जाए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सम्मान अपने साथ जिम्मेदारी लेकर आता है। उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक धरती से उन्होंने दोनों देशों की दोस्ती को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों का व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलना इसी निरंतर सहयोग का परिणाम है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक रणनीतिक जरूरतों से जोड़ते हुए यह साझेदारी आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।