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  • उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी

    उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी


    नई दिल्ली। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों ने रविवार को एक नई ऊंचाई हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद में ऐलान किया कि दोनों देशों के बीच संबंध अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ओली दराजली दोस्तलिक से सम्मानित किए जाने के बाद यह घोषणा की गई। इस मौके पर पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की भावना की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं और अब यह साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध केवल आधुनिक कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती और साझा विरासत जुड़ी हुई है। उन्होंने उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत सम्मान के बजाय भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोस्तलिक का अर्थ दोस्ती है और यही शब्द भारत तथा उज्बेकिस्तान के रिश्तों की वास्तविक भावना को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है।

    पीएम मोदी ने सम्मान को स्वीकार करते हुए उज्बेकिस्तान की जनता सरकार और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों की ऐतिहासिक दोस्ती और साझा विरासत को समर्पित है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।

    भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का नया स्तर दोनों देशों के लिए आर्थिक कूटनीतिक सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान की अहम भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति है और भारत के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत संबंध लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के संबंधों को नई श्रेणी मिलना भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर भारत की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपनी मित्रता को हमेशा मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटेगा और दोनों देशों की दोस्ती को मजबूती से आगे बढ़ाता रहेगा।

    पीएम मोदी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी को ग्लोबल साउथ के व्यापक हितों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज बनने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों का प्रयास होगा कि ग्लोबल साउथ के लोगों के कल्याण और पूरी मानवता के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम किया जाए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सम्मान अपने साथ जिम्मेदारी लेकर आता है। उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक धरती से उन्होंने दोनों देशों की दोस्ती को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों का व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलना इसी निरंतर सहयोग का परिणाम है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक रणनीतिक जरूरतों से जोड़ते हुए यह साझेदारी आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

  • ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत

    ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत


    नई दिल्ली। ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को खेलो इंडिया संवाद के दौरान देश के युवा खिलाड़ियों और एथलीटों से संवाद करते हुए भारत के खेल भविष्य को लेकर बड़ा विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं की शक्ति और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है और भारत को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से तैयार करना जरूरी है। पीएम मोदी ने 29 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस का जिक्र करते हुए महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को भी याद किया और कहा कि उनका जीवन देश की खेल परंपरा और प्रेरणा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने खेल को केवल पदक जीतने का माध्यम मानने के बजाय व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि जो खेले वो खिले। उनके मुताबिक मैदान पर खेलने से केवल खिलाड़ी की क्षमता नहीं बढ़ती बल्कि उसके परिवार का गौरव बढ़ता है और उसके स्कूल कॉलेज जिले तथा पूरे राज्य की पहचान मजबूत होती है।

    पीएम मोदी ने कहा कि देश को 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए अभी से ऐसी प्रतिभाओं की तलाश करनी होगी जो आने वाले वर्षों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। उन्होंने 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों के लिए बड़े टैलेंट हंट अभियान की बात कही। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की खेल में रुचि जानना नहीं बल्कि यह पहचानना भी होगा कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए स्वाभाविक रूप से बेहतर है। इसके आधार पर उन्हें प्रशिक्षण देने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    उन्होंने भारत की ओलंपिक भागीदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। पीएम मोदी के अनुसार भारत कई ऐसे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेता जिनमें दुनिया के दूसरे देश पदक जीत रहे हैं। ऐसे में देश को सर्फिंग स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग वॉटर स्पोर्ट्स और विंटर स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशनी होंगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इन खेलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ स्थानीय प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण देने की है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने के लिए काम कर रही है। खेल विश्वविद्यालयों से लेकर प्रशिक्षण केंद्रों तक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उसे शीर्ष स्तर तक पहुंचाने तक सहयोग मिले। उन्होंने खेलों को फिटनेस और बेहतर जीवनशैली से भी जोड़ा और कहा कि खेल युवाओं को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके मुताबिक खेल अब केवल शौक नहीं बल्कि करियर का भी मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

    पीएम मोदी ने पैरा एथलीटों की उपलब्धियों को भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत बताया। उन्होंने शीतल देवी अवनी लेखरा सुमित अंतिल और नितेश कुमार जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और जज्बे से देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि खेल हमें जीत के साथ हार के बाद दोबारा उठना भी सिखाता है और यही खेल भावना जीवन को मजबूत बनाती है। अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से स्क्रीन टाइम कम करने और मैदान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की अहमियत है। उनके मुताबिक खेल के मैदान में हो या समाज के किसी अन्य क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भारत की असली शक्ति है।

  • लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए युवाओं, तकनीक और आत्मनिर्भरता को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं में AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करना है।

    प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस लक्ष्य को देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए ऊंचे संकल्प और उसी स्तर के सामर्थ्य व प्रयास जरूरी हैं। उनके संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा की प्रमुख शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में डेटा सेंटर, AI और क्वांटम तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उभरती तकनीकें भारत के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आ रही हैं। ऐसे में देश को इनोवेशन का केंद्र बनाने के साथ डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास बढ़ाने की जरूरत है।

    तकनीकी विकास के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण को भी प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और तीन प्लांट शुरू होने की जानकारी दी गई। आने वाले सात से आठ वर्षों में और संयंत्र शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। ऐसे में पर्याप्त और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्धता भारत की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के प्रमुख माध्यमों में शामिल किया।

    प्रधानमंत्री ने देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि इस दशक में पांच परमाणु रिएक्टरों के काम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीक और ऊर्जा दोनों की जरूरत बढ़ेगी, इसलिए दोनों क्षेत्रों में क्षमता निर्माण जरूरी है।

    संबोधन में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा, मत्स्य संसाधन, तटीय पर्यटन और तटीय तकनीक के जरिए ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

    प्रधानमंत्री के भाषण में AI प्रशिक्षण से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था तक कई क्षेत्रों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल देने की घोषणा से तकनीकी रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान का संकेत मिला है। इसके साथ ही ऊर्जा और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को भी भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

  • सेशेल्स में दिखी 'कार डिप्लोमेसी', राष्ट्रपति हर्मिनी संग पीएम मोदी की शानदार केमिस्ट्री

    सेशेल्स में दिखी 'कार डिप्लोमेसी', राष्ट्रपति हर्मिनी संग पीएम मोदी की शानदार केमिस्ट्री


    नई दिल्ली/विक्टोरिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सेशेल्स पहुंचे, जहां उनका भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी स्वयं एयरपोर्ट पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच दिखाई दी सहज आत्मीयता और साथ की गई ‘कार यात्रा’ ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे के अहम पलों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ कार में सफर करते हुए दोनों नेता मुस्कुराते हुए बातचीत करते नजर आए। प्रधानमंत्री ने बताया कि वे राष्ट्रपति के साथ सेशेल्स नेशनल बोटैनिकल गार्डन की ओर जा रहे थे। दोनों नेताओं की यह सहज मुलाकात भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक मानी जा रही है।

    एयरपोर्ट पर दिखा भारतीय संस्कृति का रंग

    सेशेल्स एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के दौरान भारतीय संस्कृति की भी शानदार झलक देखने को मिली। गुजराती पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने कच्छ का लोकनृत्य प्रस्तुत कर माहौल को रंगारंग बना दिया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रवासी भारतीय जिस तरह भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को विदेशों में भी जीवंत बनाए हुए हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कलाकारों के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि विदेश में भारतीय संस्कृति का ऐसा जीवंत प्रदर्शन दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करता है।


    भारतीय समुदाय से भी मिले प्रधानमंत्री
    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और उनसे आत्मीय बातचीत की। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के सदस्य एयरपोर्ट पहुंचे थे और उनमें खासा उत्साह देखने को मिला।

    साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर रहेगा फोकस

    प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति हर्मिनी को गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार और करीबी मित्र है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग, समुद्री सुरक्षा, विकास साझेदारी और लोगों के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी।

    प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की यात्रा पर हैं। वह राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरे को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ तथा ‘सागर’ नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सेशेल्स में पीएम मोदी के स्वागत को लेकर भारतीय समुदाय उत्साहित, बोले- ऐतिहासिक होगा यह दौरा

    सेशेल्स में पीएम मोदी के स्वागत को लेकर भारतीय समुदाय उत्साहित, बोले- ऐतिहासिक होगा यह दौरा


    नई दिल्ली/विक्टोरिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय सेशेल्स दौरे को लेकर वहां रह रहे भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री के आगमन से पहले ही प्रवासी भारतीयों ने भव्य स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली हैं। भारतीय समुदाय का मानना है कि यह दौरा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि भारत और सेशेल्स के बीच सांस्कृतिक तथा सामाजिक रिश्तों को भी नई ऊंचाई देने वाला साबित होगा।

    आईएएनएस से बातचीत में सेशेल्स में पिछले 15 वर्षों से रह रहे प्रवासी भारतीय भरत ईरानी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए भारतीय समुदाय ने विशेष तैयारियां की हैं। उन्होंने कहा कि कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की जा सके। उनके अनुसार पूरे भारतीय समुदाय में उत्साह का माहौल है और इस खुशी को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है।

    एक अन्य प्रवासी भारतीय ने बताया कि वह वर्ष 2019 से सेशेल्स में रह रहे हैं और पहली बार उन्हें किसी भारतीय प्रधानमंत्री के स्वागत का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद गौरव और सम्मान का क्षण है। उनका विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के बाद भारत और सेशेल्स के संबंध पहले से अधिक मजबूत होंगे और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।

    भारतीय मूल के एक अन्य नागरिक ने भी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें विदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने और उनका स्वागत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इसे अपने जीवन का यादगार पल बताया और कहा कि यह दौरा भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है।

    उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2016 से सेशेल्स में रह रहे हैं और यहां के लोग भारतीय समुदाय का पूरा सम्मान करते हैं। स्थानीय समाज भारतीय संस्कृति और परंपराओं को अपनाने का भी प्रयास करता है, जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच आत्मीयता और विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

    प्रवासी भारतीयों ने भारत और सेशेल्स के बीच सीधी हवाई सेवा शुरू करने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि डायरेक्ट फ्लाइट शुरू होने से पर्यटन, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को नई गति मिलेगी। इससे दोनों देशों के आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

    भारतीय समुदाय का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के नेतृत्व के बीच पहले से ही मजबूत संबंध हैं। सेशेल्स के राष्ट्रपति भी भारत का दौरा कर चुके हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी और मजबूत करेगी।

    प्रवासी भारतीयों ने उम्मीद जताई कि यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। उनका कहना है कि दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध इस यात्रा के बाद और अधिक प्रगाढ़ होंगे तथा भारतीय समुदाय को भी इससे नई पहचान और सम्मान मिलेगा।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, अगले साल ट्रंप के भारत दौरे की तैयारी शुरू

    भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, अगले साल ट्रंप के भारत दौरे की तैयारी शुरू


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2027 की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन इस संभावित यात्रा की तैयारियों पर काम कर रहा है और इसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में मार्को रुबियो ने कहा कि वह स्वयं भी इस वर्ष के अंत से पहले भारत आने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों की समीक्षा करना और दोनों देशों के बीच जारी रणनीतिक एवं आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी तैयारियां तय समय पर पूरी होती हैं तो अगले वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत की यात्रा कर सकते हैं।

    रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद लगातार जारी है। उनके अनुसार भारत और अमेरिका के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में हैं तथा हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    उन्होंने हाल ही में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। रुबियो के अनुसार दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही और इससे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत संबंध हैं जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती प्रदान करते हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता पर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने बताया कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। बातचीत अंतिम चरण में है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उनका मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा तथा निवेश और व्यापार के नए अवसर खोलेगा।

    रुबियो ने क्वाड देशों के सहयोग को भी भविष्य की वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति स्थिरता और सुरक्षित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा उभरती प्रौद्योगिकी मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी चारों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

    राष्ट्रपति ट्रंप का पिछला भारत दौरा फरवरी 2020 में हुआ था जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहमदाबाद में आयोजित नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में भाग लिया था। इसके बाद नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं हुई थीं। उस यात्रा के बाद भी दोनों नेताओं के बीच नियमित संवाद जारी रहा और रक्षा तकनीक ऊर्जा व्यापार तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत होता गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप का प्रस्तावित भारत दौरा तय समय पर होता है तो यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं होगी बल्कि भारत अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है। व्यापार समझौते से लेकर रक्षा सहयोग और वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों तक कई महत्वपूर्ण विषय इस यात्रा के केंद्र में रहने की संभावना है।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम चरण की बातचीत जारी

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम चरण की बातचीत जारी


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। उनका कहना है कि कानूनी मसौदे की भाषा तय होते ही यह समझौता अगले कुछ सप्ताह या महीनों में औपचारिक रूप से पूरा हो सकता है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में सर्जियो गोर ने कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ हुई बैठकों में उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इन वार्ताओं को बेहद सकारात्मक और सार्थक बताते हुए कहा कि अब बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष समझौते की भाषा तथा शेष तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

    गोर ने इस प्रक्रिया की तुलना अन्य वैश्विक व्यापार समझौतों से करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच यह वार्ता अपेक्षाकृत बहुत तेजी से आगे बढ़ी है। उन्होंने बताया कि इस समझौते पर करीब डेढ़ वर्ष से काम चल रहा है जबकि दुनिया के कई बड़े व्यापार समझौतों को पूरा होने में दो दशक तक का समय लग चुका है। उनके अनुसार दोनों देशों ने कम समय में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है और यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

    हालांकि उन्होंने समझौते के संभावित प्रावधानों या संवेदनशील विषयों पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया लेकिन इतना जरूर कहा कि दोनों सरकारें ऐसे समाधान की दिशा में काम कर रही हैं जिससे भारत और अमेरिका दोनों को समान रूप से लाभ मिले। उन्होंने कहा कि जब साझा हितों पर सहमति बन जाती है तभी एक सफल व्यापार समझौता संभव हो पाता है।

    सर्जियो गोर ने दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वर्षों से मजबूत व्यक्तिगत संबंध रहे हैं और यही रिश्ते भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने के लिए उत्सुक हैं और प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण स्वीकार करने की इच्छा भी जता चुके हैं। हालांकि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के व्यस्त कार्यक्रम के कारण यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन भारत उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बना हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं बल्कि रक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा, निवेश और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देश आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और निवेश के अवसरों को भी विस्तार देने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।

    भारत और अमेरिका फिलहाल व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच आसान बनाना, शुल्क संबंधी बाधाओं को कम करना, निवेश को प्रोत्साहित करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देना है। माना जा रहा है कि इस शुरुआती समझौते के बाद दोनों देश भविष्य में एक व्यापक व्यापार ढांचे की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे, जिससे दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।

  • शर्मिष्ठा मुखर्जी का खुलासा, प्रणब मुखर्जी ने 2014 के जनादेश को बताया था भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़

    शर्मिष्ठा मुखर्जी का खुलासा, प्रणब मुखर्जी ने 2014 के जनादेश को बताया था भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़


    नई दिल्ली । पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने एक लेख में अपने दिवंगत पिता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रसंग साझा करते हुए दावा किया है कि प्रणब मुखर्जी का मानना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जनता से प्रत्यक्ष जनादेश प्राप्त हुआ। उनके अनुसार वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था जिसने चुनावी राजनीति की दिशा बदल दी।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान प्रणब मुखर्जी ने मोदी से चुनाव परिणाम का विश्लेषण पूछा। मोदी ने कहा कि लगभग तीन दशकों बाद किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है। इस पर प्रणब मुखर्जी ने उनसे पूछा कि इसके अलावा और क्या विशेष बात रही। जब मोदी ने कोई उत्तर नहीं दिया तो उन्होंने स्वयं कहा कि यह पहला अवसर था जब देश की जनता ने औपचारिक रूप से घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में किसी नेता को स्पष्ट जनादेश दिया।

    लेख में दावा किया गया है कि प्रणब मुखर्जी का मानना था कि इससे पहले देश के प्रधानमंत्री या तो चुनाव के बाद पार्टी द्वारा चुने जाते थे या फिर गठबंधन की परिस्थितियों में सर्वसम्मति से तय किए जाते थे। जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक किसी भी प्रधानमंत्री को चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में जनता से प्रत्यक्ष समर्थन नहीं मिला था। वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को पहले ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था और मतदाताओं ने उसी नेतृत्व को ध्यान में रखकर मतदान किया।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने यह भी लिखा कि उनके पिता का मानना था कि वर्ष 2014 का चुनाव भारतीय संसदीय लोकतंत्र में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत था जहां मतदाताओं ने लगभग राष्ट्रपति प्रणाली जैसी शैली में एक व्यक्ति के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने उल्लेख किया कि नरेंद्र मोदी उस समय राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे और पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

    लेख में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का भी उल्लेख किया गया है। शर्मिष्ठा ने लिखा कि डॉ. सिंह को कांग्रेस नेतृत्व ने प्रधानमंत्री चुना था जबकि पी. वी. नरसिम्हा राव और एच. डी. देवेगौड़ा भी प्रधानमंत्री बनने के समय संसद के सदस्य नहीं थे। उनके अनुसार वर्ष 2014 का जनादेश इन सभी उदाहरणों से अलग था क्योंकि उसमें मतदाताओं ने सीधे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सफलता के पीछे मजबूत संगठन, जमीनी स्तर पर निरंतर काम, विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच, रणनीतिक सुधार और प्रभावी नेतृत्व को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने लिखा कि इन सभी कारकों ने भाजपा को लगातार चुनाव जीतने वाली राजनीतिक ताकत बना दिया है।

    उन्होंने अपने पश्चिम बंगाल के अनुभव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान कई मतदाता यह कहते थे कि वे भाजपा नहीं बल्कि मोदी को वोट दे रहे हैं। जब उन्हें याद दिलाया जाता था कि यह विधानसभा चुनाव है तो उनका जवाब होता था कि दोनों एक ही बात हैं। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत प्रभाव पार्टी की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

    लेख के अंत में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजादी के बाद भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि लोकतंत्र में उनकी नीतियों पर मतभेद स्वाभाविक हैं लेकिन उनके जनसंपर्क, नेतृत्व क्षमता और जनता के साथ मजबूत जुड़ाव को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनता से मिले इस व्यापक जनादेश के अनुरूप देश को आगे बढ़ाने की दिशा में यह नेतृत्व अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेगा।

  • भारत-ब्रिटेन रिश्तों को नई मजबूती देने पर पीयूष गोयल सम्मानित, UK-India Awards 2026 में मिला विशेष अवॉर्ड

    भारत-ब्रिटेन रिश्तों को नई मजबूती देने पर पीयूष गोयल सम्मानित, UK-India Awards 2026 में मिला विशेष अवॉर्ड


    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए लंदन में आयोजित यूके-इंडिया अवॉर्ड्स 2026 में ‘भारत-ब्रिटेन संबंधों को बेहतर बनाने में उत्कृष्ट नेतृत्व’ के विशेष सम्मान से नवाजा गया।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद 300 से अधिक नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देशों की साझेदारी का सबसे बेहतरीन दौर अभी आना बाकी है।

    उन्होंने बताया कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। उनके अनुसार यह समझौता व्यापार, निवेश, नवाचार और आर्थिक सहयोग को नई गति देगा तथा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाएगा।

    पीयूष गोयल ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने सरकार, उद्योग, शिक्षा, संस्कृति और भारतीय प्रवासी समुदाय के माध्यम से भारत और ब्रिटेन के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया है।

    उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है। यह विकास यात्रा व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, नवाचार और उभरते क्षेत्रों में भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग के अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने समारोह में सम्मानित अन्य विजेताओं को भी बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके प्रयासों से भारत-ब्रिटेन रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार, मजबूत होते कारोबारी संबंध और लोगों के बीच गहरे होते संपर्क भविष्य में सहयोग के नए आयाम स्थापित करेंगे।

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि “भारत-ब्रिटेन साझेदारी की सबसे बेहतरीन पारी अभी बाकी है।” यह संदेश दोनों देशों के बीच भविष्य में और व्यापक आर्थिक, तकनीकी तथा रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है।

  • भारत-जापान रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, पीएम साने ताकाइची के पहले भारत दौरे पर होगी अहम वार्ता

    भारत-जापान रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, पीएम साने ताकाइची के पहले भारत दौरे पर होगी अहम वार्ता


    नई दिल्ली । भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1 से 3 जुलाई, 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा साने ताकाइची का पहला आधिकारिक भारत दौरा होगा। इस दौरान वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी।

    नई दिल्ली में आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करने, रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर देगा। बैठक में आर्थिक सहयोग, निवेश, रक्षा, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त 2025 में जापान गए थे, जहां उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती देने की प्रतिबद्धता जताई थी।

    जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए पांच सूत्रीय रोडमैप भी प्रस्तुत किया था। उन्होंने निवेश, विनिर्माण, नवाचार और तकनीकी सहयोग को दोनों देशों के भविष्य के विकास का आधार बताया था।

    प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौरान जापान की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नुकागा फुकुशिरो और जापानी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी। इसके अलावा उन्होंने जापान के विभिन्न प्रांतों के राज्यपालों के साथ बैठक कर क्षेत्रीय सहयोग और निवेश के अवसरों पर चर्चा की थी।

    जापान दौरे की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग रही थी। प्रधानमंत्री मोदी और शिगेरु इशिबा ने जापान के मियागी प्रांत स्थित Tokyo Electron Miyagi Limited का दौरा किया था, जहां उन्हें उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण तकनीकों और वैश्विक सप्लाई चेन में कंपनी की भूमिका की जानकारी दी गई थी।

    इस यात्रा के बाद भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। दोनों देशों ने सुरक्षित, भरोसेमंद और लचीली वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन विकसित करने तथा औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प भी दोहराया था।

    साने ताकाइची की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और जापान रक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल इकोनॉमी, हरित ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूती मिलेगी।