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  • सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी से की भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत

    सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी से की भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत


    भोपाल/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट की और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर सीएम ने पीएम मोदी को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि विकास किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में कई पहलें की जा रही हैं। पीएम मोदी ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए मार्गदर्शन और आशीर्वाद दिया।

    सीएम डॉ. यादव ने कहा “प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के बताए मार्ग के अनुसार चार श्रेणियों किसान महिला गरीब और युवा के लिए काम कर रही है। करीब 16 विभागों को जोड़कर कृषि पशुपालन मछली पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में अच्छी पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे काम को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया है।

    नई दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने संसद भवन का भ्रमण भी किया और विभिन्न सांसदों से मुलाकात कर मध्यप्रदेश के विकास केंद्र राज्य समन्वय और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता के हित में विकास कार्यों को और गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।  सीएम ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वय से प्रदेश में निवेश रोजगार और किसान कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल होंगी।

  • दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सीएम मोहन यादव, मध्यप्रदेश की योजनाओं और किसान कल्याण वर्ष पर हुई चर्चा

    दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सीएम मोहन यादव, मध्यप्रदेश की योजनाओं और किसान कल्याण वर्ष पर हुई चर्चा



    नई दिल्ली। Mohan Yadav ने सोमवार को नई दिल्ली में Narendra Modi से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की विकास योजनाओं और किसान कल्याण वर्ष के तहत चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।

    सीएम मोहन यादव ने मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री से भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत चल रही गतिविधियों और राज्य की प्रगति से प्रधानमंत्री को अवगत कराया गया।

    संसद परिसर में सांसदों के साथ मीडिया से चर्चा
    मुलाकात के बाद संसद भवन परिसर में मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के सांसदों के साथ मीडिया से भी चर्चा की। इस दौरान उनके साथ Shankar Lalwani, Rahul Singh Lodhi, Ashish Dubey और Rajesh Mishra मौजूद रहे।

    चार वर्गों के लिए काम कर रही सरकार
    सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए चार प्रमुख वर्ग – किसान, महिला, गरीब और युवा के कल्याण के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के तहत करीब 16 विभागों जैसे कृषि, पशुपालन, मछली पालन और बागवानी को जोड़कर योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए आगे भी मार्गदर्शन और आशीर्वाद दिया है, जिससे भविष्य में बेहतर परिणाम मिलेंगे।

  • संसद में तीखी टक्कर: राहुल गांधी का पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ आरोप, भाजपा ने किया जोरदार पलटवार

    संसद में तीखी टक्कर: राहुल गांधी का पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ आरोप, भाजपा ने किया जोरदार पलटवार


    नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब स्पीकर Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बीच विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने आ गए। बहस के दौरान कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने से बार-बार रोका जाता है और उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर “कॉम्प्रोमाइज्ड” होने का आरोप लगाया।

    राहुल गांधी ने कहा कि यह चर्चा केवल स्पीकर के पद तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र और संसद की भूमिका से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि कई मौकों पर उनका नाम लिया गया, लेकिन जब भी वह अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो उन्हें रोक दिया गया। राहुल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें लगातार टोकने की कोशिश की जाती है।

    राहुल के बयान पर भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का भारत कभी “कॉम्प्रोमाइज्ड” नहीं हो सकता। प्रसाद ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सदन में अनावश्यक विवाद खड़ा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना चाहता है।

    दरअसल लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार से चर्चा चल रही है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्ष नहीं हैं और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी को करीब 20 बार बोलने से रोका गया।

    वहीं संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ओम बिरला पूरी निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सांसद पहले स्पीकर के चैंबर में घुस गए थे और यदि जरूरत पड़ी तो इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सार्वजनिक किया जा सकता है।

    बहस के दौरान कांग्रेस नेता K. C. Venugopal ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार देश की संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण बहस के दौरान सदन में मौजूद क्यों नहीं हैं।

    स्पीकर के खिलाफ लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में लंबी बहस जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है।

    कीवर्ड: राहुल गांधी, ओम बिरला, लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव, रविशंकर प्रसाद, संसद बहस, नरेंद्र मोदी

  • विपक्ष ने देश को गहरी चोट पहुंचाई, लेकिन मोदी सरकार ने भारत को मजबूत बनाया: केशव प्रसाद मौर्य

    विपक्ष ने देश को गहरी चोट पहुंचाई, लेकिन मोदी सरकार ने भारत को मजबूत बनाया: केशव प्रसाद मौर्य

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्रीकेशव प्रसाद मौर्य ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने देश को गहरी चोट पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मुद्दों पर विपक्ष को देश के साथ खड़ा होना चाहिए वहां वह लगातार सरकार पर आरोप लगाने और भ्रम फैलाने का काम करता रहा है।

    वाराणसी के सर्किट हाउस में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मौर्य ने कहा कि देश ने कई चुनौतियों का सामना किया है लेकिन विपक्ष ने हमेशा सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय सरकार को घेरने की राजनीति की है। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा भारत की जमीन पर कब्जा करने और कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान के नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दों के बावजूद विपक्ष सरकार पर आरोप लगाने से बाज नहीं आता।

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देशहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीति करने से बचना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य से विपक्षी दलों ने इन मुद्दों को भी राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इससे देश की छवि और एकता को नुकसान पहुंचता है।

    मौर्य ने विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस भाषा और शैली में वे सरकार की आलोचना करते हैं वह किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देती। उनका कहना था कि लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सभी को है लेकिन आलोचना तथ्यों और मर्यादा के साथ होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश ने सुरक्षा विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में भारत आज पहले से अधिक मजबूत और सुरक्षित हुआ है।

    मौर्य ने कहा कि मोदी सरकार ने देश की सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया गया है। साथ ही सरकार ने विकास को भी समान महत्व देते हुए बुनियादी ढांचे रोजगार निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से देश को आगे बढ़ाने का काम किया है।

    उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक मंच पर एक मजबूत और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। दुनिया के कई देश भारत के साथ साझेदारी बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं और यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और नीतियों का परिणाम है। उपमुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भी देश इसी तरह तेजी से प्रगति करेगा और भारत दुनिया की अग्रणी शक्तियों में शामिल होगा।

  • पीएम मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब से की मुलाकात व्यापार तकनीक और रणनीतिक साझेदारी पर जोर

    पीएम मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब से की मुलाकात व्यापार तकनीक और रणनीतिक साझेदारी पर जोर

    नई दिल्ली :प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित Hyderabad House में Alexander Stubb के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और Finland के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ व्यापार निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों यानी एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए।

    बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि फिनलैंड के राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए अलेक्जेंडर स्टब का भारत में स्वागत करना उनके लिए सम्मान और खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि स्टब जैसे अनुभवी नेता का इस वर्ष आयोजित होने वाले Raisina Dialogue का मुख्य अतिथि बनना भी भारत के लिए गर्व की बात है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। Ukraine से लेकर West Asia तक कई क्षेत्रों में तनाव देखा जा रहा है। ऐसे समय में भारत और यूरोप के देशों के बीच सहयोग का एक नया दौर शुरू हो रहा है जो वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

    उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ता सहयोग साझा विकास और समृद्धि के नए अवसर पैदा कर रहा है। वर्ष 2026 की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता भी हुआ है जिससे व्यापार निवेश और तकनीकी सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में भारत और फिनलैंड महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि Nokia के मोबाइल फोन और टेलीकॉम नेटवर्क ने करोड़ों भारतीयों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा फिनलैंड के आर्किटेक्ट्स के सहयोग से Chenab River पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज बनाया गया है।

    उन्होंने यह भी बताया कि फिनलैंड के सहयोग से Numaligarh में दुनिया की सबसे बड़ी बायो एथेनॉल रिफाइनरी परियोजनाओं में से एक स्थापित की गई है। इन परियोजनाओं से दोनों देशों के बीच तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा मिली है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति स्टब की इस यात्रा से भारत और फिनलैंड के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का नया स्वरूप मिलेगा। यह सहयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर 6जी टेलीकॉम तकनीक तक और क्लीन एनर्जी से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे हाईटेक क्षेत्रों तक विस्तारित होगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत और फिनलैंड दोनों ही अंतरराष्ट्रीय कानून संवाद और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। दोनों देशों का मानना है कि किसी भी वैश्विक विवाद का समाधान केवल सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि बातचीत और सहयोग से ही संभव है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चाहे यूक्रेन का संकट हो या पश्चिम एशिया का तनाव भारत और फिनलैंड शांति और स्थिरता के हर प्रयास का समर्थन करते रहेंगे और आतंकवाद के सभी रूपों को समाप्त करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

  • खाली कुर्सियों से कैसे होगा किसान कल्याण, जीतू पटवारी का पीएम मोदी को पत्र, MP के कृषि विभाग में हजारों पद खाली

    खाली कुर्सियों से कैसे होगा किसान कल्याण, जीतू पटवारी का पीएम मोदी को पत्र, MP के कृषि विभाग में हजारों पद खाली


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में कृषि व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर राज्य के कृषि और उससे जुड़े विभागों में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाया है। पटवारी ने मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित किए जाने पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है, तब केवल घोषणाओं से किसानों का भला संभव नहीं है।

    अपने पत्र में पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकारी उदासीनता के कारण प्रदेश का कृषि तंत्र कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए जो प्रशासनिक ढांचा होना चाहिए, वह ही अधूरा पड़ा है। ऐसे में “कृषक कल्याण वर्ष” जैसी घोषणाएं जमीन पर प्रभावी साबित नहीं होंगी।

    पटवारी ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के कृषि विभाग में कुल 14,537 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 8,468 पद खाली पड़े हैं। यानी विभाग का लगभग 60 प्रतिशत स्टाफ मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पद रिक्त होने से किसानों तक सरकारी योजनाएं सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं।

    उन्होंने खास तौर पर ‘ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी’ जैसे अहम पदों का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी कमी के कारण खेत स्तर पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। साथ ही फसल नुकसान का सर्वे, मृदा परीक्षण और Soil Health Card Scheme जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित हो रहा है।

    पटवारी ने अपने पत्र में कृषि से जुड़े अन्य विभागों की स्थिति भी सामने रखी।

    उनके अनुसार उद्यानिकी विभाग में 3,079 पदों में से 1,459 पद खाली हैं, जो लगभग 47 प्रतिशत हैं। मत्स्य पालन विभाग में 1,290 पदों में से 722 पद रिक्त हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग में 7,992 पदों में से 1,797 पद खाली बताए गए हैं। इसके अलावा खाद्य विभाग के जिला कार्यालयों में 598 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 245 कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं कृषि अभियांत्रिकी विभाग में 1,065 पदों में से 557 पद खाली पड़े हैं।

    इस मुद्दे पर पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चौहान लंबे समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए संस्थागत ढांचे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

    पटवारी के अनुसार वर्तमान सरकार भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए घोषणाएं कर रही है, जबकि जमीनी व्यवस्था कमजोर बनी हुई है।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि मध्य प्रदेश के कृषि और उससे जुड़े विभागों में खाली पदों की तत्काल समीक्षा कराई जाए और राज्य सरकार को जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर संस्थागत क्षमता बढ़ाने की राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने की भी मांग की।

    पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि मध्य प्रदेश का किसान पहले ही मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। ऐसे में सरकारी विभागों में खाली पदों की वजह से उसे आवश्यक सेवाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी और किसानों के हित में ठोस कदम उठाएगी।

    पटवारी द्वारा भेजे गए इस पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी भेजी गई है। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में कृषि व्यवस्था और सरकारी भर्तियों को लेकर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • भारत कनाडा साझेदारी का नया अध्याय: यूरेनियम सप्लाई पर समझौता, रक्षा और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा

    भारत कनाडा साझेदारी का नया अध्याय: यूरेनियम सप्लाई पर समझौता, रक्षा और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा


    नई दिल्ली । भारत और कनाडा के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को हैदराबाद हाउस दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात हुई । इस बैठक में भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति रक्षा ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर मुहर लगी।

    यूरेनियम सप्लाई समझौता

    पीएम कार्नी के दौरे का मुख्य उद्देश्य 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 अरब डॉलर है। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है और भारत अपनी तेजी से बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। 2013 में लागू भारत-कनाडा न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट के बाद यह कदम दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

    व्यापार और निवेश में बढ़ावा

    बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत-कनाडा के बीच 50 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य है। कृषि कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देने के साथ ही भारत में पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग

    दोनो देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योगों समुद्री डोमेन जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए भारत-कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

    नवाचार और तकनीकी सहयोग

    पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों की नवाचार साझेदारी वैश्विक समाधानों को जन्म देगी। AI क्वांटम सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स पर हस्ताक्षरित समझौता आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन मजबूत करेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स और उद्योगों को जोड़ने के प्रयास भी तेज होंगे।

    ऊर्जा और पर्यावरण

    ऊर्जा क्षेत्र में अगली पीढ़ी की साझेदारी स्थापित की जाएगी जिसमें हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण पर विशेष जोर रहेगा। पीएम मोदी ने कहा “भारत-कनाडा की साझेदारी दुनिया को नए वैश्विक समाधान देने में सक्षम होगी। यह सहयोग केवल ऊर्जा या रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि नवाचार तकनीकी और वैश्विक विकास के कई क्षेत्रों को छूएगा।

  • कैसे नक्सल मुक्त हुआ मध्य प्रदेश? DGP कैलाश मकवाना ने खोला रणनीति का राज, इन नेताओं को दिया श्रेय

    कैसे नक्सल मुक्त हुआ मध्य प्रदेश? DGP कैलाश मकवाना ने खोला रणनीति का राज, इन नेताओं को दिया श्रेय


    इंदौर। मध्य प्रदेश को नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद पुलिस महानिदेशक DGP लाश मकवाना का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस उपलब्धि को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देश और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित अभियान का परिणाम बताया।

    डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सलवाद लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस रणनीतिक ढंग से कार्रवाई की गई उससे प्रदेश में नक्सल नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में सफलता मिली। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah की ओर से स्पष्ट निर्देश थे कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करना है। इन्हीं निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में अभियान को तेज किया गया।

    डीजीपी ने यह भी बताया कि जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई तब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया। लगातार सर्च ऑपरेशन संवेदनशील इलाकों में विशेष बल की तैनाती खुफिया तंत्र की मजबूती और तकनीक आधारित निगरानी से नक्सल गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार किया गया।

    कैलाश मकवाना के अनुसार इस सफलता के पीछे केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं बल्कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल भी अहम रहा। वन क्षेत्र सीमावर्ती जिलों और पहले से चिन्हित संवेदनशील इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन चलाए गए। स्थानीय स्तर पर विश्वास बहाली के प्रयास ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने भी नक्सल संगठनों की जड़ें कमजोर कीं।

    उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सुरक्षा बलों की नहीं बल्कि पूरे शासन-प्रशासन की सामूहिक कोशिश का परिणाम है। प्रदेश में जिन क्षेत्रों को पहले नक्सल प्रभावित माना जाता था वहां अब शांति का वातावरण है और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि अब फोकस केवल नक्सल गतिविधियों को खत्म करने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि शांति और विकास को स्थायी बनाए रखने पर रहेगा। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी सामुदायिक पुलिसिंग और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोबारा किसी भी प्रकार की उग्र गतिविधियां पनपने न पाएं।

  • शर्म की असली वजह क्या? एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा वार

    शर्म की असली वजह क्या? एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा वार


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए सियासी बहस को नई धार दे दी है। एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अर्धनग्न प्रदर्शन को प्रधानमंत्री द्वारा शर्मनाक बताए जाने पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया और कहा कि असली शर्म प्रदर्शन नहीं बल्कि उन मामलों पर सरकार की चुप्पी है जिनमें गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री उनके एक मंत्री और एक करीबी सहयोगी का नाम सामने आना चिंता का विषय है और यही वास्तव में शर्म की बात है।

    राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा मोदी जी आप शर्म की बात करते हो? शर्म की बात यह है कि एपस्टीन फाइल्स में आपका आपके मंत्री और आपके मित्र का नाम साथ में आ रहा है। ऐसे घिनौने अपराधी के साथ नाम जुड़ना ही शर्मनाक है। उन्होंने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस समझौते से देश के किसानों टेक्सटाइल उद्योग और डेटा सुरक्षा को नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक सरकार ने देशहित से समझौता किया है और इन मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    राहुल जिस संदर्भ का जिक्र कर रहे हैं उसमें केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी चर्चा में आया था। हालांकि पुरी ने स्पष्ट किया है कि उनके संबंध केवल आधिकारिक और कार्यगत थे। इसी प्रकरण में प्रधानमंत्री मोदी के एक विदेशी दौरे का उल्लेख भी सामने आने की बात कही गई थी जिस पर संसद में पहले भी हंगामा हो चुका है। अब राहुल गांधी ने उसी मुद्दे को फिर से उठाकर सरकार पर नैतिक जवाबदेही का दबाव बनाने की कोशिश की है।

    इसके साथ ही राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी पर अमेरिका में चल रहे मामलों को लेकर भी प्रधानमंत्री को घेरा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक कारोबारी तक सीमित नहीं है बल्कि सत्ता और पूंजी के रिश्तों से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 महीनों से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई जो अपने आप में कई संदेह पैदा करती है। राहुल ने अनिल अंबानी का नाम लेते हुए भी सरकार और बड़े उद्योगपतियों की नजदीकियों पर सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी तथा देशहित के मुद्दों पर आवाज उठाती रहेगी।

    यह पूरा विवाद नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट से जुड़ा है जहां कांग्रेस यूथ कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री मोदी ने मेरठ की सभा में कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने इसे कांग्रेस की गंदी और शर्म वाली राजनीति बताते हुए कहा था कि देश की सबसे पुरानी पार्टी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब कर रही है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया।

    कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना केवल सत्तापक्ष तक सीमित नहीं रही। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस तरह की हरकत से देश की छवि धूमिल होती है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए। इसके बावजूद कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं का समर्थन किया और इसे लोकतांत्रिक विरोध बताया।

    सियासत के इस तीखे दौर में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो चुका है। एक ओर प्रधानमंत्री कांग्रेस की राजनीति को शर्मनाक बता रहे हैं तो दूसरी ओर राहुल गांधी सरकार की नीतियों अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कारोबारी गठजोड़ पर सवाल उठाकर जवाब मांग रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और चुनावी मंचों पर और अधिक गूंजने की संभावना है।

  • राज्यपाल पटेल: मन की बात जन भावनाओं का सम्मान करने और पुलिस सेवा की संवेदनशीलता की सीख देती है

    राज्यपाल पटेल: मन की बात जन भावनाओं का सम्मान करने और पुलिस सेवा की संवेदनशीलता की सीख देती है


    भोपाल । भोपाल में रविवार को मंगुभाई पटेल ने मन की बात कार्यक्रम को केवल एक रेडियो प्रसारण न मानने की अपील की और उसे जन‑भावनाओं की जीवंत गाथा बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के कोने‑कोने में हो रहे सकारात्मक बदलाव और आम नागरिकों की भागीदारी की प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाता है, जिससे समाज की नब्ज को समझने और जन‑भावनाओं का सम्मान करने की सीख मिलती है। राज्यपाल ने यह बात प्रशिक्षणाधीन पुलिस अधिकारियों और नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए कही।

    उन्होंने कहा कि पुलिस का जनता से सीधा जुड़ाव होता है, इसलिए मन की बात जैसे कार्यक्रम को केवल औपचारिकता न मानकर नियमित रूप से सुनना चाहिए, क्योंकि इससे लोक‑कल्याण की भावना, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस कार्यक्रम के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में भी समाज के लिए उदाहरण पैदा करने वाले गुमनाम नायकों की कहानियों को साझा करते हैं, जो पुलिस बल को भी अपनी सेवा‑परिवार के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाने में मदद करती हैं।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रशिक्षण का समय भविष्य की नींव है और इस दौरान सीखी गई बातें और प्रधानमंत्री के विचार पुलिस अधिकारियों के करियर में मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस सेवा में शालीनता और तत्परता होना चाहिए, ताकि पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आते समय सुरक्षित महसूस करे। साथ ही पुलिस में अनुशासन के साथ सहानुभूति का होना आवश्यक है, और मन की बात कार्यक्रम हमें मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो वर्दी को केवल सत्ता का प्रतीक नहीं बल्कि समाज सेवा का संकल्प बनाता है।

    राज्यपाल ने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे देश‑भक्ति और जन‑सेवा की गौरवशाली परंपरा को सशक्त, अनुशासित और मानवीय पुलिस बल के रूप में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि मन की बात में प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता, जल संरक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों पर दिया गया मार्गदर्शन उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में लागू करना चाहिए। यह कार्यक्रम आज के सामाजिक और तकनीकी युग में पुलिस सेवा को लोक‑कल्याण की भावना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

    राज्यपाल ने प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों को कहा कि वे अपने आप को केवल ड्यूटी तक सीमित न रखें, बल्कि समाज में चेंज मेकर के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास करें। उन्होंने बताया कि मन की बात में देश के अलग‑अलग हिस्सों से आने वाली सफल कहानियों से यह स्पष्ट होता है कि व्यक्ति का छोटा सा प्रयास भी बड़े परिवर्तन ला सकता है। इस संदेश को अपनाकर पुलिस विभाग समाज में मित्र और रक्षक की छवि को और मजबूत कर सकता है।

    कार्यक्रम की शुरुआत में विशेष पुलिस महानिदेशक और मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण के अनुभवों को नव आरक्षकों ने साझा किया। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक और अकादमी के सहायक निदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उपस्थित रही।