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  • बंगाल चुनाव में BJP की जीत पर नॉर्वे के पूर्व मंत्री का बड़ा बयान बोले- क्या शानदार बदला लिया है, मोदी की जमकर तारीफ

    बंगाल चुनाव में BJP की जीत पर नॉर्वे के पूर्व मंत्री का बड़ा बयान बोले- क्या शानदार बदला लिया है, मोदी की जमकर तारीफ



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत पर नॉर्वे के पूर्व मंत्री और राजनयिक एरिक सोल्हेम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बीजेपी की यह जीत “शानदार बदला” है।

    2024 लोकसभा चुनाव से की तुलना
    सोल्हेम ने अपने बयान में कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिमी मीडिया ने बीजेपी के बहुमत से नीचे रहने को “मोदी युग के अंत की शुरुआत” बताया था। लेकिन इसके बाद पार्टी ने कई राज्यों ओडिशा, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, असम और अब पश्चिम बंगाल में मजबूत वापसी की है।

    बंगाल की जीत को बताया लोकतंत्र की ताकत
    उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में 90% से ज्यादा मतदान होना भारत के लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है। सोल्हेम के अनुसार, भारत में चुनावी भागीदारी यूरोप और अमेरिका के कई देशों से कहीं अधिक है, जो इसे एक मजबूत लोकतांत्रिक उदाहरण बनाता है।

    भारत के लोकतंत्र की अंतरराष्ट्रीय सराहना
    एरिक सोल्हेम ने कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए एक मिसाल है और पश्चिमी देशों को इसे और बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है।

    तमिलनाडु राजनीति पर भी टिप्पणी
    उन्होंने तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी TVK के प्रदर्शन को भी राज्य की राजनीति में संभावित बड़ा बदलाव बताया।

  • भारत-वियतनाम रिश्तों को नई रफ्तार: पीएम मोदी-तो लाम की बैठक में 13 बड़े समझौते, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत

    भारत-वियतनाम रिश्तों को नई रफ्तार: पीएम मोदी-तो लाम की बैठक में 13 बड़े समझौते, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत



    नई दिल्ली । नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में बुधवार को भारत और वियतनाम के रिश्तों ने एक नई ऊंचाई छू ली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई अहम द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों देशों ने 13 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत-वियतनाम संबंध अब “आधुनिक व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले साल भारत से भेजे गए बौद्ध अवशेषों के दर्शन वियतनाम में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों ने किए। उन्होंने चंपा सभ्यता की पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की घोषणा करते हुए कहा कि यह साझेदारी सिर्फ विकास नहीं, बल्कि विरासत को भी सहेजने का प्रयास है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि तकनीक, पर्यटन, व्यापार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं और अब इन्हें और विस्तार देने का समय है।

    इस दौरान हुए 13 समझौते कई अहम क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिनमें डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा और तकनीक शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक और वियतनाम के स्टेट बैंक के बीच डिजिटल पेमेंट सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र में दवा नियमन, और आईटी सेक्टर में साझेदारी जैसे समझौते भविष्य की आर्थिक मजबूती की दिशा तय करते हैं।

    वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम का यह भारत का पहला राजकीय दौरा है, जिसकी शुरुआत उन्होंने बिहार के बोधगया में महाबोधि मंदिर में पूजा के साथ की। इसके बाद दिल्ली पहुंचकर उनका औपचारिक स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने किया।

    बैठक से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति लाम से मुलाकात कर रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि भारत और वियतनाम अपनी रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे कर रहे हैं।

    कुल मिलाकर, हैदराबाद हाउस में हुई यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की मजबूत साझेदारी का रोडमैप साबित हुई है, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देगी।

  • UAE हमले पर भारत का कड़ा रुख: 3 भारतीय घायल, PM मोदी बोले- नागरिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं

    UAE हमले पर भारत का कड़ा रुख: 3 भारतीय घायल, PM मोदी बोले- नागरिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं



    नई दिल्ली। UAE के फुजैराह स्थित ऑयल पोर्ट और पेट्रोलियम सुविधाओं पर हुए हमले में 3 भारतीय नागरिकों के घायल होने के बाद भारत ने सख्त नाराजगी जताई है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि आम लोगों और जरूरी ढांचों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमला किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    क्या हुआ फुजैराह में?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, फुजैराह के इंडस्ट्रियल एरिया में ड्रोन और मिसाइल हमले के बाद पेट्रोलियम प्लांट में आग लग गई। इस घटना में तीन भारतीय घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है।

    भारत की दो टूक
    भारत ने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने और कूटनीति के रास्ते अपनाने की अपील की है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है, जिसे वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    UAE का दावा, ईरान पर आरोप
    UAE ने इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन हमलों को रोका गया। हालांकि ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    24 घंटे में बढ़ा तनाव, बड़े अपडेट्स
    ड्रोन प्लांट पर हमला
    फुजैराह के पेट्रोलियम प्लांट पर हमले के बाद भीषण आग लगी, 3 भारतीय घायल।

    ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ लॉन्च
    अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नई पहल शुरू की।

    दक्षिण कोरियाई जहाज पर अटैक
    दक्षिण कोरिया के जहाज पर हमले से आग लगी, कोई हताहत नहीं।

    जब्त जहाज पाकिस्तान को सौंपा
    अमेरिका ने जब्त ईरानी जहाज पाकिस्तान को सौंपा, जिसे बाद में ईरान भेजा गया।

    ईरान में फांसी
    ईरान में जासूसी के आरोप में तीन लोगों को फांसी दी गई।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर पूरी तरह सतर्क है।

  • बंगाल फतह के बाद बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब! जीत के जोश में बड़ा सियासी ऐलान

    बंगाल फतह के बाद बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब! जीत के जोश में बड़ा सियासी ऐलान


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में शानदार बढ़त के बाद बीजेपी अब सिर्फ जश्न के मूड में नहीं है, बल्कि अगले मिशन की तैयारी में भी जुट गई है। पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि अब उसका अगला बड़ा राजनीतिक टारगेट पंजाब होगा।

    बंगाल में मिल रही बढ़त को बीजेपी राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश मान रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह जीत सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि देशभर में बदलते सियासी समीकरणों की शुरुआत है।

    बीजेपी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब की बारी है, AAP सरकार अपना बोरिया-बिस्तर बांध ले।” इस बयान ने साफ कर दिया है कि पार्टी अब पंजाब की राजनीति में आक्रामक रुख अपनाने वाली है।

    दिल्ली समेत देशभर में बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है। पार्टी मुख्यालयों में ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का उत्सव मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और इस जीत को जनता के भरोसे का नतीजा बताएंगे।

    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बंगाल में बीजेपी का प्रदर्शन पार्टी को नई ऊर्जा देने वाला है। यह जीत आने वाले चुनावों के लिए रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी, खासकर उन राज्यों में जहां बीजेपी अभी सत्ता से दूर है।

    कुल मिलाकर, बंगाल की जीत ने बीजेपी के हौसले बुलंद कर दिए हैं और अब पार्टी इस लहर को पंजाब तक ले जाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में देश की राजनीति और भी ज्यादा गरमाने वाली है।

  • बंगाल में बीजेपी की ‘सुनामी’ के संकेत, स्वाति मालीवाल बोलीं- खत्म होगी गुंडागर्दी और तुष्टिकरण की राजनीति

    बंगाल में बीजेपी की ‘सुनामी’ के संकेत, स्वाति मालीवाल बोलीं- खत्म होगी गुंडागर्दी और तुष्टिकरण की राजनीति

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त बढ़त बना ली है और बहुमत के आंकड़े को पार करती नजर आ रही है। 294 सीटों वाली विधानसभा में 148 का आंकड़ा जादुई माना जाता है, जिसे बीजेपी शुरुआती ट्रेंड्स में पार करती दिखाई दे रही है।

    इसी बीच आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में बीजेपी में शामिल हुईं राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इस संभावित जीत को “ऐतिहासिक बदलाव” बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा कि बंगाल में दशकों से चली आ रही हिंसा, गुंडागर्दी और वोट बैंक की राजनीति अब खत्म होने की ओर है।

    मालीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि असम और पुडुचेरी में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आ रहा है।

    चुनावी रुझानों में यह भी देखने को मिल रहा है कि बीजेपी सीमावर्ती इलाकों, आदिवासी क्षेत्रों और औद्योगिक बेल्ट में मजबूत पकड़ बना रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को कोलकाता और कुछ पारंपरिक गढ़ों में बढ़त मिल रही है।

    सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना में पहले पोस्टल बैलेट और फिर ईवीएम वोटों की गिनती की जा रही है। शुरुआती आंकड़े भले ही अंतिम नतीजे न हों, लेकिन जो तस्वीर उभर रही है, वह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।

  • बंगाल में सत्ता बदलाव का बड़ा असर! झारखंड के अवैध कारोबार पर कसेगा शिकंजा, सियासत में भी हलचल

    बंगाल में सत्ता बदलाव का बड़ा असर! झारखंड के अवैध कारोबार पर कसेगा शिकंजा, सियासत में भी हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन के संकेतों ने न सिर्फ राज्य की राजनीति बदली है, बल्कि इसका असर पड़ोसी Jharkhand तक देखने को मिल सकता है। करीब 15 साल बाद बन रहे नए सियासी समीकरणों के बीच अवैध कारोबार और सीमा से जुड़ी गतिविधियों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    माना जा रहा है कि नई सरकार के आने के बाद अवैध नेटवर्क पर सख्ती बढ़ सकती है। खासतौर पर Bharatiya Janata Party की संभावित नीतियों को देखते हुए ऐसे कारोबार में शामिल लोगों के बीच डर का माहौल बनना शुरू हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन गतिविधियों पर लगाम लगाने को सरकार प्राथमिकता दे सकती है।

    झारखंड लंबे समय से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश  से जुड़े अवैध कारोबार के लिए एक “ट्रांजिट कॉरिडोर” के रूप में देखा जाता रहा है। राज्य के कई जिले जैसे साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम पश्चिम बंगाल से सटे होने के कारण इन गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

    अब अगर बंगाल में सख्ती बढ़ती है, तो इन जिलों में चल रहे अवैध नेटवर्क पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे झारखंड की राजनीति भी प्रभावित हो सकती है, जहां मौजूदा महागठबंधन सरकार पर दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पूर्वी भारत की सुरक्षा और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई नीतियां जमीन पर कितनी तेजी से लागू होती हैं और उनका वास्तविक असर क्या पड़ता है।

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  • भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लेकर बड़ा बयान: पीएम मोदी के नेतृत्व की टॉड मैक्ले ने की सराहना

    भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लेकर बड़ा बयान: पीएम मोदी के नेतृत्व की टॉड मैक्ले ने की सराहना


    नई दिल्ली| भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री Todd McClay ने कहा है कि इस समझौते को रिकॉर्ड नौ महीनों में पूरा करने में प्रधानमंत्री Narendra Modi और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस लक्सन के मजबूत नेतृत्व की अहम भूमिका रही है।

    उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच विकसित हुए मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों ने बातचीत की प्रक्रिया को बेहद तेज और प्रभावी बनाया। पिछले वर्ष न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री द्वारा भारत का दौरा एक ऐतिहासिक कदम था, जिसमें अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल था।

    Todd McClay ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि उनके साथ मुलाकात करना उनके लिए सम्मान की बात रही। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकारों का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब व्यापारिक समुदाय को इस समझौते का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल लगातार बढ़ाए जाएंगे ताकि आर्थिक सहयोग को नई गति मिल सके। साथ ही भारतीय कंपनियों को भी न्यूजीलैंड में निवेश और व्यापार के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया गया है।

    Todd McClay ने यह भी कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दुनिया के दो मजबूत लोकतंत्र हैंभारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जबकि न्यूजीलैंड सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक माना जाता है।

    बातचीत के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि इस वर्ष भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल सहयोग के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने हल्के अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी को न्यूजीलैंड आने और अपनी क्रिकेट टीम साथ लाने का आमंत्रण भी दिया।

  • भारत-दक्षिण कोरिया के बीच ‘चिप से शिप’ तक हुए 15 समझौते, व्यापार 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

    भारत-दक्षिण कोरिया के बीच ‘चिप से शिप’ तक हुए 15 समझौते, व्यापार 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

    नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे. म्युंग के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। साथ ही तकनीक, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और पोत निर्माण समेत 15 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए और छह अहम घोषणाएं भी हुईं।

    भरोसे से भविष्य की साझेदारी की ओर

    बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया अपने भरोसेमंद रिश्तों को भविष्य की मजबूत साझेदारी में बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि “चिप से लेकर शिप, टैलेंट से लेकर टेक्नोलॉजी और एनर्जी से लेकर एनवायरमेंट तक हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा।” इससे दोनों देशों की प्रगति और समृद्धि को नई गति मिलेगी।

    2030 तक व्यापार दोगुना करने की योजना
    प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार करीब 27 अरब डॉलर है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भारत-दक्षिण कोरिया फाइनेंशियल फोरम की शुरुआत की गई है। साथ ही औद्योगिक सहयोग समिति का गठन और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए आर्थिक सुरक्षा वार्ता शुरू की जाएगी।

    निवेश और इंडस्ट्री को बढ़ावा देने पर जोर
    भारत में दक्षिण कोरिया की कंपनियों, खासकर MSME सेक्टर के लिए अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप स्थापित करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अगले एक साल में अपग्रेड किया जाएगा। एआई, सेमीकंडक्टर, आईटी, पोत निर्माण, स्टील और पोर्ट सेक्टर में सहयोग को भी विस्तार मिलेगा।

    सांस्कृतिक रिश्तों में भी नई ऊर्जा

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और दक्षिण कोरिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हजारों साल पुराना जुड़ाव है। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम-सुरो की कथा का उल्लेख किया।
    उन्होंने कहा कि भारत में K-Pop और K-ड्रामा तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, वहीं दक्षिण कोरिया में भारतीय सिनेमा की पहचान भी बढ़ रही है। इस सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए 2028 में भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा।

    इन क्षेत्रों में हुए प्रमुख समझौते

    दोनों देशों के बीच पोत निर्माण, औद्योगिक सहयोग, इस्पात सप्लाई चेन, MSME सहयोग, समुद्री विरासत, व्यापार समझौते का उन्नयन, वित्तीय सिस्टम, विज्ञान एवं तकनीक, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, डिजिटल ब्रिज, जलवायु और पर्यावरण, पेरिस समझौते के तहत सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेल जैसे क्षेत्रों में समझौते हुए हैं।

    ये रहीं अहम घोषणाएं
    बैठक के दौरान आर्थिक सुरक्षा वार्ता की शुरुआत, डिस्टिंग्विश्ड विजिटर प्रोग्राम, दक्षिण कोरिया का इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव और सोलर एलायंस में शामिल होना, विदेश मंत्री स्तर की वार्ता शुरू करना और 2028-29 को भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप ईयर के रूप में मनाने जैसे फैसले लिए गए।

  • हरिवंश नारायण सिंह का तीसरी बार उपसभापति चुना जाना अनुभव और विश्वास की निरंतरता का प्रतीक

    हरिवंश नारायण सिंह का तीसरी बार उपसभापति चुना जाना अनुभव और विश्वास की निरंतरता का प्रतीक

    नई दिल्ली: राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर उच्च सदन का उपसभापति चुना गया है और यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल होगा। शुक्रवार को उनके निर्विरोध चयन की औपचारिक घोषणा की गई। विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण यह चयन पहले से ही लगभग तय माना जा रहा था। इस घटनाक्रम को संसदीय परंपरा में निरंतरता और अनुभव पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

    यह पद उनके पिछले कार्यकाल की समाप्ति के बाद रिक्त हुआ था, जिसके बाद निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नामांकन और चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई। तय समय सीमा के भीतर उनके समर्थन में कई प्रस्ताव दाखिल किए गए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि विपक्ष ने इस प्रक्रिया से दूरी बनाकर अपनी असहमति दर्ज कराई, हालांकि सदन की औपचारिक प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हुई।

    उपसभापति के रूप में उनके चयन के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह लगातार तीसरी बार की जिम्मेदारी सदन के उनके प्रति गहरे विश्वास को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश नारायण सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान सदन की कार्यवाही को संतुलित, व्यवस्थित और प्रभावी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के बीच संतुलन बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक रहा है।

    प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हरिवंश नारायण सिंह ने सदन में सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है और उनकी कार्यशैली ने संसदीय गरिमा को मजबूत किया है। अनुभव और संयम के साथ उनके द्वारा निभाई गई भूमिका ने सदन की कार्यवाही को अधिक सुचारु और प्रभावी बनाने में योगदान दिया है।

    संसदीय हलकों में भी उनके लगातार तीसरी बार चुने जाने को स्थिरता और निरंतरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनके कार्यकाल में संवाद की गुणवत्ता और संसदीय अनुशासन को बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है, जिससे विधायी कार्यों के संचालन में अधिक सहजता आई है।

    इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय संसदीय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है, जहां अनुभव, संतुलन और परंपरा को महत्व देते हुए नेतृत्व की निरंतरता को आगे बढ़ाया गया है।

  • भारत-ऑस्ट्रिया के बीच बड़ी साझेदारी खाद्य सुरक्षा से लेकर रक्षा तक कई अहम समझौते पर मुहर

    भारत-ऑस्ट्रिया के बीच बड़ी साझेदारी खाद्य सुरक्षा से लेकर रक्षा तक कई अहम समझौते पर मुहर


    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी है। राजधानी नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इस बैठक के दौरान कई डील्स पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारत और ऑस्ट्रिया के रिश्तों में नई मजबूती देखने को मिली है।

    बैठक के दौरान सबसे अहम समझौता ऑडियो विजुअल को प्रोडक्शन से जुड़ा रहा, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की फिल्म इंडस्ट्री के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इस समझौते से संयुक्त फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, सांस्कृतिक और क्रिएटिव एक्सचेंज को मजबूती मिलेगी और भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे भारतीय सिनेमा और देश की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को भी वैश्विक स्तर पर विस्तार मिलेगा।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों को आने वाली अड़चनों की पहचान कर उनका समाधान करना है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे। यह कदम निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करेगा और बाजार पहुंच को भी आसान बनाएगा।

    रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके तहत एक संस्थागत ढांचा तैयार किया जाएगा, जो डिफेंस इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को मजबूत करेगा। साथ ही रक्षा नीति पर संवाद, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ेगा, जिससे भारत के रक्षा क्षेत्र को नई तकनीकी मजबूती मिलेगी।

    आतंकवाद विरोधी सहयोग को लेकर भी एक संयुक्त कार्य समूह के गठन पर सहमति बनी है। यह समूह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और अधिक प्रभावी होगा।

    खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा समझौता हुआ है, जिसके तहत भारत के एफएसएसएआई और ऑस्ट्रिया के संबंधित संस्थान एजीईएस के बीच सहयोग स्थापित किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य खाद्य मानकों में सुधार, वैज्ञानिक आदान प्रदान, जोखिम मूल्यांकन और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है। इससे कृषि और खाद्य उत्पादों के व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर यह बैठक भारत और ऑस्ट्रिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।