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  • शर्म की असली वजह क्या? एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा वार

    शर्म की असली वजह क्या? एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा वार


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए सियासी बहस को नई धार दे दी है। एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अर्धनग्न प्रदर्शन को प्रधानमंत्री द्वारा शर्मनाक बताए जाने पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया और कहा कि असली शर्म प्रदर्शन नहीं बल्कि उन मामलों पर सरकार की चुप्पी है जिनमें गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री उनके एक मंत्री और एक करीबी सहयोगी का नाम सामने आना चिंता का विषय है और यही वास्तव में शर्म की बात है।

    राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा मोदी जी आप शर्म की बात करते हो? शर्म की बात यह है कि एपस्टीन फाइल्स में आपका आपके मंत्री और आपके मित्र का नाम साथ में आ रहा है। ऐसे घिनौने अपराधी के साथ नाम जुड़ना ही शर्मनाक है। उन्होंने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस समझौते से देश के किसानों टेक्सटाइल उद्योग और डेटा सुरक्षा को नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक सरकार ने देशहित से समझौता किया है और इन मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    राहुल जिस संदर्भ का जिक्र कर रहे हैं उसमें केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी चर्चा में आया था। हालांकि पुरी ने स्पष्ट किया है कि उनके संबंध केवल आधिकारिक और कार्यगत थे। इसी प्रकरण में प्रधानमंत्री मोदी के एक विदेशी दौरे का उल्लेख भी सामने आने की बात कही गई थी जिस पर संसद में पहले भी हंगामा हो चुका है। अब राहुल गांधी ने उसी मुद्दे को फिर से उठाकर सरकार पर नैतिक जवाबदेही का दबाव बनाने की कोशिश की है।

    इसके साथ ही राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी पर अमेरिका में चल रहे मामलों को लेकर भी प्रधानमंत्री को घेरा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक कारोबारी तक सीमित नहीं है बल्कि सत्ता और पूंजी के रिश्तों से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 महीनों से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई जो अपने आप में कई संदेह पैदा करती है। राहुल ने अनिल अंबानी का नाम लेते हुए भी सरकार और बड़े उद्योगपतियों की नजदीकियों पर सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी तथा देशहित के मुद्दों पर आवाज उठाती रहेगी।

    यह पूरा विवाद नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट से जुड़ा है जहां कांग्रेस यूथ कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री मोदी ने मेरठ की सभा में कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने इसे कांग्रेस की गंदी और शर्म वाली राजनीति बताते हुए कहा था कि देश की सबसे पुरानी पार्टी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब कर रही है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया।

    कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना केवल सत्तापक्ष तक सीमित नहीं रही। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस तरह की हरकत से देश की छवि धूमिल होती है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए। इसके बावजूद कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं का समर्थन किया और इसे लोकतांत्रिक विरोध बताया।

    सियासत के इस तीखे दौर में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो चुका है। एक ओर प्रधानमंत्री कांग्रेस की राजनीति को शर्मनाक बता रहे हैं तो दूसरी ओर राहुल गांधी सरकार की नीतियों अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कारोबारी गठजोड़ पर सवाल उठाकर जवाब मांग रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और चुनावी मंचों पर और अधिक गूंजने की संभावना है।

  • राज्यपाल पटेल: मन की बात जन भावनाओं का सम्मान करने और पुलिस सेवा की संवेदनशीलता की सीख देती है

    राज्यपाल पटेल: मन की बात जन भावनाओं का सम्मान करने और पुलिस सेवा की संवेदनशीलता की सीख देती है


    भोपाल । भोपाल में रविवार को मंगुभाई पटेल ने मन की बात कार्यक्रम को केवल एक रेडियो प्रसारण न मानने की अपील की और उसे जन‑भावनाओं की जीवंत गाथा बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के कोने‑कोने में हो रहे सकारात्मक बदलाव और आम नागरिकों की भागीदारी की प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाता है, जिससे समाज की नब्ज को समझने और जन‑भावनाओं का सम्मान करने की सीख मिलती है। राज्यपाल ने यह बात प्रशिक्षणाधीन पुलिस अधिकारियों और नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए कही।

    उन्होंने कहा कि पुलिस का जनता से सीधा जुड़ाव होता है, इसलिए मन की बात जैसे कार्यक्रम को केवल औपचारिकता न मानकर नियमित रूप से सुनना चाहिए, क्योंकि इससे लोक‑कल्याण की भावना, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस कार्यक्रम के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में भी समाज के लिए उदाहरण पैदा करने वाले गुमनाम नायकों की कहानियों को साझा करते हैं, जो पुलिस बल को भी अपनी सेवा‑परिवार के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाने में मदद करती हैं।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रशिक्षण का समय भविष्य की नींव है और इस दौरान सीखी गई बातें और प्रधानमंत्री के विचार पुलिस अधिकारियों के करियर में मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस सेवा में शालीनता और तत्परता होना चाहिए, ताकि पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आते समय सुरक्षित महसूस करे। साथ ही पुलिस में अनुशासन के साथ सहानुभूति का होना आवश्यक है, और मन की बात कार्यक्रम हमें मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो वर्दी को केवल सत्ता का प्रतीक नहीं बल्कि समाज सेवा का संकल्प बनाता है।

    राज्यपाल ने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे देश‑भक्ति और जन‑सेवा की गौरवशाली परंपरा को सशक्त, अनुशासित और मानवीय पुलिस बल के रूप में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि मन की बात में प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता, जल संरक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों पर दिया गया मार्गदर्शन उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में लागू करना चाहिए। यह कार्यक्रम आज के सामाजिक और तकनीकी युग में पुलिस सेवा को लोक‑कल्याण की भावना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

    राज्यपाल ने प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों को कहा कि वे अपने आप को केवल ड्यूटी तक सीमित न रखें, बल्कि समाज में चेंज मेकर के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास करें। उन्होंने बताया कि मन की बात में देश के अलग‑अलग हिस्सों से आने वाली सफल कहानियों से यह स्पष्ट होता है कि व्यक्ति का छोटा सा प्रयास भी बड़े परिवर्तन ला सकता है। इस संदेश को अपनाकर पुलिस विभाग समाज में मित्र और रक्षक की छवि को और मजबूत कर सकता है।

    कार्यक्रम की शुरुआत में विशेष पुलिस महानिदेशक और मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण के अनुभवों को नव आरक्षकों ने साझा किया। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक और अकादमी के सहायक निदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उपस्थित रही।

  • यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मायावती और BJP ने देश की गरिमा पर सवाल उठाया

    यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मायावती और BJP ने देश की गरिमा पर सवाल उठाया



    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान उस समय सियासी भूचाल आ गया जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल के भीतर अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया। यह समिट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करने के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल थे।

    क्या हुआ था?
    प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, 8‑10 प्रदर्शनकारी अचानक मुख्य सभागार के समीप पहुंच गए, टी‑शर्ट उतारकर नारेबाजी करने लगे और कथित तौर पर भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विरोध जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारे लगाए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और कार्यक्रम बाधित हुए बिना आगे बढ़ाया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को कुछ ही मिनटों में नियंत्रित कर लिया गया और किसी प्रतिनिधि को शारीरिक नुकसान नहीं हुआ।

    मायावती की कड़ी प्रतिक्रिया
    घटना के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया मंच X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस प्रदर्शन को “अत्यंत अशोभनीय और निंदनीय” बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का व्यवहार देश की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
    मायावती ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति सभ्य और मर्यादित तरीके से होनी चाहिए।

    BJP का हमला
    सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को लेकर कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह का प्रदर्शन भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
    BJP का कहना है कि जब दुनिया AI और तकनीकी प्रगति में भारत की भूमिका की सराहना कर रही है, तब ऐसे विरोध देश को बदनाम करने वाले हैं।

    कांग्रेस का पक्ष
    वहीं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से कहा गया कि युवा कार्यकर्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अपनी आवाज उठाई। पार्टी नेताओं ने सरकार से असहमति को देशविरोधी बताने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है।

    सियासी असर और आगे की राह
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावी माहौल में और गर्मी ला सकता है।

    सत्तापक्ष इसे “राष्ट्रीय गरिमा” का मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेर सकता है।

    विपक्ष इसे “लोकतांत्रिक अधिकार” और “नीतिगत असहमति” का मामला बताकर राजनीतिक बहस को नई दिशा दे सकता है।

    दिल्ली AI समिट में हुआ यह प्रदर्शन केवल कुछ मिनटों की घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक प्रतीक बन गया है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तकनीकी छवि, तो दूसरी ओर घरेलू राजनीति का टकराव—दोनों के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना रखता है।

  • जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

     भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

  • सेवा तीर्थ से चलेगा देश का शासन: PM मोदी ने नए PMO का किया उद्घाटन, साउथ ब्लॉक में 78 साल बाद आखिरी कैबिनेट बैठक

    सेवा तीर्थ से चलेगा देश का शासन: PM मोदी ने नए PMO का किया उद्घाटन, साउथ ब्लॉक में 78 साल बाद आखिरी कैबिनेट बैठक



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में बने अत्याधुनिक प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। करीब 78 वर्षों तक रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से संचालित होने के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट हो गया है। पुराने दफ्तर में शुक्रवार शाम 4 बजे केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसे इस ऐतिहासिक इमारत में आखिरी कैबिनेट बैठक माना जा रहा है।

    उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। भवन पर देवनागरी लिपि में ‘सेवा तीर्थ’ और उसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’ अंकित है, जो शासन की नागरिक-केंद्रित सोच को दर्शाता है। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने नए कार्यालय में महिलाओं, युवाओं, किसानों और कमजोर वर्गों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए।

    इन फैसलों में पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा, ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करना, कृषि अवसंरचना कोष की राशि 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ करना और 10,000 करोड़ के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी देना शामिल है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

    नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड स्थित एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में बना ‘सेवा तीर्थ’ परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है और इसे करीब 1189 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। पहले इस परियोजना का नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ था, जिसे दिसंबर 2025 में बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया। परिसर में तीन इमारतें हैंसेवा तीर्थ-1 में PMO, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय स्थित है।

    यह पूरा कॉम्प्लेक्स केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है। इसी परियोजना के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ का निर्माण किया गया है। कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को स्थान दिया गया है। भवनों को 4-स्टार GRIHA ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और स्मार्ट सुरक्षा प्रणालियां शामिल हैं।

    सरकार का कहना है कि पहले कई मंत्रालय अलग-अलग पुराने भवनों में फैले हुए थे, जिससे तालमेल की कमी, देरी और रखरखाव पर अधिक खर्च जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नए एकीकृत परिसर से प्रशासनिक कार्यों में तेजी, समन्वय और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    आने वाले समय में नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदलने की योजना है, जहां भारत की सभ्यता और विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। इस बदलाव के साथ केंद्र सरकार का प्रशासनिक ढांचा एक नए और आधुनिक दौर में प्रवेश कर गया है।

  • रोजगार मेले में पीएम मोदी की बड़ी सौगात: 61 हजार से अधिक युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र

    रोजगार मेले में पीएम मोदी की बड़ी सौगात: 61 हजार से अधिक युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आयोजित 18वें रोजगार मेले के दौरान देशभर के 61 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र सौंपे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से युवाओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन इन सभी युवाओं के जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने नियुक्ति पत्रों को “नेशन बिल्डिंग का इनविटेशन लेटर” बताते हुए कहा कि यह विकसित भारत के निर्माण को गति देने का संकल्प है। नियुक्तियां केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों में की गई हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा, “आज आप सभी सरकारी सेवा में प्रवेश कर रहे हैं। यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी का अवसर है।” उन्होंने यह भी कहा कि साल 2026 की शुरुआत युवाओं के जीवन में नई उम्मीदें और नई खुशियां लेकर आई है। बसंत पंचमी और गणतंत्र दिवस के संयोग का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह समय संविधान के प्रति कर्तव्यों को याद करने और राष्ट्र सेवा के लिए खुद को समर्पित करने का है।

    तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी में खुद को अपडेट रखना जरूरी

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बदलते तकनीकी दौर की चुनौतियों और जरूरतों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं और ऐसे में सरकारी सेवाओं में आने वाले युवाओं को खुद को लगातार अपग्रेड करना होगा। पीएम मोदी ने बताया कि iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक करीब डेढ़ करोड़ सरकारी कर्मचारी खुद को नए कौशलों में प्रशिक्षित कर चुके हैं। उन्होंने “नागरिक देवो भव:” को सभी कर्मचारियों के लिए मूल मंत्र बताया।

    रिफॉर्म एक्सप्रेस पर भारत, महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, जिसका उद्देश्य जीवन और कारोबार-दोनों को आसान बनाना है। उन्होंने बताया कि इस रोजगार मेले में 8 हजार से अधिक बेटियों को भी नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है। पीएम मोदी ने कहा कि बीते 11 वर्षों में देश के वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी लगभग दोगुनी हो गई है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार कई देशों के साथ ट्रेड और मोबिलिटी एग्रीमेंट कर रही है, जिससे युवाओं के लिए वैश्विक अवसर खुल रहे हैं। डिजिटल मीडिया, क्रिएटर इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से ग्लोबल हब बनता जा रहा है।

  • सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा..

    सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा..


    नई दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के कारण अंग्रेजों का भारत पर कब्जा करने का सपना चकनाचूर हो गया

    सुधांशु त्रिवेदी ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कटाक्ष किया उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी भी कांग्रेस से निकली है आप भी कांग्रेस में थीं इतने सालों तक क्यों नहीं याद आया कि नेताजी को सम्मान और उचित स्थान मिलना चाहिए अगर टीएमसी के मन में नेताजी के प्रति सम्मान है तो उन्हें अपने नाम से कांग्रेस हटा देना चाहिए अन्यथा बंगाल की प्रबुद्ध जनता उन्हें जड़-मूल से खत्म कर देगीउन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सबसे सच्चा सम्मान दिया 2018 में आजाद हिंद की निर्वासित सरकार के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी जीवित सेनानियों को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया गया और उनका सम्मान किया गया किसी भी राजनीतिक दल ने इससे पहले ऐसा सम्मान नहीं दिया इंडिया गेट पर 1968 तक जॉर्ज पंचम की मूर्ति रही थी वहां नेताजी की मूर्ति पुनर्स्थापित की गई

    सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि भारत की स्वतंत्रता में कई लोगों ने योगदान दिया लेकिन सुभाष चंद्र बोस का योगदान अग्रणी और अविस्मरणीय है इसे भुलाने के अनेक कुत्सित प्रयास हुए हैं उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि 1955 में दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की निष्ठा अंग्रेजों के प्रति बदल चुकी थी और नेताजी के नेतृत्व ने ब्रिटिश शासन की धारणा को तोड़ दिया

    त्रिवेदी ने 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत के बाद नेताजी द्वारा इसे ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने का अवसर बताया और सवाल उठाया कि उस समय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन पर दबाव क्यों नहीं बनाया उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 14 जुलाई 1942 के रेजोल्यूशन का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नकारात्मक भाव को सहयोग और सकारात्मक में बदला जाएगा और कांग्रेस पूरी स्वेच्छा से ब्रिटिश फौजों के समर्थन के लिए तैयार थी यही कारण था कि कांग्रेस ने 1931 से 1947 तक 1942 को छोड़कर कोई आंदोलन नहीं किया

    सुधांशु त्रिवेदी का कहना है कि इतिहास में नेताजी के योगदान को सही रूप में प्रस्तुत करना और उनका सम्मान करना आवश्यक है यह केवल भारत के गौरव के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है

  • नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष

    नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष


    नई दिल्ली। नितिन नबीन का नाम इन दिनों भाजपा और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। 45 वर्षीय नितिन नबीन निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। बिहार के पथ निर्माण मंत्री रह चुके नितिन की राजनीतिक यात्रा लंबी और भरोसेमंद रही है। पांच विधानसभा चुनाव जीतने, भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने और छत्तीसगढ़ प्रभारी बनने के बाद भी यह निर्णय कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है।

    असल में नितिन नबीन पीएम नरेंद्र मोदी के करीब दो दशक पुराने विश्वासपात्र हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी से मिलने के लिए वह पटना से उड़कर जाते थे। बिहार में मोदी की आंख और कान बने नितिन नबीन ने पार्टी में कई अहम फैसलों और लोकसभा अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।2009 में लुधियाना रैली इसका प्रमाण है। एनडीए द्वारा एलके आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के दौरान आयोजित विशाल जनसभा में नीतीश कुमार की हिचकिचाहट के बावजूद नितिन नबीन के प्रयास से भाजपा के वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने में सफल हुए। रैली में मंच पर नरेंद्र मोदी ने नीतीश का हाथ उठाकर सबके सामने दिखाया, जिससे नीतीश असहज हो गए।

    पटना में 2010 के बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सत्र के दौरान भी नितिन नबीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोदी के प्रति आभार जताने के लिए पटना की दीवारों पर बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए, जिसमें स्थानीय बीजेपी यूनिट के नितिन और रामेश्वर चौरसिया की सक्रियता देखने को मिली। इस अभियान ने मोदी की लोकप्रियता बढ़ाई, लेकिन नीतीश कुमार इस पर नाराज हुए। अखबारों में छपी तस्वीरों ने उन्हें परेशान कर दिया और उन्होंने डिनर का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    इस पूरी कहानी से यह साफ है कि नितिन नबीन न केवल पार्टी के अंदर बल्कि मोदी के भरोसे के मामले में भी वर्षों से मजबूत स्थिति में रहे हैं। उनकी यह यात्रा पटना से गुजरात तक मोदी के विश्वास और भाजपा के संगठनात्मक काम में गहरे जुड़े रहने का उदाहरण है।आज राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर नितिन नबीन भाजपा में युवाओं और संगठनात्मक मजबूती दोनों के लिए बड़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनकी राजनीतिक समझ, मोदी के साथ लंबे समय से चलती मित्रता और बिहार में उनके अनुभव ने उन्हें यह बड़ा मंच दिलाया है।

  • साबरमती आश्रम से मजबूत हुई भारत-जर्मनी मित्रता, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने पीएम मोदी संग किया बापू को नमन

    साबरमती आश्रम से मजबूत हुई भारत-जर्मनी मित्रता, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने पीएम मोदी संग किया बापू को नमन


    नई दिल्ली । जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार सुबह अहमदाबाद पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऐतिहासिक साबरमती आश्रम का दौरा किया। यह दौरा न केवल औपचारिक था, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच साझा मूल्यों, शांति और लोकतांत्रिक आदर्शों का प्रतीक भी बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती आश्रम परिसर में चांसलर मर्ज का आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। चांसलर मर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बापू की तस्वीर पर भी माल्यार्पण किया और गांधी जी के जीवन व विचारों के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज को साबरमती आश्रम के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कराया और स्वतंत्रता संग्राम में इस आश्रम की भूमिका तथा महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के दर्शन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। चांसलर मर्ज ने आश्रम की सादगी, ऐतिहासिक महत्व और गांधी जी के विचारों से गहरा प्रभाव महसूस किया।दौरे के दौरान जर्मन चांसलर ने आगंतुक पुस्तिका में अपने विचार भी दर्ज किए। उन्होंने महात्मा गांधी को वैश्विक शांति और मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए भारत-जर्मनी संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

    साबरमती आश्रम के इस प्रतीकात्मक दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता प्रस्तावित है। इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग, व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज इससे पहले देर रात आधिकारिक यात्रा पर गुजरात पहुंचे थे। अहमदाबाद हवाई अड्डे पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह जर्मनी के किसी चांसलर की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। साबरमती आश्रम से शुरू हुई यह यात्रा भारत और जर्मनी के रिश्तों में विश्वास, सहयोग और साझा मूल्यों की मजबूत नींव रखने का संकेत देती है।

  • मोदी राज में गरीबी लगभग खत्म, अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिंदू: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का रिसर्च

    मोदी राज में गरीबी लगभग खत्म, अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिंदू: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का रिसर्च


    नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi)के शासनकाल में बड़े पैमाने पर अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) खत्म हुई है। बड़ी बात यह है कि अत्यधिक गरीबी खत्म होने की दर हिन्दुओं से ज्यादा मुस्लिमों में रही है। यानी अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिन्दू हैं। नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष और सोलहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया(Arvind Panagariya) ने अपने एक रिसर्च पेपर में यह दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-12 और 2023-24 के बीच भारत ने लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म कर दी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुसलमानों में गरीबी दर (उनकी आबादी का) 1.5% रह गया है, जबकि हिंदुओं में यह 2.3% है जो कि तुलना में थोड़ा ज्यादा है।

    कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और सोलहवें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया और नई दिल्ली स्थित रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म इंटेलिंक एडवाइजर्स के संस्थापक विशाल मोरे द्वारा लिखे गए एक नए पेपर में यह दावा किया गया है। पेपर इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली में प्रकाशित हुआ है। पेपर के अनुसार, वर्ष 2022-23 में भी दोनों समुदायों के बीच गरीबी का अंतर लगभग एक समान था। उस दौरान मुसलमानों में गरीबी दर उनकी आबादी का 4% था, जबकि हिंदुओं में यह 4.8% था, जो 0.8 प्रतिशत ज्यादा है।

    आंकड़े आम धारणा के विपरीत
    पेपर में यह भी दावा किया गया है कि ये आंकड़े उस आम धारणा के विपरीत हैं जिसके तहत कहा जाता रहा है कि मुसलमानों में हिंदुओं की तुलना में ज्यादा गरीबी है और इसमें सुधार की जरूरत है, कम से कम अत्यधिक गरीबी के संबंध में। बता दें कि विश्व बैंक क्रय शक्ति समानता (PPP) के संदर्भ में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 3 डॉलर से कम खरीद क्षमता को अत्यधिक गरीबी के रूप में परिभाषित किया जाता है। लेखकों के अनुसार, यह तेंदुलकर कमेटी की गरीबी रेखा के करीब है, जो आखिरी आधिकारिक तौर पर अपनाई गई गरीबी रेखा थी।

    देश से लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पेपर सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक समूहों, और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी के स्तर का अनुमान लगाता है। इसमें लेखकों ने लिखा है, “अनुमान बताते हैं कि 2011-12 से 2023-24 तक 12 वर्षों में गरीबी में गिरावट काफी और व्यापक रही है, इस हद तक कि देश ने लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म कर दी है।”

    लेखकों के अनुसार, तेंदुलकर पद्धति के आधार पर राष्ट्रीय (ग्रामीण+शहरी) गरीबी रेखा 2011-12 में प्रति व्यक्ति प्रति माह 932 रुपये, 2022-23 में 1,714 रुपये और 2023-24 में 1,804 रुपये निर्धारित की गई थी। इस पेपर में, हर घर को राज्य और इलाके (ग्रामीण या शहरी) के लिए गरीबी रेखा के आधार पर गरीब या गैर-गरीब माना गया है। जिन्हें गरीब के तौर पर क्लासिफाई किया गया है, उन्हें फिर ग्रुप के हिसाब से जोड़ा गया है।

    2011-2024 के बीच कुल गरीबी में तेज़ और लगातार गिरावट
    पेपर के अनुसार, 2011-2024 की अवधि में कुल गरीबी में तेज़ और लगातार गिरावट देखी गई है। पेपर में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय गरीबी दर 2011-12 में 21.9% (आबादी का) से घटकर 2023-24 में 2.3% हो गई। यानी 12 सालों में गरीबी दर में 19.7 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई है, जो प्रति वर्ष के हिसाब से 1.64 प्रतिशत की गिरावट है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में गिरावट ज़्यादा तेज़ रही है। ररिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में जहां 2011-12 में शुरुआती गरीबी का स्तर राष्ट्रीय औसत से ज़्यादा था, उस अवधि में 22.5 प्रतिशत अंकों की कमी आई, या सालाना 1.87 प्रतिशत अंकों की कमी आई। इसके विपरीत, शहरी गरीबी में 12.6 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई, जो मोटे तौर पर प्रति वर्ष 1 प्रतिशत अंक के बराबर है। पेपर में ये भी कहा गया है कि वर्ग के हिसाब से भी, सभी प्रमुख सामाजिक समूहों – अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), और अगड़ी जाति के समूहों में भी गरीबी में काफी कमी आई है।

    ST समुदाय में भी गरीबी दर 8.7% रह गई
    लेखकों ने इस बात पर फोकस किया है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदाय के अंदर 2023-24 में गरीबी घटकर 8.7% रह गई है। पेपर में कहा गया है कि जहां हिंदुओं में गरीबी की दर 2.3% अनुमानित है, वहीं मुसलमानों में अब 1.5%, ईसाइयों में 5%, बौद्धों में 3.5%, और सिखों और जैनियों में 0% है। रिपोर्ट में यह दावा कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अत्यधिक गरीबी में अंतर लगभग खत्म हो गया है, हैरान करने वाला है।

    पेपर में कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में भी हिंदुओं की तुलना में मुसलमान कम ही गरीबी रेखा के नीचे हैं। यह आंकड़ा मुस्लिमों में 1.6% है जबकि हिन्दुओं में 2.8% है। हालांकि, शहरी इलाकों में 2011-12 में मुसलमानों में गरीबी दर 20.8% थी, जबकि हिंदुओं में यह 12.5% ​​थी, जो 2023-24 तक घटकर अब क्रमशः 1.2% और 1% रह गई है।