Tag: Narendra Modi

  • मोदी राज में गरीबी लगभग खत्म, अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिंदू: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का रिसर्च

    मोदी राज में गरीबी लगभग खत्म, अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिंदू: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का रिसर्च


    नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi)के शासनकाल में बड़े पैमाने पर अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) खत्म हुई है। बड़ी बात यह है कि अत्यधिक गरीबी खत्म होने की दर हिन्दुओं से ज्यादा मुस्लिमों में रही है। यानी अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिन्दू हैं। नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष और सोलहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया(Arvind Panagariya) ने अपने एक रिसर्च पेपर में यह दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-12 और 2023-24 के बीच भारत ने लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म कर दी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुसलमानों में गरीबी दर (उनकी आबादी का) 1.5% रह गया है, जबकि हिंदुओं में यह 2.3% है जो कि तुलना में थोड़ा ज्यादा है।

    कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और सोलहवें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया और नई दिल्ली स्थित रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म इंटेलिंक एडवाइजर्स के संस्थापक विशाल मोरे द्वारा लिखे गए एक नए पेपर में यह दावा किया गया है। पेपर इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली में प्रकाशित हुआ है। पेपर के अनुसार, वर्ष 2022-23 में भी दोनों समुदायों के बीच गरीबी का अंतर लगभग एक समान था। उस दौरान मुसलमानों में गरीबी दर उनकी आबादी का 4% था, जबकि हिंदुओं में यह 4.8% था, जो 0.8 प्रतिशत ज्यादा है।

    आंकड़े आम धारणा के विपरीत
    पेपर में यह भी दावा किया गया है कि ये आंकड़े उस आम धारणा के विपरीत हैं जिसके तहत कहा जाता रहा है कि मुसलमानों में हिंदुओं की तुलना में ज्यादा गरीबी है और इसमें सुधार की जरूरत है, कम से कम अत्यधिक गरीबी के संबंध में। बता दें कि विश्व बैंक क्रय शक्ति समानता (PPP) के संदर्भ में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 3 डॉलर से कम खरीद क्षमता को अत्यधिक गरीबी के रूप में परिभाषित किया जाता है। लेखकों के अनुसार, यह तेंदुलकर कमेटी की गरीबी रेखा के करीब है, जो आखिरी आधिकारिक तौर पर अपनाई गई गरीबी रेखा थी।

    देश से लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पेपर सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक समूहों, और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी के स्तर का अनुमान लगाता है। इसमें लेखकों ने लिखा है, “अनुमान बताते हैं कि 2011-12 से 2023-24 तक 12 वर्षों में गरीबी में गिरावट काफी और व्यापक रही है, इस हद तक कि देश ने लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म कर दी है।”

    लेखकों के अनुसार, तेंदुलकर पद्धति के आधार पर राष्ट्रीय (ग्रामीण+शहरी) गरीबी रेखा 2011-12 में प्रति व्यक्ति प्रति माह 932 रुपये, 2022-23 में 1,714 रुपये और 2023-24 में 1,804 रुपये निर्धारित की गई थी। इस पेपर में, हर घर को राज्य और इलाके (ग्रामीण या शहरी) के लिए गरीबी रेखा के आधार पर गरीब या गैर-गरीब माना गया है। जिन्हें गरीब के तौर पर क्लासिफाई किया गया है, उन्हें फिर ग्रुप के हिसाब से जोड़ा गया है।

    2011-2024 के बीच कुल गरीबी में तेज़ और लगातार गिरावट
    पेपर के अनुसार, 2011-2024 की अवधि में कुल गरीबी में तेज़ और लगातार गिरावट देखी गई है। पेपर में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय गरीबी दर 2011-12 में 21.9% (आबादी का) से घटकर 2023-24 में 2.3% हो गई। यानी 12 सालों में गरीबी दर में 19.7 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई है, जो प्रति वर्ष के हिसाब से 1.64 प्रतिशत की गिरावट है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में गिरावट ज़्यादा तेज़ रही है। ररिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में जहां 2011-12 में शुरुआती गरीबी का स्तर राष्ट्रीय औसत से ज़्यादा था, उस अवधि में 22.5 प्रतिशत अंकों की कमी आई, या सालाना 1.87 प्रतिशत अंकों की कमी आई। इसके विपरीत, शहरी गरीबी में 12.6 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई, जो मोटे तौर पर प्रति वर्ष 1 प्रतिशत अंक के बराबर है। पेपर में ये भी कहा गया है कि वर्ग के हिसाब से भी, सभी प्रमुख सामाजिक समूहों – अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), और अगड़ी जाति के समूहों में भी गरीबी में काफी कमी आई है।

    ST समुदाय में भी गरीबी दर 8.7% रह गई
    लेखकों ने इस बात पर फोकस किया है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदाय के अंदर 2023-24 में गरीबी घटकर 8.7% रह गई है। पेपर में कहा गया है कि जहां हिंदुओं में गरीबी की दर 2.3% अनुमानित है, वहीं मुसलमानों में अब 1.5%, ईसाइयों में 5%, बौद्धों में 3.5%, और सिखों और जैनियों में 0% है। रिपोर्ट में यह दावा कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अत्यधिक गरीबी में अंतर लगभग खत्म हो गया है, हैरान करने वाला है।

    पेपर में कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में भी हिंदुओं की तुलना में मुसलमान कम ही गरीबी रेखा के नीचे हैं। यह आंकड़ा मुस्लिमों में 1.6% है जबकि हिन्दुओं में 2.8% है। हालांकि, शहरी इलाकों में 2011-12 में मुसलमानों में गरीबी दर 20.8% थी, जबकि हिंदुओं में यह 12.5% ​​थी, जो 2023-24 तक घटकर अब क्रमशः 1.2% और 1% रह गई है।

  • भारत पहुंचे पुतिन: राष्ट्रपति भवन में मिला 21 तोपों की सलामी का सम्मान

    भारत पहुंचे पुतिन: राष्ट्रपति भवन में मिला 21 तोपों की सलामी का सम्मान


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत पहुंचे और उनके आगमन पर राजधानी दिल्ली में पारंपरिक सम्मान के साथ शानदार स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और भारतीय सेना की तीनों सेवाओं ने गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद थोड़ी ही देर में पुतिन और मोदी राजघाट पहुंचे, जहां दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की

    पुतिन के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में सात वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं, जिनकी उपस्थिति इस दौरे की अहमियत को दर्शाती है। दोनों देशों के बीच आज दो महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित हैं जिनमें से एक क्लोज़्ड-डोर बैठक होगी। इनके दौरान रक्षा, ऊर्जा, आर्थिक सहयोग और कौशल आधारित भारतीय कामगारों की आवाजाही को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। उम्मीद है कि मुलाकात के दौरान 25 से अधिक द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जो भविष्य में भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद पुतिन का काफिला राजघाट के लिए रवाना हुआ। सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई थी और रास्तों को पहले ही खाली करा लिया गया था। राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों नेता हैदराबाद हाउस पहुँचे, जहाँ 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच दशकों पुराने विश्वास और सहयोग की परंपरा को आगे बढ़ाने का एक और अवसर है।

    पुतिन की यात्रा का एक दिलचस्प पहलू वह सफेद टोयोटा फॉर्च्यूनर सिग्मा-4 भी रही जिसमें पीएम मोदी और पुतिन एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक साथ बैठे। यह गाड़ी मुंबई के एक एडिशनल पुलिस कमिश्नर के नाम रजिस्टर्ड है और अप्रैल 2024 में पंजीकृत हुई थी। सुरक्षा के लिहाज से पीएम की रेंज रोवर और पुतिन की विशेष सुरक्षा वाली कारें भी काफिले में शामिल थीं।

    फ्लाइटडाटा-24 की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन का विमान Ilyushin Il-96-300 मॉस्को के ज़ुकोवस्की एयरपोर्ट से उड़ा और कजाकिस्तान, कैस्पियन सागर, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर राजस्थान के ऊपर भारतीय सीमा में दाखिल हुआ। यह उड़ान मार्ग अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से सावधानीपूर्वक तय किया गया था।

    भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा ही रिश्तों की मजबूत नींव रहा है। पुतिन ने हाल ही में कहा था कि भारत और रूस का रिश्ता सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त का नहीं बल्कि गहरे विश्वास और तकनीकी साझेदारी का है। यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग की ओर संकेत करती है।

    पुतिन के आगमन की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वयं उनका स्वागत कर इस दौरे को विशेष महत्व दिया। दोनों नेताओं ने एक ही गाड़ी में सफर किया और रात में पीएम आवास पर निजी रात्रिभोज हुआ। इस मुलाकात की तस्वीरों और वीडियो को दुनिया भर के मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया। अमेरिका यूरोपीय देशों, यूक्रेन और एशियाई मीडिया ने भी इस दौरे के भू-राजनीतिक महत्व पर विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की हैं।

    भारत-रूस संबंध एक ऐसे दौर में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं जब वैश्विक राजनीति में बदलाव तेजी से हो रहे हैं। यह दौरा न केवल सामरिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते भी खोल सकता है।

  • भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा

    भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को चार साल बाद भारत पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले और एक ही कार में बैठकर PM निवास पहुंचे, जहां पुतिन के सम्मान में प्राइवेट डिनर आयोजित किया गया। यह दृश्य सिर्फ कूटनीति नहीं था बल्कि दुनिया को भारत-रूस की रणनीतिक गहराई का मजबूत संदेश भी था। इस दौरे को अमेरिका, यूरोप, यूक्रेन और ग्लोबल मीडिया ने बेहद करीब से कवर किया क्योंकि यह ऐसे वक्त हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की धुरी बदल रही है-ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आने रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच।

    ब्रिटेन: रूस अलग-थलग नहीं, भारत उसका अहम साथी
    मिडिया के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा इस बात का संकेत है कि रूस वैश्विक मंच पर अकेला नहीं है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, विशाल मार्केट है और रूस के लिए ऊर्जा, रक्षा और कौशल-आधारित कामगारों का प्रमुख स्रोत भी। रूस को उम्मीद है कि भारत सस्ती तेल खरीद और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।रूस भारत को Su-57 फाइटर जेट और नए एयर डिफेंस सिस्टम की पेशकश कर सकता है।

    कीव इंडिपेंडेंट यूक्रेन: भारत की कूटनीति की कठिन परीक्षा

    यूक्रेनी मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बताया। भारत को रूस और यूक्रेन दोनों से रिश्ते संभालने हैं। रूस चाहता है कि भारत उसके साथ खड़ा दिखे, जबकि अमेरिका-यूरोप उम्मीद करते हैं कि मोदी पुतिन पर दबाव डालें ताकि युद्ध कमजोर पड़े।
    यूक्रेन को यह चिंता भी है कि क्या मोदी उस वादे पर टिके रहेंगे जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से युद्ध खत्म कराने में मदद का आश्वासन दिया था। साथ ही, भारत का तटस्थ रुख ध्यान खींचता है-UN में रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों पर भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई है।

    द डॉन पाकिस्तान: रक्षा से ज्यादा व्यापार पर फोकस
    पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने लिखा कि पुतिन का यह दौरा रक्षा सहयोग और खासकर आर्थिक रिश्तों को मजबूती देने पर केंद्रित है। अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है, वहीं ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त में भारत के कई उत्पादों पर 50% टैरिफ भी लगा दिया था। रूस भारत को अधिक S-400 सिस्टम और Su-57 जेट के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दे सकता है।भारत को डर है कि रूस से किसी बड़ी डील का असर अमेरिका के साथ उसके आर्थिक रिश्तों पर पड़ सकता है।

    अल जजीरा कतर: मोदी-पुतिन का व्यक्तिगत रिश्ता जगजाहिर
    अल जजीरा ने जोर दिया कि मोदी द्वारा एयरपोर्ट पर जाकर गले लगाना व्यक्तिगत संबंधों की मजबूती का संकेत है। पुतिन ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को रूसी तेल खरीदने का पूरा हक है और यह साझेदारी यूक्रेन युद्ध से प्रभावित नहीं होगी। भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है2022 से पहले रूस से सिर्फ 2.5% तेल आता था, अब यह बढ़कर करीब 36% हो गया है, जिससे भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है।

    द गार्डियन (ब्रिटेन): रूस-भारत अमेरिकी दबाव से नहीं डरते

    द गार्डियन के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-भारत संबंध ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण तनावपूर्ण हैं। इस पृष्ठभूमि में पुतिन का दिल्ली पहुंचना यह संकेत है कि भारत-रूस अपने रणनीतिक हितों को किसी तीसरे देश के दबाव पर आधारित नहीं करते। रूस के लिए यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय अलगाव की धारणा तोड़ने का मंच है जबकि भारत के लिए यह संतुलन साधने का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास।

    भारत-रूस रिश्तों की नई परिभाषा

    पुतिन की यह यात्रा प्रतीकात्मक भी है और रणनीतिक भी।
    यह दिखाती है कि- भारत रूस को ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा का अनिवार्य स्तंभ मानता है
    रूस भारत को एशिया में अपना सबसे विश्वसनीय साझेदार और अमेरिका को यह संदेश है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है। दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थीं, बल्कि उस रिश्ते की झलक थीं जो वैश्विक ध्रुवीयता के बदलते दौर में भी मजबूती से खड़ा है