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  • राजस्थान को ₹1.05 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, पीएम मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज-2 का किया शिलान्यास

    राजस्थान को ₹1.05 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, पीएम मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज-2 का किया शिलान्यास

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान को ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की सौगात देते हुए राज्य के बुनियादी ढांचे को नई गति देने का संदेश दिया। बालोतरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण किया। इन परियोजनाओं में ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर, जयपुर मेट्रो फेज-2, सौर ऊर्जा संयंत्र और सड़क अवसंरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं।

    प्रधानमंत्री ने बालोतरा के पचपदरा में विकसित देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर का उद्घाटन करते हुए इसे भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अत्याधुनिक तकनीक से विकसित यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परियोजना के माध्यम से रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन की सुविधाओं को एक ही परिसर में विकसित किया गया है।

    उन्होंने कहा कि इस प्रकार की औद्योगिक परियोजनाएं न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देंगी बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार और सहायक उद्योगों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेंगी। सरकार का लक्ष्य आधुनिक औद्योगिक ढांचा तैयार करना है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण का भी शिलान्यास किया। इस परियोजना के तहत लगभग 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद मौजूदा मेट्रो नेटवर्क के साथ जयपुर मेट्रो की कुल लंबाई 50 किलोमीटर से अधिक हो जाएगी। नई लाइन शहर के प्रमुख औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि मेट्रो विस्तार से शहर में यातायात का दबाव कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे दैनिक यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और निवेश गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री ने राजस्थान में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे विस्तार का भी उल्लेख किया और कहा कि राज्य हरित ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। इस अवसर पर बीकानेर में स्थापित बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों को राष्ट्र को समर्पित किया गया। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूत करेंगी।

    इसके अलावा जोधपुर क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का भी उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों में चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधारभूत संरचना, ऊर्जा, परिवहन और रोजगार से जुड़ी ये परियोजनाएं राजस्थान के समग्र विकास को नई दिशा देंगी तथा राज्य को औद्योगिक, आर्थिक और हरित विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन को मिली वैश्विक सराहना, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने पर जापानी मीडिया का जोर

    16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन को मिली वैश्विक सराहना, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने पर जापानी मीडिया का जोर

    नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच आयोजित 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन को लेकर जापानी मीडिया ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग में लगातार बढ़ती साझेदारी को क्षेत्रीय स्थिरता और दीर्घकालिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया है। विश्लेषणों में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और जापान के संबंध पहले की तुलना में अधिक व्यापक और मजबूत होते जा रहे हैं।

    शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई। बातचीत में आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, ऊर्जा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    जापानी मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की उपलब्धता जापान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे समय में भारत का विशाल बाजार, तेजी से विकसित होता विनिर्माण क्षेत्र और कुशल मानव संसाधन जापान के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। इसी कारण दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    विश्लेषणों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को भी प्रमुख विषय बताया गया। रिपोर्टों के अनुसार जापान भारत को स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के संदर्भ में दोनों देशों के बीच सहयोग को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा सहयोग को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा अभ्यासों को और मजबूत करने, नौसैनिक सहयोग बढ़ाने, रक्षा उपकरणों के विकास तथा आधुनिक सैन्य तकनीकों के आदान-प्रदान को गति देने पर जोर दिया। साथ ही रक्षा उत्पादन में सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई।

    बातचीत के दौरान ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक खनिज संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया। दोनों देशों ने वैश्विक आपूर्ति में आने वाली संभावित बाधाओं से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके अलावा उच्च तकनीक आधारित संचार प्रणालियों और रक्षा उपकरणों से जुड़े सहयोग को भी नई गति देने का निर्णय लिया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते संबंध केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। हालिया शिखर सम्मेलन से स्पष्ट संकेत मिला है कि दोनों देश रणनीतिक विश्वास, साझा हितों और दीर्घकालिक सहयोग के आधार पर अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में इस सहयोग के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

  • वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा और आर्थिक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में व्यवधान, व्यापारिक अनिश्चितता और मांग में कमी जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है और लगातार सुधारों के जरिए निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार किया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अनेक आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, लेकिन कठिन परिस्थितियां ही किसी देश की वास्तविक क्षमता की परीक्षा लेती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ने ऐसे समय में अपनी आर्थिक मजबूती साबित की है और आने वाले वर्षों में भी विकास की गति बनाए रखने की पूरी क्षमता रखता है।

    उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 7.7 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर्ज की, जो वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश की मजबूत आर्थिक नींव का संकेत है। उनके अनुसार पिछले बारह वर्षों में सरकार ने निरंतर सुधार की नीति अपनाते हुए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव किए हैं। लगातार सुधार और बेहतर नीतियों के माध्यम से देश के आर्थिक ढांचे को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाया गया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में कर व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कारोबार सुगमता से जुड़े नई पीढ़ी के सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों के लिए अनावश्यक बाधाओं को कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उद्योगों को अधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दे रही है और अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निवेश के लिए खोल दिया गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि उद्योगों को नीति स्थिरता, बेहतर बुनियादी ढांचा और तेज निर्णय प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए, जिससे भारत वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सके।

    प्रधानमंत्री ने जापानी उद्योग जगत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश स्थलों में शामिल रहा है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और आपसी विश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने जापानी निवेशकों से भारत में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का आग्रह किया।

    इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से विशेष ‘जापान बिजनेस वीक’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल के तहत वरिष्ठ अधिकारी जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे तथा कारोबार सुगमता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आवश्यक कदमों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग के माध्यम से भारत को वैश्विक उद्योग एवं निवेश का और अधिक आकर्षक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की मांग को लेकर दोनों देशों के प्रमुख नागरिकों द्वारा जारी संयुक्त शांति पहल अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित खुले पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस पहल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत का सवाल नहीं उठता।

    बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की नीति पहले से स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देना बंद नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर कुछ समूह भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और संवाद की पहल करते हैं, लेकिन ऐसे प्रयास तब तक व्यावहारिक नहीं हो सकते जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। उनका कहना था कि स्थायी शांति के लिए सबसे पहले आतंकवाद के ढांचे को खत्म करना आवश्यक है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र भेजा गया। पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की पूर्ण बहाली, संवाद प्रक्रिया दोबारा शुरू करने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की अपील की गई है। इसके साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करने की मांग की गई है, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का माहौल तैयार हो सके।

    संयुक्त शांति प्रस्ताव पर भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत की ओर से विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख नाम इस पहल का हिस्सा बताए गए हैं। पत्र में दोनों सरकारों से आग्रह किया गया है कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को ध्यान में रखते हुए संवाद के रास्ते फिर से खोले जाएं तथा लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाया जाए।

    इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान की भी चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद के सभी रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आतंकवाद के प्रति भारत की सख्त नीति में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

    भारत और पाकिस्तान के संबंध पिछले कई वर्षों से सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा चुनौतियों और राजनयिक तनाव के कारण प्रभावित रहे हैं। ऐसे में शांति पहल को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से यही रुख दोहराया जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ठोस कार्रवाई किसी भी संभावित संवाद की पहली और अनिवार्य शर्त है।

  • भारत के प्रति ट्रंप का विशेष लगाव, पीएम मोदी से व्यक्तिगत रिश्तों के सहारे मजबूत होगी द्विपक्षीय साझेदारी; अमेरिकी राजदूत गोर का बड़ा बयान

    भारत के प्रति ट्रंप का विशेष लगाव, पीएम मोदी से व्यक्तिगत रिश्तों के सहारे मजबूत होगी द्विपक्षीय साझेदारी; अमेरिकी राजदूत गोर का बड़ा बयान

    नई दिल्ली । भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र मानते हैं और भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत विश्वास को द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में दोनों देश व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर सकते हैं।

    अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के प्रति विशेष सम्मान रखते हैं और अक्सर अपने भारत दौरे तथा यहां के अनुभवों का उल्लेख करते हैं। उनके अनुसार अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल औपचारिक कूटनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा हितों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं।

    राजदूत गोर ने बताया कि हाल ही में वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई उनकी मुलाकात के दौरान भारत को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत में अपने अनुभवों और वहां मिले सकारात्मक माहौल को लेकर राष्ट्रपति बेहद संतुष्ट दिखाई दिए। ट्रंप के मन में भारत की कई सुखद यादें हैं और उनका पिछला भारत दौरा उनके सबसे यादगार विदेशी दौरों में शामिल रहा है। गोर ने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान एक बार फिर भारत का दौरा कर सकते हैं।

    उन्होंने दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों का उदाहरण देते हुए मियामी में आयोजित एक यूएफसी कार्यक्रम का उल्लेख किया। गोर ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने की इच्छा जताई थी। समय का अंतर देखते हुए बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई, लेकिन इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को एक करीबी मित्र के रूप में देखते हैं और उनके साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहते हैं।

    गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच विकसित व्यक्तिगत विश्वास ने पिछले वर्षों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें व्यापार, निवेश, रक्षा उत्पादन, अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। उनका मानना है कि अगले दो वर्ष दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे और इस अवधि में लिए गए निर्णय आने वाले दशकों तक सहयोग की नींव मजबूत करेंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर समय-समय पर उठने वाले संदेह वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क लगातार रिश्तों को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में अपने पिछले छह महीनों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने लगभग हर क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं देखी हैं और दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार विस्तार की ओर बढ़ रही है।

    राजदूत गोर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत प्रौद्योगिकी, रक्षा, निवेश और नवाचार को भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक हितों और रणनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर दोनों देशों की साझेदारी आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी तथा वैश्विक स्तर पर स्थिरता और विकास को भी नई दिशा देगी।

  • भारत-सेशेल्स रिश्तों को नई मजबूती, रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और ब्लू इकोनॉमी समेत 19 क्षेत्रों में बढ़ा सहयोग

    भारत-सेशेल्स रिश्तों को नई मजबूती, रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और ब्लू इकोनॉमी समेत 19 क्षेत्रों में बढ़ा सहयोग


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिवसीय सेशेल्स दौरा भारत और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स के बीच कुल 19 महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोगी पहलों पर सहमति बनी, जिनका उद्देश्य रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई दिशा देना है। इन समझौतों को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार माना जा रहा है।

    दौरे के दौरान भारत ने सेशेल्स को एक फास्ट पेट्रोल वेसल, कई यूटिलिटी वाहन, लेजर रेडियल क्लास बोट्स और छह एम्बुलेंस भेंट कीं। इन पहलों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, मानवीय सहयोग बढ़ाना और हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और प्रभावी बनाना है। साथ ही सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज की मरम्मत और डोर्नियर विमान के आधुनिकीकरण जैसे प्रोजेक्ट भी सहयोग के प्रमुख केंद्र रहे।

    आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई गति देने के लिए भारत और सेशेल्स के बीच यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू करने पर सहमति बनी। इस दिशा में दोनों देशों के संबंधित वित्तीय संस्थानों के बीच समझौते किए गए, जिससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रणाली का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी मजबूत होगा। इसके साथ ही आर्थिक सहयोग और वित्तीय समावेशन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जन औषधि योजना के तहत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण भारतीय दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा नए राष्ट्रीय अस्पताल की शुरुआती तैयारियों और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास से जुड़े समझौतों पर भी सहमति बनी, जिससे सेशेल्स की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा।

    कृषि, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग का दायरा विस्तारित किया है। कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार की गई है। वहीं प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर की स्थापना तथा विदेश सेवा से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए संस्थागत सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी। इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय क्षमता निर्माण के साथ दीर्घकालिक विकास साझेदारी को मजबूत करना है।

    ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और ब्लू इकोनॉमी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। ग्रीन हाइड्रोजन, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे, समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर साझा प्रयासों पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सेशेल्स ने आपदा-रोधी अवसंरचना से जुड़े वैश्विक गठबंधन की सदस्यता भी ग्रहण की, जिससे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सहयोग और मजबूत होगा।

    दौरे के दौरान अंतरिक्ष सहयोग, प्रत्यर्पण संधि, नाविकों के प्रशिक्षण, खाद्य सुरक्षा, विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता तथा बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण समझौते भी किए गए। भारत ने सेशेल्स को चावल और सीमेंट की आपूर्ति के साथ विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग भी उपलब्ध कराया। इन पहलों से स्पष्ट है कि दोनों देश केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि व्यापक आर्थिक, रणनीतिक और विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करने के साथ भारत-सेशेल्स संबंधों को नई ऊंचाई देने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

  • ‘मन की बात’ एपिसोड 135 में पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भरता, बचत और जनभागीदारी पर दिया जोर

    ‘मन की बात’ एपिसोड 135 में पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भरता, बचत और जनभागीदारी पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और संसाधन संरक्षण पर विशेष जोर दिया। इस दौरान उन्होंने हाल की अपनी अपीलों का सकारात्मक प्रभाव सामने आने पर नागरिकों को धन्यवाद भी दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कई परिवारों ने विवाह समारोहों में सोना खरीदने के बजाय पुराने आभूषणों के पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए कार पूलिंग जैसे उपाय अपना रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के नागरिकों ने जिस तरह सामूहिक जिम्मेदारी दिखाई है, वह सराहनीय है। उन्होंने इसे देश की बदलती सोच और जागरूक समाज का प्रतीक बताया और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने हाल ही में की गई उस अपील का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बचत, अनावश्यक विदेश यात्राओं में कमी और एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि इन कदमों से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बचत होती है, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    संबोधन में उन्होंने किसानों से प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती अपनाने का भी आग्रह दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटकर न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि खेती की लागत को भी कम किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना की हालिया उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं पर गर्व जताया। उन्होंने स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके साथ ही उन्होंने रक्षा क्षेत्र में घरेलू तकनीक के बढ़ते उपयोग को भी देश की बड़ी उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया।

    कार्यक्रम में विज्ञान, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने युवाओं को खगोल विज्ञान और विज्ञान गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और विभिन्न एस्ट्रोनॉमी क्लबों की सराहना की। उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हालिया पुरातात्विक खोजों और विदेशों से लौटाई गई ऐतिहासिक धरोहरों को भारत के लिए गर्व का विषय बताया।

    प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के तहत गंगा डॉल्फिन बचाव अभियान और पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थों के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि भारतीय जीवनशैली की समृद्ध परंपरा को भी दर्शाते हैं।

    अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने नागरिकों से वैज्ञानिक सोच अपनाने, अंधविश्वास से दूर रहने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी ही भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे ले जाती है।

  • राष्ट्रपति से पीएम मोदी और अमित शाह की लगातार मुलाकातों से बढ़ी मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें, सियासी हलचल तेज

    राष्ट्रपति से पीएम मोदी और अमित शाह की लगातार मुलाकातों से बढ़ी मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें, सियासी हलचल तेज

    नई दिल्ली । केंद्र की राजनीति में संभावित मंत्रिपरिषद विस्तार और फेरबदल को लेकर चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है। इन बैठकों को सामान्य शिष्टाचार से आगे बढ़कर संभावित राजनीतिक बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन की ओर से सोशल मीडिया पर इस बैठक की जानकारी साझा की गई, जिसमें बताया गया कि यह मुलाकात राष्ट्रपति भवन में हुई। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार को राष्ट्रपति से भेंट की थी, जिसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में मंत्रिपरिषद में संभावित बदलावों की चर्चा तेज हो गई थी।

    सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इन लगातार उच्च स्तरीय बैठकों को मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने अटकलों को और मजबूत कर दिया है।

    हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कुछ बदलाव पहले ही देखने को मिले हैं। केरल से भाजपा के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वे अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया गया।

    इसी तरह रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह का भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उच्च सदन में पुनः नामांकन नहीं हुआ है। वे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री का भी दायित्व संभाल रहे थे। ऐसे घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि सरकार संगठनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर पुनर्गठन की दिशा में विचार कर रही है।

    इसके अतिरिक्त कुछ केंद्रीय मंत्रियों को उनके गृह राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां दिए जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। इस तरह के बदलाव अक्सर राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के दृष्टिकोण से किए जाते हैं। इन्हीं संकेतों के चलते मंत्रिपरिषद विस्तार की संभावना पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार समय-समय पर अपनी टीम में बदलाव कर प्रशासनिक दक्षता और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है। ऐसे में आगामी समय में मंत्रिपरिषद में नए चेहरों की एंट्री या कुछ मौजूदा मंत्रियों की भूमिका में बदलाव संभव माना जा रहा है।

    फिलहाल सरकार की ओर से किसी भी प्रकार के आधिकारिक बयान में मंत्रिमंडल विस्तार की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राष्ट्रपति से लगातार शीर्ष नेतृत्व की मुलाकातों ने राजनीतिक वातावरण को और अधिक सक्रिय कर दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है।

  • इमरजेंसी की 51वीं बरसी पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा संदेश, बोले- संविधान पर हमला था वह दौर, नहीं भूल सकता देश लोकतंत्र का दर्द

    इमरजेंसी की 51वीं बरसी पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा संदेश, बोले- संविधान पर हमला था वह दौर, नहीं भूल सकता देश लोकतंत्र का दर्द

    नई दिल्ली । देश में लागू किए गए आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1975 के उस दौर को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया है। उन्होंने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार था। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को उस कालखंड की याद दिलाते हुए लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत का संविधान देश के प्रत्येक नागरिक की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की शक्ति केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और संस्थागत मजबूती में भी निहित होती है। उनके अनुसार आपातकाल के दौरान इन मूलभूत सिद्धांतों को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा था।

    प्रधानमंत्री ने उस दौर को याद करते हुए कहा कि देश के नागरिकों से उनकी स्वतंत्रता छीन ली गई थी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल भारतीय इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी नागरिक आसानी से नहीं भूल सकता। इस अवसर पर उन्होंने उन लोगों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और कठिन परिस्थितियों का सामना किया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उन अनगिनत नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं के साहस का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद लोकतंत्र की आवाज को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि उस समय अनेक लोगों ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। यही संघर्ष भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा का स्रोत बना।

    भारत के राजनीतिक इतिहास में 25 जून 1975 की तारीख को विशेष महत्व प्राप्त है। इसी दिन तत्कालीन सरकार की सिफारिश पर देश में आपातकाल लागू किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत घोषित इस आपातकाल का आधार आंतरिक अशांति को बताया गया था। उस समय देश में व्यापक राजनीतिक गतिविधियां चल रही थीं और विभिन्न विपक्षी दल सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे।

    आपातकाल लागू होने के बाद लगभग 21 महीनों तक देश ने असाधारण परिस्थितियों का सामना किया। इस अवधि में नागरिकों के कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए और मीडिया पर कड़ी सेंसरशिप लागू की गई। समाचार पत्रों और प्रकाशनों को सामग्री प्रकाशित करने से पहले सरकारी अनुमति की आवश्यकता पड़ती थी। इसके अलावा अनेक विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती संविधान के सम्मान और संस्थाओं की स्वतंत्रता में निहित होती है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश आज पहले से अधिक जागरूक और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को भारत की प्रगति का आधार बताते हुए इन्हीं मूल्यों के अनुरूप विकसित राष्ट्र के निर्माण का संकल्प दोहराया।

    आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर दिया गया यह संदेश केवल इतिहास की एक घटना का स्मरण नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्ता को रेखांकित करने का प्रयास भी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र की सफलता के लिए नागरिक अधिकारों, स्वतंत्र संस्थाओं और संवैधानिक मर्यादाओं का संरक्षण हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता बना रहना चाहिए।

  • युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

    युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

    नई दिल्ली । लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिक और देश के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच संवाद का एक प्रेरक उदाहरण उस समय सामने आया जब कानपुर के प्रतियोगी छात्र आशुतोष यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से व्यक्तिगत पत्र प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में आशुतोष द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और राष्ट्रहित से जुड़े उनके दृष्टिकोण की सराहना करते हुए उन्हें देश के जागरूक युवाओं का प्रतिनिधि बताया। पत्र मिलने के बाद आशुतोष ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देशवासियों से मिलने वाले आत्मीय और सकारात्मक विचार उन्हें राष्ट्रहित में लगातार कार्य करने की नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा व्यक्त भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण के विषय को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

    पत्र में प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देशभर में ऊर्जा संरक्षण को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है और विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और ऊर्जा बचत को जनभागीदारी से जुड़े अभियान का रूप देने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा आवश्यक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के संकल्प को सराहनीय बताया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में युवाओं की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और वैश्विक विषयों के प्रति जागरूकता, सकारात्मक सोच और समस्याओं के समाधान के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उनके अनुसार आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और यही वर्ग भविष्य की दिशा तय करेगा।

    प्रधानमंत्री का पत्र मिलने के बाद आशुतोष यादव ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सम्मानजनक और प्रेरणादायक क्षण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि एक सामान्य नागरिक भी अपनी बात देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकता है और उसे गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके पत्र का उत्तर मिलना स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है।

    आशुतोष ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी चिंता और सुझाव साझा किए थे। उनका मानना है कि देश के नागरिकों को राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखने और रचनात्मक सुझाव देने चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उनके विचारों को महत्व दिया जाना युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।

    आशुतोष ने पिछले कुछ वर्षों में देश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार ने आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने डिजिटल भुगतान व्यवस्था, सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार तथा आधारभूत ढांचे के विकास को महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। उनके अनुसार तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई गति प्रदान की है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान या सरकारी योजना की सफलता में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब नागरिक स्वयं किसी उद्देश्य से जुड़ते हैं, तब उसके परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं। आशुतोष का मानना है कि युवाओं में नई सोच, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता होती है, जो देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं पर व्यक्त किया गया विश्वास देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।