Tag: NarendraModi

  • एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा स्पोर्ट्स विजन: चेन्नई में होगा बीबीएल मुकाबला, भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया रोडमैप

    एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा स्पोर्ट्स विजन: चेन्नई में होगा बीबीएल मुकाबला, भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया रोडमैप


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में आयोजित विशेष कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई मजबूती देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान दोनों देशों ने क्रिकेट से लेकर खेल विज्ञान, युवा विकास और खेल उद्योग तक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

    सबसे बड़ी घोषणा बिग बैश लीग (बीबीएल) को लेकर हुई। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बताया कि 12 दिसंबर को बीबीएल के 16वें सीजन का उद्घाटन मुकाबला चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला मेलबर्न रेनेगेड्स और पर्थ स्कॉर्चर्स के बीच होगा। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में पहली बार बिग बैश लीग का कोई मैच विदेशी धरती पर आयोजित किया जाएगा, जिसे दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

    एमसीजी में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न खेलों में भाग लेने वाले युवा खिलाड़ियों से भी मुलाकात की। उन्होंने क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल खेल रहे बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि खेल लोगों और देशों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में दोनों देश युवा प्रतिभाओं के विकास, खेल प्रशिक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर और खेल विज्ञान के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त रूप से स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप भी लॉन्च किया। इस पहल के तहत खेल प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, खेल विज्ञान, निवेश और खेल उद्योग में सहयोग को नई दिशा दी जाएगी। साथ ही दोनों देशों के युवा खिलाड़ियों के लिए यूथ स्पोर्ट्स फेस्टिवल आयोजित करने की भी घोषणा की गई, जिससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सीखने का बेहतर अवसर मिलेगा।

    एमसीजी कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ और पूर्व महिला कप्तान लीसा स्थालेकर भी मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्टीव वॉ के साथ मुलाकात कर तस्वीर खिंचवाई, जबकि लीसा स्थालेकर ने प्रधानमंत्री का ऑटोग्राफ लिया। प्रधानमंत्री ने शेन वॉर्न स्टैंड का भी दौरा किया और हाल ही में महिला टी20 विश्व कप जीतने पर ऑस्ट्रेलियाई टीम को बधाई दी।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। ऐसे में दोनों देशों के पास खेल, खेल उद्योग और युवा विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के व्यापक अवसर मौजूद हैं। यह पहल भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को खेल कूटनीति के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • मेलबर्न में PM मोदी की अपील पर रोशनी से जगमगाया स्टेडियम, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के सम्मान में हजारों लोगों ने जलाईं मोबाइल फ्लैशलाइट

    मेलबर्न में PM मोदी की अपील पर रोशनी से जगमगाया स्टेडियम, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के सम्मान में हजारों लोगों ने जलाईं मोबाइल फ्लैशलाइट

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में आयोजित भारतीय समुदाय के विशाल कार्यक्रम में भारत और ऑस्ट्रेलिया की मित्रता का एक विशेष दृश्य देखने को मिला। ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत से पहले मौजूद लोगों से ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के सम्मान में अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाने का आग्रह किया। उनकी अपील के तुरंत बाद हजारों लोगों ने एक साथ अपनी फ्लैशलाइट जलाकर पूरा स्टेडियम रोशनी से भर दिया। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला और उपस्थित लोगों ने दोनों देशों की मित्रता के समर्थन में जोरदार उत्साह व्यक्त किया।

    मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आयोजन में 30 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी ने इसे ऑस्ट्रेलिया में किसी वैश्विक नेता के स्वागत के लिए आयोजित सबसे बड़े सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल कर दिया। कार्यक्रम के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते संबंधों, सांस्कृतिक जुड़ाव और आर्थिक सहयोग को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय से मिलने की खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि वह लंबे समय से इस मुलाकात का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम को “हाउसफुल” और “ब्लॉकबस्टर” बताते हुए उपस्थित लोगों के उत्साह की सराहना की। इसके बाद उन्होंने विक्टोरिया राज्य के नेतृत्व और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के सम्मान में फ्लैशलाइट जलाने की अपील की, जिसे लोगों ने पूरे उत्साह के साथ स्वीकार किया। कुछ ही क्षणों में पूरा स्टेडियम मोबाइल की रोशनी से जगमगा उठा।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होती साझेदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में दिखाई दे रहा उत्साह दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक है। उन्होंने भारत की अपनी यात्राओं का उल्लेख करते हुए वहां की संस्कृति, ऊर्जा और विकास की प्रशंसा की तथा दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों में मजबूत हुए रिश्तों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में उनके पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में यह उनका तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है, जो द्विपक्षीय संबंधों की बढ़ती मजबूती का संकेत है। उन्होंने इस प्रगति का श्रेय दोनों देशों के लोगों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय को दिया।

    प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इंडोनेशिया की यात्रा के बाद शुरू हुआ है। ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। मेलबर्न में आयोजित यह कार्यक्रम केवल भारतीय समुदाय के सम्मान का अवसर नहीं रहा, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गहराते रणनीतिक और जन-स्तरीय संबंधों का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर सामने आया।

  • राजनयिक बातचीत के बीच छाया हल्का-फुल्का अंदाज, स्कॉट मॉरिसन से पीएम मोदी ने पूछा भारतीय व्यंजनों का हाल

    राजनयिक बातचीत के बीच छाया हल्का-फुल्का अंदाज, स्कॉट मॉरिसन से पीएम मोदी ने पूछा भारतीय व्यंजनों का हाल


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में हुई एक मुलाकात ने औपचारिक कूटनीतिक चर्चाओं के बीच हल्का और आत्मीय रंग भर दिया। प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से मुलाकात के दौरान मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या वे अब भी भारतीय खाना बना रहे हैं। यह सवाल दोनों नेताओं के बीच पुराने मैत्रीपूर्ण संवाद की याद दिलाने वाला बन गया और सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ गया।

    मेलबर्न में हुई इस मुलाकात के बाद स्कॉट मॉरिसन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात के लिए समय निकाला और दोनों नेताओं ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को मिली नई गति पर चर्चा की। मॉरिसन ने हल्के अंदाज में यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री ने उनसे उनके भारतीय खाना बनाने के शौक के बारे में पूछा और जानना चाहा कि वह कैसा चल रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भी मॉरिसन के साथ मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि उनसे मिलकर हमेशा खुशी होती है। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। इस बातचीत में व्यापार, रणनीतिक सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

    मॉरिसन का भारतीय व्यंजनों से लगाव पहले भी सुर्खियों में रह चुका है। वर्ष 2022 में भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते के बाद उन्होंने भारतीय और विशेष रूप से गुजराती व्यंजन बनाकर उसका जश्न मनाया था। उस समय उन्होंने सोशल मीडिया पर रसोई में खाना बनाते हुए अपनी तस्वीरें साझा की थीं और बताया था कि उन्होंने खिचड़ी सहित कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके परिवार को भारतीय भोजन काफी पसंद आया।

    विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे व्यक्तिगत और सांस्कृतिक संवाद द्विपक्षीय संबंधों को अधिक आत्मीय बनाते हैं। औपचारिक बैठकों के साथ जब नेता एक-दूसरे की संस्कृति, भोजन और जीवनशैली में रुचि दिखाते हैं, तो दोनों देशों के लोगों के बीच भी निकटता बढ़ती है। प्रधानमंत्री मोदी और स्कॉट मॉरिसन के बीच यह बातचीत उसी सांस्कृतिक जुड़ाव का उदाहरण मानी जा रही है।

    प्रधानमंत्री वर्तमान में तीन देशों की यात्रा पर हैं और ऑस्ट्रेलिया इस दौरे का महत्वपूर्ण पड़ाव है। मेलबर्न पहुंचने पर उनका स्वागत ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय समुदाय के लोगों ने भी उत्साह के साथ किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेलबर्न का मौसम भले ठंडा हो, लेकिन भारतीय समुदाय के स्नेह और गर्मजोशी ने विशेष अनुभव कराया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देगी।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल के वर्षों में व्यापार, शिक्षा, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी सहयोग में तेजी से विस्तार हुआ है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी करीबी साझेदार माने जाते हैं। ऐसे में मेलबर्न में हुई यह मुलाकात केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने दोनों देशों के संबंधों में मौजूद मानवीय और सांस्कृतिक पहलू को भी उजागर किया।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई मजबूती देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था की पुष्टि भी की गई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, निवेश और व्यापारिक सहयोग जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक सहयोग पर भी पड़ेगा।

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था को आगे बढ़ाने की पुष्टि की। इस निर्णय को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में संयुक्त सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

    दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख दोहराते हुए हर प्रकार के आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ की कड़ी निंदा की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों, उनके समर्थकों, वित्तपोषकों और सहयोगियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने आतंकवाद से जुड़े खतरों, ऑनलाइन कट्टरपंथ, नई तकनीकों के दुरुपयोग, आतंकी वित्तपोषण और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।

    हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों नेताओं ने नियम-आधारित व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, हवाई आवाजाही और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर बल देते हुए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रयास जारी रखने की बात कही।

    यात्रा के दौरान आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में दोनों देशों के उद्योगपतियों और निवेशकों ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और निवेश से जुड़ी योजनाओं को साझा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। वहीं ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा सहयोग, निवेश और व्यापारिक साझेदारी से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच विश्वास और समन्वय पहले की तुलना में अधिक मजबूत होने की संभावना है। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को व्यापक और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

  • ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित CEO फोरम को संबोधित किया। इस दौरान दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया की ओर से गुजरात में बड़े निवेश और वहां दो प्रमुख विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने की घोषणा भी की गई, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर सहयोग का मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिसका लाभ अब व्यापार और निवेश के रूप में दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर पहुंच मिली है, जबकि दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर भी तैयार हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इस आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाकर निवेश तथा औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

    सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने गुजरात में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया का एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वर्ष के अंत में भारत का दौरा करेगा, जहां निवेश की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि राज्यों के स्तर पर भी प्रत्यक्ष सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय विकास और उद्योगों को नई गति मिल सके।

    प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    शिक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है। ऑस्ट्रेलिया की दो प्रमुख विश्वविद्यालयों ने गुजरात में अपने परिसर स्थापित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल शैक्षणिक सहयोग नहीं बल्कि प्रतिभा विकास और कौशल निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को छात्र आदान-प्रदान से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर की प्रतिभा तैयार करने पर मिलकर काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राज्यों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्थानीय संस्थानों के बीच भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच बढ़ता संवाद निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा तथा आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध आर्थिक सहयोग के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।

  • पीएम मोदी के भाषण में गूंजा 'कुछ कुछ होता है', जकार्ता से वायरल हुआ वीडियो, करण जौहर बोले- यह मेरे लिए गर्व और सम्मान का क्षण

    पीएम मोदी के भाषण में गूंजा 'कुछ कुछ होता है', जकार्ता से वायरल हुआ वीडियो, करण जौहर बोले- यह मेरे लिए गर्व और सम्मान का क्षण

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ का उल्लेख किया और भारत तथा इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को उसी संदर्भ में जोड़ते हुए एक संदेश दिया। उनके संबोधन का यह हिस्सा सामने आने के बाद वीडियो तेजी से साझा किया जाने लगा और फिल्म निर्माता करण जौहर ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लोकप्रिय गीत ‘कुछ कुछ होता है’ इंडोनेशिया में भी काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने इसी संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर आगे बढ़ते हैं तो केवल “कुछ कुछ” नहीं बल्कि “बहुत कुछ” होता है। प्रधानमंत्री का यह संदेश दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा विरासत को रेखांकित करने के रूप में देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर तेजी से वायरल हुआ। कई लोगों ने इसे भारतीय सिनेमा की वैश्विक लोकप्रियता और सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभावी उदाहरण बताया। उनके संबोधन में बॉलीवुड का उल्लेख होने से भारतीय समुदाय के साथ-साथ फिल्म जगत में भी इसे लेकर उत्साह देखा गया।

    फिल्म निर्माता और निर्देशक करण जौहर ने भी प्रधानमंत्री के इस उल्लेख पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है कि उनकी पहली निर्देशित फिल्म का जिक्र अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया गया। उन्होंने कहा कि प्रेम ऐसी भाषा है जो सीमाओं से परे होती है और इस गीत को वर्षों तक लोगों के दिलों में जीवित रखने के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।

    ‘कुछ कुछ होता है’ वर्ष 1998 में रिलीज हुई थी और यही करण जौहर के निर्देशन की पहली फिल्म थी। फिल्म ने रिलीज के समय बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी और बाद के वर्षों में भी हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में अपनी जगह बनाए रखी। इसकी कहानी, संगीत और संवाद आज भी दर्शकों के बीच याद किए जाते हैं।

    फिल्म में शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इसके अलावा सलमान खान, फरीदा जलाल, अनुपम खेर, जॉनी लीवर, सना सईद और रीमा लागू सहित कई कलाकारों की भूमिकाओं को भी दर्शकों ने सराहा था। फिल्म का संगीत और इसके गीत आज भी भारतीय सिनेमा की पहचान माने जाते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में इस फिल्म का उल्लेख यह भी दर्शाता है कि भारतीय सिनेमा विश्व के अनेक देशों में सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के बीच बॉलीवुड का प्रभाव भी दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आया है। जकार्ता में दिया गया यह संदेश केवल एक फिल्म के संदर्भ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और द्विपक्षीय मित्रता को रेखांकित करने वाला प्रतीकात्मक संदेश भी बन गया।

  • इंडोनेशिया दौरे का भव्य समापन, प्रधानमंत्री मोदी को पांच फाइटर जेट्स की विशेष एस्कॉर्ट के साथ दी गई राजकीय विदाई

    इंडोनेशिया दौरे का भव्य समापन, प्रधानमंत्री मोदी को पांच फाइटर जेट्स की विशेष एस्कॉर्ट के साथ दी गई राजकीय विदाई

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की अपनी आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए प्रस्थान किया। यात्रा के समापन पर उन्हें विशेष राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। इंडोनेशियाई वायुसेना के पांच लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट करते हुए विदाई दी, जिसे दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री की यात्रा की शुरुआत भी विशेष सम्मान के साथ हुई थी। इंडोनेशिया पहुंचने से पहले वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया था। जकार्ता पहुंचने पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं हवाई अड्डे पर मौजूद रहकर उनका स्वागत किया। यह स्वागत दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और आपसी विश्वास का संकेत माना गया।

    यात्रा के समापन के अवसर पर भी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को विदा करने पहुंचे। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ मुलाकात की और भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस सम्मानजनक विदाई ने भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरे होते संबंधों को एक बार फिर रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा के बाद संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति और वहां की जनता का आत्मीय स्वागत और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि इस यात्रा ने दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देने का काम किया है।

    यात्रा के दौरान रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नवाचार और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

    भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से समुद्री सहयोग, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों के महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा, डिजिटल तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी सहयोग को नई गति दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

    प्रधानमंत्री की इस यात्रा को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सक्रिय कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। भारत लगातार क्षेत्रीय सहयोग, मुक्त एवं सुरक्षित समुद्री मार्ग, आर्थिक साझेदारी और तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता देता रहा है। ऐसे में इंडोनेशिया के साथ बढ़ता सहयोग दोनों देशों के साझा हितों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इंडोनेशिया दौरे के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने अगले कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो गए। उनकी आगामी बैठकों में भी क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक भागीदारी, सुरक्षा, तकनीक और बहुपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरी यात्रा से भारत की इंडो-पैसिफिक नीति और क्षेत्रीय साझेदारियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

    इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्ण ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किए जाने के बाद देशभर में उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला शुरू हो गया। लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस उपलब्धि को भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। नेताओं का कहना है कि यह सम्मान भारत की सक्रिय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ते प्रभाव की व्यापक स्वीकृति को दर्शाता है।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई दिशा मिली है। उनके अनुसार यह सम्मान क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के बीच मित्रता और अधिक मजबूत होगी।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावशाली कूटनीति और भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता की वैश्विक पहचान है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है और यह सम्मान उसी बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है। उनके अनुसार भारत आज विश्व समुदाय के बीच एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी वैश्विक नेतृत्व क्षमता और भारत-इंडोनेशिया के बीच गहरे होते संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ की सफलता का भी महत्वपूर्ण संकेत है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग लगातार नए आयाम हासिल कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय विकास और साझा समृद्धि को भी बल मिलेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रदान किया। इसे इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है और यह उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक सहयोग को नई दिशा दी हो। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जा रहा है।

    सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न बताते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें मिला यह सम्मान भारत के लोगों के प्रति इंडोनेशिया की सद्भावना और दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, वहां की सरकार और जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग केवल राजनीतिक या रणनीतिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की विदेश नीति की बढ़ती स्वीकार्यता और वैश्विक स्तर पर मजबूत होती भूमिका का संकेत है। हाल के वर्षों में भारत ने विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को विस्तार दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत हुए हैं। ऐसे सम्मान न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देते हैं, बल्कि वैश्विक समुदाय में भारत की सकारात्मक और विश्वसनीय छवि को भी और सुदृढ़ बनाते हैं।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष, औद्योगिक सहयोग और तकनीक समेत अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनाई है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था और पूरी मानवता पर भी दिखाई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया दौर साझा विकास और स्थिरता को नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा दिए गए आत्मीय स्वागत और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के सम्मान के रूप में स्वीकार करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के दशकों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक है तथा भविष्य में सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा देगा।

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में विश्वास, सहयोग और रणनीतिक समझ लगातार बढ़ी है। वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नए चरण में प्रवेश कर रही है। विकास, सुरक्षा, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आगे भी इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया गया है।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के तटरक्षक बल मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति बनी है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और समुद्री संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। भारत की किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में बढ़ाने, वहां के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में सहयोग देने तथा उन्नत गेहूं के बीज उपलब्ध कराने जैसे कदमों पर सहमति बनी है। इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन से जुड़े भारतीय अनुभव भी साझा किए जाएंगे, ताकि दोनों देशों के नागरिकों तक सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

    तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने का निर्णय लिया है। भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस प्रणाली को इंडोनेशिया की भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन को सुविधा मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान का परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करने की योजना भी सामने आई है, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीकी क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों, स्टील और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भी संयुक्त प्रयासों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता में एकता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, आसियान की केंद्रीय भूमिका, संवाद आधारित कूटनीति और वैश्विक शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि के आधार पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले वर्षों में नई सफलताओं की मिसाल कायम करेंगे।

  • तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय विदेश यात्रा पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे के लिए रवाना हो गए हैं। यह यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों, उच्चस्तरीय वार्ताओं और भारतीय समुदाय के साथ संवाद के माध्यम से तीनों देशों के साथ सहयोग को और व्यापक बनाने पर जोर रहेगा। यात्रा का उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और लोगों के बीच संबंधों को नई दिशा देना भी है।

    रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत के प्रमुख विकास साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ युवाओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से भारत के वैश्विक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी को नया बल मिलेगा।

    यात्रा का पहला पड़ाव इंडोनेशिया है, जहां प्रधानमंत्री कई उच्चस्तरीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच वर्षों से मजबूत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और समुद्री संबंध रहे हैं। इस दौरे के दौरान द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा के साथ भविष्य की साझेदारी को और व्यापक बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रम भी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे, जहां रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर वार्ता होगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार और खेल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय को भारत और संबंधित देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे संवाद दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई गति देने, निवेश बढ़ाने और व्यावसायिक सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा होगी। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। भारतीय समुदाय के साथ संवाद भी इस दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, शिक्षा, कृषि, नवाचार और सेवा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित उच्चस्तरीय संवाद से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री की यह तीन देशों की यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और मुक्त, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को भी आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के भारत के प्रयासों को भी इस दौरे से नई गति मिलने की उम्मीद है।