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  • भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई मजबूती देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था की पुष्टि भी की गई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, निवेश और व्यापारिक सहयोग जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक सहयोग पर भी पड़ेगा।

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था को आगे बढ़ाने की पुष्टि की। इस निर्णय को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में संयुक्त सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

    दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख दोहराते हुए हर प्रकार के आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ की कड़ी निंदा की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों, उनके समर्थकों, वित्तपोषकों और सहयोगियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने आतंकवाद से जुड़े खतरों, ऑनलाइन कट्टरपंथ, नई तकनीकों के दुरुपयोग, आतंकी वित्तपोषण और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।

    हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों नेताओं ने नियम-आधारित व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, हवाई आवाजाही और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर बल देते हुए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रयास जारी रखने की बात कही।

    यात्रा के दौरान आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में दोनों देशों के उद्योगपतियों और निवेशकों ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और निवेश से जुड़ी योजनाओं को साझा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। वहीं ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा सहयोग, निवेश और व्यापारिक साझेदारी से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच विश्वास और समन्वय पहले की तुलना में अधिक मजबूत होने की संभावना है। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को व्यापक और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

  • ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित CEO फोरम को संबोधित किया। इस दौरान दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया की ओर से गुजरात में बड़े निवेश और वहां दो प्रमुख विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने की घोषणा भी की गई, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर सहयोग का मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिसका लाभ अब व्यापार और निवेश के रूप में दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर पहुंच मिली है, जबकि दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर भी तैयार हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इस आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाकर निवेश तथा औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

    सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने गुजरात में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया का एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वर्ष के अंत में भारत का दौरा करेगा, जहां निवेश की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि राज्यों के स्तर पर भी प्रत्यक्ष सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय विकास और उद्योगों को नई गति मिल सके।

    प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    शिक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है। ऑस्ट्रेलिया की दो प्रमुख विश्वविद्यालयों ने गुजरात में अपने परिसर स्थापित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल शैक्षणिक सहयोग नहीं बल्कि प्रतिभा विकास और कौशल निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को छात्र आदान-प्रदान से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर की प्रतिभा तैयार करने पर मिलकर काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राज्यों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्थानीय संस्थानों के बीच भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच बढ़ता संवाद निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा तथा आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध आर्थिक सहयोग के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।

  • पीएम मोदी के भाषण में गूंजा 'कुछ कुछ होता है', जकार्ता से वायरल हुआ वीडियो, करण जौहर बोले- यह मेरे लिए गर्व और सम्मान का क्षण

    पीएम मोदी के भाषण में गूंजा 'कुछ कुछ होता है', जकार्ता से वायरल हुआ वीडियो, करण जौहर बोले- यह मेरे लिए गर्व और सम्मान का क्षण

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ का उल्लेख किया और भारत तथा इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को उसी संदर्भ में जोड़ते हुए एक संदेश दिया। उनके संबोधन का यह हिस्सा सामने आने के बाद वीडियो तेजी से साझा किया जाने लगा और फिल्म निर्माता करण जौहर ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लोकप्रिय गीत ‘कुछ कुछ होता है’ इंडोनेशिया में भी काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने इसी संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर आगे बढ़ते हैं तो केवल “कुछ कुछ” नहीं बल्कि “बहुत कुछ” होता है। प्रधानमंत्री का यह संदेश दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा विरासत को रेखांकित करने के रूप में देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर तेजी से वायरल हुआ। कई लोगों ने इसे भारतीय सिनेमा की वैश्विक लोकप्रियता और सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभावी उदाहरण बताया। उनके संबोधन में बॉलीवुड का उल्लेख होने से भारतीय समुदाय के साथ-साथ फिल्म जगत में भी इसे लेकर उत्साह देखा गया।

    फिल्म निर्माता और निर्देशक करण जौहर ने भी प्रधानमंत्री के इस उल्लेख पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है कि उनकी पहली निर्देशित फिल्म का जिक्र अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया गया। उन्होंने कहा कि प्रेम ऐसी भाषा है जो सीमाओं से परे होती है और इस गीत को वर्षों तक लोगों के दिलों में जीवित रखने के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।

    ‘कुछ कुछ होता है’ वर्ष 1998 में रिलीज हुई थी और यही करण जौहर के निर्देशन की पहली फिल्म थी। फिल्म ने रिलीज के समय बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी और बाद के वर्षों में भी हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में अपनी जगह बनाए रखी। इसकी कहानी, संगीत और संवाद आज भी दर्शकों के बीच याद किए जाते हैं।

    फिल्म में शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इसके अलावा सलमान खान, फरीदा जलाल, अनुपम खेर, जॉनी लीवर, सना सईद और रीमा लागू सहित कई कलाकारों की भूमिकाओं को भी दर्शकों ने सराहा था। फिल्म का संगीत और इसके गीत आज भी भारतीय सिनेमा की पहचान माने जाते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में इस फिल्म का उल्लेख यह भी दर्शाता है कि भारतीय सिनेमा विश्व के अनेक देशों में सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के बीच बॉलीवुड का प्रभाव भी दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आया है। जकार्ता में दिया गया यह संदेश केवल एक फिल्म के संदर्भ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और द्विपक्षीय मित्रता को रेखांकित करने वाला प्रतीकात्मक संदेश भी बन गया।

  • इंडोनेशिया दौरे का भव्य समापन, प्रधानमंत्री मोदी को पांच फाइटर जेट्स की विशेष एस्कॉर्ट के साथ दी गई राजकीय विदाई

    इंडोनेशिया दौरे का भव्य समापन, प्रधानमंत्री मोदी को पांच फाइटर जेट्स की विशेष एस्कॉर्ट के साथ दी गई राजकीय विदाई

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की अपनी आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए प्रस्थान किया। यात्रा के समापन पर उन्हें विशेष राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। इंडोनेशियाई वायुसेना के पांच लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट करते हुए विदाई दी, जिसे दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री की यात्रा की शुरुआत भी विशेष सम्मान के साथ हुई थी। इंडोनेशिया पहुंचने से पहले वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया था। जकार्ता पहुंचने पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं हवाई अड्डे पर मौजूद रहकर उनका स्वागत किया। यह स्वागत दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और आपसी विश्वास का संकेत माना गया।

    यात्रा के समापन के अवसर पर भी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को विदा करने पहुंचे। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ मुलाकात की और भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस सम्मानजनक विदाई ने भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरे होते संबंधों को एक बार फिर रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा के बाद संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति और वहां की जनता का आत्मीय स्वागत और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि इस यात्रा ने दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देने का काम किया है।

    यात्रा के दौरान रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नवाचार और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

    भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से समुद्री सहयोग, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों के महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा, डिजिटल तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी सहयोग को नई गति दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

    प्रधानमंत्री की इस यात्रा को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सक्रिय कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। भारत लगातार क्षेत्रीय सहयोग, मुक्त एवं सुरक्षित समुद्री मार्ग, आर्थिक साझेदारी और तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता देता रहा है। ऐसे में इंडोनेशिया के साथ बढ़ता सहयोग दोनों देशों के साझा हितों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इंडोनेशिया दौरे के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने अगले कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो गए। उनकी आगामी बैठकों में भी क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक भागीदारी, सुरक्षा, तकनीक और बहुपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरी यात्रा से भारत की इंडो-पैसिफिक नीति और क्षेत्रीय साझेदारियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

    इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्ण ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किए जाने के बाद देशभर में उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला शुरू हो गया। लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस उपलब्धि को भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। नेताओं का कहना है कि यह सम्मान भारत की सक्रिय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ते प्रभाव की व्यापक स्वीकृति को दर्शाता है।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई दिशा मिली है। उनके अनुसार यह सम्मान क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के बीच मित्रता और अधिक मजबूत होगी।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावशाली कूटनीति और भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता की वैश्विक पहचान है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है और यह सम्मान उसी बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है। उनके अनुसार भारत आज विश्व समुदाय के बीच एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी वैश्विक नेतृत्व क्षमता और भारत-इंडोनेशिया के बीच गहरे होते संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ की सफलता का भी महत्वपूर्ण संकेत है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग लगातार नए आयाम हासिल कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय विकास और साझा समृद्धि को भी बल मिलेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रदान किया। इसे इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है और यह उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक सहयोग को नई दिशा दी हो। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जा रहा है।

    सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न बताते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें मिला यह सम्मान भारत के लोगों के प्रति इंडोनेशिया की सद्भावना और दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, वहां की सरकार और जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग केवल राजनीतिक या रणनीतिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की विदेश नीति की बढ़ती स्वीकार्यता और वैश्विक स्तर पर मजबूत होती भूमिका का संकेत है। हाल के वर्षों में भारत ने विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को विस्तार दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत हुए हैं। ऐसे सम्मान न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देते हैं, बल्कि वैश्विक समुदाय में भारत की सकारात्मक और विश्वसनीय छवि को भी और सुदृढ़ बनाते हैं।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष, औद्योगिक सहयोग और तकनीक समेत अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनाई है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था और पूरी मानवता पर भी दिखाई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया दौर साझा विकास और स्थिरता को नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा दिए गए आत्मीय स्वागत और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के सम्मान के रूप में स्वीकार करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के दशकों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक है तथा भविष्य में सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा देगा।

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में विश्वास, सहयोग और रणनीतिक समझ लगातार बढ़ी है। वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नए चरण में प्रवेश कर रही है। विकास, सुरक्षा, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आगे भी इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया गया है।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के तटरक्षक बल मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति बनी है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और समुद्री संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। भारत की किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में बढ़ाने, वहां के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में सहयोग देने तथा उन्नत गेहूं के बीज उपलब्ध कराने जैसे कदमों पर सहमति बनी है। इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन से जुड़े भारतीय अनुभव भी साझा किए जाएंगे, ताकि दोनों देशों के नागरिकों तक सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

    तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने का निर्णय लिया है। भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस प्रणाली को इंडोनेशिया की भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन को सुविधा मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान का परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करने की योजना भी सामने आई है, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीकी क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों, स्टील और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भी संयुक्त प्रयासों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता में एकता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, आसियान की केंद्रीय भूमिका, संवाद आधारित कूटनीति और वैश्विक शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि के आधार पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले वर्षों में नई सफलताओं की मिसाल कायम करेंगे।

  • तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय विदेश यात्रा पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे के लिए रवाना हो गए हैं। यह यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों, उच्चस्तरीय वार्ताओं और भारतीय समुदाय के साथ संवाद के माध्यम से तीनों देशों के साथ सहयोग को और व्यापक बनाने पर जोर रहेगा। यात्रा का उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और लोगों के बीच संबंधों को नई दिशा देना भी है।

    रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत के प्रमुख विकास साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ युवाओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से भारत के वैश्विक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी को नया बल मिलेगा।

    यात्रा का पहला पड़ाव इंडोनेशिया है, जहां प्रधानमंत्री कई उच्चस्तरीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच वर्षों से मजबूत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और समुद्री संबंध रहे हैं। इस दौरे के दौरान द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा के साथ भविष्य की साझेदारी को और व्यापक बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रम भी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे, जहां रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर वार्ता होगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार और खेल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय को भारत और संबंधित देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे संवाद दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई गति देने, निवेश बढ़ाने और व्यावसायिक सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा होगी। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। भारतीय समुदाय के साथ संवाद भी इस दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, शिक्षा, कृषि, नवाचार और सेवा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित उच्चस्तरीय संवाद से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री की यह तीन देशों की यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और मुक्त, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को भी आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के भारत के प्रयासों को भी इस दौरे से नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा कई मोर्चों पर अहम, रणनीतिक सहयोग से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी तक बनेंगे नए आयाम

    प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा कई मोर्चों पर अहम, रणनीतिक सहयोग से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी तक बनेंगे नए आयाम

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में होने वाला इंडोनेशिया दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। 6 से 8 जुलाई तक प्रस्तावित इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग, कृषि, खनिज संसाधनों और सांस्कृतिक संबंधों सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहेगा।

    भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा और भविष्य की सहयोग योजनाओं को गति देने का अवसर भी मानी जा रही है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों को साझा प्राथमिकता मानते हैं।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और रक्षा उद्योग में सहयोग को और व्यापक बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी और हिंद महासागर क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने के पक्षधर हैं।

    आर्थिक सहयोग भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा। भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश निवेश के नए अवसरों की तलाश में हैं। विनिर्माण, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। दोनों देशों के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

    महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता को देखते हुए दोनों देश आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

    डिजिटल सहयोग इस यात्रा का एक और प्रमुख आयाम है। दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान प्रणाली, ई-कॉमर्स, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। इससे व्यापार, पर्यटन, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को और अधिक सरल तथा प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कृषि, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े क्षेत्रों में भी अनुभव साझा करने पर जोर रहेगा। टिकाऊ कृषि, खाद्यान्न सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण व्यवस्था, डिजिटल कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देश एक-दूसरे के सफल मॉडलों से सीखने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

    इस यात्रा का सांस्कृतिक पक्ष भी विशेष महत्व रखता है। भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और समुद्री संबंध रहे हैं। साझा विरासत, सभ्यतागत जुड़ाव और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उच्चस्तरीय मुलाकातों का आयोजन भी प्रस्तावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को व्यापक रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी के नए चरण में पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • राजस्थान को ₹1.05 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, पीएम मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज-2 का किया शिलान्यास

    राजस्थान को ₹1.05 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, पीएम मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज-2 का किया शिलान्यास

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान को ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की सौगात देते हुए राज्य के बुनियादी ढांचे को नई गति देने का संदेश दिया। बालोतरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण किया। इन परियोजनाओं में ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर, जयपुर मेट्रो फेज-2, सौर ऊर्जा संयंत्र और सड़क अवसंरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं।

    प्रधानमंत्री ने बालोतरा के पचपदरा में विकसित देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर का उद्घाटन करते हुए इसे भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अत्याधुनिक तकनीक से विकसित यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परियोजना के माध्यम से रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन की सुविधाओं को एक ही परिसर में विकसित किया गया है।

    उन्होंने कहा कि इस प्रकार की औद्योगिक परियोजनाएं न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देंगी बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार और सहायक उद्योगों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेंगी। सरकार का लक्ष्य आधुनिक औद्योगिक ढांचा तैयार करना है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण का भी शिलान्यास किया। इस परियोजना के तहत लगभग 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद मौजूदा मेट्रो नेटवर्क के साथ जयपुर मेट्रो की कुल लंबाई 50 किलोमीटर से अधिक हो जाएगी। नई लाइन शहर के प्रमुख औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि मेट्रो विस्तार से शहर में यातायात का दबाव कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे दैनिक यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और निवेश गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री ने राजस्थान में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे विस्तार का भी उल्लेख किया और कहा कि राज्य हरित ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। इस अवसर पर बीकानेर में स्थापित बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों को राष्ट्र को समर्पित किया गया। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूत करेंगी।

    इसके अलावा जोधपुर क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का भी उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों में चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधारभूत संरचना, ऊर्जा, परिवहन और रोजगार से जुड़ी ये परियोजनाएं राजस्थान के समग्र विकास को नई दिशा देंगी तथा राज्य को औद्योगिक, आर्थिक और हरित विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन को मिली वैश्विक सराहना, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने पर जापानी मीडिया का जोर

    16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन को मिली वैश्विक सराहना, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने पर जापानी मीडिया का जोर

    नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच आयोजित 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन को लेकर जापानी मीडिया ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग में लगातार बढ़ती साझेदारी को क्षेत्रीय स्थिरता और दीर्घकालिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया है। विश्लेषणों में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और जापान के संबंध पहले की तुलना में अधिक व्यापक और मजबूत होते जा रहे हैं।

    शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई। बातचीत में आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, ऊर्जा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    जापानी मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की उपलब्धता जापान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे समय में भारत का विशाल बाजार, तेजी से विकसित होता विनिर्माण क्षेत्र और कुशल मानव संसाधन जापान के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। इसी कारण दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    विश्लेषणों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को भी प्रमुख विषय बताया गया। रिपोर्टों के अनुसार जापान भारत को स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के संदर्भ में दोनों देशों के बीच सहयोग को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा सहयोग को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा अभ्यासों को और मजबूत करने, नौसैनिक सहयोग बढ़ाने, रक्षा उपकरणों के विकास तथा आधुनिक सैन्य तकनीकों के आदान-प्रदान को गति देने पर जोर दिया। साथ ही रक्षा उत्पादन में सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई।

    बातचीत के दौरान ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक खनिज संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया। दोनों देशों ने वैश्विक आपूर्ति में आने वाली संभावित बाधाओं से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके अलावा उच्च तकनीक आधारित संचार प्रणालियों और रक्षा उपकरणों से जुड़े सहयोग को भी नई गति देने का निर्णय लिया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते संबंध केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। हालिया शिखर सम्मेलन से स्पष्ट संकेत मिला है कि दोनों देश रणनीतिक विश्वास, साझा हितों और दीर्घकालिक सहयोग के आधार पर अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में इस सहयोग के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।