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  • भारत-रूस रिश्तों पर पुतिन का बड़ा बयान, कहा- कोई बाहरी ताकत नहीं डाल सकती असर; 100 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्य

    भारत-रूस रिश्तों पर पुतिन का बड़ा बयान, कहा- कोई बाहरी ताकत नहीं डाल सकती असर; 100 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्य

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही अहम बातचीत के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के संबंधों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारत को एक महान राष्ट्र, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और रूस का भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं हो सकते। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी खुलकर सराहना की और भारत की आर्थिक प्रगति को उनकी सरकार की नीतियों का परिणाम बताया।

    सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम के दौरान दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों से बातचीत करते हुए पुतिन ने कहा कि भारत आज विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी विकास दर दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है। उन्होंने कहा कि भारत की यह उपलब्धि उसके नेतृत्व, स्थिर नीतियों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की सोच का परिणाम है।

    रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका सहित कुछ देशों द्वारा भारत पर रूस के साथ संबंधों को लेकर बनाए जाने वाले दबाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े और स्वतंत्र देश पर किसी प्रकार का राजनीतिक या आर्थिक दबाव बनाना आसान नहीं है। उनके अनुसार डेढ़ अरब से अधिक आबादी वाले देश के अपने राष्ट्रीय हित हैं और वह उन्हीं के आधार पर अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आर्थिक साझेदारियों का निर्धारण करता है। पुतिन ने संकेत दिया कि किसी भी देश द्वारा भारत की विदेश नीति को प्रभावित करने का प्रयास अंततः उसके अपने हितों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

    भारत-रूस आर्थिक सहयोग का उल्लेख करते हुए पुतिन ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की पूरी संभावना मौजूद है। उनके अनुसार ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, जिनका लाभ दोनों देशों को मिलेगा।

    पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका एक बार फिर सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दी गई कुछ प्रतिबंध छूटों की समीक्षा की जा सकती है। भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है जिन्होंने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के दौरान रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया है। ऐसे में पुतिन का बयान भारत-रूस ऊर्जा सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रूस और भारत के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को लेकर पुतिन ने भरोसा जताया कि दोनों देश भविष्य में भी विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने दीर्घकालिक सहयोग की ऐसी रूपरेखा तैयार की है जो पारस्परिक लाभ और साझा विकास पर आधारित है।

    विशेष महत्व की बात यह है कि पुतिन का यह बयान उनके प्रस्तावित भारत दौरे से पहले आया है। सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उनके शामिल होने की संभावना है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज़ हैं। ऐसे में पुतिन के हालिया बयान को भारत-रूस संबंधों की मजबूती और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

  • मोदी सरकार पर राहुल गांधी का नया हमला, महंगाई और रोजगार के मुद्दों पर साधा निशाना

    मोदी सरकार पर राहुल गांधी का नया हमला, महंगाई और रोजगार के मुद्दों पर साधा निशाना


    नई दिल्ली । देश की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज बना हुआ है। इसी बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अपनी पहले की बात दोहराते हुए दावा किया कि आने वाले समय में देश की राजनीतिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उनके इस बयान के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है।

    दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने कहा कि देश के सामने महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याएं लगातार गंभीर रूप ले रही हैं और इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार कई सवालों के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान यह भी कहा कि बदलते राजनीतिक माहौल में जनता कई मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर रही है। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। विपक्षी दलों के नेता इसे सरकार के खिलाफ बढ़ती असंतुष्टि से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया है।

    राजनीतिक चर्चा के बीच सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी इस बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। पार्टी संगठन और राजनीतिक ढांचे में अनुसूचित जाति समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत कैसे बनाया जाए तथा समाज के विभिन्न वर्गों को राजनीतिक प्रक्रिया में अधिक अवसर कैसे दिए जाएं।

    बैठक में शामिल नेताओं ने सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि कांग्रेस आने वाले समय में संगठनात्मक स्तर पर कुछ नई रणनीतियों पर काम कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभिन्न राज्यों में पार्टी अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है और इसी दिशा में सामाजिक समीकरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    इस दौरान भाजपा की ओर से भी राहुल गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार स्थिर और मजबूत स्थिति में है तथा विपक्ष के दावों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों दलों के नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया।

    देश की राजनीति में आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम होने हैं और ऐसे में बड़े नेताओं के बयान लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। फिलहाल राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक बहस को एक नई दिशा दे दी है और अब सभी की नजर आने वाले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों पर बनी हुई है।

  • पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद

    पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में ईंधन के संयमित उपयोग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील के बाद मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। पीएम ने हाल ही में देशवासियों से कार पूलिंग, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की बात कही थी, ताकि वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों की बचत की जा सके।

    हालांकि, इस अपील के बाद भी राज्य में कई नेताओं के बड़े-बड़े काफिले निकलते नजर आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां दर्जनों से लेकर सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन किया।

    कुछ मामलों में पार्टी स्तर पर कार्रवाई भी हुई है। भिंड में किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया, क्योंकि वे लगभग 100 वाहनों के काफिले और बग्घी के साथ कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहीं, पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष पर भी कार्रवाई करते हुए उनका अधिकार सीमित कर दिया गया, जब उन्होंने उज्जैन से भोपाल तक करीब 700 वाहनों का काफिला निकाला, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।

    लेकिन कई अन्य मामलों में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ विधायकों और मोर्चा पदाधिकारियों पर भी इसी तरह के काफिलों के आरोप लगे हैं, जहां 200 से अधिक गाड़ियों के साथ रैलियां निकाली गईं। इनमें मंदिर दर्शन, स्वागत कार्यक्रम और पार्टी आयोजनों के दौरान शक्ति प्रदर्शन के दृश्य सामने आए हैं।

    वहीं दूसरी ओर कुछ उदाहरण ऐसे भी सामने आए हैं जो अलग संदेश देते हैं, जैसे एक मंत्री द्वारा बस से यात्रा कर आम लोगों के बीच पहुंचना और ईंधन बचत की अपील को समर्थन देना।

    इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जहां एक तरफ जनता से संयम की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी संस्कृति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है और लोग नेताओं के इस दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

    अब देखना होगा कि सरकार और पार्टी संगठन इस पर आगे क्या सख्त कदम उठाते हैं, या यह विवाद सिर्फ नोटिस और बयानबाजी तक सीमित रह जाता है।

  • डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद

    डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को एक अलग ही माहौल देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें संस्करण का जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ सामूहिक श्रवण किया। वीआईपी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित इस कार्यक्रम में आमजन की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली जिससे यह एक जनसंवाद का मंच बन गया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मन की बात आज देशवासियों के दिलों में अपनी खास जगह बना चुका है और यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि करोड़ों लोगों को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए समाज के प्रेरक कार्यों नवाचारों और सकारात्मक प्रयासों को सामने लाया जाता है जिससे लोगों को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए 2027 में होने वाली डिजिटल जनगणना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना बताते हुए कहा कि इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से की जाएगी। घर घर जाकर जानकारी एकत्र करने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप होगा जिसमें नागरिकों की जानकारी सीधे दर्ज की जाएगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस बार नागरिकों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है। कर्मचारी के आने से लगभग 15 दिन पहले यह सुविधा शुरू होगी जिससे लोग अपने समय अनुसार जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद उन्हें एक विशेष आईडी मिलेगी जिसे वे कर्मचारी के आने पर दिखाकर अपनी जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया सरल होगी और समय की बचत भी होगी।

    उन्होंने जानकारी दी कि जिन राज्यों में स्व गणना का कार्य पूरा हो चुका है वहां घरों के सूचीकरण का काम भी शुरू हो गया है और अब तक करीब 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में बढ़ चढ़कर भाग लें क्योंकि यह केवल सरकारी कार्य नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उपस्थित युवाओं और आमजनों से आत्मीय संवाद भी किया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान और स्वरोजगार जैसे विषयों पर चर्चा की और बताया कि राज्य सरकार महिलाओं की शिक्षा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से भी मुलाकात की और उनसे संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के महत्व और बड़ों के सम्मान की सीख दी तथा उनके साथ समय बिताया।

    कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात देश को सकारात्मक दिशा देने का एक अनूठा प्रयास है। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है और जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है।

    कुल मिलाकर भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक रेडियो प्रसारण नहीं बल्कि जनसंवाद और जनभागीदारी का उदाहरण बनकर सामने आया जिसमें सरकार और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने की झलक देखने को मिली।

  • ग्रोक के जवाब ने बढ़ाई सियासी बहस, विकास और वंशवाद पर नई बहस शुरू..

    ग्रोक के जवाब ने बढ़ाई सियासी बहस, विकास और वंशवाद पर नई बहस शुरू..

    नई दिल्ली। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक एआई चैटबॉट की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को एक नया मोड़ दे दिया है। एक काल्पनिक प्रश्न के जवाब में दिए गए इस उत्तर ने इंटरनेट पर तेजी से ध्यान खींचा और कुछ ही समय में यह बातचीत व्यापक रूप से वायरल हो गई। इस संवाद में एआई से भारत के राजनीतिक नेतृत्व को लेकर एक राय पूछी गई थी, जिसके जवाब ने लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया।

    एआई ने अपने उत्तर में यह स्पष्ट किया कि वह किसी भी प्रकार से मतदान करने या नागरिक होने की क्षमता नहीं रखता, लेकिन यदि काल्पनिक रूप से देखा जाए तो वह निर्णय विकास आधारित आंकड़ों और शासन के परिणामों के आधार पर लेगा। इसके बाद उसने अपने विश्लेषण में बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और आर्थिक प्रगति जैसे पहलुओं का उल्लेख किया, जिन्हें शासन की सफलता के प्रमुख मानक के रूप में बताया गया।

    इस उत्तर में यह विचार भी सामने आया कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल राजनीतिक संरचनाओं या परंपराओं के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस विकास परिणामों के आधार पर होना चाहिए। इसी संदर्भ में एआई की टिप्पणी में यह धारणा उभरी कि आंकड़ों और वास्तविक प्रगति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिसने बहस को और अधिक तेज कर दिया।

    जैसे ही यह बातचीत सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर इसे लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे एआई की विश्लेषण क्षमता का उदाहरण बताया, जबकि कुछ ने इसे डिजिटल युग में बदलती राजनीतिक चर्चाओं का संकेत माना। विशेष रूप से “वंशवाद से ऊपर आंकड़े” जैसी पंक्ति ने लोगों का ध्यान सबसे अधिक आकर्षित किया और यह विचार विभिन्न मंचों पर तेजी से फैल गया।

    यह एआई सिस्टम वास्तविक समय में उपलब्ध सार्वजनिक डेटा और ऑनलाइन चर्चाओं का विश्लेषण करके उत्तर तैयार करता है। इसकी खासियत यह है कि यह स्थिर जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा ट्रेंड और चर्चाओं के आधार पर प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करता है, जिससे इसके उत्तर अधिक ताजगी और संदर्भ के साथ सामने आते हैं।

    हालांकि इस तरह के एआई मॉडल को लेकर अलग-अलग मत भी सामने आते हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे सूचना को समझने और सरल बनाने का एक प्रभावी माध्यम मानते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद अधूरी या पक्षपाती जानकारी इसके उत्तरों को प्रभावित कर सकती है।

  • भारत में लॉकडाउन नहीं लगेगा, तीन मंत्रियों ने किया स्पष्ट और जमाखोरों को दी चेतावनी

    भारत में लॉकडाउन नहीं लगेगा, तीन मंत्रियों ने किया स्पष्ट और जमाखोरों को दी चेतावनी


    नई दिल्ली:  पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच भारत में लॉकडाउन और ईंधन की किल्लत को लेकर फैल रही अफवाहों ने शुक्रवार को सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि केंद्र सरकार ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार करार देते हुए जनता को शांति बनाए रखने की अपील की है।

    सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरीने- स्पष्ट किया कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई इरादा नहीं है और जनता को पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान जैसा लॉकडाउन देखा गया था, वैसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

    इस अफवाह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए हालिया बयान के बाद हुई। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट के लंबे प्रभावों की चेतावनी दी थी और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए एकजुट रहने की बात कही थी। इसे कुछ लोगों ने गलत तरीके से लॉकडाउन से जोड़कर प्रचारित कर दिया।

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो और कोई भी आवश्यक वस्तुओं की होर्डिंग न करे। उन्होंने जमाखोरों को भी सख्त चेतावनी दी।

    पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईंधन की कमी की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि डर का माहौल बनाना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने साफ किया कि सरकार के पास लॉकडाउन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति लगातार बनी हुई है।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजनीतिक गलियारों में उठ रही इन चर्चाओं पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि कोविड के समय जैसा लॉकडाउन देखा गया, वैसा अब लागू नहीं होगा और अफवाहें केवल जनता में चिंता फैलाने के उद्देश्य से हैं।

    केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध जारी है। इस प्रकार जनता को किसी भी तरह की घबराहट या अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए और शांत एवं जिम्मेदार बने रहना चाहिए।

  • मोदी सरकार ने साफ किया रुख, लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह फर्जी, घबराने की जरूरत नहीं

    मोदी सरकार ने साफ किया रुख, लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह फर्जी, घबराने की जरूरत नहीं


    नई दिल्ली:
    देश में एक बार फिर लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इन खबरों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। हाल ही में वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव विशेषकर ईरान और इजराइल से जुड़े घटनाक्रमों के कारण तेल संकट की आशंका ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी थी। इसी के चलते सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि भारत में फिर से कोविड जैसी पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और देश में हालात पूरी तरह सामान्य हैं।

    केंद्रीय मंत्रियों किरण रिजिजू और हरदीप सिंह पुरी ने सामने आकर इन अफवाहों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को लेकर जो भी खबरें फैलाई जा रही हैं वे पूरी तरह निराधार हैं और सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांत एवं जिम्मेदार व्यवहार बनाए रखें।

    किरण रिजिजू ने संसद के बाहर बातचीत में साफ कहा कि देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नरेंद्र मोदी स्वयं स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा आम जनता को न हो। उन्होंने जमाखोरी करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनी रहे और कृत्रिम संकट पैदा न हो।

    वहीं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तेल की कीमतों को लेकर सरकार की रणनीति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद सरकार ने ऐसा रास्ता चुना है जिससे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास विकल्प था कि अन्य देशों की तरह कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर खुद वित्तीय भार उठाया जाए और सरकार ने नागरिकों के हित में दूसरा विकल्प चुना।

    पुरी ने यह भी कहा कि भारत ने पहले भी वैश्विक संकटों के दौरान अपनी मजबूती दिखाई है और इस बार भी समय पर और संतुलित निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि लॉकडाउन को लेकर फैल रही बातें पूरी तरह गलत हैं और इस तरह की अफवाहें फैलाना गैर जिम्मेदाराना है।दरअसल यह भ्रम उस समय बढ़ा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में वैश्विक हालात को देखते हुए सतर्क रहने और तैयार रहने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि दुनिया में बने कठिन हालात का असर लंबे समय तक रह सकता है और हमें मिलकर इसका सामना करना होगा। इस बयान को कुछ लोगों ने गलत तरीके से समझ लिया और सोशल मीडिया पर लॉकडाउन को लेकर अटकलें शुरू हो गईं।

    सरकार ने अब साफ कर दिया है कि देश में किसी भी प्रकार के लॉकडाउन की योजना नहीं है। ऐसे समय में जरूरी है कि लोग अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित कर रही है कि देश में सामान्य जीवन प्रभावित न हो।

  • नई दिल्ली में मोदी धामी बैठक मार्गदर्शन के साथ भेंट हुई मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति

    नई दिल्ली में मोदी धामी बैठक मार्गदर्शन के साथ भेंट हुई मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति


    नई दिल्ली में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राजनीतिक संवाद के साथ सांस्कृतिक आस्था का भी सशक्त संदेश दिया। यह मुलाकात न केवल औपचारिक रही बल्कि इसमें मार्गदर्शन परंपरा और जनहित के विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इस बैठक की जानकारी साझा की गई जिससे यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय और संवाद लगातार मजबूत हो रहा है।

    मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ जो राज्य के विकास और जनकल्याण के कार्यों में दिशा देने वाला है। उन्होंने इस मुलाकात के दौरान रामनवमी की शुभकामनाएं भी प्रधानमंत्री को दी जिससे यह भेंट केवल राजनीतिक न रहकर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावनाओं से भी जुड़ गई।

    इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति भेंट की जो उत्तराखंड की आस्था और परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने बद्री गाय का घी पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादित विभिन्न प्रकार के राजमा और शहद भी उपहार स्वरूप दिए। ये सभी उपहार उत्तराखंड की समृद्ध जैविक परंपरा और स्थानीय उत्पादों की पहचान को दर्शाते हैं।

    मुख्यमंत्री धामी ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने अपने संदेश में प्रधानमंत्री को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया जो देश को नई दिशा नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का नेतृत्व सेवा समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प से प्रेरित है और वे गरीबों किसानों युवाओं और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

    इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में की गई कटौती को भी प्रधानमंत्री का दूरदर्शी और जनहितकारी निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों विशेषकर मिडिल ईस्ट संकट के बीच लिया गया यह निर्णय आम जनता को राहत देने वाला है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी से जहां आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा वहीं आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब भी देश ने किसी चुनौती का सामना किया है तब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मजबूत नेतृत्व और प्रभावी निर्णयों से देशवासियों के हितों की रक्षा की है। डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क के माध्यम से देश में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

  • भारत-अमेरिका महा-डील: वाशिंगटन से आएंगे 'खतरनाक' हथियार, टैरिफ युद्ध खत्म होने के बाद रक्षा संबंधों में नई गर्मी

    भारत-अमेरिका महा-डील: वाशिंगटन से आएंगे 'खतरनाक' हथियार, टैरिफ युद्ध खत्म होने के बाद रक्षा संबंधों में नई गर्मी


    नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच हाल ही में हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील ने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में नई गर्मजोशी भर दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वाशिंगटन अब भारत को और भी खतरनाक हथियार प्रणालियों की आपूर्ति करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस कदम का सीधा उद्देश्य भारत की रक्षा क्षमता और सैन्य आधुनिकीकरण को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करना है। यह महत्वपूर्ण विकास ऐसे समय में हुआ है, जब पिछले कुछ वर्षों में दोनों महाशक्तियों के बीच रणनीति और व्यापार को लेकर कई उतार-चढ़ाव देखे गए थे।

    पिछले कुछ समय में राष्ट्रपति ट्रंप के शासनकाल के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधों में काफी ठंडापन महसूस किया गया था। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर कड़ी टिप्पणियां की थीं और कई कड़े अमेरिकी टैरिफ भारत पर थोप दिए थे, जिससे आपसी सहयोग पर दबाव बढ़ गया था। लेकिन नई ट्रेड डील के बाद हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत के भारी टैरिफ को घटाकर अब मात्र 18 प्रतिशत कर दिया है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत है। इसके बदले में भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की संभावना जताई है।

    अमेरिकी विदेश विभाग में एशियाई मामलों के सहायक सचिव पॉल कपूर ने आधिकारिक पुष्टि की है कि दोनों देश रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और भारत अधिक उन्नत हथियार प्रणालियों की खरीद पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे न केवल भारत की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। यह सप्लाई श्रृंखला दोनों देशों के बीच एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है, जिसमें ऊर्जा उत्पादों से लेकर उच्च तकनीक वाले सैन्य उपकरणों तक सब कुछ शामिल है।

    वर्तमान रक्षा परिदृश्य की बात करें तो भारत ने 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अमेरिका के साथ समुद्री निगरानी विमानों और अन्य बड़ी सैन्य प्रणालियों पर गहन चर्चा जारी है। हालांकि, इस सौदे में फिलहाल एफ-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमानों की खरीद पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका लगातार भारत को अपने रक्षा खेमे में लाने के प्रयास कर रहा है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अपनी जरूरतों के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ तकनीक का चयन कर रहा है।

    भारत के लिए यह संतुलन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि रूस स्वतंत्रता के बाद से ही भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार रहा है। अमेरिका ने कई बार भारत को पूरी तरह अपने पक्ष में करने की कोशिश की है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की स्वायत्तता वाली विदेश नीति ने दोनों देशों के साथ संतुलन बनाए रखा है। इस नई डील के बाद यह साफ हो गया है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया भरोसा पैदा हुआ है। यह समझौता न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भविष्य की सुनहरी तस्वीर पेश करता है, जहाँ दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करेंगे।