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  • छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    नई दिल्ली ।शारदीय नवरात्रि के दौरान आम तौर पर मां दुर्गा की आराधना नौ दिनों तक की जाती है, लेकिन छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की पूजा परंपरा इससे अलग है। यहां बंगाली पंचांग के अनुसार मां दुर्गा की स्थापना पंचमी के दिन की जाती है और पांच दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जबकि बंगाली समाज 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना करेगा और 21 अक्टूबर को विसर्जन किया जाएगा।

    मोहन नगर में बंगाली समाज की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन पिछले करीब 40 वर्षों से किया जा रहा है। इस दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए दुर्गा पंडाल में एक साथ मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके अलावा महिषासुर की मूर्ति भी स्थापित की जाती है। बंगाली समाज में दुर्गा पूजा के लिए अलग विधि-विधान का पालन किया जाता है और इसी परंपरा के अनुसार पांच दिनों तक मां की आराधना की जाती है।

    इस बार बंगाली पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना होगी। पूजा का समापन 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा। इस तरह यहां नवरात्रि के पूरे नौ दिनों के बजाय पंचमी से शुरू होकर पांच दिनों तक दुर्गा पूजा की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। पूजा के दौरान अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और कई कार्यक्रम सुबह के समय आयोजित किए जाएंगे।

    बंगाली समाज की पूजा में अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। दोनों तिथियों को मिलाकर एक विशेष पूजा की जाती है, जिसे संधी पूजा कहा जाता है। बंगाली दुर्गा पूजा की परंपरा में इसका खास महत्व माना जाता है। पांच दिनों की इस पूजा व्यवस्था में धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन बंगाली पंचांग और परंपरागत विधि-विधान के अनुसार किया जाता है।

    दुर्गा पूजा के लिए मूर्तियां तैयार करने का काम भी कई महीने पहले शुरू हो जाता है। पश्चिम बंगाल से आने वाले मूर्तिकार छिंदवाड़ा में करीब चार महीने पहले पहुंचते हैं। यहां वे बंगाली समाज की ओर से दिए गए ऑर्डर के अनुसार दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। मूर्तियों को पूजा के लिए निर्धारित समय तक पूरी तरह तैयार करने के लिए यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलती है।

    मूर्तिकार अपने साथ पश्चिम बंगाल से मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष मिट्टी भी लेकर आते हैं। इसके अलावा मां दुर्गा की प्रतिमा के कपड़े और सजावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बंगाल से ही लाई जाती है। छिंदवाड़ा पहुंचने के बाद मूर्तिकार इन सामग्रियों के साथ चार महीने तक प्रतिमाओं को तैयार करने और उन्हें सजाने का काम करते हैं। पूजा के लिए प्रतिमाओं की तैयारी और सजावट की यह प्रक्रिया पिछले करीब 40 वर्षों से इसी तरह चल रही है।

    छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की यह दुर्गा पूजा स्थानीय स्तर पर अपनी अलग धार्मिक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां स्थापना का समय, पूजा की अवधि, प्रतिमाओं की संख्या और संधी पूजा जैसी परंपराएं बंगाली पंचांग के अनुसार तय होती हैं। इस वर्ष भी समाज इसी परंपरा के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना कर पांच दिनों तक पूजा-अर्चना करेगा और 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

  • गरबा में रील, लाइक और व्यूज के लिए शामिल न हों मुस्लिम युवा, मुस्लिम त्योहार कमेटी ने की संयम बरतने की अपील

    गरबा में रील, लाइक और व्यूज के लिए शामिल न हों मुस्लिम युवा, मुस्लिम त्योहार कमेटी ने की संयम बरतने की अपील

    मध्य प्रदेश।  में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के दौरान माता की आराधना-पूजा, व्रत और गरबा समेत कई धार्मिक आयोजन होते हैं। इसी को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मुस्लिम विद्यार्थियों और युवाओं से जिम्मेदार और संयमित व्यवहार करने की अपील की है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमशुल हसन ने युवाओं से कहा है कि वे केवल सोशल मीडिया पर रील, लाइक और व्यूज हासिल करने के लिए किसी धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल होने से बचें। कमेटी का कहना है कि किसी व्यक्ति का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कई बार सिर्फ उसकी व्यक्तिगत गलती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर परिवार और समाज पर भी पड़ सकता है।

    कमेटी ने मुस्लिम युवाओं से गरबा आयोजनों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। साथ ही युवाओं से शांति, संयम, धार्मिक मर्यादा और कानून का पालन करने को कहा गया है। इस संबंध में मुस्लिम त्योहार कमेटी ने शासन-प्रशासन को पत्र भेजकर आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध भी किया है। कमेटी ने मांग की है कि 11 अक्टूबर से पहले यह संदेश विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी एवं चिकित्सा संस्थानों और छात्रावासों तक पहुंचाया जाए, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं को समय रहते जागरूक किया जा सके। कमेटी ने कहा है कि युवा सभी धर्मों की आस्था और परंपराओं का सम्मान करें तथा स्थानीय नियमों और कानूनों का पालन करें।

    कमेटी ने युवाओं को ऐसे किसी विवाद, टकराव, उकसावे या अनुचित प्रतिक्रिया से दूर रहने की सलाह दी है, जिससे सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए खास तौर पर रील बनाने, लाइक और व्यूज हासिल करने या सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए किसी धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल नहीं होने की अपील की गई है। कमेटी का कहना है कि सोशल मीडिया पर कुछ मिनटों की लोकप्रियता के लिए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे बाद में विवाद पैदा हो या परिवार और समाज को परेशानी का सामना करना पड़े।

    शमशुल हसन ने कहा कि जब एक समुदाय की ओर से यह संकेत दिया जा रहा है कि मुस्लिम समाज के लोग उनके धार्मिक आयोजनों से दूरी बनाएं, तो इसे विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश के सामाजिक संगठनों, उलेमाओं और काजियों से आगे आने और मुस्लिम समाज के नौजवानों, बच्चों और बच्चियों से गरबा सहित दूसरे धार्मिक आयोजनों से दूरी बनाए रखने की अपील करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमेटी का उद्देश्य किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं है। उनका कहना है कि किसी धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल होकर ऐसा कोई काम नहीं किया जाना चाहिए, जिससे विवाद की स्थिति बने या समाज में तनाव पैदा हो।

    उन्होंने देश और प्रदेश के युवाओं, बच्चों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से भी अपील की कि वे सिर्फ रील, लाइक और व्यूज के लिए किसी धार्मिक आयोजन में शामिल न हों। साथ ही ऐसी कोई रील या वीडियो वायरल न करने को कहा, जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों या विवाद की स्थिति पैदा हो। कमेटी की ओर से प्रदेश, जिला और स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में उलेमाओं और सामाजिक संगठनों से संपर्क करने तथा मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करने को कहा जाएगा। कमेटी जिला प्रशासन से भी संपर्क करेगी और अमन व शांति बनाए रखने का संदेश देगी। कमेटी ने कहा कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए वह उलेमाओं, सामाजिक संगठनों और प्रशासन के साथ मिलकर सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

    कमेटी ने स्पष्ट किया है कि उसकी अपील किसी धर्म, धार्मिक आयोजन या गरबा कार्यक्रम के विरोध में नहीं है। इसका उद्देश्य मुस्लिम युवाओं को जिम्मेदार व्यवहार, धार्मिक मर्यादा, कानून के पालन और सामाजिक सद्भाव के प्रति जागरूक करना है। कमेटी ने कहा है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सभी समुदायों को एक-दूसरे की आस्था और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहिए।

  • नवरात्रि 2026 में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को चढ़ाएं अलग-अलग भोग, जानें किस दिन क्या अर्पित करें

    नवरात्रि 2026 में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को चढ़ाएं अलग-अलग भोग, जानें किस दिन क्या अर्पित करें

    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि का समापन 19 अक्टूबर को होगा, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना के साथ उन्हें अलग-अलग भोग अर्पित करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी के प्रत्येक स्वरूप को उसकी मान्यता के अनुसार भोग चढ़ाया जाता है और श्रद्धालु सुख, शांति, समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

    नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन माता को देसी घी अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है। भक्त माता की पूजा कर सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है और उन्हें शक्कर का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में शक्कर को संयम, तप और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इस दिन माता को दूध या खीर का भोग लगाने की परंपरा है और भक्त घर में सुख-शांति तथा सकारात्मकता की कामना करते हैं।

    नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन माता को मालपुए का भोग अर्पित किया जाता है। घर पर बनाए गए सात्विक मालपुए से भी भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना होती है और उन्हें केले का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद केले को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की मान्यता है। छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है और उन्हें शहद अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में शहद को मधुरता और शुभता से जोड़ा जाता है।

    सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। इस दिन माता को गुड़ का भोग लगाया जाता है। भक्त जीवन की बाधाएं दूर होने और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और उन्हें नारियल का भोग अर्पित करने की परंपरा है। कई घरों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। नवरात्रि के अंतिम यानी नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना होती है। इस दिन माता को तिल का भोग लगाया जाता है और भक्त सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं में भोग को केवल किसी खाद्य सामग्री के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसे देवी के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव माना जाता है। इसलिए भोग तैयार करते समय साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखने की परंपरा है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और पूजा पद्धतियों में भोग से जुड़ी परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए ऊपर बताए गए भोग प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें अनिवार्य नियम नहीं माना जाता। श्रद्धालु अपने परिवार और स्थानीय पूजा परंपरा के अनुसार भी माता को भोग अर्पित कर सकते हैं।

  • नवरात्रि से पहले फाल्गुनी पाठक ने पेश किया नया लगातार चलने वाला गरबा, एक घंटे तक थिरकने का तैयार किया म्यूजिकल सफर

    नवरात्रि से पहले फाल्गुनी पाठक ने पेश किया नया लगातार चलने वाला गरबा, एक घंटे तक थिरकने का तैयार किया म्यूजिकल सफर

    नई दिल्ली ।नवरात्रि का त्योहार नजदीक आते ही गरबा और डांडिया की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इसी बीच गरबा गायिका फाल्गुनी पाठक ने इस नवरात्रि के लिए एक नई संगीत पेशकश तैयार की है। इसका नाम ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ है। यह एक घंटे का लगातार चलने वाला गरबा है, जिसे खास तौर पर नवरात्रि के उत्सव और गरबा आयोजनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    इस नई पेशकश की खासियत इसका लगातार चलने वाला म्यूजिक फॉर्मेट है। इसमें अलग-अलग गानों को इस तरह जोड़ा गया है कि एक गाना खत्म होते ही दूसरा शुरू हो जाता है। इस वजह से संगीत के बीच लंबा अंतर नहीं आता और गरबा करने का सिलसिला लगातार जारी रखा जा सकता है।

    फाल्गुनी पाठक ने अपने नए गरबा कलेक्शन को लेकर कहा कि गरबा उनके लिए हमेशा लोगों के साथ जुड़ने, जश्न मनाने और संगीत व भक्ति में पूरी तरह डूबने का माध्यम रहा है। उन्होंने बताया कि ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ के जरिए इस नवरात्रि के लिए एक नया म्यूजिकल सफर तैयार किया गया है।

    उन्होंने इस बात को लेकर उत्साह जताया कि लोग इन गानों को सुनें, गरबा करें और एक साथ मिलकर नवरात्रि का जश्न मनाएं। उनके मुताबिक, इन धुनों के साथ लोग अपनी यादों को भी जोड़ सकेंगे।

    फाल्गुनी पाठक ने बताया कि इस गरबा कलेक्शन को विशेष रूप से नवरात्रि और गरबा आयोजनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे केवल बड़े आयोजनों में ही नहीं, बल्कि दोस्तों और परिवार के साथ होने वाली छोटी-बड़ी महफिलों में भी सुना जा सकता है।

    नए गरबा कलेक्शन में गानों की प्रस्तुति को इस तरह रखा गया है कि संगीत शुरू होने के बाद डांस का सिलसिला बना रहे। गानों के बीच लगातार जुड़ाव होने के कारण इसे एक लंबे गरबा सेशन के तौर पर सुना जा सकता है। इस पेशकश का उद्देश्य नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजनों के माहौल में उत्साह बनाए रखना है।

    फाल्गुनी पाठक ने कहा कि इस संगीत को सुनते हुए लोग एक और राउंड के लिए गरबा मैदान में उतरने से खुद को रोक न पाएं, इसी भावना के साथ इसे तैयार किया गया है। लगातार चलने वाले इस गरबा कलेक्शन में संगीत, भक्ति और उत्सव के माहौल को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।

    इस नए कलेक्शन में फाल्गुनी पाठक की आवाज इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। गरबा और नवरात्रि के संगीत से उनकी आवाज लंबे समय से जुड़ी रही है। इस नई पेशकश में भी उनकी गायकी को केंद्र में रखा गया है।

    म्यूजिक कंपनी की ओर से भी ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ को गरबा संगीत की अपनी पेशकश में एक नई कड़ी के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। इसमें संगीत की प्रस्तुति के साथ फाल्गुनी पाठक की आवाज को शामिल किया गया है।

    नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में इस एक घंटे के लगातार चलने वाले कलेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है। दोस्तों और परिवार के साथ होने वाली महफिलों के लिए भी इसे तैयार किया गया है। इस तरह नई पेशकश नवरात्रि के दौरान संगीत और गरबा के उत्सवी माहौल का हिस्सा बनने के लिए तैयार है।

  • कल्प नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा के दर्शन से मिलेगा यश और आशीर्वाद इन मंदिरों में करें पूजा

    कल्प नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा के दर्शन से मिलेगा यश और आशीर्वाद इन मंदिरों में करें पूजा


    नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा को समर्पित होता है जिन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है भक्तों का विश्वास है कि मां कुष्मांडा की आराधना करने से जीवन में यश बल और समृद्धि की प्राप्ति होती है

    देशभर में मां कुष्मांडा के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां दर्शन करने से भक्तों को विशेष कृपा का अनुभव होता है इन मंदिरों में आस्था और चमत्कार से जुड़ी मान्यताएं लोगों को दूर दूर से आकर्षित करती हैं

    मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित लमान माता मंदिर एक प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है इस मंदिर को नौकरी देने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है स्थानीय मान्यता है कि जो व्यक्ति रोजगार की समस्याओं से जूझ रहा हो वह यहां दर्शन करके मां से प्रार्थना करे तो उसकी मनोकामना पूरी हो सकती है नवरात्रि के चौथे दिन यहां विशेष रूप से मालपुए का भोग लगाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं

    उत्तर प्रदेश में भी मां कुष्मांडा के कई प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं कानपुर में स्थित मां कुष्मांडा देवी मंदिर एक प्राचीन शक्तिपीठ है जहां का पवित्र जल विशेष महत्व रखता है मान्यता है कि इस जल को आंखों पर लगाने से नेत्र रोगों में राहत मिलती है और कई भक्त इस जल को अपने साथ भी लेकर जाते हैं यहां मां की प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में विराजमान है जो इस मंदिर को और भी खास बनाती है

    इसके अलावा वाराणसी में स्थित दुर्गाकुंड मंदिर भी मां कुष्मांडा के दर्शन के लिए एक प्रमुख स्थान है इस मंदिर के पास स्थित विशाल जलकुंड इसे और भी विशेष बनाता है नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और कुंड में स्नान कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं इस मंदिर में मां लक्ष्मी सरस्वती और काली के रूप में भी पूजा होती है और नवरात्रि के चौथे दिन इन्हें मां कुष्मांडा के रूप में सजाया जाता है

    मां कुष्मांडा की उपासना का सबसे बड़ा महत्व यह है कि वे अपने भक्तों के जीवन से अंधकार दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं उनकी पूजा से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भी आता है

    नवरात्रि का चौथा दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और मां कुष्मांडा के इन पावन मंदिरों में दर्शन करने से भक्तों को आशीर्वाद और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

  • नवरात्र के तीसरे दिन और गणगौर का महत्व..

    नवरात्र के तीसरे दिन और गणगौर का महत्व..


    नई दिल्ली:शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का तीसरा दिन इस बार और भी खास बन गया है क्योंकि इसी दिन तृतीया तिथि पर प्रसिद्ध पर्व गणगौर भी मनाया जा रहा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    गणगौर का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से है। इस दिन शिवजी को ईसर और माता पार्वती को गौरा या गवरजा के रूप में पूजा जाता है। गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ माता पार्वती होता है। यह पर्व विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र सहित कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है और विवाहित महिलाओं को सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं पूरे मनोभाव से व्रत रखकर माता गौरा की पूजा करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

    पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 33 मिनट पर होगा। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहेगी। नक्षत्र अश्विनी दिनभर रहेगा और यह 22 मार्च की देर रात तक प्रभावी रहेगा। वहीं, योग इन्द्र शाम 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा और करण तैतिल दोपहर 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।

    शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 32 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उत्तम समय माना जाता है। अमृत काल शाम 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

    हालांकि, कुछ समय ऐसे भी होते हैं जिनमें शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इस दिन राहुकाल सुबह 9 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 31 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इन समयों में कोई भी नया कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ नहीं माना जाता।

    नवरात्र का यह तीसरा दिन आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां मां गौरा और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है, वहीं दूसरी ओर पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का पालन कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह दिन भक्ति, आस्था और संस्कारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।