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  • नेपाल के पीएम बालेन शाह ने बदला रुख, भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात कर कूटनीतिक संतुलन का दिया संकेत

    नेपाल के पीएम बालेन शाह ने बदला रुख, भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात कर कूटनीतिक संतुलन का दिया संकेत

    नई दिल्ली । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से जाना जाता है, अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में अपनाई गई एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक नीति में बदलाव करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं करेंगे और सभी आधिकारिक संपर्क विदेश मंत्रालय की निर्धारित प्रक्रिया या समूह बैठकों के माध्यम से ही होंगे। अब पहली बार वह इस नीति से हटते हुए भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने की तैयारी में हैं। इसे नेपाल की संतुलित विदेश नीति और बदलती कूटनीतिक आवश्यकताओं का संकेत माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से प्रधानमंत्री की अलग-अलग बैठकें एक ही दिन आयोजित की जाएंगी। दोनों बैठकों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि नेपाल अपने दोनों प्रमुख पड़ोसी देशों के साथ समान महत्व और संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है। सरकार की ओर से इन बैठकों की पुष्टि की गई है, हालांकि उनकी अंतिम तिथि सार्वजनिक नहीं की गई है। विदेश मंत्रालय इन मुलाकातों की तैयारियों में जुटा हुआ है।

    प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने पारंपरिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक नया कूटनीतिक प्रोटोकॉल लागू किया था। इसके तहत उन्होंने तय किया कि वह केवल किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के प्रतिनिधियों से ही व्यक्तिगत बैठक करेंगे। राजदूतों, उप-मंत्रियों या अन्य अधिकारियों से मुलाकात विदेश मंत्रालय की मौजूदगी में या समूह स्तर पर ही होगी। उनका मानना था कि विदेश नीति व्यक्तिगत संपर्कों के बजाय संस्थागत व्यवस्था के तहत संचालित होनी चाहिए और इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

    नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही थी कि प्रभावशाली देशों के राजदूत सीधे प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात करते थे। कई बार इन बैठकों का कोई औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था। विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसी व्यवस्था से विदेश नीति पर अनौपचारिक प्रभाव बढ़ सकता है और राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते हैं। इसी सोच के आधार पर बालेन शाह ने नई व्यवस्था लागू की थी, जिसके चलते कई विदेशी प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित व्यक्तिगत मुलाकातें नहीं हो सकीं।

    बताया जाता है कि उन्होंने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री, अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों तथा चीन के कुछ उच्च प्रतिनिधियों से भी व्यक्तिगत मुलाकात नहीं की थी। हालांकि एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष मसातो कांडा के साथ उनकी एकल बैठक को विशेष परिस्थिति में अपवाद माना गया था। इन घटनाओं ने उनकी नई कार्यशैली को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा पैदा की थी।

    अब प्रधानमंत्री के रूप में कुछ महीनों के अनुभव के बाद बालेन शाह का रुख अधिक व्यावहारिक दिखाई दे रहा है। नेपाल की भौगोलिक, आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत और चीन दोनों के साथ नियमित एवं प्रत्यक्ष संवाद बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बन गया है। ऐसे में व्यक्तिगत स्तर पर संवाद को पूरी तरह सीमित रखने की नीति व्यवहारिक चुनौतियां पैदा कर रही थी। यही कारण माना जा रहा है कि उन्होंने पहली बार अपने पुराने निर्णय में बदलाव करने का फैसला लिया है।

    नेपाल की विदेश नीति लंबे समय से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच खुली सीमा, सांस्कृतिक संबंध तथा लोगों के बीच गहरे सामाजिक जुड़ाव हैं। दूसरी ओर चीन ने हाल के वर्षों में नेपाल के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और परिवहन परियोजनाओं में बड़े निवेश किए हैं। ऐसे में दोनों देशों के साथ समान दूरी और समान निकटता बनाए रखना काठमांडू की कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बालेन शाह का यह नया कदम भी इसी संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • नेपाल से भटककर गोरखपुर पहुंची 147 किलो की प्रेग्नेंट डॉल्फिन…52 KM का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर नदी में छोड़ी

    नेपाल से भटककर गोरखपुर पहुंची 147 किलो की प्रेग्नेंट डॉल्फिन…52 KM का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर नदी में छोड़ी


    गोरखपुर/महराजगंज।
    नेपाल (Nepal) की त्रिवेणी नदी (Triveni River) से महराजगंज जिले (Maharajganj district) के एक कैनाल में बहकर आई 147 किलो की डॉल्फिन मछली (Dolphin) का रेस्क्यू चर्चा में है. प्रेग्नेंट मछली (Pregnant fish) को राप्ती नदी में छोड़ा गया. डॉल्फिन को सुरक्षित गोरखपुर लाने के लिए भटहट से 52 किलो के रास्ते में ग्रीन कॉरिडोर (Green Corridor) बनाया गया. तकरीबन 1 घंटे के सफर के बाद डॉल्फिन को गोरखपुर के राप्ती तट पर लाकर इलाज के बाद राप्ती नदी में छोड़ दिया गया.

    गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्लाह खान प्राणी उद्यान के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. योगेश कुमार सिंह ने बताया, नेपाल की त्रिवेणी नदी से एक डॉल्फिन भटककर एक कैनाल में आ गई और वह धीरे-धीरे परतावाल के पास धरमौली बाजार के कैनाल में आकर फंस गई थी. वह वहां 3 दिन से फंसी थी और उसकी जान को बचाना बहुत ही जरूरी था।

    प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव उत्तर प्रदेश अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बीसी ब्रम्हा के निर्देशन में डॉल्फिन को रविवार यानी 19 जुलाई को भी पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन बारिश के कारण कैनाल में पानी ज्यादा था और बहाव भी बहुत तेज होने के कारण बहुत ही कठिनाई हो रही थी.

    ऐसे में सिंचाई विभाग के आलाधिकारियों से बात करके कैनाल में पानी को कम कराया गया और सोमवार (20 जुलाई) को कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज के तहत सिसवां शुक्ल ग्रामसभा के पास देवरिया कैनाल से सफल रेस्क्यू किया गया।

    रेस्क्यू के बाद डॉलफिन को डॉलफिन एंबुलेंस में रखा गया. जहां इलाज और जांच किया गया. 7 फीट 2 इंच लंबी डॉल्फिन 147 किलो की प्रेग्नेंट मादा है. एंबुलेंस के जरिए ही मछली को राजघाट के पास राप्ती नदी में छोड़ा जाना था, क्योंकि राप्ती नदी डॉल्फिन के लिए एक सुरक्षित घर है।

    गोरखपुर SSP डॉक्टर कौस्तुभ के आदेश पर डॉल्फिन को सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके चलते राप्ती घाट तक कुल दूरी करीब 52 किमी को तय करने में मात्र एक घंटा 5 मिनट लगे और मछली को सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया।

  • एडीबी की रिपोर्ट में भारत-नेपाल डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने की सिफारिश, सीमा-पार लेनदेन होंगे आसान

    एडीबी की रिपोर्ट में भारत-नेपाल डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने की सिफारिश, सीमा-पार लेनदेन होंगे आसान

    नई दिल्ली । एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भारत और नेपाल के बीच डिजिटल पेमेंट कॉरिडोर को दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। बैंक का मानना है कि सीमा-पार डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने से व्यापार, पर्यटन और रेमिटेंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। एडीबी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि दोनों देशों के बीच हर वर्ष अरबों डॉलर का आर्थिक लेनदेन होता है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अब भी पारंपरिक बैंकिंग माध्यमों के जरिए संचालित होता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल भुगतान तकनीक में तेज प्रगति के बावजूद सीमा-पार भुगतान व्यवस्था का पूरा लाभ अभी तक नहीं उठाया जा सका है। एडीबी का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच भुगतान प्रणालियों को अधिक इंटरऑपरेबल और समन्वित बनाया जाए तो व्यापारियों, पर्यटकों और आम उपभोक्ताओं के लिए भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकती है।

    रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि नेपाल के डिजिटल भुगतान तंत्र को मजबूत करने के लिए क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, नियामकीय समन्वय, भुगतान प्रणालियों की इंटरऑपरेबिलिटी और बाजार एकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही घरेलू डिजिटल अवसंरचना और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी बताई गई है।

    वर्ष 2024 में नेपाल राष्ट्र बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक ने नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस को भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से जोड़ने की दिशा में नियामकीय समझौते किए थे। इसके बाद मार्च 2024 से भारतीय नागरिक नेपाल में फोनेपे और खल्ती जैसे क्यूआर कोड के माध्यम से अपने भारतीय भुगतान ऐप का उपयोग कर भुगतान कर रहे हैं। इस सुविधा को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और डिजिटल लेनदेन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में प्रतिदिन लगभग 500 डिजिटल भुगतान दर्ज किए जाते थे, जो वर्ष 2025 की शुरुआत तक बढ़कर करीब 2,000 प्रतिदिन हो गए। इससे प्रतिदिन लाखों नेपाली रुपये का कारोबार हो रहा है और कुल सीमा-पार डिजिटल भुगतान का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावा नेपालपे क्यूआर प्रणाली का उपयोग अन्य देशों के पर्यटक भी कर रहे हैं, जिससे डिजिटल भुगतान का दायरा और विस्तृत हुआ है।

    हालांकि एडीबी ने यह भी उल्लेख किया है कि अभी तक नेपाल के नागरिकों के लिए भारत में क्यूआर कोड आधारित भुगतान की समान सुविधा पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। रिपोर्ट के अनुसार, कमीशन संरचना और शुल्क निर्धारण से जुड़े कुछ नियामकीय मुद्दे इस दिशा में प्रमुख बाधा बने हुए हैं। इन चुनौतियों के समाधान के बाद दोनों देशों के बीच पूरी तरह द्विपक्षीय डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू की जा सकती है।

    एडीबी ने सिफारिश की है कि भारत और नेपाल को सीमा-पार डिजिटल भुगतान से जुड़े लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान करना चाहिए। बैंक का मानना है कि आधुनिक भुगतान प्रणाली को व्यापक स्तर पर लागू करने से द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी, पर्यटकों को अधिक सुविधा मिलेगी और दोनों देशों के बीच रेमिटेंस भेजने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और किफायती बन सकेगी।

  • भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

    भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

    नई दिल्ली । भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब पड़ोसी देश नेपाल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित मानकों का विस्तृत मसौदा जारी किया गया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, परिवहन, लेबलिंग और मूल्य निर्धारण तक के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

    प्रस्तावित मानकों के अनुसार नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को पेट्रोल में अधिकतम 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुसार कैबिनेट के निर्णय से इथेनॉल मिश्रण का अनुपात बदला जा सकेगा। इससे ऊर्जा नीति को समय-समय पर बदलती जरूरतों के अनुरूप लचीला बनाए रखने की कोशिश की गई है।

    मसौदे में इथेनॉल उत्पादन के स्रोतों और तकनीकों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। साथ ही इसके सुरक्षित भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया है। चूंकि इथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए इसे केवल सुरक्षित, सूखे और पूरी तरह लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखने का प्रावधान किया गया है। परिवहन और भंडारण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना या पर्यावरणीय जोखिम से बचा जा सके।

    सरकार ने उत्पाद की पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कंटेनर पर विस्तृत जानकारी देना भी अनिवार्य किया है। इसमें निर्माता का नाम, बैच नंबर, उत्पादन की मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना होगा। इसके अलावा इथेनॉल पूरी तरह स्वच्छ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें किसी प्रकार के ठोस कण नहीं होने चाहिए। मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी आवश्यक होगी।

    प्रस्तावित नियमों में वाहन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे ऐसे पदार्थों के उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो इंजन, रबर पाइप और ईंधन प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सरकार का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले इथेनॉल के उपयोग से वाहनों की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहेगी और ईंधन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा।

    नेपाल सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना, नए रोजगार के अवसर सृजित करना और पेट्रोल आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। साथ ही सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित न हो। इसी वजह से खाद्य उपयोग वाले अनाज को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया गया है।

    इसके स्थान पर चीनी उद्योग से निकलने वाले शीरे, नेपियर घास, कृषि एवं वन अपशिष्ट, धान के पुआल, मक्के के डंठल, गेहूं की भूसी, खराब एवं अनुपयोगी अनाज, कसावा तथा अन्य जैविक स्रोतों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया अपनाने की भी शर्त रखी है। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को बेचा जा सकेगा, जबकि इसकी कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा, जैव ईंधन उत्पादन और हरित अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।

  • भारत-नेपाल संबंधों में नई चुनौतियां: नेपाली विदेश मंत्री ने दोहराया ‘कालापानी-लिपुलेख हमारा अधिकार’

    भारत-नेपाल संबंधों में नई चुनौतियां: नेपाली विदेश मंत्री ने दोहराया ‘कालापानी-लिपुलेख हमारा अधिकार’

    नई दिल्ली । नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal इन दिनों भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे के दौरान उन्होंने भारत के शीर्ष नेतृत्व के साथ विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद से जुड़े कई मुद्दे फिर से चर्चा में हैं। इस दौरान उन्होंने भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करने पर भी जोर दिया, लेकिन सीमा विवाद को लेकर उनका पुराना रुख एक बार फिर सामने आया है।

    यात्रा के दौरान शिशिर खनाल ने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग, सीमा प्रबंधन, सांस्कृतिक संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने और संवाद के माध्यम से सभी संवेदनशील विषयों को सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    हालांकि, मीडिया से बातचीत के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री ने एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा विवाद से जुड़े Kalapani और Lipulekh क्षेत्र को नेपाल का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है और यह मुद्दा ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक संदर्भों से जुड़ा हुआ है। उनके इस बयान ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुर्खियों में ला दिया है।

    शिशिर खनाल ने साथ ही यह भी कहा कि नेपाल इस मुद्दे को किसी भी प्रकार की उग्र राष्ट्रवादी बयानबाजी के बजाय शांतिपूर्ण और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से सुलझाना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों को आपसी सम्मान और समझ के आधार पर बातचीत की मेज पर बैठकर समाधान तलाशना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे और रिश्तों में विश्वास और मजबूत हो सके।

    उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कई श्रद्धालु नेपाल के मार्ग से इस यात्रा पर जाते हैं, इसलिए सीमा क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने भारत और चीन के बीच हुए कुछ समझौतों को लेकर भी नेपाल की चिंता व्यक्त की और कहा कि इस तरह के निर्णयों में नेपाल की सहमति और भागीदारी को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा विषय है।

    भारत की प्रगति और आर्थिक विकास की सराहना करते हुए शिशिर खनाल ने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है और यह क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने नेपाल में चल रहे जन-आंदोलनों और सामाजिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। साथ ही भारत में हाल के एक आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते, जिससे उनके बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।

    कुल मिलाकर यह यात्रा भारत-नेपाल संबंधों में संवाद और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के रुख में अंतर एक बार फिर स्पष्ट दिखाई दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, आगे की बातचीत ही इन संवेदनशील मामलों के समाधान का रास्ता तय करेगी।

  • नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी

    नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की जमीन कब्जा करने के नेपाली पीएम बालेन शाह (Nepali PM Balen Shah) के दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सधी हुई प्रक्रिया दी है। कहा कि सीमा विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच एक स्थापित तंत्र है, जिसके जरिये समाधान निकाला जाएगा। साथ ही इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया। इस बीच उत्तराखंड (Uttarakhand) से सटे नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बालेन शाह के बयान के खिलाफ डडेलधुरा समेत कई स्थानों पर विभिन्न छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता विरोध दर्ज करा रहे हैं। इस बीच भारत-नेपाल सीमा (India-Nepal border) पर सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

    सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से गश्त तेज कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पगडंडी मार्गों, चेकपोस्टों और सीमावर्ती गांवों में लगातार निगरानी कर रही हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है जहां सीमा अपेक्षाकृत खुली है और लोगों का आवागमन अधिक रहता है।


    एसएसबी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त गश्त

    मंगलवार को बलुवाकोट क्षेत्र में थानाध्यक्ष नीमा बोहरा के नेतृत्व में पुलिस और एसएसबी की टीम ने संयुक्त गश्त की। इस दौरान जवानों ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नियमित गश्त और निगरानी जारी रहेगी।


    बालेन शाह के बयान पर विदेश मंत्रालय

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमने भारत-नेपाल सीमा के संबंध में नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों के साथ-साथ इस मामले पर नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान को भी देखा है।

    रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 फीसदी हिस्सा निर्धारित हो चुका है, फिर भी कुछ हिस्से को सुलझाना बाकी है। उन्होंने कहा कि गंडक नदी के बहाव में परिवर्तन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके अतिरिक्त सीमा के निर्धारित हिस्सों में सीमा पार कब्जे और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण के मामले भी हैं, जिनका संयुक्त रूप से मानचित्रण किया जा रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने सीमा संबंधी सभी मामलों से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। सभी संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

    हाल में पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख पर भी भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जायसवाल ने कहा कि हम संयुक्त प्रेस बयान में भारत के अंदरूनी मामलों पर ऐसे बेवजह जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं।

  • नेपाल में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता, चीन की बढ़ी चिंता क्या बन रहा नया भू-राजनीतिक मोर्चा?

    नेपाल में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता, चीन की बढ़ी चिंता क्या बन रहा नया भू-राजनीतिक मोर्चा?




    नई दिल्ली। नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद United States की सक्रियता तेजी से बढ़ती दिख रही है। अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार दौरे और कूटनीतिक संपर्कों ने क्षेत्रीय राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। खासकर चीन और भारत के बीच स्थित नेपाल अब बड़ी भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पब्लिक डिप्लोमेसी सराह बी. रोजर्स के नेपाल दौरे की तैयारी ने इस गतिविधि को और तेज कर दिया है। इससे पहले भी कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी काठमांडू का दौरा कर चुके हैं। इस बढ़ती कूटनीतिक हलचल को लेकर China ने भी सतर्क रुख अपनाया है और अपनी रणनीतिक निगरानी बढ़ा दी है।

    विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल में बढ़ती अमेरिकी रुचि का एक कारण क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा रणनीति हो सकता है। वहीं चीन का फोकस तिब्बती मुद्दों और अपने क्षेत्रीय हितों की सुरक्षा पर है। इसी वजह से नेपाल में दोनों देशों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं।

    नेपाल सरकार फिलहाल सभी पक्षों के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह देश अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम केंद्र बन सकता है।

  • नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    नेपाल की बालेन शाह सरकार ने देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति शुरू की है, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे नेपाल आने का न्योता दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस अपील के बाद क्षेत्रीय पर्यटन और यात्रा उद्योग में हलचल देखी जा रही है।

    नेपाल सरकार की इस नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के तहत भारतीय यूट्यूबर्स, व्लॉगर्स, पॉडकास्ट क्रिएटर्स और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को नेपाल यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। नेपाली दूतावास (नई दिल्ली) की ओर से 30 मई तक आवेदन मांगे गए हैं और इस पहल को भारतीय क्रिएटर्स से तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल सरकार ने इस तरह सीधे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार के लिए शामिल किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही दिनों में 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 1000 से ज्यादा पहुंच सकता है।

    नेपाल एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री ने भी इस अभियान को समर्थन दिया है। काठमांडू के कई फाइव स्टार होटलों ने चयनित इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किए हैं। योजना के तहत चुने गए पांच इन्फ्लुएंसर्स को नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा और चितवन का दौरा कराया जाएगा, जहां वे देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करेंगे।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पर्यटन छवि को मजबूत करना है और भारतीय युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है।

  • भारत में पड़ोसी देशों से सस्ता पेट्रोल, पाकिस्तान-श्रीलंका-नेपाल में कीमतें काफी ज्यादा

    भारत में पड़ोसी देशों से सस्ता पेट्रोल, पाकिस्तान-श्रीलंका-नेपाल में कीमतें काफी ज्यादा



    नई दिल्ली(New Delhi)। 
    भारत में हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में ईंधन अभी भी अपेक्षाकृत सस्ता बताया जा रहा है। मौजूदा रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 101 रुपये प्रति लीटर है।

    वहीं पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 142 रुपये प्रति लीटर है, जो भारत से लगभग 41 रुपये अधिक है। इसी तरह Sri Lanka में पेट्रोल लगभग 140 रुपये प्रति लीटर और Nepal में करीब 136 रुपये प्रति लीटर बताया जा रहा है, जो भारत की तुलना में क्रमशः 39 और 35 रुपये ज्यादा है।

    अन्य पड़ोसी और वैश्विक देशों की बात करें तो बांग्लादेश, म्यांमार और चीन में भी पेट्रोल भारत से महंगा बताया जा रहा है। वहीं अमेरिका और यूरोपीय देशों में ईंधन की कीमतें और अधिक हैं, जबकि हांगकांग को दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला देश माना जाता है, जहां कीमतें 400 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के कारण ईंधन दरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़ने से कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित हो रही हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।

  • पाकिस्तान ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, फिर भी भारत और पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग क्यों?

    पाकिस्तान ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, फिर भी भारत और पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग क्यों?



    नई दिल्ली। पाकिस्तान सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। नई दरें 16 मई 2026 से लागू हो गई हैं। कटौती के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 409.78 पाकिस्तानी रुपये और डीजल 409.58 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 140–141 रुपये प्रति लीटर के आसपास बैठता है।

    हालांकि यह कटौती राहत देने वाली है, फिर भी पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें भारत के मुकाबले अधिक बनी हुई हैं। इससे पहले वहां पेट्रोल और डीजल में करीब 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी भी की गई थी, जिससे आम लोगों पर बोझ और बढ़ गया था।

    पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें (भारत की तुलना में)
    भारत में हाल ही में पेट्रोल-डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल करीब 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर है, जबकि मुंबई में पेट्रोल 106 रुपये के पार पहुंच चुका है।

    नेपाल में ईंधन भारत से महंगा है, जहां पेट्रोल करीब 134 रुपये और डीजल लगभग 139 रुपये प्रति लीटर पड़ता है। बांग्लादेश में पेट्रोल लगभग 109 रुपये और डीजल करीब 90 रुपये प्रति लीटर है। श्रीलंका में डीजल की कीमत 137 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, जबकि भूटान में पेट्रोल-डीजल भारत के लगभग बराबर, यानी 98 से 102 रुपये के बीच मिलता है।

    कीमतें क्यों बदल रही हैं लगातार?
    दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मध्य-पूर्व में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों (जैसे होर्मुज स्ट्रेट) में अस्थिरता के कारण ईंधन सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसी वजह से भारत, पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देश अपनी घरेलू नीतियों और टैक्स ढांचे के अनुसार समय-समय पर कीमतों में बदलाव कर रहे हैं।