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  • सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा

    सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा


    नई दिल्ली। 1 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अगस्त के आखिरी कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार दबाव में नजर आया और अब नए महीने की शुरुआत कई महत्वपूर्ण संकेतों के बीच हो रही है। सोमवार को Nifty 50 और Sensex में गिरावट दर्ज की गई थी जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया। 31 अगस्त को Nifty 50 करीब 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23997.10 के स्तर तक पहुंच गया था जबकि Sensex भी करीब 0.66 प्रतिशत नीचे 76751.32 के आसपास रहा।

    1 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस MSCI रीबैलेंसिंग पर रहने वाला है। इंडेक्स में बदलाव प्रभावी होने के साथ कई शेयरों में फंड फ्लो बढ़ सकता है। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक Laurus Labs Adani Energy Solutions Lenskart और Groww जैसे शेयरों को इंडेक्स बदलाव से फायदा मिल सकता है जबकि Reliance Industries और Jio Financial Services जैसे बड़े शेयरों में आउटफ्लो का दबाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार का मुख्य सूचकांक भले ही सीमित दायरे में रहे लेकिन कुछ खास शेयरों में तेज खरीदारी या बिकवाली देखने को मिल सकती है।

    MSCI रीबैलेंसिंग के साथ बाजार में नए Closing Auction Session को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। यह व्यवस्था अगस्त की शुरुआत से लागू हुई है और 1 सितंबर का MSCI बदलाव इस नई व्यवस्था के लिए पहला बड़ा परीक्षण माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कम ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले शेयरों में इंडेक्स से जुड़े बड़े फंड फ्लो आने पर कीमतों में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि व्यापक बाजार पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद जताई गई है।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए अहम संकेत बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इससे महंगाई तथा रुपये की चाल पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर 31 अगस्त को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.2 प्रतिशत मजबूत होकर 95.1625 पर बंद हुआ और करीब चार सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार में MSCI से जुड़े प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक के समर्थन को रुपये की मजबूती के प्रमुख कारणों में गिना गया।

    बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों को सतर्क नजर रखनी होगी। HDFC Bank के शेयरों में हालिया कमजोरी ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया है। 31 अगस्त को बैंक के शेयर में करीब 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं बाजार में वैश्विक ब्याज दरों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीति को लेकर संकेत आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में 1 सितंबर का कारोबार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार में किसी एक दिशा में तेजी या गिरावट के बजाय शेयर आधारित गतिविधियां ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। इसलिए निवेशकों को केवल बाजार की तेजी देखकर खरीदारी करने या गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। खासतौर पर MSCI बदलाव से प्रभावित शेयरों में अचानक आने वाली हलचल को समझना जरूरी होगा। कुल मिलाकर नए महीने की शुरुआत घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक बाजार कच्चे तेल रुपये और इंडेक्स रीबैलेंसिंग के बीच होने जा रही है और यही फैक्टर मंगलवार को शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • दलाल स्ट्रीट पर फिर दिखेगा उतार चढ़ाव सेंसेक्स निफ्टी के रुख से तय होगी निवेशकों की रणनीति

    दलाल स्ट्रीट पर फिर दिखेगा उतार चढ़ाव सेंसेक्स निफ्टी के रुख से तय होगी निवेशकों की रणनीति

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए हर कारोबारी दिन नई संभावनाओं और जोखिमों के साथ आता है। सेंसेक्स और निफ्टी में होने वाला उतार चढ़ाव केवल बाजार की मौजूदा स्थिति को नहीं दर्शाता बल्कि इसका असर निवेशकों के फैसलों और शेयरों की खरीद बिक्री पर भी पड़ता है। ऐसे समय में बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले घरेलू और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर लगातार उत्सुकता बनी रहती है कि बाजार में तेजी का सिलसिला आगे बढ़ेगा या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलेगी।

    शेयर बाजार की चाल पर सबसे पहले वैश्विक संकेतों का असर दिखाई देता है। अमेरिका समेत दुनिया के प्रमुख बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। अगर विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों में पैसा लगाते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के तिमाही नतीजे कारोबार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहते हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं उनके शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों में होने वाली गतिविधियां भी पूरे बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी को देखना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि अलग अलग सेक्टर के प्रदर्शन पर भी नजर रखना जरूरी है।

    बाजार में ब्याज दरें महंगाई कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा सकती है। वहीं रुपये में कमजोरी का असर आयात लागत और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। दूसरी ओर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है क्योंकि इससे कंपनियों और कारोबार के लिए कर्ज की लागत कम होने की संभावना बनती है।

    निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी या गिरावट देखकर घबराहट में बिकवाली करने से बचा जाए। शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है और किसी भी शेयर की पिछली तेजी उसके भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होती। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति मुनाफे कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं जबकि अल्पकालिक कारोबार करने वालों को बाजार की अस्थिरता और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू आर्थिक आंकड़े और कंपनियों से जुड़ी खबरें भारतीय शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार में अवसर जरूर हैं लेकिन हर अवसर के साथ जोखिम भी जुड़ा हुआ है। समझदारी इसी में है कि निवेशक भावनाओं के बजाय तथ्यों और अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला लें।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के चलते सेंसेक्स 183.15 अंक और निफ्टी 126.80 अंक गिरकर बंद हुए।

    कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के चलते सेंसेक्स 183.15 अंक और निफ्टी 126.80 अंक गिरकर बंद हुए।

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबारी सप्ताह के तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली। पिछले सत्र में तेजी के बाद घरेलू बाजार बुधवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच दबाव में रहा। आईटी, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों पर असर डाला। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 183.15 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,472.94 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 126.80 अंक यानी 0.52 प्रतिशत टूटकर 24,207.75 अंक पर पहुंच गया।

    बुधवार के सत्र की शुरुआत हालांकि सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 77,656.09 अंक के स्तर से 236 अंक की बढ़त के साथ 77,892.10 अंक पर खुला। शुरुआती कारोबार में खरीदारी बढ़ने से यह 330.75 अंक तक चढ़कर 77,986.84 अंक के इंट्रा-डे उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में बाजार की शुरुआती बढ़त कायम नहीं रह सकी और सूचकांक फिसलकर 77,472.94 अंक के दिन के निचले स्तर पर बंद हुआ।

    निफ्टी 50 भी 24,334.55 अंक के पिछले बंद स्तर की तुलना में मामूली बढ़त के साथ 24,341.95 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान यह 24,378.60 अंक के उच्च स्तर तक पहुंचा, लेकिन बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से 24,207.75 अंक के निचले स्तर तक आ गया। अंत में निफ्टी 0.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में भी एक समान रुख नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.81 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद कुछ छोटे शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर क्षेत्रों में रहा। एफएमसीजी, ऑटो और रियल्टी शेयरों पर भी दबाव देखा गया। इसके विपरीत मेटल, प्राइवेट बैंक और सीमेंट से जुड़े शेयरों में मजबूती रही। बैंकिंग और मेटल क्षेत्र की कुछ कंपनियों में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को सीमित करने में मदद की।

    निफ्टी 50 के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी लाइफ और एसबीआई लाइफ शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, पावरग्रिड, इंफोसिस, एलएंडटी, नेस्ले इंडिया और श्रीराम फाइनेंस कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख शेयरों में रहे।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती बढ़त के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रुझान बनने से प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। वैश्विक बाजारों के संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहे।

    ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में संभावित ढील से महंगाई को लेकर कुछ चिंताएं कम होने की बात कही गई। इससे घरेलू बॉन्ड यील्ड में नरमी और बैंकिंग शेयरों में मजबूती देखने को मिली। बेहतर कमाई की उम्मीदों से मेटल शेयरों में भी खरीदारी रही। हालांकि आईटी शेयरों में गिरावट ने इन क्षेत्रों की तेजी का असर काफी हद तक कम कर दिया।

    अमेरिका में आव्रजन नियमों को लेकर सख्ती और वीजा अपॉइंटमेंट से जुड़े घटनाक्रम के कारण आईटी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की आशंकाएं बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के प्रमुख आंकड़ों पर रहेगी। विशेष रूप से कोर पीसीई आंकड़ों से ब्याज दरों की दिशा को लेकर बाजार को संकेत मिलने की उम्मीद है। इन आंकड़ों के आधार पर वैश्विक निवेश धारणा और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह की दिशा प्रभावित हो सकती है।

  • गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में लौटी खरीदारी, सेंसेक्स 287 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.48 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में लौटी खरीदारी, सेंसेक्स 287 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.48 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू स्तर पर फार्मा तथा पीएसयू बैंक शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को सहारा दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में बंद हुए।

    30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 116 अंकों यानी 0.48 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 24,335.55 के स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले सोमवार के कारोबार में बाजार में कमजोरी देखने को मिली थी।

    मंगलवार को सेंसेक्स 77,369.11 के पिछले बंद स्तर की तुलना में 73.61 अंक नीचे 77,295.49 पर खुला। शुरुआती कमजोरी के बाद सूचकांक ने तेजी पकड़ी और दिन के दौरान 297.28 अंक की बढ़त के साथ 77,666.39 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया।

    निफ्टी भी 24,219.05 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 43.29 अंक की गिरावट के साथ 24,175.75 पर खुला। कारोबार के दौरान खरीदारी बढ़ने से इसमें सुधार आया और सूचकांक 115.5 अंक की तेजी के साथ 24,334.55 के इंट्रा-डे उच्च स्तर तक पहुंचा।

    बाजार की तेजी में फार्मा, हेल्थकेयर और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक में मजबूती दिखाई दी। इसके विपरीत निजी क्षेत्र के बैंक और मेटल से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला।

    व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप में 0.54 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.10 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि निवेशकों की दिलचस्पी चुनिंदा बड़ी और मध्यम कंपनियों में बनी रही।

    निफ्टी 50 में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल्स, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, श्रीराम फाइनेंस, इंफोसिस और इटरनल प्रमुख तेजी वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, सिप्ला और ओएनजीसी कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे।

    बाजार की धारणा को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी समर्थन मिला। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर बाजार की अपेक्षाओं के मुकाबले अपेक्षाकृत कम सख्ती रहने की धारणा बनी, जिससे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में हालिया ऊंचाई से कुछ नरमी आई। ऊर्जा लागत में राहत ने घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बनाया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों ने हेल्थकेयर और वित्तीय क्षेत्र जैसे अपेक्षाकृत रक्षात्मक तथा घरेलू मांग पर आधारित क्षेत्रों की ओर रुख किया। घरेलू बॉन्ड बाजार में स्थिरता के संकेतों ने भी बाजार धारणा को सहारा दिया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी बनी हुई है।

    बाजार participants अब महंगाई के आगामी आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख अधिकारियों की टिप्पणियों पर नजर रख रहे हैं। इन संकेतों से आगे ब्याज दरों की दिशा और वैश्विक निवेश धारणा को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

    निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार में सावधानी बनी रह सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों तथा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में संभावित बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे माहौल में मंगलवार की तेजी ने निवेशकों को राहत जरूर दी, लेकिन आगे के कारोबार में वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • निफ्टी में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट, एफआईआई ने 1,602 करोड़ रुपये निकाले, डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला

    निफ्टी में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट, एफआईआई ने 1,602 करोड़ रुपये निकाले, डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सप्ताह दबाव देखने को मिला। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका ईरान तनाव के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने भारतीय बाजार से 1,602 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने मजबूत खरीदारी जारी रखते हुए बाजार को सहारा दिया।

    सप्ताह के दौरान एफआईआई का निवेश व्यवहार उतार चढ़ाव वाला रहा। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की। इसके बाद लगातार दो कारोबारी सत्रों में उन्होंने खरीदारी की, लेकिन सप्ताह के अंतिम दो सत्रों में फिर से बिकवाली का रुख अपनाया। इससे बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

    20 जुलाई से 21 अगस्त के बीच एफआईआई की गतिविधियों पर नजर डालें तो शुरुआती सप्ताह में वे शुद्ध विक्रेता रहे। इसके बाद लगातार तीन सप्ताह तक उन्होंने खरीदारी की। हालांकि मौजूदा सप्ताह में उनका रुख फिर बदल गया और उन्होंने शुद्ध निकासी की। इसके बावजूद पिछले एक महीने की कुल अवधि में एफआईआई अभी भी 1,282 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे हैं।

    दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में लगातार मजबूती दिखाई। पिछले एक महीने के दौरान डीआईआई ने प्रत्येक सप्ताह शुद्ध खरीदारी की। इस अवधि में उनका कुल निवेश 48,390 करोड़ रुपये रहा। केवल मौजूदा सप्ताह में ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 17,320 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे विदेशी बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित करने में मदद मिली।

    अगस्त महीने के अब तक के आंकड़ों से भी घरेलू निवेशकों की मजबूत भूमिका सामने आती है। इस अवधि में एफआईआई ने कुल 2,510 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि डीआईआई का निवेश 34,370 करोड़ रुपये रहा है। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू संस्थागत पूंजी बाजार की स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    प्रमुख सूचकांकों की बात करें तो निफ्टी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की। मध्य सप्ताह में सूचकांक 24,026 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि सप्ताह के अंतिम दो कारोबारी सत्रों में इसमें सुधार देखने को मिला और निफ्टी अपने निचले स्तर से ऊपर आया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में यह 24,252 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट है।

    व्यापक बाजार में तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। निफ्टी मिडकैप 100 लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने नया सर्वकालिक उच्च स्तर बनाया और सप्ताह के दौरान एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों में बनी हुई है।

    बाजार के लिए आगे कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका ईरान के बीच भू राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे। कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने से भारतीय बाजार पर दबाव की आशंका है। आने वाले दिनों में एफआईआई की दिशा भी बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगी। वहीं डीआईआई की मजबूत खरीदारी बाजार को समर्थन देती रह सकती है।

  • शुरुआती तेजी के बाद सपाट बंद हुआ भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 3 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,252 पर पहुंचा

    शुरुआती तेजी के बाद सपाट बंद हुआ भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 3 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,252 पर पहुंचा


    नई दिल्ली । 
    भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती तेजी के बाद कारोबार सीमित दायरे में रहा और दोनों प्रमुख सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। दिनभर उतार चढ़ाव के बीच सेंसेक्स 3 अंक की मामूली तेजी के साथ 77,540.83 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 20.15 अंक यानी 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,252.00 पर पहुंच गया।

    बाजार को सबसे ज्यादा समर्थन मेटल और बैंकिंग शेयरों में हुई खरीदारी से मिला। निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सेक्टर रहा। इसके अलावा निफ्टी बैंक और निफ्टी पीएसई दोनों में 0.46 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी रियल्टी भी 0.40 प्रतिशत चढ़ा।

    वित्तीय सेवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े शेयरों में भी खरीदारी दिखाई दी। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस इंडेक्स 0.22 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रा 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। डिफेंस से जुड़े शेयरों में भी मजबूती रही और निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 0.32 प्रतिशत ऊपर रहा।

    दूसरी ओर कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी एफएमसीजी 0.74 प्रतिशत, ऑटो 0.60 प्रतिशत, आईटी 0.46 प्रतिशत, कंजप्शन 0.40 प्रतिशत और हेल्थकेयर 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे बाजार की कुल तेजी सीमित रही और प्रमुख सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर टिके रहे।

    व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी अपेक्षाकृत मजबूत रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 64.20 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,735.75 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 136.30 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की तेजी रही और यह 19,977.75 के स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का रुझान अधिक रहा।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में पावर ग्रिड, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, टाइटन, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं ट्रेंट, मारुति सुजुकी, इंडिगो, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस, एमएंडएम, टेक महिंद्रा, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस पर दबाव रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर बनी आशंकाएं भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। घरेलू स्तर पर महंगाई के जोखिम, सीमित लिक्विडिटी और रिजर्व बैंक के रुख से जुड़े संकेतों के कारण भारत की 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड दो महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई है।

    इसके बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ संकेत बाजार के लिए सकारात्मक रहे। हालिया सर्विस पीएमआई आंकड़ों से घरेलू गतिविधियों में मजबूती के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद वित्तीय क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन आकर्षक नजर आ रहे हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ के कारण इन शेयरों में वैल्यू खरीदारी देखने को मिली। साथ ही मेटल की स्थिर कीमतों ने कमोडिटी आधारित शेयरों को भी समर्थन दिया।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए मिश्रित रहा। बैंकिंग और मेटल शेयरों की मजबूती ने बाजार को संभाले रखा, जबकि कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी तेजी नहीं आ सकी।

  • भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 325 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद हुआ, निवेशकों में सतर्कता बढ़ी

    भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 325 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद हुआ, निवेशकों में सतर्कता बढ़ी

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार बुधवार को कारोबारी सत्र के अंत में लाल निशान में बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और प्रमुख आर्थिक घटनाक्रमों से पहले निवेशकों की सतर्कता का असर घरेलू इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,909.68 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 76.60 अंक यानी 0.32 प्रतिशत कमजोर होकर 24,078.30 अंक पर रहा।

    बाजार में बुधवार को व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस सबसे अधिक प्रभावित रहा और इसमें 1.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी एनर्जी 1.18 प्रतिशत कमजोर हुआ। मीडिया, पीएसई, इंफ्रास्ट्रक्चर और कमोडिटीज से जुड़े सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, ऑटो, सर्विसेज, फार्मा और कंजप्शन सूचकांकों में भी कमजोरी रही। इससे संकेत मिला कि बाजार में दबाव केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई प्रमुख क्षेत्रों में निवेशकों ने बिकवाली की।

    हालांकि आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच कुछ राहत दी। दोनों सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। कमजोर रुपये और कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग से आईटी कंपनियों को समर्थन मिलने की बात बाजार जानकारों ने कही।

    लार्जकैप शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 130.65 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 63,408.75 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 101.70 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 19,707.15 अंक पर रहा।

    सेंसेक्स में कुछ शेयरों ने बाजार की गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। एचसीएल टेक, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, टाइटन, टीसीएस, इंफोसिस और ट्रेंट बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बीईएल और इंडिगो में गिरावट दर्ज की गई।

    इसके अलावा एसबीआई, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक भी कमजोर होकर बंद हुए। बैंकिंग, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बाजार की कमजोरी का एक कारण रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है।

    इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद स्थायी कूटनीतिक समाधान को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर भी नजर बनी हुई है। ऊंचे क्रूड और बॉन्ड यील्ड का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया।

    बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ निवेशकों की ओर से चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग देखने को मिली। कमजोर रुपये से आईटी कंपनियों को संभावित लाभ की उम्मीद ने इस क्षेत्र के कुछ शेयरों को समर्थन दिया। हालांकि वैश्विक संकेतों और आगामी अमेरिकी फेड मिनट्स को लेकर बाजार में सावधानी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।

  • भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट, सेंसेक्स 493 अंक टूटा और निफ्टी 24155 के करीब बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट, सेंसेक्स 493 अंक टूटा और निफ्टी 24155 के करीब बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,235.46 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 24,154.90 पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती कारोबार से ही दबाव दिखाई दिया और दिन बढ़ने के साथ प्रमुख सूचकांकों की कमजोरी बनी रही।

    बाजार की गिरावट में आईटी क्षेत्र की कंपनियों का प्रदर्शन प्रमुख कारणों में रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन का सबसे कमजोर प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में 1.42 प्रतिशत, पीएसयू बैंक में 1.01 प्रतिशत और एफएमसीजी इंडेक्स में 0.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी सर्विसेज इंडेक्स 0.68 प्रतिशत कमजोर रहा, जबकि मेटल इंडेक्स में 0.61 प्रतिशत की गिरावट आई। कंजप्शन इंडेक्स 0.50 प्रतिशत और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स 0.42 प्रतिशत नीचे बंद हुए। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार की व्यापक कमजोरी को बढ़ाने का काम किया।

    हालांकि कुछ क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 1.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ प्रमुख लाभार्थियों में रहा। मीडिया इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत, ऑटो में 0.30 प्रतिशत, हेल्थकेयर में 0.21 प्रतिशत और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 0.20 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई।

    बड़े शेयरों के साथ मिडकैप कंपनियों पर भी दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 277.60 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 63,539.40 पर बंद हुआ। दूसरी ओर निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट रहा और 19,808.85 के स्तर पर कारोबार समाप्त किया। इससे संकेत मिला कि व्यापक बाजार में गिरावट एक समान नहीं रही और कुछ हिस्सों में निवेशकों ने मजबूती बनाए रखी।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, बजाज फिनसर्व और एनटीपीसी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अल्ट्राटेक सीमेंट समेत कई बड़े शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार के प्रदर्शन पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी प्रभाव रहा। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। ऊंची तेल कीमतों से भारत जैसे तेल आयातक देश की कंपनियों की लागत और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसके साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी बाजार के sentiment पर दबाव बनाया।

    अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम के समाप्त होने के बाद मध्य पूर्व में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे निवेशकों के बीच मुद्रास्फीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर सावधानी बढ़ी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि से उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के आकर्षण पर भी असर पड़ सकता है।

    आईटी शेयरों पर विशेष दबाव की वजह वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च को लेकर बनी चिंताएं रहीं। ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने की आशंका से कंपनियों के प्रौद्योगिकी खर्च में कमी आने की संभावना को लेकर निवेशक सतर्क रहे।

    घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतकों को अपेक्षाकृत मजबूत माना जा रहा है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमत और बढ़ती इनपुट लागत कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, तेल कीमतों और ब्याज दरों से जुड़े घटनाक्रम पर बनी रहने की संभावना है।

  • रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    नई दिल्ली ।दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने भारतीय शेयर बाजार के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख जताया है। उनका मानना है कि अगले पांच वर्षों में भारतीय शेयरों से सालाना करीब 15 प्रतिशत रिटर्न मिल सकता है। इस तरह के रिटर्न से लंबी अवधि में निवेशकों का पोर्टफोलियो लगभग दोगुना होने की संभावना बनती है।

    अग्रवाल के अनुमान का आधार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि और कंपनियों की कमाई में संभावित बढ़ोतरी है। उनके मुताबिक आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 7.5 से 8.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जबकि कॉर्पोरेट मुनाफे में लगभग 13 से 14 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में प्रमुख बाजार सूचकांकों के रिटर्न के लिए भी सकारात्मक संभावना बनती है।

    हालांकि उन्होंने निकट अवधि के बाजार को लेकर बहुत तेज बढ़त की उम्मीद नहीं जताई। उनके मुताबिक लगभग दो साल की सुस्ती के बाद भारतीय शेयर बाजार अगले विकास चरण में प्रवेश करने से पहले कुछ समय तक सीमित दायरे में रह सकता है। एक और साल तक बाजार में इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया।

    मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर भी अग्रवाल ने कमाई की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। निफ्टी की कमाई के मुकाबले ऊंचे मूल्यांकन के बीच यदि कंपनियों की कमाई में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो बाजार की वैल्यूएशन अपेक्षाकृत कम हो सकती है। उनका अनुमान है कि इस स्थिति में बाजार में आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी रह सकती है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई के भारत में सीमित रुझान को लेकर अग्रवाल ने वैश्विक बाजारों की स्थिति का उल्लेख किया। उनके मुताबिक अमेरिका के अलावा कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में मजबूत तेजी और कमाई की संभावनाओं के कारण विदेशी निवेशकों का ध्यान वहां अधिक गया है। वैश्विक पूंजी के लिए अमेरिकी बाजार से मुकाबला करना भी भारतीय बाजारों के लिए चुनौती बना हुआ है।

    अग्रवाल ने कहा कि भारत कुछ ऐसे उभरते बाजारों के लिए पूंजी का स्रोत भी बन रहा है, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश रुझान से फायदा मिल रहा है। हालांकि उन्हें एफआईआई की लगातार बिकवाली में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता है तो भारतीय बाजार के लिए यह महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक साबित हो सकता है।

    विदेशी निवेशकों के लिए भारत की कर व्यवस्था पर भी अग्रवाल ने अपनी राय रखी। उन्होंने कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए कुछ हद तक चुनौतीपूर्ण बताया, लेकिन इसे भारत से निवेश कम होने का सबसे बड़ा कारण नहीं माना। उनके अनुसार मुद्रा विनिमय में होने वाला बदलाव विदेशी निवेशकों के लिए अधिक महत्वपूर्ण चिंता हो सकता है।

    विदेशी निवेशक भारत में डॉलर के माध्यम से पूंजी लगाते हैं, जबकि कैपिटल गेन्स की गणना रुपये में होती है। ऐसे में रुपये की कमजोरी के कारण डॉलर में वास्तविक रिटर्न कम होने के बावजूद निवेशक को रुपये में बने लाभ पर कर देना पड़ सकता है। अग्रवाल के अनुसार विदेशी निवेशकों के लिए लंबे समय तक आकर्षक माहौल बनाए रखने के लिए कर व्यवस्था को दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रखना जरूरी है।

    नई पीढ़ी की कंपनियों और स्टार्टअप को लेकर भी अग्रवाल ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उनका कहना है कि किसी कंपनी को सार्वजनिक बाजार में आने से पहले या तो मुनाफे में होना चाहिए या उसके पास मुनाफे तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता होना चाहिए। सार्वजनिक बाजार निवेशक कंपनियों की कमाई और तिमाही प्रदर्शन को काफी महत्व देते हैं।

    जेप्टो में अपने निवेश का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने कहा कि किसी निवेश की सफलता या विफलता का फैसला तुरंत नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक उनके निवेश का अंतिम आकलन 10 साल बाद ही किया जा सकेगा। इससे उनका जोर स्पष्ट होता है कि शेयर बाजार में लंबी अवधि का नजरिया तत्काल उतार-चढ़ाव से अधिक महत्वपूर्ण है।

  • Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली

    Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली


    नई दिल्ली । 
    भारतीय शेयर बाजार सोमवार को लगातार दबाव के बीच लाल निशान में बंद हुआ। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,728.16 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32 प्रतिशत टूटकर 24,287.65 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के बावजूद बाजार के मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

    सोमवार के कारोबार में आईटी और एफएमसीजी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया। निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी प्रमुख कमजोर सेक्टरों में रहे। इनके अलावा निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके विपरीत रियल्टी और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग मजबूती के साथ बंद हुए। निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी पीएसई में भी तेजी दर्ज की गई।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर इन्फोसिस, एचसीएल टेक, सन फार्मा, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही।

    आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों पर दबाव का असर पूरे बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। इसके अलावा आईटीसी, ट्रेंट, एनटीपीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारती एयरटेल समेत कई बड़े शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। बजाज फिनसर्व, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी में भी गिरावट दर्ज की गई।

    बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34.85 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 63,817.00 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.70 अंक यानी 0.36 प्रतिशत चढ़कर 19,809.25 पर पहुंच गया।

    बाजार के मौजूदा रुख में ऊर्जा लागत एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियों की इनपुट लागत पर दबाव बना हुआ है। इसका असर निकट अवधि में निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कई कंपनियों के उम्मीद से बेहतर परिणामों ने आगे की कमाई को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं।

    पहली तिमाही में कम लागत वाली इन्वेंट्री से कई कंपनियों के मुनाफे को सहारा मिला। हालांकि आने वाली तिमाहियों में महंगी इन्वेंट्री की खरीद बढ़ने पर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आने की आशंका बनी हुई है। इसलिए निवेशक कंपनियों की कमाई और लागत के रुझान पर विशेष नजर रख रहे हैं।

    बाजार में निवेशकों का रुझान अब उन सेक्टर और कंपनियों की ओर बढ़ रहा है, जहां भविष्य की कमाई अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है। इसी वजह से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल रही है।

    घरेलू स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अपेक्षाकृत नरम उपभोक्ता आंकड़ों ने निकट अवधि में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को कुछ कम किया है। ऐसे संकेत लंबी अवधि में जोखिम लेने की क्षमता को समर्थन दे सकते हैं, लेकिन घरेलू लागत और वैश्विक घटनाक्रम के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।