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  • शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला, वैश्विक संकेतों का असर

    शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला, वैश्विक संकेतों का असर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, जहां वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का सीधा असर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

    सुबह के सत्र में सेंसेक्स में करीब 850 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह 75,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं निफ्टी भी लगभग 250 अंकों की कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट चौतरफा बिकवाली के कारण देखने को मिली, जिसमें लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे।

    निफ्टी के सेक्टोरल इंडेक्स में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी सबसे ज्यादा नुकसान में रहे, जबकि मीडिया, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसयू बैंक, ऊर्जा और कंजप्शन जैसे सेक्टर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे व्यापक स्तर पर दबाव स्पष्ट नजर आया।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में आईटी सेक्टर की कुछ कंपनियां जैसे इन्फोसिस और टीसीएस हल्की मजबूती में रहीं, लेकिन ज्यादातर बड़ी कंपनियां नुकसान में रहीं। पावर ग्रिड, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और अन्य प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। इससे बाजार में गिरावट और गहरी हो गई।

    वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का नकारात्मक रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, हांगकांग और जकार्ता जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल सोल का बाजार हरे निशान में रहा। इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं।

    अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी, जहां प्रमुख सूचकांक डाओ जोन्स और नैस्डैक में एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। इसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के पीछे मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और आर्थिक दबाव की चिंता बढ़ गई है।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, जिससे इक्विटी बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव बन रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जबकि घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी सीमित रहीं।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय शेयर बाजार पर मिलकर दबाव बनाया है, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे, निवेशकों में चिंता

    शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे, निवेशकों में चिंता


    नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को इस सप्ताह गहरे दबाव में डाल दिया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर रही, जिसका असर सीधे तौर पर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। दोनों सूचकांक सप्ताह के अंत में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए।

    एनएसई निफ्टी-50 इस सप्ताह 2.2 प्रतिशत यानी 532 अंक टूटकर 23,643.5 के स्तर पर आ गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 2.7 प्रतिशत यानी 2,000 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 75,238 पर बंद हुआ। बाजार में यह गिरावट केवल बड़े इंडेक्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार भी इसकी चपेट में आ गया। मिडकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति पर और अधिक दबाव बना।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। बीएसई रियल्टी इंडेक्स में लगभग 8 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई, जबकि आईटी इंडेक्स 5.7 प्रतिशत टूट गया। ऑटो, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल, बैंकिंग और पीएसयू सेक्टर में भी लगातार बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कुछ रक्षात्मक सेक्टर जैसे मेटल और हेल्थकेयर ने थोड़ी मजबूती दिखाई और मामूली बढ़त दर्ज की।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाइटन सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला स्टॉक रहा, जिसमें 7.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जो महंगाई और आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों से विदेशी निवेश को बाहर खींचा है, जिससे एफआईआई की लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है।

    हालांकि, इस नकारात्मक माहौल के बीच घरेलू निवेशकों की भागीदारी बाजार के लिए एक सहारा बनी रही। एसआईपी के जरिए लगातार आने वाले निवेश ने बाजार को कुछ हद तक स्थिर बनाए रखने में मदद की। अप्रैल में एसआईपी निवेश 31,115 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसने विदेशी बिकवाली के असर को आंशिक रूप से संतुलित किया।

    कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, तेल कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार में दबाव बना हुआ है, और आने वाले समय में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल के रुझानों पर टिकी रहेगी।

  • शेयर बाजार की रफ्तार थमी, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट..

    शेयर बाजार की रफ्तार थमी, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट..

    नई दिल्ली । सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाने के बावजूद दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार ने कमजोर रुख के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों के बीच मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी का असर बाजार पर साफ दिखाई दिया।

    कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई थी और शुरुआती घंटों में बाजार में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूत ओपनिंग दी थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिके रहने में सफल नहीं हो सके। दिन चढ़ने के साथ बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा और प्रमुख सूचकांक धीरे-धीरे लाल निशान में पहुंच गए।

    दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 161 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी कमजोरी के साथ 23,650 के स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की सतर्कता को और बढ़ा दिया है। विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली, जिससे व्यापक बाजार पर दबाव बढ़ गया।

    मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में बेंचमार्क सूचकांकों की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में इन शेयरों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना, जिसके चलते इन सेगमेंट्स में दबाव बढ़ा।

    शेयरों की बात करें तो कुछ चुनिंदा कंपनियों में अच्छी तेजी भी देखने को मिली। ऑटो और आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन धातु, बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में कमजोरी ने बाजार की दिशा को नीचे की ओर बनाए रखा। आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि मेटल और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे।

    सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो मीडिया, आईटी, फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर में सीमित तेजी दर्ज की गई। वहीं मेटल, पीएसयू बैंक, डिफेंस और रियल्टी सेक्टर में बड़ी गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने ऊर्जा और ऑयल एंड गैस शेयरों पर भी दबाव बनाया।

    विश्लेषकों के अनुसार बाजार में फिलहाल निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। इसके अलावा घरेलू स्तर पर महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। कुल मिलाकर, शुक्रवार का कारोबारी सत्र यह संकेत देता है कि बाजार अभी भी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और निवेशकों की नजरें अब आने वाले वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर टिकी रहेंगी।

  • शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव

    शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत वैश्विक संकेतों के मिले-जुले रुख के बीच लगभग सपाट स्तर पर की। शुरुआती कारोबार में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेतों के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जिससे शुरुआती गति सीमित रही।

    सुबह के शुरुआती सत्र में सेंसेक्स में हल्की मजबूती देखी गई और यह मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी सीमित बढ़त के साथ हरे निशान में बना रहा। हालांकि इस दौरान लार्जकैप शेयरों में स्थिरता देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि थोड़ी कमजोर रही।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और ऑटो सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट देने का काम किया। इन सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी को सहारा मिला। इसके अलावा सर्विसेज, एफएमसीजी, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर भी सकारात्मक दायरे में रहे। इसके विपरीत डिफेंस, मेटल, कमोडिटीज, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में दबाव देखने को मिला, जिससे समग्र बाजार में असंतुलित रुझान बना रहा।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशिया के कई प्रमुख बाजारों में कमजोरी का रुख देखने को मिला, जबकि कुछ बाजारों में हल्की मजबूती बनी रही। अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में अच्छी तेजी के साथ बंद होकर सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन एशियाई बाजारों की सुस्ती ने भारतीय बाजार की दिशा को सीमित रखा। इसी कारण घरेलू निवेशकों ने भी शुरुआत में सतर्क रुख अपनाया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों में बदलाव भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत रहा। लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी लगातार निवेश जारी रखा, जो बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मददगार साबित हुआ।

    इसके अलावा आर्थिक मोर्चे पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी बाजार की धारणा पर देखा गया। ईंधन कीमतों में वृद्धि से महंगाई और लागत दबाव को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले दिनों में उपभोक्ता आधारित सेक्टरों पर पड़ सकता है।

  • बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी की रिकवरी की कोशिश तेज, मेटल शेयरों में जोरदार खरीदारी से रफ्तार बढ़ी

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी की रिकवरी की कोशिश तेज, मेटल शेयरों में जोरदार खरीदारी से रफ्तार बढ़ी

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरे माहौल के साथ हुई, जहां शुरुआती गिरावट के बाद निफ्टी ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश की, लेकिन ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली के दबाव ने बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 120 अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी भी हल्की कमजोरी के साथ खुलकर दिन के दौरान एक सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आया। बाजार खुलते ही निफ्टी ने 23500 के स्तर को छूने की कोशिश की, लेकिन इस स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस के कारण इंडेक्स बार-बार नीचे खिसकता दिखा और 23400 के नीचे भी फिसल गया।

    इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान निफ्टी ने कई बार रिकवरी की कोशिश की और 23500 के स्तर को दोबारा टेस्ट किया, लेकिन हर बार ऊपरी स्तरों पर बिकवाली हावी रही। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार 23500 का स्तर फिलहाल एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस के रूप में काम कर रहा है, जिसे पार करने के लिए मजबूत वॉल्यूम और किसी सकारात्मक ट्रिगर की जरूरत होगी। अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो शॉर्ट कवरिंग के चलते निफ्टी में तेजी तेज हो सकती है और यह 23800 के स्तर तक भी पहुंच सकता है। फिलहाल बाजार 23300 के सपोर्ट के ऊपर टिके रहने की कोशिश कर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि अल्पकालिक कंसोलिडेशन का दौर जारी रह सकता है।

    इस पूरे उतार-चढ़ाव के बीच सबसे मजबूत प्रदर्शन मेटल सेक्टर में देखने को मिला, जहां निवेशकों की भारी खरीदारी ने इंडेक्स को मजबूती दी। निफ्टी मेटल इंडेक्स में करीब 1.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और इसके सभी प्रमुख घटक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। खासतौर पर Hindustan Zinc Limited में लगभग 5 प्रतिशत की तेज उछाल देखने को मिली, जिसने सेक्टर को लीड किया। इसके अलावा Hindustan Copper Limited में 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज हुई, जबकि Vedanta Limited, National Aluminium Company Limited और Hindalco Industries Limited जैसे शेयरों में भी 2 से 4 प्रतिशत तक की मजबूती देखने को मिली।

    मेटल शेयरों में इस तेजी के पीछे वैश्विक कमोडिटी कीमतों में सुधार और बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात शुल्क में बदलाव के बाद मेटल सेक्टर में निवेशकों की रुचि बढ़ी है, जिससे इस सेगमेंट में खरीदारी का दबाव बढ़ा है।

    इसी बीच कुछ अन्य सेक्टर्स में भी अलग-अलग मूवमेंट देखने को मिला, जहां कुछ स्टॉक्स में रिकवरी दिखी तो कुछ में दबाव बना रहा। कुल मिलाकर बाजार फिलहाल स्पष्ट दिशा की तलाश में है और निफ्टी 23300 से 23500 के बीच एक सीमित दायरे में झूलता नजर आ रहा है। आने वाले सत्रों में यह देखना अहम होगा कि क्या निफ्टी रेजिस्टेंस तोड़कर नई तेजी की शुरुआत कर पाता है या फिर बाजार कंसोलिडेशन के चरण में ही बना रहता है।

  • 13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

    13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में आज 13 मई को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है। मंगलवार को बाजार में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों की नजर आज के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर आज भी निफ्टी और सेंसेक्स पर दिखाई दे सकता है।

    मंगलवार को बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही कमजोर होकर बंद हुए थे। आज बाजार की शुरुआत भी दबाव के साथ हो सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    निफ्टी के लिए 23,600 अहम स्तर

    मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार निफ्टी के लिए 23,600 का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे जाता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं 24,000 का स्तर फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। बैंक निफ्टी अपेक्षाकृत मजबूत नजर आ सकता है और बैंकिंग शेयर बाजार को सहारा दे सकते हैं।

    इन सेक्टरों में दिख सकती है हलचल

    आज आईटी सेक्टर दबाव में रह सकता है। ग्लोबल मांग में कमजोरी का असर टेक कंपनियों पर दिखाई दे सकता है। दूसरी तरफ ऑयल एंड गैस सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का फायदा इस सेक्टर को मिल सकता है। फार्मा सेक्टर में भी कंपनियों के तिमाही नतीजों के चलते हलचल बनी रह सकती है।

    इन शेयरों पर निवेशकों की नजर

    आज के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डीज और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है। इन शेयरों में खबरों और रिजल्ट के आधार पर अच्छी मूवमेंट देखने को मिल सकती है।

    निवेशकों को क्या करना चाहिए?

    विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता के साथ निवेश करना जरूरी है। जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए और ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस जरूर लगाना चाहिए। बाजार में किसी भी ग्लोबल खबर का असर तेजी से देखने को मिल सकता है, इसलिए सोच-समझकर निवेश करना ही बेहतर रणनीति होगी।

  • ग्लोबल टेंशन और क्रूड की आग से हिला शेयर बाजार, निफ्टी में और गिरावट के संकेत

    ग्लोबल टेंशन और क्रूड की आग से हिला शेयर बाजार, निफ्टी में और गिरावट के संकेत


    नई दिल्ली ।शेयर बाजार में इस कारोबारी सत्र की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई, जहां निवेशकों के रुझान में साफ तौर पर घबराहट दिखाई दी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही इंडेक्स गैपडाउन ओपन हुए और शुरुआती मिनटों से ही दबाव में कारोबार करते नजर आए। बाजार की चाल पूरी तरह से बिकवाली की तरफ झुकी हुई दिखी, जिससे पूरे ट्रेडिंग सेशन में कमजोरी बनी रही।

    निफ्टी ने 23800 का महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिया, जो पिछले कई सत्रों से एक मजबूत आधार के रूप में काम कर रहा था। इस लेवल के टूटते ही बाजार में सेलिंग प्रेशर और तेज हो गया और इंडेक्स 23700 के नीचे तक फिसल गया। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, जब किसी प्रमुख सपोर्ट लेवल का ब्रेकडाउन होता है, तो बाजार में तेजी से गिरावट का जोखिम बढ़ जाता है और इसी तरह की स्थिति फिलहाल देखने को मिल रही है।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भी घरेलू बाजार पर साफ नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण हालात ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है, जो लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। क्रूड ऑयल की यह ऊंची कीमतें महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ रहा है।

    बाजार में सेक्टोरल प्रदर्शन भी काफी असमान रहा। आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जहां बड़े स्टॉक्स में लगभग तीन प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों पर बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे पूरा आईटी इंडेक्स कमजोर दिखाई दिया। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा शेयरों में हल्की मजबूती जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार की समग्र कमजोरी को संभालने में नाकाफी रही।

    ऑयल और गैस सेक्टर में कुछ स्टॉक्स में तेजी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। वहीं, ऑटो और टेलीकॉम सेक्टर के कुछ शेयरों में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि यह तेजी सीमित दायरे में रही और पूरे बाजार की दिशा को बदल नहीं सकी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार ‘सेल ऑन राइज’ पैटर्न में काम कर रहा है, जहां हर छोटी तेजी पर बिकवाली देखने को मिल रही है। इसके अलावा, वीकली एक्सपायरी के कारण भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी हुई है। इंडिया विक्स का 18 के ऊपर जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।

    कुल मिलाकर बाजार फिलहाल दबाव में है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। निफ्टी का अहम सपोर्ट टूटने के बाद आगे की दिशा अब नए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर निर्भर करती नजर आ रही है।

  • निफ्टी की सीमित रेंज टूटते ही बाजार में आ सकता है बड़ा ट्रेंड, वोल्टास पर दबाव बरकरार और तेजस नेटवर्क में मजबूत रिकवरी के संकेत

    निफ्टी की सीमित रेंज टूटते ही बाजार में आ सकता है बड़ा ट्रेंड, वोल्टास पर दबाव बरकरार और तेजस नेटवर्क में मजबूत रिकवरी के संकेत

    नई दिल्ली । शेयर बाजार इस समय लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है, जहां निवेशक किसी स्पष्ट दिशा के इंतजार में नजर आ रहे हैं। बाजार की चाल फिलहाल सीमित दायरे में घूम रही है, जिससे यह समझना मुश्किल हो गया है कि अगली बड़ी मूव किस दिशा में होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक निफ्टी अपनी मौजूदा रेंज से बाहर नहीं निकलता, तब तक किसी मजबूत ट्रेंड की पुष्टि नहीं की जा सकती। उनका मानना है कि एक बार यह दायरा टूटने के बाद बाजार किसी एक दिशा में तेज और स्पष्ट रुख अपना सकता है, जो आने वाले दिनों में निर्णायक साबित होगा।

    इस समय बाजार की स्थिति को प्रभावित करने वाले कई वैश्विक कारण भी सामने हैं, जिनमें भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं। इन वजहों से निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और खरीदारी में सतर्कता देखी जा रही है। इसके साथ ही आईटी और बैंकिंग जैसे बड़े सेक्टरों में कमजोरी ने भी बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया है, जिससे प्रमुख इंडेक्स ऊपर की ओर मजबूत बढ़त नहीं दिखा पा रहे हैं।

    इसी बीच वोल्टास के शेयरों पर दबाव लगातार बना हुआ है। यह स्टॉक पिछले कुछ समय से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है और हाल के सत्रों में इसमें गिरावट का रुझान देखने को मिला है। तकनीकी संकेत भी इसकी कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं, जहां मोमेंटम में गिरावट और बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक यह स्टॉक एक निश्चित स्तर के ऊपर मजबूती नहीं दिखाता, तब तक इसमें सुधार की संभावना सीमित बनी रह सकती है।

    दूसरी ओर तेजस नेटवर्क के शेयरों में हाल के दिनों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली है। यह स्टॉक अपने निचले स्तर से तेजी से उभरता हुआ दिखाई दिया है और इसमें बढ़ते वॉल्यूम के साथ खरीदारी भी बढ़ी है। तकनीकी रूप से यह अपने महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज के ऊपर बना हुआ है, जो इसे सकारात्मक संकेत देता है। हालांकि, इस तेजी को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि स्टॉक मौजूदा स्तरों पर स्थिरता बनाए रखे, अन्यथा इसमें फिर से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर बाजार की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि निफ्टी की अगली बड़ी दिशा उसके रेंज ब्रेकआउट पर निर्भर करेगी। वहीं स्टॉक स्तर पर वोल्टास में कमजोरी और तेजस नेटवर्क में सुधार के संकेत अलग-अलग अवसर और जोखिम दोनों को दर्शा रहे हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए चयनात्मक और सतर्क रणनीति अपनाना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

  • निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बीच भी मजबूत तेजी की उम्मीद, जानें अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

    निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बीच भी मजबूत तेजी की उम्मीद, जानें अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

    नई दिल्ली ।
    शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से निफ्टी 50 इंडेक्स एक अस्थिर लेकिन दिलचस्प स्थिति में बना हुआ है। एक ओर जहां बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी चार्ट यह संकेत दे रहे हैं कि निफ्टी में अभी भी ऊपर जाने की क्षमता बची हुई है। निवेशकों के बीच फिलहाल अनिश्चितता का माहौल है, लेकिन बाजार का समग्र ढांचा पूरी तरह कमजोर नहीं माना जा रहा है।

    पिछले सप्ताह निफ्टी ने कई बार दिशा बदली। शुरुआती सत्रों में इंडेक्स ने मजबूती दिखाते हुए 24500 के करीब पहुंचने की कोशिश की, जिससे बाजार में थोड़ी सकारात्मकता देखने को मिली। लेकिन इसके बाद किसी मजबूत सकारात्मक संकेत के अभाव में बाजार दबाव में आ गया और इंडेक्स नीचे की ओर फिसलने लगा। 24000 का स्तर इस दौरान एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आया, जहां से बार-बार खरीदारी का समर्थन मिलता रहा।

    मध्य सप्ताह में निफ्टी ने इसी सपोर्ट से उभरते हुए फिर से ऊपर की ओर रुख किया और कुछ समय के लिए तेजी का माहौल भी बना। लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी और अंततः बाजार एक बार फिर अस्थिरता की ओर लौट आया। सप्ताह के अंत तक इंडेक्स ने लगभग 24176 के स्तर पर क्लोजिंग दी, जबकि दिन के दौरान लगभग 150 अंकों की गिरावट भी देखने को मिली।

    इसके बावजूद तकनीकी संकेत यह दर्शाते हैं कि बाजार पूरी तरह दबाव में नहीं है। वीकली चार्ट पर बनी डोजी कैंडल इस बात का संकेत देती है कि बाजार में अनिश्चितता जरूर है, लेकिन ट्रेंड अभी भी पूरी तरह टूटता हुआ नहीं दिख रहा है। ऊपरी स्तरों से आई बिकवाली के बावजूद निचले स्तरों पर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है, जो बाजार को गिरने से रोक रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23920 के आसपास का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। जब तक यह स्तर सुरक्षित रहता है, तब तक बाजार में ऊपर जाने की संभावना बनी रह सकती है। वहीं दूसरी ओर 24500 का स्तर एक मजबूत रेजिस्टेंस की तरह काम कर रहा है, जिसे पार करना बाजार के लिए अगला बड़ा संकेत होगा। यदि निफ्टी इस स्तर को मजबूती से तोड़ता है, तो आगे 24800 और फिर 25000 तक के स्तर देखने को मिल सकते हैं।

    हालांकि बाजार की दिशा काफी हद तक बाहरी घटनाओं और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। किसी भी सकारात्मक अंतरराष्ट्रीय विकास से बाजार को तेजी का नया ट्रिगर मिल सकता है, जबकि नकारात्मक संकेत दबाव बढ़ा सकते हैं। इसी कारण आने वाले सत्रों को बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर निफ्टी फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर है जहां गिरावट के बावजूद तेजी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल अगले बड़े मूवमेंट की दिशा तय करेंगे।

  • चुनावी रुझानों का असर बाजार पर, सेंसेक्स 700 अंक उछला, बंगाल कंपनियों में जबरदस्त तेजी

    चुनावी रुझानों का असर बाजार पर, सेंसेक्स 700 अंक उछला, बंगाल कंपनियों में जबरदस्त तेजी

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज का दिन निवेशकों के लिए बेहद सकारात्मक रहा, जहां कारोबार की शुरुआत से ही मजबूती का रुख देखने को मिला। जैसे-जैसे चुनावी रुझानों से जुड़ी खबरें सामने आती गईं, बाजार में तेजी और अधिक मजबूत होती चली गई।

    सेंसेक्स में कारोबार के दौरान 700 अंक से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी मजबूत उछाल के साथ ऊपर चढ़ा। यह तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बाजार में चौतरफा तेजी का माहौल बन गया, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ।

    विशेष रूप से उन कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली जिनका जुड़ाव पश्चिम बंगाल से माना जाता है। इन कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने के कारण कई स्टॉक्स में तेज उछाल आया और कुछ शेयरों में अच्छी प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। इससे पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी रुझानों का असर बाजार पर तुरंत दिखाई दे सकता है, लेकिन यह प्रभाव आमतौर पर अल्पकालिक होता है। लंबे समय में बाजार की दिशा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर अधिक निर्भर करती है।

    कारोबार की शुरुआत भी मजबूती के साथ हुई थी, जहां प्रमुख सूचकांक हरे निशान में खुले और दिनभर तेजी बनाए रखी। आईटी और रियल्टी सेक्टर में खासतौर पर खरीदारी देखी गई, जबकि अन्य सेक्टर भी सकारात्मक रुख में बने रहे।