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  • आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

    आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

    नई दिल्ली । छोटे कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव हावी रहा और प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। अब अगले सप्ताह बाजार की दिशा पर आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलने पर भारतीय बाजार में राहतभरी तेजी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत आरबीआई की नीति, महंगाई को लेकर उसका रुख और आर्थिक वृद्धि के अनुमान घरेलू ब्याज दरों तथा वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

    पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी की शुरुआत पहले कारोबारी दिन से ही हो गई थी। सोमवार को सेंसेक्स में 1.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और अगले दो कारोबारी सत्रों में भी कमजोरी बनी रही। गुरुवार को सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत और गिर गया। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में यह गिरावट जारी करेक्शन के दौर को दर्शाती है।

    तकनीकी संकेतकों के स्तर पर भी बाजार में कमजोरी बनी हुई है। निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। इसका साप्ताहिक आरएसआई करीब 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और कमजोर मोमेंटम का संकेत देता है। हालांकि आरएसआई अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे निचले स्तरों पर बीच-बीच में तकनीकी रिकवरी की संभावना बन सकती है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 22,800 और 23,000 के स्तर निफ्टी के लिए निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध रहेंगे। इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख सपोर्ट माने जा रहे हैं।

    बाजार की धारणा पर फिलहाल वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव अधिक है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी, महंगाई को लेकर चिंता और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क रखा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतक अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में संशोधित आंकड़ा 7.4 प्रतिशत था। विनिर्माण क्षेत्र में 9 प्रतिशत तथा बिजली और गैस आपूर्ति में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    ऊर्जा बाजार का रुख भी अगले सप्ताह महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आया है, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है। इससे ऊर्जा कीमतों को कुछ राहत मिली है। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। नॉन-फार्म पेरोल्स और आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जैसे आंकड़े वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं और इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर आरबीआई नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े अगले सप्ताह बाजार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे।

  • सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे, कच्चा तेल और FII बिकवाली से दबाव

    सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे, कच्चा तेल और FII बिकवाली से दबाव


    नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत दबाव के साथ हुई। सोमवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 22,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 9:26 बजे सेंसेक्स 72,371.25 अंक पर कारोबार कर रहा था और इसमें 400.47 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी 22,658.75 अंक पर था और 121.50 अंक नीचे कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,800 के स्तर से भी नीचे चला गया। बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोर रही और कई बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे प्रमुख शेयरों की कमजोरी का भी बाजार पर असर पड़ा। तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, निफ्टी का 22,700 के नीचे टिकना बिकवाली के दबाव को बढ़ा सकता है।

    बाजार में गिरावट के बीच निफ्टी के 22,400 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना पर भी नजर रखी जा रही है, यदि कमजोरी आगे जारी रहती है। यह स्तर तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और पिछले दो वर्षों की प्रमुख निचली ट्रेंडलाइन तथा 200 सप्ताह के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से जुड़ा हुआ है। निफ्टी के लिए 22,650 से 22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन के तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया है। इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबार में इस स्तर के आसपास बाजार की चाल महत्वपूर्ण रहेगी।

    भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब 106 से 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों यानी FII की भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार में बिकवाली के दबाव को बढ़ाया है।

    भारतीय बाजार की कमजोरी के बीच एशियाई और अन्य वैश्विक बाजारों में भी कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:51 बजे S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी नीचे था, जबकि निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जापान का टॉपिक्स 1.5 फीसदी नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.1 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.1 फीसदी और Euro Stoxx 50 फ्यूचर्स 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। इस तरह वैश्विक बाजारों में एक समान रुख नहीं रहा।

    बाजार की तकनीकी स्थिति को लेकर एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,650 से 22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन है। उनके अनुसार, यदि इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आती है तो शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। फिलहाल सेंसेक्स की 400 अंक से अधिक की गिरावट, निफ्टी का 22,700 से नीचे जाना, कच्चे तेल की ऊंची कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और FII की लगातार बिकवाली बाजार के लिए प्रमुख दबाव वाले कारक बने हुए हैं।

  • वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांकों में कुछ सुधार देखने को मिला।

    साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को निफ्टी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह सेंसेक्स में शुक्रवार को 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी आई और यह 73,895 के स्तर पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह के आधार पर सेंसेक्स में 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    सप्ताह के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1.6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। इसके बाद शुक्रवार को कुछ चुनिंदा शेयरों में निचले स्तर पर खरीदारी बढ़ने से बाजार में सीमित सुधार आया। हालांकि, सप्ताहभर के दबाव को पूरी तरह दूर करने में यह तेजी सफल नहीं रही।

    कच्चे तेल की कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के स्तर पर कारोबार करता रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं ने तेल कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा। सप्ताह के अंत में तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, जिससे आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर संभावित दबाव को लेकर चिंता कुछ कम हुई।

    अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बढ़ी यील्ड भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती बनी रही। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान 5.10 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड से वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त होती हैं और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने 11,490 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की। यह लगातार छठा सप्ताह रहा, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता रहे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी और सप्ताह के दौरान 16,398 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। घरेलू निवेश से बाजार में गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद मिली।

    सितंबर में अब तक विदेशी निवेशक 18,531 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 52,617 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के अंत के स्तर से करीब 3.9 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।

    आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक संकेतों से प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और अमेरिका के दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। तकनीकी स्तर पर 23,000 को निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट क्षेत्र और 23,200 को निकटतम रेजिस्टेंस स्तर माना जा रहा है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम और निवेश प्रवाह बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनाए रख सकते हैं।

  • बड़ी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 315 अंक चढ़ा और निफ्टी 23,140 के पार बंद

    बड़ी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 315 अंक चढ़ा और निफ्टी 23,140 के पार बंद

    नई दिल्ली । पिछले कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स में 0.43 प्रतिशत और निफ्टी में 0.34 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन सत्र के अंत में प्रमुख सूचकांक बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ। इससे पहले यह पिछले कारोबारी सत्र के 73,580.54 के स्तर से 54.61 अंक नीचे 73,525.92 पर खुला था। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 73,968.05 का उच्चतम स्तर छुआ। इस तरह इंट्रा-डे कारोबार में सूचकांक ने 387.51 अंक यानी करीब 0.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।

    निफ्टी 50 भी बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी में 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,140.50 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार की शुरुआत में निफ्टी पिछले बंद स्तर की तुलना में करीब 28 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,035 पर खुला था। दिन के दौरान इसने 23,162.70 का उच्चतम स्तर दर्ज किया, जो इंट्रा-डे आधार पर 99.60 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त थी।

    व्यापक बाजार की तस्वीर हालांकि पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बाजार में अलग-अलग श्रेणियों के शेयरों में निवेशकों की गतिविधियां अलग-अलग रहीं।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मीडिया, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में दबाव रहा। प्रमुख शेयरों में एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में रहे।

    दूसरी ओर मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, इंफोसिस, ओएनजीसी और ट्रेंट के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन में अंतर बना रहा।

    बाजार के प्रदर्शन पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर का असर भी देखा गया। महंगाई को लेकर चिंता, विदेशी फंड की निकासी और उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव जैसे मुद्दे भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने रहे। हालिया गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला।

    बाजार के 23,000 के स्तर से ऊपर बने रहने को घरेलू बाजार में मजबूती और घरेलू लिक्विडिटी से मिलने वाले समर्थन से जोड़कर देखा गया। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बदलाव बाजार के लिए निकट अवधि में महत्वपूर्ण कारक बने रह सकते हैं। बेहतर वैल्यूएशन और घरेलू विकास की संभावनाओं के बीच चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रहने से शुक्रवार को बाजार ने पिछले सत्र की गिरावट के बाद बढ़त के साथ सप्ताह का कारोबार समाप्त किया।

  • कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा

    कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने के कारण प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,063.10 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार की शुरुआत भी कमजोर रही। सेंसेक्स पिछले सत्र के 74,828.25 के बंद स्तर से 555.85 अंक यानी 0.74 प्रतिशत नीचे 74,272.40 पर खुला। दिन के कारोबार में गिरावट और बढ़ी तथा सूचकांक 1,264.33 अंक यानी 1.68 प्रतिशत फिसलकर 73,563.92 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    निफ्टी 50 भी पिछले बंद स्तर 23,446.80 से 225 अंक यानी 0.95 प्रतिशत नीचे 23,221.80 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 400.65 अंक यानी 1.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,046.15 के निचले स्तर तक चला गया।

    व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप में 2.25 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 1.53 प्रतिशत की गिरावट रही। सेक्टरवार कारोबार में सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

    इसके अलावा निफ्टी मेटल 1.96 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.57 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 1.13 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.10 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 1.08 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निफ्टी 50 में केवल सिप्ला, ओएनजीसी और एनटीपीसी के शेयरों में तेजी रही, जबकि बाकी अधिकतर शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा। एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट दर्ज हुई।

    बाजार में व्यापक बिकवाली का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। एक ही कारोबारी सत्र में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी घट गई। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के लगभग 485 लाख करोड़ रुपये से घटकर 480.95 लाख करोड़ रुपये रह गया।

    गुरुवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन वे 102 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बनी रहीं। इसके साथ वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी हुई। इससे इक्विटी निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी और जोखिम वाली परिसंपत्तियों का आकर्षण प्रभावित हुआ।

    इसी दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों की लिस्टिंग भी हुई। शेयर 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,817 रुपये पर बंद हुए, जो इसके 1,785 रुपये के आईपीओ प्राइस बैंड से ऊपर था।

    बाजार में कमजोरी के बीच महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर बनी अनिश्चितताओं ने ब्याज दरों की दिशा पर भी चिंता बढ़ाई। घरेलू स्तर पर इंश्योरेंस और बैंकिंग क्षेत्र में कमीशन स्ट्रक्चर की नियामकीय समीक्षा तथा मुनाफे पर संभावित असर को लेकर भी दबाव बना रहा।

    आने वाले समय में बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों की कमाई पर बनी रह सकती है।

  • शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए बुधवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी-ईरान वार्ता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों के करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने से बाजार धारणा को कुछ सहारा मिला। इसके साथ ही घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,828.25 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 117.80 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,446.80 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने पिछले सत्र की कमजोरी के बाद अच्छी वापसी की।

    व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.70 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.89 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि तेजी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, रियल्टी और सीमेंट से जुड़े शेयरों में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

    दूसरी ओर, आईटी और मीडिया क्षेत्र दबाव में रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया 0.50 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। आईटी शेयरों में सुस्ती के कारण बाजार की कुल बढ़त ऊपरी स्तरों पर कुछ सीमित रही।

    निफ्टी50 के प्रमुख तेजी वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, हिंडाल्को, टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल्स और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल रहे। इनके अलावा ग्रासिम, नेस्ले इंडिया, आईटीसी, एलएंडटी, पावर ग्रिड और अदाणी पोर्ट्स में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एचसीएल टेक, टाइटन, इंफोसिस, कोल इंडिया, टीसीएस, विप्रो, एनटीपीसी, बीईएल और ट्रेंट जैसे शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार की चाल पर नजर डालें तो कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर बना रहा। मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, सितंबर के फ्लैश पीएमआई के उम्मीद से बेहतर आंकड़ों ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।

    महंगाई का दबाव बढ़े बिना आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को सहारा दिया। व्यापक बाजार में खरीदारी और एशियाई बाजारों की मजबूती के बीच घरेलू शेयरों में भी सकारात्मक रुख बना रहा। हालांकि, आईटी क्षेत्र की कमजोरी के कारण प्रमुख सूचकांकों की बढ़त दिन के ऊपरी स्तरों तक पूरी तरह कायम नहीं रह सकी।

  • चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 330 अंक टूटा और निफ्टी गिरा, जानिए बाजार में दबाव की बड़ी वजहें

    चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 330 अंक टूटा और निफ्टी गिरा, जानिए बाजार में दबाव की बड़ी वजहें

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र की तेजी के बाद मंगलवार को एक बार फिर गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। आईटी और वित्तीय शेयरों में दबाव के चलते बाजार की चार दिन से जारी तेजी का सिलसिला भी टूट गया।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,529.08 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 में 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,329.00 के स्तर पर पहुंच गया।

    व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.08 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे बाजार के बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज हुई।

    सेक्टरवार कारोबार की बात करें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा में गिरावट रही। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में तेजी दर्ज की गई।

    निफ्टी50 के शेयरों में कोल इंडिया सबसे अधिक बढ़ने वाले शेयरों में रहा। कंपनी के शेयर में 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। इसके अलावा इटरनल, इंडिगो, टाइटन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज भी बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

    दूसरी तरफ टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, नेस्ले इंडिया, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, ग्रासिम, ट्रेंट, आयशर मोटर्स और टीसीएस में दबाव रहा। इन शेयरों में गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर भी असर डाला।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत दोबारा 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ विदेशी निवेश की निकासी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।

    इन परिस्थितियों में महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंता बनी हुई है। रुपये की स्थिति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। मंगलवार को रुपया करीब 95.8 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के आसपास रहा।

    वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। इन अंतरराष्ट्रीय संकेतकों का असर घरेलू बाजार के निवेशकों की धारणा पर देखने को मिल रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के 23,300 से 23,350 के दायरे में रहने के कारण निवेशकों को अल्पकालिक तेजी का पीछा करने के बजाय सावधानी बरतने की जरूरत है। निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने, मजबूत कंपनियों पर ध्यान देने और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    इसके साथ ही बाजार में बड़ी गिरावट की स्थिति में अवसरों का इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त नकदी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। मंगलवार की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर रहेगी।

  • कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को सहारा, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में तेजी

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को सहारा, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में तेजी

    नई दिल्ली ।कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी देखने को मिली। फार्मा, हेल्थकेयर, रियल्टी और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा।

    बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,858.99 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 74,294.96 अंक के स्तर से 240.21 अंक यानी 0.32 प्रतिशत ऊपर 74,535.18 अंक पर खुला था। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 74,987.40 अंक का उच्चतम स्तर भी छुआ, जो पिछले बंद स्तर से 692.43 अंक यानी 0.93 प्रतिशत अधिक था।

    निफ्टी 50 में हालांकि कारोबार की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई। यह पिछले बंद 23,346.40 अंक की तुलना में 16.20 अंक फिसलकर 23,330.20 अंक पर खुला। बाद में इसमें तेजी आई और यह 120.40 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़कर 23,466.80 अंक के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। अंत में निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत बढ़कर 23,414.30 अंक पर बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि सोमवार के कारोबार में तेजी मुख्य रूप से बड़े शेयरों तक सीमित रही।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी फार्मा, हेल्थकेयर, रियल्टी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, पीएसयू बैंक और ऑटो इंडेक्स में कमजोरी रही।

    निफ्टी 50 के प्रमुख लाभ वाले शेयरों में इटरनल, एचसीएल टेक, आईटीसी, सन फार्मा, मैक्स हेल्थ, टाइटन, एचडीएफसी लाइफ और एसबीआई लाइफ शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, पावरग्रिड, विप्रो, ग्रासिम, इंफोसिस और टाटा स्टील में गिरावट दर्ज की गई।

    वैश्विक बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी अहम संकेत रही। सऊदी अरब से शिपमेंट में सुधार की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.25 प्रतिशत घटकर 101.5 डॉलर प्रति बैरल रह गई। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर बाजार की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    भारतीय शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि में भी बदलाव देखने को मिला। लगातार सात कारोबारी सत्रों की बिकवाली के बाद शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 599 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी खरीदारी जारी रखी और सत्र के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया।

    बाजार में सकारात्मक माहौल को वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच प्रस्तावित बातचीत तथा अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं से भी समर्थन मिला। हालांकि, आने वाले समय में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।

  • भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार, सेंसेक्स 22 अंक फिसला जबकि निफ्टी 53 अंक चढ़कर 23,270 पर बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार, सेंसेक्स 22 अंक फिसला जबकि निफ्टी 53 अंक चढ़कर 23,270 पर बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार मिला-जुला रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों और उसके संकेतों का आकलन करने के बीच घरेलू बाजार में पूरे सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 में हल्की बढ़त दर्ज की गई। व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

    बीएसई सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,314.59 पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 74,336.45 के स्तर पर बंद हुआ था। गुरुवार को सूचकांक 153.83 अंक यानी 0.20 प्रतिशत नीचे 74,182.62 पर खुला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 74,677.56 का ऊपरी स्तर छुआ, जो पिछले बंद स्तर से 341.11 अंक यानी 0.45 प्रतिशत अधिक था। दिन के दौरान इसका निचला स्तर 74,163.95 रहा।

    निफ्टी50 में इसके विपरीत बढ़त दर्ज की गई। सूचकांक 53 अंक यानी 0.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,270.60 पर बंद हुआ। पिछले सत्र में निफ्टी 23,217.60 पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 22.34 अंक की गिरावट के साथ 23,195.25 पर खुला। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 23,363.55 का इंट्रा-डे हाई बनाया, जो 145.95 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की बढ़त थी। इसका निचला स्तर 23,193.65 रहा।

    व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.92 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की रुचि चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बनी रही।

    सेक्टरवार कारोबार में रियल्टी, ऑटो और मेटल सूचकांकों का प्रदर्शन बेहतर रहा। दूसरी ओर बैंकिंग से जुड़े सूचकांकों पर दबाव दिखाई दिया। निफ्टी बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक में गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी50 में एचडीएफसी लाइफ का शेयर 5.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ प्रमुख लाभ वाले शेयरों में रहा। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, एसबीआई लाइफ, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, बीईएल, इंडिगो और टाटा स्टील भी बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर ओएनजीसी, टाइटन, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, कोल इंडिया और नेस्ले इंडिया में गिरावट रही।

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच हालिया गिरावट के बाद कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग भी देखने को मिली। निवेशकों ने मजबूत कमाई की संभावना, अच्छे ऑर्डर बुक और बेहतर बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर ध्यान बनाए रखा। कैपिटल गुड्स, इंडस्ट्रियल, डिफेंस, पावर और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में चुनिंदा कंपनियों के प्रति रुचि बनी रही।

    वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेतों का असर भी बाजार के रुख पर रहा। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिकी टैरिफ से जुड़े जोखिमों के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बनी रहने की बात कही गई। आने वाले सत्रों में वैश्विक आर्थिक संकेतक और केंद्रीय बैंकों के फैसले बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • शेयर बाजार में दो दिन बाद रिकवरी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,217 पर बंद, आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

    शेयर बाजार में दो दिन बाद रिकवरी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,217 पर बंद, आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

    नई दिल्ली ।अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के फैसले से पहले बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने पिछले दो कारोबारी सत्रों की गिरावट से उबरते हुए बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया। तेल की कीमतों में नरमी और एफएमसीजी, पीएसयू बैंक तथा रियल्टी शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में रहे।

    सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,336.45 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 99 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,217.60 अंक पर बंद हुआ। इस तरह दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने पिछले दो दिनों की कमजोरी के बाद बाजार में रिकवरी दर्ज की।

    हालांकि व्यापक बाजार में स्थिति पूरी तरह सकारात्मक नहीं रही। निफ्टी मिडकैप में 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.18 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिला कि प्रमुख शेयरों में खरीदारी के बावजूद व्यापक बाजार में दबाव बना रहा।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी एफएमसीजी सबसे ज्यादा बढ़ने वाले प्रमुख सूचकांकों में रहा। इसमें 1.63 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 1.44 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.99 प्रतिशत चढ़ा। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार की रिकवरी को मजबूती दी।

    इसके विपरीत निफ्टी आईटी पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके अलावा निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 में टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। वहीं एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ, एसबीआई और आईटीसी के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।

    बाजार के तकनीकी रुझान को लेकर विशेषज्ञों ने निफ्टी के लिए 23,300 से 23,400 के स्तर को अहम बाधा बताया है। उनके मुताबिक व्यापक तकनीकी स्थिति में सुधार के लिए निफ्टी का 23,500 के ऊपर टिकना जरूरी होगा। दूसरी ओर 23,100 से 23,070 का स्तर तत्काल समर्थन क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी 23,070 के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सूचकांक 23,000 से 22,800 के दायरे तक जा सकता है। इसलिए आने वाले सत्रों में इन स्तरों पर बाजार की दिशा पर नजर रहेगी।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर किस तरह का रुख अपनाता है। फेड की टिप्पणी से वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फेड की टिप्पणी संतुलित रहती है तो बाजार में आगे रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है। वहीं सख्त रुख, बॉन्ड यील्ड में दोबारा तेजी या ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने की स्थिति में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार की रिकवरी सीमित हो सकती है।

    विश्लेषकों के मुताबिक अब निवेशकों का ध्यान फेड चेयरमैन की टिप्पणियों पर रहेगा। भविष्य की ब्याज दरों को लेकर मिलने वाले संकेत वैश्विक तरलता, पूंजी प्रवाह और वित्तीय बाजारों की निकट अवधि की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।