Tag: Nifty

  • कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 19 सेक्टर्स ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि फाइनेंशियल और मेटल्स प्रमुख बढ़त वाले क्षेत्र रहे।

    Keywords:
    Financials, Metals, Nifty, Earnings, BFSI,

    नई दिल्ली ।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।

  • भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में बंद, सेंसेक्स 113 अंक फिसला लेकिन 78 हजार के स्तर के ऊपर रहा

    भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में बंद, सेंसेक्स 113 अंक फिसला लेकिन 78 हजार के स्तर के ऊपर रहा


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को पूरे कारोबारी सत्र के दौरान सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। वैश्विक संकेतों, महंगाई के आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,079.96 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 40.10 अंक यानी 0.16 प्रतिशत टूटकर 24,395.85 पर बंद हुआ।

    बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद कारोबार का रुख अपेक्षाकृत सीमित रहा। प्रमुख सूचकांकों में मामूली गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का रुझान दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 97.15 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64,121.55 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 53.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत बढ़कर 19,875 पर पहुंच गया।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले इंडेक्स में रहा और इसमें 1.55 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। निफ्टी रियल्टी में भी 0.97 प्रतिशत की तेजी रही। इसके अलावा एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, आईटी, कंजम्पशन, मीडिया, पीएसई और ऑटो से जुड़े शेयरों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला।

    दूसरी ओर निफ्टी मेटल, प्राइवेट बैंक, कमोडिटीज, ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसयू बैंक सूचकांकों में कमजोरी रही। इससे बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों के बीच प्रदर्शन में अंतर दिखाई दिया और व्यापक स्तर पर निवेशकों का रुख पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में इंडिगो, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इटरनल, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, एचसीएल टेक, आईटीसी, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और एमएंडएम में बढ़त रही।

    इसके विपरीत आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट्स, इंफोसिस, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी और एक्सिस बैंक दबाव में रहे। इन शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

    बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में भारत और अमेरिका के महंगाई आंकड़े भी शामिल रहे। बाजार जानकारों के अनुसार, दोनों देशों में महंगाई के आंकड़े अपेक्षाओं से कम रहने के कारण निवेशकों को कुछ राहत मिली। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक निकट अवधि में मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क और संयमित रुख अपना सकते हैं।

    हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए अभी भी महत्वपूर्ण जोखिम बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल कीमतों में लंबे समय तक तेजी का असर मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।

    मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी निवेशकों को जोखिम लेने से रोक रही है। इसके बावजूद कंपनियों के तिमाही नतीजों से घरेलू मांग और कॉरपोरेट प्रदर्शन को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। मजबूत कंपनियों के नतीजों ने बाहरी दबावों के प्रभाव को सीमित करने में मदद की है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, विदेशी निवेश के प्रवाह और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत संकेतों से प्रभावित हो सकती है। फिलहाल प्रमुख सूचकांकों में सीमित गिरावट और मिडकैप-स्मॉलकैप में मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशकों का रुख सतर्क होने के बावजूद पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।

  • कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला

    कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और बढ़ती महंगाई की चिंता के बीच दबाव में नजर आया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,154.25 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 112.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत फिसलकर 24,471.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा लेकिन कारोबारी सत्र के आखिरी हिस्से में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों के साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर रही। कच्चे तेल में तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है और यही चिंता बाजार के सेंटीमेंट पर हावी रही।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.17 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन के प्रमुख कमजोर सेक्टर रहे। इसके अलावा निफ्टी मेटल में 0.95 प्रतिशत निफ्टी इन्फ्रा में 0.86 प्रतिशत निफ्टी कमोडिटीज में 0.84 प्रतिशत निफ्टी कंजप्शन में 0.63 प्रतिशत निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स भी 0.44 प्रतिशत कमजोर रहा। इन सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की कुल कमजोरी को और बढ़ाया।

    हालांकि बाजार में कुछ ऐसे सेक्टर भी रहे जिन्होंने गिरावट को सीमित करने का काम किया। निफ्टी फार्मा 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख इंडेक्स में रहा। निफ्टी आईटी में 0.61 प्रतिशत निफ्टी हेल्थकेयर में 0.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने बाजार में जोखिम बढ़ने के बावजूद चुनिंदा रक्षात्मक और मजबूत कंपनियों में खरीदारी बनाए रखी।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कारोबार मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 11.85 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 63,843.85 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 43.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,857.15 पर पहुंच गया। सेंसेक्स में इटरनल इन्फोसिस टाइटन एचसीएल टेक और टीसीएस बढ़त के साथ बंद होने वाले प्रमुख शेयरों में रहे। इसके विपरीत अल्ट्राटेक सीमेंट एक्सिस बैंक इंडिगो भारती एयरटेल बजाज फाइनेंस पावर ग्रिड आईटीसी एमएंडएम टाटा स्टील एचयूएल एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व एलएंडटी सन फार्मा मारुति सुजुकी एसबीआई ट्रेंट एचडीएफसी बैंक टेक महिंद्रा एनटीपीसी आईसीआईसीआई बैंक कोटक महिंद्रा बैंक और बीईएल समेत कई दिग्गज शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को एक बार फिर महंगाई और ब्याज दरों के संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधान और अमेरिका ईरान बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। निवेशकों की नजर अब भारत और अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है क्योंकि इनके आधार पर आगे की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार नई दिशा तय कर सकता है। हालांकि विदेशी निवेश की मजबूत आवक और कंपनियों की बेहतर कमाई बाजार के लिए राहत देने वाले संकेत बने हुए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में वैश्विक घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • उतार-चढ़ाव के बीच मामूली बढ़त पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 43 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,583 पर पहुंचा

    उतार-चढ़ाव के बीच मामूली बढ़त पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 43 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,583 पर पहुंचा


    नई दिल्ली । हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर समझौते की अनिश्चितता का असर निवेशकों के रुख पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान बाजार में कई बार तेजी और कमजोरी के दौर आए, लेकिन अंत में प्रमुख सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,542.44 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 13.15 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली तेजी दर्ज की गई और यह 24,583.80 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों की सीमित बढ़त से संकेत मिला कि निवेशकों ने मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख बनाए रखा।

    व्यापक बाजार में हालांकि तस्वीर कुछ अलग रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.27 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। इसके बावजूद दोनों सूचकांक अपने-अपने रिकॉर्ड उच्च स्तरों के आसपास बने हुए हैं। इससे व्यापक बाजार में अब भी मजबूती कायम रहने का संकेत मिलता है।

    क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा और इसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। फार्मा और एफएमसीजी क्षेत्र के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इसके विपरीत निफ्टी रियल्टी ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार की कमजोरी के बीच मजबूती दिखाई।

    निफ्टी50 में टाइटन, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम और टाटा स्टील प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का रुख दिखाई दिया और इन्होंने सूचकांक को संभालने में योगदान दिया।

    दूसरी ओर एसबीआई, इटरनल, आईटीसी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टीसीएस, विप्रो और कोल इंडिया के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन प्रमुख शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार की बढ़त सीमित रही और कारोबार का समग्र रुख सपाट बना रहा।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 24,750 से 24,800 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस क्षेत्र माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे के ऊपर मजबूती से टिकता है तो आगे 24,950 और फिर 25,100 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    वहीं, बाजार में कमजोरी आने पर 24,450 से 24,420 का क्षेत्र निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट जोन रहेगा। इस स्तर के ऊपर सूचकांक के बने रहने तक बाजार की व्यापक संरचना सकारात्मक रहने की उम्मीद है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति, आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बनी रहेगी।

  • निफ्टी-सेंसेक्स की तेजी के बाद अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कच्चे तेल और घरेलू आंकड़ों पर रहेगी

    निफ्टी-सेंसेक्स की तेजी के बाद अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कच्चे तेल और घरेलू आंकड़ों पर रहेगी

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए 10 से 14 अगस्त के बीच आने वाला कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के कारण अहम माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, घरेलू महंगाई के आंकड़े और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार की दिशा तय करने में इन सभी कारकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। फिलहाल दोनों देशों के बीच हमले रुके हुए हैं और इसी वजह से कच्चे तेल की कीमत करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। तेल की कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दिखाई दे सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।

    घरेलू मोर्चे पर खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े अगले सप्ताह जारी किए जाएंगे। महंगाई के आंकड़े अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के दबाव के साथ मांग और आपूर्ति की स्थिति का संकेत देते हैं। ऐसे में निवेशक इन आंकड़ों का विश्लेषण करके बाजार की आगे की दिशा को लेकर अपनी रणनीति तय कर सकते हैं।

    इसके अलावा कई सूचीबद्ध कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित करेंगे। 10 से 14 अगस्त के बीच स्काईगोल्ड, बॉश, बॉम्बे डाइंग, डॉलर, डीबीएल, आईटीडीसी, वोडाफोन आइडिया, आइडियाफोर्ज, हिंदुस्तान कॉपर, लिंडे इंडिया, वीगार्ड, जी, बाटा इंडिया, ईपैक, ईपीएल, आईएफसीआई और जेएनके इंडिया समेत कई कंपनियों के नतीजे सामने आने हैं।

    बीते कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में कुल मिलाकर मजबूती देखने को मिली। निफ्टी 187.05 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,570.65 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स में 404.53 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 78,499.17 के स्तर पर बंद हुआ।

    बाजार में व्यापक तेजी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 548.25 अंक यानी 0.87 प्रतिशत बढ़कर 63,463.55 पर पहुंच गया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 528.15 अंक यानी 2.73 प्रतिशत की मजबूत तेजी दर्ज हुई और यह 19,867.80 पर बंद हुआ।

    सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा और इसमें 5.01 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.30 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 3.70 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 3.14 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 2.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

    इसी तरह निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग में 2.04 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज में 1.32 प्रतिशत, निफ्टी इंफ्रा में 1.01 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.64 प्रतिशत की मजबूती रही। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया 3.94 प्रतिशत गिरा। निफ्टी रियल्टी में 1.72 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.48 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.28 प्रतिशत नीचे रहे।

    कुल मिलाकर अगले सप्ताह बाजार की निगाह घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के प्रदर्शन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर रहेगी। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव और महंगाई के आंकड़ों में होने वाले बदलाव निवेशकों के लिए प्रमुख संकेतक रहेंगे। तिमाही नतीजों से कंपनियों के कारोबार और कमाई की तस्वीर भी स्पष्ट होगी, जिससे अलग-अलग शेयरों और क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

  • Nifty vs Sensex: कौन सा इंडेक्स देता है बेहतर निवेश का मौका? समझें आसान भाषा में पूरा फर्क

    Nifty vs Sensex: कौन सा इंडेक्स देता है बेहतर निवेश का मौका? समझें आसान भाषा में पूरा फर्क


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि निफ्टी और सेंसेक्स में से कौन सा बेहतर है। दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स हैं और देश की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। हालांकि दोनों के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं जिन्हें समझना किसी भी निवेशक के लिए जरूरी है। खासकर नए निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि निफ्टी और सेंसेक्स सीधे तौर पर निवेश के साधन नहीं बल्कि बाजार के प्रदर्शन को मापने वाले प्रमुख सूचकांक हैं। इनके आधार पर कई इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश किया जा सकता है।

    सेंसेक्स बीएसई यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स है। इसमें देश की 30 बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। इन कंपनियों का चयन बाजार पूंजीकरण और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है। सेंसेक्स का प्रदर्शन इन कंपनियों के शेयरों में होने वाली तेजी और गिरावट से प्रभावित होता है। दूसरी तरफ निफ्टी 50 एनएसई यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स है। इसमें 50 बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। इसलिए निफ्टी में सेंसेक्स की तुलना में कंपनियों की संख्या अधिक होती है और इसका दायरा भी थोड़ा व्यापक माना जाता है।

    दोनों इंडेक्स में भारत की प्रमुख कंपनियां शामिल रहती हैं और कई बड़ी कंपनियां दोनों में भी मौजूद होती हैं। यही वजह है कि लंबे समय में दोनों के प्रदर्शन में बहुत ज्यादा अंतर देखने को जरूरी नहीं है। हालांकि किसी खास समय में सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन के कारण दोनों इंडेक्स के रिटर्न में अंतर आ सकता है। उदाहरण के लिए यदि निफ्टी में शामिल किसी विशेष सेक्टर की कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं तो निफ्टी को उसका फायदा मिल सकता है। इसी तरह सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से सेंसेक्स मजबूत हो सकता है।

    अगर निवेश के नजरिए से देखा जाए तो किसी एक इंडेक्स को हर निवेशक के लिए बेहतर बताना सही नहीं होगा। निवेशक को अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला करना चाहिए। जो व्यक्ति लंबे समय के लिए बाजार में निवेश करना चाहता है और अलग-अलग बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन में भागीदारी चाहता है वह निफ्टी 50 या सेंसेक्स आधारित इंडेक्स फंड पर विचार कर सकता है। दोनों ही विकल्प बाजार की बड़ी कंपनियों में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश का अवसर देते हैं।

    नए निवेशकों के लिए इंडेक्स आधारित निवेश का एक फायदा यह है कि इसमें किसी एक कंपनी के शेयर चुनने का जोखिम अपेक्षाकृत कम हो सकता है क्योंकि निवेश कई कंपनियों में फैला होता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें जोखिम नहीं होता। शेयर बाजार से जुड़े निवेश में बाजार की स्थिति के अनुसार उतार-चढ़ाव बना रहता है और निवेश की रकम घट या बढ़ सकती है।

    निफ्टी और सेंसेक्स में चुनाव करते समय केवल पिछले रिटर्न को देखकर फैसला करना भी उचित नहीं है। निवेशक को फंड का खर्च अनुपात ट्रैकिंग एरर निवेश की अवधि और अपने वित्तीय लक्ष्य जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा निवेश शुरू करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता समझना और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की मदद लेना बेहतर रहता है।

    कुल मिलाकर निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के मजबूत और महत्वपूर्ण इंडेक्स हैं। किसी एक को हमेशा दूसरे से बेहतर कहना सही नहीं होगा। लंबे समय के निवेश के लिए दोनों से जुड़े इंडेक्स फंड या अन्य निवेश विकल्प उपयोगी हो सकते हैं लेकिन अंतिम फैसला निवेशक के लक्ष्य जोखिम और निवेश अवधि के आधार पर होना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि केवल इंडेक्स का नाम देखकर निवेश करने के बजाय उसके पीछे की कंपनियों बाजार की स्थिति और निवेश उत्पाद की लागत को समझकर ही फैसला लेना चाहिए।

  • पश्चिम एशिया तनाव का असर, सेंसेक्स 456 अंक टूटा और निफ्टी 24,600 से नीचे बंद हुआ

    पश्चिम एशिया तनाव का असर, सेंसेक्स 456 अंक टूटा और निफ्टी 24,600 से नीचे बंद हुआ


    नई दिल्ली ।वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन दबाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके चलते प्रमुख घरेलू सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।

    बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,499.17 के स्तर पर रहा। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में 65.35 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,570.65 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी 24,600 के स्तर से नीचे चला गया।

    व्यापक बाजार की बात करें तो तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.05 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि दबाव मुख्य रूप से बड़े और प्रमुख शेयरों में ज्यादा दिखाई दिया।

    सेक्टरवार कारोबार में वित्तीय सेवाओं, निजी बैंकों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके विपरीत ऑटो और आईटी क्षेत्र में मजबूती देखने को मिली। मेटल और पीएसयू बैंक सूचकांकों ने भी बाजार की गिरावट के बीच बेहतर प्रदर्शन किया।

    निफ्टी 50 में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, हिंडाल्को, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक और एसबीआई प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और श्रीराम फाइनेंस पर बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार में शुक्रवार की कमजोरी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़ता तनाव रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी नई अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, कंपनियों की लागत और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर संभावित असर को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ती है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर भी जारी है और अलग-अलग कंपनियों के परिणामों के आधार पर शेयरों में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू कारोबार पर दबाव बनाया।

    हालांकि बाजार के मौजूदा रुख को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और संभावित शांति समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों का स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए तेल की कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बन सकती है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं संकेतों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की संभावना रहेगी।

  • मार्केट आउटलुक: अगस्त में सेंसेक्स-निफ्टी की दिशा क्या होगी? इन अहम संकेतों पर रहेगी नजर

    मार्केट आउटलुक: अगस्त में सेंसेक्स-निफ्टी की दिशा क्या होगी? इन अहम संकेतों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 7 अगस्त का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब घरेलू और वैश्विक दोनों संकेतों पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा विदेशी बाजारों के रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम से तय हो सकती है।

    यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर पर इस कारोबारी सत्र में खास नजर रहने की संभावना है। यदि इन प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी चुनिंदा स्टॉक्स निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही निवेश करना बेहतर रहेगा।

    कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजों वाली कंपनियों के शेयर दबाव में रह सकते हैं। इसलिए निवेशकों को परिणाम घोषित करने वाली कंपनियों पर विशेष नजर रखनी चाहिए।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूत समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है। इसके अलावा रुपये की चाल और डॉलर इंडेक्स पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है इसलिए जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को तकनीकी स्तरों पर नजर रखते हुए ट्रेडिंग करनी चाहिए। बिना शोध और जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करना नुकसान का कारण बन सकता है।

    बाजार में सफलता पाने के लिए धैर्य और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना आवश्यक है। यदि निवेशक सही रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं तो बाजार की अस्थिरता के बीच भी बेहतर अवसर तलाश सकते हैं।

    कुल मिलाकर 7 अगस्त का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण आर्थिक और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। बाजार में उतार चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी लेकिन मजबूत सेक्टरों और गुणवत्तापूर्ण शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अवसर भी मौजूद रहेंगे। समझदारी से लिया गया निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मददगार साबित हो सकता है।

  • Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों की सकारात्मक धारणा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 373.76 अंकों की बढ़त के साथ 78,954.76 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 11.35 अंक चढ़कर 24,636.00 पर पहुंच गया। निफ्टी का 24,600 के ऊपर बंद होना बाजार की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंतिम चरण में चुनिंदा हैवीवेट और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। इससे पहले मंगलवार की गिरावट के बाद भी बाजार ने वापसी करते हुए लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज की है। निवेशकों का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से आगे भी बाजार को समर्थन मिल सकता है।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो पीएसयू बैंक शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मीडिया, रियल्टी, ऑटो, मेटल और आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली के कारण गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद व्यापक बाजार में स्मॉलकैप शेयरों की मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में एसबीआई, बीईएल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस, सिप्ला और इटरनल में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। वहीं पावर ग्रिड, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, टीसीएस और बजाज ऑटो के शेयर दबाव में रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और पश्चिम एशिया में समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में जारी कूटनीतिक प्रयासों ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने और कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर कॉर्पोरेट मुनाफे पर पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा बाजार में बना हुआ है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के स्थिर नीतिगत रुख और आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में आई खरीदारी इसी भरोसे को दर्शाती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों की संभावना निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।

    हालांकि कुछ क्षेत्रों में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन स्मॉलकैप और चुनिंदा वैल्यू शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। विशेष रूप से ऊर्जा, टेलीकॉम और रिटेल से जुड़े कारोबार में लंबी अवधि की संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी। इससे बाजार का समग्र रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे।

  • शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सकारात्मक रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 250 अंकों की बढ़त के साथ 78,850 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी मामूली तेजी के साथ 24,650 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटे में निवेशकों की ओर से बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान चुनिंदा बड़े शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    आज के कारोबार में बैंकिंग कंपनियों के शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी निवेशकों ने भरोसा दिखाया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर मजबूत निवेश गतिविधियों और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी के कारण बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के चलते निवेशक सतर्क भी नजर आए और सीमित दायरे में कारोबार जारी रहा।

    इसी बीच रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की। कंपनी का शेयर राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज पर 245 रुपये और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 242 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ। यह कंपनी के 225 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक रहा। मजबूत लिस्टिंग ने उन निवेशकों को शुरुआती दिन ही लाभ दिया जिन्होंने कंपनी के सार्वजनिक निर्गम में निवेश किया था।

    कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस इश्यू का प्राइस बैंड 214 से 225 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। निवेशकों की अच्छी भागीदारी के चलते इस निर्गम को लगभग 7.97 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं और निवेशकों के सकारात्मक रुख का लाभ कंपनी को सूचीबद्ध होने के पहले ही दिन मिला।

    दूसरी ओर एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और विभिन्न आर्थिक संकेतकों का असर एशियाई बाजारों पर स्पष्ट रूप से नजर आया। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिला-जुला प्रदर्शन दर्ज किया गया, जहां डाउ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में हल्की गिरावट रही।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो हाल के सात कारोबारी दिनों में उन्होंने कुल 2,703 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की है। हालांकि ताजा कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित बिकवाली दर्ज की गई, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा। पिछले कारोबारी दिन भी सेंसेक्स 152 अंकों की बढ़त के साथ 78,581 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन शुरुआती तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी भी घरेलू बाजार में बना हुआ है और आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कॉर्पोरेट गतिविधियों पर भी बाजार की नजर रहेगी।