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  • अनंत सिंह की बगावत से बिहार की सियासत में भूचाल बोले केकड़ा बिच्छू बन गए पार्टी के मालिक कुत्ता भी नहीं पूछेगा

    अनंत सिंह की बगावत से बिहार की सियासत में भूचाल बोले केकड़ा बिच्छू बन गए पार्टी के मालिक कुत्ता भी नहीं पूछेगा


    बिहार । बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड और मोकामा विधायक अनंत सिंह के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह ने तीखे तेवर दिखाते हुए जदयू नेतृत्व पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनाव में पार्टी को अपनी राजनीतिक ताकत का अंदाजा लग जाएगा और उसे 12 सीटें हासिल करना भी मुश्किल होगा। अनंत सिंह ने कहा कि जनता ही असली मालिक है और चुनाव के समय सबको अपनी औकात पता चल जाएगी। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई बहस छिड़ गई है।

    जदयू ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी है। निष्कासन के बाद एक इंटरव्यू में अनंत सिंह ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बाहर कर दिया है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी जिसके हाथ में है वह अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। वह किसी के पास दोबारा पार्टी में शामिल रखने की गुहार लगाने नहीं जाएंगे। अनंत सिंह ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जो किया वह उचित था और उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

    अनंत सिंह ने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि आज ऐसे लोग पार्टी के मालिक बनकर बैठे हैं जिनका संगठन को खड़ा करने में कोई खास योगदान नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में मंत्री और दूसरे पदों पर बैठे कई लोगों ने संगठन के लिए कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाई है। उनके मुताबिक चुनाव आने पर ऐसे नेताओं को अपनी वास्तविक राजनीतिक हैसियत का पता चल जाएगा। अनंत सिंह ने इसी दौरान केकड़ा और बिच्छू जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए नेतृत्व पर कटाक्ष किया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    नीतीश कुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि उनके मन में नीतीश कुमार के प्रति सम्मान पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के रहते शायद उन्हें पार्टी से निकालने की हिम्मत कोई नहीं करता। अनंत सिंह ने मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज पार्टी में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ गया है जो पहले इस स्थिति में नहीं थे। हालांकि उन्होंने निशांत कुमार को लेकर कोई तीखी टिप्पणी करने से परहेज किया। अनंत सिंह ने कहा कि निशांत के बारे में वह कुछ नहीं कहना चाहते और पार्टी जो भी फैसला करेगी उसके लिए वह तैयार हैं।

    भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर अनंत सिंह ने फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि वह आगे किस राजनीतिक दल के साथ जाएंगे इसका फैसला अभी नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार जताने की बात कही। अनंत सिंह ने दोहराया कि जनता ही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है और चुनाव के समय जनता का फैसला सामने आ जाएगा। उन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता को लेकर संभावित कार्रवाई पर भी कहा कि पार्टी जो करना चाहती है कर सकती है और उन्हें इसकी चिंता नहीं है।

    दरअसल जदयू ने अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और हालिया विधान परिषद चुनाव में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करने के आरोप लगाए हैं। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी बयान में उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की जानकारी दी गई। अनंत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया और जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार को हराने की बात कही। पार्टी ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की है। अब देखना होगा कि इस राजनीतिक टकराव का बिहार की आगामी चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय

    नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय


    नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार को हुई बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से अलग होने का मुद्दा भी चर्चा में आया। बैठक में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से जाने नहीं देना चाहिए था और अगर वह साथ रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। इस पर सोनिया गांधी ने अलग राय रखते हुए कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से बाहर जाना ही था।

    नीतीश कुमार पहले विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने गठबंधन से अलग होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का रुख किया था। मंगलवार की बैठक में उनके इस फैसले और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन के साथ बने रहते तो सियासी हालात अलग होते।

    दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर सोनिया गांधी ने कहा कि नीतीश कुमार INDIA गठबंधन में रुकना नहीं चाहते थे। उनके मुताबिक, वह गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे थे। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनका बाहर जाना पहले से तय दिशा में था। इस तरह बैठक में नीतीश कुमार के फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग आकलन सामने आए।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस चर्चा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने की बात सामने रखी। खड़गे के मुताबिक, गठबंधन का संयोजक बनने की उनकी कोशिश भी वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता के बजाय दिखावे तक सीमित थी। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार पहले उनसे राज्य की राजनीति में रहने और केंद्र में INDIA गठबंधन को समर्थन देने की बात कह चुके थे।

    नीतीश कुमार के मुद्दे पर हुई यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कांग्रेस ने मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। पार्टी की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने समेत कई मांगें रखी गईं।

    कांग्रेस की बैठक के अगले दिन INDIA गठबंधन की बैठक भी नई दिल्ली में निर्धारित थी। इसमें विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा करनी थी। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य घटक दलों के प्रमुख नेताओं की भागीदारी तय थी।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत का एक हल्का-फुल्का पल भी चर्चा में रहा। बैठक में खड़गे ने राहुल गांधी के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि पार्टी उनके पीछे चल रही है। इस पर राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए पूछा कि वे बहुत पीछे तो नहीं हैं। इसके बाद खड़गे ने कहा कि पार्टी उनके साथ चल रही है।

    नीतीश कुमार को लेकर हुई चर्चा ने INDIA गठबंधन के गठन और उसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों को फिर से सामने ला दिया। एक तरफ दिग्विजय सिंह ने उनके गठबंधन में बने रहने को लेकर अलग संभावना व्यक्त की, वहीं सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके अलग होने को उनकी राजनीतिक दिशा से जुड़ा फैसला बताया। इसी बीच विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी संयुक्त रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।

  • बिहार में बंगले पर सियासत तेज, तेज प्रताप ने नीतीश कुमार को भी नोटिस देने की उठाई मांग

    बिहार में बंगले पर सियासत तेज, तेज प्रताप ने नीतीश कुमार को भी नोटिस देने की उठाई मांग


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी विवाद के बीच राबड़ी देवी के बड़े बेटे और जन जन पार्टी के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निशाने पर लिया है।

    तेज प्रताप यादव ने साफ कहा कि यदि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से सरकारी आवास खाली करवाना चाहती है तो यही नियम पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भी पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उन्हें भी सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलना चाहिए। तेज प्रताप ने तंज कसते हुए कहा कि सबसे पहले नीतीश कुमार अपना आवास छोड़ दें, उसके बाद राबड़ी देवी भी बंगला खाली कर देंगी।

    जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि सरकार ने राबड़ी देवी को 15 दिनों के भीतर बंगला खाली करने का निर्देश दिया है तो उन्होंने जवाब दिया कि सरकार को समान नियम अपनाने चाहिए और इसी तरह का नोटिस नीतीश कुमार को भी जारी करना चाहिए। तेज प्रताप का यह बयान ऐसे समय आया है जब बंगला विवाद बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

    इससे पहले राबड़ी देवी की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्या भी इस मामले में सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आ चुकी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। रोहिणी ने कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है तो वह जबरन बंगला खाली करवाकर दिखाए। उनके अनुसार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 27 मई को एक आदेश जारी कर 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया। इसके साथ ही राबड़ी देवी को आवास खाली करने के निर्देश दिए गए। यह वही बंगला है जिसमें राबड़ी देवी पिछले करीब दो दशकों से रह रही हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम पर राबड़ी देवी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह बंगला खाली नहीं करेंगी। उनका कहना है कि सरकार चाहे जितना दबाव बनाए लेकिन उन्हें जबरन हटाना आसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यदि चाहती है तो बलपूर्वक कार्रवाई करके दिखाए।

    बंगला विवाद अब केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है बल्कि यह बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ सरकार नियमों का हवाला दे रही है तो दूसरी ओर राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है तथा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

  • “सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार ने खुद चुना उत्तराधिकारी”, ललन सिंह के बयान से बिहार की राजनीति में हलचल

    “सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार ने खुद चुना उत्तराधिकारी”, ललन सिंह के बयान से बिहार की राजनीति में हलचल


    पटना। बिहार की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि सम्राट चौधरी केवल बीजेपी की पसंद नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं अपना उत्तराधिकारी चुना है।

    ललन सिंह के इस बयान के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसे जदयू-बीजेपी गठबंधन के भीतर सत्ता हस्तांतरण और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर अहम संकेत माना जा रहा है।

    लखीसराय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ललन सिंह ने कहा, “जब नीतीश कुमार जी ने पद छोड़ने का निर्णय लिया, तब उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सम्राट चौधरी जी को चुना। सम्राट चौधरी ने यह संकल्प लिया है कि वे नीतीश कुमार द्वारा दिखाए गए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए विकसित बिहार के निर्माण का काम करेंगे।”

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान उन अटकलों का जवाब है, जिनमें कहा जा रहा था कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना बीजेपी का एकतरफा फैसला था। ललन सिंह के बयान ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि इस बदलाव को नीतीश कुमार की सहमति और समर्थन प्राप्त था।

    बिहार की राजनीति में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि, जदयू के किसी वरिष्ठ नेता की ओर से पहली बार इतनी स्पष्टता के साथ यह बात सार्वजनिक रूप से कही गई है।

    इससे पहले उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी यह संकेत दे चुके थे कि सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद प्राप्त है, लेकिन उन्होंने उन्हें सीधे तौर पर राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं बताया था।

    ललन सिंह ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि सम्राट चौधरी “विकसित बिहार” के विजन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और नीतीश कुमार के शासन मॉडल को जारी रखने का संकल्प ले चुके हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे सम्राट चौधरी को औपचारिक तौर पर नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत का चेहरा बताने की कोशिश साफ दिखाई देती है।

  • बिहार में सम्राट कैबिनेट का विस्तार: 32 मंत्रियों ने ली शपथ, नीतीश के बेटे निशांत भी शामिल, PM मोदी और शाह रहे मौजूद

    बिहार में सम्राट कैबिनेट का विस्तार: 32 मंत्रियों ने ली शपथ, नीतीश के बेटे निशांत भी शामिल, PM मोदी और शाह रहे मौजूद


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में आज बड़ा दिन देखने को मिला जब सम्राट चौधरी सरकार के कैबिनेट विस्तार में 32 नए मंत्रियों ने गांधी मैदान में शपथ ली। इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    32 मंत्रियों ने ली शपथ, कई नए चेहरे शामिल
    सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के 22 दिन बाद हुए इस कैबिनेट विस्तार में बीजेपी, जेडीयू और सहयोगी दलों से कुल 32 विधायकों को मंत्री बनाया गया।

    बीजेपी से 15 मंत्री

    जेडीयू से 13 मंत्री

    LJP(R) से 2 मंत्री

    HAM और RLM से 1-1 मंत्री

    इस दौरान कई मंत्रियों ने एक साथ शपथ ली, जिससे समारोह बेहद तेज और व्यवस्थित रहा।

    नीतीश के बेटे निशांत कुमार बने मंत्री
    इस विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की रही, जिन्होंने मंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा श्रवण कुमार, विजय सिन्हा, लेसी सिंह और दिलीप जायसवाल जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी शपथ ली।

    पीएम मोदी का भव्य स्वागत, रोड शो भी हुआ
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना एयरपोर्ट से सीधे रोड शो करते हुए गांधी मैदान पहुंचे। पूरे रास्ते समर्थकों ने फूलों की बारिश की और “मोदी-मोदी” के नारे लगाए।पीएम मोदी ने गाड़ी से ही लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।

    मंच पर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी
    शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर कई बड़े नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं

    अमित शाह

    राजनाथ सिंह

    नीतीश कुमार

    बीजेपी अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेता
    नीतीश कुमार ने मंच पर पहुंचकर कई नेताओं से मुलाकात की और अपने बेटे निशांत को आशीर्वाद भी दिया।

    राष्ट्रगीत की जगह सीधे राष्ट्रगान
    कार्यक्रम में एक खास बात यह रही कि शुरुआत में सीधे राष्ट्रगान बजाया गया, जबकि सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार पहले “वंदे मातरम” बजाया जाना था।

    कैबिनेट में जातीय और सामाजिक संतुलन
    नए मंत्रिमंडल में जातीय समीकरण पर भी खास ध्यान दिया गया है

    ईबीसी: 10 ओबीसी: 6 दलित: 7

    सवर्ण: 9

    मुस्लिम: 1

    महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व देते हुए 5 महिला मंत्रियों को शामिल किया गया है।

    किस दल से कितने मंत्री
    बीजेपी:
    EBC-5, OBC-2, दलित-2, सवर्ण-6

    जेडीयू:
    EBC-4, OBC-3, दलित-3, सवर्ण-1, मुस्लिम-1

    एलजेपी (आर): 1 दलित, 1 दलित एचएएम: 1 दलित आरएलएम: 1 OBC

    राजनीतिक हलचल तेज
    शपथ से पहले ही अमित शाह पटना पहुंचकर देर रात तक बैठकों में शामिल रहे, जहां कैबिनेट के चेहरों को अंतिम रूप दिया गया।बिहार का यह कैबिनेट विस्तार राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, जिसमें नए और पुराने चेहरों के साथ-साथ जातीय संतुलन और गठबंधन राजनीति की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

  • नीतीश कुमार के करीबी को मिल सकती है नई सरकार में अहम जिम्मेदारी..

    नीतीश कुमार के करीबी को मिल सकती है नई सरकार में अहम जिम्मेदारी..

    नई दिल्ली:   बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। इस राजनीतिक हलचल के बीच नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है और संभावित मंत्रिमंडल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसी क्रम में जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और अनुभवी विधायक विजय कुमार चौधरी का नाम उपमुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में प्रमुखता से सामने आ रहा है।

    नीतीश कुमार के साथ लंबे समय से काम कर रहे विजय कुमार चौधरी बिहार की राजनीति में एक भरोसेमंद और अनुभवी चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ के कारण उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत रणनीतिक नेता माना जाता है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उनके नाम पर चर्चा यह संकेत दे रही है कि नई सरकार में अनुभव और संतुलन को प्राथमिकता दी जा सकती है।

    विजय कुमार चौधरी का जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था और उन्होंने शिक्षा पूरी करने के बाद कुछ समय तक बैंकिंग क्षेत्र में भी कार्य किया, लेकिन बाद में उन्होंने पूरी तरह राजनीति को अपना करियर बना लिया। वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और कई बार विधानसभा चुनाव जीतकर जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ साबित कर चुके हैं।

    अपने राजनीतिक सफर में उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है, जिनमें वित्त, जल संसाधन, शिक्षा, ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य जैसे अहम मंत्रालय शामिल रहे हैं। इसके अलावा वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने सदन की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में काम किया।

    जातिगत चर्चा के बीच यह भी स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में उपनाम और सामाजिक पहचान अलग-अलग संदर्भों में देखी जाती है, लेकिन विजय कुमार चौधरी की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से उनके प्रशासनिक कौशल और लंबे अनुभव पर आधारित रही है। वे नीतीश कुमार के करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं और सरकार के निर्णयों में उनकी भूमिका अक्सर महत्वपूर्ण रही है।

    वर्तमान समय में जब एनडीए सरकार के गठन को लेकर मंथन चल रहा है, तब विजय कुमार चौधरी का नाम उपमुख्यमंत्री पद के लिए उभरकर सामने आना यह दर्शाता है कि संगठन अनुभवी और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दे सकता है। उनकी छवि एक शांत, संतुलित और प्रशासनिक रूप से दक्ष नेता की रही है, जो सरकार की नीतियों को सुचारू रूप से लागू करने में सक्षम माने जाते हैं।

    बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार में किन नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिलती है और क्या विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री के रूप में बड़ी भूमिका सौंपी जाती है या नहीं, इसका आधिकारिक फैसला आने वाले समय में राजनीतिक दिशा को और स्पष्ट करेगा।

  • बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन तय, नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर तेज हुई हलचल और भाजपा की रणनीतिक भूमिका पर टिकी सबकी नजर

    बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन तय, नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर तेज हुई हलचल और भाजपा की रणनीतिक भूमिका पर टिकी सबकी नजर


    नई दिल्ली:बिहार की राजनीति इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है, जहां मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज होती हलचल ने सियासी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं और इसके साथ ही नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस बार राज्य की सत्ता भारतीय जनता पार्टी के हाथ में जा सकती है।
    मुख्यमंत्री पद से Nitish Kumar के इस्तीफे के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं और अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर नए नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, क्योंकि मुख्यमंत्री पद के लिए नाम तय करने की जिम्मेदारी उसी के पास है।

    इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए भाजपा ने केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan को बिहार में विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनकी भूमिका पार्टी के विधायकों के बीच समन्वय स्थापित करना और नए नेता के चयन की प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करना होगी। इस कदम को पार्टी की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, जिससे नेतृत्व परिवर्तन को व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जा सके।

    राज्य के वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Choudhary ने भी संकेत दिए हैं कि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अंतिम निर्णय भाजपा को लेना है, जिसके बाद गठबंधन के विधायकों की बैठक में नेता का चयन किया जाएगा। इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पूरी प्रक्रिया का केंद्र भाजपा का निर्णय ही रहेगा।


    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मुख्यमंत्री का चयन केवल तत्काल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि आगामी चुनावों और व्यापक रणनीति को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। बिहार जैसे राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में पार्टी नेतृत्व हर पहलू को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की तैयारी में है।

    इस बीच संभावित दावेदारों की सक्रियता और अंदरूनी बैठकों ने यह संकेत दिया है कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हो चुकी है। हालांकि अंतिम निर्णय विधायक दल की बैठक में ही लिया जाएगा, जहां चुने गए नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।

    बदलते राजनीतिक घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार जल्द ही एक नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ सकता है। अब सभी की नजर उस फैसले पर टिकी हुई है, जो राज्य की राजनीति की दिशा और भविष्य दोनों को प्रभावित करेगा।

  • नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर शुरू की नई राजनीतिक पारी..

    नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर शुरू की नई राजनीतिक पारी..


    नई दिल्ली:बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है, जहां लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहे नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर अपनी राजनीतिक यात्रा के एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है। संसद भवन में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण की, जिसके साथ ही उनके राजनीतिक सफर में केंद्र की भूमिका को लेकर नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

    शपथ ग्रहण के साथ राजनीतिक यात्रा का नया चरण
    नीतीश कुमार ने शुक्रवार दोपहर राज्यसभा सदस्य के रूप में हिंदी में शपथ ली। इस अवसर पर संसद परिसर में कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे, जिससे यह कार्यक्रम राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बन गया। लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहने के बाद उनका यह कदम राज्य की राजनीति और राष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।

    दो दशक की नेतृत्व यात्रा का नया मोड़

    नीतीश कुमार पिछले लगभग दो दशकों से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई बार सत्ता संभाली और राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई। अब राज्यसभा में प्रवेश के साथ उनकी सक्रियता केंद्र की राजनीति की ओर बढ़ने की संभावना को और मजबूत कर रही है।

    विधान परिषद से इस्तीफा और नई राजनीतिक दिशा

    राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। यह कदम उनके राजनीतिक बदलाव का औपचारिक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह बदलाव केवल एक पद परिवर्तन नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे अब राष्ट्रीय स्तर पर अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

    बिहार की सत्ता समीकरणों पर असर की संभावना

    नीतीश कुमार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य में नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है। हालांकि इस पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन सियासी गतिविधियों ने संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है।

    केंद्र की राजनीति में बढ़ती भूमिका

    राज्यसभा सांसद बनने के बाद नीतीश कुमार की भूमिका अब केंद्र की राजनीति में अधिक प्रभावी हो सकती है। उनके अनुभव और लंबे प्रशासनिक कार्यकाल को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वे राष्ट्रीय नीतिगत चर्चाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

    संसदीय लोकतंत्र में व्यापक अनुभव
    नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर अत्यंत व्यापक रहा है। वे लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य रह चुके हैं, इसके अलावा उन्होंने विधानसभा और विधान परिषद दोनों में भी काम किया है। यह उन्हें देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल करता है जिन्होंने संसदीय लोकतंत्र के सभी मंचों पर कार्य किया है।

    राजनीतिक भविष्य पर निगाहें
    उनके इस नए कदम के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे केंद्र में किस प्रकार की भूमिका निभाते हैं और बिहार की राजनीति में आगे क्या परिवर्तन देखने को मिलता है। उनके अनुभव और राजनीतिक समझ को देखते हुए यह बदलाव आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।

  • 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज

    10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज


    पटना।
    बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। जदयू के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री तीन दिवसीय दौरे पर 9 अप्रैल की दोपहर दिल्ली रवाना होंगे। शुक्रवार को शपथ लेने के बाद शनिवार 11 अप्रैल को पटना वापस आएंगे। दिल्ली में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री (Prime Minister and Home Minister) से भी उनकी मुलाकात हो सकती है।

    नीतीश कुमार के पटना वापसी के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो जाएगी। इसके बाद किसी भी दिन नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं। एनडीए के दलों में यह आपसी साझेदारी बन चुकी है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। सरकार में जदयू की मौजूदगी भी दमदार रहेगी तथा इस पार्टी से राज्य को उप मुख्यमंत्री मिलेगा। यह दोनों बातें पहली बार होगी।

    नीतीश कुमार बतौर राज्यसभा सदस्य शपथ लेकर पटना वापसी पर किसी दिन एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं और इस बैठक में वह सीएम पद छोड़ने की जानकारी आधिकारिक तौर पर विधायकों को देंगे। फिर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार के गठन को पहले एनडीए के सभी घटक दलों के विधायक दल की अलग-अलग बैठकों में नेता चुने जाएंगे।

    फिर एनडीए विधानमंडल दल के नेता की घोषणा संयुक्त बैठक में होगी। नए नेता सरकार गठन का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपेंगे। एनडीए के दलों में हो रही चर्चा के मुताबिक 15 अप्रैल के बाद ही नई सरकार अस्तित्व में आएगी। पद छोड़ने के पहले सीएम की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक होने के भी आसार हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।


    कौन बनेगा बिहार का सीएम?

    अब भले ही बिहार में नई सरकार बनने का प्रोग्राम सेट हो गया हो लेकर राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसपर अभी सस्पेंस बरकरार है। सीएम की रेस में सम्राट चौधरी का नाम अभी सबसे आगे चल रहा है। मौजूदा डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हाल ही में यह कर सम्राट चौधरी की राह और भी आसान कर दी थी कि वो सीएम की रेस में नहीं हैं बल्कि वो सेवक की रेस में हैं। हालांकि, बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर अभी बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है। पार्टी नेता लगातार यह कह रहे हैं कि एनडीए की बैठक में बिहार के नए सीएम का नाम तय किया जाएगा। इधऱ डिप्टी सीएम की रेस में नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम है। हालांकि, सीएम और डिप्टी सीएम के नामों को लेकर यह सिर्फ कयासबाजी है अभी इसपर आधिकारिक तौर से कुछ भी साफ नहीं किया गया है।

  • नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्‍यमंत्री पद से दे सकते हैं इस्तीफा, 14 को नई सरकार बनने की संभावना

    नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्‍यमंत्री पद से दे सकते हैं इस्तीफा, 14 को नई सरकार बनने की संभावना


    नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में MLC पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री की खोज शुरू हो गई है। बीजेपी की ओर से नए सीएम के लिए सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय और दिलीप जायसवाल के नाम चर्चा में हैं। जेडीयू से निशांत कुमार और विजय चौधरी के नाम सामने आ रहे हैं।

    मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार 12 अप्रैल को CM पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद 14 अप्रैल तक नए मुख्यमंत्री की शपथ समारोह होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    राजनीतिक गतिविधियां और दिल्ली यात्रा

    सियासी हलचल के बीच बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार अगले सप्ताह 9 अप्रैल को दिल्ली जाएंगे और राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके बाद वे पटना लौटकर राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे।

    सुरक्षा और आवास में बदलाव

    मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा जारी रहेगी। गृह विभाग की विशेष शाखा ने आदेश में कहा है कि उन्हें बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सीएम पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार को वर्तमान में 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास छोड़कर 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रहने के लिए जाना होगा।