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  • नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री: पटना में JDU जॉइन, कार्यकर्ताओं ने लगाए भविष्य के CM के नारे

    नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री: पटना में JDU जॉइन, कार्यकर्ताओं ने लगाए भविष्य के CM के नारे


    पटना। बिहार की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar ने पटना स्थित पार्टी कार्यालय में Janata Dal (United) (जेडीयू) की सदस्यता ग्रहण कर ली। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Kumar Jha ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई, जबकि वरिष्ठ नेता Rajiv Ranjan Singh ने उन्हें पार्टी का गमछा पहनाकर स्वागत किया। हालांकि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Nitish Kumar मौजूद नहीं रहे।

    पार्टी की सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार ने कहा कि वे पार्टी के लिए पूरी मेहनत से काम करेंगे और उनके पिता ने पिछले 20 वर्षों में बिहार के विकास के लिए जो काम किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने बिहार और देश की जनता से अपील करते हुए कहा कि लोग उनके पिता पर विश्वास बनाए रखें। सदस्यता लेने के बाद निशांत ने मंच पर मौजूद नेताओं के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया।

    जेडीयू कार्यालय पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों के साथ समर्थकों ने फूलों की वर्षा की और “नीतीश कुमार जिंदाबाद” तथा “बिहार का सीएम कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो” जैसे नारे लगाए। कई समर्थक हाथी, घोड़ा और ऊंट लेकर स्वागत करने पहुंचे थे। मोकामा से बाहुबली नेता Anant Kumar Singh के समर्थक भी बड़ी संख्या में पटना पहुंचे।

    इस मौके पर जेडीयू विधायक Nachiketa Mandal ने कहा कि निशांत कुमार पार्टी के लिए बेहतर काम करेंगे और Nitish Kumar के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिनमें मंत्री Vijay Kumar Chaudhary, Shravan Kumar और Ramnath Thakur शामिल थे।

    निशांत कुमार की जेडीयू में एंट्री को बिहार की राजनीति में एक अहम कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे आने वाले समय में राज्य की सियासत और पार्टी की रणनीति पर असर पड़ सकता है।

  • बिहार की राजनीति में नया मोड़ नीतीश कुमार सहित एनडीए के पांच उम्मीदवारों ने भरा राज्यसभा नामांकन

    बिहार की राजनीति में नया मोड़ नीतीश कुमार सहित एनडीए के पांच उम्मीदवारों ने भरा राज्यसभा नामांकन


    नई दिल्ली :बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। खास बात यह रही कि नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे संभावित राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
    नामांकन प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के पांचों दलों ने एक साथ अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया। इनमें नीतीश कुमार के अलावा नितिन नबीन, रामनाथ ठाकुर, शिवेश कुमार राम और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। सभी उम्मीदवार बिहार विधान सभा परिसर पहुंचे और राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया।

    नामांकन के दौरान अमित शाह की मौजूदगी ने इस प्रक्रिया को और भी राजनीतिक रूप से अहम बना दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार की आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है।

    इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पटना में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार मुलाकात की। उन्होंने अपने संदेश में जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर भरोसा बनाए रखा है और उसी विश्वास के बल पर उन्होंने राज्य की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ की है।

    अपने पोस्ट में नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि उनके संसदीय जीवन की शुरुआत से ही यह इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी भावना के तहत उन्होंने इस बार राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा जताई है और चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया है।

    गौरतलब है कि Election Commission of India ने 18 फरवरी को देश के 10 राज्यों में खाली हो रही 37 सीटों के लिए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इन सीटों पर चुनाव इसलिए कराए जा रहे हैं क्योंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होने वाला है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कराया जाएगा। इसके बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    नामांकन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे जहां उन्होंने नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary सहित कई अन्य नेता भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इस दौरान राज्यसभा चुनाव के साथ साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगे की रणनीति को लेकर भी चर्चा की गई।

  • नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा

    नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा


    नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके साथ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश कुमार भी मौजूद रहे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और नीतीश कुमार के लंबे और भ्रष्टाचार-मुक्त राजनीतिक सफर की सराहना की। शाह ने कहा कि नीतीश का कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में लिखा जाएगा और उन्होंने बिहार को जंगलराज से मुक्त करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बिहार की सड़कों और ग्रामीण विकास में भी योगदान दिया और अपनी राजनीतिक यात्रा में किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप कभी नहीं लगा।

    नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यसभा में जाने के बावजूद वे बिहार की नई सरकार को हर तरह से सहयोग देंगे। उन्होंने अपने संसदीय जीवन के महत्व और जनता के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया। नीतीश के इस ऐलान के बाद तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में महाराष्ट्र मॉडल लागू किया गया है और बीजेपी ने नीतीश को हाईजैक कर दिया। उनका कहना था कि सहयोगी पार्टी को ताकत से दबाकर नीतीश को राज्यसभा भेजा गया।

    नीतीश के राज्यसभा नामांकन की खबर मिलते ही सुबह से ही JDU कार्यकर्ता उनके मुख्यमंत्री आवास पर इकट्ठा होने लगे। कार्यकर्ताओं ने अपने नेता के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वे नीतीश कुमार को कहीं नहीं जाने देंगे। इस दौरान CM हाउस के बाहर भावुक दृश्य देखने को मिले और कई कार्यकर्ता रोते हुए नजर आए। कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कोटे के मंत्रियों सुरेंद्र मेहता, JDU MLC संजय गांधी और JDU विधायक प्रेम मुखिया को भी CM हाउस से बाहर निकाल दिया।

    JDU कार्यालय में भी नाराज कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और हंगामा किया। कई जिलों जैसे बेगूसराय और नालंदा में नीतीश के राज्यसभा जाने का विरोध हुआ। कार्यकर्ताओं ने ललन सिंह, विजय चौधरी, संजय झा मुर्दाबाद के नारे लगाए, जिसके कारण JDU ऑफिस का गेट बंद कर दिया गया। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि नीतीश कुमार के योगदान की चर्चा दशकों तक होती रहेगी और कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला सहज रूप से अपनाना मुश्किल है, लेकिन वे इसे स्वीकार करेंगे।

    अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि नीतीश कुमार 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री रहे और अब लंबे अरसे के बाद राज्यसभा सांसद के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं। शाह ने उनके प्रशासनिक कौशल, सादगी और बिहार में विकास कार्यों के लिए किए गए योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के हर गांव और घर में बिजली पहुंचाई और पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाया।

    नीतीश कुमार ने भी अपने पोस्ट में कहा कि संसदीय जीवन के लिए उनका सपना है कि वे दोनों सदनों का अनुभव लें और बिहार के विकास के लिए काम करें। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की कि वे बिहार की नई सरकार को सहयोग दें और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा के लिए नीतीश का नामांकन और JDU कार्यकर्ताओं का गुस्सा बिहार में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह घटना न केवल राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि आगामी दिनों में बिहार की सियासत में हलचल और बढ़ सकती है।

    नीतीश कुमार का यह कदम उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्यसभा में जाने के साथ ही वे राष्ट्रीय स्तर पर फिर से सक्रिय भूमिका निभाएंगे, वहीं कार्यकर्ताओं का विरोध और नाराजगी बीजेपी और JDU के बीच संबंधों की जटिलता को भी दर्शाता है।

  • बिहार विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार और भाई वीरेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक, चौकीदारों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर हंगामा

    बिहार विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार और भाई वीरेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक, चौकीदारों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर हंगामा


    नई दिल्ली । पटना बिहार विधानसभा में आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र आमने सामने आ गए। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। दरअसल सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने कल चौकीदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी की। आरजेडी विधायकों ने लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी नहीं चलेगी का नारा लगाया। आरजेडी विधायकों को जवाब देने के लिए मंत्री विजय चौधरी उठे। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चलेगी तो चौकीदारों की सुनेगा कौन।

    नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए विपक्षी विधायक

    इतने में सीएम नीतीश भी खड़े हो गए। उन्होंने भाई वीरेन्द्र को कहा कि आप बैठिए। आपकी संख्या कितनी कम है। आप लोगों ने कभी कोई काम नहीं किया है। नीतीश जब बोल रहे थे तो आरजेडी विधायक सर्वजीत भी खड़े हो गए। फिर राजद विधायक वेल की तरफ आ गए और नारे लगाने लगे। मार्शल ने विधायकों के हाथ से तख्तियां ले ली।

    सरकार ने दिया विपक्ष के आरोपों का जवाब

    आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने चौकीदारों पर लाठीचार्ज को क्रूर बताया। आरजेडी विधायकों ने सदन में हंगामा किया। संसदीय मामलों के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन चौकीदारों और दफादारों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने कहा कि उसने चौकीदार के विरोध को दबाने की कोशिश नहीं की है और उनकी मांगों की जांच करेगी।

    मांगों को लेकर किया था प्रदर्शन

    बता दें कि बिहार पुलिस के चौकीदारों ने सोमवार को अपने मानदेय में बढ़ोतरी और सर्विस में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और बैरिकेड तोड़ दिए जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। पुलिस की कार्रवाई में कई चौकीदार घायल हो गए। बिहार पुलिस के चौकीदारों ने पटना के बीच में जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और डाक बंगला क्रॉसिंग की ओर बढ़ने की कोशिश की।

  • बिहार: नीतीश कुमार पर विपक्ष की अभद्र टिप्पणी से भड़के विजय सिन्हा, बोले- लोकतंत्र की गरिमा से खिलवाड़

    बिहार: नीतीश कुमार पर विपक्ष की अभद्र टिप्पणी से भड़के विजय सिन्हा, बोले- लोकतंत्र की गरिमा से खिलवाड़


    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर माहौल गरमा गया है. विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर की गई अभद्र टिप्पणी पर राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति इस तरह की भाषा का प्रयोग न सिर्फ गलत, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी है. सदन में जाने से पहले विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन मर्यादा और भाषा की सीमा लांघना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है. उन्होंने विपक्ष की इस मानसिकता को पूरी तरह अनुचित बताया और संयम व जिम्मेदारी की अपील की.

    पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लेकर सदन में नीतीश कुमार के बयान पर उन्होंने कहा कि जिस भाव से मुख्यमंत्री ने कहा उन दोनों का देवर-भौजाई का रिश्ता है. उन्होंने कहा कि राजनीति नहीं अपनत्व का प्रकट मुख्यमंत्री ने किया जिसे गलत सेंस में लेना कतई उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा सबको रखने की जिम्मेवारी है और मुख्यमंत्री का वैसा कोई भाव नहीं था.

    विपक्ष को संविधान पर नहीं है विश्वास- विजय कुमार सिन्हा

    वहीं विपक्ष के 119 सांसदों के द्वारा लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विपक्ष को संविधान में विश्वास नहीं है. ये लोग संवैधानिक पद का सम्मान नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि ओम बिरला ने विधायकी कार्य को बेहतर करने एवं सुंदर वातावरण बनाने का काम किया है. विपक्ष की अराजकता को रोकने के लिए जब वो सतर्क और सावधान करते हैं. अविश्वास प्रस्ताव से संवैधानिक संस्था को डिमोरलाईज करने का प्रयास विपक्ष करती है.

    संवैधानिक संस्था का अपमान करना ही है कांग्रेस का चरित्र- सिन्हा

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस के लोगों का चरित्र ही वैसा है. संवैधानिक संस्था का अपमान करना, भय का वातावरण बनाना और वैसे लोग जो बेहतर काम करते हैं उनको डिमोरलाईज करने का काम ये लोग करते हैं.उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्था, सीबीआई, चुनाव आयोग पर ये सवाल उठाते रहे हैं. लेकिन अब ये देश के सबसे बड़े मंदिर के सबसे बड़े पुजारी पर सवाल खड़े कर सदन की गरिमा को गिराने का काम कर रही है.

  • नीतीश के सामने ललन ने निशांत से कहा ‘अब मान जाइए’, पॉलिटिकल डेब्यू की अटकलों से फिर गरमाई बिहार की सियासत

    नीतीश के सामने ललन ने निशांत से कहा ‘अब मान जाइए’, पॉलिटिकल डेब्यू की अटकलों से फिर गरमाई बिहार की सियासत


    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर चल रही चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। सरस्वती पूजा के मौके पर सामने आए एक वीडियो ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। वीडियो में केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता ललन सिंह नीतीश कुमार की मौजूदगी में निशांत कुमार से कहते नजर आ रहे हैं
    “अब बोल दीजिए कि मान जाएंगे, आज बोल ही दीजिए।” इस एक लाइन ने निशांत के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है।

    दरअसल, शुक्रवार को पटना में एक पूजा स्थल पर नीतीश कुमार दर्शन के लिए पहुंचे थे, जहां निशांत कुमार पहले से मौजूद थे। उसी दौरान ललन सिंह, विजय चौधरी समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी वहां मौजूद थे। बातचीत के दौरान ललन सिंह ने निशांत के कंधे पर हाथ रखकर यह बात कही। हालांकि, निशांत कुमार ने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए।

    नीतीश कुमार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी और पूजा में लीन रहे। मौके पर मौजूद लोग इस बातचीत पर मुस्कुरा दिए, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

    इस वीडियो के सामने आने के बाद जदयू और भाजपा दोनों दलों में बयानबाज़ी शुरू हो गई है। जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि वीडियो का संदर्भ स्पष्ट नहीं है और यह जरूरी नहीं कि बात राजनीति में आने को लेकर ही हो। वहीं प्रवक्ता मनीष यादव ने कहा कि निशांत कुमार पढ़े-लिखे और सक्षम युवा हैं, लेकिन राजनीति में आने का फैसला पूरी तरह उनका और पार्टी नेतृत्व का होगा।

    भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है।

    भाजपा नेता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि निशांत कुमार में क्षमता है और अगर वे राजनीति में आते हैं तो बिहार को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम निर्णय निशांत कुमार का ही होगा और सभी को उसका सम्मान करना चाहिए।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब निशांत कुमार के राजनीतिक डेब्यू की चर्चा हुई हो।

    इससे पहले भी जदयू नेताओं और समर्थकों की ओर से पोस्टर, उपवास और नारेबाज़ी के जरिए उन्हें राजनीति में लाने की मांग उठती रही है। उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता भी निशांत की वकालत कर चुके हैं।

    फिलहाल, नीतीश कुमार और निशांत कुमार की खामोशी बनी हुई है, लेकिन ललन सिंह का यह बयान बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर गया हैक्या निशांत कुमार जल्द सियासी मैदान में उतरेंगे या यह चर्चा यूं ही चलती रहेगी

  • नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष

    नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष


    नई दिल्ली। नितिन नबीन का नाम इन दिनों भाजपा और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। 45 वर्षीय नितिन नबीन निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। बिहार के पथ निर्माण मंत्री रह चुके नितिन की राजनीतिक यात्रा लंबी और भरोसेमंद रही है। पांच विधानसभा चुनाव जीतने, भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने और छत्तीसगढ़ प्रभारी बनने के बाद भी यह निर्णय कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है।

    असल में नितिन नबीन पीएम नरेंद्र मोदी के करीब दो दशक पुराने विश्वासपात्र हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी से मिलने के लिए वह पटना से उड़कर जाते थे। बिहार में मोदी की आंख और कान बने नितिन नबीन ने पार्टी में कई अहम फैसलों और लोकसभा अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।2009 में लुधियाना रैली इसका प्रमाण है। एनडीए द्वारा एलके आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के दौरान आयोजित विशाल जनसभा में नीतीश कुमार की हिचकिचाहट के बावजूद नितिन नबीन के प्रयास से भाजपा के वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने में सफल हुए। रैली में मंच पर नरेंद्र मोदी ने नीतीश का हाथ उठाकर सबके सामने दिखाया, जिससे नीतीश असहज हो गए।

    पटना में 2010 के बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सत्र के दौरान भी नितिन नबीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोदी के प्रति आभार जताने के लिए पटना की दीवारों पर बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए, जिसमें स्थानीय बीजेपी यूनिट के नितिन और रामेश्वर चौरसिया की सक्रियता देखने को मिली। इस अभियान ने मोदी की लोकप्रियता बढ़ाई, लेकिन नीतीश कुमार इस पर नाराज हुए। अखबारों में छपी तस्वीरों ने उन्हें परेशान कर दिया और उन्होंने डिनर का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    इस पूरी कहानी से यह साफ है कि नितिन नबीन न केवल पार्टी के अंदर बल्कि मोदी के भरोसे के मामले में भी वर्षों से मजबूत स्थिति में रहे हैं। उनकी यह यात्रा पटना से गुजरात तक मोदी के विश्वास और भाजपा के संगठनात्मक काम में गहरे जुड़े रहने का उदाहरण है।आज राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर नितिन नबीन भाजपा में युवाओं और संगठनात्मक मजबूती दोनों के लिए बड़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनकी राजनीतिक समझ, मोदी के साथ लंबे समय से चलती मित्रता और बिहार में उनके अनुभव ने उन्हें यह बड़ा मंच दिलाया है।

  • ‘भारत रत्न नीतीश कुमार’ केसी त्यागी की मांग पर जीतन राम मांझी ने जताया समर्थन

    ‘भारत रत्न नीतीश कुमार’ केसी त्यागी की मांग पर जीतन राम मांझी ने जताया समर्थन


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग चर्चा का विषय बन गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि समाजवादी आंदोलन के बचे अनमोल रत्न नीतीश कुमार इस सर्वोच्च सम्मान के योग्य हैं। त्यागी ने पत्र में लिखा कि नीतीश कुमार ने समाज सेवा, किसानों और हाशिए पर गए लोगों को संगठित करने में अनमोल योगदान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों को देखते हुए नीतीश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए, ताकि उनके योगदान का इतिहास लंबे समय तक सराहा जाए।
    हमें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने फैसले से सबको चौंकाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री को भारत रत्न से नवाजेंगे।” उन्होंने कहा कि यह सम्मान नीतीश कुमार के जीवन और राजनीति में किए गए योगदान को सही मायने में दर्शाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग कोई नई बात नहीं है। पहले भी कई नेताओं और समर्थकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि नीतीश कुमार के लंबे समय तक किए गए समाजसेवी और राजनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह सम्मान उनके व्यक्तित्व और योगदान का सही मूल्यांकन होगा।

    नीतीश कुमार की सादगी, समाज सेवा और समाजवादी आंदोलन में योगदान को देखकर समर्थक मानते हैं कि भारत रत्न उनके लिए उचित और न्यायसंगत सम्मान होगा। केसी त्यागी और जीतन राम मांझी की यह पहल दिखाती है कि बिहार में उनकी लोकप्रियता और उनके योगदान की राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के बीच भी सराहना की जाती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं और नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च सम्मान देने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इस मांग से न केवल राजनीतिक समर्थन दिखता है, बल्कि जनता के बीच नीतीश कुमार की छवि और योगदान भी मजबूत होता है।

    अंततः, केसी त्यागी की पहल और जीतन राम मांझी का समर्थन नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की दिशा में एक मजबूत संदेश है। यह मामला राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इस पर और चर्चाएं होने की संभावना है।

  • नीतीश के दोनों डिप्टी सीएम उनसे अमीर, सम्राट के पास कैश तो विजय सिन्हा के पास सबसे अधिक सोना-चांदी

    नीतीश के दोनों डिप्टी सीएम उनसे अमीर, सम्राट के पास कैश तो विजय सिन्हा के पास सबसे अधिक सोना-चांदी


    नई दिल्ली। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत सभी मंत्रियों ने अपने संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक कर दिया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास दोनों डिप्टी सीएम से कम संपत्ति है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 1 करोड़ 65 लाख रुपए की संपत्ति के मालिक हैं. उनके पास महज 20 हजार रुपए नकद हैं. दिल्ली के द्वारका में एक फ्लैट है, जिसकी कीमत 1 करोड़ 48 लाख रुपए है. साथ ही उनके पास दस गाय है. दो लाख रुपए की ज्वेलरी भी है, जिसमें 2 सोने की अंगूठी 1 चांदी की अंगूठी भी है. 10 साल पुरानी एक फोर्ड इकोस्पोर्ट कार है, जिसकी कीमत 11 लाख 32 हजार रुपए है.
    वहीं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास नीतीश के मुकाबले करीब 7 गुना अधिक कैश है. उनके पास 1 लाख 35 हजार की नकदी है, उनकी पत्नी कुमारी ममता के पास 35 हजार की नकदी है. सम्राट चौधरी के बैंक खातों में 17 लाख 45 हजार 488 रुपए जमा है. उनकी पत्नी के खाते में 6 लाख 43 हजार बेटी के खाते में 1 लाख 34 हजार, बेटे प्रणय के खाते में 1 लाख 8 हजार रुपए जमा हैं.
    बॉन्ड और इंश्योरेंस में निवेश, हथियार के शौकीन हैं सम्राट
    सम्राट चौधरी ने बॉन्ड्स में 31 लाख रुपए का निवेश किया है. निप्पोन इंडिया, फ्रैंकलिन इंडिया और HDFC के बॉन्ड में उन्होंने निवेश किया है. वहीं 19 लाख रुपए LIC में निवेश किए हैं. राज्य के गृह मंत्री सम्राट चौधरी के पास NP बोर रायफल है जिसकी कीमत 4 लाख रुपए है. वहीं पिता शकुनि चौधरी की दी हुई रिवॉल्वर भी है. इसकी कीमत 2 लाख रुपए है.डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के पास 88 हजार 560 रुपए की नकदी है, वहीं उनकी पत्नी सुशीला देवी के पास 67 हजार 528 रुपए कैश हैं. विजय सिन्हा के पास करीब 1 करोड़ की चल संपत्ति है. वहीं उनकी पत्नी के पास 1 करोड़ 73 लाख रुपए की चल संपत्ति है. इसमें बैंक खातों में जमा राशि, शेयर्स और गहने शामिल हैं.

    विजय सिन्हा के पास सबसे अधिक सोना-चांदी

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास दो लाख रुपए की ज्वेलरी है, जिसमें 2 सोने की अंगूठी, 1 चांदी की अंगूठी है. सम्राट चौधरी के पास पास 20 लाख रुपए का सोना, पत्नी के पास भी 20 लाख का सोना और 75 हजार मूल्य की चांदी है. वहीं विजय सिन्हा के पास 9 लाख 90 हजार के गहने हैं. उन्होंने बताया है कि यह उन्हें शादी के वक्त तोहफे में मिले थे. वहीं उनकी पत्नी के पास 49 लाख 50 हजार रुपए के गहने हैं.
  • शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!

    शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!


    नई दिल्ली । कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने सोमवार 22 दिसंबर को नीतीश कुमार सरकार की तरफ से बिहार में बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे कार्यों की जमकर सराहना की, जबकि कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ गठबंधन में है.नालंदा साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए बिहार आए शशि थरूर ने एक चैनल संग बातचीत में कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बुनियादी ढांचा पहले की तुलना में कहीं बेहतर है. सड़कें बेहतर हैं. लोग देर रात तक सड़कों पर दिखते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. अब तक बिजली, पानी और बाकी सब कुछ ठीक चल रहा है.
    नीतीश के बारे में पूछे जाने पर क्या बोले
    उन्होंने कहा कि मेरा मतलब है, इसमें कोई शक नहीं कि हाल के वर्षों में बहुत सी अच्छी चीजें हुई हैं. नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस सांसद ने टालमटोल करते हुए कहा कि मुझे यहां राजनीति में मत घसीटिए. मैं निश्चित रूप से इस प्रगति को देखकर बहुत खुश हूं. बिहार की जनता और उनके प्रतिनिधि इसके लिए श्रेय के पात्र हैं.

    कांग्रेस का क्या है रिएक्शन

    बिहार में थरूर के बीजेपी संग गठबंधन वाली सरकार की प्रशंसा करने वाली हालिया टिप्पणी पर कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. पिछले महीने दुबई में एक मीडिया कार्यक्रम में थरूर ने राजनीतिक परिदृश्य पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हर किसी को वैचारिक रूप से कट्टरपंथी होना पड़ता है और वे दूसरे पक्ष की अच्छाई को नहीं देखते या दूसरे पक्ष के किसी भी व्यक्ति से बात नहीं करते.

    हिजाब विवाद को लेकर क्या कहा था
    बता दें कि 4 बार के सांसद शशि थरूर, प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी की प्रशंसा करने वाले कई बयानों के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपने संबंध खराब होते देख रहे हैं. थरूर हमेशा से यह कहते रहे हैं कि उनकी टिप्पणियां केवल भारत की बेहतर सेवा करने की इच्छा को दर्शाती हैं. इससे पहले शशि थरूर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा था कि यह घटना अनुचित थी.