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  • बिहार की सियासत गरम अगले सीएम पर बीजेपी का बड़ा बयान और भविष्य की रणनीति

    बिहार की सियासत गरम अगले सीएम पर बीजेपी का बड़ा बयान और भविष्य की रणनीति


    नई दिल्ली : बिहार की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है क्योंकि राज्य के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बना हुआ है मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावनाओं के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि उनके बाद राज्य की कमान कौन संभालेगा इसी बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान भी सामने आ रहे हैं जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है

    इसी क्रम में बिहार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है उन्होंने साफ किया कि वर्तमान में नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री हैं और आने वाले समय में उनके राज्यसभा जाने की बात सामने आ रही है इसके बाद आगे की राजनीतिक प्रक्रिया एनडीए और भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय की जाएगी उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस निर्णय में मुख्यमंत्री की भूमिका भी अहम रहेगी

    संजय सरावगी के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि फिलहाल बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई अंतिम नाम तय नहीं किया है बल्कि यह निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा एनडीए के घटक दल और पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मिलकर यह तय करेगा कि राज्य की कमान किसे सौंपी जाए यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक और सहमति आधारित होगी जिससे गठबंधन की एकजुटता बनी रहे

    वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों की ओर से भी बयानबाजी जारी है नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने की प्रक्रिया किसी दबाव के तहत हो रही है हालांकि एनडीए की ओर से इस दावे को लगातार खारिज किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि सभी निर्णय राजनीतिक सहमति और आपसी समझ के आधार पर लिए जाएंगे

    संजय सरावगी ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश और राजनीति में गंभीरता की आवश्यकता होती है उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं तब नेताओं को जिम्मेदारी के साथ बयान देने चाहिए उनका यह भी कहना था कि राजनीतिक बयानबाजी देशहित में नहीं होती

    इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि संविधान में अनुसूचित जाति के लिए कई प्रकार की सुविधाएं और आरक्षण की व्यवस्था की गई है उन्होंने यह भी कहा कि धर्मांतरण के बाद इन सुविधाओं के संदर्भ में स्थिति बदल सकती है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस संदर्भ में उचित है

    बिहार की राजनीति में यह स्पष्ट है कि अगले मुख्यमंत्री को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और सभी की निगाहें एनडीए के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं आने वाले समय में इस पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है लेकिन फिलहाल सस्पेंस बरकरार है और राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं

  • बिहार दिवस पर नीतीश कुमार का संदेश विकास सांस्कृतिक गौरव और पीएम मोदी के योगदान की सराहना

    बिहार दिवस पर नीतीश कुमार का संदेश विकास सांस्कृतिक गौरव और पीएम मोदी के योगदान की सराहना


    नई दिल्ली:बिहार दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्य के विकास और सांस्कृतिक गौरव पर विस्तृत संदेश साझा किया उन्होंने अपने संदेश में बिहार की समृद्ध विरासत, परंपराओं और विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए इसे राज्य और देश दोनों के लिए गर्व का विषय बताया

    मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि बिहार के सर्वांगीण विकास, सामाजिक न्याय, सुशासन और मजबूत आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए उनकी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार का सहयोग राज्य के विकास को नई गति दे रहा है और इसी सहयोग से बिहार तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है

    नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और समर्थन से बिहार के प्रतिभाशाली लोग राज्य और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

    अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने बिहार दिवस को राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बताया उन्होंने कहा कि यह दिन बिहार के सामर्थ्य, परंपरा और गौरवशाली अतीत को याद करने का अवसर है बिहार की भूमि ने प्राचीन काल से ही ज्ञान, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को दिशा दी है

    उन्होंने भगवान बुद्ध और आचार्य चाणक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार की धरती ने ऐसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया है जिन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया है चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य के प्रयासों ने एक सशक्त और संगठित भारत की नींव रखी जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है

    नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों की मेहनत, ईमानदारी और प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि बिहारवासियों ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, उद्योग, कला या संस्कृति हर क्षेत्र में बिहार के लोगों का योगदान उल्लेखनीय रहा है

    उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के लोग जहां भी जाते हैं अपनी संस्कृति और मूल्यों को साथ लेकर चलते हैं जिससे राज्य की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होती है उन्होंने विशेष रूप से छठ महापर्व का उल्लेख किया जो अब दुनिया भर में बिहार की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया जिसमें महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह, लोकनायक जयप्रकाश नारायण का आंदोलन और जननायक कर्पूरी ठाकुर का योगदान शामिल है उन्होंने कहा कि इन महान नेताओं ने बिहार और देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

    उन्होंने राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और समावेशी विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कहा कि बिहार अब तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं

    अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का बिहार अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है यह यात्रा न केवल बिहार की बल्कि पूरे भारत की प्रगति और परिवर्तन की कहानी को भी दर्शाती है

  • नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री: पटना में JDU जॉइन, कार्यकर्ताओं ने लगाए भविष्य के CM के नारे

    नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री: पटना में JDU जॉइन, कार्यकर्ताओं ने लगाए भविष्य के CM के नारे


    पटना। बिहार की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar ने पटना स्थित पार्टी कार्यालय में Janata Dal (United) (जेडीयू) की सदस्यता ग्रहण कर ली। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Kumar Jha ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई, जबकि वरिष्ठ नेता Rajiv Ranjan Singh ने उन्हें पार्टी का गमछा पहनाकर स्वागत किया। हालांकि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Nitish Kumar मौजूद नहीं रहे।

    पार्टी की सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार ने कहा कि वे पार्टी के लिए पूरी मेहनत से काम करेंगे और उनके पिता ने पिछले 20 वर्षों में बिहार के विकास के लिए जो काम किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने बिहार और देश की जनता से अपील करते हुए कहा कि लोग उनके पिता पर विश्वास बनाए रखें। सदस्यता लेने के बाद निशांत ने मंच पर मौजूद नेताओं के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया।

    जेडीयू कार्यालय पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों के साथ समर्थकों ने फूलों की वर्षा की और “नीतीश कुमार जिंदाबाद” तथा “बिहार का सीएम कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो” जैसे नारे लगाए। कई समर्थक हाथी, घोड़ा और ऊंट लेकर स्वागत करने पहुंचे थे। मोकामा से बाहुबली नेता Anant Kumar Singh के समर्थक भी बड़ी संख्या में पटना पहुंचे।

    इस मौके पर जेडीयू विधायक Nachiketa Mandal ने कहा कि निशांत कुमार पार्टी के लिए बेहतर काम करेंगे और Nitish Kumar के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिनमें मंत्री Vijay Kumar Chaudhary, Shravan Kumar और Ramnath Thakur शामिल थे।

    निशांत कुमार की जेडीयू में एंट्री को बिहार की राजनीति में एक अहम कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे आने वाले समय में राज्य की सियासत और पार्टी की रणनीति पर असर पड़ सकता है।

  • बिहार की राजनीति में नया मोड़ नीतीश कुमार सहित एनडीए के पांच उम्मीदवारों ने भरा राज्यसभा नामांकन

    बिहार की राजनीति में नया मोड़ नीतीश कुमार सहित एनडीए के पांच उम्मीदवारों ने भरा राज्यसभा नामांकन


    नई दिल्ली :बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। खास बात यह रही कि नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे संभावित राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
    नामांकन प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के पांचों दलों ने एक साथ अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया। इनमें नीतीश कुमार के अलावा नितिन नबीन, रामनाथ ठाकुर, शिवेश कुमार राम और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। सभी उम्मीदवार बिहार विधान सभा परिसर पहुंचे और राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया।

    नामांकन के दौरान अमित शाह की मौजूदगी ने इस प्रक्रिया को और भी राजनीतिक रूप से अहम बना दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार की आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है।

    इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पटना में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार मुलाकात की। उन्होंने अपने संदेश में जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर भरोसा बनाए रखा है और उसी विश्वास के बल पर उन्होंने राज्य की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ की है।

    अपने पोस्ट में नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि उनके संसदीय जीवन की शुरुआत से ही यह इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी भावना के तहत उन्होंने इस बार राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा जताई है और चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया है।

    गौरतलब है कि Election Commission of India ने 18 फरवरी को देश के 10 राज्यों में खाली हो रही 37 सीटों के लिए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इन सीटों पर चुनाव इसलिए कराए जा रहे हैं क्योंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होने वाला है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कराया जाएगा। इसके बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    नामांकन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे जहां उन्होंने नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary सहित कई अन्य नेता भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इस दौरान राज्यसभा चुनाव के साथ साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगे की रणनीति को लेकर भी चर्चा की गई।

  • नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा

    नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा


    नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके साथ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश कुमार भी मौजूद रहे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और नीतीश कुमार के लंबे और भ्रष्टाचार-मुक्त राजनीतिक सफर की सराहना की। शाह ने कहा कि नीतीश का कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में लिखा जाएगा और उन्होंने बिहार को जंगलराज से मुक्त करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बिहार की सड़कों और ग्रामीण विकास में भी योगदान दिया और अपनी राजनीतिक यात्रा में किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप कभी नहीं लगा।

    नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यसभा में जाने के बावजूद वे बिहार की नई सरकार को हर तरह से सहयोग देंगे। उन्होंने अपने संसदीय जीवन के महत्व और जनता के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया। नीतीश के इस ऐलान के बाद तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में महाराष्ट्र मॉडल लागू किया गया है और बीजेपी ने नीतीश को हाईजैक कर दिया। उनका कहना था कि सहयोगी पार्टी को ताकत से दबाकर नीतीश को राज्यसभा भेजा गया।

    नीतीश के राज्यसभा नामांकन की खबर मिलते ही सुबह से ही JDU कार्यकर्ता उनके मुख्यमंत्री आवास पर इकट्ठा होने लगे। कार्यकर्ताओं ने अपने नेता के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वे नीतीश कुमार को कहीं नहीं जाने देंगे। इस दौरान CM हाउस के बाहर भावुक दृश्य देखने को मिले और कई कार्यकर्ता रोते हुए नजर आए। कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कोटे के मंत्रियों सुरेंद्र मेहता, JDU MLC संजय गांधी और JDU विधायक प्रेम मुखिया को भी CM हाउस से बाहर निकाल दिया।

    JDU कार्यालय में भी नाराज कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और हंगामा किया। कई जिलों जैसे बेगूसराय और नालंदा में नीतीश के राज्यसभा जाने का विरोध हुआ। कार्यकर्ताओं ने ललन सिंह, विजय चौधरी, संजय झा मुर्दाबाद के नारे लगाए, जिसके कारण JDU ऑफिस का गेट बंद कर दिया गया। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि नीतीश कुमार के योगदान की चर्चा दशकों तक होती रहेगी और कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला सहज रूप से अपनाना मुश्किल है, लेकिन वे इसे स्वीकार करेंगे।

    अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि नीतीश कुमार 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री रहे और अब लंबे अरसे के बाद राज्यसभा सांसद के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं। शाह ने उनके प्रशासनिक कौशल, सादगी और बिहार में विकास कार्यों के लिए किए गए योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के हर गांव और घर में बिजली पहुंचाई और पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाया।

    नीतीश कुमार ने भी अपने पोस्ट में कहा कि संसदीय जीवन के लिए उनका सपना है कि वे दोनों सदनों का अनुभव लें और बिहार के विकास के लिए काम करें। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की कि वे बिहार की नई सरकार को सहयोग दें और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा के लिए नीतीश का नामांकन और JDU कार्यकर्ताओं का गुस्सा बिहार में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह घटना न केवल राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि आगामी दिनों में बिहार की सियासत में हलचल और बढ़ सकती है।

    नीतीश कुमार का यह कदम उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्यसभा में जाने के साथ ही वे राष्ट्रीय स्तर पर फिर से सक्रिय भूमिका निभाएंगे, वहीं कार्यकर्ताओं का विरोध और नाराजगी बीजेपी और JDU के बीच संबंधों की जटिलता को भी दर्शाता है।

  • बिहार विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार और भाई वीरेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक, चौकीदारों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर हंगामा

    बिहार विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार और भाई वीरेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक, चौकीदारों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर हंगामा


    नई दिल्ली । पटना बिहार विधानसभा में आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र आमने सामने आ गए। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। दरअसल सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने कल चौकीदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी की। आरजेडी विधायकों ने लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी नहीं चलेगी का नारा लगाया। आरजेडी विधायकों को जवाब देने के लिए मंत्री विजय चौधरी उठे। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चलेगी तो चौकीदारों की सुनेगा कौन।

    नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए विपक्षी विधायक

    इतने में सीएम नीतीश भी खड़े हो गए। उन्होंने भाई वीरेन्द्र को कहा कि आप बैठिए। आपकी संख्या कितनी कम है। आप लोगों ने कभी कोई काम नहीं किया है। नीतीश जब बोल रहे थे तो आरजेडी विधायक सर्वजीत भी खड़े हो गए। फिर राजद विधायक वेल की तरफ आ गए और नारे लगाने लगे। मार्शल ने विधायकों के हाथ से तख्तियां ले ली।

    सरकार ने दिया विपक्ष के आरोपों का जवाब

    आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने चौकीदारों पर लाठीचार्ज को क्रूर बताया। आरजेडी विधायकों ने सदन में हंगामा किया। संसदीय मामलों के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन चौकीदारों और दफादारों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने कहा कि उसने चौकीदार के विरोध को दबाने की कोशिश नहीं की है और उनकी मांगों की जांच करेगी।

    मांगों को लेकर किया था प्रदर्शन

    बता दें कि बिहार पुलिस के चौकीदारों ने सोमवार को अपने मानदेय में बढ़ोतरी और सर्विस में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और बैरिकेड तोड़ दिए जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। पुलिस की कार्रवाई में कई चौकीदार घायल हो गए। बिहार पुलिस के चौकीदारों ने पटना के बीच में जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और डाक बंगला क्रॉसिंग की ओर बढ़ने की कोशिश की।

  • बिहार: नीतीश कुमार पर विपक्ष की अभद्र टिप्पणी से भड़के विजय सिन्हा, बोले- लोकतंत्र की गरिमा से खिलवाड़

    बिहार: नीतीश कुमार पर विपक्ष की अभद्र टिप्पणी से भड़के विजय सिन्हा, बोले- लोकतंत्र की गरिमा से खिलवाड़


    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर माहौल गरमा गया है. विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर की गई अभद्र टिप्पणी पर राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति इस तरह की भाषा का प्रयोग न सिर्फ गलत, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी है. सदन में जाने से पहले विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन मर्यादा और भाषा की सीमा लांघना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है. उन्होंने विपक्ष की इस मानसिकता को पूरी तरह अनुचित बताया और संयम व जिम्मेदारी की अपील की.

    पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लेकर सदन में नीतीश कुमार के बयान पर उन्होंने कहा कि जिस भाव से मुख्यमंत्री ने कहा उन दोनों का देवर-भौजाई का रिश्ता है. उन्होंने कहा कि राजनीति नहीं अपनत्व का प्रकट मुख्यमंत्री ने किया जिसे गलत सेंस में लेना कतई उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा सबको रखने की जिम्मेवारी है और मुख्यमंत्री का वैसा कोई भाव नहीं था.

    विपक्ष को संविधान पर नहीं है विश्वास- विजय कुमार सिन्हा

    वहीं विपक्ष के 119 सांसदों के द्वारा लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विपक्ष को संविधान में विश्वास नहीं है. ये लोग संवैधानिक पद का सम्मान नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि ओम बिरला ने विधायकी कार्य को बेहतर करने एवं सुंदर वातावरण बनाने का काम किया है. विपक्ष की अराजकता को रोकने के लिए जब वो सतर्क और सावधान करते हैं. अविश्वास प्रस्ताव से संवैधानिक संस्था को डिमोरलाईज करने का प्रयास विपक्ष करती है.

    संवैधानिक संस्था का अपमान करना ही है कांग्रेस का चरित्र- सिन्हा

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस के लोगों का चरित्र ही वैसा है. संवैधानिक संस्था का अपमान करना, भय का वातावरण बनाना और वैसे लोग जो बेहतर काम करते हैं उनको डिमोरलाईज करने का काम ये लोग करते हैं.उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्था, सीबीआई, चुनाव आयोग पर ये सवाल उठाते रहे हैं. लेकिन अब ये देश के सबसे बड़े मंदिर के सबसे बड़े पुजारी पर सवाल खड़े कर सदन की गरिमा को गिराने का काम कर रही है.

  • नीतीश के सामने ललन ने निशांत से कहा ‘अब मान जाइए’, पॉलिटिकल डेब्यू की अटकलों से फिर गरमाई बिहार की सियासत

    नीतीश के सामने ललन ने निशांत से कहा ‘अब मान जाइए’, पॉलिटिकल डेब्यू की अटकलों से फिर गरमाई बिहार की सियासत


    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर चल रही चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। सरस्वती पूजा के मौके पर सामने आए एक वीडियो ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। वीडियो में केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता ललन सिंह नीतीश कुमार की मौजूदगी में निशांत कुमार से कहते नजर आ रहे हैं
    “अब बोल दीजिए कि मान जाएंगे, आज बोल ही दीजिए।” इस एक लाइन ने निशांत के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है।

    दरअसल, शुक्रवार को पटना में एक पूजा स्थल पर नीतीश कुमार दर्शन के लिए पहुंचे थे, जहां निशांत कुमार पहले से मौजूद थे। उसी दौरान ललन सिंह, विजय चौधरी समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी वहां मौजूद थे। बातचीत के दौरान ललन सिंह ने निशांत के कंधे पर हाथ रखकर यह बात कही। हालांकि, निशांत कुमार ने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए।

    नीतीश कुमार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी और पूजा में लीन रहे। मौके पर मौजूद लोग इस बातचीत पर मुस्कुरा दिए, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

    इस वीडियो के सामने आने के बाद जदयू और भाजपा दोनों दलों में बयानबाज़ी शुरू हो गई है। जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि वीडियो का संदर्भ स्पष्ट नहीं है और यह जरूरी नहीं कि बात राजनीति में आने को लेकर ही हो। वहीं प्रवक्ता मनीष यादव ने कहा कि निशांत कुमार पढ़े-लिखे और सक्षम युवा हैं, लेकिन राजनीति में आने का फैसला पूरी तरह उनका और पार्टी नेतृत्व का होगा।

    भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है।

    भाजपा नेता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि निशांत कुमार में क्षमता है और अगर वे राजनीति में आते हैं तो बिहार को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम निर्णय निशांत कुमार का ही होगा और सभी को उसका सम्मान करना चाहिए।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब निशांत कुमार के राजनीतिक डेब्यू की चर्चा हुई हो।

    इससे पहले भी जदयू नेताओं और समर्थकों की ओर से पोस्टर, उपवास और नारेबाज़ी के जरिए उन्हें राजनीति में लाने की मांग उठती रही है। उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता भी निशांत की वकालत कर चुके हैं।

    फिलहाल, नीतीश कुमार और निशांत कुमार की खामोशी बनी हुई है, लेकिन ललन सिंह का यह बयान बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर गया हैक्या निशांत कुमार जल्द सियासी मैदान में उतरेंगे या यह चर्चा यूं ही चलती रहेगी

  • नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष

    नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष


    नई दिल्ली। नितिन नबीन का नाम इन दिनों भाजपा और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। 45 वर्षीय नितिन नबीन निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। बिहार के पथ निर्माण मंत्री रह चुके नितिन की राजनीतिक यात्रा लंबी और भरोसेमंद रही है। पांच विधानसभा चुनाव जीतने, भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने और छत्तीसगढ़ प्रभारी बनने के बाद भी यह निर्णय कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है।

    असल में नितिन नबीन पीएम नरेंद्र मोदी के करीब दो दशक पुराने विश्वासपात्र हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी से मिलने के लिए वह पटना से उड़कर जाते थे। बिहार में मोदी की आंख और कान बने नितिन नबीन ने पार्टी में कई अहम फैसलों और लोकसभा अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।2009 में लुधियाना रैली इसका प्रमाण है। एनडीए द्वारा एलके आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के दौरान आयोजित विशाल जनसभा में नीतीश कुमार की हिचकिचाहट के बावजूद नितिन नबीन के प्रयास से भाजपा के वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने में सफल हुए। रैली में मंच पर नरेंद्र मोदी ने नीतीश का हाथ उठाकर सबके सामने दिखाया, जिससे नीतीश असहज हो गए।

    पटना में 2010 के बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सत्र के दौरान भी नितिन नबीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोदी के प्रति आभार जताने के लिए पटना की दीवारों पर बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए, जिसमें स्थानीय बीजेपी यूनिट के नितिन और रामेश्वर चौरसिया की सक्रियता देखने को मिली। इस अभियान ने मोदी की लोकप्रियता बढ़ाई, लेकिन नीतीश कुमार इस पर नाराज हुए। अखबारों में छपी तस्वीरों ने उन्हें परेशान कर दिया और उन्होंने डिनर का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    इस पूरी कहानी से यह साफ है कि नितिन नबीन न केवल पार्टी के अंदर बल्कि मोदी के भरोसे के मामले में भी वर्षों से मजबूत स्थिति में रहे हैं। उनकी यह यात्रा पटना से गुजरात तक मोदी के विश्वास और भाजपा के संगठनात्मक काम में गहरे जुड़े रहने का उदाहरण है।आज राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर नितिन नबीन भाजपा में युवाओं और संगठनात्मक मजबूती दोनों के लिए बड़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनकी राजनीतिक समझ, मोदी के साथ लंबे समय से चलती मित्रता और बिहार में उनके अनुभव ने उन्हें यह बड़ा मंच दिलाया है।

  • ‘भारत रत्न नीतीश कुमार’ केसी त्यागी की मांग पर जीतन राम मांझी ने जताया समर्थन

    ‘भारत रत्न नीतीश कुमार’ केसी त्यागी की मांग पर जीतन राम मांझी ने जताया समर्थन


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग चर्चा का विषय बन गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि समाजवादी आंदोलन के बचे अनमोल रत्न नीतीश कुमार इस सर्वोच्च सम्मान के योग्य हैं। त्यागी ने पत्र में लिखा कि नीतीश कुमार ने समाज सेवा, किसानों और हाशिए पर गए लोगों को संगठित करने में अनमोल योगदान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों को देखते हुए नीतीश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए, ताकि उनके योगदान का इतिहास लंबे समय तक सराहा जाए।
    हमें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने फैसले से सबको चौंकाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री को भारत रत्न से नवाजेंगे।” उन्होंने कहा कि यह सम्मान नीतीश कुमार के जीवन और राजनीति में किए गए योगदान को सही मायने में दर्शाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग कोई नई बात नहीं है। पहले भी कई नेताओं और समर्थकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि नीतीश कुमार के लंबे समय तक किए गए समाजसेवी और राजनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह सम्मान उनके व्यक्तित्व और योगदान का सही मूल्यांकन होगा।

    नीतीश कुमार की सादगी, समाज सेवा और समाजवादी आंदोलन में योगदान को देखकर समर्थक मानते हैं कि भारत रत्न उनके लिए उचित और न्यायसंगत सम्मान होगा। केसी त्यागी और जीतन राम मांझी की यह पहल दिखाती है कि बिहार में उनकी लोकप्रियता और उनके योगदान की राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के बीच भी सराहना की जाती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं और नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च सम्मान देने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इस मांग से न केवल राजनीतिक समर्थन दिखता है, बल्कि जनता के बीच नीतीश कुमार की छवि और योगदान भी मजबूत होता है।

    अंततः, केसी त्यागी की पहल और जीतन राम मांझी का समर्थन नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की दिशा में एक मजबूत संदेश है। यह मामला राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इस पर और चर्चाएं होने की संभावना है।