OBC आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना आदेश, दो केस खुद सुनेगा, अप्रैल में होगी अहम सुनवाई


भोपाल। मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए आरक्षण से जुड़े दो मामलों को फिर से अपने पास ले लिया है। अब 13 प्रतिशत आरक्षण को होल्ड रखने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत स्वयं सुनवाई करेगी।

बताया जा रहा है कि 87-13 फार्मूले को चुनौती देने वाले मामले को भी रिकॉल किया गया है, जिसकी सुनवाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह में तय की गई है।

कई याचिकाएं हाईकोर्ट को ट्रांसफर

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 54 अन्य याचिकाओं को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया है। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कुल 103 याचिकाओं पर हाईकोर्ट में 2 से 15 अप्रैल के बीच नियमित सुनवाई होगी।

52 मामलों की वापसी, दो पर SC करेगा सुनवाई

ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 के अपने आदेश में बदलाव करते हुए 52 मामलों को वापस हाईकोर्ट भेज दिया है। हालांकि, इनमें से दो विशेष मामलों की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में ही होगी।

पहले ट्रांसफर हुए थे सभी केस

जानकारी के अनुसार, ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी लंबित मामलों को पहले मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराया गया था। ये मामले अलग-अलग बेंचों में लंबित थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को आदेश जारी कर सभी मामलों को वापस हाईकोर्ट भेजते हुए निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर विशेष बेंच बनाकर इनका निपटारा किया जाए।

रिव्यू याचिका पर बदला फैसला

ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने दीपक कुमार पटेल के नाम से रिव्यू याचिका दाखिल की थी। इस पर 20 मार्च को खुली अदालत में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में संशोधन कर दिया। संशोधित आदेश के तहत 52 मामलों को दोबारा हाईकोर्ट भेजा गया, जबकि दो विशेष अनुमति याचिकाएं दीपक कुमार पटेल बनाम मध्यप्रदेश शासन और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्यप्रदेश शासन को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास सुनवाई के लिए रख लिया है।

अप्रैल में फिर होगी अहम सुनवाई

अब इन सभी मामलों में अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में शुरू होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में रिकॉल किए गए मामलों पर अप्रैल के दूसरे सप्ताह में सुनवाई प्रस्तावित है।