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  • अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव

    अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने रविवार रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें 34 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में सभी आम नागरिक होने का दावा किया गया है।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पाकतिका प्रांत के गयान जिले और पाकतिया प्रांत के समकानी जिले में हवाई हमले किए। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा कुनार प्रांत के कुछ क्षेत्रों पर भी हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    रिहायशी इलाकों को बनाया गया निशाना
    पाकतिया पुलिस कमांड के प्रवक्ता मुनीब जादरान ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि समकानी जिले में 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उनके अनुसार, हमला समकानी जिले के मांडोखेल इलाके में बिस्मिल्लाह जान नामक एक नागरिक के घर पर किया गया। आरोप है कि पहले हमले के बाद जब स्थानीय लोग मलबे में फंसे लोगों को बचाने पहुंचे, तभी उसी स्थान पर दूसरा हवाई हमला किया गया, जिससे राहत कार्य में जुटे लोग भी इसकी चपेट में आ गए।

    स्थानीय लोगों का दावा- इलाके में नहीं था कोई सैन्य ठिकाना
    समकानी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों और घायलों का कहना है कि हमले पूरी तरह रिहायशी इलाकों पर हुए। उनका दावा है कि आसपास कोई सैन्य ठिकाना या सैनिक मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद घरों को निशाना बनाया गया, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए।

    पाकिस्तान की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
    इस घटना पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। वहीं अफगानिस्तान की ओर से इन हमलों की कड़ी निंदा की गई है और इसे आम नागरिकों पर सीधा हमला बताया गया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में कराची में हुए हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था। इसी पृष्ठभूमि में इन ताजा हवाई हमलों की खबर सामने आई है, जिससे सीमा पर हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

  • आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप

    आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े तत्वों की रहस्यमयी मौतों को लेकर हाल के दिनों में सुरक्षा और खुफिया हलकों में हलचल तेज हो गई है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि क्या देश के भीतर किसी प्रकार का संगठित टारगेट ऑपरेशन चल रहा है या यह आपसी संघर्ष का परिणाम है।

    सूत्रों और सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हाल के दिनों में तीन आतंकियों के शव मिलने से आतंकी नेटवर्क में बेचैनी बढ़ी है। इनमें गाजी मुमताज, मोहम्मद खुजैमा कासिम और खालिद बशीर जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जो कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इन मौतों के कारण संगठन के भीतर असुरक्षा का माहौल गहराने की बात कही जा रही है।

    पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी संगठनों को संरक्षण देने के आरोपों का सामना करता रहा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को लेकर भी विभिन्न समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि वर्तमान घटनाक्रम में जिस तरह से एक के बाद एक संदिग्ध मौतों की खबरें सामने आ रही हैं, उसने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की घटनाएं या तो आंतरिक संघर्ष, गुटीय टकराव या फिर किसी गुप्त ऑपरेशन का संकेत हो सकती हैं। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर कुछ घटनाओं में हमलों और गोलीबारी का जिक्र भी सामने आया है, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।

    इसी क्रम में खैबर पख्तूनख्वा और अन्य संवेदनशील इलाकों में पहले भी आतंकी कमांडरों पर हमलों की खबरें आती रही हैं, जिनमें अज्ञात हमलावरों की भूमिका की बात कही जाती है। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी ढांचे की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी नेटवर्क अब पहले जितना सुरक्षित नहीं रह गया है और आंतरिक व बाहरी दबाव दोनों के बीच उसकी स्थिति कमजोर हो रही है। लगातार हो रही घटनाओं से संगठनों के भीतर नेतृत्व और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ती दिखाई दे रही है।

    हालांकि इन सभी घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, यह स्पष्ट नहीं है और जांच एजेंसियों की ओर से भी कोई ठोस निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही संदिग्ध मौतों ने आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनकी आंतरिक संरचना को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • Pakistan: कराची में भीषण आतंकी हमला, 6 आतंकवादी और 4 रेंजर्स ढेर…एक पकड़ाया

    Pakistan: कराची में भीषण आतंकी हमला, 6 आतंकवादी और 4 रेंजर्स ढेर…एक पकड़ाया


    कराची।
    पाकिस्तान (Pakistan) के सबसे बड़े शहर कराची (Karachi) में शनिवार रात एक बड़ा आतंकी हमला (Terrorist Attack) हुआ. आतंकियों ने सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर धावा बोल दिया. सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई में छह आतंकवादी (Six Terrorists) मार गिराए गए, जबकि एक हमलावर को जिंदा पकड़ लिया गया. करीब 90 मिनट तक चली इस मुठभेड़ में चार रेंजर्स की भी मौत हो गए. अक्टूबर 2024 के बाद कराची में यह पहला बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विश्वसनीय सुरक्षा सूत्रों के अनुसार प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार के सात आतंकियों ने शनिवार रात करीब 8:30 बजे कराची के घनी आबादी वाले गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय पर हमला किया. आतंकियों ने पहले विस्फोटकों से भरे वाहन को मुख्य गेट से टकराकर परिसर में प्रवेश किया और इसके बाद हैंड ग्रेनेड फेंकते हुए अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. हमले के तुरंत बाद रेंजर्स के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया।

    बाद में स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (एसएसयू) के कमांडो और एंटी टेररिस्ट फोर्स (एटीएफ) की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं. संयुक्त अभियान के दौरान करीब डेढ़ घंटे तक भीषण गोलीबारी हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने छह आतंकियों को मार गिराया और एक घायल हमलावर को जिंदा गिरफ्तार कर लिया. हालांकि इस मुठभेड़ में चार रेंजर्स जवानों ने भी अपनी जान गंवा दी. घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया. रेंजर्स मुख्यालय के आसपास की सभी सड़कों को बंद कर दिया गया और स्थानीय लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई।


    हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली

    सुरक्षा अभियान के दौरान आसपास के कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही. बचाव और राहत एजेंसियों को भी तत्काल मौके पर भेजा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके. हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली है. यह संगठन टीटीपी का एक कट्टरपंथी धड़ा है, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय रहा है. यह संगठन पहले भी सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों पर कई बड़े हमले कर चुका है. हालांकि हाल के वर्षों में इसकी गतिविधियां सीमित मानी जा रही थीं, लेकिन कराची में हुआ यह हमला संगठन की नई रणनीति की ओर इशारा करता है. सिंध के पुलिस महानिरीक्षक जावेद आलम ओधो ने बताया कि शुरुआती जांच से पुष्टि हुई है कि आतंकी एक वाहन में सवार होकर आए थे और मुख्य गेट को तोड़कर परिसर में घुसे।

    उन्होंने कहा कि हमला शुरू होते ही रेंजर्स के जवानों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की और आतंकियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया. उन्होंने यह भी बताया कि हमले के दौरान जोरदार विस्फोट की आवाज सुनी गई थी, जिसकी जांच की जा रही है. सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने घटना का संज्ञान लेते हुए पुलिस महानिदेशक और कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. वहीं रेस्क्यू 1122 सिंध ने बताया कि गुलिस्तान-ए-जौहर ब्लॉक-5 के पास विस्फोट की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दलों को मौके पर रवाना कर दिया गया था।


    अक्टूबर 2024 में बड़ा आतंकी हमला हुआ था

    कराची में इससे पहले अक्टूबर 2024 में बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जब कराची एयरपोर्ट के पास हुए आत्मघाती विस्फोट में दो चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी. उस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली थी. वहीं टीटीपी का कराची में पिछला बड़ा हमला फरवरी 2023 में हुआ था, जब आतंकियों ने कराची पुलिस कार्यालय पर हमला किया था. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर टीटीपी आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने का आरोप लगाता रहा है।

    पाकिस्तान का दावा है कि अफगान सीमा पार मौजूद टीटीपी के ठिकानों से लगातार हमलों की साजिश रची जाती है. इसके जवाब में पाकिस्तान की सेना हाल के महीनों में अफगानिस्तान के भीतर कथित टीटीपी ठिकानों पर कई कार्रवाई भी कर चुकी है. ऐसे में कराची में हुआ यह हमला पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

  • इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील

    इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील


    नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बीते तनाव और संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़े समझौतों की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने और आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। उनके इस बयान को क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत मुस्लिम गठबंधन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक घटनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

    संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास तभी संभव है जब क्षेत्रीय देश आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना से आगे बढ़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम देशों को अपने साझा हितों और जबड़े के प्रति एकजुट होकर काम करना चाहिए।

    पेजेशकियन ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि मुस्लिम अपने समुदायों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होंगे।” उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि ईरान भविष्य में उस सैन्य-सहयोगी मंच के करीब आ सकता है जिसे मीडिया में अक्सर ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जाता है।

    हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि ‘इस्लामिक नाटो’ कोई औपचारिक नाटो जैसी संस्था नहीं है, बल्कि इस्लामिक मिलिट्री काउंटर टेररिज्म कोएलिशन नामक एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधन है, जिसे हासिल सऊदी अरब करता है और जिसमें पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देश शामिल हैं। ईरान वर्तमान में इस गठबंधन का सदस्य नहीं है।

    विश्लेषणों का मानना ​​है कि यदि ईरान और पाकिस्तान के बीच राजनयिक सहयोग बढ़ता है और क्षेत्रीय स्वायत्त अनुकूल रहते हैं, तो मुस्लिम देशों के बीच सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग का नया ढांचा विकसित हो सकता है। हालांकि ईरान के किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ वार्ता के बाद पाकिस्तान पहुंचे पेजेशकियां के इस दौरे को क्षेत्रीय आतंकवाद और मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

  • पाकिस्तान के बन्नू में दो लगातार धमाकों से दहशत 7 की मौत कई घायल

    पाकिस्तान के बन्नू में दो लगातार धमाकों से दहशत 7 की मौत कई घायल


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में एक के बाद एक हुए दो शक्तिशाली धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इन धमाकों में सात लोगों की मौत हो गई जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस घटना को गंभीर आतंकी हमला बताया है और इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

    घटना बन्नू के वजीर सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी और अर्ध जनजातीय क्षेत्र मरका बेरा में हुई। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार पहला धमाका उस समय हुआ जब एक निजी वाहन यात्रियों को लेकर डोमेल की दिशा में जा रहा था। इसी दौरान रिमोट कंट्रोल के जरिए लगाए गए विस्फोटक उपकरण को सक्रिय किया गया। धमाका इतना तेज था कि वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया और उसमें सवार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    पहले धमाके के बाद जैसे ही राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और घायलों को अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई तभी लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरा विस्फोट हुआ। यह धमाका भी रिमोट कंट्रोल तकनीक से किया गया बताया जा रहा है। इस दूसरे हमले में एक और वाहन निशाना बना और उसमें सवार दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    लगातार दो धमाकों से इलाके में अफरा तफरी फैल गई। स्थानीय लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। पुलिस और सुरक्षा बल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया। रेस्क्यू टीमों ने घायलों और शवों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में पहुंचाया।

    सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई है कि इलाके में अभी और भी विस्फोटक उपकरण छिपाए गए हो सकते हैं। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बम निरोधक दस्ते को भी मौके पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।

    पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी इसे नागरिकों पर किया गया कायराना हमला बताया है।

    बन्नू जिले में पिछले कुछ महीनों से आतंकी घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इससे पहले भी कई बार सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच झड़पें हो चुकी हैं। हाल ही में एक पुल को विस्फोट से उड़ाने की कोशिश और टारगेट किलिंग की घटनाओं ने सुरक्षा स्थिति को और गंभीर बना दिया था।

    इस ताजा हमले ने एक बार फिर खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है और प्रशासन के सामने शांति बहाली की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

  • जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के प्रचार को किया खारिज

    जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के प्रचार को किया खारिज


    नई द‍िल्‍ली । जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बासठवें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामी सहयोग संगठन की ओर से जम्मू कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस विषय पर किसी भी प्रकार का भ्रम या गलत व्याख्या स्वीकार नहीं की जा सकती। भारतीय प्रतिनिधि ने मंच पर कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और गलत इरादों पर आधारित हैं तथा इनका उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना है।

    भारत ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने घरेलू संकट और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रचार का सहारा लेता रहा है। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि इस्लामी सहयोग संगठन द्वारा की गई टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और यह एकतरफा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। भारत ने यह दोहराया कि जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा था और है तथा हमेशा रहेगा और इस वास्तविकता को कोई भी बयान बदल नहीं सकता।

    भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि असली मुद्दा वह क्षेत्र है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है और जिसे पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के रूप में जाना जाता है। भारत ने आरोप लगाया कि वहां दशकों से लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और सैन्य दबाव के कारण जनता की मूलभूत स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया है। भारत ने कहा कि यह स्थिति किसी भी प्रकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और लगातार असंतोष और अशांति का कारण बनी हुई है।

    भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में इस्तेमाल करता है और फिर खुद को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिश करता है। भारतीय प्रतिनिधि ने इस विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की दोहरी नीति लंबे समय से देखी जा रही है। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे दावे वास्तविकता को नहीं बदल सकते और न ही तथ्यों को छिपा सकते हैं।

    सिंधु जल संधि पर टिप्पणी करते हुए भारत ने कहा कि यह समझौता उस समय की परिस्थितियों में हुआ था जब क्षेत्रीय स्थिति अलग थी लेकिन अब समय बदल चुका है और जल संसाधनों के प्रबंधन को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार देखना होगा। भारत ने संकेत दिया कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते और किसी भी प्रकार की साझेदारी तभी संभव है जब पारस्परिक विश्वास और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।

    भारत ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति और स्थिरता के पक्ष में है लेकिन किसी भी प्रकार के झूठे प्रचार और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बयानों को स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने दोहराया कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना है तथा वह इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • पीओके में बढ़ा असंतोष: पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग तेज

    पीओके में बढ़ा असंतोष: पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग तेज


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी अशांति और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। हाल के दिनों में वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई, गिरफ्तारियों और कथित मौतों को लेकर पाकिस्तान सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियां आलोचनाओं के घेरे में हैं। खास बात यह है कि इस बार आवाज केवल स्थानीय स्तर से नहीं, बल्कि उन कश्मीरी समूहों की ओर से भी उठ रही है जो लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर अलग रुख रखते आए हैं।

    कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन के अध्यक्ष डॉ. मुबीन शाह ने पीओके की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रशासन ने लोगों की आवाज सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया है, जिससे क्षेत्र में असंतोष और बढ़ा है। उनका कहना है कि पीओके में हो रही घटनाओं ने नियंत्रण रेखा के दोनों ओर रहने वाले कश्मीरियों को झकझोर दिया है।

    डॉ. शाह ने कहा कि कश्मीरी समाज के लिए यह क्षेत्र केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक महत्व रखता है। ऐसे में वहां आम नागरिकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई ने लोगों के मन में गहरी नाराजगी पैदा की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय लोगों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।

    पीओके में चल रहे आंदोलन को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का समर्थन प्राप्त है। इस आंदोलन के समर्थन में कई प्रवासी कश्मीरी संगठनों ने पाकिस्तान सरकार के सामने 12 सूत्रीय मांग पत्र भी रखा है। इसमें प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग रोकने, गिरफ्तार लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने और हिंसा तथा मौतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग शामिल है। संगठनों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है तथा नागरिकों की आवाज को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए।

    कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन, जो दुनिया के कई देशों में सक्रिय कश्मीरी संगठनों का संयुक्त मंच है, ने भी इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है। संगठन का मानना है कि पीओके में मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े सवालों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की है कि घटनाओं की स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।

    विश्लेषकों का मानना है कि पीओके में उभर रहा यह असंतोष केवल स्थानीय आर्थिक समस्याओं तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक नीतियों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नागरिक अधिकारों से जुड़े व्यापक मुद्दों का रूप लेता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में पाकिस्तान सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है, इस पर क्षेत्र की राजनीतिक दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • चाबहार पर पाकिस्तान की नजर, ग्वादर के साथ ‘सिस्टर पोर्ट’ योजना ने बढ़ाई भारत की चिंता, रणनीतिक समीकरण बदलने की आशंका

    चाबहार पर पाकिस्तान की नजर, ग्वादर के साथ ‘सिस्टर पोर्ट’ योजना ने बढ़ाई भारत की चिंता, रणनीतिक समीकरण बदलने की आशंका

    नई दिल्ली । ईरान के चाबहार बंदरगाह को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के साथ जोड़कर ‘सिस्टर पोर्ट’ के रूप में विकसित करने की चर्चा ने क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस प्रस्ताव को ऐसे समय में सामने रखा गया है जब चाबहार परियोजना में भारत की भूमिका और भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी हैं। रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि इस दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है तो इसका प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

    पाकिस्तान के कुछ विश्लेषकों द्वारा प्रस्तुत इस विचार में चाबहार और ग्वादर के बीच आर्थिक एवं लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। प्रस्ताव के अनुसार दोनों बंदरगाहों के बीच परिवहन, कस्टम प्रक्रियाओं और व्यापारिक गतिविधियों को एकीकृत कर बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया जा सकता है। ग्वादर पहले से ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जबकि चाबहार को भारत ने अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने में निवेश किया है।

    चाबहार बंदरगाह भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक परियोजनाओं में शामिल रहा है। यह बंदरगाह पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे केवल आर्थिक परियोजना नहीं बल्कि भारत की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों ने इस परियोजना के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण चाबहार परियोजना की गति प्रभावित हुई है। इसी बीच यह भी चर्चा रही कि भारत अपनी कुछ हिस्सेदारी और संचालन व्यवस्था को लेकर वैकल्पिक विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि परियोजना पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। हालांकि भारत ने चाबहार को लेकर अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को कई बार दोहराया है।

    रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में चाबहार और ग्वादर के बीच किसी प्रकार का औपचारिक सहयोग विकसित होता है तो इससे क्षेत्र में चीन, पाकिस्तान और ईरान के बीच सहयोग का नया आयाम उभर सकता है। ऐसे परिदृश्य में भारत की समुद्री रणनीति और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में उसकी उपस्थिति को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखने के लिए भारत को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

    जानकारों के अनुसार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बंदरगाह केवल व्यापारिक केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सामरिक और कूटनीतिक महत्व के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी कारण चाबहार और ग्वादर से जुड़ी हर गतिविधि पर क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों की नजर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए आने वाले वर्षों में चाबहार परियोजना का महत्व कम नहीं होगा। मध्य एशिया, रूस और पश्चिम एशिया के साथ संपर्क बढ़ाने की रणनीति में यह बंदरगाह अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत के लिए अपनी आर्थिक, कूटनीतिक और सामरिक प्राथमिकताओं के अनुरूप संतुलित और सक्रिय नीति अपनाना आवश्यक होगा।

  • भारत की परमाणु क्षमता में बढ़ोतरी, SIPRI रिपोर्ट के अनुसार 190 हथियारों के साथ पाकिस्तान को छोड़ा पीछे

    भारत की परमाणु क्षमता में बढ़ोतरी, SIPRI रिपोर्ट के अनुसार 190 हथियारों के साथ पाकिस्तान को छोड़ा पीछे

    नई दिल्ली । स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत ने परमाणु हथियारों की संख्या के मामले में पाकिस्तान पर बढ़त बना ली है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु वारहेड्स मौजूद थे, जबकि पाकिस्तान का परमाणु भंडार करीब 170 वारहेड्स पर स्थिर रहा। यह आकलन दक्षिण एशिया के बदलते सामरिक परिदृश्य और दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पिछले वर्ष की तुलना में अपने परमाणु भंडार में वृद्धि की है। वर्ष 2025 में भारत के पास लगभग 180 परमाणु हथियार होने का अनुमान लगाया गया था, जो अब बढ़कर 190 तक पहुंच गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति और विकसित हो रही रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप है।

    SIPRI ने अपनी रिपोर्ट में भारत की न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता का विशेष उल्लेख किया है। न्यूक्लियर ट्रायड का अर्थ उन तीन माध्यमों से है जिनके जरिए परमाणु हथियारों का उपयोग किया जा सकता है। इसमें वायु आधारित प्लेटफॉर्म, जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलें और परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत इस त्रिस्तरीय क्षमता को लगातार मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत नई मिसाइल प्रणालियों के लिए अतिरिक्त परमाणु वारहेड विकसित कर रहा है। साथ ही देश की रक्षा अनुसंधान गतिविधियां लंबी दूरी तक मार करने वाली प्रणालियों और उन्नत मिसाइल तकनीकों पर अधिक केंद्रित दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना है।

    SIPRI ने यह भी संकेत दिया है कि भारत बहु-वारहेड क्षमता वाली मिसाइल तकनीकों की दिशा में प्रगति कर रहा है। इस तकनीक के तहत एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसी क्षमताओं को आधुनिक सामरिक प्रतिरोधक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    दूसरी ओर रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने भी वर्ष 2025 के दौरान अपनी परमाणु डिलीवरी प्रणालियों के विकास पर काम जारी रखा। हालांकि उसके परमाणु हथियारों की अनुमानित संख्या में कोई विशेष बदलाव दर्ज नहीं किया गया। पाकिस्तान की भूमि और वायु आधारित परमाणु क्षमताएं पहले से स्थापित हैं, जबकि समुद्र आधारित क्षमता अभी विकास और परीक्षण की प्रक्रिया में बताई गई है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान भविष्य में अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर सकता है। इसके पीछे नई मिसाइल प्रणालियों का विकास और विखंडनीय सामग्री के बढ़ते भंडार को प्रमुख कारण माना गया है। हालांकि इस संबंध में सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि आधिकारिक सार्वजनिक आंकड़े सीमित उपलब्ध हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन केवल हथियारों की संख्या का विषय नहीं है, बल्कि तकनीकी क्षमता, प्रतिरोधक रणनीति और कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे से भी जुड़ा हुआ है। SIPRI की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत और पाकिस्तान दोनों अपनी सामरिक क्षमताओं को आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल के वर्षों में क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण अधिक जटिल हुआ है। ऐसे में दोनों देशों द्वारा प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को समझने के लिए परमाणु रणनीति, तकनीकी विकास और क्षेत्रीय कूटनीति तीनों कारकों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक होगा।

  • भारत-चीन रिश्तों पर पाकिस्तान के प्रभाव के सवाल पर चीन का जवाब, राजदूत बोले- सभी पड़ोसी हमारे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण

    भारत-चीन रिश्तों पर पाकिस्तान के प्रभाव के सवाल पर चीन का जवाब, राजदूत बोले- सभी पड़ोसी हमारे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण

    नई दिल्ली । भारत और चीन के संबंधों में हाल के समय में दिखाई दे रही सकारात्मक गतिविधियों के बीच भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को विशेष महत्व देता है और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भारत, चीन और पाकिस्तान के त्रिकोणीय संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए चीनी राजदूत ने कहा कि चीन की विदेश नीति का आधार पड़ोसी देशों के साथ मित्रता, सहयोग और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के देशों सहित सभी पड़ोसी राष्ट्र चीन के लिए महत्वपूर्ण हैं और उनके साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना बीजिंग की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    राजदूत ने भारत और पाकिस्तान के संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश न केवल एक-दूसरे के पड़ोसी हैं बल्कि चीन के भी पड़ोसी हैं। ऐसे में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए संवाद का मार्ग सबसे उपयुक्त माना जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से अपने मतभेदों का समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

    शू फेइहोंग ने कहा कि भौगोलिक वास्तविकताओं को बदला नहीं जा सकता और पड़ोसी देशों के बीच बेहतर संबंध पूरे क्षेत्र के विकास और समृद्धि में योगदान दे सकते हैं। उनके अनुसार, आपसी विश्वास और सहयोग न केवल संबंधित देशों के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित होगा बल्कि व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता को भी मजबूती देगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक राजनीति और आर्थिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एशिया में बढ़ते आर्थिक महत्व और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच क्षेत्रीय सहयोग को लेकर विभिन्न देशों की सक्रियता बढ़ी है। चीन भी अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर लगातार जोर देता रहा है।

    राजदूत ने भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर संपर्क बढ़ा है। उन्होंने आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में आई वृद्धि को सकारात्मक संकेत बताया। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार विस्तार कर रहा है और भविष्य में सहयोग की संभावनाएं और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की दो बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के पास साझा विकास, निवेश, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। उनके अनुसार, आर्थिक साझेदारी का विस्तार दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है और क्षेत्रीय विकास को नई गति दे सकता है।

    राजनयिक हलकों में इस बयान को दक्षिण एशिया में संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने की चीन की सार्वजनिक नीति के अनुरूप माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में प्रमुख एशियाई देशों के बीच संवाद, व्यापारिक साझेदारी और विश्वास निर्माण की प्रक्रिया भविष्य की कूटनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

    भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण देशों के बीच संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहती है। ऐसे में संवाद, कूटनीति और सहयोग पर दिया गया जोर क्षेत्रीय शांति और दीर्घकालिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।