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  • पाकिस्तान ने भारत में होने वाले मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप से बनाई दूरी, हॉकी टीम को भेजने की अनुमति भी नहीं

    पाकिस्तान ने भारत में होने वाले मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप से बनाई दूरी, हॉकी टीम को भेजने की अनुमति भी नहीं

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों का असर एक बार फिर खेल आयोजनों पर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और वहां के गृह मंत्रालय ने जनवरी 2027 में भारत में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में अपनी 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की टीम को भेजने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के कारण पाकिस्तान की वेटरंस क्रिकेट टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकेगी। इससे पहले पाकिस्तान की पुरुष राष्ट्रीय हॉकी टीम को भी भारत में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट में भेजने से इनकार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

    इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में भाग लेने के लिए पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट संघ ने अपनी टीम भेजने की तैयारी की थी। संघ के प्रमुख फवाद एजाज के अनुसार, आयोजकों को टीम का नाम वापस लेने की आधिकारिक जानकारी दे दी गई है, ताकि वे टूर्नामेंट के लिए किसी दूसरी टीम की व्यवस्था कर सकें। पाकिस्तान की टीम को अनुमति नहीं मिलने से आयोजकों को अब भाग लेने वाली टीमों की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    फवाद एजाज ने बताया कि भारतीय आयोजकों और मेजबान देश की ओर से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वीजा तथा उच्चस्तरीय सुरक्षा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट संघ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी मांगा था। हालांकि, अनुमति नहीं मिलने के कारण टीम भारत आने की तैयारी आगे नहीं बढ़ा सकी।

    बताई गई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री और क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी ने दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों का हवाला देते हुए टीम को भारत जाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके चलते पाकिस्तान की टीम अगले साल होने वाले इस टूर्नामेंट में अपने खिताब का बचाव नहीं कर सकेगी। पाकिस्तान ने पिछला वेटरंस विश्व कप श्रीलंका में जीता था। ऐसे में आगामी प्रतियोगिता से उसका बाहर रहना टीम के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है।

    क्रिकेट के अलावा हॉकी में भी इसी तरह की स्थिति सामने आई है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ ने हाल ही में संवेदनशील द्विपक्षीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी पुरुष राष्ट्रीय टीम को भारत भेजने से इनकार कर दिया था। इसके बाद एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के लिए बांग्लादेश को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भारत-पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव का प्रभाव केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर भी पड़ रहा है।

    पाकिस्तान पहले भी भारत में आयोजित कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से हट चुका है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए उसने तमिलनाडु में आयोजित जूनियर विश्व कप और जूनियर एशिया कप से भी अपना नाम वापस लिया था। हालांकि, अलग-अलग प्रतियोगिताओं में फैसलों के पीछे परिस्थितियां और आधिकारिक कारण अलग हो सकते हैं।

    भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय खेल संबंध लंबे समय से प्रभावित हैं। वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों में बड़ा बदलाव आया। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने जुलाई 2008 में एशिया कप के लिए पाकिस्तान का दौरा किया था। वहीं, द्विपक्षीय श्रृंखला खेलने के लिए भारतीय टीम वर्ष 2005-06 में पाकिस्तान गई थी।

    वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों की क्रिकेट टीमें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और एशियाई क्रिकेट परिषद के बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में आमने-सामने आती हैं। ऐसे मुकाबले भी अक्सर संयुक्त अरब अमीरात या श्रीलंका जैसे तटस्थ स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं। द्विपक्षीय तनाव के कारण नियमित घरेलू दौरे और श्रृंखलाएं बहाल नहीं हो पाई हैं।

    जनवरी 2027 के मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान की अनुपस्थिति और हॉकी टीम को भारत नहीं भेजने के फैसले से दोनों देशों के खेल संबंधों में जारी चुनौतियां फिर सामने आई हैं। अब आयोजकों को क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए वैकल्पिक टीम की व्यवस्था करनी होगी, जबकि दोनों देशों के बीच भविष्य में खेल आयोजनों में भागीदारी की स्थिति राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगी।

  • आसिम मुनीर के तेहरान दौरे के बाद भी नहीं खुली सीमा, पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर पर ट्रकों में लगाई आग

    आसिम मुनीर के तेहरान दौरे के बाद भी नहीं खुली सीमा, पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर पर ट्रकों में लगाई आग


    इस्लामाबाद/तेहरान।
    पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा पर व्यापारिक आवाजाही बाधित होने से तनाव बढ़ता जा रहा है। सैकड़ों ट्रकों के फंसे होने के बीच रिमदान सीमा क्षेत्र में ट्रेड गेट-250 के पास हथियारबंद लोगों ने कई ट्रकों और व्यावसायिक ढांचों को निशाना बनाया। ताजे फलों से लदे कई भारी वाहनों में आग लगा दी गई। इस घटना से स्थानीय व्यापारियों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। इससे पहले ईरान के एक सांसद ने चेतावनी दी थी कि यदि पाकिस्तान ने ईरान से आने वाले ट्रकों की आवाजाही पर रोक जारी रखी, तो तेहरान भी अपनी ओर से सीमा बंद कर सकता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के बाद सुरक्षा बलों और हथियारबंद हमलावरों के बीच गोलीबारी हुई। इलाके में दहशत फैलने के बाद आपातकालीन टीमों को मौके पर भेजा गया। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हमलावरों की तलाश और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि हमले का संबंध प्रांत में सक्रिय अन्य उग्रवादी गतिविधियों से तो नहीं है।

    आसिम मुनीर के दौरे के बाद भी विवाद बरकरार

    पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हालिया तेहरान दौरे के बावजूद दोनों देशों के बीच सीमा पर ट्रकों की आवाजाही का विवाद नहीं सुलझ सका है। रिपोर्टों के अनुसार, मुनीर की यात्रा के दौरान सीमा खोलने का मुद्दा भी उठा था।

    ईरान-पाकिस्तान संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख फदाहोसैन मलिकी ने ईरानी समाचार एजेंसी आईएलएनए (ILNA) से कहा कि मुनीर ने तेहरान से ही सीमा खोलने के आदेश दिए थे। हालांकि, उनके मुताबिक पाकिस्तान की ओर से ईरान जाने वाले ट्रकों की आवाजाही शुरू होने के बावजूद ईरान से पाकिस्तान आने वाले वाहनों पर रोक जारी है।

    मलिकी ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में बदलाव नहीं हुआ, तो ईरान भी अपनी तरफ से सीमा बंद कर सकता है। उन्होंने पाकिस्तान के राजदूत को संसद में बुलाने की मांग की। मलिकी ने इस घटनाक्रम को ईरान पर अमेरिकी राजनीतिक दबाव से भी जोड़ा, हालांकि यह उनका दावा है।

    20 अक्टूबर से बाधित है व्यावसायिक आवाजाही

    गबद-रिमदान और ताफ्तान सीमा चौकियों पर 20 अक्टूबर से व्यापारिक आवाजाही बाधित होने की खबर है। पाकिस्तान ने सुरक्षा मजबूत करने और तस्करी रोकने के लिए इसे अस्थायी कदम बताया है। वहीं, ईरान ने तकनीकी दिक्कतों और एहतियाती उपायों का हवाला दिया है। दोनों देशों के बीच समस्या के समाधान के लिए बातचीत जारी है।

    फंसे ट्रक चालकों के सामने बुनियादी सुविधाओं का संकट

    सीमा पर सैकड़ों ट्रकों के फंसे होने से चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई ट्रक चालकों को पीने के पानी और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रक चालक अब्दुल गनी ने बताया कि चालकों को बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।

    सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां ठप होने और ताजा फलों से लदे ट्रकों पर हमले ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो सीमा पार व्यापार और स्थानीय कारोबार पर इसका असर और गहरा सकता है।

  • अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- परमाणु हथियार के चलते पाकिस्तान से संबंध रखना जरूरी

    अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- परमाणु हथियार के चलते पाकिस्तान से संबंध रखना जरूरी


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कई मतभेदों के बावजूद अमेरिका को पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखना पड़ता है। उन्होंने इसके पीछे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और उसकी भौगोलिक स्थिति को प्रमुख कारण बताया। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ है।

    सीएनएन-न्यूज18 को दिए एक साक्षात्कार में रुबियो ने कहा, “हम उन सभी के खिलाफ हैं, जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।” पाकिस्तान के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी देश की विदेश नीति को संभालना है। इसके लिए अमेरिका को कई देशों के साथ संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, भले ही उनके साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद हों।

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मामले में भी यही स्थिति है। यह एक ऐसा देश है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं। साथ ही, उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका को उसके साथ बातचीत करने की जरूरत पड़ती है। रुबियो ने इसकी तुलना भारत के ईरान के साथ संबंधों से करते हुए कहा कि भारत सरकार भी ईरान के नेताओं के साथ संपर्क और संवाद बनाए रखती है।

    पाकिस्तान से बातचीत क्यों जरूरी?

    पांच महीने में दूसरी बार भारत यात्रा पर आए रुबियो ने कहा कि विभिन्न हितों और मतभेदों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल है, लेकिन विदेश नीति के तहत ऐसा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखना सकारात्मक परिणाम भी दे सकता है।

    रुबियो के मुताबिक, यदि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संबंध बने रहते हैं और दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है, तो इससे उन गतिविधियों को रोकने में मदद मिल सकती है, जिनको लेकर भारत चिंतित है। उनके इस बयान को पाकिस्तान के साथ अमेरिकी कूटनीतिक संबंधों और भारत की सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होने की उम्मीद

    मुंबई पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जल्द होने की उम्मीद जताई। बैठक में दोनों देशों के संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, रुबियो की यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की गति को दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष 21वीं सदी के लिए भारत-अमेरिका सहयोग को आगे बढ़ाने को महत्व देते हैं।

    भारत को बताया तेल रिफाइनरी क्षेत्र की महाशक्ति

    जयशंकर के साथ बैठक के बाद रुबियो ने भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता की सराहना करते हुए उसे इस क्षेत्र की महाशक्ति बताया। रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद पर उन्होंने कहा कि भारत ने बार-बार अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की इच्छा जताई है और इस दिशा में प्रगति हो रही है।

    उन्होंने कहा कि अमेरिका भी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक अच्छा स्रोत बन सकता है। बैठक में दोनों देशों के बीच ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। रुबियो ने भारत से ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने और अमेरिकी तकनीक का उपयोग बढ़ाने की अपील भी की।

    वेनेजुएला में तेल उत्पादन पर रिलायंस से चर्चा करेगा अमेरिकी दल

    रुबियो ने बुधवार को गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रिफाइनरी के प्रस्तावित दौरे को लेकर मीडिया के सवालों का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वेनेजुएला में तेल उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर रिलायंस के साथ चर्चा करेगा। इस संभावित बातचीत को ऊर्जा क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

  • PAK: ऐतिहासिक राम लीला मंदिर को तोड़कर कमर्शियल प्लाजा बनाने की साजिश! विरोध के बाद प्रशासन ने जड़ा ताला

    PAK: ऐतिहासिक राम लीला मंदिर को तोड़कर कमर्शियल प्लाजा बनाने की साजिश! विरोध के बाद प्रशासन ने जड़ा ताला


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत (Pakistan) स्थित डेरा इस्माइल खान (Dera Ismail Khan) के रहीम बाजार में स्थित ऐतिहासिक ‘राम लीला मंदिर’ (Historic ‘Ram Leela Mandir’) को स्थानीय प्रशासन ने शनिवार को ताला लगाकर पूरी तरह सील कर दिया है। मंदिर की ऐतिहासिक इमारत को ध्वस्त कर वहां कमर्शियल प्लाजा बनाने की कथित साजिश के सामने आने के बाद नागरिक समाज और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के कड़े विरोध के बाद प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा है।

    ACP हामिद सिद्दीकी के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद मंदिर परिसर में जारी हर तरह के निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।


    तोड़फोड़ और कमर्शियल प्लाजा के खिलाफ नागरिक समाज का विरोध

    मंदिर को ध्वस्त कर व्यापारिक परिसर में बदलने की कोशिशों की खबर मिलने के बाद स्थानीय नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और हिंदू समुदाय के नेताओं की एक आपातकालीन संयुक्त बैठक सुहैल अहमद आजमी (स्थानीय नागरिक समाज संगठन के अध्यक्ष) के कार्यालय में की गई। इस बैठक में पूर्व प्रांतीय असेंबली सदस्य (MPA) और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि किशोर कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद नौमान सहित नागरिक समाज के कई नेता शामिल हुए।

    बैठक में शामिल नेताओं ने मंदिर की जमीन को अवैध तरीके से कमर्शियल प्लाजा के लिए आवंटित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और पाकिस्तानी सांसदों से इस मामले को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठाने की अपील की।


    400 सांस्कृतिक विरासत इमारतों में शामिल है राम लीला मंदिर

    बैठक में वक्ताओं ने राम लीला मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक मंदिर डेरा इस्माइल खान की उन लगभग 400 ऐतिहासिक इमारतों में शामिल है, जिन्हें ‘इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ की ओर से सांस्कृतिक विरासत संपत्ति के रूप में शामिल किया गया है।

    नागरिक समाज ने चेतावनी दी कि ऐतिहासिक धरोहरों को ध्वस्त कर व्यापारिक परिसरों में तब्दील करने से शहर की सदियों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पूरी तरह मिट जाएगी। नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, साहित्यिक हलकों और विरासत संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर ऐतिहासिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया।


    अधिकारियों की शक्तियों और कानूनी वैधता पर सवाल

    नागरिक समाज और हिंदू नेताओं ने सवाल उठाया कि संबंधित अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर मंदिर की जमीन पर कमर्शियल प्लाजा निर्माण की अनुमति कैसे दे दी। प्रतिभागियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष, पुरातत्व विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई जाएगी।

  • खुद IMF से मांग रहा मदद, अब दुनिया को कर्ज संभालना सिखाएगा पाकिस्तान, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की मिली कमान

    खुद IMF से मांग रहा मदद, अब दुनिया को कर्ज संभालना सिखाएगा पाकिस्तान, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की मिली कमान


    नई दिल्ली। खुद अरबों डॉलर के विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान अब दूसरे विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के गुर सिखाने और उनकी आर्थिक चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जिम्मेदारी निभाएगा। संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाले ‘बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ यानी कर्ज लेने वाले देशों के मंच की अध्यक्षता पाकिस्तान को मिली है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर को बैंकॉक में मंच की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष का पद संभाला।

    पाकिस्तान की इस नियुक्ति पर इसलिए चर्चा हो रही है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से बाहरी वित्तीय मदद पर निर्भर है। हालांकि, इस मंच की अगुवाई करने से पाकिस्तान का अपना कर्ज कम नहीं होगा। न ही उसे कर्ज चुकाने की शर्तों में किसी तरह की विशेष राहत मिलेगी। इस मंच का उद्देश्य विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के अनुभव साझा करने, आर्थिक सुधारों पर चर्चा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के बेहतर विकल्प तलाशने का अवसर देना है।

    IMF से फिर मदद की उम्मीद, पहले भी मिल चुके हैं राहत पैकेज

    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से वित्तीय सहायता मांगता रहा है। 7 अक्टूबर को पाकिस्तान और IMF के बीच एक समझौते पर सहमति बनी थी। इसके तहत पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की मदद मिल सकती है। हालांकि, इस सहायता के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।

    इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का IMF राहत पैकेज मिला था, जिसने उसे संप्रभु डिफॉल्ट यानी कर्ज चुकाने में पूरी तरह नाकाम होने की स्थिति से बचने में मदद की। इसके बाद 2024 में देश के लिए 7 अरब डॉलर का एक और कार्यक्रम मंजूर किया गया। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने IMF से 1.3 अरब डॉलर का अलग ऋण भी हासिल किया।

    स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत तक देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां 137.55 अरब डॉलर थीं। ऐसे में कर्ज प्रबंधन से जुड़े मंच की अध्यक्षता मिलना पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम जिम्मेदारी है, लेकिन इससे उसकी आर्थिक चुनौतियां अपने आप दूर नहीं होंगी।

    क्या है बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म?

    बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म विकासशील देशों के लिए बनाया गया ऐसा मंच है, जहां कर्ज लेने वाले देश अपनी समस्याओं, अनुभवों और आर्थिक सुधारों से जुड़े उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। इसका उद्देश्य कर्ज के बेहतर प्रबंधन, विकास के लिए वित्त जुटाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में कर्जदार देशों की चिंताओं को मजबूती से सामने लाने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

    इस मंच को संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD यानी व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का सचिवालय सहयोग देता है। इसका विचार जुलाई 2025 में स्पेन के सेविले में आयोजित विकास वित्त सम्मेलन के दौरान सामने आया था। इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया।

    अब तक कर्ज देने वाले देशों के बीच समन्वय के लिए कई व्यवस्थाएं मौजूद रही हैं, लेकिन कर्ज लेने वाले देशों के पास आपसी सहयोग के लिए ऐसा स्थायी मंच नहीं था। बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म इसी कमी को दूर करने की कोशिश है।

    UNCTAD में कर्ज और विकास से जुड़े मामलों की प्रमुख पेनेलोप हॉकिन्स ने अप्रैल में मंच की शुरुआत के दौरान कहा था कि कर्ज देने वाले देशों के समूह ‘पेरिस क्लब’ को इस तरह के समन्वय का करीब 70 साल का अनुभव है।

    पाकिस्तान पहले से रहा है मंच की तैयारी में शामिल

    पाकिस्तान इस मंच को तैयार करने की प्रक्रिया में पहले से भागीदारी कर रहा था। वह मिस्र की अगुवाई वाले कार्य समूह का उपाध्यक्ष था। इस समूह में कोलंबिया, होंडुरास, मालदीव, नेपाल और जाम्बिया भी शामिल थे। समूह ने मंच के कामकाज, सदस्यता और संचालन से जुड़े नियम तैयार करने में योगदान दिया।

    UNCTAD के अनुसार, मंच के सदस्य हर साल अपना अध्यक्ष चुनते हैं। इसकी गवर्निंग काउंसिल में वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं, जो मंच की प्राथमिकताएं तय करते हैं। वहीं, संचालन समिति तकनीकी और व्यावहारिक कामकाज संभालती है।

    कर्ज प्रबंधन और आर्थिक सुधारों पर रहेगा जोर

    पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि उनका देश कर्ज प्रबंधन को बेहतर बनाने, आर्थिक सुधारों के अनुभव साझा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के नए तरीके तलाशने पर ध्यान देगा। उन्होंने योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनके नतीजों का आकलन करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

    हालांकि, अध्यक्ष के रूप में पाकिस्तान को दूसरे देशों के कर्ज की शर्तों पर बातचीत करने या अपने लिए भुगतान में राहत हासिल करने का अधिकार नहीं मिलेगा। UNCTAD के मुताबिक, यह मंच अपने सदस्यों की ओर से कर्ज की शर्तों या भुगतान को लेकर बातचीत नहीं करेगा। इसके बजाय यह कर्ज से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान की भूमिका कर्ज से परेशान विकासशील देशों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने, उनके अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाने और उनकी समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की होगी। मंच की अध्यक्षता से उसे कूटनीतिक भूमिका निभाने का अवसर जरूर मिलेगा, लेकिन अपने विदेशी कर्ज और उसे चुकाने की जिम्मेदारी से उसे कोई छूट नहीं मिलेगी।

  • Pakistan: ईशनिंदा के आरोप के बाद भड़की हिंसा… डर के मारे 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने छोड़ा गांव

    Pakistan: ईशनिंदा के आरोप के बाद भड़की हिंसा… डर के मारे 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने छोड़ा गांव


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के पंजाब प्रांत (Punjab Province) में एक ईसाई व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद मुस्लिम भीड़ ने उसके घर और दुकान में आग लगा दी. घटना के बाद हिंसा (Violence) की आशंका से 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों (Christian families) को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस्लामाबाद में 16 अक्टूबर को एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना पंजाब के घड़ियाल कलां गांव की है, जहां 40 वर्षीय ईसाई व्यक्ति कामरान मसीह एक छोटी फार्मेसी चलाते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, घटना से एक दिन पहले पुलिस ने कामरान मसीह को गिरफ्तार किया था. स्थानीय मुसलमानों ने उन पर व्हाट्सऐप ग्रुप में ईशनिंदा से जुड़ा वीडियो साझा करने का आरोप लगाया था. ‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल-मॉर्निंग स्टार न्यूज’ ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि मसीह की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही उनके परिवार और गांव के अन्य ईसाई परिवार भीड़ के हमले के डर से घर छोड़कर भागने लगे. सूत्र के मुताबिक, कई मुसलमान मसीह की दुकान और घर के पास इकट्ठा हुए, विरोध प्रदर्शन किया और दोनों इमारतों में आग लगा दी।


    पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों पर उठे सवाल

    ‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की आलोचना की है. उनका कहना है कि इन कानूनों का इस्तेमाल निजी विवादों और दूसरे झगड़ों में किया जा सकता है, जिसका सबसे बुरा असर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पड़ता है. 22 जुलाई को एक प्रमुख अल्पसंख्यक समूह ने पाकिस्तान पर इन कानूनों के दुरुपयोग को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था. समूह ने झूठे आरोपों, आरोपियों के खिलाफ भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यकों को ऐसी घटनाओं के नतीजों से बचाने में नाकामी का मुद्दा उठाया।


    मानवाधिकार संगठन ने न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल

    ‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ (वीओपीएम) के अनुसार, पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक हैं. संगठन का कहना है कि इनका धार्मिक अल्पसंख्यकों पर गहरा असर पड़ता है और सरकारी संस्थाएं इनके दुरुपयोग को रोकने में लगातार विफल रही हैं. वीओपीएम ने कहा कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक यह है कि वह निर्दोष लोगों को झूठे आरोपों से बचाने में सक्षम नहीं रही है. संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायपालिका और कानून लागू करने वाली एजेंसियां ईशनिंदा के आरोपों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफल रही हैं. उसके मुताबिक, झूठे आरोप लगाने वालों को जवाबदेह नहीं ठहराए जाने से ऐसा संदेश जाता है कि इस तरह की हरकतें बिना किसी परिणाम के जारी रह सकती हैं. इससे कानूनी व्यवस्था में जनता का भरोसा कमजोर होता है।


    रिमशा मसीह का मामला भी उठाया

    वीओपीएम ने डाउन सिंड्रोम से पीड़ित पाकिस्तानी ईसाई लड़की रिमशा मसीह के मामले का भी जिक्र किया. उस पर कुरान के अपमान का आरोप लगाया गया था, लेकिन बाद में सामने आए सबूतों से आरोप गढ़े जाने की बात सामने आई. रिमशा को बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, तब तक उसके परिवार को भारी दबाव का सामना करना पड़ा था. संगठन का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि अदालत में तथ्यों की जांच होने से पहले ही कोई व्यक्ति ईशनिंदा जैसे गंभीर आरोपों का शिकार बन सकता है।

    रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच, झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है।

  • बेल आउट पैकेज पर गुजारा करने वाला पाकिस्तान अब विश्व बैंक और IMF में बड़ी भूमिका में

    बेल आउट पैकेज पर गुजारा करने वाला पाकिस्तान अब विश्व बैंक और IMF में बड़ी भूमिका में


    इस्लामाबाद।
    IMF के बेल आउट पैकेज (Bailout package) से गुजर बसर करने वाला पाकिस्तान (Pakistan) अब बड़ी टेबल पर बैठता हुआ नजर आएगा। जी हां, IMF से 1.2 अरब डॉलर के पैकेज की मंजूरी का इंतजार कर रहा पाकिस्तान अब इस वैश्विक संस्था के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Global Institution Board of Governors) की अध्यक्षता करने जा रहा है। पाकिस्तान सरकार के मुताबिक 1953 के बाद यह पहली बार है, जब इस्लामाबाद इस पद पर बैठेगा। बता दें, इस पद के तहत पाकिस्तान उन बैठकों की अध्यक्षता करेगा, जिनमें सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर शामिल होते हैं। हालांकि कर्ज देने के मामले में पाकिस्तान की कोई सीधी भूमिका नहीं होगी।

    पाकिस्तान सरकार की तरफ से बताया गया कि बैंकॉक में हुए विश्व बैंक और IMF की वार्षिक बैठकों के दौरान वहां पाकिस्तान के गवर्नर अहद खान चीमा को 2027 के लिए आगामी अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है। पाकिस्तान की तरफ से इस नियुक्ति को एक ऐतिहासिक पल करार दिया गाय है।

    कर्ज लेकर पलने वाला देश अब बड़ी भूमिका में
    पाकिस्तान अपनी स्थापना के बाद लगातार IMF से बेल आउट पैकेज ले चुका है। 1950 में IMF की स्थापना के बाद करीब 25 बार पाकिस्तान IMF की मदद लेकर अपना देश चलाने की कोशिश कर रहा है। बार-बार IMF के पास जाने से पता चलता है कि पाकिस्तान को अपनी बाहरी देनदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा जुटाने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, देश में महंगाई और फंडिंग का दबाव भी बना हुआ है।

    वर्तमान की स्थिति में पाकिस्तान IMF से करीब 1.2 बिलियन डॉलर निकालने की जुगत में है। इसमें एक्सटेंटेड फंड फैसिलिटी और जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए दी जाने वाली मदद शामिल है। लेकिन इस पैसे को निकालने के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है, जो कि अभी तक मिली नहीं है।


    पाकिस्तान का अर्थव्यवस्था का मॉडल अस्थिर- विश्वबैंक

    आईएमएफ की तरफ से पाकिस्तान को लगातार एक अस्थिर अर्थव्यवस्था वाला देश कहा जाता रहा है। विश्व बैंक ने भी हाल में पाकिस्तान के विकास मॉडल को अस्थिर ही बताया था। विश्व बैंक की तरफ से कहा गया था कि पाकिस्तान में सार्वजनिक खपत का उच्च स्तर, कम उत्पादकता और भारी मात्रा में कर्ज लेना। अब असली चुनौती यह है कि क्या ये लोन ऐसे विकास को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे भविष्य में किसी और ‘बेलआउट’ (आर्थिक मदद) की जरूरत न पड़े।

    पाकिस्तान शुरुआत से ही दुनिया के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरता रहता है। एक इस्लामिक देश, जिसके पास परमाणु हथियार है। वह अपने आप की मदद करने के लिए दुनिया को लगातार इस मामले में चैक पर रखता है कि वह आतंकवाद से लड़ रहा है। अगर उसकी मदद नहीं की गई, तो परमाणु हथियार खतरे में पड़ सकते हैं। इसलिए पश्चिम एशिया से लेकर अमेरिका तक पाकिस्तान और उसकी सेना का अपने मन मुताबिक उपयोग करके पैसे के जरिए इस्लामाबाद की सत्ता के संभाले रहते हैं।

    शहबाज शरीफ की सरकार के आने के बाद IMF और सऊदी अरब ने खुले मन से पाकिस्तान की मदद की है। IMF का कहना है कि पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद, पाकिस्तान ने अपनी व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखी है। इसमें मजबूत नीतियों और IMF के लोन कार्यक्रम के तहत मिली मदद ने अहम भूमिका निभाई है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तीन तिमाहियों में वास्तविक GDP में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालाँकि, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में रुकावटों के कारण विकास की गति धीमी हो गई, जिससे पूरे साल के लिए विकास दर 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

  • भारत ने UN में मानवाधिकार रिपोर्ट पर उठाए सवाल…. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा

    भारत ने UN में मानवाधिकार रिपोर्ट पर उठाए सवाल…. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा


    वाशिंगटन।
    न्यूयॉर्क (New York) में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के 81वें सत्र में मानवाधिकार उच्चायोग के साथ ‘इंटरैक्टिव डायलॉग’ के दौरान प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने भारत का बयान रखा. उन्होंने ओएचसीएचआर (OHCHR) के चयनात्मक रवैये और दोहरे मानदंडों पर चिंता जाहिर करते हुए सवाल खड़े किए. उनकी ओर से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिका के उल्लंघनों पर रिपोर्ट की मांग की गई।

    दरअसल, अनुज स्वरूप ने मानवाधिकार परिषद में भारत के सदस्य के रूप में अपनी रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका को रेखांकित किया. अपने संबोधन के दौरान उम्होंने कहा कि मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की ओर से चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान देने और दोहरे मानदंड अपनाने से बहुपक्षीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।


    पाकिस्तान पर OHCHR रिपोर्ट जारी करने की मांग

    इस दौरान भारत ने पाकिस्तान पर एक ओएचसीएचआर रिपोर्ट जारी करने की मांग की, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ओर से लोगों की हत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच, हिरासत में रखे गए आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अधिकार दिए जाने और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर लगी सभी पाबंदियां हटाने जैसे मुद्दों को शामिल करने की बात कही।


    भारत की पाकिस्तान को दो टूक

    भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस बात पर आत्ममंथन करें कि उसके देश के कई हिस्सों, खासकर उसके अवैध कब्जे वाले क्षत्रों में मानवाधिकारों का किस तरीके से उल्लंघन हो रहा है. प्रथम सचिव की ओर से कहा गया कि मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है और इस दिशा में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

    बता दें इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया गया था. स्थायी मिशन के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर बेदी ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर परमाणु हथियारों की धमकी से दबने वाला नहीं है. बेदी ने कहा कि भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी आतंकी हमले का जवाब देगा।


    भारत ने पाकिस्तान को दी सीधी चेतावनी

    उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ होने वाली किसी भी आतंकी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा. भारत आतंकवाद को समर्थन देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा. बेदी ने यह भी कहा कि पिछले साल पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद किया गया था. पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी।

  • पाकिस्तान के पेशावर में निजी स्कूल की छत गिरने से 20 बच्चों की मौत, 40 से अधिक लोग घायल

    पाकिस्तान के पेशावर में निजी स्कूल की छत गिरने से 20 बच्चों की मौत, 40 से अधिक लोग घायल

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के पेशावर में एक निजी स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 20 बच्चों की मौत होने की खबर है, जबकि 40 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। कई बच्चे और स्कूल के कर्मचारी छत के मलबे के नीचे दब गए। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।

    दुर्घटना के बाद बचावकर्मियों ने मलबे में फंसे बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। टीमों ने घटनास्थल पर तलाश अभियान चलाया, ताकि मलबे के नीचे दबे लोगों तक पहुंचा जा सके। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। हादसे में घायल 20 बच्चों को लेडी रीडिंग अस्पताल ले जाया गया।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआती जानकारी में 17 शव अस्पताल लाए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद एक महिला शिक्षक का शव भी अस्पताल पहुंचाया गया। घटना में हताहत हुए लोगों की संख्या और घायलों की स्थिति को लेकर राहत अभियान के दौरान जानकारी सामने आती रही। हादसे की गंभीरता को देखते हुए बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों को तलाशने में लगा रहा।

    पेशावर में हुए इस हादसे के बाद घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। संबंधित अधिकारियों ने अस्पतालों में भर्ती लोगों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राहत टीमों को भी तेजी से काम करने और मलबे के नीचे फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालने के लिए कहा गया।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने जान गंवाने वाले बच्चों और अन्य लोगों के लिए प्रार्थना की तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हादसे में घायल लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बचाव दल को अभियान तेज करने के निर्देश भी दिए, ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

    खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर के सूचना एवं जनसंपर्क सलाहकार समर हारून बिलौर ने भी घटना पर दुख जताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से घायल बच्चों को हर संभव सहायता देने को कहा। इस बीच, पेशावर के पुलिस अधिकारी डॉ. मियां सईद ने बताया कि हादसे में 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

    स्कूल की छत गिरने के कारणों को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य का मुख्य उद्देश्य मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को उपचार उपलब्ध कराना है। हादसे में बच्चों की मौत से इलाके में दुख का माहौल है।

  • राजस्थान बॉर्डर पर ड्रोन से हथियारों की खेप बरामद, 600 कारतूस और विस्फोटक मिले, दो आरोपी गिरफ्तार

    राजस्थान बॉर्डर पर ड्रोन से हथियारों की खेप बरामद, 600 कारतूस और विस्फोटक मिले, दो आरोपी गिरफ्तार


    जयपुर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन के जरिए गिराई गई हथियारों और विस्फोटकों की खेप बरामद की है। रावला क्षेत्र के एक खेत से 7.7 किलोग्राम प्लास्टिक एक्सप्लोसिव, दो पिस्टल, करीब 600 कारतूस और अन्य संदिग्ध उपकरण मिले हैं। मामले में पंजाब निवासी लखविंद्र सिंह और सुखविंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया है। राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने संयुक्त अभियान चलाकर यह कार्रवाई की।

    ANTF के आईजी विकास कुमार के मुताबिक, ड्रोन की तीन उड़ानों के जरिए सीमा क्षेत्र में हथियार, कारतूस और विस्फोटक गिराए गए थे। बरामद सामग्री की गिनती और जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि खेप में आईईडी बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और विस्फोटक से जुड़ी अन्य सामग्री भी शामिल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर से विशेष बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है, जो मौके पर पहुंचकर विस्फोटकों की जांच और उन्हें निष्क्रिय करने की कार्रवाई करेगा।

    खेत में मिले तीन पैकेट, विस्फोटक भी बरामद

    जानकारी के मुताबिक, श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र में सीमा के पास 12 केएनडी इलाके के एक खेत में ड्रोन से तीन पैकेट गिराए गए थे। तलाशी के दौरान इन पैकेटों से 7.7 किलोग्राम प्लास्टिक एक्सप्लोसिव, दो पिस्टल, करीब 600 कारतूस और चार मैगजीन बरामद हुईं।

    इसके अलावा एक रिमोट, दो केपलर और चार बैटरियां भी मिली हैं। सुरक्षा एजेंसियां बरामद सामग्री की प्रकृति, इस्तेमाल और संभावित खतरे का आकलन कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, विस्फोटकों की स्थिति की जांच के बाद उन्हें निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप किसके लिए भेजी गई थी, इसे आगे कहां पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

    मजदूर बनकर रह रहे थे दोनों संदिग्ध

    इस मामले में गिरफ्तार लखविंद्र सिंह और सुखविंद्र सिंह पंजाब के रहने वाले हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों रावला मंडी क्षेत्र में मजदूर बनकर रह रहे थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वे ड्रोन से गिराए गए पैकेट लेने के लिए वहां पहुंचे थे।

    एजेंसियां उन बाइक सवार युवकों की भी तलाश कर रही हैं, जो कथित तौर पर दोनों को रावला छोड़ने आए थे। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्धों का संपर्क किन लोगों से था और हथियारों की खेप मंगाने के पीछे किसका निर्देश था।

    मामले की जांच जारी होने के कारण अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की है।

    एक महीने से संदिग्धों की गतिविधियों पर थी नजर

    ANTF के आईजी विकास कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई पहले से मिली खुफिया सूचना के आधार पर की गई। एजेंसी को करीब एक महीने पहले जानकारी मिली थी कि पंजाब के दो संदिग्ध किसी खास मकसद से राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में मौजूद हैं। इसके बाद टीम ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी।

    विकास कुमार के मुताबिक, संदिग्धों की निगरानी के दौरान बाद में सूचना मिली कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप अगले दिन पहुंचने वाली है। इसके बाद ANTF और BSF ने संयुक्त अभियान की योजना बनाई और कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर खेप लेने पहुंचे दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।

    फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों, विस्फोटकों और अन्य उपकरणों की जांच के साथ पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि खेप कहां से भेजी गई थी और इसे हासिल करने के बाद किस ठिकाने तक पहुंचाया जाना था।