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  • पाकिस्तान में सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके से कांपी धरती, 4.6 मापी गई तीव्रता

    पाकिस्तान में सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके से कांपी धरती, 4.6 मापी गई तीव्रता


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) में भूकंप (Earthquake) के तेज झटके लगे हैं. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी National Center for Seismology.- (NCS) के अनुसार, आज सुबह पाकिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र बलूचिस्तान के बारखान से लगभग 55 किलोमीटर उत्तर में स्थित था.


    सुबह-सुबह कांपी धरती

    एनसीएस के अनुसार, भूकंप 26 मार्च 2026 को सुबह 5:56 बजे (भारतीय समय) आया. भूकंप का केंद्र 30.394° उत्तरी अक्षांश और 69.534° पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया, जबकि इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी. भूकंप के झटके आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए, जिससे कुछ समय के लिए लोगों में दहशत फैल गई।


    जान-माल का नुकसान नहीं

    फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है. प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है. विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान एक भूकंप संभावित क्षेत्र में स्थित है, क्योंकि यह भारतीय, यूरेशियाई और अरब टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा के पास आता है, जिस कारण इस क्षेत्र में अक्सर भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जाती रहती हैं.


    क्यों आता है भूकंप?

    भूकंप पृथ्वी की सतह के अचानक कंपन को कहते हैं, जो जमीन के अंदर टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने, घर्षण या ऊर्जा मुक्त होने के कारण आता है. यह ऊर्जा शॉक वेव्स के रूप में फैलती है, जिससे जमीन हिलती है और इमारतें गिर सकती हैं. भूकंप को रिक्टर पैमाने पर मापा जाता है और इसके कारण भूस्खलन, सुनामी या आग जैसी आपदाएं आ सकती हैं.

    केंद्र (Epicenter): जमीन के अंदर वह स्थान जहां से भूकंप शुरू होता है, उसे ‘फोकस’ कहते हैं, और ठीक ऊपर सतह पर स्थित स्थान को ‘एपिसेंटर’ कहते हैं.


    भूकंप के दौरान क्या करें?

    मेज के नीचे छिपें और उसे पकड़ें. अगर संभव हो तो इमारतों से दूर, खुले मैदान में चले जाएं. लिफ्ट का प्रयोग न करें. भूकंप के दौरान हमेशा सीढ़ियों का इस्तेमाल करें.

  • ईरान जंग के बीच शियाओं पर आसिम मुनीर का बयान, पाकिस्तान में बढ़ा विवाद

    ईरान जंग के बीच शियाओं पर आसिम मुनीर का बयान, पाकिस्तान में बढ़ा विवाद

    तेहरान। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर Asim Munir के एक बयान को लेकर पाकिस्तान में नया विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कथित तौर पर कहा कि जिन शिया धर्मगुरुओं को Iran से “ज्यादा लगाव” है, वे वहां चले जाएं। उनका यह बयान रावलपिंडी में आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जिसके बाद शिया समुदाय के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

    शिया धर्मगुरुओं ने इसे अपमानजनक और भड़काऊ बताते हुए आरोप लगाया कि सैन्य नेतृत्व देश के भीतर सांप्रदायिक तनाव बढ़ा रहा है। कुछ नेताओं ने यहां तक कहा कि सेना प्रमुख बाहरी शक्तियों के प्रभाव में काम कर रहे हैं, जो पाकिस्तान के हितों के खिलाफ है।

    सरकारों को गिराने तक के आरोप
    शिया उलेमा काउंसिल पाकिस्तान के केंद्रीय उपाध्यक्ष आलम सैयद सिब्तैन हाइडर सब्ज़वारी ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि सेना प्रमुख को अमेरिका और इजरायल से इतना लगाव है तो उन्हें खुद पाकिस्तान छोड़ देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार सरकारों को गिराकर देश को नुकसान पहुंचाया गया है।

    विरोध प्रदर्शनों के बाद बढ़ा तनाव
    इससे पहले, कराची, स्कार्डू और इस्लामाबादसमेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये प्रदर्शन शिया अयातुल्लाह खामेनेई से जुड़े घटनाक्रमों के विरोध में बताए गए। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत होने की खबरें सामने आई थीं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।

    मुनीर की चेतावनी
    विरोध प्रदर्शनों के बाद मुनीर ने कहा था कि किसी दूसरे देश की घटनाओं को लेकर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बाद में “ईरान चले जाएं” वाली टिप्पणी सामने आने के बाद शिया समुदाय के एक हिस्से में नाराजगी और बढ़ गई।
    Inter-Services Public Relations ने अपने बयान में कहा कि सेना प्रमुख ने उलेमाओं से मुलाकात कर राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में उनकी भूमिका पर चर्चा की। हालांकि विवादित टिप्पणी पर आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

  • 2 मुस्लिम देशों की ईरान को चेतावनी, क्या सऊदी-पाकिस्तान जंग में उतरेंगे

    2 मुस्लिम देशों की ईरान को चेतावनी, क्या सऊदी-पाकिस्तान जंग में उतरेंगे


    रियाद।
     मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान  के खिलाफ 12 मुस्लिम देशों ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया है। साउदी अरब  की राजधानी में हुई अहम बैठक में पाकिस्‍तान समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से तुरंत हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की मांग की।

    बैठक में । अज़रबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात  जैसे देश शामिल रहे। सभी ने नागरिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की।

    ईरान को सख्त संदेश

    बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तेल संयंत्रों, हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों और राजनयिक मिशनों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया। देशों ने United Nations चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का भी जिक्र किया और United Nations Security Council के प्रस्तावों के पालन की मांग की।

    साथ ही ईरान से हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में हस्तक्षेप न करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की अपील की गई।

    सऊदी विदेश मंत्री की कड़ी चेतावनी
    सऊदी विदेश मंत्री Faisal bin Farhan Al Saud ने साफ कहा कि ईरान पर भरोसा “पूरी तरह खत्म” हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान दबाव और आक्रामक रणनीति के जरिए क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो सऊदी अरब “उचित कदम” उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनका यह बयान सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई की संभावना की ओर इशारा माना जा रहा है।

    क्या पाकिस्तान भी जंग में खिंच सकता है?
    विश्लेषकों का मानना है कि यदि Saudi Arabia सीधे संघर्ष में उतरता है, तो उसका रक्षा सहयोग समझौता Pakistan के साथ सक्रिय हो सकता है। ऐसे में इस्लामाबाद भी इस टकराव का हिस्सा बन सकता है, जिससे संघर्ष और व्यापक हो सकता है।

    खाड़ी देशों पर हमलों से बढ़ा तनाव
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सभी छह देशों को निशाना बनाया है। Abu Dhabi और Dubai में हुए हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई, जबकि Kuwait, Oman और Bahrain में भी नुकसान की खबरें हैं।

    Qatar के अल-उदीद एयरबेस और Saudi Arabia के तेल ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    स्थिति बेहद संवेदनशील
    मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा। अगर सऊदी अरब और उसके सहयोगी सीधे मैदान में उतरते हैं, तो यह टकराव पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है—जिसके वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक असर भी गंभीर हो सकते हैं।

  • ईद पर थमेगा संघर्ष: पाकिस्तान-अफगानिस्तान ने किया अस्थायी सीजफायर का ऐलान

    ईद पर थमेगा संघर्ष: पाकिस्तान-अफगानिस्तान ने किया अस्थायी सीजफायर का ऐलान

    । ईद-उल-फितर के मौके पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव को लेकर राहत भरी खबर आई है। दोनों देशों ने सऊदी अरब, तुर्किये और कतर की अपील पर सीमित अवधि के लिए संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू करने की घोषणा की है।
    ईद के मद्देनजर लिया गया फैसला
    पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि उनके देश ने चल रहे सैन्य अभियान ‘गजब-लिल-हक’ के बीच अस्थायी विराम का फैसला किया है। यह निर्णय ईद-उल-फितर को ध्यान में रखते हुए और मित्र इस्लामी देशों के अनुरोध पर लिया गया है।

    कब तक रहेगा सीजफायर लागू
    यह संघर्ष विराम 18/19 मार्च की मध्यरात्रि से शुरू होकर 23/24 मार्च की मध्यरात्रि तक प्रभावी रहेगा। हालांकि पाकिस्तान ने साफ किया है कि अगर इस दौरान सीमा पार से हमला, ड्रोन अटैक या आतंकी गतिविधि होती है, तो कार्रवाई तुरंत फिर शुरू कर दी जाएगी।

    अफगानिस्तान ने भी रोकी सैन्य कार्रवाई
    पाकिस्तान की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अफगानिस्तान की ओर से भी जवाब आया।

    सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि ईद के अवसर पर सुरक्षा बलों को रक्षात्मक अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने का निर्देश दिया गया है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी खतरे की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

    हमलों के बाद बढ़ा तनाव
    यह सीजफायर ऐसे समय में सामने आया है जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल स्थित एक पुनर्वास केंद्र पर हमले का आरोप लगाया है। अफगान अधिकारियों का दावा है कि इस हमले में 400 से अधिक लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।

    वहीं पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके हमले केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे और नागरिक हताहतों के आंकड़े भ्रामक हैं।

    सामूहिक अंतिम संस्कार की खबरें
    अफगानिस्तान में हमलों के बाद बड़ी संख्या में मृतकों का सामूहिक अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, भारी मशीनों की मदद से कब्रें खोदकर पीड़ितों को दफनाया गया। हालांकि मृतकों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

    संयुक्त राष्ट्र की कड़ी प्रतिक्रिया
    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCHR) ने इस घटना पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।

    संगठन ने कहा है कि हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय व मुआवजा मिलना चाहिए।

    ईद के मौके पर घोषित यह अस्थायी सीजफायर भले ही कुछ दिनों की राहत दे, लेकिन दोनों देशों के बीच गहराते अविश्वास और हालिया हमलों ने क्षेत्र में तनाव को गंभीर बना दिया है।

  • काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग

    काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग


    काबुल/इस्लामाबाद/जेनेवा।
    अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए भीषण हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले में 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 250 लोग घायल हुए हैं। यह हमला हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में हुआ सबसे घातक हवाई हमला माना जा रहा है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से तत्काल संघर्ष रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस हमले पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए।


    2000 बेड वाले अस्पताल पर हमला

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2000 बेड वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर सोमवार रात यह हमला हुआ। यह अफगानिस्तान के सबसे बड़े नशा मुक्ति केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती थे। हमले में अस्पताल की इमारत का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया और कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल लगातार शव और घायलों को निकाल रहे हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि हमले के बाद अस्पताल की कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और परिसर में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर शव और घायलों को निकाल रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। तालिबान प्रशासन ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताते हुए कड़ी निंदा की है।


    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह मंजर

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमले के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और चारों ओर मलबा फैल गया। सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पताल के मलबे के बीच भटकते नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और देर रात तक बचाव अभियान जारी रहा।


    संयुक्त राष्ट्र की सख्त टिप्पणी

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि काबुल के नशा मुक्ति केंद्र में हुआ यह विस्फोट बेहद दुखद है और इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र ने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है। युद्ध के नियमों के अनुसार किसी भी हमले में अंतर, अनुपात और सावधानी के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है, जबकि चिकित्सा संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाती है।


    अफगानिस्तान का कड़ा रुख

    इस बीच अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतिन काने ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि काबुल पर किए गए हमले का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

    अफगान सरकार ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि ऐसे हमले बिना जवाब के नहीं छोड़े जाएंगे। पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और सीमा पार झड़पों के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की खबरें भी सामने आई हैं।


    पाकिस्तान ने आरोपों को बताया निराधार

    दूसरी ओर पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी वायुसेना ने काबुल और नंगरहार में “आतंकी ढांचे और हथियार भंडार” को निशाना बनाते हुए सटीक कार्रवाई की। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हमले में गोला-बारूद के डिपो और आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया और किसी अस्पताल या नागरिक केंद्र को लक्ष्य नहीं बनाया गया।


    बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय चिंता

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच हालात “खुले संघर्ष” की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।

    ऐसी स्थिति में भारत समेत कई देशों ने भी इस हमले की निंदा करते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने की अपील की है। साथ ही वर्तमान में बने ऐसे हालात पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह टकराव जारी रहा तो पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • पाकिस्तान में गहराता ऊर्जा संकट: इस तारीख के बाद गैस आपूर्ति ठप होने की चेतावनी

    पाकिस्तान में गहराता ऊर्जा संकट: इस तारीख के बाद गैस आपूर्ति ठप होने की चेतावनी

    इस्‍लामाबाद। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण कतर से LNG की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। पाकिस्तान में गैस सप्लाई को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है, जिसके मुताबिक आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
    सरकारी सूत्रों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा भंडार और आपूर्ति व्यवस्था को देखते हुए निर्धारित तारीख के बाद गैस की उपलब्धता लगभग खत्म होने जैसी स्थिति बन सकती है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों तक पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
    पाकिस्तान में 14 अप्रैल के बाद लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) उपलब्ध नहीं रहेगी। सीनेट की पेट्रोलियम कमिटी को अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि कतर से पाकिस्तान का LNG आयात 2 मार्च से पूरी तरह निलंबित है। कतर अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक है।
    मार्च महीने के लिए निर्धारित 8 LNG कार्गो में से केवल 2 ही पाकिस्तान पहुंचे हैं। वहीं, अप्रैल में आने वाले 6 कार्गो के भी देश में पहुंचने की कोई संभावना नहीं है। युद्ध के कारण प्रमुख संकरे समुद्री जलमार्गों से शिपिंग लगभग रुक गई है, जिससे दुनिया भर की लगभग 20% तेल और LNG आपूर्ति बाधित हुई है। इसके चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 2022 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
    महंगी बिजली और गैस की किल्लत
    इस कमी को पूरा करने के लिए पाकिस्तान अजरबैजान से स्पॉट मार्केट से LNG खरीदने पर विचार कर रहा है। लेकिन यह सौदा 24 डॉलर प्रति यूनिट पड़ेगा, जबकि कतर के साथ कॉन्ट्रैक्ट के तहत यह केवल 9 डॉलर प्रति यूनिट था। इससे बिजली उत्पादन काफी महंगा हो जाएगा। बिजली क्षेत्र को गैस की आपूर्ति 300 mmcfd से घटाकर 130 mmcfd कर दी गई है। इसके अलावा, सुई सदर्न गैस कंपनी (SSGC) ने एक उर्वरक संयंत्र की गैस आपूर्ति में 50% की कटौती की है।
    पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के बढ़ने के कारण पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) के अनुसार, 7 मार्च से अब तक डीजल की कीमतों में लगभग 100% और पेट्रोल की कीमतों में लगभग 70% की वृद्धि हुई है। वैश्विक स्तर पर हाई-स्पीड डीजल 88 डॉलर से बढ़कर 187 डॉलर प्रति बैरल और पेट्रोल 74 डॉलर से बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
    पाकिस्तान के पास मौजूदा ईंधन भंडार

    पेट्रोलियम सचिव मिर्जा नसीर-उद-दीन अहमद ने समिति को देश के मौजूदा स्टॉक की जानकारी दी:

    पेट्रोल: 27 दिनों का भंडार

    डीजल: 21 दिनों का भंडार

    कच्चा तेल: 11 दिनों का भंडार

    LPG: 9 दिनों का भंडार

    JP-1 (विमानन ईंधन): 14 दिनों का भंडार

    पाकिस्तानी सीनेटर मंजूर अहमद और सादिया अब्बासी ने सवाल उठाया कि जब देश के पास 28 दिनों तक का रिजर्व स्टॉक था, तो सरकार ने कीमतें क्यों बढ़ाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुराने स्टॉक पर दाम बढ़ाकर मुनाफा कमा रही है। पेट्रोलियम सचिव ने स्पष्ट किया कि कीमतों में यह बढ़ोतरी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि जमाखोरी को हतोत्साहित करने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
    सरकार के आगामी कदम और भारत की स्थिति

    मोटरसाइकिल और रिक्शा चालकों के लिए पाक सरकार एक राहत पैकेज पर काम कर रही है। आपूर्ति के दबाव को कम करने के लिए शहबाज सरकार ने अस्थायी रूप से यूरो-5 (Euro-5) मानक से कम गुणवत्ता वाले तेल के आयात की अनुमति दे दी है। अधिकारियों ने समिति को यह भी बताया कि इस क्षेत्रीय संकट से भारत भी अछूता नहीं है; वहां भी पेट्रोल के लगभग 60% आयात पर असर पड़ा है।

  • सलमान आगा ने रन आउट विवाद पर खेल भावना का पाठ पढ़ाया

    सलमान आगा ने रन आउट विवाद पर खेल भावना का पाठ पढ़ाया



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज सलमान आगा ने बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे वनडे में अपने विवादित रन आउट के बाद खेल भावना (sportsman spirit) पर जोर देते हुए नया संदेश दिया। पारी के 39वें ओवर में बांग्लादेश के कप्तान मेहदी हसन मिराज गेंदबाजी कर रहे थे। चौथी गेंद पर मोहम्मद रिजवान का शॉट सीधे नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े सलमान आगा की ओर गया। मिराज ने गेंद उठाई और देखा कि सलमान अभी क्रीज के बाहर थे, इसके बाद उन्होंने तुरंत रन आउट के लिए अंपायर से अपील की। थर्ड अंपायर ने नियम के तहत उन्हें आउट करार दिया।

    घटना के बाद सलमान आगा ने कहा कि वे समझते हैं कि मिराज ने नियम के दायरे में ही सही काम किया। लेकिन अगर उन्हें मौका मिलता, तो वे नियम से ऊपर खेल भावना को चुनते। उन्होंने कहा, “यह बस उस पल की गरमा-गरमी थी। मैं हमेशा नियम का पालन करता हूं, लेकिन खेल में स्थिति चाहे जैसी भी हो, खेल भावना सबसे ऊपर होनी चाहिए।”

    सलमान ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा, “जो मेहदी ने किया, वह नियम के दायरे में सही है। अगर उन्हें लगता है कि यह सही है, तो यह सही है। लेकिन मेरे नजरिए से, मैं चीजें अलग तरह से करता। मैं हमेशा खेल भावना को प्राथमिकता दूंगा।” उनके इस बयान ने साबित किया कि क्रिकेट में सिर्फ नियमों का पालन ही नहीं बल्कि खेल भावना की भी उतनी ही अहमियत है।

    सलमान आगा का यह दृष्टिकोण खिलाड़ियों और फैन्स के लिए सीखने योग्य है। उन्होंने यह संदेश दिया कि खेल में जीत और हार महत्वपूर्ण है, लेकिन खेल भावना और ईमानदारी सबसे ऊपर होनी चाहिए। फैन्स ने उनके इस बयान को सराहा और इसे क्रिकेट के लिए सकारात्मक संदेश माना। यह घटना याद दिलाती है कि नियम के भीतर खेलते हुए भी खिलाड़ी खेल की आत्मा को हमेशा कायम रख सकते हैं।

    इस तरह सलमान आगा ने अपने रन आउट विवाद को अवसर में बदलते हुए खेल भावना की मिसाल पेश की। उनके बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्रिकेट में सम्मान और ईमानदारी हमेशा जीत से ऊपर हैं।

  • ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान पर, स्कूल-कॉलेज बंद

    ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान पर, स्कूल-कॉलेज बंद

    लाहौर। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की है कि देश में स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद रहेंगे, जबकि सरकारी दफ्तर अब सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे।

    समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा है कि ईंधन की खपत कम करने के लिए बैंकों को छोड़कर अधिकतर सरकारी कार्यालय सीमित दिनों में काम करेंगे। साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों की कक्षाएं फिलहाल ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी।

    सरकारी दफ्तरों में आधा स्टाफ करेगा वर्क फ्रॉम होम

    सरकार के फैसले के अनुसार जरूरी सेवाओं को छोड़कर कई सरकारी विभागों में 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे। इसके अलावा अगले दो महीनों के दौरान सरकारी विभागों को मिलने वाले ईंधन में भी 50 फीसदी कटौती करने का फैसला किया गया है।
    क्यों लेना पड़ा यह फैसला
    पाकिस्तान में ईंधन संकट का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता युद्ध और Strait of Hormuz में बढ़ा तनाव बताया जा रहा है।

    इस समुद्री मार्ग से पाकिस्तान को तेल की बड़ी आपूर्ति मिलती है। क्षेत्रीय हालात बिगड़ने के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में तेज उछाल आया है।

    सरकार ने शनिवार देर रात पेट्रोल की कीमतों में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसे देश के इतिहास में सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik, उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री Ishaq Dar और वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb भी मौजूद थे।

    डीज़ल भी हुआ महंगा
    सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि हाई-स्पीड डीज़ल की कीमत में भी करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

    डीज़ल की कीमत 280.86 पाकिस्तानी रुपये से बढ़ाकर 335.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

    मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा कि पड़ोसी क्षेत्र में शुरू हुआ संघर्ष अब पूरे इलाके को प्रभावित कर रहा है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह संकट कब तक जारी रहेगा।

    सरकार का मानना है कि अगर ईंधन की खपत पर अभी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है, इसलिए अस्थायी तौर पर ये कड़े कदम उठाए गए हैं।

  • आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब सऊदी अरब से मांगी दीर्घकालिक आर्थिक मदद

    आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब सऊदी अरब से मांगी दीर्घकालिक आर्थिक मदद


    इस्लामाबाद।
    आर्थिक चुनौतियों (Economic Challenges) से जूझ रहे कंगाल पाकिस्तान (Poor Pakistan) ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) से दीर्घकालिक आर्थिक सहायता की मांग की है। सोमवार को सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद ने रियाद से कई वित्तीय सहायताओं का अनुरोध किया है, जिनमें 5 अरब डॉलर की मौजूदा अल्पकालिक जमा राशि को 10 साल की दीर्घकालिक सुविधा में बदलने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने सऊदी अरब से स्थगित भुगतान पर मिलने वाली तेल सुविधा को 1.2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करने और उसकी अवधि बढ़ाने का भी अनुरोध किया है। इसके अलावा पाकिस्तान ने प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजे गए लगभग 10 अरब डॉलर के धन के प्रतिभूतिकरण (सिक्योरिटाइजेशन) का प्रस्ताव भी रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष सरकारी सूत्रों ने बताया कि अमेरिका और इजरायल के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ जारी युद्ध से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव के कारण पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं।


    आईएमएफ के साथ भी चल रही बातचीत

    दूसरी ओर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ 7 अरब डॉलर की विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) कार्यक्रम की तीसरी समीक्षा पूरी करने के लिए बातचीत कर रहा है। पाकिस्तान और सऊदी अरब पहले से ही व्यापक आर्थिक सहयोग पैकेज पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन हालिया वैश्विक तनावों ने इन वार्ताओं को और तेज कर दिया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में जमा 5 अरब डॉलर की सऊदी राशि को दीर्घकालिक ऋण में बदलने का अनुरोध किया है। इस प्रस्ताव के तहत मौजूदा अल्पकालिक जमा को अनुकूल दरों पर 10 साल की ऋण सुविधा में बदला जा सकता है। दूसरे प्रस्ताव में स्थगित भुगतान के आधार पर मिलने वाली तेल सुविधा को बढ़ाने की मांग की गई है। इसके तहत मौजूदा 1.2 अरब डॉलर की व्यवस्था को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक करने और भुगतान अवधि को एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने का सुझाव दिया गया है।


    प्रवासी धन और अंतरराष्ट्रीय फंड जुटाने की योजना

    तीसरे प्रस्ताव के तहत पाकिस्तान ने प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजी गई धनराशि के प्रतिभूतिकरण की योजना रखी है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और महंगे विदेशी ऋण पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। चौथे प्रस्ताव में सऊदी अरब से पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय सुकुक (इस्लामिक बॉन्ड) जारी करने के प्रयासों के लिए गारंटी देने पर विचार करने को कहा गया है, जिससे पाकिस्तान को कम ब्याज दरों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूंजी जुटाने में मदद मिल सके।


    व्यापार और निवेश से जुड़े प्रस्ताव

    पाकिस्तान ने सऊदी अरब से एक्सिम ऋण लाइन उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। इसके अलावा इस्लामाबाद ने आयात से जुड़े लेनदेन के लिए बैंक गारंटी की अनिवार्यता को समाप्त करने पर भी विचार करने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के सार्वजनिक निवेश कोष (PIF) से देश में संभावित निवेश के अवसर तलाशने का भी आग्रह किया है। साथ ही आईएमएफ कार्यक्रम के अनुरूप कर सुधारों और प्राथमिक अधिशेष लक्ष्यों में संभावित समायोजन के लिए भी समर्थन मांगा गया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से किए गए इन आठ प्रमुख अनुरोधों पर सऊदी अरब की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। अखबार ने बताया कि उसने इस संबंध में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान से भी संपर्क किया, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली हैं।

  • अफगान-पाक संघर्ष: तालिबान का दावा- 5 दिन में मारे 150 PAK सैनिक, 40 पोस्ट पर किया कब्जा

    अफगान-पाक संघर्ष: तालिबान का दावा- 5 दिन में मारे 150 PAK सैनिक, 40 पोस्ट पर किया कब्जा


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दुर्गम डूरंड लाइन पर चल रहा तनाव अब खुले सशस्त्र संघर्ष में बदल चुका है। अफगान सीमा बलों के प्रवक्ता अबीदुल्लाह उकाब ने बताया कि बीते पांच दिनों में अफगान-तालिबान डिफेंस फोर्सेज ने पाकिस्तान की सेना को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार इस लड़ाई में अब तक लगभग 150 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, करीब 200 घायल हुए हैं और पाकिस्तान के 40 पोस्ट तालिबान-अफगान लड़ाकों के कब्जे में आ गए हैं।
    अफगान-तालिबान का दावा
    अफगान सीमा बलों के प्रवक्ता अबीदुल्लाह उकाब ने मंगलवार को बताया कि अफगान डिफेंस मिनिस्टर के हवाले से कहा गया है कि तालिबान- अफगान फोर्सेज पाकिस्तान की हरकतों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना की कई पोस्टों को बम के जरिए नष्ट किया गया।

    ड्रोन भी हुए तबाह
    अफगान फोर्स ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान द्वारा भेजे गए कई ड्रोन को नष्ट कर दिया गया। इनमें छोटे इंटेलिजेंस ड्रोन भी शामिल हैं, जो अफगान फोर्सेज की गतिविधियों की जासूसी के लिए भेजे गए थे।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
    अफगान-तालिबान ने कुछ वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें उनके लड़ाके पाकिस्तानी पोस्ट पर कब्जा करते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में अफगान लड़ाके हथियार, वायरलेस सेट और अन्य सैन्य सामग्री लूटते नजर आए। कई पाकिस्तानी सैनिक हाथ उठाकर भागते हुए दिखे, और उनके उपकरण अफगान कब्जे में चले गए। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच प्रचार युद्ध को और बढ़ा रहे हैं।

    पाकिस्तानी पक्ष का जवाब
    अफगान दावों पर पाकिस्तान की सेना या सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगान पक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी कार्रवाई में अफगान तालिबान के सैकड़ों लड़ाके मारे गए हैं और कई ठिकानों पर पाकिस्तान ने कब्जा किया है। वर्तमान में सीमा पर तनाव चरम पर है और अफगान फोर्स अपनी जीत का दावा मजबूत कर रही है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है। इस संघर्ष ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और हजारों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं।