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  • PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता

    PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ईरान (Iran) के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन (President Dr. Masoud Pezeshkian) से मंगलवार को टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया (West Asia) की हालिया घटनाओं और आगे की दिशा की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। पीएम मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए भारत की स्थिर नीति को दोहराया कि क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। इस दौरान समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्य की सुरक्षा को बनाए रखने के महत्व को भी सामने रखा गया।

    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात हुई। बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार कोशिशों से इस इलाके में स्थायी शांति आएगी। भारत और दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही की आजादी के महत्व को फिर से दोहराया।’ इससे पहले, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह अगले सप्ताह आयोजित होने वाला है। खबरों के मुताबिक, सरकार भारत के प्रतिनिधि के तौर पर बिहार के राज्यपाल अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा को इन समारोह में भेजने की योजना बना रही है। अंतिम संस्कार की रस्में 5 से 9 जुलाई तक होंगी।


    भारत-ईरान के रिश्ते में उतार-चढ़ाव

    भारत और ईरान के मौजूदा संबंध काफी जटिल और रणनीतिक महत्व वाले रहे हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और ऐतिहासिक गहराई है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2024 में भारत ने चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों के लिए ऑपरेट करने का समझौता किया, जिसमें 120 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल था। 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने पोर्ट पर अपनी गतिविधियां कम कीं और वादा किया राशि का भुगतान पूरा कर लिया।

    होर्मुज स्ट्रेट संकट के दौरान भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाया, जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर बातचीत हुई। ईरान के सुप्रीम लीडर की मृत्यु पर भारत ने शोक व्यक्त किया और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग जारी रखा। ऊर्जा आयात लगभग बंद हो गया है, लेकिन कनेक्टिविटी, अफगानिस्तान और मध्य एशिया पहुंच के लिए चाबहार अभी भी अहम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित हैं। भारत ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी मानता है, जबकि ईरान भारत को बड़े बाजार और निवेशक के रूप में देखता है।

  • PM मोदी की अपील का असर…. लगातार गिरता जा रहा सोने-चांदी के दाम… जानें आज के रेट

    PM मोदी की अपील का असर…. लगातार गिरता जा रहा सोने-चांदी के दाम… जानें आज के रेट


    नई दिल्ली।
    सोने की कीमत (Gold Rate) बीते लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है. जो सोना कभी महंगाई के नए रिकॉर्ड (New records inflation) बना रहा था, आज वो गिरता ही जा रहा है. 29 जून को फिर से सोने में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. सोमवार को ग्लोबल मार्केट (Global Market) में कॉमेक्स गोल्ड (COMEX Gold) की कीमत में 27 डॉलर से अधिक की गिरावट लौटी है. इंटरनेशनल मार्केट में कॉमेक्स (COMEX) गोल्ड सोमवार, 29 जून को 27.75 डॉलर की गिरावट के साथ 4,059.26 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है।

    सिर्फ अंतरर्राष्ट्रीय बाजार ही नहीं, घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. 29 जनवरी 2026 को 1.79 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के अपने ऑल टाइम हाई पर बिकने वाला सोना आज 1.36 लाख रुपये पर गिर चुका है. अगर चांदी की बात करें, तो इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 29 जनवरी को 1 किलो चांदी 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच चुकी थी. आज वो गिरते-गिरते 2.15 लाख पर आ चुकी है. यानी चांदी की कीमत अपने ऑल टाइम हाई से 1.69 लाख रुपये तक सस्ती हो चुकी है. मई से जून के बीच सोने की कीमत में 13 हजार से अधिक की गिरावट आई है. वहीं चांदी 46000 रुपये तक गिर गई।


    24 कैरेट से लेकर 18 कैरेट तक सोने की कीमत

    24 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,39,461 रुपये प्रति 10 ग्राम
    22 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,28,260 रुपये प्रति 10 ग्राम.
    18 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,05,017 रुपये प्रति 10 ग्राम.

    PM ने सोना-चांदी नहीं खरीदने की अपील की.
    10 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने देशवासियों से अपील की कि वो अगले 1 साल तक सोना ना खरीदें. दरअसर भारत भारी मात्रा में सोने का आयात करता है. सोने के आयात पर भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है. जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आता है. कच्चे तेल की खरीद की वजह से पहले से ही भारतीय का फॉरैक्स रिजर्व प्रेशर में है. ऐसे में बढ़ते पश्चिम एशिया के तनाव, तेल की कच्ची कीमत, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री ने सोना ना खरीदने की अपील की. विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोना ना खरीदने की पीएम मोदी की अपील काम आ गई. जिसके बाद से सोने की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है।


    क्यों लगातार गिर रहा है सोना?

    पीएम मोदी की अपील के साथ-साथ सरकार ने सोने के आयात पर शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया. सोने का आयात कम करने के लिए कई जरूरी कदम उठाए गए. जिसका असर सोने की मांग पर दिखा. मांग में कमी के अलावा सोने में मुनाफावसूली , पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बातचीत की उम्मीद, फेरडल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका, डॉलर इंडेक्स में तेजी से सोने पर दबाव बना रखा है।

  • ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा विजन BRICS 2026 की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को नई दिशा देगा भारत पीएम मोदी का ऐलान

    ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा विजन BRICS 2026 की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को नई दिशा देगा भारत पीएम मोदी का ऐलान


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के दौरान भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करना शामिल होगा। उनका कहना है कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में केवल घरेलू नीतियां ही पर्याप्त नहीं हैं बल्कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रयासों के माध्यम से ही सुरक्षित विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है। भारत इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में ब्रिक्स मंच के जरिए विकासशील देशों की आवाज को और अधिक मजबूती देने का प्रयास करेगा।

    प्रधानमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसी वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना है जो सभी देशों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए और ऊर्जा सुरक्षा के साथ आर्थिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करे। उनका मानना है कि ग्लोबल साउथ के देशों के सामने ऊर्जा उपलब्धता स्वच्छ तकनीक और वित्तीय संसाधनों जैसी कई चुनौतियां हैं जिनका समाधान सामूहिक सहयोग से ही संभव है।

    मनोहर लाल खट्टर ने भी अपने विचारों में कहा कि दुनिया का ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को नई तकनीकों नवाचार और मजबूत साझेदारी की सबसे अधिक आवश्यकता है। भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान इसी दिशा में ठोस पहल करेगा ताकि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति मिले और सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग तथा निवेश को बढ़ावा मिल सके।

    उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। देश ने गैर जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता में तेजी से वृद्धि की है और राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले ही कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा नीति और हरित विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    भारत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन कोयला गैसीकरण इलेक्ट्रिक मोबिलिटी आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क और डिजिटल तकनीकों पर लगातार निवेश कर रहा है। स्मार्ट मीटर और इंडिया एनर्जी स्टैक जैसी पहल बिजली क्षेत्र को अधिक पारदर्शी सक्षम और आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकार का मानना है कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था डिजिटल तकनीक और स्वच्छ संसाधनों के बेहतर समन्वय पर आधारित होगी।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि ब्रिक्स देशों की अलग अलग क्षमताएं एक दूसरे की ताकत बन सकती हैं। यदि सदस्य देश मिलकर अनुसंधान तकनीक निवेश और ऊर्जा अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हैं तो न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान निकाला जा सकेगा। भारत इसी साझा सोच को आगे बढ़ाते हुए ब्रिक्स 2026 के दौरान ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा।

  • भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से प्रभावित अमेरिका, मार्को रुबियो बोले- पीएम मोदी के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर देश

    भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से प्रभावित अमेरिका, मार्को रुबियो बोले- पीएम मोदी के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर देश


    नई दिल्ली /वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती वैश्विक शक्तियों में शामिल हो चुका है और इस बदलाव के पीछे पीएम मोदी का नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन भारत को अमेरिका के सबसे करीबी और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में गिनता है तथा दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में रुबियो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक विकास की नई गति हासिल की है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। उनके अनुसार आज वैश्विक स्तर पर होने वाले बड़े फैसलों में भारत की राय को गंभीरता से सुना और महत्व दिया जाता है। यह बदलाव केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि कूटनीति सुरक्षा तकनीक और वैश्विक रणनीति के स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को केवल एक सहयोगी देश नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच विश्वास और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती दी है। उनके मुताबिक दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल भविष्य में भी साझेदारी को नई दिशा देगा।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और यही समानता दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जबकि अमेरिका सबसे पुराना लोकतंत्र है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं और कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम किया जा रहा है।

    रुबियो ने बताया कि दोनों देश अर्थव्यवस्था आपूर्ति श्रृंखला महत्वपूर्ण खनिज ऊर्जा सुरक्षा रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर लगातार साझेदारी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में साझा हित मौजूद हैं और दोनों सरकारें मिलकर भविष्य की चुनौतियों का समाधान तलाश रही हैं।

    उन्होंने भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय की भी सराहना करते हुए कहा कि यह समुदाय दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार भारतीय अमेरिकी समाज ने अमेरिका के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक तथा आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है।

    रुबियो ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि रक्षा व्यापार अत्याधुनिक तकनीक ऊर्जा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीति जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। यही वजह है कि वाशिंगटन भारत को 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार मानता है और दोनों देशों के संबंध भविष्य में वैश्विक स्थिरता तथा आर्थिक विकास के लिए अहम भूमिका निभाएंगे।

  • शर्मिष्ठा मुखर्जी का खुलासा, प्रणब मुखर्जी ने 2014 के जनादेश को बताया था भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़

    शर्मिष्ठा मुखर्जी का खुलासा, प्रणब मुखर्जी ने 2014 के जनादेश को बताया था भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़


    नई दिल्ली । पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने एक लेख में अपने दिवंगत पिता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रसंग साझा करते हुए दावा किया है कि प्रणब मुखर्जी का मानना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जनता से प्रत्यक्ष जनादेश प्राप्त हुआ। उनके अनुसार वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था जिसने चुनावी राजनीति की दिशा बदल दी।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान प्रणब मुखर्जी ने मोदी से चुनाव परिणाम का विश्लेषण पूछा। मोदी ने कहा कि लगभग तीन दशकों बाद किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है। इस पर प्रणब मुखर्जी ने उनसे पूछा कि इसके अलावा और क्या विशेष बात रही। जब मोदी ने कोई उत्तर नहीं दिया तो उन्होंने स्वयं कहा कि यह पहला अवसर था जब देश की जनता ने औपचारिक रूप से घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में किसी नेता को स्पष्ट जनादेश दिया।

    लेख में दावा किया गया है कि प्रणब मुखर्जी का मानना था कि इससे पहले देश के प्रधानमंत्री या तो चुनाव के बाद पार्टी द्वारा चुने जाते थे या फिर गठबंधन की परिस्थितियों में सर्वसम्मति से तय किए जाते थे। जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक किसी भी प्रधानमंत्री को चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में जनता से प्रत्यक्ष समर्थन नहीं मिला था। वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को पहले ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था और मतदाताओं ने उसी नेतृत्व को ध्यान में रखकर मतदान किया।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने यह भी लिखा कि उनके पिता का मानना था कि वर्ष 2014 का चुनाव भारतीय संसदीय लोकतंत्र में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत था जहां मतदाताओं ने लगभग राष्ट्रपति प्रणाली जैसी शैली में एक व्यक्ति के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने उल्लेख किया कि नरेंद्र मोदी उस समय राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे और पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

    लेख में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का भी उल्लेख किया गया है। शर्मिष्ठा ने लिखा कि डॉ. सिंह को कांग्रेस नेतृत्व ने प्रधानमंत्री चुना था जबकि पी. वी. नरसिम्हा राव और एच. डी. देवेगौड़ा भी प्रधानमंत्री बनने के समय संसद के सदस्य नहीं थे। उनके अनुसार वर्ष 2014 का जनादेश इन सभी उदाहरणों से अलग था क्योंकि उसमें मतदाताओं ने सीधे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सफलता के पीछे मजबूत संगठन, जमीनी स्तर पर निरंतर काम, विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच, रणनीतिक सुधार और प्रभावी नेतृत्व को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने लिखा कि इन सभी कारकों ने भाजपा को लगातार चुनाव जीतने वाली राजनीतिक ताकत बना दिया है।

    उन्होंने अपने पश्चिम बंगाल के अनुभव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान कई मतदाता यह कहते थे कि वे भाजपा नहीं बल्कि मोदी को वोट दे रहे हैं। जब उन्हें याद दिलाया जाता था कि यह विधानसभा चुनाव है तो उनका जवाब होता था कि दोनों एक ही बात हैं। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत प्रभाव पार्टी की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

    लेख के अंत में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजादी के बाद भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि लोकतंत्र में उनकी नीतियों पर मतभेद स्वाभाविक हैं लेकिन उनके जनसंपर्क, नेतृत्व क्षमता और जनता के साथ मजबूत जुड़ाव को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनता से मिले इस व्यापक जनादेश के अनुरूप देश को आगे बढ़ाने की दिशा में यह नेतृत्व अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेगा।

  • वेनेजुएला में तबाही के बीच भारत का मानवीय संदेश, पीएम मोदी के समर्थन पर राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कहा धन्यवाद

    वेनेजुएला में तबाही के बीच भारत का मानवीय संदेश, पीएम मोदी के समर्थन पर राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कहा धन्यवाद


    नई दिल्ली । वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उत्पन्न मानवीय संकट के बीच भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वेनेजुएला की जनता के प्रति व्यक्त की गई संवेदनाओं और राहत कार्यों में हरसंभव सहयोग के आश्वासन का वहां की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने स्वागत किया है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस कठिन समय में भारत का समर्थन वेनेजुएला के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का जवाब देते हुए डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि वे भारत की ओर से व्यक्त संवेदनाओं और सहायता की इच्छा का दिल से स्वागत करती हैं। उन्होंने कहा कि भूकंप से प्रभावित लोगों के लिए भारत का सहयोग और समर्थन दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता और मानवीय संबंधों का प्रतीक है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने इस कठिन घड़ी में भारत के साथ खड़े होने के लिए विशेष धन्यवाद भी दिया।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप पर गहरा दुख व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से हुई जनहानि और व्यापक तबाही की खबर बेहद पीड़ादायक है। प्रधानमंत्री ने भारत के लोगों की ओर से उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के लोगों के साथ खड़ा है और हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है।

    वेनेजुएला सरकार लगातार राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रही है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के अनुसार अब तक कम से कम 32 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में इमारतों के ढहने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर बचाव कार्यों को तेज करने में जुटी हैं।

    इस बीच यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने चेतावनी दी है कि आपदा का वास्तविक असर आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकता है। एजेंसी ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में हालात का आकलन कर रही हैं। सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार स्रोतों से सामने आई तस्वीरों में काराकस सहित कई शहरों में इमारतों और घरों को भारी नुकसान पहुंचा दिखाई दे रहा है।

    जानकारी के अनुसार बुधवार शाम सबसे पहले 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। इसके महज एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। दोनों भूकंप समुद्र तटीय क्षेत्र मोरोन के पास और राजधानी काराकस से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में आए। भूकंप की गहराई केवल 10 किलोमीटर होने के कारण इसका प्रभाव अधिक विनाशकारी साबित हुआ।

    वेनेजुएला के गृह, न्याय और शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने बताया कि देश के कई हिस्सों में इमारतों और सार्वजनिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आफ्टरशॉक्स की आशंका को देखते हुए सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस आपदा पर नजर बनाए हुए है और कई देशों ने वेनेजुएला को सहायता देने की पेशकश की है।

  • ईरान के राष्ट्रपति का PM मोदी को न्योता, खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने का आमंत्रण

    ईरान के राष्ट्रपति का PM मोदी को न्योता, खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने का आमंत्रण


    नई दिल्ली ।ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के पूर्व सर्वोच्च नेता और धार्मिक प्रमुख Ali Khamenei के अंतिम संस्कार और राजकीय विदाई समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। खामेनेई की 28 फरवरी को हुए सैन्य हमले में मौत के बाद अब उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

    ईरान सरकार की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार अंतिम संस्कार और दफन समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान Tehran, Qom, Mashhad, Najaf और Karbala में कई धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम होंगे, जिनमें लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

    जानकारी के अनुसार 6 जुलाई को तेहरान में भव्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद 7 जुलाई को क़ोम में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होगा। अंतिम चरण में 9 जुलाई को मशहद स्थित Imam Reza Shrine में खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    भारत सरकार की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi स्वयं शामिल होंगे या भारत की ओर से कोई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा।

    तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व करने वाले खामेनेई को देश की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक व्यवस्था का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। उनके निधन के बाद यह अंतिम विदाई समारोह ईरान के हालिया इतिहास के सबसे बड़े राजकीय आयोजनों में से एक माना जा रहा है।

  • PM मोदी जुलाई में करेंगे 3 देशों की यात्रा ! 38 साल बाद इस देश जाएगा कोई भारतीय प्रधानमंत्री

    PM मोदी जुलाई में करेंगे 3 देशों की यात्रा ! 38 साल बाद इस देश जाएगा कोई भारतीय प्रधानमंत्री


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जुलाई के महीने में एक अहम विदेशी दौरे पर जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी 6 से 11 जुलाई के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (Indo-Pacific region) के तीन देशों- इंडोनेशिया (Indonesia), ऑस्ट्रेलिया (Australia) और न्यूजीलैंड (New Zealand) की यात्रा कर सकते हैं। तैयारियों से जुड़े लोगों का कहना है कि इस दौरे के दौरान राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं और भारतीय समुदाय से बातचीत मुख्य एजेंडे में शामिल होगी।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल प्रधानमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे का पूरा शेड्यूल अंतिम रूप से तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से अभी तक इस यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यात्रा की तारीखों, जगहों और कार्यक्रमों में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है।


    किस देश में क्या रहेगा पीएम मोदी का एजेंडा?

    पीएम मोदी के इस संभावित 3 देशों के दौरे को रणनीतिक और व्यापारिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। दौरे का फोकस कुछ इस तरह रह सकता है।

    इंडोनेशिया: अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी की मुलाकात इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से हो सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले 7 जून को नई दिल्ली में भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग की बैठक हुई थी। इसमें दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और आपसी संबंधों को लेकर समीक्षा की थी। पीएम मोदी की यह वार्ता इसी आधार पर आगे बढ़ सकती है।

    ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पीएम मोदी वहां के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की इस बातचीत का मुख्य फोकस व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कम्प्रेहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप), रक्षा और सुरक्षा सहयोग, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों), शिक्षा और व्यापार पर रहेगा।

    न्यूजीलैंड का ऐतिहासिक दौरा: इस यात्रा का सबसे खास हिस्सा न्यूजीलैंड का दौरा माना जा रहा है। यहां पीएम मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ वार्ता कर सकते हैं। यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि साल 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यात्रा के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूजीलैंड दौरा होगा।


    फ्रांस दौरे से लौटे हैं पीएम मोदी

    बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा संपन्न करने के बाद लौट आए हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया और विश्व के कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। प्रधानमंत्री मोदी 13 जून को भूमध्यसागरीय शहर नीस पहुंचे थे, जहां उन्होंने मैक्रों के साथ ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया और द्विपक्षीय बैठक भी की। इससे पहले मोदी ने स्लोवाकिया की “ऐतिहासिक” यात्रा पूरी की। मोदी स्लोवाकिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।

  • मोदी की विदेश यात्रा में भारतीय विरासत की झलक, स्लोवाकिया को मिले थेवा, हिमरू और डोकरा आर्ट गिफ्ट्स

    मोदी की विदेश यात्रा में भारतीय विरासत की झलक, स्लोवाकिया को मिले थेवा, हिमरू और डोकरा आर्ट गिफ्ट्स

    नई द‍िल्‍ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्रा एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक मंच पर बढ़ती सॉफ्ट पावर का उदाहरण बनकर सामने आई है फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद पीएम मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर स्लोवाकिया पहुंचे जहां उन्होंने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया स्लोवाकिया की आजादी के बाद यह पहला अवसर था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस देश का दौरा किया और इस यात्रा को ऐतिहासिक माना जा रहा है यहां प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया गया जो दोनों देशों के संबंधों की मजबूती का प्रतीक है

    इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के नेताओं और शीर्ष अधिकारियों को भारत की पारंपरिक धरोहर से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए जिनमें प्राचीन भारतीय चिकित्सा ज्ञान का प्रतिनिधित्व करने वाली सुश्रुत संहिता और चरक संहिता प्रमुख रूप से शामिल थीं सुश्रुत संहिता को सर्जरी के क्षेत्र में विश्व की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है जिसमें चिकित्सा विज्ञान और शल्य चिकित्सा की उन्नत तकनीकों का विस्तृत वर्णन मिलता है वहीं चरक संहिता आयुर्वेद का एक आधारभूत ग्रंथ है जो स्वास्थ्य रोग और मानव शरीर की संरचना को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाता है इन ग्रंथों के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया कि उसका ज्ञान केवल प्राचीन नहीं बल्कि आज भी वैश्विक स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रणाली के लिए प्रासंगिक है

    इसके अलावा पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को भारत की विविध हस्तशिल्प परंपराओं से जुड़े उपहार भी भेंट किए जिनमें प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध थेवा कला से बने कफलिंक शामिल थे थेवा कला रंगीन कांच पर सोने की महीन नक्काशी से बनाई जाती है और इसे राजस्थान की दुर्लभ और अनोखी शिल्प परंपरा माना जाता है यह कला न केवल सौंदर्य का प्रतीक है बल्कि भारतीय कारीगरों की बारीक कारीगरी और धैर्य को भी दर्शाती है

    साथ ही हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर भी भेंट किए गए जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद की पारंपरिक बुनाई कला का प्रतिनिधित्व करते हैं हिमरू कपड़ा अपनी हल्की चमक मुलायम बनावट और सुंदर पैटर्न के लिए जाना जाता है और इसे शाही संरक्षण में विकसित किया गया था

    पीतल का डोकरा एंटीलोप सेट भी इस सूची में शामिल था जो छत्तीसगढ़ ओडिशा झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी कारीगरों की प्राचीन धातु कला को दर्शाता है यह कला लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक से बनाई जाती है और हर मूर्ति अपने आप में अनोखी होती है इसके साथ ही पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को कश्मीर की प्रसिद्ध सिल्क कारपेट भी भेंट किया जो बारीक डिजाइन और महीनों से लेकर वर्षों तक चलने वाली कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है

    इन सभी उपहारों के माध्यम से भारत ने न केवल अपनी सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया बल्कि यह भी संदेश दिया कि भारतीय हस्तशिल्प और ज्ञान परंपरा वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान रखती है यह यात्रा केवल कूटनीतिक बैठकें या औपचारिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक संबंधों में उसकी बढ़ती भूमिका को भी मजबूती से सामने रखा

  • G7 समिट के दौरान जेलेस्की से मिले PM मोदी, बोले- भारत 'हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा

    G7 समिट के दौरान जेलेस्की से मिले PM मोदी, बोले- भारत 'हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा


    एवियन।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को फ्रांस (France) के एवियन (Evian) में G7 समिट (G7 Summit) के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy) से मुलाकात की. इस दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर से दोहराया कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा.

    PM मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, ‘एवियन में राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात हुई. हाल के समय में भारत और यूक्रेन के बीच काफी बातचीत और सहयोग बढ़ा है. यह हमारे सहयोग के अलग-अलग क्षेत्रों में भी दिखा. आज हमारी बातचीत हमारे सहयोग के अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा करने के बारे में थी.।

    उन्होंने आगे कहा, ‘हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि व्यापारिक संबंधों को युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस लाने की जरूरत है. साथ ही, यह भी दोहराया कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा और इंसानियत को सबसे ऊपर रखेगा। बैठक के बाद, वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि भारत और यूक्रेन के बीच ‘सहयोग की बड़ी संभावना’ है और वे पहले से ही संयुक्त प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

    जेलेंस्की के साथ PM मोदी की यह मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ हुई बैठक के ठीक बाद हुई।

    G7 में PM मोदी ने ट्रंप के सामने रखा नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा
    जेलेंस्की ने कहा, ‘आज हमने इस बारे में बात की कि कैसे इन प्रोजेक्ट्स को और मजबूत बनाया जाए और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाया जाए. अहम बात यह है कि प्रधानमंत्री यूक्रेन के साथ आपसी हित वाले संबंध विकसित करने में दिलचस्पी रखते हैं और मानते हैं कि यह साझेदारी हमारे लोगों को और मजबूत बना सकती है।

    उन्होंने X पर लिखा, ‘ऐसे कई अच्छे इंडस्ट्रियल और अन्य प्रोजेक्ट्स हैं जिन पर हम मिलकर काम कर सकते हैं. हमने तय किया कि हमारी टीमें सभी जरूरी बातों पर मिलकर काम करेंगी.’ प्रधानमंत्री मोदी और जेलेंस्की के बीच आखिरी बार सीधी बातचीत तब हुई थी, जब पिछले साल 30 अगस्त को उन्हें फोन किया था।