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  • PM मोदी के जन्मदिन के बहाने देश को मथने की तैयारी… BJP शुरू करेगी जनसंपर्क अभियान

    PM मोदी के जन्मदिन के बहाने देश को मथने की तैयारी… BJP शुरू करेगी जनसंपर्क अभियान


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिन के बहाने भाजपा (BJP) ने जनसंपर्क यात्राओं और एक महीने के सेवा संकल्प अभियान (Service Pledge Campaign) के तहत पूरे देश को मथने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और लोगों से सीधा संवाद करने की व्यापक तैयारी की है।

    योजना के तहत पीएम की जन्मभूमि वडनगर और कर्मभूमि वाराणसी से अलग-अलग यात्रा निकालने की है। इन यात्राओं से जुड़ी टीमें देश के अलग-अलग हिस्सों में बतौर लोकसेवक मोदी की उपलब्धियों की जानकारी देगी। इन यात्राओं से अछूते हिस्से में सेवा संकल्प अभियान के तहत रैलियां, रक्तदान, स्वास्थ्य जांच शिविर के जरिये लोगों से संपर्क साधा जाएगा। सेवा संकल्प अभियान का तानाबाना सोमवार देर रात तक पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, गृह मंत्री अमित शाह, महासचिव स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े समेत कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक में बुना गया।


    ये है यात्रा का खाका

    17 सितंबर से वडनगर और वाराणसी से शुरू हो रही यात्रा देश के विभिन्न हिस्से से गुजरते हुए 17 अक्तूबर को क्रमश: वाराणसी और वडनगर पहुंचेगी। दोनों यात्रा प्रतिदिन सौ किमी के सफर के साथ अलग-अलग तीन-तीन हजार किमी क्षेत्र को कवर करेगी। प्रतिदिन कम से कम चार कार्यक्रम करेगी।

  • मध्य एशिया से मॉस्को और बीजिंग तक भारत का कूटनीतिक मिशन: अगस्त में दुनिया के अहम देशों के बीच सक्रिय रही मोदी सरकार

    मध्य एशिया से मॉस्को और बीजिंग तक भारत का कूटनीतिक मिशन: अगस्त में दुनिया के अहम देशों के बीच सक्रिय रही मोदी सरकार

    नई दिल्ली । अगस्त 2026 भारतीय कूटनीति के लिए बेहद सक्रिय और महत्वपूर्ण महीना साबित हुआ। नई दिल्ली ने एक साथ मध्य एशिया रूस चीन श्रीलंका फिलिस्तीन और पाकिस्तान से जुड़े अलग अलग कूटनीतिक मोर्चों पर सक्रिय रहकर यह संदेश दिया कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी एक क्षेत्र या शक्ति तक सीमित रहने के बजाय बहुआयामी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य एशिया यात्रा से लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर की मॉस्को यात्रा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बीजिंग वार्ता तक अगस्त में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार सुर्खियों में रही।

    महीने के अंतिम दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा पर रहे। ताशकंद में उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ व्यापार निवेश रक्षा डिजिटल कनेक्टिविटी ऊर्जा और शिक्षा समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे जहां उन्होंने 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। मध्य एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा कनेक्टिविटी और रणनीतिक हितों के लिहाज से लगातार महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। एससीओ के मंच पर भारत ने सुरक्षा कनेक्टिविटी और अवसर के अपने विजन को आगे बढ़ाते हुए आतंकवाद अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

    अगस्त में भारत रूस संबंधों को भी नई मजबूती मिली। विदेश मंत्री एस जयशंकर 23 और 24 अगस्त को मॉस्को पहुंचे जहां उन्होंने भारत रूस अंतर सरकारी आयोग की बैठक की सह अध्यक्षता की। इस दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत में ऊर्जा उर्वरक परमाणु ऊर्जा हाई टेक्नोलॉजी और व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात ने भी दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत दिया। वैश्विक दबाव और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भारत ने साफ किया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर रूस के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाता रहेगा।

    भारत चीन संबंधों के मोर्चे पर भी अगस्त अहम रहा। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 25 अगस्त को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक में हिस्सा लिया। दोनों पक्षों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सीमा विवाद अब भी भारत चीन संबंधों का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है लेकिन लगातार संवाद यह संकेत देता है कि दोनों देश तनाव कम करने और संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

    श्रीलंका के साथ भारत की विकास साझेदारी भी अगस्त में चर्चा में रही। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने श्रीलंका का दौरा कर वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और भारत की सहायता से चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच व्यापार सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    वहीं भारत ने फिलिस्तीन के साथ मानवीय और विकास साझेदारी को नया आयाम दिया। वेस्ट बैंक में 200 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना से जुड़े समझौते हुए। इससे यह संकेत मिला कि भारत संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य और मानवीय विकास से जुड़े प्रयासों में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।

    अगस्त में भारत पाकिस्तान संबंधों में भी तनावपूर्ण कूटनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। दोनों देशों के उच्चायोगों के बाहर अस्थायी और अनधिकृत ढांचे हटाने को लेकर पारस्परिक कार्रवाई हुई जिसे भारत ने आनुपातिक प्रतिक्रिया बताया। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच जारी तनाव और कूटनीतिक सतर्कता की तस्वीर पेश करता है।

    पूरे अगस्त की कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर डालें तो भारत की विदेश नीति का स्पष्ट संदेश सामने आता है। नई दिल्ली एक साथ कई देशों और क्षेत्रों के साथ संवाद कर रही है और अपने आर्थिक सुरक्षा तथा रणनीतिक हितों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मध्य एशिया से रूस और चीन तक सक्रिय संपर्क और दक्षिण एशिया तथा पश्चिम एशिया में विकास साझेदारी भारत की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति को दर्शाती है जिसमें संवाद सहयोग और राष्ट्रीय हितों को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश

    SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश


    नई दिल्ली । बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का स्पष्ट और व्यापक विजन दुनिया के सामने रखा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने आतंकवाद वैश्विक सुरक्षा संवाद कूटनीति कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की सोच रखी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने संवाद और सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है और अब आने वाले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलने का समय आ गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख स्तंभों सिक्योरिटी कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी को फिर से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अब इन विचारों को केवल विजन तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक परिणामों में बदलना होगा और इसके लिए सबसे पहली जरूरत शांति और सुरक्षा की है। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई या जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है। आतंकवाद की फंडिंग भर्ती कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को खत्म किए बिना इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर किसी तरह के दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।

    प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को भी क्षेत्रीय सुरक्षा और युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग केवल अपराध नहीं बल्कि समाज और भविष्य के लिए बड़ा संकट है। सुरक्षा संबंधी खतरे संगठित अपराध सूचना सुरक्षा और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।

    वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने साबित किया है कि किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक नुकसान ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही खोजा जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने साझा विकास और कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए अवसर पैदा करते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कनेक्टिविटी पहल में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इसे एससीओ चार्टर की मूल भावना से भी जोड़ा।

    प्रधानमंत्री ने एससीओ की सबसे बड़ी पूंजी सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को बताया। उनके अनुसार महान सभ्यताओं संस्कृतियों और विचारों का यह संगठन तभी मजबूत होगा जब इसका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं के लिए नए अवसर खोलने उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार करने किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने और नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने को सफलता की वास्तविक कसौटी बताया। पीएम मोदी ने सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखकर लोगों द्वारा संचालित बनाने की जरूरत बताई। स्टार्टअप फोरम यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे भारतीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एससीओ के भविष्य को युवा शक्ति संवाद और जनसंपर्क से जोड़ने का संदेश दिया। बिश्केक के मंच से भारत ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता सुरक्षित शांतिपूर्ण और अधिक सहयोगपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने की होगी।

  • उज्बेकिस्तान दौरे पर PM मोदी, व्यापार-निवेश से लेकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर

    उज्बेकिस्तान दौरे पर PM मोदी, व्यापार-निवेश से लेकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर


    ताशकंद।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की उज्बेकिस्तान (Uzbekistan Visit) की दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों का जोर आपसी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ व्यापार एवं निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव (President Shavkat Mirziyoyev) के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के वीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी।

    इससे पहले शनिवार को ताशकंद (Tashkent ) पहुंचने पर पीएम मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ वार्ता के बाद द्विपक्षीय समझौतों के पैकेज पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना भी है। प्रधानमंत्री ताशकंद पहुंचने के बाद यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचकर आजादी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिसे देश की आजादी की 30वीं वर्षगांठ पर बनाया गया था। पीएम शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र भी गए।


    किर्गिस्तान दौरे पर पीएम मोदी के कार्यक्रमों में खास क्या?

    प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को 26वें एससीओ समिट में शामिल होने के लिए बिश्केक जाएंगे। यह एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है। इस साल की थीम है ‘एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ’। बिश्केक में होने वाले एससीओ लीडरशिप समिट के कार्यक्रमों में 31 अगस्त को वेलकम डिनर और अगले दिन समिट की मुख्य बैठक शामिल है। यहां प्रधानमंत्री मोदी भाषण भी देंगे। बिश्केक में समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं।


    उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात कब हुई थी?
    पीएम मोदी और मिर्जियोयेव की मुलाकात 2023 में दुबई में सीओपी28 सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद 2024 में कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। पिछली मुलाकात 2025 में चीन के तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान हुई थी।

    2026 की मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक संबंध हैं। इस दौरे के बाद द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में इंडोलॉजिस्ट (भारतीय संस्कृति के जानकार) और अन्य विद्वानों से भी बातचीत करेंगे।


    कनेक्टिविटी की बाधा दूर करेंगे भारत और उज्बेकिस्तान

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक उज्बेकिस्तान संसाधनों से समृद्ध देश है और भारत को अहम खनिजों की जरूरत है। ऐसे में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सप्लाई की सुदृढ़ व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है। राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक भारत और उज्बेकिस्तान एक-दूसरे के लिए स्वाभाविक बाजार हैं। हम निश्चित रूप से ज्यादा आयात कर सकते हैं। बहुत ज्यादा निर्यात भी कर सकते हैं। लेकिन कनेक्टिविटी (संपर्क) एक बड़ी बाधा रही है। इसलिए, व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कनेक्टिविटी की इस बाधा को कैसे दूर किया जाए, इस मुद्दे पर भी दोनों पक्ष चर्चा करेंगे।


    फार्मा, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे दोनों देश

    उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे का एजेंडा बहुत व्यापक है। 2015 में उनके पिछले द्विपक्षीय दौरे के बाद दोनों देशों का व्यापार 300% बढ़ा है। उज्बेकिस्तान में निवेश 700% से अधिक बढ़ा है। संस्कृति, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, स्वास्थ्य, पारंपरिक दवाओं, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात होगी। कई एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।


    पीएम मोदी से मिलने का उत्साह, कलाकारों और प्रवासियों में दिखी खुशी

    उज्बेकिस्तान के ताशकंद पहुंचे पीएम मोदी के स्वागत में बच्चों, युवतियों और युवाओं की एक टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। कार्यक्रम के दौरान एक छोटे बच्चे को पीएम मोदी से मिलने के लिए खास तौर पर उत्साहित देखा गया। प्रस्तुति के बाद स्थानीय लोगों को इस जेस्चर की सराहना करते देखा जा सकता है।


    ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता से अभिभूत: पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने ताशकंद के अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा भी किया। उन्होंने लिखा कि वह ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता से अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रवासी समुदाय भारत और उज्बेकिस्तान के बीच एक जीवंत सेतु की तरह है, जो दोनों देशों के बीच मित्रता के संबंधों को लगातार मजबूत बना रहा है। स्वागत कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय की ओर से प्रस्तुत कथक और अंदिजान पोल्का नृत्य देखा। उज्बेकिस्तान के छोटे बच्चों ने प्रसिद्ध भारतीय गीत उड़े जब जब जुल्फें तेरी पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम ने तबले और पारंपरिक उज्बेक वाद्यों (दोइरा और चांग) की मनमोहक जुगलबंदी का भी आनंद लिया।


    राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की योजना

    विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी ब्यौरे के मुताबिक ताशकंद दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। दोनों के बीच व्यापार और निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। दोनों देश संबंधों की समीक्षा के अलावा भविष्य की कार्ययोजना भी तय करेंगे। जनता के बीच जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने के मकसद से समुदाय के बीच संबंधों की गर्मजोशी बनाए रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।

  • 5 दशकों तक राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे ए. बालकृष्णन का निधन, PM मोदी बोले पूर्वोत्तर के विकास में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा

    5 दशकों तक राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे ए. बालकृष्णन का निधन, PM मोदी बोले पूर्वोत्तर के विकास में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा


    नई दिल्ली। विवेकानंद शिला स्मारक और विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष रहे ए. बालकृष्णन के निधन से देशभर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में उनके लंबे योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ए. बालकृष्णन ने अपने जीवन के पांच दशकों से अधिक समय स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने विवेकानंद केंद्र के शुरुआती जीवनव्रतियों में शामिल होकर देश के अलग अलग हिस्सों में लगातार काम किया और विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ए. बालकृष्णन के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की। पीएम मोदी ने कहा कि विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष के रूप में सेवा देने वाले ए. बालकृष्णन के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में शिक्षा सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने विवेकानंद केंद्र परिवार उनके कार्यकर्ताओं और बालकृष्णन से जुड़े सभी प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

    ए. बालकृष्णन का जीवन स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज तक पहुंचाने और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। विवेकानंद केंद्र से जुड़े उनके कार्यकाल में शिक्षा सामाजिक गतिविधियों और संगठन निर्माण को विशेष महत्व दिया गया। पूर्वोत्तर भारत में उनकी भूमिका को खास तौर पर याद किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े प्रयासों में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि उनके निधन पर देश के अलग अलग हिस्सों से नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि दी।

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ए. बालकृष्णन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी निस्वार्थ सेवा और खासकर अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को वहां के लोग और पूरा देश लंबे समय तक याद रखेगा। रिजिजू ने उन्हें सच्चा कर्मयोगी बताते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा भावना का प्रतीक था। उन्होंने उनके परिवार और करीबियों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी बालकृष्णन के निधन को अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन का ध्येय बनाकर बालकृष्णन ने पांच दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रकार्य समाज जागरण शिक्षा और संगठन निर्माण के लिए खुद को समर्पित रखा। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में बालकृष्णन के योगदान को राष्ट्रसेवा की प्रेरक परंपरा बताया और उनके लिए श्रद्धांजलि अर्पित की।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी ए. बालकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सच्चा कर्मयोगी और जीवनव्रती कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि बालकृष्णन ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। कन्याकुमारी से लेकर असम और पूर्वोत्तर भारत तक विवेकानंद केंद्र के काम को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी। ए. बालकृष्णन का निधन समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में एक ऐसी कमी छोड़ गया है जिसे भरना आसान नहीं होगा। उनके जीवन और कार्यों को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित सेवा की लंबी यात्रा के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

  • पुतिन ने PM मोदी की जमकर की तारीफ, भारतीय किसानों के लिए रूस देगा पर्याप्त मात्रा में उर्वरक

    पुतिन ने PM मोदी की जमकर की तारीफ, भारतीय किसानों के लिए रूस देगा पर्याप्त मात्रा में उर्वरक

    नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के रिश्तों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। सोमवार को मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में पीएम मोदी की व्यक्तिगत भूमिका अहम रही है। उन्होंने जयशंकर से प्रधानमंत्री मोदी तक अपना गर्मजोशी भरा अभिवादन पहुंचाने को भी कहा।

    मुलाकात के दौरान पुतिन ने भारत के कृषि क्षेत्र को लेकर भी अहम भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि रूस भारत को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक यानी खाद उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। इससे भारतीय किसानों के लिए खाद की उपलब्धता को लेकर राहत की उम्मीद बढ़ी है।

    भारत-रूस व्यापार में फिर दिख रही तेजी

    पुतिन ने कहा कि 2025 में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कुछ गिरावट आई थी, लेकिन अब इसमें सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने व्यापारिक रिश्तों में दोबारा तेजी आने के पीछे कई वजहों का जिक्र किया और प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत ध्यान को खास तौर पर रेखांकित किया।

    रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पीएम मोदी भारत-रूस संबंधों के विकास में व्यक्तिगत रुचि लेते हैं और यही दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद

    पुतिन ने जयशंकर के सामने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों नेताओं की मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) से जुड़े कार्यक्रम के दौरान हो सकती है। इसके अलावा कार्यक्रम और समय-सारिणी के अनुसार साल के अंत में भी दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावना जताई गई।

    भारतीय किसानों के लिए रूस का बड़ा भरोसा

    बैठक में उर्वरक आपूर्ति का मुद्दा भी अहम रहा। पुतिन ने कहा कि रूस भारत की कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है।

    भारत के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है, क्योंकि उर्वरकों की उपलब्धता सीधे खेती की लागत और उत्पादन से जुड़ी है। खासकर बुवाई के मौसम में खाद की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए बेहद अहम होती है।

    सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है सहयोग

    पुतिन ने भारत और रूस के बीच सहयोग को केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं बताया। दोनों देश परमाणु ऊर्जा, हाईटेक, रक्षा और रणनीतिक तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।

    भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है। अब दोनों देश व्यापार और आर्थिक सहयोग को भी नए क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

    मोदी की तारीफ का क्या है मतलब?

    जयशंकर के साथ मुलाकात के दौरान पुतिन की ओर से पीएम मोदी की व्यक्तिगत भूमिका का उल्लेख ऐसे समय हुआ है, जब भारत और रूस अपने पारंपरिक रणनीतिक रिश्तों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं।

    ऐसे में एक तरफ पुतिन का मोदी की नेतृत्वकारी भूमिका की तारीफ करना और दूसरी तरफ भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा देना, दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

  • 'सवाल पूछो तो नक्सली…': पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर प्रकाश राज का तीखा पलटवार

    'सवाल पूछो तो नक्सली…': पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर प्रकाश राज का तीखा पलटवार


    नई दिल्ली। अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार से सवाल पूछने और असहमति जताने वालों को नक्सली बताया जा रहा है। प्रकाश राज ने 16 अगस्त की शाम X पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण और सरकार की नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

    ‘सवाल करने वालों को नया नाम दे दिया’
    प्रकाश राज ने वीडियो में कहा कि लंबे समय से सरकार से सवाल करने वालों को ‘अर्बन नक्सल’, ‘देशविरोधी’ और दूसरे नामों से संबोधित किया जाता रहा है। अब उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ का नाम दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि सवाल पूछना और असहमति जताना किसी को नक्सली नहीं बना देता।

    सरकारी स्कूलों की बदहाली का मुद्दा उठाया
    अभिनेता ने अपने वीडियो में सरकारी स्कूलों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग गांवों के सरकारी स्कूलों में जाकर वहां के टॉयलेट, क्लासरूम, शिक्षकों की कमी और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं को सामने ला रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे मुद्दे उठाने वालों को ‘दिमागी नक्सल’ कहना सवालों से बचने का तरीका है।

    ‘दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं’
    प्रकाश राज ने लोगों से सवाल पूछने और अपनी आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता को यह तय करना होगा कि वह किस पक्ष का समर्थन करती है। उन्होंने अपने वीडियो के अंत में कहा कि ‘दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं, अंधभक्त नहीं। सवाल करो, गुलामी नहीं।’

    प्रकाश राज इससे पहले भी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते रहे हैं। उनके इस नए बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा

    PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाली भारतीय महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद उनका आभार जताया है। रविवार को प्रधानमंत्री आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से खास मुलाकात हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। मीराबाई चानू ने कहा कि प्रधानमंत्री के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द उन्हें और अन्य खिलाड़ियों को आने वाली प्रतियोगिताओं में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेंगे।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मीराबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की यात्रा में प्रधानमंत्री का लगातार सहयोग और प्रोत्साहन काफी महत्वपूर्ण है। मीराबाई ने लिखा कि मुलाकात के दौरान हर पदक विजेता के लिए पीएम मोदी के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द निश्चित तौर पर खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए और बेहतर तैयारी करने की प्रेरणा देंगे।

    इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई के उस भावुक पल का भी जिक्र किया जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद पोडियम पर आंसू बहाए थे। प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि वह उस समय इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम मोदी ने मजाकिया और भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू निकल रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो।

    मीराबाई ने इसके जवाब में अपने संघर्ष की पूरी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह बेहद खुश और भावुक थीं। उनकी आंखों से आंसू इसलिए भी निकल आए क्योंकि पेरिस ओलंपिक में वह महज एक किलो के अंतर से पदक जीतने से चूक गई थीं। इसके बाद के चार वर्षों में उन्होंने कई तरह की चुनौतियों का सामना किया। चोटों ने उनकी तैयारी को प्रभावित किया और परिवार में भी कई परेशानियां चलती रहीं। इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी फिटनेस तथा प्रदर्शन पर काम करती रहीं।

    मीराबाई ने बताया कि जब वह कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ तो वह खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने कहा कि जब सामने देश का तिरंगा ऊपर उठता है और राष्ट्रगान बजता है तो भावनाएं अपने आप उमड़ पड़ती हैं। उनके लिए वह पल वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई ने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो भारतीय खेल जगत के लिए बेहद खास है। मीराबाई लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गई हैं।

    मीराबाई की इस उपलब्धि के पीछे केवल उनकी ताकत और तकनीक ही नहीं बल्कि लंबे समय तक किया गया संघर्ष भी शामिल है। पेरिस ओलंपिक की निराशा, चोटों और निजी चुनौतियों के बाद उन्होंने जिस तरह वापसी की, वह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। प्रधानमंत्री से मुलाकात और उनके प्रोत्साहन के बाद मीराबाई ने भी संकेत दिया कि उनका लक्ष्य यहीं खत्म नहीं हुआ है। आने वाली प्रतियोगिताओं में वह और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरी मेहनत करेंगी और देश के लिए नए पदक जीतने की कोशिश जारी रखेंगी।

  • पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा

    पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की भावुक तस्वीरें अब भी लोगों के जेहन में हैं। ग्लासगो में पोडियम पर खड़ी मीराबाई जब अपने गले में गोल्ड मेडल पहनकर भारत का राष्ट्रगान सुन रही थीं तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स से पदक जीतकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई चानू के उसी भावुक पल का जिक्र करते हुए उनकी उपलब्धि और संघर्ष की जमकर सराहना की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई से पूछा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह पोडियम पर इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू बह रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो। प्रधानमंत्री की यह बात सुनकर मीराबाई ने भी अपने भावुक होने की वजह बताई और कहा कि उस दिन वह बेहद खुश और भावुक थीं। उन्होंने बताया कि पेरिस ओलंपिक में वह सिर्फ एक किलो के अंतर से पदक से चूक गई थीं और उस अनुभव ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया था।

    मीराबाई ने बताया कि एक खिलाड़ी के सफर में केवल मैदान पर प्रदर्शन करना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई व्यक्तिगत और शारीरिक संघर्ष भी जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्हें लगातार चोटों का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही परिवार में भी कई तरह की परेशानियां चल रही थीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और खुद को दोबारा मजबूत बनाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी की।

    मीराबाई ने कहा कि जब वह पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ, तो वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकीं। ऊपर लहराता भारतीय तिरंगा देखकर उनके आंसू अपने आप निकल आए। उनके लिए वह पल केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष, चोटों और निराशाओं के बाद देश के लिए सम्मान हासिल करने का क्षण था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद खास रहा। उन्होंने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर ऐसी उपलब्धि हासिल की, जो इससे पहले किसी महिला वेटलिफ्टर के नाम नहीं थी। उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद निरंतर मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से दुनिया के बड़े मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

    मीराबाई की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके सामने पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियां आईं। चोटों के कारण उन्हें अपनी फिटनेस और तैयारी पर लगातार काम करना पड़ा। पेरिस ओलंपिक में पदक से मामूली अंतर से चूकने के बाद उनके लिए वापसी आसान नहीं थी। लेकिन उन्होंने निराशा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए फिर से स्वर्ण पदक हासिल किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान भारतीय दल के प्रदर्शन की भी सराहना की। ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया और मीराबाई चानू की ऐतिहासिक हैट्रिक ने इस सफलता को और खास बना दिया। उनके पोडियम पर छलके आंसू उस संघर्ष की कहानी बयां कर रहे थे, जिसने उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ चैंपियन बनाया।

  • IIT दिल्ली के कार्यक्रम पर सियासी विवाद तेज, ओवैसी ने संविधान की धाराओं से जताई आपत्ति

    IIT दिल्ली के कार्यक्रम पर सियासी विवाद तेज, ओवैसी ने संविधान की धाराओं से जताई आपत्ति


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने के बाद अब कार्यक्रम से जुड़े कथित निर्देशों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि कार्यक्रम में छात्रों को प्रधानमंत्री से मेडल या डिग्री लेते समय सिर झुकाने और वैदिक मंत्रोच्चार के दौरान खड़े रहने के निर्देश दिए गए थे। ओवैसी ने इन कथित निर्देशों पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान की भावना और वैज्ञानिक सोच से जुड़े प्रावधानों के विपरीत बताया है। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    ओवैसी ने कहा कि IIT दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित सरकारी तकनीकी संस्थान में छात्रों के लिए इस तरह के कथित निर्देश गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनका कहना है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार छात्रों को यह तक बताया गया था कि प्रधानमंत्री से मेडल लेते समय उन्हें किस तरह और कितनी मात्रा में गर्दन झुकानी है। इसके साथ ही वैदिक मंत्रों के पाठ के दौरान सभी छात्रों के खड़े रहने की बात भी सामने आई। ओवैसी ने कहा कि अगर इस तरह के निर्देश वास्तव में दिए गए हैं तो इन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    अपने बयान में ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लेख किया। उनका तर्क है कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक गतिविधियों से जुड़े प्रावधानों को संविधान की कसौटी पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि IIT जैसे संस्थान केवल तकनीकी शिक्षा के केंद्र नहीं हैं बल्कि वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51A के वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने से जुड़े प्रावधान का भी हवाला दिया।

    ओवैसी ने प्रधानमंत्री के सामने छात्रों के कथित तरीके से अभिवादन करने के निर्देश पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि किसी सरकारी शिक्षण संस्थान में छात्रों को इस तरह के निर्देश देना उचित नहीं है। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित का मतलब केवल सरकार का समर्थन करना नहीं है बल्कि जब किसी सरकारी फैसले या कदम को गलत माना जाए तो उसके खिलाफ आवाज उठाना भी राष्ट्रीय हित का हिस्सा हो सकता है।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में करीब 587 पीएचडी स्कॉलर्स और 3,000 से ज्यादा छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। प्रधानमंत्री ने इस दौरान छात्रों को उनके भविष्य और देश में नवाचार की भूमिका को लेकर संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से जिज्ञासा बनाए रखने और बड़ी चुनौतियों को छोटे हिस्सों में बांटकर उनका समाधान खोजने की बात कही।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने के साथ अपने शिक्षकों और संस्थान से जुड़े रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं की प्रतिभा और नवाचार से जुड़ा है। ऐसे में IIT दिल्ली का यह कार्यक्रम शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

    फिलहाल ओवैसी की आपत्ति मुख्य रूप से कथित प्रोटोकॉल और धार्मिक मंत्रोच्चार के दौरान दिए गए निर्देशों को लेकर है। इन निर्देशों की वास्तविक प्रकृति और उनका आधिकारिक आधार क्या था इस पर संस्थान या सरकार की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। इसलिए इस पूरे मामले में अंतिम स्थिति आधिकारिक प्रतिक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। राजनीतिक बयानबाजी के बीच IIT दिल्ली का दीक्षांत समारोह एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में परंपरा प्रोटोकॉल संवैधानिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को लेकर बहस के केंद्र में आ गया है।