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  • फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी … खरगे ने चर्चा के लिए PM मोदी से की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

    फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी … खरगे ने चर्चा के लिए PM मोदी से की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Opposition Leader Mallikarjun Kharge) ने परिसीमन (Delimitation) के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए। खरगे की ओर से प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए लिखा गया यह चौथा पत्र है। इससे पहले वह 11 अप्रैल, 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी इस संबंध में पत्र लिख चुके हैं।


    खरगे बोले- पहले चर्चा हो, फिर संसद में लाया जाए विधेयक

    खरगे ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से कहा कि परिसीमन पर नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर संसद में विचार के लिए लाने से पहले सभी दलों के साथ विस्तार से चर्चा कराई जाए। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक दलों को आपस में विचार-विमर्श करने और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

    उन्होंने प्रधानमंत्री को आगाह करते हुए लिखा कि पहले की तरह किसी व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक को संसद में जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश दोबारा नहीं होनी चाहिए। खरगे के मुताबिक, पहले भी ऐसी कोशिश की गई थी, लेकिन उसे संसद में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला था।


    मॉनसून सत्र खत्म हुए 64 दिन, फिर भी दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं

    खरगे ने संसद के मॉनसून सत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त, 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया। संसद का सत्रावसान करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हालांकि, विपक्षी दलों ने सत्रावसान में देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्हें आशंका है कि सरकार परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।


    अप्रैल में भी उठाई थी सर्वदलीय बैठक की मांग

    खरगे ने पत्र में बताया कि उन्होंने पहली बार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री से परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। उनके मुताबिक, सरकार ने उस मांग पर बैठक नहीं बुलाई।

    इसके बाद 14 अप्रैल, 2026 की देर शाम विधेयकों को सार्वजनिक किया गया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। 17 अप्रैल को परिसीमन से संबंधित विधेयक संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। यह मोदी सरकार की ओर से लाया गया पहला संवैधानिक संशोधन विधेयक था, जिसे संसद में हार का सामना करना पड़ा।


    दोबारा विधेयक लाने की अटकलों के बीच बढ़ी सियासी हलचल

    विधेयक गिरने के बाद से इस बात की अटकलें लगाई जाती रही हैं कि पर्याप्त संख्या बल जुटाने के बाद सरकार इसे दोबारा पेश कर सकती है। हालांकि, खबर प्रकाशित होने तक विधेयक फिर से पेश नहीं किया गया था।

    खरगे ने अपने ताजा पत्र में एक बार फिर स्पष्ट किया कि परिसीमन के नए प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने और उन्हें संसद में विचार के लिए लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को चर्चा का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी दलों और संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय मिलना जरूरी है।

  • केन्द्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश…. अगले हफ्ते PM मोदी करेंगे दो दिनी चिंतन बैठक

    केन्द्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश…. अगले हफ्ते PM मोदी करेंगे दो दिनी चिंतन बैठक


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले हफ्ते केंद्रीय मंत्रियों (Union Ministers) के साथ दो दिवसीय ‘चिंतन बैठक’ करेंगे। 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में सरकार के कामकाज, नीतियों और सुधारों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन होगा। सूत्रों के मुताबिक, सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों को अगले हफ्ते दिल्ली में मौजूद रहने को कहा गया है। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री शामिल होंगे या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।


    सुधारों पर मंत्रियों की होगी प्रेजेंटेशन

    बैठक में कुछ मंत्री अपने-अपने मंत्रालयों में किए गए काम और अलग-अलग क्षेत्रों में सुधारों को लेकर उठाए गए कदमों पर प्रेजेंटेशन दे सकते हैं। इस दौरान यह चर्चा भी हो सकती है कि सरकारी नीतियों को ज्यादा असरदार कैसे बनाया जाए और उनका फायदा आम लोगों तक तेजी से कैसे पहुंचाया जाए। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी मंत्रियों से कह चुके हैं कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और उनका जीवन आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।


    योजनाओं की प्रगति से लेकर सरकारी सेवाओं तक पर नजर

    ‘चिंतन बैठक’ में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रगति और उनके जमीन पर क्रियान्वयन की भी समीक्षा हो सकती है। चर्चा इस बात पर होगी कि योजनाओं का लाभ लोगों तक किस तरह और बेहतर तरीके से पहुंचाया जाए। इसके अलावा सरकारी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने और अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी मंथन होने की संभावना है।


    आगे की रणनीति और सरकार के रोडमैप पर भी फोकस

    दो दिन चलने वाली इस बैठक में समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच समन्वय और नीतियां बनाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दे भी उठ सकते हैं। अब तक किए गए काम की समीक्षा के साथ आगे की प्राथमिकताओं और सरकार के अगले रोडमैप पर भी चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक का बड़ा फोकस शासन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, सुधारों को गति देने और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने पर रहेगा।


    पिछले हफ्ते राज्य मंत्रियों के साथ हुई थी लंबी बैठक

    बता दें कि पीएम मोदी ने अपनी सरकार के राज्य मंत्रियों के साथ भी लंबी बैठक की थी। इस दौरान मंत्रालयों के कामकाज और अब तक की प्रगति की समीक्षा की गई थी। इससे पहले हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में भी अलग-अलग मंत्रालयों की उपलब्धियों पर चर्चा हुई थी। काम की रफ्तार, फाइलों के निपटारे और अदालतों में लंबित सरकारी मामलों जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालयों की रैंकिंग भी की गई थी। यह ‘चिंतन बैठक’ ऐसे वक्त हो रही है, जब मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज हैं। इसके अलावा मोदी सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

  • PM मोदी आज मना रहे अपना 76वां जन्मदिन, जानिए उनकी उपलब्धियां और कीर्तिमान…

    PM मोदी आज मना रहे अपना 76वां जन्मदिन, जानिए उनकी उपलब्धियां और कीर्तिमान…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज अपना 76वां जन्मदिन (76th Birthday) मना रहे हैं। केंद्र की सत्ता में रहते हुए यह उनका 13वां जन्मदिन है। गुरुवार सुबह से ही उन्हें देश-विदेश से बधाई मिलने का सिलसिला जारी है। अगर मोदी के पीएम के तौर पर कार्यकाल को देखा जाए तो बीते 12 वर्षों के अपने शासन में प्रधानमंत्री (Prime Minister) के तौर पर उन्होंने कई उपलब्धियां (Achievements) हासिल की हैं। फिर चाहे देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की बात हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने का विषय। इन पहलुओं के साथ पीएम मोदी ने निजी तौर पर भी कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

    उनके कीर्तिमानों मे सबसे लंबे समय तक अलग-अलग स्तरों पर सरकार चलाने वाले नेता के साथ-साथ सबसे लंबे समय तक गैर-कांग्रेसी पीएम रहने तक की उपलब्धि शामिल है। इसी साल पीएम मोदी ने भारत पर लगातार सबसे लंबा शासन करने वाले प्रधानमंत्री बनने का कीर्तिमान भी अपने नाम किया। वे लगातार शासन के मामले में पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के लगातार 4398 दिन शासन (चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर) करने के रिकॉर्ड को जून में तोड़ चुके हैं।

    हालांकि, यह सिर्फ कुछ रिकॉर्ड हैं, जिन्हें पीएम मोदी ने छुआ है। अभी कई और कीर्तिमान उनकी झोली में गिरना बाकी है। वहीं, कुछ और रिकॉर्ड ऐसे भी हैं, जो फिलहाल उनकी पहुंच से दूर हैं और उन्हें पार करने के लिए मोदी को कम से कम एक और कार्यकाल के लिए पीएम बनना होगा।

    ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक कौन-कौन से रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं? इनके जरिए उन्होंने किन नेताओं के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा? अब वे कौन सा रिकॉर्ड तोड़ने के बेहद करीब आ चुके हैं? इसके अलावा वे कौन से और किन नेताओं के रिकॉर्ड हैं, जो फिलहाल पीएम मोदी की पहुंच से दूर हैं और इन्हें हासिल करने में कितना समय लग सकता है?

    पीएम मोदी ने अब तक कौन-कौन से रिकॉर्ड तोड़े?
    1. भारत में सरकार के प्रमुख के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल (राज्य और केंद्र मिलाकर)
    22 मार्च 2026 को पीएम मोदी राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों को मिलाकर भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन गए थे। लगातार कार्यकारी पद पर बने रहने के मामले में उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

    पीएम मोदी के लिए यह पूरी उपलब्धि सिर्फ किसी एक सरकार का नेतृत्व करते हुए नहीं आई है। बल्कि उनकी इस उपलब्धि में 15 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड और अब लगातार करीब 12 साल से प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड शामिल है।

    गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 12 वर्ष से अधिक (अक्तूबर 2001 – मई 2014)
    भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्ष से अधिक (मई 2014 – वर्तमान)


    2. सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री

    पीएम मोदी कांग्रेस पार्टी से बाहर के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने इस मामले में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को काफी पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा, वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जिन्होंने संसद में लगातार दो बार पूर्ण बहुमत (2014 और 2019 दोनों में) की सरकार बनाई। इनमें जहां भाजपा अपनी दम पर बहुमत के आंकड़े- 272 के पार थी, वहीं एनडीए का आंकड़ा 300 के पार ही था।


    3. लगातार तीन आम चुनाव में जीत

    2024 के आम चुनावों के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले इतिहास के दूसरे भारतीय नेता बने। उनसे पहले यह उपलब्धि केवल जवाहरलाल नेहरू के नाम थी।


    4. अजेय कार्यकारी सफर

    अक्तूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार नियुक्त होने के बाद से, वह सत्ता में रहते हुए कभी कोई चुनाव नहीं हारे हैं और उन्होंने एक भी दिन निर्वाचित कार्यकारी पद से बाहर नहीं बिताया है।

    पीएम मोदी ने अब कौन सा रिकॉर्ड तोड़ा?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले चुने हुए लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री बन गए। वह देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लगातार कार्यकाल वाले 64 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, आजादी के बाद देश के पहले आम चुनावों के बाद गठित पहली लोकसभा का गठन 17 अप्रैल 1952 को हुआ था। उसकी पहली बैठक 13 मई 1952 को हुई थी और इसी दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस लिहाज से देखा जाए तो जहां नेहरू पहला चुनाव जीतने के बाद लगातार 4398 दिन (12 साल 15 दिन) तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वहीं, पीएम मोदी ने आज (बुधवार) को कुल 4399 दिन लगातार पीएम रहने का गौरव हासिल कर लिया। यानी वे लगातार सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं।

    इस रिकॉर्ड की बारीक समझ भी हासिल करना जरूरी है। दरअसल, जवाहरलाल नेहरू का प्रधानमंत्री के रूप में कुल कार्यकाल कुल 6,131 दिन का था। इसकी वजह यह है कि उन्होंने भारत की कमान 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद ही संभाल ली थी। तब पीएम पद के लिए कोई चुनाव नहीं हुआ था। देश में पहली बार आम चुनाव 1952 में ही हुए। यानी 1947 से 1952 तक नेहरू पीएम तो रहे, लेकिन उनकी सरकार चुनाव के जरिए नहीं आई थी यानी निर्वाचित नहीं थी। इस लिहाज से आम चुनाव के बाद लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित होकर लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने की अवधि को देखा जाए, तो पीएम मोदी अब नेहरू के रिकॉर्ड को पार कर चुके हैं।


    अभी कौन से रिकॉर्ड पीएम मोदी की पहुंच से दूर?
    1. प्रधानमंत्री के रूप में कुल सबसे लंबा कार्यकाल

    भले ही पीएम मोदी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित होकर लगातार सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर कुल दिनों के मामले में जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड अभी भी सबसे ऊपर है। जवाहरलाल नेहरू का कुल कार्यकाल (1947-1964) 16 वर्ष और 286 दिन का रहा है यानी कुल 6,131 दिन। इसी तरह इंदिरा गांधी ने भी अलग-अलग कार्यकालों में देश पर 15 साल से ज्यादा शासन किया है।

    पीएम मोदी की स्थिति: मई 2014 से अब तक उनका कार्यकाल लगभग 12 वर्ष का हुआ है। नेहरू के इस कुल कार्यकाल के रिकॉर्ड को पार करने के लिए पीएम मोदी को साल 2030 के अंत तक देश का प्रधानमंत्री बने रहना होगा। यानी भाजपा का अगला लोकसभा चुनाव जीतना जरूरी होगा। साथ ही पीएम मोदी का 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद अगले करीब दो साल तक लगातार प्रधानमंत्री बना रहना भी अनिवार्य होगा। तभी नेहरू का यह रिकॉर्ड टूटना संभव हो सकता है।


    2. सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड

    पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 12 साल से अधिक (4,610 दिन) का समय बिताया, जो एक बड़ा रिकॉर्ड है, लेकिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सर्वकालिक इतिहास में उनसे आगे कई नेता हैं। सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग (24 वर्ष, 165 दिन) और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (24 वर्ष, 99 दिन) के नाम भारत में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड है। चूंकि पीएम मोदी अब पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति में हैं, इसलिए मुख्यमंत्री के इस व्यक्तिगत रिकॉर्ड में अब बदलाव होने की संभावना कम ही है।


    3. लोकसभा चुनाव में किसी एक पार्टी द्वारा सर्वाधिक सीटें जीतने का रिकॉर्ड

    चुनावी सफलता के मामले में भाजपा ने पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014 (282 सीटें) और 2019 (303 सीटें) में पूर्ण बहुमत हासिल किया, लेकिन भारत के संसदीय इतिहास में एक पार्टी द्वारा सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड अभी भी कांग्रेस के नाम है। यह जीत राजीव गांधी के समय में कांग्रेस को मिली थी। तब पार्टी ने 414 सीट जीत कर इतिहास रच दिया था। यह अब तक का रिकॉर्ड है, जिसे कोई भी दल या यहां तक कि गठबंधन भी नहीं तोड़ पाया है।


    4. चार या अधिक कार्यकाल का रिकॉर्ड

    पीएम मोदी इस समय अपने तीसरे कार्यकाल में हैं, जिससे उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के लगातार तीन बार प्रधानमंत्री चुने जाने के रिकॉर्ड की बराबरी की है। अगर वह 2029 में चौथे कार्यकाल के लिए निर्वाचित होते हैं, तो वह भारत के इतिहास में चार बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता बनकर एक नया रिकॉर्ड कायम करेंगे और चार बार चुने जाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री होंगे।

  • Gen-Z से मातृशक्ति और बुजुर्गों तक… PM मोदी का संवाद कैसे बदलता रहा, हर पीढ़ी के लिए है अलग अंदाज

    Gen-Z से मातृशक्ति और बुजुर्गों तक… PM मोदी का संवाद कैसे बदलता रहा, हर पीढ़ी के लिए है अलग अंदाज


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 76वां जन्मदिन है। 7 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी इस वर्ष 76 वर्ष के हो रहे हैं और 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। करीब 12 साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल में उनकी राजनीति के साथ उनके संवाद का तरीका भी लगातार बदलता दिखाई देता है। युवाओं के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल क्रिएटर, छात्रों के लिए ‘परीक्षा पे चर्चा’, महिलाओं के लिए ‘माताओं-बहनों-बेटियों’ का संबोधन और बुजुर्गों-परिवारों तक पहुंचने के लिए ‘मन की बात’ जैसे अलग-अलग माध्यम उनके सार्वजनिक संवाद का हिस्सा रहे हैं।

    मोदी के संचार की खासियत पर चर्चा करते समय एक बात बार-बार सामने आती है—वे अलग-अलग वर्गों से बातचीत में अलग भाषा, माध्यम और संदर्भ इस्तेमाल करते हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे नारों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं से संवाद तक, उनके सार्वजनिक संचार का दायरा पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से आगे बढ़ा है।

    Gen-Z के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया
    आज की Gen-Z पीढ़ी के संवाद के तरीके को पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से अलग माना जाता है। इसी बदलाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप और डिजिटल क्रिएटर इकोसिस्टम जैसे विषयों पर युवाओं से बातचीत करते रहे हैं।

    2024 में पहली बार आयोजित नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड इसी डिजिटल इकोसिस्टम को औपचारिक पहचान देने वाली पहल के तौर पर सामने आया। इसमें कहानी कहने, सामाजिक बदलाव, शिक्षा, गेमिंग, तकनीक और दूसरे डिजिटल क्षेत्रों में काम करने वाले क्रिएटर्स को शामिल किया गया था।

    जुलाई 2026 में इंस्टाग्राम की एक रील पर 24 घंटे में 300 मिलियन यानी 30 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिलने का दावा भी सोशल मीडिया पर मोदी की डिजिटल मौजूदगी को लेकर चर्चा में रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रधानमंत्री का सार्वजनिक संवाद अब केवल टीवी, अखबार और रैलियों तक सीमित नहीं है।

    ‘परीक्षा पे चर्चा’ में प्रधानमंत्री नहीं, मेंटर की भूमिका
    बोर्ड परीक्षाओं के समय प्रधानमंत्री का संवाद एक अलग रूप लेता है। ‘परीक्षा पे चर्चा’ में वे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से परीक्षा के तनाव, आत्मविश्वास और पढ़ाई से जुड़े सवालों पर बातचीत करते हैं।

    2026 के संस्करण में 4.5 करोड़ से ज्यादा पंजीकरण हुए। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री छात्रों के सवाल लेते हैं, रोजमर्रा के उदाहरणों के जरिए जवाब देते हैं और पढ़ाई के साथ खेल, आराम, कौशल तथा रुचियों के संतुलन पर बात करते हैं।

    यही वजह है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ की भाषा सामान्य राजनीतिक भाषणों से अलग दिखाई देती है। यहां विषय सत्ता या राजनीति नहीं, बल्कि छात्र की रोजमर्रा की जिंदगी होती है। ‘एग्जाम वारियर्स’ जैसे संबोधन के जरिए परीक्षा के दबाव को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का संदेश देने की कोशिश की जाती है।

    महिलाओं से संवाद में योजनाओं के साथ पहचान
    महिलाओं को संबोधित करते समय प्रधानमंत्री के भाषणों में ‘माताओं, बहनों और बेटियों’ जैसे शब्द नियमित रूप से सुनाई देते हैं। लाल किले की प्राचीर से सैनिटरी पैड, पीरियड पॉवर्टी और घर में शौचालय जैसे विषयों का उल्लेख भी उनके सार्वजनिक भाषणों का हिस्सा रहा है।

    सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं को भी इसी संवाद के साथ जोड़ा गया। उज्ज्वला योजना के जरिए रसोई के धुएं से राहत, लखपति दीदी के जरिए आर्थिक मजबूती और ड्रोन दीदी के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल को भाषणों में जगह मिली।

    इन योजनाओं के नाम और उनसे जुड़े संबोधन ऐसे रखे गए हैं, जिन्हें महिलाओं के रोजमर्रा के जीवन और अनुभवों से जोड़कर पेश किया जा सके।

    बुजुर्गों और परिवारों तक ‘मन की बात’
    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने के बावजूद प्रधानमंत्री ने रेडियो जैसे पारंपरिक माध्यम को भी लगातार इस्तेमाल किया है। ‘मन की बात’ के जरिए वे हर महीने देशवासियों से संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम में अक्सर गुमनाम नायकों, ग्रामीण नवाचारों, स्थानीय उपलब्धियों और सामाजिक पहलों की चर्चा होती है।

    इस माध्यम की पहुंच रेडियो सुनने वाले परिवारों और गांवों तक है। इसलिए मोदी के संचार में एक तरफ इंस्टाग्राम और डिजिटल क्रिएटर्स हैं तो दूसरी तरफ रेडियो और चौपाल जैसी पारंपरिक पहुंच भी बनी हुई है।

    स्थानीय भाषा और संस्कृति का इस्तेमाल
    मोदी के सार्वजनिक भाषणों में स्थानीय संदर्भों का इस्तेमाल भी दिखाई देता है। किसी राज्य में पहुंचने पर वहां के त्योहार, परंपरा, खान-पान, स्थानीय व्यक्तित्व और क्षेत्रीय भाषा का उल्लेख उनके संबोधन का हिस्सा रहा है।

    सांस्कृतिक विषयों को लेकर काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे संदर्भ भी उनके भाषणों में दिखाई देते हैं। इन विषयों के जरिए वे भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्थानीय पहचान से जुड़े मुद्दों को अपने संवाद में जगह देते हैं।

    ‘मित्रों’ से ‘मेरे परिवारजनों’ तक
    मोदी के संबोधन समय के साथ बदलते रहे हैं। ‘मित्रों’ और ‘भाइयों-बहनों’ जैसे संबोधनों के साथ अब ‘मेरे परिवारजनों’ जैसे शब्द भी उनके भाषणों में सुनाई देते हैं। इसके साथ ही वे कई बार जटिल नीतिगत विषयों को आंकड़ों के बजाय छोटी घटनाओं और प्रेरक कहानियों के माध्यम से समझाने की कोशिश करते हैं।

    किसी राज्य में भाषण की शुरुआत वहां की क्षेत्रीय भाषा में करना भी उनके संवाद का एक हिस्सा रहा है। इससे भाषण के शुरुआती क्षणों में ही स्थानीय संदर्भ जुड़ जाता है।

    कुल मिलाकर मोदी के सार्वजनिक संवाद में माध्यम और भाषा दोनों का विस्तार दिखाई देता है—एक ओर सोशल मीडिया पर Gen-Z और डिजिटल क्रिएटर्स हैं, तो दूसरी ओर ‘मन की बात’ के जरिए रेडियो सुनने वाले परिवार और स्थानीय भाषाओं-सांस्कृतिक संदर्भों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के लोग। यही बहुस्तरीय संचार शैली उनके करीब 12 वर्ष के प्रधानमंत्री कार्यकाल में लगातार दिखाई देती रही है।

  • PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…

    PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पिछले सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ हुई मुलाकात के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत (India) की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। भारत सरकार के अनुसार, मोदी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के संबंध में विदेश मंत्रालय चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया। चीनी बयान में मोदी के हवाले से कहा गया था कि तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और भारत अपनी धरती पर किसी को भी चीन विरोधी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने भारतीय चिंताओं का भी उल्लेख किया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।’


    सीमा पर शांति को रिश्ते आगे बढ़ाने की बुनियाद बताया

    जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिक सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।


    भारत ने चीन के साथ संबंधों में अपनी चिंताएं रखीं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग को यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक आवश्यक आधार है। भारत और चीन के बीच सीमा पर बार-बार पैदा हुए तनाव के बीच भारत ने पिछले 16 वर्षों से सार्वजनिक रूप से अपनी ‘वन चाइना’ नीति को उसी तरह स्पष्ट रूप से व्यक्त करना बंद कर दिया है।


    तिब्बत और ताइवान पर भारत की नीति में बदलाव नहीं

    हालांकि व्यवहार में तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति लगातार बनी हुई है। केंद्र सरकार का कहना है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति स्पष्ट और निरंतर है। भारत व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में ताइवान के साथ संबंधों को बढ़ावा देता है और सहयोग की सुविधा प्रदान करता है।


    तिब्बत को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट

    तिब्बत के मामले में भारत अब भी यह मानता है कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र चीन जनवादी गणराज्य के क्षेत्र का हिस्सा है। यह स्थिति वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के बीच हस्ताक्षरित ‘संबंधों और व्यापक सहयोग के सिद्धांतों पर घोषणा’ में भी दर्ज की गई थी। इस घोषणा में यह भी कहा गया था कि भारत अपनी जमीन से तिब्बतियों को चीन विरोधी राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता।


    चीन के बयान में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का भी जिक्र
    चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से यह भी कहा कि भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और चीन के प्रति भारत के दृष्टिकोण का किसी तीसरे देश से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में तिब्बत या ताइवान का कोई उल्लेख नहीं किया गया।


    ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले पर भी चर्चा

    दिलचस्प बात यह है कि इस बार भारत ने अपने बयान में चीन के उस ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले का इस्तेमाल नहीं किया, जिसका उल्लेख पिछले साल तियानजिन में मोदी-शी मुलाकात के बाद चीन की ओर से जारी बयान में किया गया था।


    जयशंकर और वांग यी की बातचीत में भी उठा था मुद्दा

    जुलाई में मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ हुई मुलाकात के बाद भी चीन ने जयशंकर के हवाले से भारत द्वारा चीन की संप्रभुता का सम्मान करने जैसी बातें कही थीं। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि जयशंकर ने वांग यी से बातचीत में यह बात कही थी कि संप्रभुता से जुड़े मुद्दे भारत को चीन के सामने उठाने चाहिए।

    चीन के कब्जे को लेकर भारत ने जताई आपत्ति
    उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता। हालांकि, चीन 1963 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा किए हुए है, जबकि इन क्षेत्रों पर भारत के अधिकार को चीन भी स्वीकार करता रहा है।

  • एक ही दिन तीज और गणेश चतुर्थी महिलाओं के लिए खास रहेगा आज का दिन दोपहर में गणेश स्थापना और रातभर होगा जागरण

    एक ही दिन तीज और गणेश चतुर्थी महिलाओं के लिए खास रहेगा आज का दिन दोपहर में गणेश स्थापना और रातभर होगा जागरण


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर आठवीं बार एशिया कप की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। टीम की इस शानदार उपलब्धि के बाद देशभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को इस ऐतिहासिक जीत के लिए शुभकामनाएं दीं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जमकर सराहना की।

    यूएई में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट की तरह निर्णायक मुकाबले में भी अपना दबदबा कायम रखा। टीम के खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए श्रीलंका को 72 रन से मात दी। इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब जीतकर अपनी मजबूती का परिचय दिया। फाइनल में मिली इस जीत को भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम की जीत पर खुशी जताते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम के खेल में आत्मविश्वास निरंतर शानदार प्रदर्शन और जबरदस्त जज्बा नजर आया। प्रधानमंत्री ने महिला खिलाड़ियों की मेहनत और उनके प्रदर्शन की तारीफ करते हुए इस उपलब्धि को भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह जीत देशभर के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम की इस सफलता से युवा क्रिकेट के साथ साथ दूसरे खेलों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे। खिलाड़ियों की मेहनत आत्मविश्वास और लगातार बेहतर प्रदर्शन ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भारतीय महिला क्रिकेट किस तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को एशिया कप जीतने पर बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टीम की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने एशियाई क्रिकेट में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अमित शाह ने टीम के पूरे टूर्नामेंट में दबदबा बनाए रखने की तारीफ की और कहा कि भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने पूरे देश को रोमांचित किया।

    महिला टीम की इस जीत को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और फाइनल जैसे अहम मुकाबले में भी दबाव के बीच शानदार खेल दिखाया। श्रीलंका के खिलाफ 72 रन की जीत ने भारतीय टीम की तैयारियों और मजबूत इरादों को सामने रखा।

    आठवीं बार एशिया कप जीतने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह एशियाई क्रिकेट में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। खिलाड़ियों की इस सफलता ने देश के क्रिकेट प्रशंसकों में भी उत्साह भर दिया है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समेत देश की कई हस्तियों की ओर से मिल रही बधाइयां इस ऐतिहासिक जीत की अहमियत को और बढ़ा रही हैं।

  • PM मोदी का आलोचकों पर पलटवार…. बोले- होम्योपैथी की गोली दी.. सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए…

    PM मोदी का आलोचकों पर पलटवार…. बोले- होम्योपैथी की गोली दी.. सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर दिए गए भाषण में दिमागी नक्सल (‘Urban Naxal’) शब्द के इस्तेमाल को लेकर जमकर विवाद हुआ था. अब पीएम मोदी ने अपने उस बयान का जिक्र करते हुए आलोचकों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ नाम से जो होम्योपैथिक गोली दी थी, उसका असर अब साफ दिखने लगा है।

    दरअसल पीएम मोदी शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (Shri Ram College of Commerce- SRCC) के शताब्दी समारोह में पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने होम्योपैथी के सिद्धांत का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी. पीएम मोदी ने कहा, ‘आज 2013 के मुकाबले, देश आर्थिक रूप से, सामाजिक रूप से कहीं ज्यादा सुरक्षित है. लेकिन ये देखकर कुछ लोगों की छटपटाहट बढ़ रही है, बौखलाहट बढ़ रही है।

    उन्होंने आगे कहा, ‘अभी 15 अगस्त का मेरा भाषण आपने सुना होगा, ऐसे लोगों के लिए अभी मैंने लाल किले से, एक होम्योपैथी का डोज दिया था. होम्योपैथी की गोली एक छोटी सी गोली दी थी लाल किले से।


    ‘जैसे ही मैंने दिमागी नक्सल की होम्योपैथिक गोली…’

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आप जानते हैं होम्योपैथी के लिए कहते हैं कि इसका स्वभाव ऐसा है कि जब होम्योपैथी की दवाई शुरू करते हैं, तो शुरू के दौर में बीमारी एक दम से ज्यादा बढ़ जाती है, ये होम्योपैथी का स्वभाव है. ठीक वैसे ही, जैसे ही मैंने दिमागी नक्सल की होम्योपैथिक गोली दी, सारे दिमागी नक्सल एक-एक करके बाहर आने लगे. अब देश की जनता भी इस बीमारी को बढ़ावा देने वालों का असली चेहरा देख रही है।


    पुरानी सरकारों पर हमला

    इस दौरान पीएम मोदी ने देश की पुराने हालात का जिक्र किया. उन्होंने पिछली सरकारों पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘कुछ लोगों को लग सकता है कि ये 140 करोड़ लोगों का देश है, सब बहुत आसान था और मोदी ने नया क्या किया? लेकिन क्या ये सच में इतना आसान था? मैं आपको पुराने दिनों में ले जाना चाहता हूं. साल 2013 में जब केदारनाथ में आपदा आई थी, तब पूरी सरकार हिल गई थी. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और कैसे निपटे।

    प्रधानमंत्री ने 2008 के दौर को याद दिलाते हुए कहा कि जब 2008 में बैंकिंग संकट आया, तो उस समय की सरकार सालों तक उसके पीछे छुपती रही. संकट से निपटने का साहस उनमें नहीं था, जिससे देश का पूरा बैंकिंग सिस्टम तबाही के कगार पर पहुंच गया था. साल 2008 में ही मुंबई में भयानक आतंकी हमला हुआ. तब की सरकार बाहरी दबाव में आ गई और पाकिस्तान को सबक सिखाने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।

  • बेल्जियम के प्रधानमंत्री बोले- PM मोदी ने पहले ही चेताया था… अब हम अच्छे और सच्चे साझेदार तलाश रहे

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री बोले- PM मोदी ने पहले ही चेताया था… अब हम अच्छे और सच्चे साझेदार तलाश रहे


    नई दिल्ली।
    बेल्जियम (Belgium) के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर (Belgian Prime Minister Bart D Wever) ने कहा कि ‘कुछ देशों’ पर आर्थिक और सामरिक निर्भरता का यूरोपीय देशों (European Countries) का निर्णय उनके लिए नुकसानदायक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि आपके प्रधानमंत्री (Prime Minister) ने बहुत पहले यूरोप को इसके बारे में आगाह किया था, लेकिन तब उनकी बात अनसुनी कर दी गई। वेवर ने कहा कि अब यूरोप उनकी बात को समझ रहा है। यह जागरूकता देरी से आई है, लेकिन अब हम अच्छे और सच्चे साझेदार तलाश रहे हैं।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यूरोप ने लंबे समय तक सस्ते विदेशी सामान को अपने यहां बेरोकटोक आने दिया। कम कीमत पर आने वाले विदेशी सामान ने धीरे-धीरे यूरोप की कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ाने के साथ इन्हें कमजोर कर दिया।


    चीन की ओर इशारा

    वेवर ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा चीन की ओर था। उन्होंने कहा कि यूरोप को किसी देश के सामान के लिए डंपिंग जोन नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि यूरोप को अब कड़वी सच्चाई का अहसास हो रहा है। भारत ने यूरोप को इन जोखिमों के बारे में तब ही आगाह कर दिया था, जब यूरोप ने खुद इन्हें समझा भी नहीं था।


    टैरिफ का डर नहीं, सहयोग करने वाले साथी चाहिए

    वेवर ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि यूरोप को ऐसे साझेदार चाहिए, जो दबाव नहीं सम्मान से सहयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे साथियों के बारे में सोचना होगा, जो एक दिन हम पर टैरिफ लगाएं, दूसरे दिन हटा दें और अगर हम कोई ऐसी बात कहें जो उन्हें पसंद न आए, तो दोबारा टैरिफ लगा दें।


    भारत को सूची से हटाना भारी पड़ेगा: वेवर

    वेवर ने कहा, ‘दुनिया में किसके साथ, दुनिया की किस बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ हम ऐसे रिश्ते बना सकते हैं? तो, अगर इस सूची में भारत का नाम नहीं है, तो आप एक बहुत ही बुनियादी बात खो रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि यूरोपीय काउंसिल की बैठकों में अब सभी मुद्दों पर चर्चा हो रही है। हम ऐसे साथियों को ढूंढ रहे हैं, जो हमारी तरह ही हों और बहुपक्षवाद में विश्वास रखते हों। ‘भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के लागू होने से ठीक पूर्व यह महत्वपूर्ण संकेत है।’


    यूरोप के बाजारों में काबिज चीन

    यूरोप के बाजारों पर आज चीन बुरी तरह से काबिज है। वह करीब 560 अरब यूरो का निर्यात यूरोप करता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। वहीं, यूरोप का चीन को निर्यात सिर्फ 200 अरब यूरो है। 1360 अरब यूरो के व्यापार घाटे का सामना यूरोप कर रहा है।

    जानकारी के मुताबिक यूरोप ने चीन के साथ व्यापारिक मामलों को लेकर अक्टूबर तक को डेडलाइन तय की है। यूरोपीय देश चीन से व्यापार में कुछ बुनियादी बदलावों पर जोर दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि अगर यूरोप में चीनी सामान की ‘डंपिंग’ नहीं रुकी, तो वह चीन पर टैरिफ लगा सकता है। इसके पीछे यूरोपीय संघ कथित तौर पर आपूर्ति के मामले में किसी एक देश (यानी चीन) पर से निर्भरता कम करना चाहता है। दूसरे सस्ते एवं निम्न गुणवत्ता के सामानों को यूरोप के बाजार से रोकना चाहता है।


    भारत के लिए बढ़ सकते हैं अवसर

    भारत के लिए यह अवसर हो सकता है। यूरोपीय संघ चीन से आगे बढ़कर आपूर्ति श्रृंखला में अन्य देशों की ओर रुख बदलने का प्रयास कर रहा है। दरअसल, यूरोपीय संघ के 27 देशों की मांग की पूर्ति भारत बखूबी कर सकता है। बता दें कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच इसी साल के शुरू में मुक्त व्यापार समझौता हुआ है। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि साल के आखिर तक उसका क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा।

    भारत के लिए, यूरोप के बाजार में अवसर बन सकते हैं। भारत कई और मशीनरी, कपड़ा, रसायन आदि यूरोप को निर्यात करता है लेकिन कई और क्षेत्रों में मौके हैं। यूरोप के साथ भारत का द्विपक्षीय कारोबार 136 अरब डॉलर है, जिसमें भारत का निर्यात 75 अरब डॉलर और आयात 61 अरब डॉलर के करीब है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस प्रकार चीनी सामानों को लेकर सख्ती दिख रही है उसका लाभ भारतीय निर्यातकों को मिल सकता है।

  • भारत-बेल्जियम की दोस्ती को मिली नई धार मोदी बोले- बदलती दुनिया में दोनों देश स्वाभाविक साझेदार

    भारत-बेल्जियम की दोस्ती को मिली नई धार मोदी बोले- बदलती दुनिया में दोनों देश स्वाभाविक साझेदार


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में भारत और बेल्जियम के बीच रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में अहम बातचीत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की और दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की। इसके बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में द्विपक्षीय संबंधों को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान पीएम मोदी ने भारत और बेल्जियम के रिश्तों को इतिहास से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच साझा स्मृतियां और लोकतांत्रिक मूल्यों की समानता इस साझेदारी को खास बनाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंधों की जड़ें इतिहास में काफी गहरी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम में हजारों भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान को उन्होंने दोनों देशों की साझा स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आज लोकतांत्रिक मूल्य बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच मजबूत संपर्क भारत और बेल्जियम को स्वाभाविक साझेदार बनाते हैं।

    पीएम मोदी ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की पहली भारत यात्रा का स्वागत करते हुए उनके भारत से पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डी वेवर लंबे समय तक एंटवर्प के मेयर रहे हैं और इस दौरान उन्होंने वहां रहने वाले बड़े भारतीय समुदाय के साथ ही भारत और बेल्जियम के बीच हीरा कारोबार को भी समर्थन दिया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने करीब एक दशक पहले अपनी बेल्जियम यात्रा को याद करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में दोनों देशों की साझेदारी का दायरा तेजी से बढ़ा है। अब यह सहयोग पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी दोनों देश साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने जोरावर टैंक जैसे आधुनिक रक्षा उपकरणों पर सहयोग का जिक्र किया। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में दुनिया के बड़े ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट्स में से एक विकसित किए जाने की बात भी कही।

    बदलते वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े उथल पुथल के दौर से गुजर रही है। कई क्षेत्रों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है और खाद्य ईंधन तथा सप्लाई चेन समेत कई क्षेत्रों में अनिश्चितता का असर दिखाई दे रहा है। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था अपनी गति बनाए हुए है। उन्होंने पिछले क्वार्टर में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विकास यात्रा दुनिया के लिए विश्वास और नए अवसरों का आधार बन रही है।

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक सहयोग को लेकर भी प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में हुए भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का जिक्र करते हुए इसे दोनों पक्षों के लिए नई संभावनाओं का रास्ता बताया। पीएम मोदी के मुताबिक आर्थिक प्रगति और इस समझौते ने भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। भारत और बेल्जियम के बीच हुई बातचीत में रक्षा खाद्य क्षेत्र क्लीन एनर्जी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े समझौतों और एमओयू का भी आदान प्रदान हुआ।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और बेल्जियम की साझेदारी आने वाले समय में और व्यापक हो सकती है। दोनों देशों के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग रणनीतिक साझेदारी और लोगों के बीच संपर्क इस रिश्ते को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • PM मोदी के जन्मदिन के बहाने देश को मथने की तैयारी… BJP शुरू करेगी जनसंपर्क अभियान

    PM मोदी के जन्मदिन के बहाने देश को मथने की तैयारी… BJP शुरू करेगी जनसंपर्क अभियान


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिन के बहाने भाजपा (BJP) ने जनसंपर्क यात्राओं और एक महीने के सेवा संकल्प अभियान (Service Pledge Campaign) के तहत पूरे देश को मथने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और लोगों से सीधा संवाद करने की व्यापक तैयारी की है।

    योजना के तहत पीएम की जन्मभूमि वडनगर और कर्मभूमि वाराणसी से अलग-अलग यात्रा निकालने की है। इन यात्राओं से जुड़ी टीमें देश के अलग-अलग हिस्सों में बतौर लोकसेवक मोदी की उपलब्धियों की जानकारी देगी। इन यात्राओं से अछूते हिस्से में सेवा संकल्प अभियान के तहत रैलियां, रक्तदान, स्वास्थ्य जांच शिविर के जरिये लोगों से संपर्क साधा जाएगा। सेवा संकल्प अभियान का तानाबाना सोमवार देर रात तक पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, गृह मंत्री अमित शाह, महासचिव स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े समेत कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक में बुना गया।


    ये है यात्रा का खाका

    17 सितंबर से वडनगर और वाराणसी से शुरू हो रही यात्रा देश के विभिन्न हिस्से से गुजरते हुए 17 अक्तूबर को क्रमश: वाराणसी और वडनगर पहुंचेगी। दोनों यात्रा प्रतिदिन सौ किमी के सफर के साथ अलग-अलग तीन-तीन हजार किमी क्षेत्र को कवर करेगी। प्रतिदिन कम से कम चार कार्यक्रम करेगी।