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  • पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों को संबोधित किया और उन्हें जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने वास्तविक दुनिया की ऐसी चुनौतियां आएंगी, जिनका सामना करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सोच, मेहनत, रचनात्मकता और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कॉलेज और बाहर की दुनिया में काफी अंतर होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यह मालूम होता है कि उन्हें कौन सा विषय पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल सामने आ सकते हैं। लेकिन नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा की जिंदगी में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। कई बार अचानक कोई नई समस्या सामने आती है और उस समय यह भी स्पष्ट नहीं होता कि असल समस्या क्या है। ऐसे अवसरों पर व्यक्ति को खुद स्थिति को समझना पड़ता है और समाधान तलाशना होता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें भविष्य की ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी अलग तस्वीर होगी। कोई पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला स्टार्टअप शुरू करने का सपना भी देख रहे होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का रास्ता और सपना अलग हो सकता है, लेकिन दीक्षांत समारोह का यह अवसर सभी के लिए समान रूप से विशेष है।

    समारोह में पीएम मोदी ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन पहलों के लिए संस्थान और छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद करते हुए उनके मन में चल रहे विचारों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन कुछ तो पता चलता होगा कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली में छात्रों के पहले दिन से लेकर दीक्षांत समारोह तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरिएंटेशन से कनवोकेशन तक की यात्रा पूरी करना उनके लिए संतोष का विषय होगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि IIT दिल्ली से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी नई यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज तथा देश की प्रगति में करेंगे। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने और हर चुनौती को सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया।

  • CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

    CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का दसवां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे जिसने भारत की पदक तालिका को और मजबूत कर दिया। मुक्केबाजी से लेकर पैरा एथलेटिक्स तक भारतीय खिलाड़ियों ने हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खिलाड़ियों की इस शानदार उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और इसे देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

    दसवें दिन भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा सबसे ज्यादा देखने को मिला। भारत ने बॉक्सिंग में कुल 10 पदक अपने नाम किए और कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण जीतकर तिरंगा ऊंचा लहराया। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने उनके संघर्ष और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण देशभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल की प्रधानमंत्री ने खुलकर तारीफ की। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घांगस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सफलता उनके कौशल और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।

    भारत की एक और महिला मुक्केबाज साक्षी ने 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें निर्णायक जीत के लिए बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दीं। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में जदुमणि सिंह मंडेंगबाम ने रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और महत्वपूर्ण पदक जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी दृढ़ता अनुशासन और संघर्ष की सराहना की।

    पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों के शॉट पुट एफ57 वर्ग में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी प्रतियोगिता के दौरान उनका फोकस और अटूट संकल्प साफ दिखाई दिया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी तकनीक और समर्पण की प्रशंसा करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि देश अब हर खेल में वैश्विक स्तर पर मजबूती से अपनी पहचान बना रहा है। एक ही दिन में 16 पदकों का ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है और खिलाड़ियों की यह सफलता देशवासियों के लिए गर्व का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई ने खिलाड़ियों का उत्साह और बढ़ाया है तथा पूरे देश में इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया जा रहा है।

  • 'PR कम कीजिए और शिक्षा सुधारिए', पीएम मोदी के वीडियो पर विशाल ददलानी का बयान वायरल

    'PR कम कीजिए और शिक्षा सुधारिए', पीएम मोदी के वीडियो पर विशाल ददलानी का बयान वायरल


    नई दिल्ली। प्रसिद्ध गायक और संगीतकार विशाल ददलानी एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वाले विशाल ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है। इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी मां के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर चिंता जताई थी। इसके बाद विशाल ददलानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी और शिक्षा व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर सरकार को सलाह दी।

    विशाल ददलानी ने अपने वीडियो में कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान युवाओं में आक्रोश दिखाई दे रहा है तो उसके पीछे मौजूद कारणों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान टियर गैस चलने डंडे बरसने और हिंसा जैसी घटनाओं पर अपेक्षित चर्चा नहीं होती लेकिन गाली गलौज के मुद्दे पर अधिक ध्यान दिया जाता है। उनके अनुसार युवाओं के गुस्से की असली वजहों को समझना ज्यादा जरूरी है।

    उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से छात्रों और उनके परिवारों ने प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों का सामना किया है। विशाल ने अपने बयान में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समस्याओं के समाधान पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और छात्रों को पारदर्शी अवसर मिलेंगे तो स्वाभाविक रूप से उनके भीतर का असंतोष भी कम होगा।

    विशाल ददलानी ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि जरूरत जनसंपर्क गतिविधियों से अधिक वास्तविक काम करने की है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को शिक्षा क्षेत्र में सुधार पर प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि युवाओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा तो वही छात्र सरकार की उपलब्धियों की सराहना भी करेंगे। उन्होंने अपने वीडियो में यह भी कहा कि लोगों से वास्तविक संवाद और भरोसे का रिश्ता बनाना किसी भी जनसंपर्क अभियान से अधिक प्रभावी होता है।

    अपने सोशल मीडिया पोस्ट में विशाल ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए हैशटैग भी साझा किए। उनका यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया तो कुछ ने उनके बयान पर असहमति जताई। सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर बहस भी तेज हो गई और विभिन्न पक्षों ने अपनी अपनी राय रखी।

    विशाल ददलानी पहले भी कई सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं। उनके बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं और सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। इस बार भी उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे लेकर अलग अलग दृष्टिकोण सामने रख रहे हैं।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट है कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दे देश में लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। परीक्षा प्रणाली पारदर्शिता रोजगार और छात्रों के भविष्य जैसे विषयों पर बहस जारी है। ऐसे में विशाल ददलानी का यह बयान भी उसी व्यापक सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गया है जहां अलग अलग पक्ष अपनी राय रख रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक हस्तियों और नागरिकों द्वारा व्यक्त विचारों पर स्वस्थ संवाद होना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है और अंतिम निष्कर्ष तथ्यों तथा नीतिगत निर्णयों के आधार पर ही तय होते हैं।

  • भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव पीएम मोदी के दौरे ने रक्षा व्यापार और समुद्री सहयोग को दी नई दिशा

    भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव पीएम मोदी के दौरे ने रक्षा व्यापार और समुद्री सहयोग को दी नई दिशा


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूजीलैंड यात्रा ने भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। लगभग दो दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। न्यूजीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स द्वारा प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा गया है कि इस यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं।

    दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया। इस रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत रक्षा व्यापार समुद्री सुरक्षा कृषि पर्यटन खेल संस्कृति विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में दोनों देश साझा हितों और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करेंगे।

    यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का रखा गया। इसके लिए निवेश व्यापारिक सहयोग आपूर्ति श्रृंखला और नई आर्थिक संभावनाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था और विशाल उपभोक्ता बाजार को देखते हुए न्यूजीलैंड भारत को अपनी दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण साझेदार मान रहा है।

    विश्लेषण में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2030 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत का बढ़ता मध्यम वर्ग वैश्विक बाजार के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि न्यूजीलैंड भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

    दौरे के दौरान कुल 18 महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए जिनमें 10 समझौते और सहमति पत्र शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना भी है। रोडमैप टू 2030 के माध्यम से दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा वैज्ञानिक अनुसंधान शिक्षा सांस्कृतिक आदान प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रहे। दोनों देशों ने म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट अरेंजमेंट पर सहमति जताई जिससे भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड रक्षा बल जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की सुविधाओं का उपयोग ईंधन भरने रखरखाव और रसद सहायता के लिए कर सकेंगे। इसके अलावा हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और समन्वय को मजबूत करने के लिए एक नए समुद्री सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।

    आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी नई मजबूती दी गई है। दोनों देशों ने संयुक्त कार्य समूह गठित करने पर सहमति जताई है जो खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान और सुरक्षा समन्वय को और प्रभावी बनाएगा। साथ ही अवैध मछली पकड़ने जैसी समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए भी साझा प्रयास किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी आर्थिक विकास क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक सहयोग के नए अवसर पैदा करेगी तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगी।

  • इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का जलवा रिकॉर्ड व्यूज के बाद युवाओं के लिए जारी किया खास धन्यवाद संदेश

    इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का जलवा रिकॉर्ड व्यूज के बाद युवाओं के लिए जारी किया खास धन्यवाद संदेश


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए देश के युवाओं और नागरिकों से संवाद स्थापित किया है। हाल ही में जारी उनके वीडियो संदेश को मिली अभूतपूर्व प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने नया वीडियो साझा कर सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। खास तौर पर युवाओं और जेन जी का धन्यवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों का स्नेह और सकारात्मक सुझाव उन्हें लगातार प्रेरित करते हैं तथा भविष्य में भी यह संवाद और अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा।

    अपने नए वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली रात देशवासियों से संवाद का अवसर मिला और जिस तरह लोगों ने वीडियो को देखा उस पर अपनी प्रतिक्रिया दी तथा सकारात्मक सुझाव साझा किए उसके लिए वह सभी के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास और स्नेह उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है और आने वाले समय में भी यह रिश्ता लगातार मजबूत होता रहेगा। वीडियो के साथ साझा किए गए संदेश में भी प्रधानमंत्री ने युवाओं को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए लिखा कि जिन्होंने उनका वीडियो देखा और उस पर अपनी प्रतिक्रिया दी उनके प्रति वह आभार व्यक्त करते हैं।

    प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब उनका पिछला इंस्टाग्राम वीडियो सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड व्यूज हासिल कर सुर्खियों में बना हुआ है। बताया जा रहा है कि वीडियो को पहले चौबीस घंटे के भीतर 30 करोड़ से अधिक बार देखा गया। इस असाधारण प्रतिक्रिया ने इसे इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो में शामिल कर दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने वीडियो पर अपनी राय और सुझाव भी साझा किए जिससे यह सोशल मीडिया पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गया।

    वीडियो की लोकप्रियता का असर प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी दिखाई दिया। रिकॉर्ड व्यूज के साथ उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर बड़ी संख्या में नए फॉलोअर्स जुड़े। इससे यह साफ हो गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री की पहुंच लगातार मजबूत बनी हुई है और युवाओं के बीच उनकी सक्रिय मौजूदगी पहले की तरह प्रभावी है।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ऐसे वैश्विक राजनेता हैं जिन्होंने इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स का आंकड़ा पार किया है। सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता लंबे समय से चर्चा का विषय रही है और विभिन्न राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनके वीडियो और संदेशों को बड़ी संख्या में लोग देखते और साझा करते हैं।

    सोशल मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल माध्यम अब नेताओं और नागरिकों के बीच सीधे संवाद का सबसे प्रभावी मंच बन चुका है। प्रधानमंत्री का ताजा वीडियो भी इसी बदलते दौर की एक मिसाल माना जा रहा है जहां कुछ ही घंटों में करोड़ों लोगों तक संदेश पहुंच गया। बड़ी संख्या में युवाओं ने वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कर यह संकेत दिया कि सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि जनसंवाद का भी महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बन चुका है।

    प्रधानमंत्री के नए धन्यवाद संदेश को भी लोगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि जनता से सीधे संवाद की यह शैली लोकतांत्रिक सहभागिता को मजबूत बनाती है जबकि बड़ी संख्या में युवाओं ने इसे प्रेरणादायक पहल बताया है। रिकॉर्ड व्यूज और लगातार बढ़ती डिजिटल पहुंच के बीच प्रधानमंत्री का यह नया संदेश सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है।

  • नीट परीक्षा व्यवस्था के बीच पीएम मोदी का संवेदनशील कदम एयरपोर्ट पर रोका काफिला

    नीट परीक्षा व्यवस्था के बीच पीएम मोदी का संवेदनशील कदम एयरपोर्ट पर रोका काफिला


    नई दिल्ली । NEET री एग्जाम के पहले सरकार पूरी ताकत झोंक रही है. बार बार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं के बाद इस परीक्षा को सुचारू और पारदर्शी तरीके से कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. इस बार देश भर में लाखों छात्र छात्राएं शामिल हो रहे हैं. सरकार का प्रयास है कि किसी भी छात्र को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया जिसने सभी का ध्यान खींचा है. प्रधानमंत्री दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे. यहां से उन्हें अपने आवास के लिए रवाना होना था. लेकिन उन्होंने तत्काल प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी.

    अगर पीएम का काफिला उस समय एयरपोर्ट से निकलता तो राजधानी की कई सड़कों पर यातायात रोकना पड़ता. उसी समय हजारों छात्र नीट परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे थे. इससे छात्रों को देरी और परेशानी का सामना करना पड़ सकता था.

    ऐसे में प्रधानमंत्री ने निर्णय लिया कि वे एयरपोर्ट पर ही रुकेंगे. उन्होंने अपने काफिले को वहीं रोक दिया. बताया जा रहा है कि वे तब तक एयरपोर्ट पर रहे जब तक परीक्षा शुरू नहीं हुई. इसके बाद ही वे अपने आवास के लिए रवाना हुए.

    देश भर में इस बार नीट परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा किया जा रहा है. परीक्षा में कुल 22.79 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं. यह परीक्षा देश के साथ साथ विदेशों के कुछ केंद्रों पर भी आयोजित की गई है. कुल 551 शहरों और 14 विदेश शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. लगभग 5000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा संपन्न हो रही है.

    परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. हर केंद्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और जैमर का उपयोग किया जा रहा है. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके.

    इस पूरे आयोजन में दो लाख से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. सैकड़ों सिटी कोऑर्डिनेटर और हजारों ऑब्जर्वर भी तैनात किए गए हैं जो परीक्षा की निगरानी कर रहे हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो.

    छात्रों के लिए यह परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमित सीटों के कारण प्रतिस्पर्धा काफी कठिन है. ऐसे में सरकार और प्रशासन दोनों का प्रयास है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए. प्रधानमंत्री का यह निर्णय भी इसी दिशा में एक संवेदनशील कदम के रूप में देखा जा रहा है.

  • सोना महंगा, आयात घटा और राजस्व बढ़ा भारत की अर्थव्यवस्था में नीतिगत बदलावों का बड़ा प्रभाव

    सोना महंगा, आयात घटा और राजस्व बढ़ा भारत की अर्थव्यवस्था में नीतिगत बदलावों का बड़ा प्रभाव


    नई द‍िल्‍ली । भारत की आर्थिक नीतियों और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का असर अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार देश में सोने के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले कुछ समय में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीद को सीमित करने की अपील के बाद देखने को मिली है।

    सरकार ने 13 मई को सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिसका सीधा प्रभाव आयात मात्रा पर पड़ा है। पहले जहां मासिक आयात 75 से 100 टन के बीच रहता था, वहीं अब यह घटकर लगभग 25 से 30 टन रह गया है। हालांकि मात्रा में भारी गिरावट के बावजूद सोने के मूल्य में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की ऊंची कीमतें बताई जा रही हैं। मई महीने में भारत का सोना आयात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

    आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल और मई की अवधि में सोने का कुल आयात 60 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। हालांकि इस दौरान मात्रा के लिहाज से आयात में 4.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 721.03 टन पर आ गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सोने की कीमतों में वृद्धि ने आयात के मूल्य को बढ़ा दिया है जबकि वास्तविक खपत में कमी आई है।

    भारत के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत से अधिक बनी हुई है, जो यह दर्शाता है कि यह अब भी देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण घटक है। सरकार के इन कदमों का उद्देश्य सोने के आयात को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम करना माना जा रहा है।

    इसी बीच, देश के टैक्स संग्रह में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार शुद्ध आयकर संग्रह लगभग 15 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। इसमें कॉरपोरेट और गैर-कॉरपोरेट दोनों प्रकार के कर शामिल हैं।

    कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 8 प्रतिशत बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 89,026 करोड़ रुपये के रिफंड भी जारी किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि दर्शाते हैं। वहीं सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 12 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 6.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

    यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि एक ओर जहां सोने के आयात में सरकार की नीतियों और वैश्विक कीमतों के कारण गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर कर संग्रह में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था में नीतिगत संतुलन और वित्तीय अनुशासन की ओर संकेत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यदि यही रुझान जारी रहता है तो यह देश की आर्थिक स्थिरता और विकास दर को और मजबूती दे सकता है।

  • डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है

    डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है


    नई द‍िल्‍ली । फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत की तेजी से बदलती तस्वीर और उसकी वैश्विक भूमिका को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि फ्रांस में बसे भारतीय न केवल दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं बल्कि 21वीं सदी के भारत फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और योगदान भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है और देश ने विकास के कई नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद दोगुना हुआ है जबकि निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और आज देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माण केंद्र बनकर उभरा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विकास केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी एक बड़ी कहानी है। उन्होंने बताया कि देश में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हुई है और विश्वविद्यालयों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ है। हाईवे निर्माण की गति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है जबकि मेट्रो नेटवर्क ने रिकॉर्ड स्तर पर विस्तार किया है। इन प्रयासों ने देश में कनेक्टिविटी को मजबूत किया है और विकास को नई रफ्तार दी है।

    डिजिटल इंडिया अभियान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने डिजिटल तकनीक को जनसामान्य तक पहुंचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि देश में करोड़ों नागरिकों को यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई गई है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मेडिकल रिकॉर्ड अब सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हैं जिससे मरीजों और स्वास्थ्य संस्थानों दोनों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कल्पना करना भी कठिन था कि देश के दूरदराज गांवों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंच जाएगा लेकिन आज यह वास्तविकता बन चुकी है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की आकांक्षाओं का नया दौर है जहां लोगों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। अब लोग केवल मूलभूत सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं बल्कि बेहतर जीवन स्तर और विश्वस्तरीय सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं। जहां बिजली पहुंची है वहां लोग स्मार्ट जीवनशैली चाहते हैं। जहां रेल पहुंची है वहां हाई स्पीड कनेक्टिविटी की मांग है और जहां इंटरनेट पहुंचा है वहां लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल नवाचार में नेतृत्व की आकांक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपने नागरिकों के सपनों को साकार करने के साथ साथ भविष्य का मजबूत इकोसिस्टम भी तैयार कर रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देशों के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं बल्कि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। दुनिया के देश विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला और स्थिर साझेदारी की तलाश में हैं। ऐसे समय में भारत एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत विकास नवाचार और वैश्विक सहयोग के नए मानक स्थापित करेगा और विश्व मंच पर अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगा।

  • भारत का सौर कृषि मॉडल बन सकता है अफ्रीका के लिए विकास का नया रोडमैप: प्रधानमंत्री मोदी

    भारत का सौर कृषि मॉडल बन सकता है अफ्रीका के लिए विकास का नया रोडमैप: प्रधानमंत्री मोदी


    नई दिल्ली ।
    भारत में विकसित हो रहा सौर ऊर्जा आधारित कृषि मॉडल अब वैश्विक स्तर पर एक प्रभावी विकास विकल्प के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा है कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा आधारित कृषि प्रणाली अफ्रीका जैसे क्षेत्रों के लिए एक व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकने वाला समाधान बन सकती है।

    प्रधानमंत्री ने यह बात साझा समृद्धि, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के संदर्भ में कही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक लेख का उल्लेख करते हुए कहा कि सौर ऊर्जा अब कृषि क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी शक्ति बन चुकी है, जो न केवल उत्पादन बढ़ा रही है बल्कि किसानों की आय में भी सुधार कर रही है।

    भारत में लागू की गई प्रमुख योजनाओं में PM-KUSUM Scheme को इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। इस योजना के तहत किसानों को सौर पंप और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे पारंपरिक बिजली और डीजल पर निर्भरता कम हो रही है।

    इसके साथ ही International Solar Alliance जैसी अंतरराष्ट्रीय पहल भारत की सौर ऊर्जा क्षमता को वैश्विक सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। इस गठबंधन का उद्देश्य विकासशील देशों में स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच को आसान बनाना और सौर ऊर्जा के उपयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का अनुभव यह दर्शाता है कि नवीकरणीय ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है। सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और कृषि प्रणाली से फसल उत्पादन में सुधार के साथ-साथ किसानों की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सौर कृषि मॉडल ने यह साबित किया है कि यदि तकनीक और नीति को सही तरीके से जोड़ा जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा संकट को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है। इससे कृषि उत्पादन अधिक स्थिर और टिकाऊ बनता है, जो लंबे समय में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करता है।

    लेख में यह भी उल्लेख किया गया कि जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संसाधनों की कमी जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत का यह मॉडल अन्य देशों के लिए एक व्यावहारिक समाधान प्रदान कर सकता है। विशेष रूप से अफ्रीकी देशों में, जहां ऊर्जा पहुंच और कृषि उत्पादकता एक बड़ी चुनौती है, यह मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    केंद्रीय मंत्री Pralhad Joshi ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत की सौर क्रांति अब देश की सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल रही है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    कुल मिलाकर, भारत का सौर ऊर्जा आधारित कृषि मॉडल एक ऐसे विकास ढांचे के रूप में उभर रहा है, जो आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय तीनों स्तरों पर संतुलित परिणाम देने की क्षमता रखता है। आने वाले वर्षों में इसके वैश्विक विस्तार की संभावनाएं और अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।

  • अर्मेनिया चुनाव में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा- जनादेश नेतृत्व में जनता के भरोसे का संकेत

    अर्मेनिया चुनाव में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा- जनादेश नेतृत्व में जनता के भरोसे का संकेत

    नई दिल्ली । अर्मेनिया में हुए संसदीय चुनाव में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान को चुनाव में मिली सफलता पर बधाई दी है और इसे जनता के भरोसे और मजबूत जनादेश का संकेत बताया है।

    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने संदेश में कहा कि चुनाव परिणाम अर्मेनिया के लोगों के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के नेतृत्व और दृष्टिकोण में विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग के ऐतिहासिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा आने वाले समय में द्विपक्षीय साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।

    अर्मेनिया में 7 जून को हुए संसदीय चुनावों में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखी। शुरुआती और आधिकारिक रुझानों के अनुसार पार्टी को लगभग 49.81 प्रतिशत वोट मिले, जिससे वह सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरकर सामने आई। इस चुनावी परिणाम ने देश की राजनीतिक दिशा को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए हैं।

    चुनाव में अन्य दलों में स्ट्रॉन्ग अर्मेनिया अलायंस को लगभग 23.29 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए, जबकि पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट कोचरियन के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 9.94 प्रतिशत वोट मिले। इसके अलावा अन्य छोटी पार्टियों को भी सीमित समर्थन मिला, हालांकि वे निर्णायक भूमिका में नहीं रहीं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने अर्मेनिया की विदेश नीति और क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर डाला है। रूस और पश्चिमी देशों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच यह परिणाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अर्मेनिया लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव से पहले के दिनों में क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी चर्चा में रहीं, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और राजनीतिक संबंधों को लेकर विभिन्न देशों के बीच तनाव और सहयोग दोनों ही देखने को मिले। इन परिस्थितियों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया था।

    चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान ने अपनी पार्टी की जीत को ऐतिहासिक बताया और इसे जनता के विश्वास की पुष्टि करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आगे भी विकास और स्थिरता की दिशा में काम करती रहेगी।

    भारत और अर्मेनिया के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं, जिसमें व्यापार, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं। पीएम मोदी के संदेश को इसी कड़ी में दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय अर्मेनिया के इस राजनीतिक बदलाव और उसके क्षेत्रीय प्रभावों पर नजर बनाए हुए है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि नई राजनीतिक स्थिति क्षेत्रीय कूटनीति और वैश्विक संतुलन को किस तरह प्रभावित करती है।