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  • नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी का संबोधन, 2014 के चुनाव नतीजे किए याद; बोले- ‘16 मई को कुछ खास हुआ था’, भारत की विकास यात्रा पर गिनाईं उपलब्धियां

    नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी का संबोधन, 2014 के चुनाव नतीजे किए याद; बोले- ‘16 मई को कुछ खास हुआ था’, भारत की विकास यात्रा पर गिनाईं उपलब्धियां



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड के आधिकारिक दौरे पर हैं, जो उनकी पांच देशों की यात्रा का दूसरा पड़ाव है। द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव के नतीजों को याद किया और कहा कि 16 मई 2014 को देश में स्थिर और पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ था।

    पीएम मोदी ने कहा, “आज से 12 वर्ष पहले 2014 में 16 मई को कुछ खास हुआ था। उस दिन भारतवासियों के विश्वास ने नई दिशा दी, जिसने उन्हें बिना रुके और बिना थके काम करने की ताकत दी।”

    अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना की और कहा कि नीदरलैंड का हेग आज भारत-नीदरलैंड मित्रता का जीवंत प्रतीक बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट और पता बदल सकता है, लेकिन भारतीयों का अपनी संस्कृति और देश के प्रति लगाव हमेशा बना रहता है।

    पीएम मोदी ने भारत की विकास यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि देश आज बड़े पैमाने पर सोलर पार्क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क, इलेक्ट्रिफाइड रेल नेटवर्क और सिविल एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास वाले देशों में शामिल हो रहा है और नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के निमंत्रण पर हो रही है। नीदरलैंड में करीब 90,000 से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं और लगभग 3,500 भारतीय छात्र वहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    पीएम मोदी 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे और इस दौरान कई द्विपक्षीय और सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

  • PM मोदी का UAE दौरा: अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर अहम चर्चा

    PM मोदी का UAE दौरा: अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर अहम चर्चा



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे, जहां अबू धाबी एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनका भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता शुरू हुई। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक हालात पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा है और दोनों देश आने वाले समय में हर क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति पर भी चिंता जताई गई, जहां दोनों नेताओं ने संयम और संवाद को ही समाधान बताया।

    इस दौरे को लेकर सबसे अहम घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच ऊर्जा और निवेश से जुड़े कई समझौते हुए। LPG सप्लाई, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व, रक्षा सहयोग और वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर जैसे क्षेत्रों में MoU साइन किए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार UAE ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, RBL बैंक और सम्मान कैपिटल में लगभग 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है।

    इसके अलावा UAE ने अपनी क्रूड ऑयल उत्पादन क्षमता को 2027 तक 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में यह दौरा भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

    भारत और UAE के बीच पहले से ही गहरा व्यापारिक संबंध है। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और दोनों देशों के बीच 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होता है। भारत पेट्रोलियम प्रोडक्ट, जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल, फूड आइटम, मशीनरी और केमिकल्स का बड़ा निर्यातक है।

    कुल मिलाकर यह दौरा ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ता नजर आ रहा है।

  • ऊर्जा संकट और पीएम अपील पर सियासी संग्राम: मायावती ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल, कोरोना काल की दिलाई याद

    ऊर्जा संकट और पीएम अपील पर सियासी संग्राम: मायावती ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल, कोरोना काल की दिलाई याद




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय हालातों को देखते हुए देशवासियों से संयमित जीवनशैली अपनाने की बात कही थी, उस पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग अपनाने, एक साल तक विदेश यात्रा सीमित करने, सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने जैसी अपीलें की थीं। उनका कहना था कि इससे देश की ऊर्जा खपत घटेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।

    इस अपील के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि देश पहले ही कोरोना महामारी के आर्थिक झटकों से उबर रहा है और आम जनता अभी भी रोज़गार और महंगाई के दबाव में जी रही है। ऐसे में सरकार को केवल संयम की अपील करने के बजाय लोगों को वास्तविक आर्थिक राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

    मायावती ने अपने बयान में कहा कि देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोग पहले ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं और उनके पास अब और ज्यादा आर्थिक बोझ सहने की क्षमता नहीं बची है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के कारण आर्थिक स्थिति और बिगड़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ेगा।

    उन्होंने कोरोना काल को याद करते हुए कहा कि उस समय भी जनता ने भारी कठिनाइयों का सामना किया था और आज भी उसका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह केवल सुझाव या अपील देने के बजाय गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ठोस आर्थिक सहायता और राहत योजनाएं लागू करे।

    पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य ऊर्जा बचत और आयात पर निर्भरता कम करना बताया जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर संयम और संसाधनों के बेहतर उपयोग से आर्थिक दबाव को कम किया जा सकता है।

    कुल मिलाकर इस मुद्दे ने एक बार फिर से देश में आर्थिक नीतियों और जनता पर पड़ने वाले असर को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, जहां एक ओर सरकार संयम और बचत पर जोर दे रही है, वहीं विपक्ष गरीब और मध्यम वर्ग की वास्तविक स्थिति को केंद्र में रखकर राहत की मांग कर रहा है।

  • पीएम की अपील पर राहुल गांधी का पलटवार-12 साल की विफल नीतियों का परिणाम है ये हालात..

    पीएम की अपील पर राहुल गांधी का पलटवार-12 साल की विफल नीतियों का परिणाम है ये हालात..

    नई दिल्ली ।
    देश इस समय वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के प्रभाव से गुजर रहा है, जिसका असर सीधे तौर पर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ रहा है। इसी माहौल में प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों से अपील की गई कि वे ऊर्जा और संसाधनों का समझदारी से उपयोग करें और अनावश्यक खर्चों से बचें। यह अपील ऐसे समय में आई है जब पेट्रोल और गैस की उपलब्धता और कीमतों को लेकर पहले से ही चिंता का माहौल बना हुआ है।

    प्रधानमंत्री ने जनता से कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देश को सामूहिक रूप से ऊर्जा बचत की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें, जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन अपनाएं और डिजिटल वर्किंग मॉडल को प्राथमिकता दें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अनावश्यक खर्चों, खासकर सोने जैसी वस्तुओं की खरीद पर अस्थायी रूप से संयम बरतना देश की अर्थव्यवस्था के लिए मददगार हो सकता है।

    इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस अपील पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे सरकार की नीतिगत विफलता का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि जब देश के नागरिकों को यह बताने की नौबत आ जाए कि उन्हें क्या खरीदना है और क्या नहीं, तो यह एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह केवल सलाह नहीं बल्कि आर्थिक प्रबंधन की कमजोरी का परिणाम है।

    राहुल गांधी ने आगे कहा कि पिछले कई वर्षों की नीतियों के कारण देश ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां आम जनता पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली जा रही है। उनका कहना था कि सरकार अपनी जवाबदेही से बचने के लिए जनता को संदेश दे रही है कि वह अपने खर्च कम करे और जीवनशैली में बदलाव लाए।

    ऊर्जा संकट का यह दौर पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने और कई क्षेत्रों में तनाव बढ़ने के कारण दुनिया भर के देशों में ऊर्जा कीमतों पर असर पड़ा है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन जाती है, क्योंकि यहां बड़ी मात्रा में तेल और गैस बाहर से मंगाया जाता है।

    सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह अपील किसी कमी को छिपाने के लिए नहीं बल्कि एक सतर्कता और सहयोग की भावना के तहत की गई है, ताकि देश इस वैश्विक संकट का बेहतर तरीके से सामना कर सके। वहीं विपक्ष का मानना है कि अगर नीति और प्रबंधन मजबूत होते तो ऐसी अपील की जरूरत नहीं पड़ती।

    इस पूरे मामले ने एक बार फिर राजनीति में आर्थिक नीतियों और जिम्मेदारी को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ सरकार इसे जनभागीदारी का हिस्सा बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे विफलता का संकेत मान रहा है।

    आने वाले समय में यह मुद्दा और भी चर्चा में रह सकता है, क्योंकि वैश्विक हालात अभी भी स्थिर नहीं हैं और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जीवनशैली पर पड़ता दिख रहा है।

  • गणित ओलंपियाड में ऐतिहासिक प्रदर्शन पर पीएम मोदी ने जताया गर्व, बेटियों की जमकर तारीफ

    गणित ओलंपियाड में ऐतिहासिक प्रदर्शन पर पीएम मोदी ने जताया गर्व, बेटियों की जमकर तारीफ


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में देश की उन प्रतिभाशाली छात्राओं की खुलकर प्रशंसा की, जिन्होंने फ्रांस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन कर भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि यह भारत की युवा पीढ़ी की क्षमता और मेहनत को दर्शाता है।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि यह प्रतियोगिता दुनिया की सबसे कठिन गणितीय प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है, जहां प्रतिभागियों को सीमित समय में बेहद जटिल समस्याओं को हल करना होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे दबाव भरे माहौल में भी भारत की बेटियों ने आत्मविश्वास और धैर्य के साथ बेहतरीन प्रदर्शन किया, जो सराहनीय है।

    उन्होंने विशेष रूप से उन छात्राओं का उल्लेख किया जिन्होंने इस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इनमें मुंबई की श्रेया मुंदड़ा, तिरुवनंतपुरम की संजना चाको, चेन्नई की शिवानी भरत कुमार और कोलकाता की श्रीमोई बेरा शामिल रहीं। इन छात्राओं ने मिलकर भारत को दुनिया में छठा स्थान दिलाया। वहीं व्यक्तिगत प्रदर्शन में श्रेया ने स्वर्ण पदक, संजना ने रजत और शिवानी ने कांस्य पदक हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया।

    प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इस ओलंपियाड के लिए चयन प्रक्रिया बेहद कठिन और कई चरणों वाली होती है। छात्रों को पहले क्षेत्रीय स्तर, फिर राज्य स्तर और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। इसके बाद चुनी गई प्रतिभागियों को एक विशेष प्रशिक्षण शिविर में शामिल किया जाता है, जहां उनकी क्षमता को और निखारा जाता है और अंतिम टीम का चयन किया जाता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि हर साल लाखों छात्राएं इस गणित ओलंपियाड प्रक्रिया में हिस्सा लेती हैं और समय के साथ यह संख्या लगातार बढ़ रही है। यह इस बात का संकेत है कि देश की बेटियों में विज्ञान और गणित के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं।

    अंत में प्रधानमंत्री ने इन छात्राओं के साथ-साथ उनके माता-पिता और शिक्षकों की भी सराहना की, जिन्होंने इस सफलता के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और भारत को शिक्षा और प्रतिभा के क्षेत्र में और मजबूत करेगी।

  • भारत की वैज्ञानिक ताकत पर जोर, पीएम मोदी ने न्यूक्लियर प्रोग्राम की उपलब्धियों को सराहा..

    भारत की वैज्ञानिक ताकत पर जोर, पीएम मोदी ने न्यूक्लियर प्रोग्राम की उपलब्धियों को सराहा..

    नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में देश की वैज्ञानिक प्रगति और सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम के महत्व पर विस्तार से विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में विज्ञान हमेशा एक मजबूत आधार रहा है और देश के वैज्ञानिक इसी सोच के साथ लगातार नई उपलब्धियों को हासिल कर रहे हैं।

    अपने संबोधन में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम ने भारत के औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षेत्र और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम का असर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि से जुड़े लोगों के साथ-साथ तकनीकी नवाचार करने वालों तक भी पहुंच रहा है, जिससे देश में विकास की गति और मजबूत हुई है।

    प्रधानमंत्री ने हाल ही में तमिलनाडु के कलपक्कम में हासिल की गई वैज्ञानिक उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है, जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जाता है। यह वह अवस्था होती है जब रिएक्टर अपने आप ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को स्थिर रूप से शुरू कर देता है।

    उन्होंने आगे बताया कि ब्रीडर रिएक्टर की विशेषता यह है कि यह न केवल ऊर्जा उत्पन्न करता है, बल्कि भविष्य के लिए आवश्यक ईंधन भी तैयार करने की क्षमता रखता है। यह तकनीक भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करती है और आने वाले समय में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

    अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने मार्च 2024 के उस अनुभव को भी याद किया, जब वे कलपक्कम में रिएक्टर की कोर लोडिंग प्रक्रिया के साक्षी बने थे। उन्होंने इसे देश की वैज्ञानिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण बताया।

    अंत में प्रधानमंत्री ने देश के सभी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को बधाई दी, जिन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास भारत को तकनीकी रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में लगातार मदद करेंगे।

  • यूपी को मिलेगा विकास का नया रफ्तार-पथ, 37 हजार करोड़ की गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना तैयार

    यूपी को मिलेगा विकास का नया रफ्तार-पथ, 37 हजार करोड़ की गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना तैयार


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार को नई दिशा देने वाली गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना अब पूरी तरह तैयार हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरदोई में किया जाएगा। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे देश के सबसे बड़े सड़क मार्गों में से एक माना जा रहा है, जो राज्य की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।

    करीब 37 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना लंबे समय से निर्माणाधीन थी, जिसे तेजी से पूरा करने के लिए अलग-अलग हिस्सों में बांटकर काम कराया गया। पूरे एक्सप्रेस-वे को चार बड़े पैकेज में विभाजित किया गया, जिससे निर्माण कार्य समानांतर रूप से आगे बढ़ सका और समय पर पूरा किया जा सका।

    इस पूरी परियोजना में आधुनिक तकनीक और कड़े गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया है। निर्माण प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी गई, ताकि काम की गुणवत्ता और गति दोनों सुनिश्चित की जा सकें। चारों हिस्सों में अलग-अलग लंबाई और लागत के पैकेज शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक भाग अपने आप में एक बड़ा निर्माण कार्य रहा है।

    गंगा एक्सप्रेस-वे को केवल एक सड़क परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है। इसके किनारे औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों की योजना बनाई गई है, जिससे रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

    यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाएगा। इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी, बल्कि माल ढुलाई की लागत भी घटेगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।

    इस परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश को एक मजबूत औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में उभरने का अवसर मिलेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क और तेज कनेक्टिविटी से राज्य में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी और यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास का एक बड़ा आधार साबित हो सकती है।

  • पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बयान भारत ने दिया संवाद से समाधान का संदेश..

    पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बयान भारत ने दिया संवाद से समाधान का संदेश..

    नई दिल्ली:  नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि यह युद्ध केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि इस संकट ने दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिसका प्रभाव भारत पर भी देखने को मिल रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन भारत लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत ने हमेशा शांति और संवाद का समर्थन किया है और इसी नीति के तहत सभी संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए रखा है। उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने क्षेत्र के कई राष्ट्राध्यक्षों से दो बार बातचीत की है और ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ लगातार संवाद जारी है

    पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में उत्पन्न स्थिति पर भी चिंता जताई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी संख्या में जहाजों के फंसे होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें भारतीय क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा और व्यापारिक जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और भारत अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है

    उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ढांचों पर हो रहे हमलों का कड़ा विरोध करता है। किसी भी प्रकार का हिंसक संघर्ष मानवता के हित में नहीं है और सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति के रास्ते पर लौटना चाहिए

    विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट के दौरान अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया गया है। खास तौर पर ईरान से 1,000 से अधिक भारतीयों की वापसी हुई है, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं

    प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस दौरान कुछ भारतीयों की जान गई है और कुछ लोग घायल हुए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जा रही है और घायलों के इलाज की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है

    ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर भी सरकार सक्रिय है। प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल के दिनों में कई देशों से तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश की जरूरतों से जुड़ी आवश्यक आपूर्ति बाधित न हो

    प्रधानमंत्री का यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत इस वैश्विक संकट के बीच संतुलित कूटनीति, संवाद और मानवीय दृष्टिकोण के साथ स्थिति को संभालने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है

  • पश्चिम एशिया तनाव के बीच पीएम मोदी ने ईरान से की अहम चर्चा शांति का संदेश

    पश्चिम एशिया तनाव के बीच पीएम मोदी ने ईरान से की अहम चर्चा शांति का संदेश

    नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की और उन्हें ईद तथा नवरोज के अवसर पर शुभकामनाएं दीं यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बीच संघर्ष लगातार जारी है

    प्रधानमंत्री ने अपनी बातचीत में पश्चिम एशिया में शांति स्थिरता और समृद्धि की उम्मीद जताई उन्होंने कहा कि ऐसे पावन अवसर आपसी समझ और सहयोग को बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं और क्षेत्र में सकारात्मक माहौल तैयार कर सकते हैं

    पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि क्षेत्र में महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी बाधित कर सकते हैं उन्होंने ऐसे कदमों की निंदा करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की

    समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री रास्तों का सुरक्षित और निर्बाध रहना बेहद जरूरी है भारत ने इस दौरान ईरान का आभार भी जताया कि वह वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रख रहा है

    इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच 12 मार्च को बातचीत हुई थी जिसमें क्षेत्र में बढ़ते तनाव और उसके वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की गई थी उस समय भी प्रधानमंत्री ने आवश्यक वस्तुओं और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति की आवश्यकता पर जोर दिया था और चेतावनी दी थी कि किसी भी तरह की रुकावट भारत और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है

    भारत लगातार इस पूरे संकट के दौरान “डायलॉग और डिप्लोमेसी” की नीति पर जोर दे रहा है प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कई देशों के नेताओं से बातचीत कर शांति की पहल को आगे बढ़ाया है उन्होंने कुवैत के क्राउन प्रिंस ओमान के सुल्तान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मलेशिया के प्रधानमंत्री और कतर के अमीर से भी बातचीत की थी

    इन सभी बातचीतों में भारत का संदेश एक ही रहा है कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि बातचीत और सहयोग ही स्थायी शांति का सबसे प्रभावी रास्ता है

    वर्तमान में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और व्यापार बाधित होने की आशंका बढ़ गई है ऐसे में भारत का यह कूटनीतिक प्रयास न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    प्रधानमंत्री मोदी की यह बातचीत शांति संवाद और सहयोग पर आधारित भारत की विदेश नीति को दर्शाती है जो मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच संतुलन और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है
  • पुडुचेरी में डबल इंजन सरकार का जश्न, पीएम मोदी ने किया 2,700 करोड़ परियोजनाओं का उद्घाटन

    पुडुचेरी में डबल इंजन सरकार का जश्न, पीएम मोदी ने किया 2,700 करोड़ परियोजनाओं का उद्घाटन


    पुडुचेरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पुडुचेरी में आयोजित जनसभा में कांग्रेस और तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की विकास यात्रा में कांग्रेस और डीएमके दोनों ही बड़े स्पीड ब्रेकर साबित हुए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अब डबल इंजन सरकार के कामों का जश्न मनाने का समय है और विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने मौके पर 2,700 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने समावेशी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों अवसंरचना विकास पर विशेष ध्यान दिया है।

    डीएमके और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पहले के दौर में पुडुचेरी के लोग भारी कष्ट झेलते रहे। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और अपराध आम बात थी। राशन की दुकानों में चावल नहीं मिलता था, सैलरी देर से मिलती थी, और सड़कों पर गुंडों और ड्रग माफिया का राज था। प्रधानमंत्री ने कहा, “कांग्रेस ने पुडुचेरी को दिल्ली में बैठे एक परिवार का एटीएम बना दिया था। डीएमके की बात करें तो तमिलनाडु में हो रहे घोटालों की लंबी सूची देखी जा सकती है।”

    पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस और डीएमके अब भी सत्ता की भूखी हैं, लेकिन पुडुचेरी के लोग इसे दोबारा नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने पुडुचेरी में विकास और कल्याण के कामों को तेज गति से आगे बढ़ाया है।

    प्रधानमंत्री ने पुडुचेरी के पर्यटन क्षेत्र को इसकी ताकत बताते हुए कहा कि यह वीकेंड डेस्टिनेशन के रूप में पहले से ही हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। ट्रेनें और उड़ानें हमेशा भरी रहती हैं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक पर्यटन, इको-टूरिज्म और स्वास्थ्य पर्यटन में निवेश से पुडुचेरी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

    स्वास्थ्य सेवा को लेकर पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि जब तक मानव संसाधन स्वस्थ रहेगा, तब तक राष्ट्र की प्रगति संभव है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सभी के लिए सुलभ, उपलब्ध और किफायती होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि पुडुचेरी के किसी भी नागरिक को इलाज के लिए लंबी दूरी की यात्रा करने की जरूरत न पड़े।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पुडुचेरी मेडिकल टूरिज्म हब बन सकता है। वर्तमान में यहां नौ मेडिकल कॉलेज हैं, और केंद्र सरकार की नीतियां इसे वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य पर्यटन केंद्र बनाने में सहायक होंगी।

    पीएम मोदी के संबोधन में डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों को उजागर किया गया और कांग्रेस-डीएमके शासनकाल की कमियों का उदाहरण देते हुए विकास और कल्याण पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने पुडुचेरीवासियों से कहा कि अब भ्रष्टाचार और अस्थिरता के दौर में लौटने का समय नहीं है, बल्कि विकास और नई परियोजनाओं का लाभ उठाने का समय है।