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  • कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश

    कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश


    नई दिल्ली: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का निर्देश मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह वही दफ्तर है जो लगभग 48 वर्षों तक कांग्रेस की पहचान बना रहा और पार्टी के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का गवाह रहा। सरकार की ओर से कांग्रेस को शनिवार तक इस भवन को खाली करने के लिए कहा गया है, जिससे यह मामला अब सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को केवल 24 अकबर रोड ही नहीं बल्कि 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस के दफ्तर को भी खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि कांग्रेस ने पिछले वर्ष कोटला मार्ग पर अपने नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ का उद्घाटन कर दिया था, लेकिन अब तक वह पूरी तरह से पुराने दफ्तर से शिफ्ट नहीं हो पाई है। पार्टी की गतिविधियां अभी भी अकबर रोड स्थित भवन में जारी हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

    कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे को लेकर मंथन चल रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि 24 अकबर रोड से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है, क्योंकि यह दफ्तर केवल एक कार्यालय नहीं बल्कि पार्टी के इतिहास और संघर्ष का प्रतीक रहा है।

    इस दफ्तर का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। ब्रिटिश शासन के समय यह भवन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास स्थान था। बाद में यह म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ खिन क्यी का निवास भी रहा, जिनकी बेटी आंग सान सू की ने आगे चलकर नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया। इस तरह यह भवन अंतरराष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

    कांग्रेस के लिए यह दफ्तर 1970 के दशक के अंत से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया। 1977 के चुनाव में हार के बाद जब पार्टी में विभाजन हुआ और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट को एक नए केंद्र की जरूरत थी, तब जी वेंकटस्वामी ने अपना बंगला पार्टी को उपलब्ध कराया। यहीं से कांग्रेस की राजनीतिक वापसी की कहानी शुरू हुई। इसके बाद यह दफ्तर इंदिरा गांधी के नेतृत्व से लेकर राजीव गांधी, पी वी नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक पार्टी का प्रमुख केंद्र बना रहा।

    समय के साथ इस भवन को पार्टी ने अपनी जरूरतों के अनुसार विस्तार भी दिया, लेकिन हाल के वर्षों में संगठन के पुनर्गठन के चलते पार्टी ने नया मुख्यालय बनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में कोटला मार्ग स्थित इंदिरा भवन’ का उद्घाटन किया गया, जो अब कांग्रेस का नया ठिकाना बन चुका है।

    अब जब सरकार ने पुराने दफ्तर को खाली करने का आदेश दिया है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक बदलाव भी माना जा रहा है। कांग्रेस इस आदेश को लेकर अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करने पर विचार कर रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस आदेश पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह अपने ऐतिहासिक दफ्तर को लेकर कोई कानूनी लड़ाई लड़ती है या फिर पूरी तरह से नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ से अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है।

  • गिरधारी यादव मामले में नया मोड़ जेडीयू के कदम पर आरजेडी ने दिया बया

    गिरधारी यादव मामले में नया मोड़ जेडीयू के कदम पर आरजेडी ने दिया बया


    नई दिल्ली:जेडीयू सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर उठाए गए कदम के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। जेडीयू की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। पार्टी का आरोप है कि गिरधारी यादव के बेटे ने 2025 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और इस दौरान खुद गिरधारी यादव ने भी प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी आधार पर जेडीयू ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का रुख अपनाया है।

    इस पूरे मामले पर आरजेडी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। आरजेडी सांसद मीसा भारती ने जेडीयू के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी का बेटा चुनाव लड़ता है तो वह एक वयस्क व्यक्ति है और उसे अपने फैसले लेने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर नागरिक को चुनाव लड़ने और अपनी राजनीतिक राह चुनने की आजादी है। मीसा भारती ने यह भी कहा कि किसी परिवार के भीतर अलग अलग लोग अलग दलों से जुड़ सकते हैं और यह पूरी तरह से व्यक्तिगत अधिकार का मामला है।

    उन्होंने आगे कहा कि चुनाव लड़ना किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी प्रकार से गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को वोट डालने और अपनी राजनीतिक पसंद रखने की स्वतंत्रता है। ऐसे में यदि किसी के परिवार का सदस्य किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ता है तो इसे आधार बनाकर कार्रवाई करना उचित नहीं है।

    मीसा भारती ने यह भी कहा कि कई अन्य नेता भी आरजेडी के लिए चुनाव प्रचार में शामिल रहे हैं और यदि आवश्यकता पड़ी तो पार्टी इसकी सूची भी सार्वजनिक कर सकती है। उनके इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि आरजेडी इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देख रही है और इसे पूरी तरह खारिज नहीं कर रही है।

    उधर जेडीयू की ओर से यह मामला लोकसभा अध्यक्ष के पास भेजा गया है और अब इस पर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। पार्टी का कहना है कि एक सांसद के तौर पर गिरधारी यादव का कर्तव्य है कि वे पार्टी के सिद्धांतों और अनुशासन का पालन करें। यदि उन पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    वहीं गिरधारी यादव ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वे अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि वे इस आरोप का जवाब विधिवत तरीके से देंगे।

    इस तरह गिरधारी यादव के खिलाफ जेडीयू के कदम और आरजेडी की प्रतिक्रिया के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का फैसला और दोनों दलों की अगली रणनीति इस मामले को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती है।
  • पुडुचेरी चुनाव 2026 भाजपा की दूसरी सूची जारी कराईकल साउथ से एम अरुल मुरुगन उम्मीदवार

    पुडुचेरी चुनाव 2026 भाजपा की दूसरी सूची जारी कराईकल साउथ से एम अरुल मुरुगन उम्मीदवार

    नई दिल्ली:   पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची जारी कर चुनावी मैदान में अपनी रणनीति को और स्पष्ट कर दिया है पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने कराईकल साउथ विधानसभा सीट से एम अरुल मुरुगन को उम्मीदवार घोषित किया है

    यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब चुनाव की तारीखें नजदीक हैं और सभी राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियान और संगठनात्मक तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं भाजपा अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव में उतरने की रणनीति बना रही है ताकि सभी सीटों पर मजबूत प्रदर्शन किया जा सके

    इससे पहले शनिवार को भाजपा ने अपनी पहली सूची जारी की थी जिसमें कई महत्वपूर्ण सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए थे मन्नादीपेट सीट से ए नमस्सिवायम ओस्सुडु एससी सीट से ई थीप्पैंथन कालापेट सीट से पीएमएल कल्याणसुंदरम और राज भवन सीट से वीपी रामलिंगम को टिकट दिया गया है इसके अलावा मुदलियारपेट से ए जॉनकुमार मनावेली से एम्बलम आर सेल्वम तिरुनल्लार से जीएनएस राजसेकरन नेरावी टीआर पट्टिनम से टीकेएसएम मीनाक्षीसुंदरम और माहे सीट से ए दिनेशन को उम्मीदवार बनाया गया है

    पार्टी ने न केवल पुडुचेरी बल्कि अन्य राज्यों में भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा तेज कर दी है इसी क्रम में केरल के लिए भी तीसरी सूची जारी की गई है जिसमें 11 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं यह दर्शाता है कि भाजपा अपने संगठन और चुनावी रणनीति को व्यापक स्तर पर मजबूत करने में लगी है

    पुडुचेरी विधानसभा में कुल 33 सीटें हैं जिनमें से 30 सीटों पर जनता द्वारा सीधे मतदान किया जाता है जबकि 3 सीटें केंद्र सरकार द्वारा नामित की जाती हैं इस चुनावी प्रक्रिया में जनता के वोट का महत्व बेहद महत्वपूर्ण होता है

    पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को एक ही चरण में संपन्न होंगे जबकि 4 मई को मतगणना की जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे चुनावी तारीखों के ऐलान के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं सभी प्रमुख दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जनसभाएं रैलियां और प्रचार अभियान चला रहे हैं

    इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में भाजपा अपनी मजबूत उम्मीदवार सूची और संगठनात्मक ताकत के सहारे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश कर रही है वहीं अन्य दल भी अपनी रणनीति के साथ मैदान में सक्रिय हो गए हैं जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक होने की उम्मीद है

  • 2026-27 के बजट प्रस्तावों में हर वर्ग के विकास पर फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा बजट

    2026-27 के बजट प्रस्तावों में हर वर्ग के विकास पर फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा बजट


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में राज्य के सभी क्षेत्रों और समाज के हर वर्ग के विकास तथा कल्याण का विशेष ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बजट प्रस्तावों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप और संतुलित बताते हुए उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा के दृष्टिकोण की सराहना की।

    मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बजट निर्माण में लगे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के परिश्रम की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि यह प्रदेश के विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई अपर मुख्य सचिव (वित्त) श्री मनीष रस्तोगी सहित वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रेजेंटेशन के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं विकास कार्यों सामाजिक कल्याण अधोसंरचना शिक्षा स्वास्थ्य कृषि और रोजगार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। बजट में गरीब किसान महिला युवा और श्रमिक वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही औद्योगिक विकास निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाले प्रस्तावों को भी इसमें शामिल किया गया है।

    मुख्यमंत्री के समक्ष प्रेजेंटेशन के बाद मंत्रि-परिषद के समक्ष भी बजट प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण किया गया जिसे कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया है। मंत्रि-परिषद से मंजूरी मिलने के बाद अब यह बजट 18 फरवरी को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

    सरकार का दावा है कि यह बजट विकासोन्मुख होने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन को भी ध्यान में रखेगा। इसमें राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने आधारभूत ढांचे के विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने पर जोर रहेगा।

    प्रदेश सरकार के इस बजट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि 2026-27 का बजट मध्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा और राज्य को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

  • सदन में बोलने से रोका गया, यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात, राहुल गांधी का स्पीकर को पत्र

    सदन में बोलने से रोका गया, यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात, राहुल गांधी का स्पीकर को पत्र


    नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार 3 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें सरकार के इशारे पर सदन में बोलने से रोका गया, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है। उन्होंने लिखा कि नेता प्रतिपक्ष सहित हर सांसद को अपनी बात रखने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है, लेकिन इन अधिकारों की अनदेखी से संसद में एक असाधारण स्थिति पैदा हो गई है।

    संसद में जारी गतिरोध के बीच राहुल गांधी ने सोमवार की तरह मंगलवार को भी पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित एक लेख का हवाला देते हुए चीन से जुड़े मुद्दे को उठाने की कोशिश की। हालांकि, उन्हें आसन की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी गई। राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने उस लेख को सत्यापित कर सदन के पटल पर रखा था।

    पत्र में क्या लिखा राहुल गांधी ने

    राहुल गांधी ने पत्र में लिखा कि सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उनसे जिस लेख का उल्लेख करना था, उसे सत्यापित करने को कहा गया था। मंगलवार को जब उन्होंने अपना भाषण आगे बढ़ाया, तो उन्होंने निर्देश के अनुसार संबंधित दस्तावेज को सत्यापित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय परंपरा और पूर्व अध्यक्षों के फैसलों के अनुसार, किसी भी सदस्य को दस्तावेज का उल्लेख करने से पहले उसे सत्यापित करना होता है और उसकी जिम्मेदारी लेनी होती है।

    संसदीय परंपरा का उल्लंघन
    राहुल गांधी ने कहा कि एक बार दस्तावेज सत्यापित हो जाने के बाद अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है और सरकार को उसका जवाब देना होता है। इसके बावजूद उन्हें बोलने से रोकना न केवल संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि इससे यह आशंका भी पैदा होती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर नेता प्रतिपक्ष को जानबूझकर चुप कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का अहम हिस्सा है और उस पर संसद में चर्चा जरूरी है।

    लोकतंत्र पर काला धब्बा
    राहुल गांधी ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि वे सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में हर सदस्य, खासकर विपक्ष के अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने लिखा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रत्येक सांसद का बोलने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब सरकार के दबाव में अध्यक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना पड़ा। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

  • NCP महाराष्ट्र में BJP-नेतृत्व वाले NDA के साथ बनी रहेगी, विलय की अटकलों को सुनील तटकरे ने किया खारिज

    NCP महाराष्ट्र में BJP-नेतृत्व वाले NDA के साथ बनी रहेगी, विलय की अटकलों को सुनील तटकरे ने किया खारिज


    नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुनील तटकरे ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी भाजपा नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन NDA का हिस्सा बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि संगठन दिवंगत अजित पवार की विचारधारा और मार्ग पर आगे बढ़ेगा।

    विलय की अफवाहों पर प्रतिक्रिया

    हाल ही में यह दावा किया गया था कि NCP और शरद पवार की राकांपा का विलय 12 फरवरी को घोषित किया जाएगा। इस पर तटकरे ने कहा, “हमारा रुख स्पष्ट है। पार्टी और अजित दादा की विचारधारा को हम आगे बढ़ाएंगे। राजग के साथ हमारा सहयोग कायम रहेगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अजित पवार की सहमति के बिना कोई राजनीतिक निर्णय नहीं लिया गया।

    शपथ और पार्टी संबंध
    तटकरे ने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की जल्दबाजी पर कहा कि यह निर्णय महाराष्ट्र के हित में और राकांपा को मजबूत करने के लिए लिया गया। उन्होंने भाजपा की प्रशंसा करते हुए कहा कि गठबंधन में हमेशा सम्मानजनक व्यवहार रहा है।

    अस्थियों का अंतिम संस्कार और आगे की प्रक्रिया
    सुनील तटकरे ने बताया कि अजित पवार की अस्थियों को राज्य के सभी जिलों में ले जाकर श्रद्धांजलि दी जाएगी। वहीं, राकांपा के वरिष्ठ नेता माणिकराव कोकाटे ने कहा कि विलय या आगे की राजनीतिक दिशा का फैसला सुनेत्रा पवार करेंगी और उनका निर्णय पार्टी में सभी के लिए बाध्यकारी होगा।

  • पश्चिम बंगाल: हुमायूं कबीर ने 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद निर्माण का किया ऐलान, ओवैसी से बढ़ी नजदीकियां

    पश्चिम बंगाल: हुमायूं कबीर ने 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद निर्माण का किया ऐलान, ओवैसी से बढ़ी नजदीकियां


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। ‘जनता उन्नयन पार्टी  के अध्यक्ष हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी के बीच शुक्रवार शाम मुर्शिदाबाद में हुई मुलाकात ने नए गठबंधन की अटकलों को हवा दे दी है। इसी बैठक के दौरान कबीर ने बड़ा बयान देते हुए 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद के निर्माण कार्य की शुरुआत होने की घोषणा की।

    हुमायूं कबीर के मुताबिक, 11 फरवरी को निर्माण स्थल पर करीब पांच हजार लोगों की मौजूदगी रहेगी। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे पवित्र कुरान के पाठ से होगी, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चलेगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए मुस्लिम बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और ट्रस्ट के सदस्य मिलकर मस्जिद की नींव रखेंगे। कबीर ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम में केवल समाज के प्रबुद्ध लोग शामिल होंगे और इसे राजनीति से अलग रखा जाएगा।

    ममता सरकार पर सीधा हमला

    बैठक के बाद हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि AIMIM और SDPI के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। कबीर ने दावा किया कि मार्च महीने में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी तय मानी जा रही है। कबीर ने इसे ममता सरकार के पतन की शुरुआत बताया।

    पुरानी बातचीत, नई मजबूती
    गौरतलब है कि दिसंबर से ही हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी के बीच बढ़ती नजदीकियों के संकेत मिलते रहे हैं। अब मुर्शिदाबाद में इमरान सोलंकी के साथ हुई ताजा बैठक के बाद इन अटकलों को और बल मिला है। AIMIM की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पार्टी पश्चिम बंगाल में मुस्लिम, दलित और वंचित समाज के अधिकारों के लिए पूरी ताकत के साथ संघर्ष करेगी।

  • राम विरोधी है कांग्रेस तेज प्रताप यादव ने तोड़ा चुप्पी, महिलाओं और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की उठाई मांग

    राम विरोधी है कांग्रेस तेज प्रताप यादव ने तोड़ा चुप्पी, महिलाओं और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की उठाई मांग


    नई दिल्ली । तेज प्रताप यादव ने यह बयान केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह के उस बयान के जवाब में दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर वीबी-जी राम जी अधिनियम’ करने का विरोध किया। तेज प्रताप ने पत्रकारों से कहा गिरिराज जी बिल्कुल सही कह रहे हैं। कांग्रेस राम विरोधी है। उनके नेता अपने माथे पर तिलक नहीं लगाते ऐसा करना चाहिए।

    हालांकि तेज प्रताप यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी जातियों समुदायों और धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा हिंदू मुस्लिम सिख और ईसाई सभी भाई हैं। किसी भी धर्म या जाति का अपमान नहीं होना चाहिए। मेरा आरोप केवल कांग्रेस के रवैये और उसके नेताओं के कार्यों पर है।

    बिहार महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी पर कार्रवाई की मांग

    तेज प्रताप यादव ने उत्तराखंड की मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा बिहार की महिलाओं के खिलाफ की गई टिप्पणी पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अपमानजनक बयान देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। तेज प्रताप ने सवाल उठाया वे किससे माफी मांगेंगे? क्या बिहार की बेटियों ने उन्हें माफ कर दिया है उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल माफी पर्याप्त नहीं है बल्कि ऐसे व्यक्तियों को बिहार आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी।

    तेज प्रताप यादव के इस बयान ने राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी के खिलाफ राम कृष्ण और महादेव के अपमान के आरोप और महिलाओं के सम्मान को लेकर उठाए गए मुद्दे आगामी राजनीतिक चर्चाओं में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनका कहना है कि धर्म और संस्कृति का सम्मान हर राजनीतिक दल और नागरिक की जिम्मेदारी है और इसे नजरअंदाज करना स्वीकार्य नहीं। तेज प्रताप का यह रुख न केवल कांग्रेस पर निशाना है बल्कि यह समाज और राजनीति में सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता बनाए रखने की दिशा में भी एक संदेश है।

  • प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई की अटकलें, वायरल फोटो से सोशल मीडिया में हलचल

    प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई की अटकलें, वायरल फोटो से सोशल मीडिया में हलचल


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है। वजह है एक वायरल तस्वीर जिसके सामने आने के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि रेहान वाड्रा ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड मानी जा रही अविवा बेग से सगाई कर ली है। हालांकि गांधी या वाड्रा परिवार की ओर से अब तक इस खबर को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रेहान वाड्रा और अविवा बेग पिछले करीब सात वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं और उनके बीच करीबी रिश्ता बताया जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर में दोनों एक साथ नजर आ रहे हैं जिसके बाद सगाई की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि यह तस्वीर किसी निजी पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान ली गई थी जिसमें सीमित लोग ही मौजूद थे।सूत्रों के मुताबिक यदि सगाई हुई भी है तो उसे बेहद निजी रखा गया और इसमें गांधी-वाड्रा परिवार तथा बेग परिवार के कुछ करीबी सदस्य ही शामिल हुए। तस्वीर के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

    बताया जा रहा है कि वायरल फोटो प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की बेटी मिराया वाड्रा की वर्ष 2025 की ग्रेजुएशन सेरेमनी के दौरान की है। इसी कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीर सामने आने के बाद रेहान और अविवा की सगाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। फिलहाल आधिकारिक पुष्टि के अभाव में इसे केवल अटकलों के तौर पर देखा जा रहा है।अविवा बेग दिल्ली की रहने वाली हैं और उनका परिवार लंबे समय से राजधानी में निवास कर रहा है। जानकारी के अनुसार गांधी-वाड्रा और बेग परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते हैं। अविवा पेशे से फोटोग्राफर और आर्ट क्यूरेटर हैं। वहएटेलियर-11 की को-फाउंडर हैं जो एक फोटोग्राफी स्टूडियो और प्रोडक्शन कंपनी के रूप में जानी जाती है।

    अविवा बेग कला और डिजाइन की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह इंडिया आर्ट फेयर के यंग कलेक्टर प्रोग्राम और इंडिया डिजाइन आईडी जैसी प्रतिष्ठित प्रदर्शनियों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। उनकी क्रिएटिव प्रोफाइल और अंतरराष्ट्रीय कला मंचों से जुड़ाव की भी काफी चर्चा रहती है।वहीं रेहान वाड्रा भी फोटोग्राफी के शौकीन माने जाते हैं खासतौर पर वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में उनकी गहरी रुचि है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि आठ साल की उम्र से ही उन्हें कैमरे से लगाव हो गया था। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकृति और वन्यजीवों से जुड़ी कई तस्वीरें देखी जा सकती हैं। इसी साझा रुचि को रेहान और अविवा के रिश्ते की मजबूत नींव माना जाता है।

    राजनीतिक दृष्टि से रेहान वाड्रा अब तक सक्रिय भूमिका में नजर नहीं आए हैं लेकिन जनवरी 2023 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा था। मध्य प्रदेश में यात्रा के दौरान वे करीब तीन दिन तक राहुल गांधी के साथ पदयात्रा करते दिखे थे। इसके बाद से उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं होती रही हैं।फिलहाल रेहान वाड्रा और अविवा बेग की सगाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिवार की ओर से आधिकारिक पुष्टि या खंडन का इंतजार किया जा रहा है। तब तक यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ है।

  • तेजू भैया से रंगदारी मांगने की हिम्मत कौन कर गया? थाने में दर्ज कराया केस, मच गया सियासी शोर

    तेजू भैया से रंगदारी मांगने की हिम्मत कौन कर गया? थाने में दर्ज कराया केस, मच गया सियासी शोर


    नई दिल्ली । पटनाः जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप ने अपने ही दल के पूर्व प्रवक्ता रहे संतोष रेणु यादव के खिलाफ सचिवालय थाना में गंभीर आरोपों के साथ मामला दर्ज कराया. तेज प्रताप ने आरोप लगाया है कि उन्हें धमकी दी गई और उनसे रंगदारी की मांग की गई है. इस शिकायत के सामने आते ही राजधानी की राजनीति में आरोप–प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया. तेज प्रताप की शिकायत के मुताबिक, संतोष रेणु यादव द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था और फोन कॉल के जरिए रंगदारी की मांग की गई. साथ ही उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई.
    सचिवालय थाना पुलिस ने इस मामले में आवेदन के आधार पर सनहा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है. दूसरी ओर, संतोष रेणु यादव ने भी पलटवार करते हुए बेऊर थाना में आवेदन देकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई थी. उन्होंने आरोप लगाया है कि राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है. संतोष रेणु यादव का कहना है कि उन्हें झूठे आरोपों में उलझाकर बदनाम किया जा रहा है और उनकी जान को खतरा है. उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है.
    संतोष रेणु यादव क्या बोले?

    संतोष रेणु यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं. माधव सेवा के अध्यक्ष के रूप में लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि तेज प्रताप द्वारा उन्हें बदनाम करने और झूठे केस में फंसाने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि वे कानून में भरोसा रखते हैं और सच सामने आएगा. दोनों पक्षों की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गई है. सिटी एसपी (पश्चिमी) पटना भानु प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों तरफ से लिखित आवेदन मिले हैं. पुलिस ने दोनों मामलों में सनहा दर्ज कर लिया है और सभी आरोपों की निष्पक्ष तरीके से जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
    क्या है पूरा मामला
    पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पार्टी के अंदर ही इतना बड़ा विवाद कैसे खड़ा हो गया. दरअसल, जनशक्ति जनता दल से जुड़े नेता तेज प्रताप ने सचिवालय थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए संतोष रेणु यादव पर धमकी देने और रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है. वहीं, संतोष रेणु यादव ने बेऊर थाना में आवेदन देकर कहा है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और उनकी जान को खतरा है. दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और अब पूरे मामले पर सबकी नजर पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है.