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  • UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठन को और सक्रिय करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्र और विभिन्न मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में छह नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है।

    पार्टी के फैसले के मुताबिक रामप्रताप सिंह चौहान को पश्चिम, गीता शाक्य को ब्रज, शंकर लोधी को कानपुर, दिलीप पटेल को अवध, रमेश सिंह को काशी और अभिजात मिश्रा को गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    मोर्चों की जिम्मेदारी भी तय
    भाजपा ने अलग-अलग मोर्चों के लिए भी प्रभारियों के नाम घोषित किए हैं। सूची के अनुसार राजेश चौधरी को युवा मोर्चा प्रभारी, संजय राय को पिछड़ा मोर्चा प्रभारी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह को अनुसूचित मोर्चा प्रभारी, कामेश्वर सिंह को महिला मोर्चा प्रभारी, डॉ. प्रियंका रावत को अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रभारी, देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी, शंकर गिरी को किसान मोर्चा प्रभारी बनाया है।

    संगठन के अन्य पदों पर भी नियुक्तियां
    पार्टी ने संगठन से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण दायित्व भी तय किए हैं। गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय प्रभारी बनाया गया है। वहीं प्रदेश मंत्री नरेंद्र शर्मा को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है।

    इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक बनाया गया है। अर्चना मिश्रा को ‘मन की बात’ का संयोजक और राहुल वाल्मीकि को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। भाजपा की इन नियुक्तियों को प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने और अलग-अलग क्षेत्रों व मोर्चों के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी

    दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव में 6016 वोटों से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित चुनाव से जुड़े मंत्री, पदाधिकारी और संगठन के प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस बैठक में हार के कारणों का विश्लेषण करने के साथ-साथ संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीति और भीतरघात की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा बैठक में उपचुनाव के प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, राकेश शुक्ला सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी प्रबंधन की हर स्तर पर समीक्षा होगी और यह भी देखा जाएगा कि किन कारणों से पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सूत्रों का कहना है कि दतिया शहर में भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन वहां कांग्रेस ने बढ़त बना ली जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला। संगठन की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ पार्षदों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भीतरघात के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दर्जनभर पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। समीक्षा बैठक के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हार के बाद पार्टी के भीतर भी आत्ममंथन की आवाजें तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आत्ममंथन का समय बताते हुए दतिया उपचुनाव का उल्लेख किया। वहीं टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी खुद को शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच वाला बताने लगते हैं तब चुनाव परिणाम प्रभावित होना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को भी संगठन के भीतर चल रही चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भाजपा संगठन जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केंद्रीय संगठन तक भेजी जा सकती है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

    पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि प्रत्याशी बदलने के बाद संगठन के सभी कार्यकर्ता पूरी मजबूती से एकजुट नहीं हो पाए और इसका असर चुनाव परिणाम पर दिखाई दिया।

    समीक्षा बैठक में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। चुनाव के दौरान वायरल हुए कथित फर्जी पत्रों और भ्रामक पोस्ट की जांच कराई जाएगी। संगठन ऐसे लोगों की सूची भी तैयार कर रहा है जिन्होंने इन पोस्ट को प्रसारित किया था ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करती है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी हार की तथ्यपरक समीक्षा करेगी और भविष्य की चुनावी रणनीति को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

  • राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भोपाल में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की

    राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भोपाल में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की


    भोपालभोपाल में शनिवार को राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर संसद परिसर में हुए विपक्ष के प्रदर्शन के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व्यापम चौराहे पर एकत्र हुए और वहां से विरोध मार्च निकालते हुए लिंक रोड की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और राहुल गांधी के पुतले का दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। पुलिस ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की जैसी स्थिति बन गई। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखा और किसी बड़े विवाद की नौबत नहीं आने दी। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर जिस प्रकार सांकेतिक प्रदर्शन किया गया उससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और संत परंपरा से जुड़े प्रतीकों का जिस तरह इस्तेमाल किया गया वह उचित नहीं था और इसी के विरोध में भोपाल में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

    संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच पहले से चल रही है। उनके अनुसार मामले में विशेष जांच दल जांच कर रहा है और न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। उनका कहना था कि जिन लोगों पर आरोप लगे थे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।

    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि राम मंदिर और हिंदू आस्था को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। विरोध मार्च के दौरान राहुल गांधी का पुतला जलाया गया और प्रतीकात्मक रूप से विरोध दर्ज कराया गया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पुतले पर आपत्तिजनक व्यवहार भी किया।

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि संसद के मानसून सत्र से जुड़ी है जहां निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद परिसर पहुंचे थे। विपक्षी सांसदों के साथ उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया था। विपक्ष का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल पारदर्शिता और जांच की मांग उठाना था जबकि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताया।

    मध्य प्रदेश संत समाज के प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि रामलला और संत परंपरा करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है।

    दूसरी ओर विपक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसका प्रदर्शन कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग से जुड़ा था और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज बनी हुई है।

    भोपाल में हुआ यह प्रदर्शन एक बार फिर यह संकेत देता है कि धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर देश में बहस लगातार तेज हो रही है। ऐसे मामलों में प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अवसर देना रहती है।

  • मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक

    मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार ने यूसीसी विधेयक चर्चा के लिए पेश किया जिसके बाद कांग्रेस ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग उठाई लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विधानसभा में तीखी बहस नारेबाजी और हंगामे का दौर शुरू हो गया। अंततः भाजपा सरकार ने अपने बहुमत के आधार पर यूसीसी विधेयक को पारित करा लिया।

    विधेयक पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय जरूरी है इसलिए इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। कांग्रेस के कई विधायकों ने इस मांग का समर्थन किया लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। मांग खारिज होने के बाद कांग्रेस विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में बढ़ते शोरगुल और अव्यवस्था को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को कार्यवाही पहले दस मिनट और फिर पंद्रह मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी माहौल शांत नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन उमंग सिंघार आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने यूसीसी को लेकर सरकार पर कई सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक संवैधानिक अधिकारों विशेषकर अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर सभी पक्षों से व्यापक संवाद होना चाहिए था। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विधेयक को सामाजिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने वाला कानून है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत लोगों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा और एक पति या एक पत्नी रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता और समान न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों का सम्मान करता है तो उसे इस कानून का समर्थन करना चाहिए। मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान भी कांग्रेस विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे लेकिन सरकार ने चर्चा पूरी कराकर बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करा लिया।

    सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी कांग्रेस ने विधानसभा परिसर में यूसीसी के विरोध में सांकेतिक नाटक का मंचन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारी महंगाई किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यूसीसी जैसे विषयों को आगे ला रही है। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून प्रदेश में समान अधिकार और समान न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम

    मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम


    नई दिल्ली। भोपाल में राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन के बाद पार्टी में एकजुटता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने चुनावी समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।

    कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरी है। नामांकन के दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई विधायक मौजूद रहे। इस दौरान विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए पार्टी नेतृत्व के साथ फोटो सेशन भी कराया
    हालांकि इसी बीच कांग्रेस को एक झटका भी लगा जब हुजूर सीट से पूर्व प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

    वहीं बीजेपी खेमे में भी हलचल कम नहीं है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी के पास अतिरिक्त वोट हैं और विकास चाहने वाले लोग बीजेपी उम्मीदवारों के साथ खड़े होंगे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में रहेगा।

    बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने भी अपनी जिम्मेदारी को लेकर भरोसा जताया और कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे वे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। इसी बीच उनके परिवार की ओर से धार्मिक माहौल भी देखने को मिला। महेश केवट के भाई और बेटे ने ओरछा में विशेष पूजा-अर्चना कर उनके राजनीतिक भविष्य की सफलता की कामना की।

    भोपाल में बीजेपी दफ्तर में भी लगातार विधायकों की आवाजाही जारी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और कई वरिष्ठ नेता बैठक के लिए पहुंचे। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी विधायकों को भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे वोटिंग प्रक्रिया में पूरी एकजुटता बनी रहे।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों ने अपनी रणनीति अंतिम चरण में पहुंचा दी है। कांग्रेस जहां एकजुटता का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी अपने संख्याबल और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा जता रही है। आने वाले दिनों में यह चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

  • यू-टर्न के बाद फंसी रणनीति? अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सस्पेंस

    यू-टर्न के बाद फंसी रणनीति? अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सस्पेंस


    नई दिल्ली। अमेरिका से 6 जून को दिल्ली पहुंचने वाले Abhijeet Deepke ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को राजधानी में जुटने का आह्वान किया था। शुरुआत में उन्होंने लोगों से कहा था कि वे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर उनका स्वागत करने पहुंचें। उनका दावा था कि दिल्ली पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, इसलिए समर्थकों की मौजूदगी जरूरी होगी।

    हालांकि, प्रदर्शन से ठीक दो दिन पहले दीपके ने अपने रुख में बड़ा बदलाव करते हुए समर्थकों से एयरपोर्ट न आने की अपील कर दी। उन्होंने तर्क दिया कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से आम यात्रियों और नागरिकों को परेशानी हो सकती है। लेकिन इस फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एयरपोर्ट से हटे, लेकिन आगे का रास्ता अस्पष्ट
    दीपके ने अब कहा है कि वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने जाएंगे और समर्थक वहीं एकत्रित हों। यहीं से प्रदर्शन की अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।

    लेकिन आलोचकों और पर्यवेक्षकों का सवाल है कि यदि वास्तव में हजारों या लाखों लोग पहुंचते हैं, जैसा कि CJP दावा कर रही है, तो नई दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील इलाके में व्यवस्था कैसे बनाए रखी जाएगी? पार्लियामेंट स्ट्रीट और आसपास के क्षेत्रों में कई सरकारी कार्यालय, महत्वपूर्ण संस्थान और व्यस्त मार्ग मौजूद हैं। ऐसे में बड़ी भीड़ के जुटने से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि अनुमति मिलने तक समर्थक कहां रहेंगे और भीड़ को नियंत्रित करने की क्या व्यवस्था होगी।

    अनुमति को लेकर सबसे बड़ा सवाल
    पूरा विवाद प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी केंद्रित है। अब तक CJP की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस या प्रशासन से पहले ही अनुमति क्यों नहीं मांगी गई। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि दीपके स्वयं दिल्ली पहुंचकर आवेदन देंगे, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ घंटों के भीतर किसी बड़े धरना-प्रदर्शन की अनुमति मिल पाना संभव होगा।

    अगर अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा?
    सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन या जंतर-मंतर पर सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, तो पार्टी की अगली रणनीति क्या होगी?

    इस मुद्दे पर न तो दीपके ने और न ही पार्टी के अन्य नेताओं ने कोई स्पष्ट जवाब दिया है। समर्थकों को भी यह नहीं बताया गया है कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना होगा। यही वजह है कि प्रदर्शन से पहले ही पूरे कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    फिलहाल, 6 जून के कार्यक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अभिजीत दीपके का ‘दिल्ली प्लान’ जमीन पर कितना सफल होता है और प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

  • असम में यूसीसी बिल पर बढ़ा राजनीतिक विवाद, ओवैसी ने उठाए संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों के सवाल

    असम में यूसीसी बिल पर बढ़ा राजनीतिक विवाद, ओवैसी ने उठाए संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों के सवाल

    नई दिल्ली । असम में समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में संबंधित विधेयक पेश किए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi ने प्रस्तावित व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कानून के कई प्रावधानों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यह मुद्दा केवल कानून का नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक संरचना से भी जुड़ा हुआ है। उनके बयान के बाद इस विषय पर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।

    असम सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के तहत विवाह, तलाक, विरासत और पारिवारिक कानूनों से जुड़े कई प्रावधानों में समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार बहुविवाह और एक से अधिक विवाह को गैर-कानूनी बनाए जाने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में महिलाओं को समान अधिकार देने की भी बात कही गई है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्रावधान सामाजिक समानता और कानूनी स्पष्टता को बढ़ावा देंगे।

    हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी असहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था कुछ समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों और धार्मिक परंपराओं को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुसार कानून यदि समानता के उद्देश्य से लाया जा रहा है तो उसका दायरा और प्रभाव भी सभी वर्गों पर एक जैसा होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कुछ वर्गों या समुदायों को विशेष छूट दी जाती है तो फिर समानता के सिद्धांत पर बहस स्वाभाविक हो जाती है।

    ओवैसी ने यह भी कहा कि संविधान के अंतर्गत विभिन्न समुदायों को अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार किसी भी कानून को लागू करते समय संवैधानिक संतुलन और सामाजिक विविधता का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने विरासत और उत्तराधिकार के मामलों को लेकर भी अपनी चिंताएं सामने रखीं और कहा कि इन विषयों पर व्यापक चर्चा आवश्यक है।

    दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को एक समान कानूनी ढांचे के अंतर्गत लाना और महिलाओं को अधिक सुरक्षा एवं अधिकार उपलब्ध कराना है। प्रस्ताव में विवाह पंजीकरण को अनिवार्य करने और वैवाहिक नियमों को अधिक स्पष्ट बनाने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर और अधिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि यह मुद्दा केवल कानून तक सीमित नहीं बल्कि समाज और संवैधानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    नई दिल्ली ।
    सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई एक बार फिर हुई, जिसमें अब अगली तारीख 21 मई 2026 तय कर दी गई है। यह मामला कई साल पुराने उस बयान से जुड़ा बताया जाता है, जो कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए कथित टिप्पणी से संबंधित है। इसी टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। इसी वजह से अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नई तारीख निर्धारित कर दी। यह मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में चल रहा है और समय-समय पर इसकी सुनवाई होती रही है।

    इस केस में वादी पक्ष की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि वे कोर्ट के एक पुराने आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। वकील की ओर से यह भी कहा गया कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें राहुल गांधी की आवाज का नमूना जांच के लिए देने की बात शामिल थी। इस फैसले के बाद भी मामला आगे बढ़ता रहा और अब अदालत ने वादी पक्ष को अपनी दलीलों के लिए अंतिम मौका भी दिया है।

    यह पूरा मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत में चल रही प्रक्रिया के बीच दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों को मजबूती से पेश कर रहे हैं। अब सभी की नजरें 21 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

  • निजाम पैलेस आ जाओ… आखिरी कॉल और फिर गोलियों की बारिश, चंद्रनाथ रथ की रहस्यमयी हत्या से दहला बंगाल

    निजाम पैलेस आ जाओ… आखिरी कॉल और फिर गोलियों की बारिश, चंद्रनाथ रथ की रहस्यमयी हत्या से दहला बंगाल

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों एक ऐसी घटना से हिल गई है, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी माने जाने वाले चंद्रनाथ रथ की देर रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उनकी आखिरी फोन कॉल की हो रही है, जिसमें उन्होंने अपने एक करीबी दोस्त से कहा था कि वह “निजाम पैलेस आ जाए”, जहां वे चाय पीने और राजनीतिक जीत का जश्न मनाने की बात कर रहे थे। यह साधारण सी बातचीत कुछ ही घंटों बाद एक दर्दनाक हकीकत में बदल गई।

    जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब चंद्रनाथ रथ अपनी कार से देर रात यात्रा कर रहे थे। रास्ते में कुछ अज्ञात हमलावरों ने उनकी गाड़ी का पीछा किया और अचानक घेरकर गोलियां चला दीं। फायरिंग इतनी तेज थी कि चंद्रनाथ और उनके ड्राइवर दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल पहुंचने से पहले ही चंद्रनाथ की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।

    बताया जाता है कि हमलावर बेहद योजनाबद्ध तरीके से आए थे। उन्होंने पहले से रेकी की हुई थी और जैसे ही गाड़ी एक सुनसान हिस्से में धीमी हुई, हमला कर दिया गया। चंद्रनाथ को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस घटना ने पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    चंद्रनाथ रथ का जीवन काफी प्रेरणादायक माना जाता है। वे मूल रूप से एक अनुशासित और सेवाभावी पृष्ठभूमि से आते थे और लगभग 20 साल तक वायुसेना में देश की सेवा कर चुके थे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में भी काम किया, लेकिन जल्द ही उनका रुझान राजनीति की ओर बढ़ा। धीरे-धीरे वे सुवेंदु अधिकारी के बेहद भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए और उनके चुनावी अभियानों में अहम भूमिका निभाने लगे।

    राजनीतिक हलकों में उन्हें एक शांत लेकिन बेहद प्रभावशाली रणनीतिकार माना जाता था। वे कैमरों से दूर रहकर पूरी रणनीति और संगठनात्मक काम संभालते थे। यही वजह थी कि उन्हें अधिकारी का सबसे करीबी और भरोसेमंद व्यक्ति कहा जाता था। उनकी अचानक हुई हत्या ने कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

    घटना के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है। एक पक्ष इसे सुनियोजित साजिश बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इन आरोपों को खारिज कर रहा है। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम जनता में डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    फिलहाल पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। आसपास लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और हमलावरों की पहचान के लिए टीमें बनाई गई हैं। हालांकि अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है। चंद्रनाथ रथ की मौत ने सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं ली, बल्कि एक पूरे राजनीतिक समीकरण को भी झकझोर कर रख दिया है।