Tag: Political News

  • निरीक्षण के दौरान अचानक लड़खड़ाकर गिरे CM धामी, सड़क पर फिसलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

    निरीक्षण के दौरान अचानक लड़खड़ाकर गिरे CM धामी, सड़क पर फिसलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी में निर्माणाधीन अमृतपुर बाईपास का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ अचानक ऐसा वाकया हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। सड़क का जायजा लेते समय मुख्यमंत्री धामी का संतुलन बिगड़ गया और वह लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़े। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मुख्यमंत्री को कच्ची और पथरीली सड़क पर चलते हुए देखा जा सकता है। इसी दौरान उनका पैर फिसला और वह जमीन पर गिर गए। यह घटना 25 अक्टूबर को निरीक्षण के दौरान हुई बताई जा रही है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री धामी अमृतपुर बाईपास परियोजना के निर्माण कार्य की प्रगति देखने पहुंचे थे। सड़क का कुछ हिस्सा अभी निर्माणाधीन है और वहां जमीन ऊबड़-खाबड़ होने के साथ पत्थर भी बिखरे हुए थे। इसी रास्ते पर चलते समय मुख्यमंत्री अचानक लड़खड़ा गए। घटना कैमरे में कैद हो गई और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री धामी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को बाईपास निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन सीजन और सप्ताहांत के दौरान इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। अमृतपुर बाईपास तैयार होने से आम नागरिकों और पर्यटकों को इस परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। निर्माण कार्य के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। इसलिए काम में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और नियमित निगरानी करने को भी कहा।

    धामी ने सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोड कटिंग और निर्माण से जुड़े कार्यों में आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों पहलुओं पर गंभीरता से काम करने के लिए कहा गया है।

    अमृतपुर बाईपास परियोजना कुमाऊं क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर यातायात का दबाव कम करना है। पिछले कुछ वर्षों में बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही नैनीताल और रानीखेत के अलावा कौसानी पिथौरागढ़ अल्मोड़ा और बागेश्वर जैसे पर्यटन स्थलों पर भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन का बढ़ना अच्छी बात है और इससे राज्य को लाभ मिलता है। लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना भी जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय नागरिकों को सुगम आवागमन मिले और बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी जाम की समस्या का सामना न करना पड़े।

    फिलहाल मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान गिरने का वीडियो चर्चा में है। वहीं अमृतपुर बाईपास परियोजना को समय पर पूरा करने और निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देशों के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि यह काम कब तक पूरा होता है और इससे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को कितनी राहत मिलती है।

  • भाजपा में पद या पैसों का खेल? भाजयुमो अध्यक्ष पद की कथित डील का चैट वायरल, नेताओं ने बताया साजिश

    भाजपा में पद या पैसों का खेल? भाजयुमो अध्यक्ष पद की कथित डील का चैट वायरल, नेताओं ने बताया साजिश

    कानपुर । कानपुर में भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा के उत्तर जिलाध्यक्ष पद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित व्हाट्सऐप चैट ने पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है। इस चैट में भाजयुमो अध्यक्ष पद के लिए पैसों के लेनदेन की बात कही गई है। वायरल संदेश में सात लाख रुपये में डील फाइनल होने का दावा किया गया है। साथ ही लिस्ट तैयार करने और कुर्सी संभालने जैसी बातें भी लिखी गई हैं। चैट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि इस वायरल चैट की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    दरअसल कानपुर में भाजपा के क्षेत्रीय आईटी सेल के पदाधिकारियों की सूची को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था। यह मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि भाजयुमो उत्तर जिलाध्यक्ष पद को लेकर कथित सौदेबाजी का मामला सामने आ गया। सोशल मीडिया पर वायरल चैट में भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संदेशों में दावा किया गया है कि युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद के लिए 10 से 15 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके बाद एक अन्य संदेश में सात लाख रुपये में सौदा तय होने की बात लिखी गई है। चैट में यह भी कहा गया है कि अब लिस्ट तैयार की जाए और कुर्सी संभालने के लिए तैयार रहा जाए।

    इस कथित बातचीत के वायरल होने के बाद संगठन की कार्यप्रणाली और पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि केवल वायरल चैट के आधार पर किसी आरोप को सही नहीं माना जा सकता। इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले पर भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वायरल चैट को फर्जी बताते हुए कहा कि भाजपा उत्तर जिला संगठन लगातार मजबूत हो रहा है और इससे विपक्ष के कुछ लोग जलन महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक संगठन की छवि खराब करने के उद्देश्य से इस तरह की कूटरचित व्हाट्सऐप चैट वायरल की गई है। भाजपा के मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा ने भी इसे विपक्षियों की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए फर्जी चैट प्रसारित कराई गई है। मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    इस विवाद की पृष्ठभूमि में भाजपा की क्षेत्रीय आईटी सेल में नियुक्तियों को लेकर उठा मामला भी जुड़ा हुआ है। 24 अक्टूबर को प्रदेश कार्यालय की ओर से क्षेत्रीय टीम में सुरेंद्र विश्वकर्मा को आईटी सेल का संयोजक और अभिषेक पांडेय को सहसंयोजक बनाए जाने का पत्र जारी हुआ था। इसके बाद कुछ पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले से तय नामों को दरकिनार कर नई नियुक्तियां की गई हैं। एक अन्य पत्र के हवाले से यह दावा किया गया कि सुरेंद्र विश्वकर्मा की जगह मयंक भट्ट को संयोजक बनाया गया और अभिषेक पांडेय को टीम से हटा दिया गया।

    वहीं क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने इस विवाद को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी ओर से किसी बदलाव का पत्र जारी नहीं किया है। उनका कहना है कि जिन्हें पद दिए जाने की बात कही जा रही है वे पहले से ही किसी न किसी जिम्मेदारी पर हैं।

    फिलहाल कानपुर भाजपा में आईटी सेल की नियुक्तियों और भाजयुमो अध्यक्ष पद को लेकर उठे विवाद ने संगठन के भीतर की खींचतान को चर्चा में ला दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि वायरल चैट की जांच में क्या सामने आता है और पार्टी इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाती है।

  • मध्यप्रदेश की योजनाओं को रफ्तार देने की तैयारी, हर भाजपा सांसद बनेगा केंद्रीय मंत्रालय का कॉर्डिनेटर

    मध्यप्रदेश की योजनाओं को रफ्तार देने की तैयारी, हर भाजपा सांसद बनेगा केंद्रीय मंत्रालय का कॉर्डिनेटर


    भोपाल । मध्यप्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के लिए भाजपा एक नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत प्रदेश के प्रत्येक भाजपा सांसद को केंद्र सरकार के एक मंत्रालय के साथ समन्वय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव सामने आया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मध्यप्रदेश से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं परियोजनाओं और लंबित स्वीकृतियों के मामलों को तेजी से आगे बढ़ाना है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित पार्टी की कोर ग्रुप बैठक में यह सुझाव रखा। प्रस्ताव के अनुसार सांसद अपने निर्धारित मंत्रालय से संबंधित प्रदेश के मामलों की निगरानी करेंगे और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय स्तर पर उनकी पैरवी करेंगे।

    इस प्रस्ताव के तहत सांसदों की भूमिका केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि उन्हें केंद्र और राज्य के बीच संपर्क की एक अतिरिक्त कड़ी के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। मध्यप्रदेश के अलग-अलग विभागों को केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी परियोजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से लगातार संपर्क करना पड़ता है। कई बार इन मामलों में जानकारी जुटाने और निर्णय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में समय लगता है। ऐसे में यदि प्रत्येक मंत्रालय के लिए एक सांसद की जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित विभागों को अपने मुद्दे उठाने के लिए एक निर्धारित माध्यम मिल सकता है।

    प्रस्ताव के मुताबिक संबंधित सांसद मुख्यमंत्री मुख्य सचिव और मध्यप्रदेश के संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के साथ समन्वय करेंगे। प्रदेश में किसी योजना या परियोजना से जुड़ा मामला केंद्रीय मंत्रालय में लंबित होने पर सांसद उसकी स्थिति की जानकारी लेकर दिल्ली में संबंधित अधिकारियों के सामने विषय रख सकेंगे। इससे राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को केंद्र तक पहुंचाने और आवश्यक मंजूरियों के लिए नियमित संपर्क बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिम्मेदारियां किस तरह बांटी जाती हैं और मामलों की समीक्षा कितनी नियमित होती है।

    मध्यप्रदेश में लोकसभा की सभी 29 सीटों पर भाजपा के सांसद हैं। ऐसे में पार्टी के पास इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए सांसदों का व्यापक समूह उपलब्ध है। सांसदों के अनुभव उनकी प्रशासनिक समझ और संबंधित क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी का उपयोग प्रदेश की योजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों में सड़क परिवहन ग्रामीण विकास कृषि ऊर्जा आवास स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। इनसे संबंधित मध्यप्रदेश के प्रस्तावों पर समन्वय की जिम्मेदारी तय होने से विभागों को अपने मामलों की स्थिति पर नजर रखने में सुविधा मिल सकती है।

    इस व्यवस्था से लंबित परियोजनाओं की पैरवी और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को व्यवस्थित करने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि किसी परियोजना के लिए वित्तीय सहायता या प्रशासनिक मंजूरी जरूरी है तो संबंधित सांसद विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेकर केंद्रीय मंत्रालय के साथ संपर्क कर सकेंगे। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के स्तर पर प्राथमिकता वाले मामलों की समीक्षा होने से राज्य सरकार की जरूरतों और केंद्र के निर्णयों के बीच तालमेल बेहतर करने का प्रयास किया जा सकता है।

    प्रस्तावित व्यवस्था का एक अहम पहलू जवाबदेही भी है। मंत्रालयवार जिम्मेदारी तय होने पर यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि किस केंद्रीय मंत्रालय से जुड़े मामलों की पैरवी कौन-सा सांसद कर रहा है और उन पर कितनी प्रगति हुई है। इससे लंबित प्रस्तावों की स्थिति की समीक्षा करना आसान हो सकता है। साथ ही अधिकारियों को विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संपर्क करने के बजाय सांसद के माध्यम से समन्वय का एक अतिरिक्त रास्ता मिलेगा।

    फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे किस रूप में लागू किया जाएगा और सांसदों को कौन-कौन से मंत्रालय सौंपे जाएंगे इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। यदि योजना को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाता है तो इससे मध्यप्रदेश की केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

  • बंगाल में माहौल को लेकर शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान बोले माता पिता को ओडिशा भेजने का था प्लान

    बंगाल में माहौल को लेकर शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान बोले माता पिता को ओडिशा भेजने का था प्लान


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल को लेकर अपने पुराने अनुभव का जिक्र किया है। कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित राम-शरद कोठारी प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें अपने बुजुर्ग माता पिता को ओडिशा भेजने की तैयारी तक करनी पड़ी थी। अधिकारी ने कहा कि उस दौरान उन्हें आशंका थी कि राजनीतिक संघर्ष के बीच उन्हें जेल जाना पड़ सकता है और परिस्थितियां उनके परिवार के लिए मुश्किल हो सकती हैं।

    शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक उनके पिता की उम्र करीब 90 वर्ष है जबकि उनकी मां भी 80 वर्ष से अधिक उम्र की हैं। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि उन्होंने यह सोच लिया था कि अगर राजनीतिक संघर्ष के दौरान उन्हें जेल जाना पड़े या कोई दूसरी परिस्थिति पैदा हो तो अपने माता पिता को ओडिशा भेज देंगे। उन्होंने कहा कि उस समय पश्चिम बंगाल में जिस तरह का माहौल बना हुआ था उसे देखते हुए उन्हें इस तरह की तैयारी करनी पड़ी थी।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जनता ने इस बार पश्चिम बंगाल को बचा लिया। उनके इस बयान का संदर्भ राज्य में हुए हालिया राजनीतिक बदलाव से था। उन्होंने यह भी कहा कि अभी राज्य में काफी काम बाकी है और सरकार को आगे कई क्षेत्रों में काम करना है। उनके बयान में राजनीतिक संघर्ष के साथ साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख रहा।

    यह कार्यक्रम राम कोठारी और शरद कोठारी की स्मृति में आयोजित किया गया था। दोनों को राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कारसेवकों के रूप में याद किया जाता है। शुभेंदु अधिकारी ने उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार उनकी स्मृति में कई योजनाओं और पहलों पर काम करेगी। इनमें पश्चिम बंगाल में किसी सड़क का नाम उनके नाम पर रखने और विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में उनके नाम से पुरस्कार शुरू करने की पहल शामिल है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े स्थलों के विकास की बात कही। अधिकारी ने कहा कि राज्य में विकास कार्य जरूरी हैं लेकिन इसके साथ विरासत को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गौ संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में गौशालाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है और इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों तथा संगठनों से आगे आने की अपील की। उन्होंने पुरुलिया कोलकाता और खड़गपुर में संचालित छोटी गौशालाओं का उल्लेख करते हुए राज्य के दूसरे हिस्सों में भी ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने की बात कही।

    बकरीद के दौरान पशु वध को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपना रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानून के तहत कार्रवाई करेगी और गौ संरक्षण से जुड़े संगठनों को गौशाला स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पहले 2026 में पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद के दौरान पशु वध से जुड़े नियमों को लेकर दिशा निर्देश जारी किए थे। इस मुद्दे पर कलकत्ता हाई कोर्ट में भी याचिकाएं पहुंची थीं और अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर गोवंश वध पर रोक से जुड़े प्रावधानों को बरकरार रखा था।

    शुभेंदु अधिकारी ने इसके साथ तारापीठ तारकेश्वर और मदनमोहनजी को जोड़ने वाले प्रस्तावित तीर्थयात्रा सर्किट का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसकी अनुमानित लागत करीब 2000 करोड़ रुपये बताई। मुख्यमंत्री के मुताबिक विकास और विरासत संरक्षण को साथ लेकर चलना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठन को और सक्रिय करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्र और विभिन्न मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में छह नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है।

    पार्टी के फैसले के मुताबिक रामप्रताप सिंह चौहान को पश्चिम, गीता शाक्य को ब्रज, शंकर लोधी को कानपुर, दिलीप पटेल को अवध, रमेश सिंह को काशी और अभिजात मिश्रा को गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    मोर्चों की जिम्मेदारी भी तय
    भाजपा ने अलग-अलग मोर्चों के लिए भी प्रभारियों के नाम घोषित किए हैं। सूची के अनुसार राजेश चौधरी को युवा मोर्चा प्रभारी, संजय राय को पिछड़ा मोर्चा प्रभारी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह को अनुसूचित मोर्चा प्रभारी, कामेश्वर सिंह को महिला मोर्चा प्रभारी, डॉ. प्रियंका रावत को अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रभारी, देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी, शंकर गिरी को किसान मोर्चा प्रभारी बनाया है।

    संगठन के अन्य पदों पर भी नियुक्तियां
    पार्टी ने संगठन से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण दायित्व भी तय किए हैं। गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय प्रभारी बनाया गया है। वहीं प्रदेश मंत्री नरेंद्र शर्मा को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है।

    इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक बनाया गया है। अर्चना मिश्रा को ‘मन की बात’ का संयोजक और राहुल वाल्मीकि को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। भाजपा की इन नियुक्तियों को प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने और अलग-अलग क्षेत्रों व मोर्चों के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी

    दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव में 6016 वोटों से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित चुनाव से जुड़े मंत्री, पदाधिकारी और संगठन के प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस बैठक में हार के कारणों का विश्लेषण करने के साथ-साथ संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीति और भीतरघात की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा बैठक में उपचुनाव के प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, राकेश शुक्ला सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी प्रबंधन की हर स्तर पर समीक्षा होगी और यह भी देखा जाएगा कि किन कारणों से पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सूत्रों का कहना है कि दतिया शहर में भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन वहां कांग्रेस ने बढ़त बना ली जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला। संगठन की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ पार्षदों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भीतरघात के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दर्जनभर पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। समीक्षा बैठक के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हार के बाद पार्टी के भीतर भी आत्ममंथन की आवाजें तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आत्ममंथन का समय बताते हुए दतिया उपचुनाव का उल्लेख किया। वहीं टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी खुद को शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच वाला बताने लगते हैं तब चुनाव परिणाम प्रभावित होना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को भी संगठन के भीतर चल रही चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भाजपा संगठन जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केंद्रीय संगठन तक भेजी जा सकती है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

    पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि प्रत्याशी बदलने के बाद संगठन के सभी कार्यकर्ता पूरी मजबूती से एकजुट नहीं हो पाए और इसका असर चुनाव परिणाम पर दिखाई दिया।

    समीक्षा बैठक में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। चुनाव के दौरान वायरल हुए कथित फर्जी पत्रों और भ्रामक पोस्ट की जांच कराई जाएगी। संगठन ऐसे लोगों की सूची भी तैयार कर रहा है जिन्होंने इन पोस्ट को प्रसारित किया था ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करती है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी हार की तथ्यपरक समीक्षा करेगी और भविष्य की चुनावी रणनीति को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

  • राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भोपाल में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की

    राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भोपाल में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की


    भोपाल। भोपाल में शनिवार को राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर संसद परिसर में हुए विपक्ष के प्रदर्शन के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व्यापम चौराहे पर एकत्र हुए और वहां से विरोध मार्च निकालते हुए लिंक रोड की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और राहुल गांधी के पुतले का दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। पुलिस ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की जैसी स्थिति बन गई। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखा और किसी बड़े विवाद की नौबत नहीं आने दी। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर जिस प्रकार सांकेतिक प्रदर्शन किया गया उससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और संत परंपरा से जुड़े प्रतीकों का जिस तरह इस्तेमाल किया गया वह उचित नहीं था और इसी के विरोध में भोपाल में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

    संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच पहले से चल रही है। उनके अनुसार मामले में विशेष जांच दल जांच कर रहा है और न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। उनका कहना था कि जिन लोगों पर आरोप लगे थे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।

    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि राम मंदिर और हिंदू आस्था को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। विरोध मार्च के दौरान राहुल गांधी का पुतला जलाया गया और प्रतीकात्मक रूप से विरोध दर्ज कराया गया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पुतले पर आपत्तिजनक व्यवहार भी किया।

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि संसद के मानसून सत्र से जुड़ी है जहां निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद परिसर पहुंचे थे। विपक्षी सांसदों के साथ उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया था। विपक्ष का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल पारदर्शिता और जांच की मांग उठाना था जबकि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताया।

    मध्य प्रदेश संत समाज के प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि रामलला और संत परंपरा करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है।

    दूसरी ओर विपक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसका प्रदर्शन कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग से जुड़ा था और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज बनी हुई है।

    भोपाल में हुआ यह प्रदर्शन एक बार फिर यह संकेत देता है कि धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर देश में बहस लगातार तेज हो रही है। ऐसे मामलों में प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अवसर देना रहती है।

  • मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक

    मध्य प्रदेश में यूसीसी कानून को मिली मंजूरी भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा से पास हुआ समान नागरिक संहिता विधेयक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार ने यूसीसी विधेयक चर्चा के लिए पेश किया जिसके बाद कांग्रेस ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग उठाई लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विधानसभा में तीखी बहस नारेबाजी और हंगामे का दौर शुरू हो गया। अंततः भाजपा सरकार ने अपने बहुमत के आधार पर यूसीसी विधेयक को पारित करा लिया।

    विधेयक पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय जरूरी है इसलिए इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। कांग्रेस के कई विधायकों ने इस मांग का समर्थन किया लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही। मांग खारिज होने के बाद कांग्रेस विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में बढ़ते शोरगुल और अव्यवस्था को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को कार्यवाही पहले दस मिनट और फिर पंद्रह मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी माहौल शांत नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन उमंग सिंघार आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने यूसीसी को लेकर सरकार पर कई सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक संवैधानिक अधिकारों विशेषकर अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर सभी पक्षों से व्यापक संवाद होना चाहिए था। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विधेयक को सामाजिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने वाला कानून है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत लोगों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा और एक पति या एक पत्नी रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता और समान न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों का सम्मान करता है तो उसे इस कानून का समर्थन करना चाहिए। मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान भी कांग्रेस विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे लेकिन सरकार ने चर्चा पूरी कराकर बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करा लिया।

    सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी कांग्रेस ने विधानसभा परिसर में यूसीसी के विरोध में सांकेतिक नाटक का मंचन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारी महंगाई किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यूसीसी जैसे विषयों को आगे ला रही है। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून प्रदेश में समान अधिकार और समान न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम

    मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम


    नई दिल्ली। भोपाल में राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन के बाद पार्टी में एकजुटता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने चुनावी समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।

    कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरी है। नामांकन के दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई विधायक मौजूद रहे। इस दौरान विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए पार्टी नेतृत्व के साथ फोटो सेशन भी कराया
    हालांकि इसी बीच कांग्रेस को एक झटका भी लगा जब हुजूर सीट से पूर्व प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

    वहीं बीजेपी खेमे में भी हलचल कम नहीं है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी के पास अतिरिक्त वोट हैं और विकास चाहने वाले लोग बीजेपी उम्मीदवारों के साथ खड़े होंगे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में रहेगा।

    बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने भी अपनी जिम्मेदारी को लेकर भरोसा जताया और कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे वे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। इसी बीच उनके परिवार की ओर से धार्मिक माहौल भी देखने को मिला। महेश केवट के भाई और बेटे ने ओरछा में विशेष पूजा-अर्चना कर उनके राजनीतिक भविष्य की सफलता की कामना की।

    भोपाल में बीजेपी दफ्तर में भी लगातार विधायकों की आवाजाही जारी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और कई वरिष्ठ नेता बैठक के लिए पहुंचे। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी विधायकों को भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे वोटिंग प्रक्रिया में पूरी एकजुटता बनी रहे।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों ने अपनी रणनीति अंतिम चरण में पहुंचा दी है। कांग्रेस जहां एकजुटता का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी अपने संख्याबल और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा जता रही है। आने वाले दिनों में यह चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।