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  • अदालत के आदेश के बाद मिला नया घर, अरविंद केजरीवाल परिवार सहित नए बंगले में शिफ्ट

    अदालत के आदेश के बाद मिला नया घर, अरविंद केजरीवाल परिवार सहित नए बंगले में शिफ्ट


    नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना नया आवास बदल लिया है और अब वे परिवार सहित लुटियंस दिल्ली स्थित एक सरकारी बंगले में शिफ्ट हो गए हैं। यह नया पता 95, लोधी एस्टेट, नई दिल्ली है, जो राजधानी के प्रतिष्ठित और वीआईपी इलाकों में गिना जाता है। केजरीवाल ने स्वयं इस बदलाव की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें यह आवास पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में निर्धारित नियमों और न्यायिक आदेश के तहत आवंटित किया गया है।

    यह बंगला उच्च श्रेणी के सरकारी आवासों में शामिल है, जिसे आमतौर पर शीर्ष राजनीतिक पदों पर आसीन नेताओं को दिया जाता है। लगभग 5000 वर्ग फीट में फैले इस आवास में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें चार बड़े कमरे, दो खुले लॉन, तीन सर्वेंट क्वॉर्टर और एक गैराज शामिल है। इसके साथ ही एक अलग ऑफिस स्पेस भी बनाया गया है, जहां से राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को संचालित किया जा सकता है। इस तरह का आवास न केवल रहने के लिए बल्कि आधिकारिक कार्यों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

    दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल को अपना पूर्व आधिकारिक आवास खाली करना पड़ा था। उस समय यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र भी बना रहा, जब विपक्ष ने उस आवास को लेकर कई सवाल उठाए। इसके बाद कुछ समय तक वे अपनी पार्टी के एक सांसद के आवास पर रह रहे थे। हालांकि, राष्ट्रीय दलों के प्रमुखों को दिल्ली में आवास उपलब्ध कराने के नियम के तहत उन्हें यह नया बंगला प्रदान किया गया है, जिससे उनकी आवास संबंधी स्थिति स्पष्ट हो गई है।

    नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को राजधानी में एक निर्धारित श्रेणी का सरकारी आवास दिया जाता है, ताकि वे अपने संगठनात्मक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित कर सकें। इसी प्रावधान के अंतर्गत केजरीवाल को यह बंगला आवंटित किया गया है। खास बात यह भी रही कि इस आवंटन की प्रक्रिया में न्यायालय के निर्देशों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि उन्हें उनके पद के अनुरूप सुविधाएं मिल सकें।

    इस नए आवास में शिफ्ट होने के साथ ही अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को संगठित रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। लुटियंस दिल्ली का यह इलाका प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां देश के कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी निवास करते हैं। ऐसे में यह बदलाव न केवल व्यक्तिगत बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। यह घटनाक्रम राजधानी की राजनीति में एक नए अध्याय की ओर इशारा करता है, जहां आने वाले समय में केजरीवाल की सक्रियता और रणनीतियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..

    बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में अब कुछ ही दिन शेष हैं। 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है, जबकि दूसरे चरण के लिए 29 तारीख तय की गई है। इसके साथ ही तमिलनाडु में भी 23 को एक ही चरण में मतदान होगा। वहीं 4 मई को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    बंगाल में बनेगी भाजपा सरकार- हिमंत बिस्वा सरमा
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का बड़ा दावा किया है। पश्चिम बर्धमान जिले के गौरबाजार में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में भाजपा की सरकार बनना 100 प्रतिशत तय है। उन्होंने पार्टी की संभावनाओं को लेकर पूरा भरोसा जताया।

    चुनावी मंच से दी सख्त चेतावनी
    पांडुआ में जनसभा को संबोधित करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा बयान दिया। उन्होंने टीएमसी के कथित सिंडिकेट पर निशाना साधते हुए कहा, 29 तारीख से पहले सरेंडर कर दो, नहीं तो बाद में जेल जाना पड़ेगा। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

    गौरव वल्लभ का दावा, भवानीपुर से हारेंगी ममता बनर्जी

    भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी सरकार ने मां, माटी और मानुष के साथ विश्वासघात किया है और राज्य में अराजकता का माहौल बना रहा।

    भाजपा नेताओं का डबल इंजन सरकार पर जोर
    भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता डबल इंजन सरकार बनाने का मन बना चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि 29 अप्रैल से पहले आरोपियों को सरेंडर कर देना चाहिए, अन्यथा 4 मई के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • महिला आरक्षण पर राजनीति…. कांग्रेस बोली- LS की वर्तमान संख्या के आधार पर तुरंत इसे लागू करे सरकार

    महिला आरक्षण पर राजनीति…. कांग्रेस बोली- LS की वर्तमान संख्या के आधार पर तुरंत इसे लागू करे सरकार


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया और मांग की कि लोकसभा की वर्तमान संख्या में आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए। विपक्षी दल ने यह भी दावा किया कि 17 अप्रैल को लोकसभा (Lok Sabha) में जो विधेयक पारित नहीं सका वह महिला आरक्षण विधेयक नहीं बल्कि परिसीमन विधेयक था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinet) ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक संसद द्वारा 21 सितंबर, 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और अब यह संविधान का हिस्सा है। उन्होंने यहां प्रेसवार्ता में कहा, ”महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पराजित नहीं हुआ, बल्कि परिसीमन विधेयक पराजित हुआ है, जिसे आप (सरकार) देश पर थोपना चाहते थे।”

    श्रीनेत ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं और महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में छिप रहे हैं।” श्रीनेत ने एक कार्टून प्रदर्शित किया, जिसमें प्रधानमंत्री के पास 543 आमों से भरी टोकरी दिखाई गई है, लेकिन वह महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सा देने से इनकार कर रहे हैं और उनसे कह रहे हैं कि वह उन्हें उनका हिस्सा तभी दे सकते हैं जब वह आमों की संख्या बढ़ाकर 850 कर दें, जो विपक्ष उन्हें करने नहीं दे रहा है। संसद में संविधान संशोधन विधेयक के खारिज होने पर प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कांग्रेस नेता ने अपनी पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा कि अगर मोदी वाकई गंभीर हैं, तो उन्हें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में महिलाओं के लिए तत्काल आरक्षण प्रदान करना चाहिए। सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “आपने इस पर एक शर्त लगा दी है। उस शर्त को हटाइए। आप ही महिला आरक्षण में बाधा डाल रहे हैं, आप पुरुषों को खुश रखना चाहते हैं और उनकी सीटें कम नहीं करना चाहते।”

    मोदी द्वारा महिलाओं से माफी मांगने का जिक्र करते हुए श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री सही थे क्योंकि उन्हें मणिपुर में दंगों के दौरान दो महिलाओं के साथ जो हुआ, हाथरस और उन्नाव में जो हुआ, महिला ओलंपिक खिलाड़ियों के साथ जो हुआ और बिलकीस बानो मामले में दोषियों को जिस तरह सम्मानित किया गया, उसके लिए देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, ”आप (प्रधानमंत्री) सही थे। महिलाएं अपने अपमान को नहीं भूलतीं। आपसे बेहतर यह बात और कौन जान सकता है?”

    श्रीनेत ने कहा कि 240 सांसदों में से केवल 31 महिलाएं हैं, जो मात्र 12 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि देशभर के 1,654 विधायकों में से केवल 164 महिलाएं हैं, जो 10 प्रतिशत से भी कम है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के 21 मुख्यमंत्रियों में से केवल एक महिला है। श्रीनेत ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने मूल रूप से 1989 में दिवंगत राजीव गांधी के नेतृत्व में महिला आरक्षण पेश किया था, जिसका अटल बिहारी वाजपेयी, एल के आडवाणी, जसवंत सिंह और राम जेठमलानी जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विरोध किया था। परिसीमन के मुद्दे पर, कांग्रेस प्रवक्ता ने लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत आनुपातिक वृद्धि के प्रधानमंत्री के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मसौदा विधेयक में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है।

  • नीतीश युग का अंत, ‘सम्राट युग’ की शुरुआत, बिहार में नई सरकार के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां

    नीतीश युग का अंत, ‘सम्राट युग’ की शुरुआत, बिहार में नई सरकार के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां


    पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दो दशक से मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने पद से इस्तीफा दे दिया है और मंत्रिमंडल भंग होने के बाद राज्य में नए राजनीतिक युग की शुरुआत हो गई है। एनडीए विधायक दल ने सम्राट चौधरी को अपना नेता चुन लिया है, जिसके बाद अब उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ माना जा रहा है।

    बिहार में सम्राट युग की शुरुआत
    नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के बाद अब बिहार में पहली बार बीजेपी से मुख्यमंत्री बनने की संभावना है। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक ढांचे को संभालने और विकास की रफ्तार को बनाए रखने की होगी। इसके अलावा राज्य में भ्रष्टाचार और अफसरशाही को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। रेड टेप कल्चर के कारण कई सरकारी योजनाएं जमीन पर सही ढंग से लागू नहीं हो पातीं, जिससे जनता तक योजनाओं का पूरा लाभ नहीं पहुंच पाता।

    बेरोजगारी और पलायन पर फोकस जरूरी

    बिहार में बेरोजगारी और पलायन हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है। युवाओं का लगातार अन्य राज्यों की ओर जाना सरकार के लिए गंभीर चुनौती है। पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि ढांचा कमजोर
    राज्य में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कृषि व सिंचाई ढांचे की कमजोर स्थिति विकास में बाधा बनती रही है।

    शराबबंदी पर भी चर्चा तेज
    बिहार में लागू शराबबंदी नीति एक बार फिर चर्चा में है। कुछ एनडीए नेताओं द्वारा इस पर पुनर्विचार की मांग भी उठती रही है। हालांकि इस फैसले के सामाजिक और राजनीतिक असर को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

    नीतीश से अलग पहचान बनाने की चुनौती

    नई सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि और कार्यशैली से अलग पहचान बनाना भी होगी। नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि ने लंबे समय तक जनता को प्रभावित किया है। ऐसे में नई सरकार को ऐसी नीतियां और योजनाएं लानी होंगी, जो सीधे जनता, खासकर महिलाओं और युवाओं के जीवन में बदलाव ला सकें।

    कुल मिलाकर बिहार अब एक नए राजनीतिक चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां नेतृत्व परिवर्तन के साथ उम्मीदें भी बढ़ी हैं और चुनौतियां भी। नई सरकार के प्रदर्शन पर ही आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा तय होगी।

  • राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा

    राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा


    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित रन फॉर अंबेडकर और रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।

    राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे बड़ा संदेश देश का संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग अंबेडकर के सिद्धांतों और संविधान को खत्‍म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये ताकतें देश में सभी को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के सामने सम्मान जताते जरूर हैं लेकिन असल में उनका उद्देश्य संविधान को नुकसान पहुंचाना है।

    इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार संविधान पर प्रहार कर रही है और उसके नेता आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उनके अनुसार सरकार परोक्ष रूप से संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। पुनिया ने कहा कि यह मैराथन लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित की गई है ताकि सभी मिलकर अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो सकें।

    महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इसके समर्थन में रही है लेकिन भाजपा के लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि इसे नई जनगणना के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।

  • राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब

    राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब


    इंदौर । इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है इस मामले में डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि पार्टी के चरित्र को उजागर करती हैं

    घटना उस समय की है जब इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देते हुए वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया उनके इस रुख का सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने विरोध किया लेकिन कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है इसी चुप्पी को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा और कहा कि इस मुद्दे पर पूरी प्रदेश कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद पार्षद ने राष्ट्रीय गीत गाने से मना किया और यह कहते हुए पीछे हट गई कि वह इसे नहीं गाएंगी उन्होंने इसे बेशर्मी की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की विचारधारा और मानसिकता को दर्शाता है उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता भारत माता की जय बोलने से भी बचते हैं जो देशभक्ति की भावना के विपरीत है

    मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जवाब मांगा उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह ऐसे बयानों और आचरण का समर्थन करता है या नहीं यदि पार्टी इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थ है तो उसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए

    उन्होंने आगे कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपने प्राण न्योछावर किए ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं न केवल उन बलिदानों का अपमान हैं बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी समय समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों पर विवाद खड़ा करती रही है

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर बहस छेड़ दी है जहां एक ओर इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक माना जाता है वहीं दूसरी ओर कुछ वर्गों द्वारा इसे लेकर अलग विचार भी सामने आते रहे हैं फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं

  • एमपी में गेहूं खरीदी पर गरमाई सियासत, देरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, सरकार पर लगाए घोटाले के आरोप

    एमपी में गेहूं खरीदी पर गरमाई सियासत, देरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, सरकार पर लगाए घोटाले के आरोप

    भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की देरी को लेकर सियासत गरमा गई है। गुरुवार से प्रदेश के चार संभागों में खरीदी शुरू हो गई, लेकिन देरी को लेकर कांग्रेस पार्टी ने प्रदेशभर में प्रदर्शन किया। सरकार जहां इस देरी के पीछे इजराइल-ईरान युद्ध का हवाला दे रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों के साथ अन्याय बता रहा है।

    प्रदेशभर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

    खंडवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की, जिसमें हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए। रतलाम में जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कृषि उपज मंडी में धरना दिया गया, जहां बड़ी संख्या में किसान भी पहुंचे। भोपाल और श्योपुर में भी विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी देखने को मिली।

    जीतू पटवारी के आरोप

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गेहूं खरीदी में देरी एक “रणनीतिक घोटाला” है। उन्होंने आरोप लगाया कि बारदाने की कमी का बहाना बनाकर खरीदी टाली गई और किसानों को नुकसान पहुंचाया गया।

    पटवारी ने कहा कि करीब 10 लाख क्विंटल गेहूं ओपन मार्केट में बिक चुका है और लगभग 25% गेहूं 1600 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बेचा गया। उन्होंने नरेंद्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं, 3100 रुपए धान और 6000 रुपए सोयाबीन के दाम अब तक लागू नहीं किए गए हैं।

    व्यवस्थाओं की कमी से किसान परेशान

    रायसेन जिले में कई खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाएं अधूरी रहीं। बम्होरी केंद्र पर न तो पर्याप्त बारदाना पहुंचा और न ही किसानों के लिए छाया की व्यवस्था थी। स्लॉट बुकिंग के बावजूद किसानों को असमंजस का सामना करना पड़ा। वहीं, सागर में मंडी बंद होने पर जीतू पटवारी ने कलेक्टर को फोन कर नाराजगी जताई और कहा कि तेज गर्मी में किसान कई दिनों से परेशान हैं।

    श्योपुर और भोपाल में भी प्रदर्शन

    श्योपुर में जिला कांग्रेस कमेटी ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा, जिसमें विधायक बाबू जंडेल भी शामिल रहे। वहीं भोपाल में कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घेराव कर खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठाए।

    सरकार का पलटवार
    राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में एक दाना भी गेहूं नहीं खरीदा गया था, जबकि वर्तमान सरकार किसानों से खरीदी कर रही है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण थोड़ी देरी हुई, लेकिन अब व्यवस्थाएं पटरी पर आ रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का काम केवल विरोध करना है, जबकि सरकार किसानों के हित में काम कर रही है।

  • कांग्रेस में वंदे मातरम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूफ़ान, केके मिश्रा ने दी खुली चेतावनी

    कांग्रेस में वंदे मातरम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूफ़ान, केके मिश्रा ने दी खुली चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस के अंदर ही बड़ा राजनीतिक तूफ़ान बन गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने इस मामले पर अपनी पार्टी के भीतर खुले तौर पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने अपने ट्वीट्स में न सिर्फ भाजपा पर हमला बोला बल्कि कांग्रेस की पार्षद रूबीना खान को भी आड़े हाथों लिया। मिश्रा ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि जो लोग राष्ट्रधर्म नहीं निभा सकते और वंदे मातरम नहीं बोल सकते वे भाड़ में जाएं और पाकिस्तान जाकर बसें। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है।

    रूबीना खान के बयान को मिश्रा ने राजनीतिक ब्लैकमेलिंग करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर खेला गया है। मिश्रा ने यह भी कहा कि रूबीना खान के बयान से उन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों का अपमान हुआ है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देश के लिए दी। उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को चुनौती देने वाला मामला है।

    केके मिश्रा ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर राजनीति करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उसने अपने ही मंत्री विजय शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मिश्रा ने भाजपा पर राष्ट्रधर्म के मुद्दे पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उछालना और अपने ही लोगों की अनदेखी करना लोकतंत्र और राष्ट्रीय भावना के लिए खतरनाक है।

    मिश्रा ने कांग्रेस नेतृत्व को भी खुली चुनौती दी। इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा। उनके अनुसार रूबीना खान को पार्टी से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा जहां जाना चाहती हैं चली जाएं। मिश्रा ने पार्टी को चेतावनी दी कि ऐसे संदिग्ध निष्ठा वाले लोगों को शामिल करने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार यह केवल पार्टी का मामला नहीं बल्कि देश के प्रति प्रतिबद्धता का भी सवाल है।

    इस पूरे विवाद ने कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद को खुलकर सामने ला दिया है। एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए भुनाने की कोशिश कर रही है तो वहीं कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच टकराव और तेज होता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस मामले में कांग्रेस की छवि और संगठनात्मक क्षमता दोनों चुनौतीपूर्ण स्थिति में हैं।

    इंदौर के यह विवाद केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। केके मिश्रा का यह कड़ा रुख और पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती देना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस को अपने भीतर अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने की आवश्यकता है। इस विवाद का राजनीतिक भविष्य और असर आने वाले दिनों में साफ होगा लेकिन फिलहाल यह वंदे मातरम विवाद कांग्रेस के लिए सबसे बड़े अंदरूनी तूफानों में से एक बन चुका है।

  • असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'

    असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'


    दिसपुर।
    असम विधानसभा चुनावों (Assam Assembly elections.) के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो गया है। मतदान से महज कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के ‘गोमांस सेवन’ पर दिए गये बयान पर राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है। सरमा ने कहा कि गोमांस खाने में कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे निजी जगहों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुस्लिम भाई गोमांस खाते हैं, हम उन्हें मना नहीं कर रहे हैं। हम बस यही कहते हैं कि इसे घर के अंदर खाएं, सार्वजनिक स्थानों पर नहीं। मंदिरों के 5 किलोमीटर दायरे में या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर इसका सेवन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान से सियासी बवाल तेज हो गया है। विपक्ष इसे भाजपा (BJP) की दोहरी नीति बता रहा है।

    दरअसल, यह बयान मुख्यमंत्री के पिछले कई बयानों से बिल्कुल अलग है। कुछ दिन पहले जोरहाट में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि गाय का मांस खाने वालों को वह नहीं बख्शेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने तब कहा था कि असम में पशु संरक्षण कानून है, सार्वजनिक रूप से गोमांस खाने पर 3 साल की जेल हो सकती है। मैं गाय का मांस खाने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराऊंगा।

    विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा
    मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दलों ने हमलावर रुख अपनाया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, कि भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ। उन्होंने हिमंता के बयान वाला पोस्टर शेयर करते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

    वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने भी भाजपा पर तीखा प्रहार किया। पार्टी ने कहा कि ‘गाय माता’ भाजपा के लिए सिर्फ चुनावी हथकंडा है, जिसका इस्तेमाल दंगे और अशांति फैलाने के लिए किया जाता है। आप ने आरोप लगाया कि उत्तर भारत में भाजपा और उसके समर्थक ‘ रक्षा’ के नाम पर हत्याएं करते हैं, वहीं असम के उनके नेता कह रहे हैं कि गोमांस खाओ लेकिन घर में।

    पुराने बयान और कानून का प्रावधान
    बता दें कि इस महीने के शुरू में हिमंता बिस्वा सरमा ने असम जातीय परिषद (एजेपी) की उम्मीदवार कुंकी चौधरी की मां सुजाता गुरुंग चौधरी पर गोमांस खाने और ‘राष्ट्र-विरोधी व सनातनी-विरोधी’ होने का आरोप लगाया था। उन्होंने चुनाव के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। एजेपी ने इन आरोपों को फर्जी और राजनीतिक साजिश बताया है।

    असम पशु संरक्षण अधिनियम, 2021 गायों के वध पर पूर्ण रोक नहीं लगाता, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, रेस्तरां और सामुदायिक कार्यक्रमों में गोमांस के सेवन पर प्रतिबंध है। राज्य में दुकानों से गोमांस खरीदा जा सकता है और निजी स्थानों पर इसका सेवन किया जा सकता है। हाल ही में कैबिनेट ने होटलों और सार्वजनिक स्थानों में गोमांस पर और सख्ती की है।

  • राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक है। वे ही इस क्षेत्र में सक्रिय और सफल हो सकते हैं, जिनमें जनसेवा और जनकल्याण की भावना हो। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोगों के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील होना, अध्ययनशील होना, तनाव प्रबंधन में दक्ष होना और जनहित के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करना आवश्यक है। कोई समस्या आने पर जनप्रतिनिधि का व्यवहार और समस्या निराकरण के लिए उनका प्रबंधन कौशल, उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। सकारात्मक और समाज हित की गतिविधियों और विकास कार्यों के लिए हमें दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर सोचना और कार्य करना चाहिए।

    भोपाल स्थित विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशेष रूप से उपस्थित थे। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मानना कि लोकतंत्र के विचार की उत्पत्ति पश्चिम से हुई थी, पूर्णत: सत्य नहीं है। लोकतंत्र, भारतीय राजनैतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण है। भारतीय व्यवस्थाओं में सदैव से ही मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है, राजनैतिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में शास्त्रार्थ की परम्परा प्राचीन समय से रही है। भारत में विचारों की अभिव्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सम्मान और महत्व प्रदान किया गया। भारत में ऐतिहासिक रूप से जुड़े लोकतंत्र के संस्कारों और मूल्यों का ही परिणाम है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी देश में लोकतंत्र पर आधारित व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहीं। जबकि अन्य पड़ोसी देशों का हाल सबके सामने है।

    उन्होंने युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें हर स्थिति में सम भाव से रहने की प्रेरणा मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम से लेना चाहिए। जब उन्हें राजपाट सौंपा जाना था, तब उन्हें वनवास दे दिया गया। परंतु उन्होंने दोनों स्थितियों को समभाव से लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सहित कई भारतीय शासकों के इतिहास से ज्ञात होता है कि उन्होंने कभी अपनी अगली पीढ़ी को राज सत्ता सौंपने का उपक्रम नहीं किया। राज्य के प्रबंधन में लगे लोगों ने ही उनके बाद व्यवस्थाएं संभाली। ऐसे महान शासकों का मानना था कि यदि अगली पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता और राज सत्ता के प्रबंधन की दक्षता होगी, तो वे स्वयं इस दिशा में सक्रिय होंगे। इन भारतीय मूल्यों और परम्पराओं का वर्तमान में भी पालन होना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों और सत्ता से जुड़े लोगों का अपने परिवार को समय देना और उन्हें अच्छे संस्कार देना भी आवश्यक है। अच्छे संस्कारों के अभाव में अगली पीढ़ी द्वारा यश प्रभावित करने की संभावना बनी रहती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर से विशेष रूप से संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए।

    मप्र के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रजातंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन है। अत: लोकतंत्र के सशक्त होने के लिए जनप्रतिनिधि का सशक्त होना आवश्यक है। विधायक होना बहुत महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है, विधायक बड़ी जनसंख्या की आशाओं, आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी दुख, तकलीफों, अपेक्षाओं को वाणी प्रदान करते हैं। विधायकगण अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रबंधन कैसे करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा विधायकों को संयत व्यवहार रखने, जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनके निराकरण की ठोस कोशिश करने, कार्यालय प्रबंधन के लिए संवेदनशील और सक्रिय स्टाफ रखने, अद्यतन डिजिटल तकनीकों के उपयोग में समय के साथ चलने की सलाह दी। सस्ती लोकप्रियता के लिए की गई गतिविधियां दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं।