मंदिर में चक्कर लगाने का विज्ञान! क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे छिपा रहस्य


नई दिल्ली।मंदिरों में घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। माना जाता है कि मंदिर का गर्भगृह एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र होता है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा निरंतर प्रवाहित होती रहती है।

आध्यात्मिक कारण: ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम

हिंदू धर्म में प्रदक्षिणा का अर्थ होता है-ईश्वर को अपने जीवन का केंद्र मानकर उनके चारों ओर घूमना। क्लॉकवाइज दिशा में चलने से देवता हमेशा आपकी दाईं ओर रहते हैं, जिसे शुभ और पवित्र माना गया है।

इससे मन में श्रद्धा, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और वह आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनता है।

वैज्ञानिक कारण: ऊर्जा प्रवाह के साथ तालमेल

क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे एक वैज्ञानिक सोच भी जुड़ी है। Sadhguru Jaggi Vasudev के अनुसार, उत्तरी गोलार्ध में ऊर्जा का प्रवाह घड़ी की दिशा में होता है।

इसी कारण मंदिरों में उसी दिशा में परिक्रमा करने से शरीर उस ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाता है। इससे मानसिक शांति, शारीरिक स्फूर्ति और बेहतर एकाग्रता प्राप्त होती है।

यह भी कहा जाता है कि इस दिशा में चलने से शरीर ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अधिक प्रभावी तरीके से अवशोषित कर पाता है।

गीले कपड़ों में प्रदक्षिणा का महत्व

धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि गीले कपड़ों में परिक्रमा करने से ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। पुराने समय में मंदिरों के पास कुंड या कुएं होते थे, जहां स्नान कर भक्त गीले वस्त्रों में ही प्रदक्षिणा करते थे।

गीलापन शरीर को ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।

अलग-अलग देवताओं की परिक्रमा संख्या

शास्त्रों में विभिन्न देवताओं के लिए प्रदक्षिणा की संख्या भी निर्धारित है-

भगवान गणेश: 3 बार
भगवान विष्णु: 4 बार
मां दुर्गा: 1 बार
भगवान शिव: आधी परिक्रमा (जलधारी तक)
यह नियम ऊर्जा संतुलन और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर बनाए गए हैं।

मंदिर में क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है। यह हमें प्राकृतिक ऊर्जा के साथ जोड़कर मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।