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  • सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित

    सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित


    नई दिल्ली । भुवनेश्वर कांग्रेस पार्टी ने ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। यह कदम पार्टी की अनुशासन समिति के निर्देश पर लिया गया क्योंकि मुकीम पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। यह फैसला पार्टी के भीतर नेतृत्व और कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ती असंतोष की स्थितियों के बीच आया है।

    सोनिया गांधी को पत्र लिखकर जताई थी नाराजगी

    मुकीम जो पहले बाराबती-कटक सीट से विधायक रह चुके हैं ने हाल ही में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने पार्टी की स्थिति और नेतृत्व पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। पत्र में उन्होंने कांग्रेस की कमजोर स्थिति का उल्लेख करते हुए सोनिया गांधी से पार्टी के भविष्य के लिए मार्गदर्शन की अपील की थी। मुकीम ने लिखा था कि कांग्रेस वर्तमान में कठिन दौर से गुजर रही है और संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि सोनिया गांधी का मार्गदर्शन पार्टी के लिए बेहद जरूरी है ताकि पार्टी को इस संकट से उबारा जा सके।

    खड़गे की उम्र और नेतृत्व पर सवाल

    पत्र का सबसे विवादास्पद हिस्सा मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र पर था। मुकीम ने खड़गे की उम्र 83 वर्ष का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाया कि विपक्ष के नेता के रूप में इतनी उम्र में सक्रियता दौड़-भाग और जनसंपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने खड़गे को सलाहकार की भूमिका में रखने की सलाह दी और युवा नेतृत्व को आगे लाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुकीम ने प्रियंका गांधी वाड्रा को केंद्रीय भूमिका में और राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में प्रभावी बनाए जाने की बात भी की।

    युवा नेताओं को आगे लाने की वकालत

    मुकीम ने अपने पत्र में पार्टी में युवा नेताओं को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने सचिन पायलट डीके शिवकुमार ए रेवंत रेड्डी और शशि थरूर जैसे नेताओं को पार्टी की शीर्ष नेतृत्व टीम में शामिल करने की बात की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया मिलिंद देवड़ा और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारणों को समझना चाहिए और इसे पार्टी की उपेक्षा और अनदेखी का परिणाम बताया।

    राहुल गांधी से मुलाकात न होने की शिकायत

    पत्र में मुकीम ने यह भी शिकायत की थी कि वे पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी से मुलाकात की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें कभी समय नहीं मिल सका। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी का प्रतीक बताया।

    कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई

    कांग्रेस ने मुकीम के इस पत्र को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अनुशासन बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता है।
    कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह कदम संगठन में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है।

    संघर्षपूर्ण समय में पार्टी का कदम

    यह घटना उस समय हुई है जब कांग्रेस पार्टी अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। मुकीम का पत्र इस असंतोष की गहराई को उजागर करता है और उनकी निष्कासन की कार्रवाई से यह भी साफ हो जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी में गहरी अंतर्विरोधों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

  • कर्नाटक के बाद अब पंजाब कांग्रेस में घमासान…. सक्रिए हुए राहुल गांधी

    कर्नाटक के बाद अब पंजाब कांग्रेस में घमासान…. सक्रिए हुए राहुल गांधी


    चंडीगढ़।
    कांग्रेस (Congress) में आंतरिक कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। कर्नाटक (Karnataka) के बाद अब पंजाब इकाई (Punjab Congress) में नेताओं के बीच तनातनी जारी है। खबर है कि हालात संभालने के लिए कांग्रेस आलाकमान सक्रिय हो गया है। कहा जा रहा है कि सांसद राहुल गांधी (MP Rahul Gandhi) ने भी इस संबंध में बैठक बुलाई थी। हालांकि, इस संबंध में कांग्रेस की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

    कांग्रेस की निलंबित नेता नवजोत कौर सिद्धू के बयान के बाद कांग्रेस की पंजाब इकाई में तनाव बढ़ गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि हालात काबू में करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। सूत्रों ने कहा है कि राहुल गांधी ने पंजाब मामलों के प्रभारी समेत कई बड़े नेताओं के साथ बैठक की है। उन्होंने बताया है कि कांग्रेस नेतृत्व जारी संसद सत्र के दौरान संकट बढ़ने नहीं देना चाहता।

    नवजोत कौर सिद्धू बनाम राजा अमरिंदर सिंह वडिंग
    नवजोत कौर ने बुधवार को कहा कि वह और उनके पति हमेशा पार्टी के साथ रहेंगे। कौर कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं। कौर ने कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पर भी तीखा हमला करते हुए उन पर पार्टी को ‘बर्बाद’ करने का आरोप लगाया। कौर ने बुधवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘हम कांग्रेस के साथ हैं और हमेशा रहेंगे, और हम अपने पंजाब राज्य को जीतेंगे और इसे अपने विनम्र, प्रिय और त्याग के प्रतीक गांधी परिवार को उपहार स्वरूप देंगे।’

    कौर ने वडिंग पर निशाना साधते हुए कहा कि 70 ‘कुशल, ईमानदार और वफादार’ नेता उनके संपर्क में हैं, ‘जिन्हें आपने (वडिंग) कांग्रेस पार्टी से अलग कर दिया है और जो कांग्रेस टिकट के लिए योग्य विजयी उम्मीदवार हैं।’ उन्होंने अपने पोस्ट में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आप पंजाब की 70 प्रतिशत सीटों को बर्बाद करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहां आपने पहले ही अप्रभावी लोगों को फर्जी टिकट दे दिए हैं, इसके बावजूद कांग्रेस पंजाब में जीत हासिल करेगी।’

    कौर ने वडिंग पर निशाना साधते हुए कहा, ‘टिकट बेचने के आरोप में आपको गुजरात से निकाल दिया गया था और आपने वहां महंगी गाड़ियां, जमीनें और मेट्रो खरीदीं। क्या आप आईटी की व्याख्या सुनने के लिए तैयार हैं? राजा वडिंग, अपने उन कुत्तों का इस्तेमाल मत करो जिन्हें आपकी वजह से टिकट मिले हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आप लगातार कांग्रेस पार्टी के खिलाफ काम क्यों कर रहे हैं और उम्मीदवारों को हराकर उन्हें अन्य पार्टियों में शामिल होने के लिए मजबूर क्यों कर रहे हैं?’

    बड़े समर्थन का दावा
    नवजोत कौर ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें कांग्रेस की पंजाब इकाई के 70 प्रतिशत और AICC के 90 प्रतिशत लोगों का समर्थन प्राप्त है। अपने निलंबन को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कौर ने कहा कि नोटिस एक ऐसे व्यक्ति की ओर से आया है, जिनके पास कोई मान्यता नहीं है और ऐसे कई नोटिस जारी किए जाते रहे हैं।

    रंधावा बोले- कोर्ट में बात करेंगे
    500 करोड़ रुपए में सीएम की कुर्सी वाले बयान के बाद भी नवजोत कौर सिद्धू लगातार कांग्रेस नेताओं पर संगीन आरोप लगाती रही। उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा पर नशा तस्करों से संबंध होने और बेहिसाब प्रोपर्टी बनाने के आरोप लगाए हैं। रंधावा ने कहा कि अब हम कोर्ट में बात करेंगे। अब तो मेरी पगड़ी का सवाल है। राजनीति में ऐसी बातें होती रहती हैं, इसमें नया कुछ नहीं है। लेकिन यह सच है कि मेरे माता-पिता का नवजोत सिद्धू के माता-पिता से दोस्ताना रिश्ता था। इस तरह के आरोप लगाना शर्मनाक है। यह तो सिर्फ सिद्धू ही बता सकते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी से ऐसी बातें कही थीं या उनकी पत्नी खुद ही ऐसा कह रही हैं। उन्होंने कहा कि अब तो वो कोर्ट में ही सिद्धू को जवाब देंगे।

  • राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति

    राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विदेशी मेहमानों को विपक्ष के नेता से नहीं मिलने देती, जबकि पहले यह परंपरा रही है कि किसी भी विदेशी गणमान्य व्यक्ति को विपक्ष के नेता से मिलने की अनुमति दी जाती थी। राहुल गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय विपक्ष के नेताओं को भी विदेशी मेहमानों से मिलने की इजाजत थी।

    राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता का दृष्टिकोण अलग होता है और विदेशी गणमान्य अतिथि से मिलने का अधिकार उन्हें होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं करते हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब वे विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उन्हें भी बताया जाता है कि विदेशी नेताओं से नहीं मिलना है, जो नीति के अनुसार होता है।

    रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि आम तौर पर यह परंपरा रही है कि विदेश से आने वाले मेहमान विपक्ष के नेता से भी मिलते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय यही नियम रहा, लेकिन अब इस परंपरा का पालन नहीं किया जाता। उनका यह भी कहना था कि एलओपी (नेता विपक्ष) एक अलग दृष्टिकोण पेश करते हैं और वह भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। केवल सरकार ही देश का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

    राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद बॉलीवुड और राजनीति जगत की हस्ती कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी की भावनाएं देश के प्रति संदिग्ध हैं। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी अटल बिहारी वाजपेयी के समान बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें भाजपा में शामिल होना चाहिए। कंगना ने ट्वीट या बयान में कहा कि भगवान ने उन्हें जन्म दिया है, जीवन दिया है, वे भी अटल जी बन सकते हैं, इसके लिए उन्हें भाजपा ज्वाइन कर लेना चाहिए।

    कंगना ने कहा, “सरकार के अपने फैसले होते हैं। अटल जी नेशनल असेट थे, पूरे देश को उन पर गर्व था। लेकिन राहुल गांधी की देश के प्रति भावनाएं संदिग्ध हैं। चाहे दंगे फैलाने की योजना हो या देश को टुकड़े करने की साजिश, उनकी नीयत पर संदेह है। अगर वह खुद को अटल जी से तुलना कर रहे हैं तो मैं यही सुझाव दूंगी कि आप भाजपा में शामिल हो जाइए।”

    राहुल गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष का अधिकार है कि वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और जनता के सामने अपनी राय रखे। थरूर ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी भूमिका निभाने का पूरा अधिकार है और विदेशी नेताओं से मिलने का उनका हक संविधान और परंपरा दोनों के तहत सुरक्षित है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल गांधी का यह आरोप देश की राजनीतिक परंपरा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। विपक्ष का यह अधिकार है कि वह विदेशी प्रतिनिधियों से मिले और अपने दृष्टिकोण को साझा करे। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि विदेश नीति केवल सरकार तक सीमित नहीं हो सकती, विपक्ष का दृष्टिकोण भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    राहुल गांधी के बयान और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का मानना है कि लोकतंत्र में अलग-अलग दृष्टिकोण रखने वाले नेताओं को भी सम्मान दिया जाना चाहिए और परंपराओं का पालन होना चाहिए। वहीं, भाजपा समर्थक इसे केवल राजनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर देश में राजनीतिक संवाद और विपक्ष की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। राहुल गांधी का आरोप और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि राजनीतिक बयानबाजी और आलोचना आज भी भारतीय राजनीति में उतनी ही तीव्र है जितनी पहले रही है।