क्या कहा किरेन रिजिजू ने?
सदन से समय से पहले चले गए

क्या कहा किरेन रिजिजू ने?
सदन से समय से पहले चले गए

भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस में अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले नवजोत कौर सिद्धू खुद सार्वजनिक मंच से कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर चुकी थीं। इसके बावजूद पार्टी ने संगठनात्मक नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें बाहर करने का निर्णय लिया।
सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास
पार्टी से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें “पप्पू” तक कह दिया। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी ने आखिरकार अपने नाम को सही साबित कर दिया है। उनके मुताबिक, राहुल खुद को अकेला ईमानदार और समझदार नेता मानते हैं, जबकि उन्हें जमीनी हकीकत की कोई समझ नहीं है।
नवजोत कौर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के आसपास मौजूद लोग उन्हें वास्तविक स्थिति से दूर रखते हैं और फैसले होने से पहले ही टिकट बेचकर ऐश करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी इमरजेंसी कॉल का जवाब देने में राहुल को छह महीने से ज्यादा लग जाते हैं, जिससे तब तक नुकसान हो चुका होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोगों को साथ जोड़ने से पहले राहुल को अपने तथाकथित समर्थकों से पूछना चाहिए कि क्या वे ईमानदारी से पंजाब के लिए काम करना चाहते हैं।
राहुल गांधी पर आगे भी साधा निशाना
अपनी पोस्ट में नवजोत कौर ने आगे कहा कि राहुल गांधी के पास न तो जमीनी सच्चाई सुनने का समय है और न ही इच्छाशक्ति, क्योंकि वे अपनी बनाई हुई दुनिया में रहना पसंद करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के अधिकांश समर्थक नि:स्वार्थ सेवा के बजाय अपनी जेबें भरने में लगे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वे दोबारा सत्ता में नहीं लौटने वाले।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर राहुल में हिम्मत है तो वे अपने समर्थकों से मौजूदा सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने को कहें और अपनी फाइलें खुलवाने के लिए भी तैयार रहें। नवजोत कौर ने राहुल को सलाह दी कि उन्हें सच बोलना और उसका सामना करना सीखना चाहिए, क्योंकि सच वही रहता है जो था और जो है।
राजनीति और पंजाब पर टिप्पणी
नवजोत कौर सिद्धू ने खुद को एक शुभचिंतक बताते हुए राहुल गांधी को ज्यादा संवेदनशील, व्यावहारिक और ग्रहणशील बनने की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि राहुल के ज्यादातर कथित समर्थक भाजपा में जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न तो वे किसी से मिलने गई हैं और न ही कोई उनके पास आया है। उनके अनुसार, वे एक फाउंडेशन के माध्यम से काम कर सकती हैं, लेकिन उनका समय और ऊर्जा केवल पंजाब की भलाई के लिए समर्पित है।
उन्होंने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी में भ्रष्ट नेताओं को सम्मान मिलता है, तब ईमानदारी और सच्चाई की बातें बेमानी हो जाती हैं। अंत में उन्होंने राहुल गांधी को “गुड लक” कहते हुए राजनीति में अपना वजूद बचाने की नसीहत दी।
बीजेपी को लेकर भी की टिप्पणी
एक अन्य पोस्ट में नवजोत कौर सिद्धू ने भारतीय जनता पार्टी की तारीफ भी की। उन्होंने लिखा कि बीजेपी ने उनके टैलेंट को पहचाना और निष्पक्ष सर्वे के आधार पर उन्हें वर्ष 2012 में विधायक का टिकट दिया। उस समय वे अस्पताल में कार्यरत थीं और डॉक्टर होने के कारण उन्हें सीएपीएस हेल्थ की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा कि बीजेपी में उन्हें ईमानदारी और सच्चाई से काम करने की पूरी आजादी मिली और वे किसी भी विभाग में जाकर उसी दिन काम निपटाकर लौट सकती थीं।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस का एक इतिहास और विरासत रही है। अब वह ढलान पर है लेकिन विजय कांग्रेस को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। यह मौका कांग्रेस को गंवाना नहीं चाहिए।” हालांकि, अभी तक न तो विजय और न ही उनकी पार्टी TVK ने इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि या खंडन किया है।
कांग्रेस बोली- राहुल गांधी ही हमारा ‘बूस्ट’
विजय के पिता के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई।
TVK का ऑफर क्यों लुभावना?
सूत्रों के अनुसार, TVK ने कांग्रेस को 60 से अधिक सीटें और सरकार बनने की स्थिति में मंत्री पदों का भी संकेत दिया है। यही कारण है कि भले ही सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस इनकार कर रही हो, लेकिन अंदरखाने इस प्रस्ताव पर मंथन जारी है। विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते-बिगड़ते देर नहीं लगती। ऐसे में कांग्रेस और विजय की पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि कांग्रेस DMK के साथ बनी रहती है या किसी नए सियासी रास्ते की ओर बढ़ती है।

सरमा ने कहा, “गांधी परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के राजनीतिक फैसलों से यह साफ दिखता है कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि प्रियंका गांधी केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करें।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस में राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं और गुट के जरिए सत्ता बनाए रखना चाहते हैं, जबकि प्रियंका उस गुट का हिस्सा नहीं हैं। सरमा ने बताया, “मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा हूं, मुझे अंदर की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि प्रियंका को केरल की बजाय असम में जिम्मेदारी दी गई।”
हिमंत सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद से लगातार कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार अब इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई राहुल और प्रियंका के बीच अंदरूनी मतभेद हैं, या यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राहुल गांधी ने दोनों परिवारों को आर्थिक सहायता के रूप में चेक भी प्रदान किए। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ इंदौर या मध्यप्रदेश का नहीं है, बल्कि पूरे देश में शहरी जल आपूर्ति प्रणाली की कमजोरी का उदाहरण है। उन्होंने सरकार से तत्काल कार्रवाई करने और लोगों को सुरक्षित पीने के पानी की गारंटी देने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि जल संकट और दूषित पानी की आपूर्ति जैसी समस्याओं को अर्बन मॉडल और स्मार्ट सिटी की उपलब्धियों के नाम पर छुपाया जा रहा है। उनका कहना था कि जनता की जान से खेलना स्वीकार्य नहीं है और इस मुद्दे पर सभी स्तरों पर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राहुल गांधी के इस दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने भी उनसे मिलकर अपने अनुभव साझा किए और मांग की कि सरकार ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि इंदौर का मामला चेतावनी है कि शहरों में जल प्रबंधन और स्वास्थ्य सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए। राहुल गांधी की यह पहल लोगों के बीच संवेदनशीलता और तत्काल कार्रवाई की मांग को उजागर करती है। उनका यह दौरा केवल समर्थन और सहानुभूति दिखाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने वास्तविक मदद और आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिली।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कल अपने इंदौर प्रवास के दौरान बिना किसी का नाम लिए इस मामले को लेकर कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ”हमने इस कठिनाई के दौर को महसूस किया है, संवेदना के साथ महसूस किया है, लेकिन आप अगर लाशों पर राजनीति करने आओगे, इंदौर बर्दाश्त नहीं करेगा। कोई बर्दाश्त करने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर आपने आपदा में से अवसर तलाश कर राजनीति का रास्ता तलाशा, तो ये उचित नहीं कहा जा सकता। आप सकारात्मक विरोध करो, विपक्ष की आवाज विपक्ष की तरह से रखो, तो हम सब उस बात से सहमत हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा,’लेकिन अगर आपने बात निकाली, तो बात दूर तलक तक जाएगी।
वहीं कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, भाजपाइयों की जुबान अभी भी “भागीरथपुरा” का भय बढ़ा रही है! पीड़ित परिवारों के गहरे जख्मों पर नमक लगा रही है! अहंकार में डूबे हुए “23 सरकारी हत्याओं” के अपराधी इसीलिए निरंकुश हैं, क्योंकि जनमत का अपमान इनकी आदत में आ चुका है! तभी तो ये आंसूओं में डूबे इंदौर का दर्द भूलकर, “जुबानी-जहर” उगल रहे हैं! गलती सुधारने की बजाय अभी भी मुंहजोरी कर रहे हैं!”
इसी बीच श्री पटवारी ने राहुल गांधी के दौरे के संबंध में कहा कि नेता प्रतिपक्ष इस घटना को लेकर बहुत चिंतित थे। पूरी घटना उनके संज्ञान में है। उन्होंने प्रभावितों के परिजनों से मिलने की इच्छा जाहिर की है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 17 जनवरी को इंदौर आगमन पीड़ित परिवारों और शहरवासियों को संबल, संवेदना और न्याय की उम्मीद देगा।
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 20 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। सरकार जहां लगातार व्यवस्थाएं सुधारने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे एक मुद्दा बना रही है।

राहुल गांधी ने ट्विटर पर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि “इंदौर में पानी नहीं जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में था। घर-घर मातम है गरीब बेबस हैं लेकिन भाजपा के नेता घमंड में चूर हैं। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है उन्हें सांत्वना मिलनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया।” उन्होंने यह भी पूछा कि गंदा पानी प्रशासन ने क्यों नहीं रोका और सीवर पानी पीने का कारण क्या था। राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “क्यों नहीं कार्रवाई की गई।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार प्रशासन और नेतृत्व इस घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का एपिसेंटर बताया और कहा कि यहां लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें गरीबों की जान जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर हमेशा की तरह खामोश रहते हैं जब गरीब मरते हैं। इस घटना के बाद से जनता में गुस्सा और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और प्रदर्शनों का दौर जारी है।

केंद्रीय मंत्री ने कहाकांग्रेस का महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है। इनके लिए गांधी का मतलब सिर्फ प्रियंका गांधीराहुल गांधीइंदिरा गांधीराजीव गांधी और संजय गांधी तक सीमित रह गया है। उन्हें उस गांधी से समस्या है जो देश और समाज के लिए खड़ा था। बिट्टू ने दावा किया कि जनता अब उस नाम वाले गांधी को नकार चुकी हैजबकि महात्मा गांधी का सम्मान देश में हमेशा बना रहेगा।राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर बिट्टू ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का नाम रोशन करने के लिए विदेश जाते हैंजबकि राहुल गांधी सैर-सपाटे के लिए विदेश रवाना हो जाते हैं। उन्होंने कहा मैंने अभी राहुल गांधी की तस्वीरें जर्मनी से देखीं। सवाल यह है कि राहुल गांधी हैं कहां? देश के अहम मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिएलेकिन वो विदेश में घूमते नजर आते हैं।
इसके बाद बिट्टू ने राहुल और प्रियंका गांधी के बीच कथित टकराव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि संसद में हाल के दिनों में दिए गए भाषणों को लेकर दोनों के बीच तुलना होने लगी है। बिट्टू के मुताबिककई लोगों ने प्रियंका गांधी के भाषणों की तुलना राहुल गांधी से कीजिससे राहुल नाराज हो गए। उन्होंने कहादोनों गांधी के बीच बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। राहुल गांधी इसी नाराजगी में परिवार और पार्टी से झगड़ा कर विदेश चले गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर गंभीर समस्याएं हैं। उनके अनुसारराहुल गांधी का विदेश जाना केवल व्यक्तिगत दौरा नहींबल्कि पार्टी और परिवार के अंदरूनी तनाव का नतीजा है। हालांकिइन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस में अंदरूनी कलह का दावा किया हो। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस को लेकर ऐसे ही आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने लिखा था किटीम प्रियंका बनाम टीम राहुल अब खुलकर सामने आ गई है और कांग्रेस की आंतरिक कलह सार्वजनिक हो चुकी है।शहजाद पूनावाला ने ओडिशा से कांग्रेस के पूर्व नेता मोहम्मद मुकीम के पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि मुकीम ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मल्लिकार्जुन खरगे को हटाने और प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस समय संगठनात्मक और वैचारिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और आपसी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। दूसरी ओरकांग्रेस की चुप्पी ने इन आरोपों को और हवा दे दी है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन दावों पर सफाई आ सकती हैलेकिन फिलहाल भाजपा इन बयानों के जरिए विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रिश्तों को लेकर लगाए गए ये आरोप सियासी बयानबाजी का हिस्सा हैं या वास्तव में पार्टी के भीतर किसी बड़े बदलाव का संकेतयह आने वाला समय ही बताएगा।