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  • खाड़ी संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तेज आर्थिक छलांग, 7.8 प्रतिशत जीडीपी पर भाजपा का राहुल गांधी को जवाब

    खाड़ी संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तेज आर्थिक छलांग, 7.8 प्रतिशत जीडीपी पर भाजपा का राहुल गांधी को जवाब


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर को देश की बदलती आर्थिक ताकत का बड़ा प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत का यह प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र में संकट तेल आपूर्ति को लेकर चुनौतियां सप्लाई चेन में रुकावट और दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत गति बनाए रखी है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ऐसे कठिन वैश्विक माहौल में 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करना सामान्य उपलब्धि नहीं बल्कि देश की आर्थिक क्षमता और मजबूत नीतिगत प्रबंधन का संकेत है।

    भाजपा नेता ने भारत की विकास दर की तुलना दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से करते हुए कहा कि कई विकसित और उभरते देशों की विकास रफ्तार भारत की तुलना में काफी कम रही है। उन्होंने कनाडा जर्मनी ब्रिटेन अमेरिका मलेशिया और दक्षिण कोरिया जैसी अर्थव्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के दौर में भारत ने अपेक्षाकृत अधिक मजबूत प्रदर्शन किया है। उनके अनुसार खाड़ी क्षेत्र में तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा लेकिन भारत ने इन परिस्थितियों में भी अपनी विकास गति को बनाए रखा।

    रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को इस प्रदर्शन का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत और स्थिर नेतृत्व किसी भी देश की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद जरूरी होता है। संकट के समय सही फैसले लेने और चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता ही किसी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती है। उन्होंने वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री के आर्थिक प्रबंधन की भी सराहना की और कहा कि सरकार की नीतियों के साथ मैन्युफैक्चरिंग व्यापार निर्माण और सेवा क्षेत्र के योगदान ने देश की विकास दर को मजबूत बनाया है।

    भाजपा सांसद ने वर्ष 2013 की आर्थिक स्थिति और वर्तमान भारत के बीच तुलना करते हुए कहा कि एक समय देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रैजाइल फाइव यानी कमजोर मानी जाने वाली प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया जाता था। उस दौर में निवेशकों के बीच भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता थी और नीतिगत ठहराव की चर्चा होती थी। उन्होंने अपने पुराने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कुछ निवेशक भारत में अपने निवेश को लेकर चिंतित थे लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उनके अनुसार फ्रैजाइल फाइव से निकलकर 7.8 प्रतिशत की विकास दर तक पहुंचना भारत की आर्थिक यात्रा में बड़े बदलाव को दर्शाता है।

    रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था बताने वाला दावा ताजा जीडीपी आंकड़ों के सामने टिकता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी आर्थिक विकास और आर्थिक प्रबंधन को समझने में असफल रहे हैं और लगातार ऐसे बयान देते हैं जो देश की आर्थिक उपलब्धियों के विपरीत दिखाई देते हैं। भाजपा नेता ने कहा कि एक ओर विपक्ष देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर बताने की कोशिश करता है जबकि दूसरी ओर ताजा आंकड़े भारत की तेज विकास गति का प्रमाण दे रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक उपलब्धि को केवल एक तिमाही के आंकड़े तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह पिछले कई वर्षों में हुए व्यापक बदलाव का परिणाम है। वैश्विक संकटों युद्धों तेल आपूर्ति की अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बावजूद भारत का मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश की अर्थव्यवस्था कठिन परिस्थितियों का सामना करने में पहले से अधिक सक्षम हुई है। रविशंकर प्रसाद के अनुसार भारत आज वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच मजबूती के साथ खड़ा है और 7.8 प्रतिशत की विकास दर उसी बदलती आर्थिक तस्वीर का सबसे बड़ा प्रमाण है।

  • ग्रोथ के आंकड़ों पर सियासत गर्म, निर्मला सीतारमण बोलीं भारत की अर्थव्यवस्था को मृत कहना करोड़ों मेहनतकश भारतीयों का अपमान

    ग्रोथ के आंकड़ों पर सियासत गर्म, निर्मला सीतारमण बोलीं भारत की अर्थव्यवस्था को मृत कहना करोड़ों मेहनतकश भारतीयों का अपमान


    नई दिल्ली । एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ा पलटवार किया है जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था बताया था। सीतारमण ने कहा कि ऐसे बयान केवल सरकार की आलोचना नहीं हैं बल्कि उन करोड़ों भारतीय नागरिकों की मेहनत को भी कमतर आंकते हैं जिनके प्रयासों से देश लगातार आर्थिक प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब भारत मजबूत विकास दर दर्ज कर रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल रहा है तब देश की अर्थव्यवस्था को नकारात्मक रूप से पेश करना तथ्यों से अलग तस्वीर दिखाने जैसा है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार से सवाल पूछना उसका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों हैं। सरकार की नीतियों की आलोचना करना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान देश के नागरिकों की मेहनत और आर्थिक उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार से असहमति रखने का पूरा अधिकार है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति में आम नागरिकों के योगदान को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।

    सीतारमण ने भारत की आर्थिक स्थिति के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2026-27 वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विस सेक्टर में 12.1 प्रतिशत का विस्तार देखने को मिला है। इसके साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचना भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े केवल कागजों पर दर्ज उपलब्धियां नहीं हैं बल्कि इसके पीछे देश के करोड़ों नागरिकों की कड़ी मेहनत और उनकी महत्वाकांक्षाएं हैं। भारत के लोग अपनी व्यक्तिगत प्रगति के साथ देश को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में भी योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है और यह देश की क्षमता को दर्शाता है।

    राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीतारमण ने कांग्रेस में मौजूद अर्थशास्त्रियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में कई ऐसे लोग हैं जो आर्थिक आंकड़ों और वास्तविक तथ्यों को समझते हैं। इसलिए मजबूत विकास दर और अन्य सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत कहना हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत हो सकती है और सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठाए जा सकते हैं लेकिन इससे देश की पूरी आर्थिक प्रगति को नकारा नहीं जा सकता।

    सीतारमण ने मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कारोबार और निवेश को आसान बनाने के लिए 1000 से अधिक कानूनों को हटाया है और लगभग 40000 नियमों को सरल बनाया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग तथा उद्योग और व्यापार जगत के साथ लगातार संवाद को भी आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण बताया गया।

    उन्होंने भरोसा जताया कि पहली तिमाही का मजबूत प्रदर्शन पूरे वित्तीय वर्ष के लिए सकारात्मक संकेत है। आने वाली तिमाहियों में भी भारत की विकास गति बनाए रखने की उम्मीद है। जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से होने वाली बातचीत में भी भारत की आर्थिक संभावनाओं और निवेश अवसरों पर जोर दिया जा रहा है। सीतारमण के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आर्थिक आंकड़ों और विकास के मुद्दे पर राजनीतिक बहस के बीच देश की प्रगति को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।

  • ‘ब्रालेट तो छोटी-सी बात थी…’ कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

    ‘ब्रालेट तो छोटी-सी बात थी…’ कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना


    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने रक्षाबंधन को लेकर कृति सेनन के विवादित ज्वैलरी विज्ञापन पर एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने कहा कि उनकी आपत्ति केवल कृति के कपड़ों को लेकर नहीं थी, बल्कि विज्ञापन में रक्षाबंधन जैसे त्योहार को जिस तरह पेश किया गया, उससे थी। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित ज्वैलरी ब्रांड ने विज्ञापन वापस ले लिया था।

    ‘किसने रोका है कुछ भी पहनने से?’
    कृति सेनन के आउटफिट पर सवाल उठाए जाने को लेकर कंगना ने कहा कि किसी को भी अपनी पसंद के कपड़े पहनने से रोकने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि कृति ने क्या पहना था, बल्कि यह है कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार को विज्ञापन में किस रूप में दिखाया गया।

    कंगना से जब पूछा गया कि क्या कृति ईद के मौके पर भी इसी तरह के कपड़ों में पोस्ट कर सकती हैं, तो उन्होंने इस पर भी टिप्पणी की और हिंदू पारिवारिक रिश्तों में मर्यादा और सीमाओं का जिक्र किया।

    राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
    ‘डिकोड’ को दिए इंटरव्यू में कंगना ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कृति सेनन के समर्थन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की पोस्ट में रक्षाबंधन का जिक्र नहीं था।

    कंगना ने कहा कि एक महिला रक्षाबंधन पर अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती है, लेकिन रक्षाबंधन केवल कपड़ों या फैशन का मामला नहीं, बल्कि एक सभ्यता और धार्मिक परंपरा की अभिव्यक्ति है।

    उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अपने नजरिए को लेकर भ्रमित हैं। कंगना ने सनातन धर्म को लेकर राहुल गांधी की सोच पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनका नजरिया सनातन धर्म के प्रति अलग तरह का है।

    ‘ब्रालेट तो छोटी-सी चीज थी’
    कंगना ने साफ किया कि उनके मुताबिक विज्ञापन में ब्रालेट सबसे बड़ा मुद्दा नहीं था। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह था कि विज्ञापन में रक्षाबंधन से जुड़े पारंपरिक तत्व लगभग नजर नहीं आए।

    उन्होंने माता-पिता, घर, हलवा-पूरी, भगवान, टीका, अक्षत, धूप और दीप जैसे पारंपरिक प्रतीकों का जिक्र करते हुए कहा कि रक्षाबंधन को केवल आधुनिक एस्थेटिक्स के जरिए पेश नहीं किया जा सकता।

    कंगना के मुताबिक, “एक त्योहार किसी संस्कृति और सभ्यता का एस्थेटिक एक्सप्रेशन होता है।” उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन में टीका और राखी जैसे पारंपरिक प्रतीकों का अपना महत्व है। अब कंगना की इन टिप्पणियों पर कृति सेनन और राहुल गांधी की ओर से किसी प्रतिक्रिया का इंतजार है।

  • गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर आंदोलन… आज हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले जलाएंगे छात्र

    गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर आंदोलन… आज हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले जलाएंगे छात्र


    रांची।
    झारखंड (Jharkhand) में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं (JPSC and JSSC examinations) में कथित अनियमितता के खिलाफ पिछले 21 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को अब और तेज करने की तैयारी है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने आज सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Chief Minister Hemant Soren) के इस्तीफे की मांग की है। मंच ने आंदोलन के अगले चरण के कार्यक्रमों का भी ऐलान किया है। आज छात्रों ने एक बड़ा ऐलान किया है। आइए जानते हैं छात्रों ने क्या-क्या कहा है।


    ‘गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर’

    सरकार की बेरुखी को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे छात्र रवींद्र पासवान ने कहा कि अब आंदोलन गांधी के रास्ते पर नहीं, बल्कि भगत सिंह के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। वहीं, मंच के पीयूष कुमार ने सरकार पर छात्रों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार उन्हें ‘कीड़ा-मकोड़ा’ समझ रही है। उन्होंने कहा कि अब छात्र ‘दिशोम गुरु’ के रास्ते पर चलकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।


    आज राहुल गांधी और हेमंत सोरेन का पुतला दहन का प्लान

    मंच के अनुसार, 16 अगस्त को पूरे झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा जबकि 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो उन्हें राज्य सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कहकर उन्हें भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।


    10 अगस्त को छात्रों पर पुलिस ने बरसाई थीं लाठियां

    बता दें कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितता के खिलाफ छात्रों का आंदोलन पिछले 21 दिनों से जारी है। 10 अगस्त को राज्य भर से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे थे और विधानसभा घेराव का प्रयास किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई थी। इसके बाद से छात्रों में सरकार के प्रति नाराजगी और बढ़ गई है।

    सदर अस्पताल में 5 दिनों से भर्ती देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल 14वें दिन भी जारी रही. उन्होंने अस्पताल के अपने बेड को छोड़कर कॉरिडोर की जमीन पर लेटकर धरना जारी रखा। देवेंद्र नाथ महतो ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में तिरंगा फहराने और इसके बाद प्रस्तावित तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए सदर अस्पताल से बाहर निकलने का प्रयास किया था।


    धक्का- मुक्की हुई

    इस संबंध में देवेंद्र नाथ महतो ने पहले ही जिला प्रशासन को पत्र देकर अपनी इच्छा से अवगत कराया था.इसके साथ ही, पुलिसकर्मियों की ओर से उनके साथ जाकर वापस अस्पताल लाने की बात भी कही गई थी. सुबह करीब 8 बजे देवेंद्र नाथ महतो सदर अस्पताल से निकलने लगे. लेकिन उन्हें बार-बार लगभग 10-10 मिनट के अंतराल में रोक दिया गया और काफी देर तक बाहर जाने नहीं दिया गया. इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की भी हुई।

    करीब 9 से 10 बजे के बीच मौके पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति और गंभीर हो गई. देवेंद्र नाथ महतो के अनुसार, उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, जिससे उन्हें चोट भी आई. उनके साथ मौजूद साथियों के साथ भी कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और कुछ साथियों को उठाकर पटके जाने की बात कही गई. घटना के बाद देवेंद्र नाथ महतो अस्पताल के अपने कमरे के गेट के बाहर बैठ गए और अपना अनशन जारी रखा।


    विधानसभा से जवाब मांगा जाएगा- जयराम महतो

    इसके बाद देवेंद्र नाथ महतो की बातचीत विधायक टाइगर जयराम महतो से हुई. बातचीत के दौरान जयराम महतो ने स्वतंत्रता दिवस के दिन हुई इस घटना को गंभीर और निंदनीय बताया. विधायक टाइगर जयराम महतो ने कहा कि इस पूरे मामले को विधानसभा के माध्यम से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा. इसके बाद करीब 2 से 4 बजे के बीच पुलिसकर्मी अस्पताल परिसर से हट गए, जिसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों को अस्पताल के अंदर आने का अवसर मिला और उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

  • देशभक्ति या लापरवाही? नर्मदा की तेज धार में बिना लाइफ जैकेट नाव पर निकले विधायक, वीडियो चर्चा में

    देशभक्ति या लापरवाही? नर्मदा की तेज धार में बिना लाइफ जैकेट नाव पर निकले विधायक, वीडियो चर्चा में


    इंदौर। मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगा यात्राओं और राजनीतिक गतिविधियों के बीच कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने नेताओं और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और दूसरे जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी हाथों में तिरंगा लेकर करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चले। देशभक्ति के इस आयोजन में लोगों की मौजूदगी भी रही लेकिन चर्चा उस समय शुरू हुई जब पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे उनके खाली सरकारी वाहन भी चलते नजर आए। इन वाहनों में ड्राइवर के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठने लगा कि जब संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि पैदल यात्रा में शामिल थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की क्या जरूरत थी। इससे पेट्रोल और डीजल की खपत को लेकर भी सवाल उठे। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से समय समय पर ईंधन बचाने और ऊर्जा की खपत कम करने की अपील की जाती रही है।

    दूसरी तस्वीर महेश्वर से सामने आई जहां तिरंगा यात्रा के दौरान भाजपा विधायक राजकुमार मेव और टीआई समेत कई नेता तथा अधिकारी नाव में सवार दिखाई दिए। मामला इसलिए ज्यादा गंभीर माना गया क्योंकि इस दौरान नर्मदा नदी उफान पर थी और बारिश के मौसम में नदी का बहाव सामान्य दिनों की तुलना में काफी तेज रहता है। इसके बावजूद नाव में बैठे लोगों ने कथित तौर पर लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। इस दृश्य के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए। आम लोगों को नदी और जलाशयों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से ही सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी का आरोप लगे तो सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि पूरे घटनाक्रम में संबंधित प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या निर्देश थे यह अलग जांच का विषय हो सकता है।

    इधर मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित उज्जैन दौरे को लेकर भी बयानबाजी शुरू हो गई है। राहुल गांधी सितंबर में मध्य प्रदेश के उज्जैन आने वाले हैं ऐसी चर्चा के बीच प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें पहले झारखंड के रांची जाने की सलाह दी है। सारंग ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन में राहुल गांधी की मौजूदगी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वे वहां क्यों नहीं पहुंचे। इसी बयान के दौरान मंत्री ने राहुल गांधी को रांची जाने का ऑफर दिया और यहां तक कहा कि वे उनकी दिल्ली से रांची की टिकट भी करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में मंत्री का टिकट वाला बयान फिलहाल राजनीतिक तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस भी परेशानी का कारण बनी। स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों में ड्यूटी पूरी करने के बाद आउट-पंच लगाने के लिए परेशान होते रहे। ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण शिक्षक समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे थे। शिक्षकों की चिंता इस बात को लेकर थी कि अगर आउट-पंच नहीं हुआ तो उनकी उपस्थिति प्रभावित हो सकती है और वेतन कटौती का खतरा पैदा हो सकता है। नियमों के अनुसार शिक्षकों को स्कूल के निर्धारित दायरे में रहकर ही ई-अटेंडेंस प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

    देर शाम तकनीकी समस्या दूर होने के बाद विभाग की ओर से शिक्षकों को राहत दी गई और उन्हें जहां वे मौजूद थे वहीं से अटेंडेंस लगाने की अनुमति दी गई। हालांकि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत कोई नई समस्या नहीं है। प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की परेशानी के कारण भी शिक्षकों को बार बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल केवल तकनीकी व्यवस्था का नहीं बल्कि ऐसी प्रणाली तैयार करने का है जो कर्मचारियों के लिए सुविधा बने परेशानी नहीं।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस से पहले मध्य प्रदेश में सामने आए इन घटनाक्रमों ने राजनीति प्रशासन और सरकारी व्यवस्था से जुड़े कई सवालों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं नदी में सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चिंता है। वहीं राजनीतिक बयानबाजी और ई-अटेंडेंस की तकनीकी समस्या ने भी अलग बहस छेड़ दी है।

  • MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट

    MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाएं इन दिनों कई सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं देशभक्ति के नाम पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में नेता और अधिकारी पैदल चलते नजर आए तो उनके पीछे खाली सरकारी और निजी वाहनों का काफिला चलता रहा। कहीं उफनती नर्मदा की लहरों के बीच भाजपा विधायक और अधिकारी बिना लाइफ जैकेट नाव में सवार दिखाई दिए। वहीं राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे से पहले मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें झारखंड के रांची जाने की सलाह देते हुए टिकट तक कराने का ऑफर दे दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक बयानबाजी से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और अन्य नेता अधिकारी करीब डेढ़ किलोमीटर तक हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बीच इस यात्रा की एक तस्वीर चर्चा का विषय बन गई। वजह थी पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे चलता खाली वाहनों का काफिला। इन गाड़ियों में ड्राइवरों के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद पैदल यात्रा कर रहे थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह ईंधन की खपत को कम किया जा सकता था।

    महेश्वर में तिरंगा यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ा मामला और ज्यादा गंभीर नजर आया। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी उफान पर है और नदी की धार तेज होने के बावजूद भाजपा विधायक राजकुमार मेव टीआई समेत अन्य नेता और अधिकारी नाव में सवार हो गए। तस्वीरों के मुताबिक नाव पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आम लोगों को नदी और जलाशयों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए इन नियमों का पालन कितना जरूरी है। देशभक्ति का उत्साह अपनी जगह है लेकिन उफनती नदी में सुरक्षा से समझौता किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सितंबर में उज्जैन आने की संभावित चर्चा के बीच मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने उन पर राजनीतिक तंज कसा है। सारंग ने राहुल गांधी को मध्य प्रदेश आने से पहले रांची जाने की सलाह दी। उनका कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वहां नहीं पहुंचे। इसी मुद्दे को लेकर मंत्री ने राहुल गांधी से पहले रांची जाने को कहा और यहां तक कहा कि वह उनकी दिल्ली से रांची की टिकट करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में टिकट वाला बयान फिलहाल सियासी तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    अब बात प्रशासनिक व्यवस्था की। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षक ई-अटेंडेंस की तकनीकी परेशानी से जूझते रहे। दिनभर स्कूल में ड्यूटी करने के बाद शिक्षकों को आउट-पंच करना था लेकिन ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण पंच नहीं हो पा रहा था। शिक्षकों की चिंता इसलिए बढ़ गई क्योंकि अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन कटने का डर था। नियम के मुताबिक शिक्षकों को स्कूल के 200 मीटर के दायरे में रहकर अटेंडेंस लगानी होती है। लिहाजा कई शिक्षक घंटों तक स्कूल में बैठकर पोर्टल ठीक होने का इंतजार करते रहे।

    देर शाम जब पोर्टल की समस्या दूर हुई तो विभाग की ओर से शिक्षकों को संदेश भेजकर राहत दी गई कि वे जहां हैं वहीं से अटेंडेंस लगा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों के लिए यह समस्या नई नहीं है। प्रदेश के कई हिस्सों में नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतों के कारण ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर लगातार परेशानी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ पोर्टल के कुछ घंटों तक ठप रहने का नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का है जिसमें तकनीकी खामी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने का डर बना रहता है।

    कुल मिलाकर तिरंगा यात्रा से लेकर नर्मदा की लहरों और ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत तक मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने अलग-अलग मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं सुरक्षा नियमों के पालन पर। वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने राहुल गांधी के संभावित मध्य प्रदेश दौरे को भी सियासी रंग दे दिया है।

  • राहुल गांधी ने प्रयागराज में छात्रों से साधा संवाद, ‘दर्द-डेटा-दौलत’ के मुद्दे पर BJP का पलटवार

    राहुल गांधी ने प्रयागराज में छात्रों से साधा संवाद, ‘दर्द-डेटा-दौलत’ के मुद्दे पर BJP का पलटवार


    नई दिल्ली । प्रयागराज में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच संवाद करते हुए बेरोजगारी पेपर लीक महंगी शिक्षा और रोजगार के घटते अवसरों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। KP ग्राउंड में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने देश के करीब 40 करोड़ युवाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही इस्तेमाल किया जाए तो भारत आर्थिक और सामाजिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। हालांकि उनके इस कार्यक्रम के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी पलटवार करते हुए राहुल गांधी से झारखंड के आंदोलनरत छात्रों के मुद्दे पर सवाल पूछ दिए। बीजेपी नेताओं ने कहा कि अगर राहुल गांधी वास्तव में छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर हैं तो उन्हें प्रयागराज के साथ रांची जाकर उन छात्रों से भी मिलना चाहिए जो प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं की समस्याओं को मुख्य रूप से दर्द डेटा और दौलत के तीन मुद्दों से जोड़कर समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवा रोजगार और बेहतर अवसरों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना था कि लाखों रुपये खर्च करके उच्च शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार हासिल करना है। राहुल गांधी ने दावा किया कि केवल डिग्री या सर्टिफिकेट मिलने से युवा का भविष्य सुरक्षित नहीं हो जाता क्योंकि जब शिक्षा के बाद नौकरी का अवसर नहीं मिलता तो परिवारों पर आर्थिक दबाव और युवाओं में निराशा दोनों बढ़ते हैं।

    पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितताओं का मुद्दा भी राहुल गांधी के भाषण के केंद्र में रहा। उन्होंने कहा कि एक युवा कई वर्षों तक किसी सरकारी परीक्षा की तैयारी करता है लेकिन अगर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो उसकी पूरी मेहनत प्रभावित हो सकती है। उन्होंने ऐसे युवाओं के उदाहरण भी सामने रखे जो आर्थिक दबाव के बीच काम करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है क्योंकि लाखों युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है।

    राहुल गांधी ने इसके बाद डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आने वाली अर्थव्यवस्था में युवा और डेटा मिलकर बड़ी ताकत बन सकते हैं। उनके अनुसार जिस तरह पिछली सदी में पेट्रोलियम को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण संसाधन माना गया उसी तरह डिजिटल दौर में डेटा बेहद महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत के करोड़ों नागरिक रोजाना इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं और इससे बड़ी मात्रा में डेटा तैयार होता है। राहुल ने इस डेटा से होने वाले आर्थिक लाभ और उसके स्वामित्व को लेकर भी सवाल उठाए।

    सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने रील्स और लगातार डिजिटल कंटेंट देखने की आदत को आधुनिक दौर की एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं का काफी समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बीत रहा है जबकि दूसरी तरफ सुरक्षित रोजगार और बेहतर करियर के अवसरों की तलाश जारी है। उनका तर्क था कि युवाओं की ऊर्जा को केवल डिजिटल मनोरंजन तक सीमित करने के बजाय उसे शिक्षा कौशल नवाचार और रोजगार सृजन की दिशा में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    राहुल गांधी का यह कार्यक्रम कांग्रेस के छात्रों की गूंज अभियान का हिस्सा बताया गया। इस अभियान के जरिए कांग्रेस पेपर लीक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दों को युवाओं के बीच उठाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का दावा है कि देश के युवाओं की समस्याओं को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना जरूरी है।

    वहीं बीजेपी ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हमला तेज कर दिया। बीजेपी नेताओं ने झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि राहुल गांधी प्रयागराज में छात्रों से संवाद कर सकते हैं तो रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों से मिलने क्यों नहीं जाते। बीजेपी का कहना है कि झारखंड में कांग्रेस सरकार की सहयोगी है और वहां छात्रों की समस्याओं पर राहुल गांधी को सीधे संवाद करना चाहिए।

    राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम के बीच Gen-Z और युवा मतदाताओं को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होती दिखाई दी। पेपर लीक रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे पहले से ही युवाओं के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नजर युवा वर्ग पर है। प्रयागराज में राहुल गांधी का छात्रों से संवाद इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि युवाओं से जुड़े रोजगार शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे किस तरह राजनीतिक बहस को प्रभावित करते हैं और क्या Gen-Z वास्तव में आगामी चुनावी राजनीति का नया केंद्र बनता है।

  • आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    प्रयागराज। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज से उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान का आगाज करेंगे। वह केपी इंटर कॉलेज मैदान में करीब दो घंटे तक छात्रों से सीधा संवाद करेंगे। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के जरिए पूर्वांचल के युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की है। कार्यक्रम में प्रदेश के करीब 25 जिलों के शहर और जिला अध्यक्षों के साथ कांग्रेस के सभी छह सांसद और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

    राहुल गांधी शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक छात्रों से संवाद करेंगे। इस दौरान नीट, आरओ/आरआरओ समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षाओं में देरी, भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। कांग्रेस के मुताबिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए करीब दो लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

    स्वराज भवन में नेताओं के साथ करेंगे मंथन
    छात्र संवाद कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी अपने पैतृक आवास स्वराज भवन पहुंचेंगे। यहां वह करीब ढाई घंटे रुकेंगे। इस दौरान पार्टी के सांसदों, विधायकों, प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। कांग्रेस ने प्रयागराज को चुनने के पीछे यहां मौजूद बड़ी छात्र आबादी को भी अहम वजह माना है। राजस्थान और उत्तराखंड के बाद राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत प्रयागराज में यह आयोजन किया जा रहा है।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है प्रयागराज
    प्रयागराज में करीब दो लाख छात्र अलग-अलग डेलीगेसियों और हॉस्टलों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनमें आधे से ज्यादा युवा पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस की नजर इस बड़े युवा वर्ग पर है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय लंबे समय से देश की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसके अलावा मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों में भी देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं।

    पॉप सिंगर लश्करी और MC अल्ताफ देंगे प्रस्तुति
    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक और सांगीतिक प्रस्तुतियों से होगी। जेन-जी की पसंद को ध्यान में रखते हुए पॉप सिंगर लश्करी और एमसी अल्ताफ को प्रस्तुति के लिए बुलाया गया है। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम में किसी तरह का राजनीतिक भाषण नहीं होगा। राहुल गांधी सीधे छात्रों से संवाद करेंगे और उनके सामने रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

  • राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भोपाल में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की

    राम मंदिर चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भोपाल में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की


    भोपालभोपाल में शनिवार को राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर संसद परिसर में हुए विपक्ष के प्रदर्शन के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व्यापम चौराहे पर एकत्र हुए और वहां से विरोध मार्च निकालते हुए लिंक रोड की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और राहुल गांधी के पुतले का दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। पुलिस ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की जैसी स्थिति बन गई। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखा और किसी बड़े विवाद की नौबत नहीं आने दी। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर जिस प्रकार सांकेतिक प्रदर्शन किया गया उससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और संत परंपरा से जुड़े प्रतीकों का जिस तरह इस्तेमाल किया गया वह उचित नहीं था और इसी के विरोध में भोपाल में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

    संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच पहले से चल रही है। उनके अनुसार मामले में विशेष जांच दल जांच कर रहा है और न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। उनका कहना था कि जिन लोगों पर आरोप लगे थे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।

    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि राम मंदिर और हिंदू आस्था को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। विरोध मार्च के दौरान राहुल गांधी का पुतला जलाया गया और प्रतीकात्मक रूप से विरोध दर्ज कराया गया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पुतले पर आपत्तिजनक व्यवहार भी किया।

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि संसद के मानसून सत्र से जुड़ी है जहां निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद परिसर पहुंचे थे। विपक्षी सांसदों के साथ उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया था। विपक्ष का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल पारदर्शिता और जांच की मांग उठाना था जबकि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताया।

    मध्य प्रदेश संत समाज के प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि रामलला और संत परंपरा करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है।

    दूसरी ओर विपक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसका प्रदर्शन कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग से जुड़ा था और इसका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज बनी हुई है।

    भोपाल में हुआ यह प्रदर्शन एक बार फिर यह संकेत देता है कि धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर देश में बहस लगातार तेज हो रही है। ऐसे मामलों में प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अवसर देना रहती है।

  • 8 अगस्त को प्रयागराज में छात्रों से संवाद करेंगे राहुल गांधी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर होगी चर्चा

    8 अगस्त को प्रयागराज में छात्रों से संवाद करेंगे राहुल गांधी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर होगी चर्चा

    प्रयागराज। प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अभियान तेज करने जा रही है। इसी क्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 8 अगस्त को प्रयागराज के केपी ग्राउंड में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों से संवाद करेंगे।

    यह अभियान कोटा से 17 जून को शुरू हुआ था, जबकि दूसरा चरण 17 जुलाई को देहरादून में आयोजित किया गया। तीसरे चरण के तहत अब 8 अगस्त को प्रयागराज में कार्यक्रम होगा। पहले 9 अगस्त को दिल्ली में विशाल छात्र रैली प्रस्तावित थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण छात्र संवाद कार्यक्रम प्रयागराज में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
    यह अभियान कोटा से 17 जून को शुरू हुआ था, जबकि दूसरा चरण 17 जुलाई को देहरादून में आयोजित किया गया। तीसरे चरण के तहत अब 8 अगस्त को प्रयागराज में कार्यक्रम होगा। पहले 9 अगस्त को दिल्ली में विशाल छात्र रैली प्रस्तावित थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण छात्र संवाद कार्यक्रम प्रयागराज में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

    कांग्रेस के प्रवक्ता हसीब अहमद ने बताया कि कार्यक्रम में रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं, पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत, छात्रवृत्ति, विश्वविद्यालयों का माहौल और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

    उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, अमेठी, रायबरेली, भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी समेत आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में छात्र भाग लेंगे।

    तैयारियों में जुटी कांग्रेस
    कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए रविवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, शहर और जिला इकाइयों के पदाधिकारियों तथा स्थानीय नेताओं की बैठक होगी।

    प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी ने बताया कि छात्र संवाद में प्रदेशभर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की भागीदारी रहेगी। वहीं कार्यक्रम के समन्वयक विवेकानंद पाठक के अनुसार, अब तक इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष फुजैल हाशमी ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।