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  • यूपी में चुनावी गठबंधन पर फंसा पेंच! कांग्रेस ने सपा को नहीं सौंपी उम्मीदवारों की लिस्ट तो सीट बंटवारे पर बढ़ा विवाद

    यूपी में चुनावी गठबंधन पर फंसा पेंच! कांग्रेस ने सपा को नहीं सौंपी उम्मीदवारों की लिस्ट तो सीट बंटवारे पर बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी खींचतान तेज होती दिखाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने के उद्देश्य से दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा जारी है लेकिन उम्मीदवारों की सूची और सीटों की संख्या को लेकर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस उन सीटों और उम्मीदवारों का स्पष्ट ब्योरा दे जहां उसकी जीत की संभावना सबसे अधिक है। दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि गठबंधन की बातचीत के दौरान उम्मीदवारों के नामों की सूची साझा करना जरूरी नहीं है। इसी मुद्दे पर दोनों दलों के बीच मतभेद गहराने की खबरें सामने आ रही हैं।

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 180 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। इस सूची को लेकर समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं में नाराजगी बताई जा रही है। सपा के भीतर यह चिंता है कि कांग्रेस को अधिक सीटें देने से गठबंधन की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव कांग्रेस को 100 से कम सीटें देने के पक्ष में हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में उनकी ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत का अंतिम नतीजा अभी सामने नहीं आया है।

    कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कम से कम 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। उनके इस बयान ने सीट बंटवारे की चर्चा को और गर्म कर दिया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में इतनी अधिक सीटों पर दावा करना गठबंधन के भीतर बातचीत को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस का मानना है कि उसके पास ऐसे उम्मीदवार हैं जो कई विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं। पार्टी का कहना है कि सीटों का चयन केवल संख्या के आधार पर नहीं बल्कि उनकी चुनावी स्थिति और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

    रिपोर्ट के मुताबिक 19 अक्टूबर को राहुल गांधी के आवास पर आयोजित चाय पार्टी के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने प्रियंका गांधी वाड्रा के सामने उम्मीदवारों और सीटों की सूची का मुद्दा उठाया था। बताया जाता है कि प्रियंका गांधी ने इस पर सूची साझा करने का आश्वासन दिया था। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 180 सीटों की सूची को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह सूची बातचीत शुरू करने का एक आधार है और दोनों दल आपसी सहमति से सीटों की संख्या तय कर सकते हैं। चर्चा के दौरान 80 से 90 सीटों पर भी समझौते की संभावना का जिक्र किए जाने की बात सामने आई है।

    कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी ने आंतरिक सर्वे के आधार पर सीटों को चार श्रेणियों में बांटा है। इसका उद्देश्य उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करना है जहां पार्टी की स्थिति मजबूत है और जहां जीत की संभावना अधिक हो सकती है। वहीं समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस अपने संभावित उम्मीदवारों की जानकारी देकर गठबंधन की रणनीति को स्पष्ट करे। सपा नेताओं की चिंता है कि कमजोर उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से विपक्षी वोटों का नुकसान हो सकता है और इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।

    गौरतलब है कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा था और 40 प्रतिशत सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारने की रणनीति अपनाई थी। हालांकि पार्टी को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी। इसी पिछले प्रदर्शन को देखते हुए सीटों के बंटवारे में कांग्रेस की चुनावी ताकत को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा फॉर्मूला तैयार करने की है जिससे सीटों पर सहमति भी बने और भाजपा के खिलाफ विपक्षी गठबंधन की एकजुटता भी कायम रहे। फिलहाल उम्मीदवारों की सूची और सीटों की संख्या पर जारी मतभेद के कारण बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।
  • इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना

    इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर जारी सियासी बहस के बीच भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के आरोपों का जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ अभियान चलाएगी। इसके तहत पदयात्रा से लेकर प्रबुद्धजन गोष्ठी और युवा संवाद तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब जनता तक पहुंचाया जाएगा।

    भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। हालांकि चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस जारी है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से अपना पक्ष जनता के सामने रखने की कोशिश करेगी।

    अभियान की तैयारियों को लेकर बुधवार रात इंदौर में बैठक आयोजित की गई। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत पार्टी के कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में अभियान की रूपरेखा और अलग-अलग कार्यक्रमों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई। भाजपा ने तय किया है कि अभियान को केवल राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर पार्टी अपनी बात पहुंचाएगी।

    सुमित मिश्रा ने बताया कि अभियान के तहत 1 नवंबर को लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ पदयात्रा निकाली जाएगी। हालांकि पदयात्रा का शुरुआती स्थान और रूट अभी तय नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रबुद्धजनों की गोष्ठी आयोजित होगी जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल करने की योजना है। युवाओं के साथ संवाद और छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धाएं भी आयोजित की जाएंगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बातचीत के जरिए भी अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।

    बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीलंका फ्रांस बांग्लादेश और नेपाल सहित कई देशों में अशांति का माहौल देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं और देश के विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल या संस्था तक सीमित नहीं है बल्कि उन ताकतों के खिलाफ भी है जो उनके मुताबिक भारत की प्रगति को रोकना चाहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अभियान के जरिए विपक्ष के कथित षड्यंत्र को जनता के सामने रखें।

    अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए भाजपा ने अलग-अलग टोलियां भी बनाई हैं। नगर स्तरीय टोली के संयोजक सुधीर कोल्हे को बनाया गया है जबकि महेश कुकरेजा कैलाश पीपले हरप्रीत सिंह बक्शी मुकेश मंगल नेहा शर्मा और दीपक बागवान को जिम्मेदारी दी गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की टोली में आलोक दुबे वरुण पाल रितेश शर्मा और नितीन शर्मा शामिल हैं। पदयात्रा की जिम्मेदारी विधायक रमेश मेंदोला मधु वर्मा गोलू शुक्ला पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय स्वप्निल कोठारी और अक्षय कांति बम को सौंपी गई है। वहीं राष्ट्र चिंतन संवाद टोली में सांसद शंकर लालवानी सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है।

    भाजपा का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब देखना होगा कि अभियान के दौरान भाजपा अपने तर्कों को जनता तक किस तरह पहुंचाती है और विपक्ष इन कार्यक्रमों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • MP में 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग फिर तेज, राहुल गांधी बोले- छात्रों की आवाज दबाई जा रही, संस्थाओं पर कब्जे का आरोप

    MP में 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग फिर तेज, राहुल गांधी बोले- छात्रों की आवाज दबाई जा रही, संस्थाओं पर कब्जे का आरोप


    भोपाल । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ऑडियो संदेश जारी कर बीते एक महीने के अपने कार्यक्रमों और लोगों से मुलाकातों का ब्योरा साझा किया है। इस संदेश में उन्होंने मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की मांग के साथ आदिवासी परिवारों की परेशानियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए शिक्षा व्यवस्था और छात्रावासों की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र और राज्य की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि देश की संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
    राहुल गांधी ने छात्रों के बीच अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में छात्रों की समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एक समूह देश की संस्थाओं पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि सिस्टम को अंधभक्त चाहिए छात्र नहीं। राहुल ने इंदौर में छात्रों के साथ शिक्षा बजट में कटौती और छात्रावासों की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की बात भी कही।
    उनके मुताबिक छात्रों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। उन्होंने सत्य निकेतन की त्रासदी का भी उल्लेख किया और कहा कि शिक्षा से जुड़े सवालों को गंभीरता से समझने की जरूरत है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रावासों के नियमों और परिस्थितियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा गया था। राहुल के अनुसार इसके बाद हॉस्टल में रहने की आयु सीमा वापस ले ली गई। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समर्थन देने की बात भी कही।
    मध्य प्रदेश के संदर्भ में राहुल गांधी ने इंदौर के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पूरी तरह लागू करने की मांग किए जाने की जानकारी दी। यह मुद्दा प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि आरक्षण के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी फैसलों पर निर्भर करती है।
    राहुल गांधी ने बालाघाट में उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात का भी उल्लेख किया जिन्होंने कुपोषण और बीमारी के कारण अपने बच्चों को खोया था। उन्होंने इस मुलाकात को बेहद भावुक बताते हुए कहा कि कुछ दुख ऐसे होते हैं जिनके सामने शब्द भी कम पड़ जाते हैं। उनके अनुसार उस दौरान उनका उद्देश्य परिवारों का दर्द सुनना और उनकी परिस्थितियों को समझना था। इस मुद्दे के जरिए उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया।
    अपने ऑडियो संदेश में राहुल गांधी ने दिल्ली की बेला एस्टेट झुग्गी बस्ती का दौरा करने का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद वहां 729 में से 728 लोगों ने मतदान का अधिकार खो दिया। यह राहुल गांधी का दावा है। उन्होंने निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की बातों का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी से जुड़े आरोप भी सामने रखे।
    राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को संस्थाओं और संविधान से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसके अलावा उन्होंने 30 सितंबर को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ हुई बैठक का जिक्र किया। उनके अनुसार बैठक में मतदान के अधिकार की रक्षा के तरीकों पर चर्चा हुई। राहुल ने रायबरेली में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए हुई दिशा बैठक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात का भी उल्लेख किया। महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देने की बात के साथ उन्होंने संदेश समाप्त किया। उनके इस बयान के बाद मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण और छात्रों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

  • प्रदर्शन से कौन-कौन सांसद रहा गायब, राहुल गांधी की नजर में आए सभी सांसद, सहयोगियों ने मिलकर दिखाई एकजुटता

    प्रदर्शन से कौन-कौन सांसद रहा गायब, राहुल गांधी की नजर में आए सभी सांसद, सहयोगियों ने मिलकर दिखाई एकजुटता


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मुहिम को मजबूत बनाने के लिए इस बार संगठन और रणनीति दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में बढ़ती भागीदारी के पीछे राहुल गांधी की निगरानी और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल को अहम वजह माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने न केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले सांसदों की मौजूदगी पर नजर रखी बल्कि गैरहाजिर रहने वाले नेताओं की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही उन्होंने सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं से सीधे संपर्क कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

    कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी अपनी कोर टीम के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे। इस टीम में प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा केसी वेणुगोपाल और अन्य रणनीतिक सहयोगी शामिल थे। बैठकों में प्रदर्शन की रूपरेखा तय करने के साथ सांसदों और पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। शुरुआती प्रदर्शनों में कुछ कांग्रेस सांसदों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद राहुल गांधी ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से प्रदर्शन में शामिल होने वाले और गैरहाजिर रहने वाले सांसदों की सूची तैयार करने को कहा। पार्टी के एक सूत्र के मुताबिक जब सांसदों को पता चला कि राहुल गांधी खुद उनकी मौजूदगी पर नजर रख रहे हैं तो प्रदर्शन में उनकी भागीदारी बढ़ने लगी।

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि आंदोलन में भागीदारी को लेकर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस की कोशिश थी कि सांसद केवल सोशल मीडिया पर बयान देने तक सीमित न रहें बल्कि जमीन पर उतरकर भी अपनी भूमिका निभाएं। प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए। दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय को कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए खोला गया। हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के नेताओं ने कार्यकर्ताओं के आने और उनके ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क कर उन्हें जल्द दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया।

    इस पूरी रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा INDIA गठबंधन के सहयोगियों को साथ लेकर चलना था। राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और माकपा के एमए बेबी समेत कई नेताओं से संपर्क किया। इससे पहले कुछ प्रदर्शनों के दौरान सहयोगी दलों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने और कांग्रेस नेताओं को अधिक प्रमुखता दिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इन मतभेदों को दूर करने के लिए कांग्रेस ने इस बार छोटे दलों को भी महत्व देने पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के दौरान राहुल गांधी जिस खुले ट्रक से नेतृत्व कर रहे थे उसमें सहयोगी दलों और छात्र संगठनों के नेताओं को भी जगह दी गई। इससे यह संदेश देने की कोशिश हुई कि आंदोलन किसी एक पार्टी का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि विपक्ष की साझा मुहिम है।

    राहुल गांधी की पहल का असर गठबंधन के भीतर समन्वय में भी दिखाई दिया। समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बार कांग्रेस के साथ बेहतर तालमेल की बात कही। कांग्रेस ने राजनीतिक दलों के साथ छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया ताकि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर व्यापक समर्थन जुटाया जा सके।

    कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति तथा INDIA गठबंधन की बैठकों में चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस विषय पर एकजुट होकर आवाज उठाने पर जोर दिया। कांग्रेस का मानना है कि सांसदों की सक्रिय भागीदारी सहयोगियों के साथ बेहतर समन्वय और नागरिक समाज की हिस्सेदारी से आंदोलन को व्यापक बनाया जा सकता है। हालांकि इस रणनीति का वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में स्पष्ट होगा लेकिन फिलहाल राहुल गांधी की सक्रियता ने विपक्षी एकजुटता और संगठनात्मक अनुशासन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा

    राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के बीच संभावित नजदीकी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी में CJP के नेताओं को आमंत्रित करने की कोशिश की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस और इस संगठन के संबंधों को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसे दोनों के बीच दोस्ती या किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं तक पहुंचने के लिए वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण की मदद लेने की कोशिश की थी। इस घटनाक्रम को विपक्षी एकजुटता की रणनीति और कांग्रेस के बदलते राजनीतिक रुख के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह कांग्रेस की ओर से CJP से संपर्क करने और उसके नेताओं को राहुल गांधी की हाई टी में आमंत्रित करने का फैसला किया गया। इसके लिए प्रशांत भूषण से मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अनुरोध किया गया था। प्रशांत भूषण के करीबी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की ओर से उनसे संपर्क किया गया था। उस समय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र में थे जबकि CJP के कुछ प्रमुख नेता जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में थे। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दीपके तक पहुंचने की कोशिश की गई लेकिन वह निमंत्रण को लेकर विशेष उत्साहित नहीं थे। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस संपर्क से दोनों पक्षों के बीच आगे कोई औपचारिक बातचीत होगी या नहीं।

    CJP मई में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। इसके बाद जून और जुलाई में संगठन ने परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के चलते संगठन को व्यापक पहचान मिली। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का एक वर्ग शुरुआत से ही CJP को लेकर संदेह जताता रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं की राय रही है कि यह संगठन आम आदमी पार्टी के प्रभाव में काम करता है या उसके राजनीतिक विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी ओर CJP खुद को स्वतंत्र संगठन बताती रही है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे अभियान ने दोनों पक्षों के बीच संभावित संवाद की चर्चा को बढ़ा दिया है।

    राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले सभी समूह एक व्यापक आंदोलन का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि संगठन और झंडे अलग हो सकते हैं लेकिन संविधान की रक्षा और नागरिक अधिकारों की मांग करने वालों के उद्देश्य समान हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई समूह संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। इस बयान को विपक्षी दलों और अन्य संगठनों को साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाया और युवाओं को जेल भेजे जाने की आलोचना की। राहुल गांधी के बयान पर अभिजीत दीपके ने उनका आभार जताया था। इससे दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाओं को लेकर चर्चा और तेज हो गई। हालांकि CJP सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं हुई थी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि समान मुद्दों पर समर्थन के बावजूद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तालमेल पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है।

    इसी बीच अभिजीत दीपके ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने समर्थकों से शाम पांच बजे राष्ट्रीय ध्वज के साथ पहुंचने की अपील की है। दूसरे शहरों में भी तिरंगा फहराने का आग्रह किया गया है। अब राजनीतिक नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित मार्च में कितने लोग शामिल होते हैं और कांग्रेस तथा CJP के बीच आगे कोई संवाद होता है या नहीं। फिलहाल हाई टी के निमंत्रण की कोशिश को विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में एक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन इसे दोनों के बीच नई राजनीतिक दोस्ती का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।

  • कन्हैया कुमार कहां हैं? राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा, छात्र संगठनों को मिली अहमियत

    कन्हैया कुमार कहां हैं? राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा, छात्र संगठनों को मिली अहमियत


    नई दिल्ली।
    कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अपील के बाद विपक्षी दलों के साथ छात्र और नागरिक संगठन भी सड़कों पर उतर रहे हैं। इस दौरान अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। वहीं, कभी छात्र आंदोलनों के चर्चित चेहरों में शामिल रहे कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    हालांकि, कन्हैया कुमार सोमवार को बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में शामिल हुए थे, लेकिन वह कैमरों की नजर से दूर रहे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रभारी होने के नाते कन्हैया की भूमिका अब बदल गई है। ऐसे में उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी से ज्यादा संगठन की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।


    राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा

    कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन में नेहा बोरा और उनके साथियों की सक्रियता चर्चा में है। पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान भी नेहा युवाओं की आवाज उठाती रही हैं। अब वह मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष के प्रदर्शन में सक्रिय दिखाई दे रही हैं।

    इंडिया गठबंधन के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में नेहा बोरा छात्र संगठनों के साथ शामिल हुईं। मार्च के दौरान कई मौकों पर राहुल गांधी एक हाथ से प्रियंका गांधी और दूसरे हाथ से नेहा बोरा का हाथ थामे नजर आए। इस दौरान प्रियंका गांधी को नेहा के नारों में आवाज मिलाते हुए भी देखा गया। विपक्ष के प्रमुख नेताओं के लिए तैयार किए गए ट्रक पर भी नेहा मौजूद थीं।

    इस भागीदारी ने छात्र संगठनों और नागरिक समूहों को विपक्ष के आंदोलन में मिल रही अहमियत को रेखांकित किया है।

    कहां हैं कन्हैया कुमार?

    कन्हैया कुमार भी बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में शामिल थे, लेकिन वह प्रमुख नेताओं की तरह कैमरों के सामने दिखाई नहीं दिए। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, कन्हैया कुमार को एनएसयूआई की जिम्मेदारी दी गई है। इसलिए उनकी भूमिका केवल किसी प्रदर्शन में व्यक्तिगत तौर पर शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र संगठन की भागीदारी सुनिश्चित करना भी है।

    कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन में एनएसयूआई लगातार सक्रिय है। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि संगठन की मौजूदगी और भागीदारी को मजबूत करना भी इस राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    छात्र और नागरिक संगठनों पर जोर

    राजनीतिक रणनीतिकारों के अनुसार, पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का आंदोलन हो या मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा, नेहा बोरा इन मामलों में सक्रिय रही हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन के मार्च में छात्र संगठनों और नागरिक समूहों से जुड़े लोगों को प्रमुखता दी।

    इस रणनीति के पीछे यह संदेश देने की कोशिश दिखाई देती है कि मतदाता सूची से जुड़ा मुद्दा केवल कांग्रेस या किसी एक विपक्षी नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे व्यापक जनभागीदारी के साथ उठाया जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि अपने अधिकारों से जुड़े सवालों पर विभिन्न संगठनों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।


    वोटर लिस्ट के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विपक्ष

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका दायर करने वालों में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत 10 दलों के नेता शामिल हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, याचिका सोमवार शाम दाखिल की गई। इसमें विपक्ष की ओर से कुल 10 राहतों की मांग की गई है।

    याचिका दायर करने वाले नेताओं में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

    याचिका में मिलीं 14 खामियां

    सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 14 खामियां बताई गई हैं। अदालत की वेबसाइट पर इनका उल्लेख करते हुए याचिकाकर्ताओं को कमियां दूर करने के लिए कहा गया है।

    प्रमुख खामियों में याचिका दाखिल करने के शुल्क का कम भुगतान किया जाना शामिल है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से 220 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जमा करने को कहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, खामियों को दूर करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।

    इस बीच, कथित वोट चोरी के खिलाफ विपक्ष का राजनीतिक आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया दोनों आगे बढ़ रहे हैं। प्रदर्शन में छात्र संगठनों की सक्रिय भागीदारी और कन्हैया कुमार की संगठनात्मक भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • Protest: बैटमैन के अवतार में दिखे राहुल गांधी, खरगे ने भी मास्क पहनकर दिया पोज

    Protest: बैटमैन के अवतार में दिखे राहुल गांधी, खरगे ने भी मास्क पहनकर दिया पोज


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में चुनाव आयोग (Election Commission) के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) बैटमैन (Batman) के मास्क के साथ नजर आए, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (President Mallikarjun Kharge) ने भी बैटमैन वाला मास्क पहनकर पोज दिया। विपक्ष का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाला गया था। यह पूरा मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा है।


    राहुल गांधी की बैटमैन वाली तस्वीर हुई चर्चा में

    राहुल गांधी की बैटमैन मास्क के साथ तस्वीर ने लोगों का ध्यान खींचा। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने भी इस तस्वीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी सोमवार को विरोध मार्च के दौरान बैटमैन के मास्क के साथ पोज देते नजर आए। राजनीतिक रूप से अहम इस प्रदर्शन के बीच दोनों नेताओं का यह अंदाज चर्चा का विषय बना।


    जब राहुल गांधी से पूछा गया था- क्या आप बैटमैन हैं?

    बैटमैन के साथ राहुल गांधी का यह जुड़ाव पहले भी चर्चा में आ चुका है। इससे पहले इंस्टाग्राम पर आयोजित ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र के दौरान एक यूजर ने उनसे पूछा था कि क्या वह बैटमैन हैं? इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने मजाकिया अंदाज में कहा था, “बस इतना कह सकते हैं कि किसी ने मुझे और बैटमैन को कभी एक ही कमरे में साथ नहीं देखा है।” अब विपक्ष के मार्च के दौरान बैटमैन मास्क के साथ उनकी तस्वीर सामने आने से यह पुराना जवाब एक बार फिर प्रासंगिक हो गया।


    SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA गठबंधन

    बैटमैन मास्क के बीच इस प्रदर्शन की भी खूब चर्चा है। राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के 10 अन्य नेताओं के साथ भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह याचिका विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर दाखिल की गई है। इस याचिका पर मंगलवार यानी आज सुनवाई होने की संभावना है।


    याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में शामिल हैं:

    राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष
    मल्लिकार्जुन खरगे
    तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद
    अखिलेश यादव
    राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव
    शिवसेना
    (UBT) के सांसद
    संजय राउत
    माकपा महासचिव एमए बेबी
    भाकपा महासचिव डी. राजा
    झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी
    एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले
    इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर


    दिल्ली में जारी है विरोध प्रदर्शन

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच सोमवार को दिल्ली पुलिस के एक सर्कुलर के अनुसार, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है।

    यह घटनाक्रम जून और जुलाई में हुए CJP के प्रदर्शनों के बाद सामने आया है। उस दौरान संगठन ने कथित पेपर लीक के मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

  • राहुल गांधी से लेकर अभिजीत दीपके तक, विरोध प्रदर्शनों पर BJP की जवाबी रणनीति की तैयारी

    राहुल गांधी से लेकर अभिजीत दीपके तक, विरोध प्रदर्शनों पर BJP की जवाबी रणनीति की तैयारी


    नई दिल्‍ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से बातचीत के लिए तैयार है। साथ ही, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के रुख का राजनीतिक जवाब देने तथा चुनाव आयोग के कामकाज पर तथ्य आधारित जानकारी सामने रखने की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि, भाजपा ने अपनी रणनीति को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिया है कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए बातचीत और राजनीतिक स्तर पर जवाब देने, दोनों विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इस बीच, विपक्षी गठबंधन INDIA, कांग्रेस से जुड़े संगठनों और अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से विरोध जारी रहने की संभावना है।

    चुनाव आयोग के मुद्दे पर फैक्टशीट तैयार करने की चर्चा

    रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए एक फैक्टशीट तैयार कर रही है। पार्टी की रणनीति में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के आरोपों का राजनीतिक जवाब देना भी शामिल बताया गया है। हालांकि, किसी भाजपा नेता ने सार्वजनिक रूप से इन तैयारियों की पुष्टि नहीं की है।

    अखबार से बातचीत में पार्टी से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि देश में कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और प्रदर्शन सहित सभी गतिविधियां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के दायरे में होनी चाहिए। सूत्र ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है और इसके लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनानी होती है।

    प्रदर्शनकारियों के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन का दावा

    रिपोर्ट में भाजपा से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चुनाव आयोग ने SIR के मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की कोशिश की है। वहीं, सरकार ने दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शनकारियों से निपटते समय संयम बरता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन रखने की कोशिश की गई।

    भाजपा से जुड़े एक सूत्र ने रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार विरोध के अधिकार के खिलाफ नहीं है। पार्टी का तर्क है कि निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन होने से लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और आम नागरिकों को होने वाली परेशानी भी कम की जा सकती है। ये दावे पार्टी से जुड़े सूत्रों के हैं; सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक रणनीति जारी नहीं की गई है।

    INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर लग सकता है विराम

    पिछले सप्ताह से विपक्षी गठबंधन INDIA के नेता दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, माकपा महासचिव एमए बेबी ने कहा कि उन्हें कांग्रेस की ओर से फोन आया था। कांग्रेस का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और याचिका दाखिल करने के बाद मंगलवार को नए मार्च या प्रदर्शन की जरूरत नहीं है।

    हालांकि, गठबंधन के साझा प्रदर्शन पर विराम लगने की स्थिति में भी कांग्रेस से जुड़े कुछ संगठन अपना विरोध जारी रख सकते हैं। इनमें भारतीय युवा कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के नाम शामिल हैं। ऐसे में दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की आगे की दिशा इन संगठनों के फैसलों पर भी निर्भर करेगी।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस को दिया 24 घंटे का समय

    अभिजीत दीपके से जुड़ी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सक्रिय है। सोमवार को पार्टी के प्रतिनिधि दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग लेकर पहुंचे थे। पार्टी ने पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था।

    सीजेपी नेता सौरभ दास ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार है और उनकी पार्टी इसी अधिकार के तहत प्रदर्शन करना चाहती है। उन्होंने कहा कि पुलिस अक्सर प्रदर्शन की अनुमति के लिए पहले से संपर्क करने की बात कहती है, इसलिए इस बार तारीख और समय तय करने का फैसला पुलिस पर छोड़ा गया है।

    पार्टी पदाधिकारी आशुतोष रांका ने भी कहा था कि सीजेपी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पुलिस से समय मांग रही है। उनके मुताबिक, अनुमति मिलने पर पार्टी 24 घंटे के भीतर निर्धारित स्थल पर जुटने के लिए तैयार है।

    मंगलवार को नए ऐलान पर नजर

    सीजेपी की ओर से पुलिस को दिया गया 24 घंटे का समय मंगलवार को पूरा होने की बात कही जा रही है। ऐसे में पार्टी की अगली घोषणा पर नजर रहेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस से जुड़े छात्र और युवा संगठन विरोध जारी रखने का फैसला कर सकते हैं, भले ही INDIA गठबंधन के स्तर पर साझा प्रदर्शन न हो।

    फिलहाल भाजपा की ओर से बातचीत और राजनीतिक जवाब की संभावित रणनीति की खबरें सामने आई हैं, लेकिन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अपने अगले कदमों का खुलासा नहीं किया है। दिल्ली में आगे विरोध प्रदर्शन किस रूप में जारी रहेंगे, यह संबंधित दलों और संगठनों के फैसलों के साथ-साथ पुलिस की अनुमति पर भी निर्भर करेगा।

  • सपा के साथ गठबंधन पर इमरान मसूद का दोटूक संदेश, बोले- कांग्रेस मजबूती से लड़ेगी चुनाव, पार्टी को खड़ा करना मेरी पहली प्राथमिकता

    सपा के साथ गठबंधन पर इमरान मसूद का दोटूक संदेश, बोले- कांग्रेस मजबूती से लड़ेगी चुनाव, पार्टी को खड़ा करना मेरी पहली प्राथमिकता


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन तथा सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने गठबंधन की रणनीति और पार्टी की चुनावी तैयारियों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन यह समझौता सम्मानजनक होना चाहिए। पार्टी ऐसा कोई समझौता नहीं करेगी जिससे यह संदेश जाए कि कांग्रेस ने आत्मसमर्पण कर दिया है। मसूद के मुताबिक कांग्रेस उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाने का लक्ष्य रखेगी।
    लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय में 11 अक्टूबर को पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हुए हंगामे पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की खबरें सामने आई थीं। इस विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में मसूद ने कहा कि कभी-कभी कार्यकर्ताओं से गलतियां हो जाती हैं। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। मसूद ने कहा कि पिछले चुनाव में अजय राय ने मेहनत करके पार्टी को खड़ा करने का काम किया था और उनके योगदान को किसी भी स्थिति में कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।
    समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं पर मसूद ने कहा कि इस बारे में अंतिम फैसला पार्टी का नेतृत्व करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की कोशिश सम्मानजनक समझौते की है ताकि गठबंधन मजबूत बना रहे। सीटों की संख्या को लेकर अलग-अलग चर्चाओं के बीच उन्होंने किसी निश्चित आंकड़े पर मुहर नहीं लगाई। मसूद के अनुसार अभी बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़नी है और उम्मीदवारों की सूची को लेकर भी समाजवादी पार्टी की ओर से कोई औपचारिक मांग नहीं की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अक्टूबर के आखिर तक सूची को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
    जब उनसे पूछा गया कि यदि गठबंधन नहीं हुआ तो क्या कांग्रेस सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस तरह की संभावना पर विचार करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक गठबंधन कायम है और पार्टी इसी आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल कांग्रेस के लिए अनुकूल है और पार्टी 2027 में मजबूत प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।
    पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल दो सीटों पर सिमट गई थी। इस बार पार्टी के लक्ष्य पर बोलते हुए मसूद ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं। उन्होंने दिल्ली की राजनीति और आम आदमी पार्टी के पिछले चुनावी प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक नैरेटिव चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है। मसूद का दावा है कि राहुल गांधी ने देशभर में जिस तरह का नैरेटिव खड़ा किया है उससे कांग्रेस की स्थिति पहले के मुकाबले मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के सहयोगी भी राहुल गांधी के साथ खड़े हैं।
    इमरान मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता किसी सरकारी पद या मुख्यमंत्री अथवा उपमुख्यमंत्री बनने की नहीं है। उन्होंने कहा कि वह किसी पद के उम्मीदवार नहीं हैं और उनका काम संगठन को मजबूत करना तथा पार्टी को चुनाव के लिए तैयार करना है। कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने इसे पार्टी का भरोसा बताया और कहा कि वह इस उम्मीद पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। टिकट वितरण में अपनी भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि इसका फैसला भी पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
    मसूद ने कांग्रेस की राजनीति पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है। उनके अनुसार अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट करना है। ऐसे में कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे पर होने वाली बातचीत आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की अहम कड़ी बन सकती है।
  • ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे

    ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता के उस दावे को झूठा बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बात स्वीकार कर ली। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल पर दुर्भावनापूर्ण राजनीति करने और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। यह विवाद इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सौंपे गए ज्ञापन के बाद सामने आया है।

    राहुल के दावे पर भाजपा ने उठाए सवाल

    इंडिया ब्लॉक के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

    मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह इस बात से हैरान और स्तब्ध हैं कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बातों को स्वीकार कर लिया।

    राहुल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अजीब’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं और राष्ट्रपति की बातचीत को अपने तरीके से पेश कर रहे हैं।

    ‘हर संवैधानिक संस्था को राजनीति का शिकार बना रहे’

    सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोप स्वीकार कर लिए, ऐसा दावा करना राहुल गांधी की दुर्भावनापूर्ण राजनीति को दर्शाता है। उनके मुताबिक, राहुल हर संवैधानिक संस्था को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी के बयान के दौरान उनके साथ खड़े नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव भी कई सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के कथन का सच्चाई से कोई संबंध नहीं दिखता और कांग्रेस नेता का पिछला रिकॉर्ड भी इसी तरह के बयानों का संकेत देता है।

    त्रिवेदी ने आगे कहा कि राहुल का दावा अजीब होने के साथ-साथ तथ्यों से ज्यादा राजनीतिक मंशा से प्रेरित लगता है।

    भाजपा ने राहुल से मांगा सबूत

    भाजपा नेता ने राहुल गांधी से सवाल किया कि राष्ट्रपति ने उनके आरोपों को स्वीकार किया था, इस दावे के समर्थन में उनके पास क्या सबूत हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

    इस मामले में फिलहाल भाजपा की ओर से राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद जो दावा किया, उसे लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।