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  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले दो दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में सक्रिय नजर आए हैं। दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिरासत में भी लिए गए। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए, जहां उन्होंने विरोध जारी रखा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस मुहिम को भी चर्चा में ला दिया है, जिसमें वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

    राहुल गांधी और कांग्रेस पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी पर मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कथित मतभेद का दावा किया गया था। चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन किया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

    CJP ने भी इस विवाद को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई मांगें उठा रहा है।

    CJP और कांग्रेस के मुद्दे एक, रास्ते अलग

    कांग्रेस और CJP दोनों ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन दोनों की आंदोलन की रणनीति अलग रही है। इससे पहले जब अभिजीत दीपके ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था, तब राहुल गांधी उनके प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।

    अब ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की लगातार सक्रियता ने इस आंदोलन को विपक्ष की मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

    आकाशवाणी भवन में राहुल-प्रियंका का धरना

    7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बैरिकेड पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जारी रखा।

    रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कांग्रेस के दोनों नेताओं के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता नजर नहीं आए। इसी वजह से INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, दूसरे दलों की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं और सभी विपक्षी दलों की ओर से इस पर कोई एकसमान आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    CJP की फिर दिल्ली कूच की तैयारी

    इस बीच अभिजीत दीपके भी अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP का कहना है कि यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर होगा।

    CJP के अनुसार, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने की योजना है। संगठन ने संकेत दिया है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भी वह आंदोलन जारी रखने की कोशिश करेगा।

    कौन सा मुद्दा किसके हाथ में?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन अब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की गतिविधियों में बंटा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सीधे सड़क पर उतरकर मुद्दा उठाया है, जबकि CJP अपने अलग संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

    ऐसे में 10 अक्टूबर का प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि CJP अपने आंदोलन को कितना विस्तार दे पाती है और कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद उसके अभियान की सार्वजनिक गूंज किस तरह आगे बढ़ती है। फिलहाल चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है, जबकि विपक्षी दल इन मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

  • आईसीसी रैंकिंग में बड़ा बदलाव, श्रेयस अय्यर ने 18 स्थान की छलांग लगाई और केएल राहुल भी टॉप-10 में पहुंचे

    आईसीसी रैंकिंग में बड़ा बदलाव, श्रेयस अय्यर ने 18 स्थान की छलांग लगाई और केएल राहुल भी टॉप-10 में पहुंचे


    नई दिल्ली । 
    वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया सीमित ओवरों की सीरीज में शानदार बल्लेबाजी का फायदा भारतीय बल्लेबाज श्रेयस अय्यर और केएल राहुल को आईसीसी रैंकिंग में मिला है। श्रेयस अय्यर ने टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में लंबी छलांग लगाकर टॉप-10 में जगह बनाई है, जबकि केएल राहुल वनडे बल्लेबाजों की सूची में सात स्थान ऊपर पहुंचकर 10वें नंबर पर आ गए हैं। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने उनकी रैंकिंग में बड़ा बदलाव किया है।

    श्रेयस अय्यर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मुकाबले में अपने करियर का पहला टी20 शतक लगाया था। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए इस मैच में उन्होंने 42 गेंदों पर शतक पूरा किया और कुल 43 गेंदों में नाबाद 102 रन बनाए। इस पारी के बाद श्रेयस को टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में 18 स्थान का फायदा हुआ और वह सातवें पायदान पर पहुंच गए।

    टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में भारत के ईशान किशन पहले स्थान पर हैं, जबकि अभिषेक शर्मा दूसरे नंबर पर हैं। पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान तीसरे, इंग्लैंड के हैरी ब्रूक चौथे और जोस बटलर पांचवें स्थान पर हैं। दक्षिण अफ्रीका के डेवाल्ड ब्रेविस छठे स्थान पर हैं। श्रेयस अय्यर सातवें नंबर पर पहुंच गए हैं। इंग्लैंड के फिल सॉल्ट आठवें, श्रीलंका के पाथुम निसांका नौवें और भारत के तिलक वर्मा दसवें स्थान पर हैं। सॉल्ट, निसांका और तिलक वर्मा को एक-एक स्थान का नुकसान हुआ है।

    वनडे रैंकिंग में भी भारतीय बल्लेबाज केएल राहुल को उनके प्रदर्शन का फायदा मिला है। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे और आखिरी वनडे में राहुल ने नाबाद 129 रन की पारी खेली थी। उन्होंने 87 गेंदों का सामना करते हुए छह छक्के और 10 चौके लगाए। इस पारी के बाद राहुल ने वनडे बल्लेबाजों की रैंकिंग में सात स्थान की छलांग लगाई और 10वें पायदान पर पहुंच गए।

    वनडे बल्लेबाजों की रैंकिंग में भारतीय कप्तान शुभमन गिल शीर्ष पर बने हुए हैं। न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल दूसरे स्थान पर हैं और उन्हें एक स्थान का फायदा हुआ है। विराट कोहली तीसरे नंबर पर हैं और उन्हें एक स्थान का नुकसान हुआ है। रोहित शर्मा चौथे और अफगानिस्तान के इब्राहिम जादरान पांचवें स्थान पर हैं।

    वेस्टइंडीज के कप्तान शे होप ने भी भारत के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद रैंकिंग में बढ़त हासिल की है। तीसरे वनडे में उन्होंने नाबाद 162 रन की पारी खेलकर अपनी टीम को जीत दिलाई थी। इस प्रदर्शन के बाद वह दो स्थान ऊपर चढ़कर छठे नंबर पर पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के बाबर आजम और श्रीलंका के कुसाल मेंडिस क्रमशः सातवें और आठवें स्थान पर हैं, दोनों को एक-एक स्थान का नुकसान हुआ है।

    इंग्लैंड के जो रूट नौवें स्थान पर हैं और उनके बाद केएल राहुल दसवें पायदान पर पहुंच गए हैं। इस तरह ताजा वनडे और टी20 रैंकिंग में भारत के कई बल्लेबाज टॉप-10 में शामिल हैं, जबकि श्रेयस अय्यर और राहुल को वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी प्रभावी पारियों का सीधा फायदा मिला है।

  • राहुल गांधी की हिरासत पर भड़के शशि थरूर, जर्मनी में होने के कारण प्रदर्शन से रहे दूर

    राहुल गांधी की हिरासत पर भड़के शशि थरूर, जर्मनी में होने के कारण प्रदर्शन से रहे दूर

    नई दिल्ली ।कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताते हुए सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। देर रात राहुल गांधी और अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया। प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके शशि थरूर ने कहा कि राहुल गांधी के साथ कथित हाथापाई की तस्वीरें देखकर वह बेहद परेशान हैं।

    शशि थरूर ने कहा कि ऐसे समय में विरोध प्रदर्शन करना उन नागरिकों के साथ खड़े होने जैसा है, जिनके संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के रुख को शर्मनाक बताया। थरूर ने यह भी कहा कि वह प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उनका समर्थन विपक्षी आंदोलन के साथ है। उन्होंने अपने संदेश में न्याय मिलने की उम्मीद भी जताई।

    प्रदर्शन में खुद शामिल नहीं होने को लेकर शशि थरूर ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वह जर्मनी में एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए गए हुए हैं। उनके अनुसार, करीब चार महीने पहले बर्लिन में आयोजित होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने का वादा किया था। इसी प्रतिबद्धता के कारण वह दिल्ली के प्रदर्शन में नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि वह दूर रहकर ही अपना समर्थन दे सकते हैं, लेकिन उनकी भावनात्मक मौजूदगी प्रदर्शन कर रहे नेताओं के साथ है।

    इससे पहले मंगलवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर मार्च निकाला था। पुलिस ने संसद मार्ग पर नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के सामने विपक्षी सांसदों को रोक दिया। इसके बाद कई सांसद सड़क पर धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और कांग्रेस तथा सहयोगी दलों के कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर में बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। यह धरना दोपहर करीब 12:20 बजे शुरू हुआ और कई घंटे तक जारी रहा।

    धरने के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची से जुड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के सांसद निर्वाचन आयुक्तों से मिलना चाहते हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, करीब 300 सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

    पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात करीब आठ बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से करीब 260 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी, जिनमें 10 सांसद भी शामिल थे। हिरासत में लिए गए नेताओं में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, के. सुरेश, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और इमरान प्रतापगढ़ी के अलावा तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्ला नदवी भी शामिल थे। नेताओं को किंग्सवे कैंप ले जाया गया और करीब दो घंटे बाद रात 10 बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया।

  • CEC विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च, राहुल-प्रियंका ने पेड़ के नीचे दिया धरना, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में

    CEC विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च, राहुल-प्रियंका ने पेड़ के नीचे दिया धरना, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली ।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग तक विरोध मार्च निकाला। मार्च के दौरान विपक्षी सांसदों ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी नेताओं ने कई आरोप लगाए। मार्च शुरू होने से पहले विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार पर एकत्र हुए थे।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मार्च के दौरान कहा कि विपक्ष का यह प्रदर्शन अन्याय के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने सरकार, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आजादी के बाद मिले वयस्क मताधिकार को खत्म करने की कोशिश कर रही है। खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सरकार की कठपुतली बताया और आरोप लगाया कि वह वही करते हैं जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह कहते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

    मार्च के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले और INDIA ब्लॉक के कई अन्य सांसद भी मौजूद रहे। विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहते थे। हालांकि पुलिस ने मार्च को रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सड़क पर एक पेड़ के नीचे ही धरना शुरू कर दिया।

    प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2017, 2019, 2022 और 2024 में बेईमानी की गई और पश्चिम बंगाल में “पूरा का पूरा खुला खेल” हुआ। उन्होंने चंडीगढ़ की घटना का भी जिक्र करते हुए कहा कि उसे कौन भूल सकता है। उनके इस बयान में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को दोहराया गया।

    इस बीच पुलिस ने अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन के दौरान भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 150 सांसदों को निलंबित किया जाता है और कई कानून पारित किए जाते हैं, तो भाजपा संविधान की बात कैसे कर सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग का बचाव करने को लेकर भी सवाल उठाया।

    कांग्रेस सांसद राजीव राय ने कहा कि भाजपा के खिलाफ लोगों में सड़कों पर आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र का गला घोंटा गया है तथा लोकतंत्र को बचाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भरोसे के लायक नहीं बताया।

    कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लिया जाना तय है और चुनाव आयोग से लोगों का भरोसा खत्म हो गया है। कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।

    कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यदि लोगों का मताधिकार छीना जाएगा तो विपक्ष मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा। इस तरह चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के आरोपों और विरोध के बीच चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की गई, जिसे पुलिस ने रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।

  • राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार पर हमला, बोले- हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का समय; चुनाव आयोग के बाहर विपक्ष का धरना

    राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार पर हमला, बोले- हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का समय; चुनाव आयोग के बाहर विपक्ष का धरना

    नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अन्य मांगों को लेकर संसद भवन परिसर से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय, निर्वाचन सदन की तरफ बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें पार्लियामेंट स्ट्रीट पर रोक दिया। इसके बाद सांसद वहीं सड़क पर बैठ गए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। सांसदों को नीति आयोग कार्यालय के सामने रोका गया, जो नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर जाने वाले रास्ते पर स्थित है।

    प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार के आरएसएस यूनिफॉर्म वाले कटआउट लिए और नारे लगाए। इनमें ‘बीजेपी है सीईसी है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘डेमोक्रेसी बिकाऊ नहीं है’ जैसे नारे शामिल थे। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए लिखा, ‘ज्ञानेश, यह हो गया भाई। इस्तीफा देने का समय आ गया है।’ मार्च में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और सीपीआई (एम) नेता जॉन ब्रिटास समेत कई सांसद शामिल हुए। सांसदों के पहुंचने से काफी पहले संसद और चुनाव आयोग मुख्यालय के अंदर तथा आसपास भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई थी और बैरिकेडिंग की गई थी।

    मार्च से पहले विपक्षी सांसदों ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज की। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के प्रति लोगों का भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस संस्था पर पूरा देश भरोसा करता है और गर्व महसूस करता है, उसकी निष्पक्षता पर पहले कभी सवाल नहीं उठाए गए, लेकिन एक व्यक्ति ने उस भरोसे को तोड़ दिया है। उन्होंने एक पूरे नेक्सस के साथ काम करने का भी आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार से सवाल करेगा और बीजेपी के मुख्यमंत्री जवाब देना शुरू करेंगे।

    सीपीआई सांसद पी संदोष कुमार ने कहा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के दौरान फॉर्म 6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर विपक्ष की आपत्तियां मजबूत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि फॉर्म 6 से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है, जबकि उनके मुताबिक यह बयान गुमराह करने वाला साबित हुआ है। सीपीआई नेता ने सीईसी को ‘धोखेबाज चुनाव कमिश्नर’ कहा और दावा किया कि विपक्षी पार्टियां 2025 से इन नियमों के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं तथा अपना आंदोलन और तेज करेंगी।

    शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी मार्च से पहले बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सांसद शांतिपूर्वक आगे बढ़ना चाहते थे और वे देश के नागरिक होने के साथ संसद के सदस्य भी हैं। राउत ने सवाल किया कि उन्हें रोकने के लिए इतनी बड़ी फोर्स की क्या जरूरत है और कहा कि उनके पास हथियार नहीं हैं। उन्होंने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और सीआईएसएफ के जवानों की तैनाती तथा मंत्रियों के घरों के बाहर सुरक्षा बढ़ाए जाने का दावा किया। राउत ने फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की स्थिति को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सीईसी को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी बदले हुए वर्जन को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने यह पता लगाने के लिए चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करने की बात कही कि क्या बदलाव किए गए थे और उन्हें किसने मंजूरी दी थी। यह टिप्पणी ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई। 26 सितंबर के बयान में आयोग ने कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। यह विरोध एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और तीन सदस्यों वाले आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर विपक्ष के अभियान के बीच हुआ। चुनाव आयोग ने आयोग में बंटवारे के सुझावों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े फैसले एकमत से लिए गए थे।

  • शुभमन गिल चोटिल होकर वनडे सीरीज से बाहर हुए तो कौन संभालेगा कप्तानी, रोहित शर्मा को मिलेगा नया ओपनिंग पार्टनर

    शुभमन गिल चोटिल होकर वनडे सीरीज से बाहर हुए तो कौन संभालेगा कप्तानी, रोहित शर्मा को मिलेगा नया ओपनिंग पार्टनर


    नई दिल्ली । भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज 27 सितंबर से होने जा रहा है। सीरीज शुरू होने से ठीक पहले भारतीय टीम को कप्तान शुभमन गिल की चोट के रूप में बड़ा झटका लगा है। 25 सितंबर को अभ्यास के दौरान तेज गेंद उनकी दाहिनी कोहनी पर लगी, जिसके बाद वह दर्द में नजर आए। चोट के कारण वह दोबारा बल्लेबाजी करने नहीं लौटे और बाकी अभ्यास सत्र में रिकवरी पर ध्यान दिया।

    अभ्यास के दौरान मोहम्मद सिराज की एक तेज गेंद गिल की कोहनी पर लगी। गेंद लगते ही वह दर्द से परेशान दिखाई दिए। उनके साथ बल्लेबाजी कर रहे विराट कोहली और सिराज ने भी उनका हाल जाना। इसके बाद टीम के फिजियोथेरेपिस्ट और सपोर्ट स्टाफ ने उनकी जांच की और उपचार दिया। गिल की कोहनी पर पट्टी भी बांधी गई।

    गिल के पास पहले वनडे से पहले कुछ समय जरूर है, लेकिन उनकी चोट की गंभीरता को देखते हुए टीम प्रबंधन उन्हें लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहेगा। भारतीय टीम के लिए अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप की तैयारियां भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में कप्तान को पूरी तरह फिट हुए बिना मैदान पर उतारने का जोखिम उठाने से बचा जा सकता है।

    गिल के लिए चोट का यह पहला अनुभव नहीं है। पिछले महीने श्रीलंका में अभ्यास के दौरान उनकी उंगली में चोट लगी थी। इसके बावजूद वह समय रहते फिट होकर दो टेस्ट मैचों की सीरीज में हिस्सा लेने में सफल रहे थे। अब उनकी ताजा चोट को लेकर अंतिम फैसला मेडिकल आकलन और उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा।

    अगर गिल को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में आराम दिया जाता है, तो सबसे बड़ा सवाल कप्तानी को लेकर होगा। ऐसी स्थिति में उप-कप्तान केएल राहुल टीम की कमान संभाल सकते हैं। राहुल के पास वनडे क्रिकेट में कप्तानी का अनुभव भी है और वह लंबे समय से भारतीय टीम के अहम खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।

    राहुल ने भारत की ओर से 15 वनडे मैचों में कप्तानी की है। इनमें भारतीय टीम ने 10 मुकाबलों में जीत दर्ज की, जबकि पांच मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा राहुल बल्लेबाजी के साथ विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी संभालते रहे हैं। इसलिए गिल की अनुपस्थिति में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

    गिल के नहीं खेलने की स्थिति में भारतीय टीम के शीर्ष क्रम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। रोहित शर्मा के साथ यशस्वी जायसवाल को पारी की शुरुआत करने का मौका मिल सकता है। जायसवाल पहले भी भारतीय टीम के लिए अलग-अलग प्रारूपों में ओपनिंग कर चुके हैं और गिल की अनुपस्थिति में उनके लिए यह बड़ी जिम्मेदारी होगी।

    इस तरह गिल की चोट का असर सिर्फ कप्तानी पर ही नहीं, बल्कि टीम के ओपनिंग संयोजन पर भी पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला उनकी फिटनेस रिपोर्ट और टीम प्रबंधन के आकलन के बाद ही सामने आएगा। सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम के लिए गिल की स्थिति सबसे अहम सवालों में से एक बनी हुई है।

  • राहुल गांधी ने चुनावी व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा लोकतंत्र कमजोर होने पर एंटी-इन्कंबेंसी का असर भी खत्म होता है

    राहुल गांधी ने चुनावी व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा लोकतंत्र कमजोर होने पर एंटी-इन्कंबेंसी का असर भी खत्म होता है

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एंटी-इन्कंबेंसी, लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में चुनावी प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ियां हो रही हैं और मतदाताओं के वोट की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हुई है। राहुल गांधी ने कहा कि वोट की ताकत कमजोर होने का असर संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है।

    राहुल गांधी ने एंटी-इन्कंबेंसी को भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता बताते हुए कहा कि आम तौर पर लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकार के खिलाफ समय के साथ विरोध की भावना विकसित होती है। उन्होंने पूर्व की सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकप्रियता के चरम पर पहुंचने के बाद भी कुछ वर्षों में सत्ता विरोधी माहौल बना। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के मामले में ऐसा प्रभाव दिखाई क्यों नहीं देता।

    उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में सत्ता विरोधी भावना कमजोर होने को समझने के लिए चुनावी प्रक्रिया पर भी नजर डालनी होगी। राहुल गांधी ने कुछ देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं होती, वहां सत्ता विरोधी भावना का प्रभाव भी दिखाई नहीं देता। उन्होंने इसी संदर्भ में भारत में वोट के अधिकार और उसकी सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव सहित विभिन्न विधानसभा चुनावों में चुनावी गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की। राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग की मूल जिम्मेदारी नागरिकों के वोट की सुरक्षा करना है और इस जिम्मेदारी में किसी भी तरह की चूक लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

    उन्होंने अपने पहले के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कथित वोट चोरी का असर केवल मतदान तक सीमित नहीं रहता। उनके अनुसार, यदि मताधिकार प्रभावित होता है तो उसके बाद कानून बनाने वाली व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की वैधता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि वह इस मुद्दे को केवल चुनावी गड़बड़ी के रूप में नहीं देखते, बल्कि इसे नागरिकों के प्रतिनिधि चुनने के अधिकार से जुड़ा विषय मानते हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया। इन आपत्तियों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, नाम बहाल करने से जुड़े आदेशों तथा मतदाता डेटा की सुरक्षा जैसे विषय शामिल बताए गए हैं।

    फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी आपत्ति सामने आने की बात कही गई। नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म में SIR से जुड़ा सवाल जोड़े जाने पर नियमों में संशोधन की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाया गया था। दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से इस विषय पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।

    वहीं, चुनाव आयोग ने अपने भीतर होने वाली लिखित टिप्पणियों, सुझावों, तकनीकी राय और आंतरिक विचार-विमर्श को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। आयोग का कहना है कि वह एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्रवाई संविधान, कानून तथा निर्धारित निर्देशों के तहत होती है।

    राहुल गांधी ने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतंत्र के लिए जरूरी है। उन्होंने चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग दोहराई।

  • आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में राहुल गांधी ने परिवार से की बात, हरसंभव मदद का भरोसा दिया

    आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में राहुल गांधी ने परिवार से की बात, हरसंभव मदद का भरोसा दिया

    नई दिल्ली ।आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। इसी बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साहिल के परिवार से बातचीत कर समर्थन जताया और न्याय की लड़ाई में हरसंभव मदद का भरोसा दिया। गुरुवार को उन्होंने साहिल के माता-पिता से वीडियो कॉल के जरिए बात की। बातचीत के दौरान परिवार की स्थिति और मामले से जुड़ी उनकी चिंताओं को लेकर चर्चा हुई।

    साहिल वाकोडे की मौत के बाद उनके परिवार ने संस्थान के प्रशासन और कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार की ओर से साहिल के साथ कथित जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच अभी जारी है। परिवार ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    साहिल की मौत के मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच एजेंसी परीक्षा केंद्र, हॉस्टल और घटना से पहले की गतिविधियों से जुड़े अलग-अलग साक्ष्यों को खंगाल रही है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अलावा साहिल तथा संबंधित अधिकारियों के बीच हुई बातचीत को भी देखा जा रहा है।

    पुलिस की जांच में 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे से 12:45 बजे के बीच साहिल परीक्षा कक्ष में मौजूद था। इस दौरान उसके पास मौजूद किसी वस्तु को लेकर उससे पूछताछ की गई और बाद में उसे अन्य छात्रों से अलग ले जाया गया। इसके बाद वह हॉस्टल की ओर गया।

    साहिल ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष का छात्र था। संस्थान की ओर से बताया गया था कि परीक्षा के दौरान उसके पास मोबाइल फोन पाया गया था और उसने प्रश्नपत्र से जुड़े जवाब हासिल करने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। संस्थान के अनुसार, परीक्षा प्रशिक्षक और विभाग प्रमुख ने इस संबंध में साहिल से बातचीत की थी। उसे समझाया गया था और यह भरोसा दिलाया गया था कि इस घटना का उसके करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    बातचीत के बाद साहिल अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया था। बाद में उसी दिन वह कमरे में मृत पाया गया। उसके परिवार ने इस घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    जातिगत भेदभाव के आरोपों को लेकर संस्थान की ओर से कहा गया है कि साहिल ने अपने जीवनकाल में एससी-एसटी प्रकोष्ठ या प्रशासन के पास इस तरह की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। दूसरी ओर, परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर कथित भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है।

    मामले में साहिल के कमरे से मिले मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। परीक्षा हॉल और हॉस्टल के अलग-अलग हिस्सों के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार है।

    इस बीच साहिल के परिवार से राहुल गांधी की बातचीत को मामले में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है। बातचीत के दौरान उन्होंने परिवार को समर्थन और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मंत्री विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर हमला, सोनिया गांधी के वोट को लेकर उठाए सवाल

    मंत्री विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर हमला, सोनिया गांधी के वोट को लेकर उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश:
    सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के शासनकाल में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची के मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

    सारंग ने कहा कि कांग्रेस के समय लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का किस तरह मजाक बनाया जाता था, इसका उदाहरण सोनिया गांधी से जुड़ा मामला है। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि उस दौर में लोकतंत्र की व्यवस्था को लेकर कई ऐसे सवाल सामने आए, जिनका जवाब दिया जाना चाहिए।

    मंत्री ने सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम और उनके मतदान को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में मतदान के अधिकार से संबंधित स्पष्ट प्रावधान हैं और केवल पात्र नागरिकों को ही मतदान का अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर उन्होंने पूछा कि सोनिया गांधी किस हैसियत से वोट दे रही थीं।

    विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के संविधान के पालन से जुड़े बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार संविधान की बात करते हैं, लेकिन मतदान के अधिकार से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कांग्रेस पर देश में लंबे समय से कथित वोट चोरी करने का आरोप लगाया। सारंग ने कहा कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज है, जो भारत का नागरिक नहीं है और उसने मतदान भी किया है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

    मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और मतदान व्यवस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता तथा नियमों का पालन जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

    सारंग ने अपने बयान में कांग्रेस के पुराने राजनीतिक इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के सत्ता में आने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से उनके अनुसार पीछे के दरवाजे से सत्ता हासिल की गई थी, उसी राजनीतिक सोच के प्रभाव आज भी कांग्रेस में दिखाई देते हैं।

    उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा संविधान और लोकतंत्र को लेकर उठाए जा रहे मुद्दों पर भी सवाल खड़े किए। सारंग का कहना था कि कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल और उससे जुड़े विवादों पर जवाब देना चाहिए, उसके बाद लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाने चाहिए।

    मंत्री ने कहा कि देश की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूची का विशेष महत्व है। किसी योग्य नागरिक का नाम छूटना या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल होना चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच और तथ्यों की स्पष्टता जरूरी है।

    सोनिया गांधी के मतदाता सूची से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए सारंग ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज किया। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस के लोकतंत्र तथा संविधान से जुड़े दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपने अतीत और वर्तमान में उठ रहे सवालों का भी सामना करना चाहिए।

    विश्वास सारंग के बयान के बाद मतदाता सूची, मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। उनके आरोपों के केंद्र में कांग्रेस का शासनकाल, सोनिया गांधी से जुड़ा मतदाता सूची का मुद्दा और राहुल गांधी के संविधान संबंधी बयान रहे।

  • राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में मोदी की मिमिक्री पर विवाद, बीजेपी ने बुजुर्ग महिला और मां के अपमान का लगाया आरोप

    राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में मोदी की मिमिक्री पर विवाद, बीजेपी ने बुजुर्ग महिला और मां के अपमान का लगाया आरोप

     
    मध्य प्रदेश : के इंदौर में आयोजित राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री मोदी की आवाज और बोलने के अंदाज की नकल की। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला से जुड़े प्रसंग का मजाक बनाए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है।

    कार्यक्रम के दौरान की गई मिमिक्री का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा और संवेदनशीलता से जोड़ते हुए सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी कॉमेडियंस और जोकर्स की पार्टी बन गई है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की आलोचना की।

    शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ संवाद के लिए आयोजित कार्यक्रम का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी की दिवंगत मां के अपमान और मजाक के लिए किया गया। जोशी ने इसे मानवीय संवेदना और राजनीतिक संस्कृति से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

    बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि मां को राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी की मौजूदगी में हुए इस मंचीय कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री से जुड़े निजी और पारिवारिक संदर्भों को मजाक का हिस्सा बनाया गया।

    वहीं कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने बीजेपी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के मंच पर प्रधानमंत्री मोदी की मां से संबंधित कोई बात नहीं हुई। उनका कहना था कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की मां का उल्लेख नहीं किया और लगाए जा रहे आरोपों में तथ्य नहीं हैं। तिवारी ने आरोप लगाने से पहले पूरे मामले को सही तरीके से देखने की बात कही।

    विवाद के बीच राहुल गांधी ने इंदौर कार्यक्रम में उठाए गए छात्रों के मुद्दों को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि एक छात्रा ने उनसे सवाल किया कि सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है, लेकिन छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने के लिए क्यों नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि गांवों से शहरों में पढ़ाई के लिए आने वाली छात्राओं को हॉस्टल नहीं मिलने पर पीजी में रहना पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि किराए और सुरक्षित आवास का खर्च अधिक होने के कारण कई छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है। कार्यक्रम में छात्रों ने शिक्षा, भर्ती, परीक्षा, आरक्षण, हॉस्टल और रोजगार से जुड़े सवाल उठाए।

    ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का यह पांचवां संस्करण था। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इंदौर में एक छात्रा ने सरकारी परीक्षाएं पास करने के बावजूद ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के कारण नियुक्ति रुकने का मुद्दा उठाया। वहीं एक छात्र ने MPPSC में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने पर कार्रवाई होने की बात कही। इस बीच मोदी की मिमिक्री को लेकर शुरू हुआ विवाद कार्यक्रम के अन्य छात्र मुद्दों पर भारी पड़ता दिखाई दिया।