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  • DUSU चुनाव नतीजों पर निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर निशाना, मंच साझा करने को लेकर कसा तंज

    DUSU चुनाव नतीजों पर निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर निशाना, मंच साझा करने को लेकर कसा तंज

    नई दिल्ली । दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर तंज कसते हुए उनके हालिया कार्यक्रमों और मंच साझा करने को लेकर टिप्पणी की। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को सुनने के लिए लोग तैयार नहीं हैं और उन्हें कलाकारों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत हासिल की। यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में कुल मतदान 40.46 प्रतिशत रहा।

    नतीजों के बाद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देशभर में ‘झूठ की गूंज’ चल रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सुनने के लिए कोई आने को तैयार नहीं है। दुबे ने राहुल गांधी के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि वह 100 से ज्यादा चुनाव हार चुके हैं। यह संख्या उनके बयान का हिस्सा है।

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के हालिया मंच साझा करने वाले कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुजरात में आयोजित एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने नेहा राठौर के साथ मंच साझा किया। इसके बाद इंदौर में एक स्टैंडअप कॉमेडियन के साथ भी वह मंच पर नजर आए।

    इसी संदर्भ में निशिकांत दुबे ने तंज कसते हुए कहा कि अगर स्थिति इसी तरह बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब राहुल गांधी को राखी सावंत के साथ भी मंच साझा करना पड़ेगा। उनका यह बयान DUSU चुनाव परिणाम के बाद राहुल गांधी पर की गई राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया।

    दुबे ने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक बनाने के लिए कलाकारों का सहारा लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के कार्यक्रमों में कलाकारों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने DUSU चुनाव परिणाम को भी युवाओं के राजनीतिक रुझान से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

    DUSU चुनाव के परिणामों में अध्यक्ष पद पर यश डबास ने 24,576 वोट हासिल किए, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले। सचिव पद पर रिया छावड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह 16,615 वोट के साथ विजयी रहे।

    इस तरह केंद्रीय पैनल के चार पदों में से तीन पर ABVP उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया। चुनाव परिणाम के बाद छात्र राजनीति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।

    निशिकांत दुबे ने DUSU परिणामों के अलावा झारखंड में SIR की प्रक्रिया को लेकर भी राज्य सरकार पर आरोप लगाए। सारठ में SIR प्रक्रिया के दौरान 34 लोगों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के सवाल पर उन्होंने दावा किया कि पूरे राज्य में प्रक्रिया के दौरान जो गड़बड़ियां हो रही हैं, उन्हें सरकार खुद करवा रही है।

    उन्होंने सारठ के पूर्व विधायक रणधीर सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह बेहतर काम कर रहे हैं। दुबे ने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ता SIR की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जुटे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने झारखंड में MMDR बिल के विरोध सहित कई राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

  • UPI चार्ज को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, प्रधानमंत्री मोदी से शुल्क वापस लेने की मांग

    UPI चार्ज को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, प्रधानमंत्री मोदी से शुल्क वापस लेने की मांग


    नई दिल्ली ।
    2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR की नई व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी उल्लेख किया।

    राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने UPI पर लागू होने वाली नई शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने इंदिरा गांधी के एक पुराने कथन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका झुकाव न बाईं ओर था और न दाईं ओर, बल्कि उनकी सोच सीधी थी।

    इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के सामने झुकने का रास्ता अपनाया है। उन्होंने UPI पर शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार से अपना फैसला वापस लेने की अपील की। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को इस मामले में हिम्मत दिखाते हुए UPI शुल्क व्यवस्था को वापस लेना चाहिए।

    इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से भी सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान पर लागू होने वाली MDR व्यवस्था को लेकर भुगतान कंपनियों के संभावित लाभ का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि PhonePe और Google Pay का डिजिटल भुगतान बाजार में बड़ा हिस्सा है और MDR से इनके राजस्व तथा मूल्यांकन पर असर पड़ सकता है।

    हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR को टैक्स नहीं माना जा सकता। नई व्यवस्था के तहत UPI से व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा। छोटे व्यापारियों के लिए भी शून्य MDR की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

    नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M लेनदेन पर सामान्य MDR दर 0.4 प्रतिशत निर्धारित की गई है। कुछ विशेष क्षेत्रों में अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। उच्च मूल्य वाले पात्र लेनदेन में MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR का भुगतानकर्ता ढांचे में इस्तेमाल होने वाला शुल्क है और इसे सरकार द्वारा टैक्स के रूप में वसूल नहीं किया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच पैसे भेजने वाले UPI लेनदेन पर राशि की कोई सीमा लागू नहीं होगी और ऐसे भुगतान मुफ्त रहेंगे।

    छोटे व्यापारियों को भी नई व्यवस्था में राहत दी गई है। UPI QR के माध्यम से हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के लेनदेन पर शून्य MDR का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का असर सीमित रखना है।

    नई व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब UPI देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। विपक्ष इसे लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि व्यवस्था का उद्देश्य UPI के संचालन और विस्तार को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और नई MDR व्यवस्था के लागू होने के बाद इसके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

  • MP में 17 से 20 सितंबर तक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, नितिन नवीन, राहुल गांधी, मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले रहेंगे मौजूद

    MP में 17 से 20 सितंबर तक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, नितिन नवीन, राहुल गांधी, मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले रहेंगे मौजूद

     मध्यप्रदेश । अगले चार दिन मध्यप्रदेश की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं। 17 से 20 सितंबर के बीच प्रदेश में देश के कई बड़े चेहरे नजर आएंगे। एक तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का दौरा होगा, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी युवाओं के बीच पहुंचेंगे। इसी दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले भी प्रदेश में मौजूद रहेंगे। ऐसे में इन चार दिनों के दौरान मध्यप्रदेश का राजनीतिक और सामाजिक माहौल काफी सक्रिय रहने वाला है और इन सभी कार्यक्रमों पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

    17 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मध्यप्रदेश के दौरे पर पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनका मंदसौर, इंदौर और उज्जैन में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है। बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। नितिन नवीन मध्यप्रदेश में इससे जुड़े आयोजनों में हिस्सा लेंगे।

    नितिन नवीन मंदसौर में SVAMITVA योजना से जुड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति और आवासीय जमीन से जुड़े अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार कर लोगों को दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। उनके दौरे में गांधी सागर अभयारण्य भी महत्वपूर्ण रहेगा। यहां चीता पुनर्वास योजना के तहत कार्यक्रम होना है। कूनो के बाद गांधी सागर को भी चीतों के लिए विकसित किया जा रहा है।

    17 और 18 सितंबर को RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उज्जैन में रहेंगे। उज्जैन पहुंचने के बाद वे संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे मध्यप्रदेश की पहली ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद गिरि, गीतकार मनोज मुंतशिर और IIM इंदौर के निदेशक हिमांशु राय समेत कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रहेगी।

    मोहन भागवत उज्जैन में आयोजित बड़े दीप प्रज्वलन कार्यक्रम का भी हिस्सा बनेंगे। उनके दौरे को लेकर संघ के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया है। पुलिस और प्रशासन भी सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियों में जुटा है।

    19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर पहुंचेंगे। यहां ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए वे युवाओं और Gen Z से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही गई है। राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस संगठन की तैयारियां तेज हो गई हैं।

    चार दिनों के इस सिलसिले का अंतिम बड़ा कार्यक्रम 20 सितंबर को भोपाल में होगा। RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले लाल परेड मैदान में आयोजित ‘शाखा संगम’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के शामिल होने की तैयारी है। इनमें 30 हजार से ज्यादा Gen-Z स्वयंसेवक शामिल होंगे, जबकि कुल उपस्थिति करीब 50 हजार बताई जा रही है।

    संघ के अनुसार भोपाल विभाग के पांच जिलों और छह नगरों की करीब 800 शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से शारीरिक अभ्यास और दंड प्रदर्शन भी किया जाएगा। दत्तात्रेय होसबाले अपने संबोधन में समाज के सामने मौजूद चुनौतियों, भविष्य के लक्ष्यों और इतिहास से मिलने वाली सीख पर बात करेंगे।

  • 2018 की टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार, छह सप्ताह की राहत जारी

    2018 की टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार, छह सप्ताह की राहत जारी



    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2018 में की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से जारी समन और मामले की आगे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, राहुल गांधी को तत्काल राहत देते हुए अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश को छह सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है।

    पूरा मामला सितंबर 2018 का है। उस समय राजस्थान में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने राफेल डील का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए ‘कमांडर-इन-चीफ’ और ‘चौकीदार चोर है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उन्होंने भाषण का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया था।

    राहुल गांधी की इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने वर्ष 2019 में मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में उनके खिलाफ चोरी से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी से पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

    शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अगस्त 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने समन को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अदालत से मानहानि मामले की कार्यवाही के साथ मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन को भी रद्द करने का अनुरोध किया था।

    राहुल गांधी के वकीलों ने हाई कोर्ट में दलील दी कि शिकायत दर्ज कराने वाला व्यक्ति इस मामले में सीधे तौर पर पीड़ित पक्ष नहीं है। उनका कहना था कि राहुल गांधी की टिप्पणी किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यक्ति विशेष को लेकर थी। इसी आधार पर वकीलों ने दावा किया कि किसी पार्टी कार्यकर्ता को इस तरह की टिप्पणी के आधार पर मानहानि का मुकदमा दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं बनता।

    इस दलील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एन. आर. बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने शशि थरूर से संबंधित पुराने फैसले का भी संदर्भ दिया। कोर्ट ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत और पहचान योग्य राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी है तथा प्रधानमंत्री उसके प्रमुख प्रतिनिधि हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से पार्टी के कार्यकर्ताओं की मानहानि होने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

    हाई कोर्ट ने यह भी माना कि मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में ऐसा कोई गैर-कानूनी या अनुचित आधार नहीं है, जिसके चलते उसे रद्द किया जाए। इसी कानूनी आधार पर राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया गया।

    हालांकि, फैसले के बावजूद राहुल गांधी को छह सप्ताह की अंतरिम राहत मिली है। उनके वकीलों के अनुरोध पर अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश की अवधि बढ़ा दी है। इसके तहत अगले छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत में मामले की सुनवाई स्थगित रहेगी और राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से भी छूट मिलेगी। इस अवधि में वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

  • राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

    राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पार्टी के भीतर संगठन को पुराने तौर-तरीकों से बाहर निकालकर युवा, सक्रिय और जमीन से जुड़े नेतृत्व को आगे लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में अब केवल राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय नेताओं के संगठनात्मक काम, जमीनी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को अधिक महत्व देने की तैयारी है।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने 30 नेताओं के इंटरव्यू लिए। इस प्रक्रिया में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हैं। चयन प्रक्रिया के तहत नेताओं को 10-10 के समूह में इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया जा रहा है।

    इंटरव्यू के दौरान राहुल गांधी उम्मीदवारों से उनके पिछले संगठनात्मक काम, राजनीतिक अनुभव और भविष्य की रणनीति से जुड़े सवाल कर रहे हैं। चयन प्रक्रिया में नेताओं के कामकाज और उनकी संगठनात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं का विस्तृत कामकाजी रिपोर्ट कार्ड पहले से ही पार्टी नेतृत्व के पास मौजूद है।

    कांग्रेस राष्ट्रीय सचिवों की मौजूदा टीम में भी बड़े फेरबदल की तैयारी कर रही है। पार्टी की योजना मौजूदा 60 फीसदी से अधिक सचिवों को बदलकर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की है। कुल 120 नेताओं के इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। इससे राष्ट्रीय संगठन में बड़ी संख्या में नए और अपेक्षाकृत युवा चेहरों के आने की संभावना है।

    चयन प्रक्रिया में ‘संगठन सृजन’ अभियान के दौरान ऑब्जर्वर के तौर पर काम कर चुके नेताओं को विशेष प्राथमिकता मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं को आगे लाना चाहता है, जिन्होंने संगठन के साथ सीधे जमीन पर काम किया है और अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को करीब से समझा है।

    राहुल गांधी लंबे समय से कांग्रेस में युवा नेतृत्व और प्रतिभा आधारित चयन की पैरवी करते रहे हैं। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में इंटरव्यू आधारित चयन की प्रक्रिया इसी सोच का हिस्सा रही है। अब प्रदेश और जिला स्तर पर युवा चेहरों को जिम्मेदारी देने के बाद राष्ट्रीय संगठन में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

    कांग्रेस का लक्ष्य अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों से आने वाले ऐसे नेताओं की टीम तैयार करना है, जो सक्रिय हों, संगठन को मजबूत करने की क्षमता रखते हों और जमीनी स्तर पर काम का अनुभव रखते हों। राष्ट्रीय संगठन में प्रस्तावित बदलाव को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    करीब दो दशक से राहुल गांधी कांग्रेस में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम के चयन की मौजूदा प्रक्रिया को उनके इसी ‘जनरेशन चेंज’ अभियान को संगठनात्मक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने और कामकाज के तरीके में बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।

  • राहुल रॉय का बदला दौर: कभी फिल्मों की लगी रहती थी लाइन, अब शादी में डांस कर 2 से 4 लाख रुपये कमाकर चला रहे खर्च

    राहुल रॉय का बदला दौर: कभी फिल्मों की लगी रहती थी लाइन, अब शादी में डांस कर 2 से 4 लाख रुपये कमाकर चला रहे खर्च

    नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री में समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कभी जिस अभिनेता के पास फिल्मों की लाइन लगी रहती है और लाखों प्रशंसक उसके दीवाने होते हैं, उसे आगे चलकर काम के लिए संघर्ष भी करना पड़ सकता है। अभिनेता राहुल रॉय की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। ‘आशिकी’ से रातोंरात लोकप्रिय हुए राहुल रॉय आज अपने करियर को दोबारा खड़ा करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।

    राहुल रॉय ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उनके सामने कई मुश्किलें आईं। खासतौर पर ब्रेन स्ट्रोक के बाद उनके लिए काम करना और दोबारा इंडस्ट्री में सक्रिय होना आसान नहीं रहा। पिछले साल उनका एक शादी समारोह में परफॉर्म करते हुए वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया, लेकिन राहुल का कहना है कि लोग उनकी परिस्थितियों और मेहनत को नहीं समझते।

    राहुल रॉय ने अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में बात करते हुए बताया कि वह 60 साल की उम्र में फिर से अपना साम्राज्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने भाई के साथ चल रहे एक कानूनी मामले का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक यह करीब 30 लाख रुपये का मामला है, जिसे वह और उनके भाई सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि तलाक के समय उन्होंने अपनी संपत्ति पत्नी के नाम कर दी थी और अब वह जिंदगी को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    अभिनेता ने कहा कि पिछले पांच साल उनके लिए एक तरह का ब्रेक रहे। इस दौरान वह अपनी सेहत को सुधारने पर ध्यान दे रहे थे और उनके पास ज्यादा काम नहीं था। उनका कहना है कि अगर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं आती तो वह इस दौरान और अधिक काम कर रहे होते। अब उन्हें कुछ काम मिलना शुरू हुआ है और वह आगे ज्यादा से ज्यादा काम करना चाहते हैं।

    राहुल ने बताया कि लंबे समय बाद सेट पर वापस लौटकर कैमरे का सामना करना उनके लिए बेहद खास अनुभव था। उन्होंने उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उन पर भरोसा किया। अभिनेता के मुताबिक फिल्मों में उनकी 37 साल की यात्रा रही है और उन्होंने इस दौरान अच्छा काम किया है। अब वह अपने करियर में आगे और काम करना चाहते हैं।

    शादी समारोहों में परफॉर्म करने को लेकर राहुल ने साफ कहा कि उन्हें अपने खर्चे चलाने के लिए पैसे की जरूरत है। ब्रेन स्ट्रोक के बाद उनके लिए काम मिलना मुश्किल हो गया था। ऐसे में वह जो भी काम मिल रहा है, उसे करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कभी शादी में डांस करके उन्हें दो लाख रुपये मिलते हैं तो कभी चार लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है।

    राहुल का कहना है कि उन्हें ट्रोल करने वाले लोग यह नहीं जानते कि शादी में परफॉर्म करना भी उनके लिए मेहनत का काम है। उन्हें अपने खर्चे खुद उठाने हैं और इसके लिए वह किसी भी ईमानदार काम को छोटा नहीं मानते।

    राहुल ने यह भी बताया कि मुश्किल दौर में इंडस्ट्री के कई लोगों ने उनका साथ दिया। उन्होंने सलमान खान, करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, फराह खान, अर्चना पूरन सिंह और पूजा भट्ट का नाम लिया। उनके मुताबिक ब्रेन स्ट्रोक के बाद सलमान खान ने उनकी दवाइयों का खर्च उठाने में मदद की थी। राहुल ने ‘आशिकी’ से जुड़े कलाकारों अनु अग्रवाल, दीपक तिजोरी और अवतार गिल के साथ-साथ महेश भट्ट का भी आभार जताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में उन्हें और काम मिलेगा और वह फिर से अपने अभिनय करियर को आगे बढ़ा सकेंगे।

  • कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सैनन अपने रक्षाबंधन से जुड़े एक ज्वेलरी विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच चर्चा में हैं। विज्ञापन में कृति को इंडो वेस्टर्न परिधान में दिखाया गया था, जिसके बाद उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद कृति ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बात स्पष्ट की।

    कृति ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी त्योहार की भावना केवल कपड़ों से तय नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े भाव और परंपराओं के अर्थ अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई बहन के बीच सुरक्षा, स्नेह और शुभकामनाओं से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वह और उनकी बहन एक दूसरे को राखी बांधती हैं और एक दूसरे की उसी तरह देखभाल कर सकती हैं, जैसे परिवार में भाई बहन करते हैं।

    कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तय करने का अधिकार दूसरों को नहीं होना चाहिए कि किसी महिला को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। उनकी पोस्ट का मुख्य संदेश यह था कि त्योहार की भावना को कपड़ों की शैली के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

    इसी पोस्ट को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। उन्होंने कृति के विचारों का समर्थन करते हुए महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता की बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां करती है, यह उसकी अपनी पसंद है। उन्होंने महिलाओं को उनकी स्वतंत्रता के लिए ट्रोल किए जाने का विरोध किया और पुरुषसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाया।

    राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गया। कृति सैनन के विज्ञापन को लेकर शुरू हुई बहस अब महिलाओं के पहनावे, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक टिप्पणी की सीमाओं तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों में कलाकारों के कपड़ों और उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को लेकर अलग अलग विचार सामने आते रहे हैं।

    कृति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन की पारिवारिक भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनके लिए राखी केवल किसी एक पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच एक दूसरे की सुरक्षा, खुशी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी है। उन्होंने अपने परिवार और पालतू कुत्तों के संदर्भ में भी स्नेह की इसी भावना को व्यक्त किया।

    विज्ञापन में कृति के परिधान को लेकर उठी आपत्तियों के बावजूद अभिनेत्री ने अपने संदेश में विवाद को बढ़ाने के बजाय त्योहार के मूल भाव पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सांस्कृतिक मूल्यों को केवल पहनावे के आधार पर निर्धारित करना उचित नहीं है।

    इस पूरे विवाद में राहुल गांधी का कृति की पोस्ट को साझा करना महत्वपूर्ण रहा। उनके समर्थन से मुद्दे को राजनीतिक संदर्भ भी मिला। हालांकि, मूल विवाद कृति के विज्ञापन और उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर हुई आलोचना से शुरू हुआ था।

    काम के मोर्चे पर कृति सैनन हाल में फिल्म कॉकटेल में नजर आई थीं, जिसमें उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर भी थे। फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसके बाद कृति के अगले प्रोजेक्ट को लेकर प्रशंसकों में उत्सुकता बनी हुई है। फिलहाल रक्षाबंधन विज्ञापन से जुड़ा विवाद उनके सार्वजनिक चर्चाओं में बने रहने की वजह बना हुआ है।

  • संसद में हंगामे पर किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को घेरा, कहा बहस छोड़कर राजनीतिक दबाव की रणनीति नहीं चलेगी

    संसद में हंगामे पर किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को घेरा, कहा बहस छोड़कर राजनीतिक दबाव की रणनीति नहीं चलेगी

    नई दिल्ली ।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हुए हंगामे और सदन की कार्यवाही बाधित होने को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि संसद किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश की जनता की संस्था है और इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव या ब्लैकमेल के लिए नहीं किया जाना चाहिए। रिजिजू ने विपक्ष से सदन में सार्थक बहस और संवाद के जरिए मुद्दे उठाने की अपील की।

    रिजिजू ने संसद की कार्यवाही बाधित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रश्नकाल को रोकना, मंत्रियों की बात नहीं सुनना और चर्चा के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है। उनका कहना था कि एक तरफ विपक्ष सदन में चर्चा नहीं होने की शिकायत करता है और दूसरी तरफ जब विस्तृत बहस का अवसर दिया जाता है तो उसे स्वीकार नहीं करता।

    संसदीय कार्य मंत्री ने मॉनसून सत्र की कार्यवाही के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक लोकसभा निर्धारित समय का करीब 15 प्रतिशत और राज्यसभा लगभग 33 प्रतिशत ही चल सकी। बार-बार होने वाले व्यवधानों के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। रिजिजू ने कहा कि संसद में जनता से जुड़े विषयों पर चर्चा होना जरूरी है और लगातार हंगामे से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।

    रिजिजू ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय देने और सवालों के जवाब देने का प्रस्ताव रखा था। रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब चर्चा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा हो तो उसे अस्वीकार करने के बाद संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं होने की शिकायत करना उचित नहीं है।

    केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की संसदीय उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51 प्रतिशत रही। रिजिजू ने कहा कि संसद में लंबी बहस के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने वाले नेता को सदन में पर्याप्त समय नहीं मिलने की शिकायत नहीं करनी चाहिए।

    उन्होंने राहुल गांधी के विदेश दौरों का उल्लेख करते हुए भी उन पर निशाना साधा। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विदेशों में भारतीय लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाने के बजाय संसद के भीतर जवाबदेही और चर्चा की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने का रास्ता हंगामा नहीं, बल्कि संवाद और तथ्य आधारित बहस है।

    रिजिजू ने राहुल गांधी के हालिया पितृसत्ता संबंधी बयान को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की स्वतंत्रता और पितृसत्तात्मक सोच पर बात की थी। उन्होंने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच की आलोचना की थी।

    इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने पूछा कि कांग्रेस और राहुल गांधी हिंदू परंपराओं को ही निशाना क्यों बनाते हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक महिलाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि समाज को बांटने के बजाय बेटियों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। दोनों नेताओं के बयानों से संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।

  • राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..

    राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..


    नई दिल्ली । 
    वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी के राजनीतिक रुख, उनके बयानों और विदेश दौरों को लेकर कई सवाल उठाए और कांग्रेस पर भी गंभीर आरोप लगाए।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस का सबसे प्रमुख चेहरा राहुल गांधी हैं, लेकिन उनके बयानों से युवाओं को स्पष्ट दिशा मिलने के बजाय भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के युवाओं को सही रास्ता दिखाने की जगह उन्हें भटकाने का काम कर रहे हैं।

    वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लगातार देश की आलोचना करता है, उससे वंदे मातरम् और भारत माता के सम्मान की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे पर निशाना साधने की कोशिश की।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के विदेश दौरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो वहां दिए जाने वाले उनके बयानों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक विदेशों में दिए गए कुछ बयानों से भारत के प्रति नकारात्मक सोच सामने आती है और इससे देश की छवि प्रभावित होने का आरोप लगाया।

    केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की मानसिक स्थिति और उनके राजनीतिक व्यवहार को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का स्वभाव ऐसा है कि या तो वह बहुत फ्रस्ट्रेट हैं या मानसिक तनाव में हैं। इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर जॉर्ज सोरोस के एजेंडे के साथ काम करने का आरोप भी लगाया। यह आरोप राजनीतिक स्तर पर पहले भी विवाद का विषय रहा है। हालांकि इस तरह के आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

    उन्होंने राहुल गांधी को पॉलिटिकल जोकर तक करार दिया और आरोप लगाया कि उनकी राजनीति से देश को नुकसान हो रहा है। गिरिराज सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है।

    वंदे मातरम् भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इसी वजह से इससे जुड़े किसी भी राजनीतिक विवाद का असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को राष्ट्र सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

    गिरिराज सिंह के बयान के बाद अब कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच यह विवाद केवल वंदे मातरम् तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि राहुल गांधी की राजनीति, उनके बयानों और देश से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख को लेकर भी बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से और राजनीतिक बयान सामने आ सकते हैं।

  • अभिनेता से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी तक, राहुल बोस का बहुआयामी जीवन प्रेरणा का उदाहरण

    अभिनेता से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी तक, राहुल बोस का बहुआयामी जीवन प्रेरणा का उदाहरण

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में अपनी गंभीर और प्रभावशाली अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले राहुल बोस का व्यक्तित्व केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। अभिनेता, फिल्म निर्माता, अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी के रूप में उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर एक बहुआयामी पहचान बनाई है। 27 जुलाई 1967 को कोलकाता में जन्मे राहुल बोस ने अपने जीवन की दिशा केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं रखी, बल्कि खेल और सामाजिक सरोकारों को भी बराबर महत्व दिया।

    राहुल बोस की शुरुआती शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। बचपन में उनकी मां ने उन्हें बॉक्सिंग और रग्बी जैसे खेलों से परिचित कराया। इसी दौरान उन्होंने क्रिकेट का प्रशिक्षण भी लिया और बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया। हालांकि आगे चलकर रग्बी उनका सबसे बड़ा जुनून बन गया और उन्होंने इसी खेल में देश का प्रतिनिधित्व करने का निर्णय लिया।

    वर्ष 1998 से 2009 तक राहुल बोस भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम का हिस्सा रहे और लगभग 11 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। अभिनय के व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने अपने फिल्मी काम और खेल के बीच संतुलन बनाए रखा। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग भी रग्बी प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अनुसार तय की, जिससे दोनों क्षेत्रों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

    रग्बी से उनका जुड़ाव खिलाड़ी के रूप में ही समाप्त नहीं हुआ। बाद के वर्षों में उन्होंने खेल के विकास के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संभाली। भारतीय महिला रग्बी टीम की उपलब्धियों और देश में खेल को नई पहचान मिलने के दौर में उन्होंने रग्बी इंडिया के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इस भूमिका में उन्होंने खेल के विस्तार और युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय योगदान दिया।

    अभिनय की दुनिया में राहुल बोस ने बचपन में स्कूल के एक नाटक से शुरुआत की थी। बाद में विज्ञापन क्षेत्र में कॉपीराइटर के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने फिल्मों की ओर कदम बढ़ाया। पहली ही प्रमुख फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने अभिनय को पूर्णकालिक पेशा बना लिया। उन्होंने हमेशा ऐसी फिल्मों को प्राथमिकता दी जिनमें मजबूत कहानी, सामाजिक संदेश और सशक्त अभिनय की गुंजाइश हो। यही कारण रहा कि उन्होंने समानांतर सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई और कई चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों की सराहना हासिल की।

    राहुल बोस ने निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उनकी पहली निर्देशित फिल्म को सीमित संसाधनों के बावजूद पूरा किया गया और बाद में उन्होंने एक ऐसी प्रेरणादायक जीवनी पर आधारित फिल्म बनाई, जिसमें कम उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भारतीय बालिका की उपलब्धि को पर्दे पर प्रस्तुत किया गया। उनके निर्देशन में भी सामाजिक संवेदनशीलता और प्रेरक विषयों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

    सिनेमा और खेल के साथ-साथ समाज सेवा राहुल बोस के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। वर्ष 2004 की सुनामी के दौरान राहत कार्यों में भाग लेने के बाद उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए स्थायी रूप से काम करने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से उन्होंने एक सामाजिक संस्था की स्थापना की, जिसके माध्यम से दूरदराज और संसाधनों से वंचित क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही बाल यौन शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हजारों शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने जैसे अभियान भी संचालित किए गए हैं। अभिनय, खेल और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाकर राहुल बोस ने यह साबित किया है कि सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने से भी मापी जाती है।