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  • पीएम मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक हर स्वतंत्रता दिवस पर बदला साफे का रंग और अंदाज

    पीएम मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक हर स्वतंत्रता दिवस पर बदला साफे का रंग और अंदाज

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। इस दौरान उनका पारंपरिक पहनावा एक बार फिर चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री ने लाल और पीले रंग की बंधेज पगड़ी पहनी, जिसके साथ सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट थी।

    प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस पर पहने जाने वाले साफे और पगड़ी की खास बात यह है कि हर वर्ष इसका रंग, डिजाइन और बांधने का अंदाज अलग दिखाई देता है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनकी पगड़ी एक अलग पहचान बन चुकी है।

    इस बार पहनी गई बंधेज पगड़ी गहरे लाल रंग की थी और उस पर सफेद रंग के छोटे-छोटे बिंदु बने थे। बंधेज राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक टाई-एंड-डाई कला से जुड़ी है। इसमें कपड़े को धागों से बांधकर अलग-अलग हिस्सों में रंग दिया जाता है, जिससे कपड़े पर खास तरह के बिंदु और पैटर्न उभरते हैं।

    बंधेज को राजस्थान और गुजरात में उत्सव, सम्मान और परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। इस तरह की पगड़ी विशेष अवसरों और समारोहों में भी पहनी जाती है। प्रधानमंत्री के इस परिधान को स्थानीय हस्तकला और पारंपरिक कपड़ा कला के संदर्भ में भी देखा गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल रंग की चमकदार राजस्थानी बंधेज पगड़ी पहनी थी। इसके अगले वर्ष उनकी पगड़ी में पीले रंग के साथ लाल और गहरे हरे रंग के क्रॉस-क्रॉस पैटर्न दिखाई दिए थे।

    2016 में उन्होंने गुलाबी और पीले रंग की टाई-डाई शैली वाली पगड़ी पहनी। 2017 में लाल रंग की पगड़ी उनके पहनावे का हिस्सा बनी। 2018 में उन्होंने भगवा रंग की पगड़ी पहनी थी, जबकि 2019 में लाल, पीले और हरे रंगों से सजी राजस्थानी पगड़ी नजर आई।

    2020 में प्रधानमंत्री ने केसरिया रंग की पगड़ी पहनी, जिस पर क्रीम रंग का प्रिंट दिखाई दिया। 2021 में उनकी पगड़ी केसरी और लाल रंग के पैटर्न वाली थी। उस समय हल्के नीले रंग की जैकेट के साथ उनका पहनावा भी चर्चा में रहा।

    2022 में प्रधानमंत्री तिरंगे रंगों वाली पगड़ी में नजर आए। इसके साथ उन्होंने नीले रंग की जैकेट पहनी थी। 2023 में उनकी पगड़ी में लाल, पीले, हरे और बैंगनी रंगों वाली बांधनी शैली दिखाई दी। 2024 में भगवा और हरे रंग की पगड़ी के साथ उन्होंने नीले रंग की सदरी पहनी थी।

    2025 में प्रधानमंत्री ने भगवा रंग की पगड़ी पहनी थी और उनके पहनावे में तिरंगे का प्रिंट भी शामिल था। इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर उनकी पगड़ी के रंग और डिजाइन हर वर्ष अलग रहे हैं।

    इस वर्ष की बंधेज पगड़ी में लाल रंग प्रमुख रहा। पारंपरिक बंधेज कला के इस्तेमाल ने एक बार फिर प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे को चर्चा में ला दिया। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पगड़ी ने उनके परिधान में पारंपरिक भारतीय शैली को प्रमुखता दी।

  • राजस्थान कांग्रेस में उभरे संगठनात्मक मतभेद, BAP नेताओं की एंट्री पर छिड़ा विवाद

    राजस्थान कांग्रेस में उभरे संगठनात्मक मतभेद, BAP नेताओं की एंट्री पर छिड़ा विवाद


    नई दिल्ली। पंजाब में गुटबाजी की चुनौती से जूझ रही कांग्रेस के सामने अब राजस्थान में भी संगठनात्मक मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के करीब 300 नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रदेश इकाई के भीतर नए विवाद ने जन्म ले लिया है। यह कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में आयोजित हुआ, जिस पर प्रदेश नेतृत्व ने अप्रसन्नता जताई है।

    BAP नेताओं की जॉइनिंग बनी विवाद की वजह
    जानकारी के अनुसार, पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में BAP नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अशोक गहलोत भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम की जानकारी प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को पहले से नहीं दी गई थी, जिसके चलते विवाद खड़ा हो गया।

    डोटासरा ने साधा परोक्ष निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि कोई अपनी व्यक्तिगत छवि बनाने के लिए काम कर रहा है तो उन्हें शुभकामनाएं, लेकिन उनकी प्राथमिकता केवल कांग्रेस पार्टी है। उन्होंने कहा कि उनकी निष्ठा हमेशा संगठन के प्रति रही है और वे किसी व्यक्ति विशेष की ब्रांडिंग के लिए काम नहीं करेंगे।

    मामला दिल्ली तक पहुंचने की चर्चा
    सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.सी. वेणुगोपाल का नाम भी शामिल है, से चर्चा की गई है। हालांकि, इस पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    महेंद्र मालवीय को लेकर भी टिप्पणी
    डोटासरा ने पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय का नाम लिए बिना कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़कर गए थे, उन्हें चुनाव में सफलता नहीं मिली और बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पार्टी में वापसी की। उन्होंने कहा कि पार्टी में लौटने वालों का स्वागत है, लेकिन यदि कोई कांग्रेस के हितों के खिलाफ काम करेगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    चार खेमों की चर्चा, कांग्रेस का इनकार
    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस एक बार फिर अलग-अलग गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। इन चर्चाओं में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के अलग-अलग प्रभाव क्षेत्रों का जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, पार्टी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। डोटासरा का कहना है कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और सभी नेता मिलकर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

  • राजस्थान में 24 हजार से अधिक सफाई कर्मचारी भर्ती, बिना परीक्षा लॉटरी से होगा चयन, 15 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन

    राजस्थान में 24 हजार से अधिक सफाई कर्मचारी भर्ती, बिना परीक्षा लॉटरी से होगा चयन, 15 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन


    नई दिल्ली ।
    राजस्थान सरकार ने राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में बड़े स्तर पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इस भर्ती अभियान के तहत राज्य के 183 नगरीय निकायों में 24 हजार से अधिक संविदा सफाई कर्मचारी पदों को भरा जाएगा। भर्ती की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा या साक्षात्कार से नहीं गुजरना होगा। पात्र उम्मीदवारों का चयन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने का प्रयास किया गया है।

    इस भर्ती के लिए किसी भी प्रकार की शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं रखी गई है। इसका उद्देश्य उन लोगों को भी रोजगार का अवसर उपलब्ध कराना है, जिन्होंने औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की है लेकिन सफाई कार्य का व्यावहारिक अनुभव रखते हैं। हालांकि, आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास कम से कम एक वर्ष का सफाई कार्य का अनुभव होना आवश्यक होगा। यह अनुभव लगातार या अलग-अलग अवधि में प्राप्त किया गया हो सकता है, लेकिन इसके समर्थन में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य रहेगा।

    भर्ती प्रक्रिया में संबंधित नगरीय निकाय में पहले से सफाई कार्य का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी निकाय में पर्याप्त पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं तो राजस्थान के अन्य नगरीय निकायों में कार्य कर चुके योग्य अभ्यर्थियों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक नगरीय निकाय के लिए अलग-अलग लॉटरी आयोजित की जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रिक्त पदों के अनुसार चयन सुनिश्चित किया जा सके।

    आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी का राजस्थान का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। इसके साथ ही उम्मीदवार का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी होगा ताकि वह सफाई कार्य की जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सके। भर्ती नियमों के अनुसार प्रत्येक अभ्यर्थी केवल 183 नगरीय निकायों में से किसी एक के लिए ही आवेदन कर सकेगा। एक से अधिक निकायों के लिए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 जनवरी 2027 को आधार मानकर की जाएगी। आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों को राज्य सरकार के प्रचलित नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी।

    भर्ती के लिए आवेदन शुल्क भी श्रेणी के अनुसार तय किया गया है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 600 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा, जबकि आरक्षित वर्ग और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए शुल्क 400 रुपये निर्धारित किया गया है। आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा और आवेदन तभी पूर्ण माना जाएगा जब निर्धारित शुल्क सफलतापूर्वक जमा हो जाएगा।

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 अगस्त 2026 से शुरू होगी। इच्छुक एवं पात्र उम्मीदवार निर्धारित भर्ती पोर्टल पर जाकर आवेदन पत्र भर सकेंगे। आवेदन के दौरान आवश्यक दस्तावेज, अनुभव प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी जानकारी अपलोड करनी होगी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने और शुल्क जमा करने के बाद आवेदन स्वीकार किया जाएगा। इस भर्ती अभियान के माध्यम से राज्य के नगरीय निकायों में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलने की उम्मीद है।

  • राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस

    राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस


    जयपुर। राजस्थान में होने वाले निकाय और पंचायत चुनावों से पहले कांग्रेस ने युवाओं को आगे बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घोषणा की कि पार्टी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में 50 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत टिकट देगी।

    पार्टी मुख्यालय में शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व का अवसर देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने टिकट के दावेदारों को यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि केवल आवेदन करने से टिकट की गारंटी नहीं होगी। उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय परिस्थितियों, संगठन की जरूरतों और जीत की संभावनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

    डोटासरा ने वार्ड बदलकर टिकट मांगने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाकर दावेदारी करने को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। टिकट वितरण पूरी तरह संगठनात्मक मानकों और स्थानीय समीकरणों के आधार पर होगा।

    राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों की अधिसूचना 23 सितंबर के आसपास जारी होने की संभावना है। मतदान 13 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच विभिन्न चरणों में कराया जा सकता है, जबकि मतगणना 12 नवंबर तक पूरी होने की उम्मीद है।

    वहीं, शहरी निकाय चुनावों की घोषणा 17 अगस्त के आसपास होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 6 और 9 सितंबर को मतदान तथा 11 सितंबर को मतगणना कराई जा सकती है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम चुनाव आयोग की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही तय होगा।

  • राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति

    राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति


    जोधपुर। राजस्थान की जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल जल्द एक अनोखे विवाह की साक्षी बनेगी। हत्या के अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो बंदी आपसी सहमति से विवाह बंधन में बंधेंगे। राजस्थान हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जेल प्रशासन ने विवाह की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    जानकारी के अनुसार, नागौर निवासी मूलाराम पड़ोसी की हत्या के मामले में दोषी है और 16 जनवरी 2017 से उम्रकैद की सजा काट रहा है। वर्तमान में वह मंडोर ओपन जेल में बंद है। वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है और फिलहाल 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर है।

    पुनर्वास के आधार पर मांगी गई थी अनुमति
    मूलाराम की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट में अस्थायी सजा निलंबन की याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि मूलाराम और सीमा दोनों अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं।

    मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी ने दलील दी कि विवाह से दोनों के पुनर्वास और सामाजिक सुधार की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में वे सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे। उन्होंने बंदियों के वैवाहिक और संतानोत्पत्ति संबंधी अधिकारों से जुड़े हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले का भी हवाला दिया।

    सरकार ने भी नहीं जताई आपत्ति
    राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि दोनों विवाह करना चाहते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि दोनों पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके हैं। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजकों ने कहा कि ओपन जेल के नियमों के तहत यदि दोनों विवाह करना चाहते हैं तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

    कोर्ट ने दिए विवाह संबंधी निर्देश
    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाह समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है और केवल दोषसिद्धि के आधार पर किसी बंदी को उसकी सहमति से विवाह करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने निर्देश दिया कि विवाह समारोह मंडोर ओपन जेल परिसर में ही आयोजित किया जाएगा। समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21-21 लोगों को शामिल होने की अनुमति होगी। विवाह संपन्न कराने के लिए एक पंडित भी मौजूद रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर मेहमानों की संख्या बढ़ाने का निर्णय जेल प्रशासन ले सकेगा।

    हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह की तिथि की सूचना पहले से जेल प्रशासन को देना अनिवार्य होगा, जबकि पूरे समारोह का खर्च मूलाराम वहन करेगा। अधिवक्ता कालूराम भाटी के अनुसार, यह विवाह 22 जुलाई को आयोजित किया जा सकता है।

  • चारधाम से लौटते वक्त मौत ने घेरा: 'बस छूट जाती तो पत्नी आज जिंदा होती', दौसा हादसे के पीड़ित की भावुक कहानी

    चारधाम से लौटते वक्त मौत ने घेरा: 'बस छूट जाती तो पत्नी आज जिंदा होती', दौसा हादसे के पीड़ित की भावुक कहानी


    मध्यप्रदेश । चारधाम यात्रा पूरी कर खुशियों के साथ घर लौट रहे इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रप्रकाश (चंदू) गुप्ता ने कभी नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा। 30 जून की रात राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण बस हादसे में उनकी पत्नी निर्मला गुप्ता की मौत हो गई। हादसे से कुछ घंटे पहले ही निर्मला ने मुस्कुराते हुए सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ लिखकर स्टेटस लगाया था। परिवार से बात हुई, भविष्य की योजनाएं बनीं, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरा परिवार बिखेर दिया।

    चंद्रप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि उनकी पत्नी पिछले तीन वर्षों से दोबारा चारधाम यात्रा पर जाने की जिद कर रही थीं। पहले भी दोनों यात्रा कर चुके थे, लेकिन निर्मला का कहना था कि अब वहां काफी बदलाव हो चुके हैं और एक बार फिर दर्शन करना चाहती हैं। यात्रा की तैयारी पूरी थी और ट्रेन की कन्फर्म टिकट भी मिल चुकी थी, लेकिन सुविधा को देखते हुए बस से जाने का फैसला किया गया। आज उन्हें सबसे ज्यादा यही बात सालती है कि अगर उस दिन बस नहीं पकड़ी होती तो शायद उनकी पत्नी आज उनके साथ होती।

    हरिद्वार से लौटते समय बस पकड़ने के लिए दोनों ने काफी मशक्कत की। पहले गलत बस स्टैंड पहुंचे, फिर सामान उठाकर कई सौ मीटर पैदल चलना पड़ा। कई बार बस संचालक से संपर्क किया और आखिरकार इंदौर जाने वाली बस मिल गई। उस समय उन्हें लगा कि बस छूटने से बच गए, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही बस निर्मला की आखिरी यात्रा साबित होगी।

    बस में बैठने के बाद निर्मला बेहद खुश थीं। उन्होंने बच्चों से फोन पर बात की और सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ का स्टेटस लगाया। इंदौर लौटने के बाद विदिशा, वृंदावन, सांवरिया सेठ और कुलदेवी के दर्शन की भी योजना बना ली गई थी। परिवार के साथ आने वाले दिनों की बातें हो रही थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

    रात करीब ढाई बजे तेज धमाके के साथ बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऊपर की बर्थ पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े और कुछ ही पलों में बस में अफरा-तफरी मच गई। चंद्रप्रकाश बताते हैं कि उनकी पत्नी खिड़की की तरफ सो रही थीं और उसी दिशा से ट्रेलर बस के अंदर तक घुस आया। उन्होंने कई बार पत्नी को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

    उन्होंने किसी तरह पत्नी का फंसा हुआ पैर निकाला और उन्हें बाहर लाने की कोशिश की, लेकिन तभी किसी ने उन्हें जबरदस्ती बस से बाहर खींच लिया। कुछ ही क्षणों में बस आग की लपटों में घिर गई। वे दोबारा पत्नी को बचाने दौड़े, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि अंदर जाना असंभव हो गया। उनकी आंखों के सामने ड्राइवर भी स्टीयरिंग में फंसा रह गया और जिंदा जल गया।

    चंद्रप्रकाश कहते हैं कि हादसे के बाद के वे सात-आठ मिनट उनकी पूरी जिंदगी बदल देने वाले थे। मोबाइल, सामान और जीवनसाथी—सब कुछ एक साथ छिन गया। सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की रही कि आसपास मौजूद कई लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन मदद के लिए बहुत कम लोग आगे आए। आखिरकार एक युवक ने उन्हें अपना मोबाइल दिया, जिससे उन्होंने बेटे को फोन कर सिर्फ इतना कहा—”बहुत बड़ा हादसा हो गया है।”

    करीब 44 वर्षों तक साथ निभाने वाली निर्मला गुप्ता को याद करते हुए उनकी आंखें भर आती हैं। वे बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की हर जिम्मेदारी उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाई। तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और जीवन में आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा योगदान था। सरल स्वभाव, सादगी और परिवार के प्रति समर्पण ही उनकी पहचान थी।

    आज चंद्रप्रकाश गुप्ता के लिए चारधाम यात्रा की यादें आस्था से ज्यादा एक ऐसे दर्द की कहानी बन चुकी हैं, जिसने कुछ ही मिनटों में उनका पूरा संसार बदल दिया। उनके शब्दों में, “हम घर लौट रहे थे… लेकिन एक पल में सब खत्म हो गया।”

  • राजस्थान: सरकारी नौकरी के लिए आयुषी ने रची साजिश, भाई को जमीन का दिया लालच, बोलीं- बस..मां को मरवा दे

    राजस्थान: सरकारी नौकरी के लिए आयुषी ने रची साजिश, भाई को जमीन का दिया लालच, बोलीं- बस..मां को मरवा दे


    जयपुर । राजस्थान में जयपुर के एयरपोर्ट कॉलोनी में ढाई साल पहले कोर्ट में एलडीसी विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने घर बनाया था जिसमें पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से कमज़ोर बेटे के साथ रहता था. एक साल पहले विजय शर्मा की मौत हो जाती है. तब बेटी आयुषी शर्मा ने 12 th पास किया था. जब पिता की जगह अनुकंपा पर नौकरी करने की बारी आई तो बेटी ने कहा कि मुझे नौकरी दे दो. मां तैयार भी हो गई. लेकिन निरज शर्मा का भाई और आयुषी का मामा भी अपने जीजा जी के साथ लोअर कोर्ट में एलडीसी था उसने बहन को कहा कि तुम भी पढ़ी लिखी हो. तुम्हारी जिंदगी पड़ी है और 16 साल का बेटा मानसिक दिव्यांग है उसकी देख भाल कौन करेगा. बेटी को पढ़ा लिखा कर लायक बना देंगे. मां ने दिव्यांग बेटे के खातिर पति की जगह नौकरी कर ली.

    चचेरे भाई के साथ रहने लगी आयुषी
    इससे नाराज होकर 24 साल की बेटी आयुषी पिता के कल्याण कॉलोनी स्थित पुराने घर में जाकर रहने लगी और अपने ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में एडमिशन ले लिया. दोनों चचेरे भाई बहन साथ रहने लगे. उसी दौरान आयुषी ने कहा कि मुझे अपनी मां को मारना है. अगर तुम मेरी मदद करोगे तो आगरा रोड की पांच करोड़ की पांच बीघा जमीन और भरतपुर के पांच करोड़ की चार बीघा जमीन तुझे दे दूंगी. मुझे मां के मरने के बाद नौकरी मिल जाएगी और जयपुर का दोनों घर मेरे पास हैं. डील तय होने के बाद दोनों ने निरज शर्मा के जेठ और बलराम के पिता मोहन को यह बात बताई.

    मां को घर से बाहर लाने के लिए टोटके
    आयुषी ने प्लान बनाया कि मां को गाड़ी से कुचलकर मार देंगे और हादसे का रूप दे देंगे. इसके बाद निरज शर्मा के जेठ मोहन शर्मा ने भरतपुर में हेमंत शर्मा से संपर्क साधा. एक महीने पहले हेमंत ने थार गाड़ी से निरज को घर के बाहर कुचलने की कोशिश की मगर निरज बच गई. मगर उसे शक हो गया था. उसने यह बात अपने भाई को बताई और घर से निकलना बंद कर दिया. उसके बाद मां को घर से निकालने के लिए आयुषी ने नए नए टोना टोटके के तरीके अपनाना शुरू किया. निंबू – मिर्चा और लाल रंग फेंकना शुरू कर दिया. निरज समझ गई थी खतरा है तो उसने पूरे घर में जाली लगाकर बाहर चार सीसीटीवी कैमरे लगा दिए थे.

    सुपारी किलर को दिए 7 लाख
    आयुषी को मां को मारने की जल्दी थी उसने फिर से अपने ताऊ को कहा प्लान बनाओ. ताउ मोहन शर्मा ने भरतपुर के रूपावास के हेमंत शर्मा से संपर्क किया. हेमंत ने उनको प्लान दिया और उसके बदले 7 लाख रूपए मांगे. फिर हेमंत ने हरियाणा नंबर का स्कॉर्पियो भरतपुर से 35 हजार में किराए पर ली और निरजा को कुचलने के लिए आकाश शर्मा और अरविंद शर्मा को हायर किया. निरज के रैकी के लिए रोहित और मोहित को हायर किया गया.

    मामा से रोते हुए बोली- मां मर गई है
    4 जुलाई को जब निरज अपने बेटे को लेकर फिजियोथैरेपिस्ट के यहां गई थी तो बेटी ने उसे जरूरी काम से घर आने के लिए कहा. निरज जब घर लौट रही थी तो 60 फीट पर रोड पर मोटरसाइकिल पर बैठे मोहित और रोहित ने इंतज़ार कर रहे स्कॉर्पियो में बैठे आकाश को इशारा किया. आकाश ने गाड़ी को सौ से ज्यादा की स्पीड से किनारे चल रही निरजा को टक्कर मारी जिससे वो 100 मीटर उछल कर गिरी और मौत हो गई. मां के मरने के बाद बेटी ने मामा को रोते हुए फोन किया कि मां का एक्सीडेंट हो गया और वो मर गई. ताउ तुरंत घर पहुंचा और शव को लेकर गांव रूपावास चले गए. मगर मामा को भांजी के हाव भाव को देखकर शक हुआ तो पुलिस से केवल इतना ही कहा कि एक्सीडेंट की जांच कर लो.

    पुलिस ने जब सीसीटीवी को खंगालना शुरू किया तो देखा निरज शर्मा तो सड़क पर बिल्कुल हीं किनारे चल रही थी और 60 फीट की चौड़ी सड़क पूरी खाली थी. पुलिस को शक गहराया तो आसपास के दूसरे सीसीटीवी खँगालना शुरू किया तो देख कि कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो काफी पहले से खड़ी थी. दो लड़के दो सड़कों पर खड़े थे.

    …रुके भी नहीं पास में मौजूद लड़के?
    हादसे के बाद दोनों लड़के निरजा के शव को देखे बिना सीधे निकल जाते हैं और आगे जाकर एक मोटरसाइकिल सवार के साथ बैठकर निकल जाते है. पुलिस सीसीटीवी तलाशती आगे बढ़ी तो क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो मिला. जब स्कॉर्पियो के मालिक को पकड़ा तो उसने हेमंत शर्मा को किराये पर देना बताया. फिर हेमंत शर्मा को पकड़ा तो उसने आयुषी के ताउ मोहन शर्मा का नाम बताया. इस बीच चचेरा भाई बलराम भाग गया. पुलिस जब गांव रूपावास पहुंची तो कानून के छात्र आयुषी ने पुलिस को धमकाना शुरू कर दिया. फिर पुलिस ने भरतपुर के सेवर थाने के पुलिसकर्मियों और गांव वालों की मदद से आयुषी को उसके ताई के साथ थाने तक ये कहकर लाए कि बयान लेकर छोड़ देंगे. फिर ताई को घर भेजकर सीधे जयपुर लेकर आए जहाँ आरोपियों के सामने देख आयुषी ने सब क़ुबूल कर लिया.आयुषी को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है . पुलिस को उल्टे सीधे जवाब देती है. आजतक के कैमरे पर हमने उससे बहुत पूछना चाहा लेकिन बेहद शातिर आयुषी ने कुछ नहीं बोला.

  • प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलें और ऐतिहासिक धरोहरें, फैमिली वेकेशन के लिए माउंट आबू की ये जगहें हैं बेहतरीन विकल्प

    प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलें और ऐतिहासिक धरोहरें, फैमिली वेकेशन के लिए माउंट आबू की ये जगहें हैं बेहतरीन विकल्प

    नई दिल्ली । यदि आप परिवार के साथ शांत, प्राकृतिक और यादगार छुट्टियां बिताने की योजना बना रहे हैं तो राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू बेहतरीन विकल्प हो सकता है। अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा यह पर्यटन स्थल अपनी हरियाली, ठंडी जलवायु, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां हर उम्र के पर्यटकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है, जिससे पारिवारिक यात्रा सुखद और यादगार बन जाती है।

    माउंट आबू की सबसे लोकप्रिय जगहों में नक्की झील का नाम सबसे पहले आता है। चारों ओर पहाड़ियों से घिरी यह झील शांत वातावरण और मनमोहक दृश्यों के लिए जानी जाती है। यहां बोटिंग का आनंद लेने के साथ-साथ झील के किनारे शाम की सैर भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। आसपास मौजूद स्थानीय बाजार और पारंपरिक व्यंजनों की दुकानें भी यात्रा का अनुभव और बेहतर बना देती हैं।

    इतिहास और स्थापत्य कला में रुचि रखने वालों के लिए दिलवाड़ा जैन मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र है। संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी और उत्कृष्ट वास्तुकला इस मंदिर को देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में शामिल करती है। यहां की कलात्मक सुंदरता पर्यटकों को लंबे समय तक प्रभावित करती है।

    प्रकृति प्रेमियों के लिए गुरु शिखर एक ऐसा स्थान है, जहां से अरावली पर्वतमाला का विस्तृत और मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। यह अरावली की सबसे ऊंची चोटी है और यहां पहुंचकर बादलों के बीच फैले प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह स्थान बेहद लोकप्रिय माना जाता है।

    माउंट आबू का सनसेट पॉइंट भी पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल है। यहां शाम के समय डूबते सूरज का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। परिवार के साथ बैठकर सूर्यास्त का आनंद लेना और यादगार तस्वीरें लेना इस यात्रा को और खास बना देता है। इसी तरह टॉड रॉक अपनी अनोखी प्राकृतिक आकृति के कारण पर्यटकों के बीच विशेष पहचान रखता है। यहां तक पहुंचने के लिए हल्की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन ऊपर से दिखाई देने वाला नक्की झील का दृश्य पूरे सफर की थकान दूर कर देता है।

    यदि आप भीड़भाड़ से दूर कुछ समय शांति के बीच बिताना चाहते हैं तो पीस पार्क एक आदर्श स्थान है। हरियाली से घिरा यह पार्क ध्यान, विश्राम और परिवार के साथ सुकून भरे पल बिताने के लिए उपयुक्त माना जाता है। साफ-सुथरा वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य यहां आने वाले पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करता है।

    माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य भी इस पर्यटन स्थल का प्रमुख आकर्षण है। यहां विभिन्न प्रकार के वन्यजीव, पक्षी और दुर्लभ वनस्पतियां देखने को मिलती हैं। प्रकृति और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोगों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी यह स्थान ज्ञान और रोमांच से भरपूर अनुभव देता है।

    माउंट आबू की यात्रा प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है। यदि यात्रा की सही योजना बनाकर इन प्रमुख स्थानों को अपने कार्यक्रम में शामिल किया जाए तो परिवार के साथ बिताया गया हर पल यादगार बन सकता है और छुट्टियों का आनंद कई गुना बढ़ जाता है।

  • बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च

    बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम शुरू होते ही राजस्थान का उदयपुर अपनी अलग ही खूबसूरती में नजर आता है। झीलों से घिरा यह ऐतिहासिक शहर मानसून के दौरान हरियाली से ढक जाता है और अरावली की पहाड़ियां बादलों की चादर ओढ़ लेती हैं। पानी से लबालब भरी झीलें और शाही महलों का नजारा इस शहर को देश के सबसे खूबसूरत मानसून पर्यटन स्थलों में शामिल कर देता है। यदि आप एक सप्ताह की यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं तो उदयपुर बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

    यात्रा के पहले दिन सिटी पैलेस और लेक पिछोला की सैर करें। शाम को बोट राइड का आनंद लें और झील किनारे स्थानीय भोजन का स्वाद लें।

    दूसरे दिन फतेह सागर झील, सहेलियों की बाड़ी और स्थानीय बाजारों की सैर करें। मानसून के दौरान यहां का वातावरण बेहद सुहावना रहता है।

    तीसरे दिन सज्जनगढ़ पैलेस जाएं जिसे मानसून पैलेस भी कहा जाता है। यहां से पूरे शहर और झीलों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। बारिश के मौसम में यह स्थान फोटोग्राफी के लिए सबसे पसंदीदा माना जाता है।

    चौथे दिन एकलिंगजी मंदिर और नाथद्वारा मंदिर का धार्मिक भ्रमण किया जा सकता है। दोनों स्थल उदयपुर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

    पांचवें दिन बागोर की हवेली और स्थानीय संग्रहालय देखें। शाम को पारंपरिक राजस्थानी लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम यात्रा को और यादगार बना देंगे।

    छठे दिन आसपास की अरावली पहाड़ियों और प्राकृतिक स्थलों की सैर करें। बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और शांत वातावरण प्रकृति प्रेमियों को खूब आकर्षित करता है।

    सातवें दिन स्थानीय हस्तशिल्प बाजारों से राजस्थानी कला वस्तुएं कपड़े और स्मृति चिह्न खरीदकर अपनी यात्रा का समापन करें।

    अनुमानित खर्च
    आने जाने का यात्रा खर्च लगभग 4000 से 10000 रुपये (शहर और परिवहन के अनुसार)
    होटल का खर्च प्रति रात लगभग 2000 से 5000 रुपये
    भोजन पर प्रतिदिन लगभग 800 से 1500 रुपये
    स्थानीय घूमने और प्रवेश शुल्क लगभग 3000 से 5000 रुपये
    कुल सात दिन का औसत बजट प्रति व्यक्ति लगभग 25000 से 45000 रुपये हो सकता है।

    मानसून के दौरान यात्रा करते समय छाता या रेनकोट साथ रखें। फिसलन वाले स्थानों पर सावधानी बरतें और मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। बारिश के मौसम में उदयपुर की झीलें, महल और हरियाली मिलकर ऐसा अनुभव देती हैं जो लंबे समय तक याद रहता है।

  • राजस्थान को ₹1.05 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, पीएम मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज-2 का किया शिलान्यास

    राजस्थान को ₹1.05 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, पीएम मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज-2 का किया शिलान्यास

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान को ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की सौगात देते हुए राज्य के बुनियादी ढांचे को नई गति देने का संदेश दिया। बालोतरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण किया। इन परियोजनाओं में ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर, जयपुर मेट्रो फेज-2, सौर ऊर्जा संयंत्र और सड़क अवसंरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं।

    प्रधानमंत्री ने बालोतरा के पचपदरा में विकसित देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर का उद्घाटन करते हुए इसे भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अत्याधुनिक तकनीक से विकसित यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परियोजना के माध्यम से रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन की सुविधाओं को एक ही परिसर में विकसित किया गया है।

    उन्होंने कहा कि इस प्रकार की औद्योगिक परियोजनाएं न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देंगी बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार और सहायक उद्योगों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेंगी। सरकार का लक्ष्य आधुनिक औद्योगिक ढांचा तैयार करना है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण का भी शिलान्यास किया। इस परियोजना के तहत लगभग 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद मौजूदा मेट्रो नेटवर्क के साथ जयपुर मेट्रो की कुल लंबाई 50 किलोमीटर से अधिक हो जाएगी। नई लाइन शहर के प्रमुख औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि मेट्रो विस्तार से शहर में यातायात का दबाव कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे दैनिक यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और निवेश गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री ने राजस्थान में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे विस्तार का भी उल्लेख किया और कहा कि राज्य हरित ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। इस अवसर पर बीकानेर में स्थापित बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों को राष्ट्र को समर्पित किया गया। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूत करेंगी।

    इसके अलावा जोधपुर क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का भी उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों में चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधारभूत संरचना, ऊर्जा, परिवहन और रोजगार से जुड़ी ये परियोजनाएं राजस्थान के समग्र विकास को नई दिशा देंगी तथा राज्य को औद्योगिक, आर्थिक और हरित विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।