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  • खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    नई दिल्ली ।देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई के आंकड़े खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती दिखाते हैं। वर्ष 2025-26 में देशभर में 2,23,808 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें 40,023 नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बावजूद दोषियों को सजा मिलने वाले मामलों की संख्या 1,918 रही। यानी जांच में खामियां सामने आने के मुकाबले सजा तक पहुंचने वाले मामले काफी कम हैं।

    पिछले पांच वर्षों के आंकड़े भी इसी स्थिति की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच देशभर में 8.86 लाख खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 1,85,780 नमूने फेल पाए गए। इन मामलों में 1,39,507 का निपटारा जुर्माना लगाकर किया गया, जबकि केवल 6,203 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के अलग-अलग परिणाम सामने आए हैं।

    सजा की दर में पिछले वर्षों के दौरान कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अब भी पांच प्रतिशत से कम है। वर्ष 2021-22 में 32,935 नमूने फेल हुए और 671 मामलों में सजा हुई। अगले वर्ष 44,626 नमूनों के फेल होने पर 1,188 मामलों में दोषियों को सजा मिली। वर्ष 2023-24 में सजा की दर 3.4 प्रतिशत और 2024-25 में 3.7 प्रतिशत रही। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई।

    राजस्थान के आंकड़े विशेष रूप से ध्यान खींचते हैं। वर्ष 2025-26 में राज्य में 17,325 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिनमें 4,594 नमूने फेल पाए गए। यह कुल जांचे गए नमूनों का 26.5 प्रतिशत है। फेल नमूनों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, राज्य में केवल 31 मामलों में दोषियों को सजा मिली। फेल नमूनों की संख्या के मुकाबले यह दर एक प्रतिशत से भी कम है।

    मध्य प्रदेश में भी स्थिति में सुधार की जरूरत दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में फेल हुए खाद्य नमूनों के करीब चार प्रतिशत मामलों में ही सजा हुई। यह राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत से कम है। ऐसे में राज्य में खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच, कानूनी प्रक्रिया और दोषियों को सजा दिलाने की व्यवस्था पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

    छत्तीसगढ़ में इसी अवधि के दौरान 2,065 खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 214 नमूने फेल पाए गए, जो कुल नमूनों का लगभग 10.4 प्रतिशत है। हालांकि, नमूनों के फेल होने की दर अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी आवश्यक बनी रहती है।

    दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में खाद्य नमूनों के फेल होने का आंकड़ा काफी अधिक रहा। वर्ष 2025-26 में वहां 39,519 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 20,427 फेल मिले। यह कुल नमूनों का 51.7 प्रतिशत है। इसके बावजूद राज्य में 342 मामलों में ही सजा हुई। हरियाणा में 31 प्रतिशत और झारखंड में 27.8 प्रतिशत नमूने फेल हुए। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 17.4 प्रतिशत और पंजाब में 13.2 प्रतिशत रहा।

    कुछ राज्यों में दोषियों को सजा मिलने की दर बेहतर दर्ज की गई। तमिलनाडु में 3,984 फेल नमूनों के मुकाबले 857 मामलों में सजा हुई, जबकि केरल में 1,863 फेल नमूनों के मुकाबले 330 मामलों में दोषियों को सजा मिली। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, झारखंड, गोवा, असम, बिहार और पुडुचेरी में दिए गए आंकड़ों के अनुसार किसी मामले में सजा दर्ज नहीं हुई।

    दूध और डेयरी उत्पादों की जांच भी चिंता का विषय है। वर्ष 2025-26 में इनके 39,351 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 14,668 फेल मिले। यानी लगभग 37.3 प्रतिशत नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। दूध रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तु है, इसलिए इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

    खाद्य सुरक्षा कानून, 2006 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और जेल का प्रावधान है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ से गंभीर नुकसान होने पर छह साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि असुरक्षित भोजन से किसी की मौत होती है, तो उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

    हालांकि, हर फेल नमूना मिलावट का मामला नहीं होता। इसमें असुरक्षित खाद्य पदार्थ, निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पाद और गलत लेबल वाले सामान भी शामिल हो सकते हैं। सरकार के मुताबिक, करीब 98 प्रतिशत खाद्य कारोबारी राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

    खाद्य पदार्थों की निगरानी के लिए वर्ष 2025-26 में देशभर में 5,20,566 निरीक्षण किए गए। वर्ष 2024-25 में 4,01,391 और 2023-24 में 3,57,072 निरीक्षण हुए थे। पिछले पांच वर्षों में 4,461 लाइसेंस निलंबित और 11,493 लाइसेंस रद्द किए गए। इन आंकड़ों के बीच सबसे अहम चुनौती यह है कि जांच में खामी मिलने के बाद मामलों का प्रभावी निपटारा हो और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई हो।

  • सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की पेरोल बढ़ाने की याचिका खारिज की, शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की पेरोल बढ़ाने की याचिका खारिज की, शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर का आदेश

    नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को मेडिकल आधार पर पेरोल की अवधि बढ़ाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। आसाराम राजस्थान में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अदालत के आदेश के बाद उन्हें निर्धारित समय तक जेल प्रशासन के सामने पेश होना होगा।

    आसाराम को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से 20 दिनों की पेरोल दी गई थी, जिसकी अवधि 27 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। उनकी ओर से अदालत में पेरोल आगे बढ़ाने की मांग की गई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वह मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित एक अस्पताल में भर्ती हैं। वकील ने बेहतर इलाज की आवश्यकता का हवाला देते हुए पेरोल की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पेरोल की अवधि समाप्त होने के मद्देनजर आसाराम को उसी दिन शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया। अदालत ने इस मामले में राजस्थान सरकार को भी निर्देश दिए कि जेल में आसाराम के स्वास्थ्य का उचित ध्यान रखा जाए। साथ ही, उनकी जरूरत के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है।

    अदालत के निर्देश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पेरोल बढ़ाने से इनकार करने के बावजूद जेल में चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। अब आसाराम की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक उपचार की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि, मेडिकल आधार पर राहत की मांग को अदालत ने मंजूरी नहीं दी है।

    आसाराम को वर्ष 2018 में राजस्थान के जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जोधपुर जेल में सजा काट रहे हैं। मामले में दोषसिद्धि के बाद उनकी ओर से समय-समय पर स्वास्थ्य और इलाज से जुड़े आधारों पर राहत की मांग की जाती रही है।

    मौजूदा मामले में भी बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य की स्थिति को आधार बनाकर पेरोल बढ़ाने की अपील की थी। दलील दी गई कि आसाराम की तबीयत ठीक नहीं है और बेहतर इलाज के लिए उन्हें अतिरिक्त समय की जरूरत है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पेरोल की अवधि आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए निर्धारित समय पर जेल लौटने का निर्देश दिया।

    उज्जैन के अस्पताल में भर्ती होने की बात सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने रखी थी। इसके बावजूद अदालत ने पेरोल बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की। साथ ही राजस्थान सरकार को निर्देश देकर यह स्पष्ट किया कि जेल में रहने के दौरान उनकी चिकित्सा जरूरतों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद आसाराम के लिए 27 अक्टूबर को शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करना जरूरी है। वहीं, जेल में उनके स्वास्थ्य की निगरानी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।

  • शिवपुरी में नाबालिग बेटी को छह लाख रुपये में बेचने का आरोप, विधवा ने वीडियो जारी कर मांगा न्याय

    शिवपुरी में नाबालिग बेटी को छह लाख रुपये में बेचने का आरोप, विधवा ने वीडियो जारी कर मांगा न्याय

    शिवपुरी जिले: के सिरसौद थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की की कथित मानव तस्करी का मामला सामने आया है। अमरखौआ गांव की रहने वाली 40 वर्षीय विधवा महिला ने एक वायरल वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया है कि पति की मौत के बाद उसके साथ शारीरिक शोषण किया गया और उसकी 14 वर्षीय बेटी को छह लाख रुपये में बेच दिया गया। महिला ने मामले में कार्रवाई कर न्याय दिलाने की मांग की है।

    महिला के अनुसार, पति के निधन के बाद वह अपनी बेटी के साथ मजदूरी करने राजस्थान के सिरसा गांव गई थी। वहां उसकी मुलाकात जसराज गुर्जर नामक व्यक्ति से हुई। महिला का आरोप है कि जसराज ने उससे शादी करने का भरोसा दिया और उसके साथ रहने लगा। इसके बाद उसने कथित तौर पर महिला का शारीरिक शोषण किया। महिला ने वीडियो में यह भी आरोप लगाया कि जसराज की नजर उसकी नाबालिग बेटी पर थी।

    पीड़िता का दावा है कि जसराज गुर्जर ने उसकी बेटी को राजस्थान में रहने वाले 40 से 45 वर्ष के एक व्यक्ति को छह लाख रुपये में बेच दिया। जब उसे बेटी के लापता होने का पता चला, तो उसने उसकी तलाश शुरू की। महिला के मुताबिक, काफी प्रयासों के बाद वह अपनी बेटी को खोजने में सफल रही और उसे वापस अपने गांव अमरखौआ ले आई।

    महिला ने आरोप लगाया कि बेटी के गांव लौटने के बाद भी परेशानी खत्म नहीं हुई। उसके अनुसार, जिस व्यक्ति को कथित तौर पर लड़की बेचा गया था, वह अमरखौआ गांव पहुंच गया। महिला का कहना है कि वह व्यक्ति अब लड़की को अपने साथ भेजने का दबाव बना रहा है और छह लाख रुपये देकर उसे खरीदने का दावा कर रहा है।

    इस पूरे मामले को लेकर महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में उसने जसराज गुर्जर और उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिस पर उसकी बेटी को खरीदने का आरोप लगाया गया है। महिला के आरोपों ने नाबालिग की सुरक्षा और कथित मानव तस्करी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी महिला की ओर से लगाए गए आरोपों और वायरल वीडियो पर आधारित है। मामले में पुलिस की कार्रवाई, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरोपों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। नाबालिग की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कथित तौर पर उसे खरीदने-बेचने से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।

    संक्षिप्त सार:
    शिवपुरी के सिरसौद थाना क्षेत्र की एक विधवा ने आरोप लगाया है कि उसके साथ शारीरिक शोषण किया गया और उसकी नाबालिग बेटी को छह लाख रुपये में बेच दिया गया।

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    Shivpuri, Trafficking, Minor, Exploitation, Rajasthan

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के सिरसौद थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की की कथित मानव तस्करी का मामला सामने आया है। अमरखौआ गांव की रहने वाली 40 वर्षीय विधवा महिला ने एक वायरल वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया है कि पति की मौत के बाद उसके साथ शारीरिक शोषण किया गया और उसकी 14 वर्षीय बेटी को छह लाख रुपये में बेच दिया गया। महिला ने मामले में कार्रवाई कर न्याय दिलाने की मांग की है।

    महिला के अनुसार, पति के निधन के बाद वह अपनी बेटी के साथ मजदूरी करने राजस्थान के सिरसा गांव गई थी। वहां उसकी मुलाकात जसराज गुर्जर नामक व्यक्ति से हुई। महिला का आरोप है कि जसराज ने उससे शादी करने का भरोसा दिया और उसके साथ रहने लगा। इसके बाद उसने कथित तौर पर महिला का शारीरिक शोषण किया। महिला ने वीडियो में यह भी आरोप लगाया कि जसराज की नजर उसकी नाबालिग बेटी पर थी।

    पीड़िता का दावा है कि जसराज गुर्जर ने उसकी बेटी को राजस्थान में रहने वाले 40 से 45 वर्ष के एक व्यक्ति को छह लाख रुपये में बेच दिया। जब उसे बेटी के लापता होने का पता चला, तो उसने उसकी तलाश शुरू की। महिला के मुताबिक, काफी प्रयासों के बाद वह अपनी बेटी को खोजने में सफल रही और उसे वापस अपने गांव अमरखौआ ले आई।

    महिला ने आरोप लगाया कि बेटी के गांव लौटने के बाद भी परेशानी खत्म नहीं हुई। उसके अनुसार, जिस व्यक्ति को कथित तौर पर लड़की बेचा गया था, वह अमरखौआ गांव पहुंच गया। महिला का कहना है कि वह व्यक्ति अब लड़की को अपने साथ भेजने का दबाव बना रहा है और छह लाख रुपये देकर उसे खरीदने का दावा कर रहा है।

    इस पूरे मामले को लेकर महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में उसने जसराज गुर्जर और उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिस पर उसकी बेटी को खरीदने का आरोप लगाया गया है। महिला के आरोपों ने नाबालिग की सुरक्षा और कथित मानव तस्करी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी महिला की ओर से लगाए गए आरोपों और वायरल वीडियो पर आधारित है। मामले में पुलिस की कार्रवाई, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरोपों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। नाबालिग की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कथित तौर पर उसे खरीदने-बेचने से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।

  • राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, भोपाल-बैतूल के 8 यात्रियों की मौत और 17 घायल

    राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, भोपाल-बैतूल के 8 यात्रियों की मौत और 17 घायल

    नई दिल्ली ।राजस्थान के कोटा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर शनिवार सुबह हुए सड़क हादसे में मध्य प्रदेश के भोपाल और बैतूल के आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 यात्री घायल हो गए। यात्रियों से भरा टैंपो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर पुलिया से करीब 15 फीट नीचे जा गिरा। वाहन में सवार लोग भोपाल से राजस्थान के खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बचाव दल को यात्रियों को बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

    यह दुर्घटना कोटा शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर सिमलिया थाना क्षेत्र में कराड़िया टोल के पास सुबह लगभग छह बजे हुई। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे। सुबह के समय अंधेरा होने के कारण राहत और बचाव कार्य में कुछ देरी हुई। दुर्घटनाग्रस्त वाहन में कई यात्री फंस गए थे, जिन्हें बाहर निकालने के लिए बचाव दल को काफी प्रयास करना पड़ा।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, टैंपो ट्रैवलर के पुलिया से नीचे गिरने के बाद कई यात्री वाहन के भीतर ही फंस गए थे। कुछ मृतकों के शव सीटों के बीच फंसे हुए थे। उन्हें बाहर निकालने में कठिनाई हुई। वहीं, घायल यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए वाहन की खिड़कियां तोड़नी पड़ीं। हादसे में घायल 17 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्घटना में जान गंवाने वालों में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं।

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों में बैतूल जिले के मुलताई, साईंखेड़ा और पाटन क्षेत्र के निवासी शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल के राजीव नगर और शहर के अन्य हिस्सों के लोगों की भी इस हादसे में मौत हुई है। एक ही यात्रा पर निकले लोगों के साथ हुए हादसे से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    दुर्घटना में जान गंवाने वालों की सूची में 25 वर्षीय वैष्णवी गावंडे, 22 वर्षीय त्रिशा गोडकी और 27 वर्षीय सचिन गिरी के नाम शामिल हैं। इनके अलावा 55 वर्षीय कृष्णाराव गोडके और 50 वर्षीय अनिता की भी मौत हुई है। मृतकों में अरुणा, 26 वर्षीय ओम सूर्यवंशी और राजुराम उर्फ राजकुमार भी शामिल हैं, जिनकी उम्र करीब 50 वर्ष बताई गई है।

    अरुणा मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र की निवासी थीं। वैष्णवी गावंडे बैतूल जिले के साईंखेड़ा थाना क्षेत्र के मीरापुर की रहने वाली थीं। त्रिशा गोडकी और कृष्णाराव गोडके का संबंध बैतूल जिले के पाटन क्षेत्र से था। अनिता भोपाल के राजीव नगर स्थित सेक्टर-ए की निवासी थीं, जबकि सचिन गिरी भोपाल के रहने वाले थे। ओम सूर्यवंशी बैतूल जिले के मुलताई थाना क्षेत्र के सरा गांव के निवासी थे। राजुराम उर्फ राजकुमार के पते की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।

    हादसे में मृतकों की पहचान और उनके पते से संबंधित जानकारी पुलिस की ओर से साझा की गई है। मृतकों में अलग-अलग उम्र के लोगों के शामिल होने से इस दुर्घटना का असर कई परिवारों पर पड़ा है। भोपाल और बैतूल में रहने वाले परिजनों के लिए यह खबर गहरे दुख का कारण बनी है।

    फिलहाल दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि टैंपो ट्रैवलर किस वजह से अनियंत्रित हुआ और पुलिया से नीचे गिर गया। पुलिस हादसे से संबंधित जानकारी जुटा रही है। दुर्घटना में घायल यात्रियों का अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। हादसे के बाद राहत और बचाव दल ने वाहन में फंसे लोगों को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया।

  • राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा

    राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा


    नई दिल्ली । 
    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश भाजपा कार्यालय के नए सभागार में इस दस्तावेज को जारी करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने का वादा किया। संकल्प पत्र में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाओं को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को अपनी सामान्य जरूरतों के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े।

    संकल्प पत्र जारी करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों जैसी सुविधाएं विकसित करने के पक्ष में है। उनका कहना था कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इससे लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों तक पहुंचने की मजबूरी कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार करने को पार्टी ने अपने विकास संबंधी वादों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

    भजनलाल शर्मा ने गांवों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शहरों का विस्तार हुआ है और कई जगह उनका दायरा 40 से 50 किलोमीटर तक बढ़ गया है। ऐसे में शहरों के भीतर भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि गांवों में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो ग्रामीणों को 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करके शहरों तक आने की जरूरत कम होगी। इससे वे अपने गांव में रहते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

    संकल्प पत्र में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों क्षेत्रों को ग्रामीण जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े अस्पतालों की उपलब्धता से जुड़े दूरी के मानकों पर काम करने की बात कही गई है। हालांकि, स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की संख्या, उनके बीच निर्धारित दूरी तथा स्थापना की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ग्रामीण युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार भी भाजपा के प्रमुख वादों में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर खेल मैदान विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों में युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस घोषणा के जरिए पार्टी ने पंचायत स्तर पर खेल के अवसर बढ़ाने की बात रखी है।

    संकल्प पत्र जारी होने से पहले कार्यक्रम के मंच पर एक अप्रत्याशित घटना भी हुई। संगठन महामंत्री अजेय कुमार का स्वागत करने के लिए पहुंचे सोशल मीडिया संयोजक हीरेन कौशिक अचानक फिसलकर नीचे गिर गए। इस घटना से मंच पर मौजूद लोग कुछ समय के लिए चौंक गए। इसके बाद प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया और अन्य कार्यकर्ताओं ने उन्हें संभाला। घटना के बाद हीरेन कौशिक ने संगठन महामंत्री का स्वागत किया।

    कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार, प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, सह प्रभारी कुलदीप चहल और कविता पाटीदार सहित पार्टी के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। पंचायत चुनाव से पहले जारी संकल्प पत्र में ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं को केंद्र में रखा गया है। इन वादों के साथ गांवों में बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने और शहरों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य सामने रखा गया है। इन घोषणाओं को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा और समयसीमा की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।

  • सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही। राजस्थान के सिरोही में नगर परिषद सभापति चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर विवाद जारी है। पार्टी के नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से तीन पार्षदों और एक पार्षद पति को हटा दिया गया है। इनमें गीता पुरोहित, प्रवीण राठौड़, गौरव प्रजापत और धनपत सिंह शामिल हैं। इस घटनाक्रम को सभापति चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को अपेक्षा से कम वोट मिलने के बाद उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने अब तक किसी पार्षद के क्रॉस वोटिंग करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    सिरोही नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। सितंबर 2026 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा के खाते में 10 सीटें आई थीं। दो वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए चुनाव हुआ। कांग्रेस ने रितु जैन को और भाजपा ने पूजा माली को उम्मीदवार बनाया था। मतदान में रितु जैन को 30 वोट मिले, जबकि पूजा माली को केवल 5 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कांग्रेस ने 25 वोटों के अंतर से सभापति पद पर जीत हासिल की। बाद में कांग्रेस के ईश्वर सिंह उपसभापति पद पर निर्विरोध चुने गए और नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बन गया।

    भाजपा के 10 पार्षदों के मुकाबले पार्टी उम्मीदवार को केवल पांच वोट मिलने के बाद क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जाने लगी। नतीजों के आधार पर यह सवाल उठा कि क्या भाजपा के कुछ पार्षदों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, सभापति चुनाव में मतदान गोपनीय होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि किस पार्षद ने किस उम्मीदवार को वोट दिया। पार्टी के भीतर संदेह और असंतोष के बीच बुधवार देर रात चार लोगों को नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया। फिलहाल उनके खिलाफ पार्टी से निष्कासन या किसी पद से हटाने का आदेश सामने नहीं आया है।

    इस विवाद में गौरव प्रजापत का नाम भी चर्चा में है। सभापति चुनाव के बाद भाजपा के पांच पार्षद सारणेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने हाथ में जल लेकर पार्टी के प्रति वफादार रहने और सभापति पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन करने की कसम खाई थी। इन पार्षदों में गौरव प्रजापत का नाम भी बताया गया था। अब उन्हें भी व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद मंदिर में ली गई कसम का मामला फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, गौरव प्रजापत के क्रॉस वोटिंग करने की पुष्टि नहीं हुई है।

    व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद पार्षद प्रवीण राठौड़ ने संगठन के सभी पदों और जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से ईमानदारी के साथ पार्टी के लिए काम कर रहे थे और संगठन की ओर से दी गई जिम्मेदारियां निभाते रहे। नगर परिषद चुनाव के बाद पार्टी में हुए घटनाक्रम से उन्हें दुख पहुंचा है। उनके अनुसार, अब पहले की तरह सम्मान और भरोसे के साथ काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा व्हाट्सऐप के माध्यम से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भेजा है। राठौड़ ने संगठन के पद छोड़े हैं, लेकिन पार्षद पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

    सिरोही भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी ने कहा कि उन्हें पार्षदों को व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर कुछ पार्षदों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं और संगठन इन शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी पार्षद का इस्तीफा नहीं मिला है। इस बीच जिले के अन्य निकायों में भी क्रॉस वोटिंग की चर्चा है। पिंडवाड़ा में उपसभापति और शिवगंज में सभापति चुनाव के दौरान दूसरी पार्टी को एक-एक वोट मिलने की बात सामने आई है। आबूरोड में सभापति चुनाव में भाजपा को 27 और कांग्रेस को 13 वोट मिले थे, जबकि उपसभापति चुनाव में भाजपा के वोट घटकर 22 और कांग्रेस के बढ़कर 18 हो गए। हालांकि, इन मामलों में भी संबंधित मतदाताओं की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। सिरोही में सभापति चुनाव से पहले रितु जैन के नामांकन पर भाजपा ने आपत्ति जताई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों उम्मीदवार मैदान में रहे और रितु जैन चुनाव जीत गईं।

  • राजस्थान निकाय चुनावों में कांग्रेस की करारी हार…. 7 में से एक पर निर्दलीय और 6 पर BJP का कब्जा

    राजस्थान निकाय चुनावों में कांग्रेस की करारी हार…. 7 में से एक पर निर्दलीय और 6 पर BJP का कब्जा


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में हाल ही में हुए चुनावों (Elections) में बीजेपी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 में से 6 निकायों में अपना कब्जा जमा लिया है. वहीं, एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार (Independent candidate) ने बाजी मारी है. इस तरह इन चुनावों में कांग्रेस (Congress) को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

    निकायों से सामने आए चुनावी नतीजों के मुताबिक, उदयपुर में बीजेपी के दिनेश भट्ट को डिप्टी मेयर चुना गया है. इसके अलावा अजमेर में बीजेपी के हेमंत सांखला, अलवर में बीजेपी के अजय पुनिया और बीकानेर में बीजेपी के पंकज गहलोत को जीत मिली है।

    भीलवाड़ा में बीजेपी के राधेश्याम सोमानी, भरतपुर में बीजेपी की अंबिका सैनी और पाली में निर्दलीय प्रत्याशी महबूब टी को डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष पद की कुर्सी मिली है।

    अजमेर और पाली में मुकाबला इतना कड़ा था कि हार-जीत का फैसला पर्ची यानी लॉटरी सिस्टम से करना पड़ा. अजमेर में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों को बराबर यानी 40-40 वोट मिले थे. वहीं इसके उलट, भीलवाड़ा में बीजेपी के राधेश्याम सोमानी ने निर्विरोध जीत हासिल की।


    बीकानेर में कांग्रेस के बहुमत को लगा झटका

    चुनावों के बीच सबसे बड़ा उलटफेर बीकानेर नगर निगम में देखने को मिला. यहां कांग्रेस पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत था, इसके बावजूद उसे हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस पार्षदों की ओर से की गई क्रॉस वोटिंग के कारण बीजेपी के पंकज गहलोत डिप्टी मेयर बने. खास बात ये है कि इसके ठीक एक दिन पहले ही चुनाव में कांग्रेस ने बीकानेर में अपना मेयर बनाया था, लेकिन उपमहापौर चुनाव में बाजी पलट गई।

    इसके अलावा, बारां नगर परिषद के उपसभापति चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ी जीत मिली. बारां में ‘आप’ के तेजस सुमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 50 वोटों में से 31 वोट हासिल किए और कांग्रेस उम्मीदवार नवीन को 19 वोटों से हरा दिया. जोधपुर की मथानिया नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के जितेंद्र देवड़ा ने 18 वोट पाकर जीत दर्ज की। इस दौरान कांग्रेस नेत्री दिव्या मदेरणा भी खासी चर्चा में रहीं, जो सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सिर पर हेलमेट पहनकर मतदान केंद्र पहुंची थीं।


    जीत की खुशी में दंडवत होकर मंदिर पहुंचे महेंद्र समरिया

    राजस्थान के इन चुनावों में हंगामे और रोमांच की कोई कमी नहीं थी. कोटा की रामगंज मंडी नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद पर बीजेपी के महेंद्र समरिया निर्विरोध चुने गए, जिसके बाद वो अपनी जीत की खुशी में दंडवत करते हुए करीब 500 मीटर दूर गोवर्धन नाथ मंदिर पहुंच गए।

    वहीं, सवाई माधोपुर नगर परिषद में उपसभापति पद के नामांकन के दौरान बीजेपी चुनाव प्रभारी मदन प्रजापत और पुलिस के बीच तीखी नोकझोक और धक्का-मुक्की देखने को मिली. सीकर में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई, जहां पूर्व सभापति और कांग्रेस पार्षद ने बीजेपी प्रत्याशी रेखा विचारणीय के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया।

    बीकानेर में वोटिंग के दौरान विधायक जेठालाल विकास की गाड़ी रोके जाने पर हल्का विवाद हुआ, जिसे बाद में महापौर प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह ने बीच-बचाव कर शांत कराया. उदयपुर की फतेह नगर पालिका में बीजेपी के बागी पार्षद राजेश चपलोद को अध्यक्ष चुनाव के दौरान एससी-एसटी एक्ट के मामले में पुलिस कस्टडी में वोट डालने लाया गया।


    बीजेपी का जलवा

    भरतपुर संभाग के 32 निकायों में से 22 स्थानों पर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार निर्वाचित हुए, जबकि कांग्रेस को 7 और निर्दलीयों को 3 सीटों पर संतोष करना पड़ा. भरतपुर नगर निगम में महापौर अनुराधा सिंह की जीत के बाद उपमहापौर पद पर अंबिका सैनी ने जीत दर्ज की. डीग जिले के सभी छह निकायों में पूरी तरह बीजेपी का दबदबा देखने को मिला, जहां डीग नगर परिषद में तो बीजेपी प्रत्याशी को शून्य वोट मिलने की भी चर्चा रही।

    दूसरी ओर, करौली जिले के 6 निकायों में समीकरण थोड़े अलग रहे, जहां बीजेपी को 1, कांग्रेस को 2 और निर्दलीयों को 3 पदों पर सफलता मिली. धौलपुर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला बराबरी का रहा, जबकि सवाई माधोपुर के 6 निकायों में उपाध्यक्ष पद पर बीजेपी ने 4 और कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की।

  • तेजा दशमी पर वीर तेजाजी की गाथा याद, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पूजा-अर्चना से लेकर भजन-कीर्तन तक हुए आयोजन

    तेजा दशमी पर वीर तेजाजी की गाथा याद, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पूजा-अर्चना से लेकर भजन-कीर्तन तक हुए आयोजन

    नई दिल्ली । भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला तेजा दशमी पर्व राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई क्षेत्रों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की स्मृति से जुड़ा है और ग्रामीण लोकसंस्कृति में इसका विशेष महत्व माना जाता है। तेजा दशमी के अवसर पर लोग वीर तेजाजी के जीवन, उनके साहस, त्याग और वचन निभाने की परंपरा को याद करते हैं।

    लोक परंपराओं में वीर तेजाजी को सत्य, साहस और वचनबद्धता के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है। उनकी गाथा में दिए गए वचन को हर परिस्थिति में निभाने की भावना को विशेष स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि तेजा दशमी केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा अवसर नहीं, बल्कि लोक जीवन में नैतिक मूल्यों और संकल्प की परंपरा को याद करने का दिन भी माना जाता है।

    राजस्थान के साथ मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचलों में भी तेजा दशमी को लेकर विशेष उत्साह दिखाई देता है। इस अवसर पर तेजाजी से जुड़े मंदिरों और थानों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और जागरण के आयोजन होते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में मेले भी लगाए जाते हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार और श्रद्धालु शामिल होकर लोकदेवता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

    तेजाजी की लोकगाथा में गौ-रक्षा का प्रसंग भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लोकमान्यता में उन्हें गौ-रक्षा के लिए साहस और त्याग का परिचय देने वाले लोकदेवता के रूप में याद किया जाता है। इसी वजह से ग्रामीण समाज में तेजाजी की पूजा और उनसे जुड़ी परंपराओं का भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व लंबे समय से बना हुआ है।

    तेजा दशमी के आयोजन स्थानीय लोक संस्कृति को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम बनते हैं। पूजा-पाठ के साथ होने वाले भजन, कीर्तन, जागरण और मेलों में पारंपरिक आस्था और सामुदायिक सहभागिता दिखाई देती है। पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को भी वीर तेजाजी की लोकगाथा और उनसे जुड़ी मान्यताओं से परिचित कराने का अवसर मिलता है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने वीर तेजाजी महाराज के प्रति श्रद्धा और आस्था से जुड़े इस पर्व को सुख, शांति और खुशहाली से जोड़ते हुए सभी परिवारों के लिए मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने कामना की कि लोकदेवता के प्रति लोगों की श्रद्धा के इस पर्व से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की वृद्धि हो।

    तेजा दशमी के मौके पर ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता का वातावरण भी देखने को मिलता है। अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम लोकपरंपराओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। वीर तेजाजी की स्मृति से जुड़ा यह पर्व साहस, सत्य, त्याग और अपने वचन के प्रति प्रतिबद्ध रहने की भावना को रेखांकित करता है।

    राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित जिन क्षेत्रों में तेजाजी की लोकआस्था गहरी है, वहां तेजा दशमी का दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और सामुदायिक आयोजनों के बीच लोग लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और परिवार तथा समाज के सुख-शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।

  • राजस्थान में कड़ी सुरक्षा के बीच आज हो रहा निकाय प्रमुखों का चुनाव…. भारी सुरक्षा बल तैनात

    राजस्थान में कड़ी सुरक्षा के बीच आज हो रहा निकाय प्रमुखों का चुनाव…. भारी सुरक्षा बल तैनात


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में नगरीय निकाय प्रमुखों के चुनाव (Urban Local Bodies Heads Elections ) से पहले कई जगहों पर सामने आई हिंसा, पार्षदों पर दबाव और राजनीतिक खींचतान के बीच पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सोमवार को होने वाले नगर निगम मेयर, नगर परिषद सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष पदों के चुनाव को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।

    चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए जिला पुलिस से लेकर रेंज और कमिश्नरेट स्तर तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पुलिस बल के साथ राजस्थान आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (RAC) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की अतिरिक्त कंपनियां भी उपलब्ध कराई गई हैं।


    हिंसा और राजनीतिक खींचतान के बीच पुलिस अलर्ट

    निकाय चुनाव के वार्ड परिणाम आने के बाद कई जगहों पर बोर्ड बनाने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जोरदार खींचतान चल रही है। निर्दलीय पार्षदों की महत्वपूर्ण भूमिका वाले निकायों में जोड़तोड़ और क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच दोनों दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं।

    इसी दौरान कुछ स्थानों पर पार्षदों को धमकाने, दबाव बनाने और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस ने अध्यक्ष पद के चुनाव वाले निकायों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है।


    एसपी, रेंज आईजी और पुलिस कमिश्नरों को विशेष निर्देश

    अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून एवं व्यवस्था) वीके सिंह की ओर से सभी जिला पुलिस अधीक्षकों, रेंज आईजी और पुलिस आयुक्तों को चुनाव के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशों के तहत जिला स्तर पर उपलब्ध पुलिस बल की समीक्षा कर जरूरत वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त बल लगाया जा रहा है। संवेदनशील निकायों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए RAC और STF की कंपनियां भी तैनात की जा रही हैं।


    शांतिपूर्ण मतदान की अपील

    पुलिस प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा या कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं होने देने के लिए स्थानीय स्तर पर भी आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून एवं व्यवस्था) वीके सिंह ने लोगों से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। आज सोमवार को होने वाले निकाय प्रमुखों के चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर पुलिस की विशेष नजर रहेगी। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल की तैनाती के साथ पुलिस अधिकारी मौके की स्थिति के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा सकेंगे।

  • Rajasthan : निकाय चुनावों में BJP का परचम…. 41% वार्ड जीतकर मजबूत की स्थिति, कांग्रेस 35% पर सिमटी

    Rajasthan : निकाय चुनावों में BJP का परचम…. 41% वार्ड जीतकर मजबूत की स्थिति, कांग्रेस 35% पर सिमटी


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के नगर निकाय चुनावों (Municipal body elections) में बीजेपी (BJP) ने 41% वार्ड जीतकर राज्य में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है, जबकि कांग्रेस (Congress) 35% वार्डों पर सिमट गई है. BJP के लिए ये पिछले निकाय चुनावों के मुकाबले 5% की बढ़त है, जबकि कांग्रेस के हिस्से में लगभग 5% की गिरावट आई है. हालांकि, परिसीमन के कारण इस बार सीटों की तुलना करना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि परिसीमन (वार्डों की सीमा तय करने) की प्रक्रिया के कारण राजस्थान में नगर निकायों की सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।


    309 निकाय में हुआ चुनाव

    राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव तीन स्तरों- नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका/नगर पंचायत पर आयोजित किए गए. नगर निगम बड़े शहरों का संचालन करते हैं, जबकि परिषद और पालिकाएं कस्बों का प्रशासन देखती हैं. इस चुनाव में 40 वर्ष से कम उम्र के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा शामिल था. 14 सितंबर की शाम 7 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, 10,244 में से 10 वार्डों के नतीजे आने बाकी थे. बीजेपी ने कांग्रेस पर 566 वार्डों की बढ़त हासिल की, जबकि निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीत लिए हैं।

    परिसीमन के बाद जुड़े 2,770 नए वार्ड
    साल 2019 और 2021 के बीच चार चरणों में हुए पिछले निकाय चुनावों की तुलना में इस बार चुनावी नक्शा काफी बड़ा था. परिसीमन प्रक्रिया की वजह से राज्य में 2,770 नए वार्ड जुड़े, जिससे कुल वार्डों में 37.1% की भारी वृद्धि हुई. पिछले चुनाव चक्र में कुल लगभग 7,474 वार्ड थे. जिनकी संख्या अब लगभग 10,244 हो गई है.


    BJP की 56.8% की जबरदस्त छलांग

    पिछले निकाय चुनाव में कांग्रेस के पास लगभग 3,042 वार्ड थे, बीजेपी के पास 2,666 और निर्दलीयों के पास 1,672 वार्ड थे. ताजा नतीजों में बीजेपी की सीटों की संख्या 2,666 से बढ़कर 4,179 हो गई, जो 56.8% की वृद्धि दिखाता है. वहीं, कांग्रेस की सीटें 3,042 से बढ़कर 3,613 हुईं, जिसमें केवल 18.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. उधर, निर्दलीयों की संख्या भी 1,672 से बढ़कर 2,273 हो गई, जो 35.9% की वृद्धि है।


    RLP और माकपा को भी मिला फायदा

    ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन चुनावों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड (40.8%) जीतकर पहला स्थान हासिल किया, जबकि मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने 3,613 वार्ड (35.3%) जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया है. जबकि AAP, CPI (M) और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जैसे कई दलों ने भी अच्छी बढ़त हासिल की है।

    इन निकाय चुनाव में क्षेत्रीय दलों ने भी अपने आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार किया है. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) 14 से बढ़कर 63 वार्डों पर पहुंच गई, जिसमें 350% का भारी उछाल आया. आरएलपी का प्रभाव मुख्य रूप से जाट बहुल पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में है. उधर, माकपा (CPI-M) 8 से बढ़कर 38 वार्डों पर पहुंची, जिसमें 375% की बढ़त रही. इसके विपरीत बहुजन समाज पार्टी (BSP) 24 से घटकर 19 वार्डों पर आ गई जो 20.8% की गिरावट है।


    कांग्रेस को 5.4% का नुकसान

    कुल वार्डों के अनुपात की बात करें तो तस्वीर बिल्कुल साफ है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास कुल वार्डों की 40.7% हिस्सेदारी थी जो अब गिरकर 35.3% रह गई है. यानी कांग्रेस को करीब 5.4 प्रतिशत अंकों का नुकसान हुआ है। वहीं, बीजेपी की हिस्सेदारी 35.7% से बढ़कर 40.8% हो गई है, यानी उसे 5.1 प्रतिशत लाभ मिला है. निर्दलीयों की हिस्सेदारी 22.4% से मामूली गिरकर 22.2% रही है।

    ये अंतर इसलिए बेहद अहम है, क्योंकि बीजेपी की बढ़त को सिर्फ नए वार्ड बनने से नहीं जोड़ा जा सकता. राज्य में कुल वार्डों की संख्या में 37.1% का इजाफा हुआ, लेकिन बीजेपी ने 56.8% की दर से सीटें बढ़ाईं. दूसरी तरफ, कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी की दर सिर्फ 18.7% रही जो वार्ड विस्तार की दर से आधी थी. इसी कारण सीटों की कुल संख्या बढ़ने के बावजूद कुल हिस्सेदारी में कांग्रेस काफी पीछे छूट गई।

    वहीं, दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आई मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सरकार के लिए ये नतीजा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. भारत के अधिकांश राज्यों की तरह राजस्थान में भी सत्ताधारी दल को प्रशासनिक मशीनरी, संगठन और राज्य स्तरीय विकास के प्रचार का स्वाभाविक लाभ मिलता है. निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार चयन, आरक्षण, गुटबाजी और निर्दलीयों के प्रभाव से तय होते हैं।


    स्विंग स्टेट रहा है राजस्थान

    विधानसभा स्तर पर राजस्थान पारंपरिक रूप से एक ‘स्विंग स्टेट’ रहा है. पिछले निकाय चुनावों के वक्त राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. इस बार स्थिति पूरी तरह उलट गई और सत्ता में मौजूद बीजेपी सबसे आगे निकल गई. इसके बावजूद 3,613 वार्ड जीतकर कांग्रेस ने दिखाया है कि उसका जमीनी संगठन अभी-भी राज्य में पूरी तरह बरकरार है।

    बता दें कि शहरी इलाकों को पारंपरिक रूप से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. केंद्र सरकार के यूजीसी इक्विटी विनियमों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सक्रियता के चलते ये चुनाव बीजेपी के लिए एक कठिन परीक्षा माना जा रहा था. इन तमाम राजनीतिक गतिविधियों के बावजूद बीजेपी ने अपने शहरी आधार को बचाते हुए अपनी स्थिति को और ज्यादा मजबूत किया है।