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  • राजस्थान निकाय चुनाव में BJP को बड़ा झटका, भजनलाल शर्मा, वसुंधरा राजे और भूपेंद्र यादव के प्रभाव वाले क्षेत्रों में बदले समीकरण

    राजस्थान निकाय चुनाव में BJP को बड़ा झटका, भजनलाल शर्मा, वसुंधरा राजे और भूपेंद्र यादव के प्रभाव वाले क्षेत्रों में बदले समीकरण

    नई दिल्ली ।राजस्थान में हुए निकाय चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी को कई प्रमुख क्षेत्रों में झटका लगा है। चुनाव परिणामों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से जुड़े क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन चर्चा में रहा। कई निकायों में BJP स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी और कुछ जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में BJP 65 वार्ड वाले नगर निगम में केवल 20 सीटें जीत सकी। यहां निर्दलीय प्रत्याशियों ने 36 वार्डों में जीत दर्ज की। कांग्रेस को सात सीटें मिलीं, जबकि BSP और RLP के खाते में एक-एक सीट गई। इस परिणाम के बाद निर्दलीय पार्षद नगर निगम के समीकरण में महत्वपूर्ण स्थिति में पहुंच गए।

    निकाय चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रोड शो भी किया था। इसके बावजूद भरतपुर में पार्टी बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। परिणामों में निर्दलीय प्रत्याशियों की बड़ी संख्या में जीत ने नगर निगम के राजनीतिक समीकरण को बदल दिया।

    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के संसदीय क्षेत्र अलवर में भी BJP स्पष्ट बहुमत से दूर रही। यहां पार्टी ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं। निर्दलीय प्रत्याशियों ने 13 वार्डों में जीत हासिल की और एक सीट BSP के खाते में गई।

    जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों में BJP और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिलीं। वहीं 11 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। इस तरह किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। यहां भी निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई।

    प्रदेश BJP अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में भी पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकी। 65 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं, जबकि BJP को 21 सीटों पर जीत मिली। निर्दलीय प्रत्याशियों ने 15 वार्डों में सफलता हासिल की। बहुमत के लिए 34 सीटों की जरूरत थी, इसलिए पाली में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों का समर्थन महत्वपूर्ण रहेगा।

    पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में BJP को बड़ा नुकसान हुआ। झालावाड़ नगर परिषद की 45 सीटों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इसके चलते BJP को यहां सत्ता से बाहर होना पड़ा।

    केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से जुड़े बीकानेर में भी BJP को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। 80 वार्ड वाले नगर निगम में कांग्रेस ने 42 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया, जबकि BJP 27 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए किसी अन्य दल या निर्दलीय के समर्थन की आवश्यकता नहीं रही।

    भरतपुर, पाली, झालावाड़, जोधपुर, अलवर, उदयपुर और बीकानेर जैसे शहरों के नतीजों में BJP कई जगह बहुमत हासिल करने से दूर रही। निकाय चुनाव में पार्टी के प्रमुख नेताओं से जुड़े क्षेत्रों में आए इन परिणामों ने स्थानीय स्तर पर BJP के सामने चुनौती की स्थिति दिखाई है। राजस्थान में 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में निकाय चुनाव के परिणाम पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी के दो उम्मीदवारों को मिला सिर्फ एक-एक वोट, अपने ही वार्डों में नतीजे बने चर्चा का विषय

    राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी के दो उम्मीदवारों को मिला सिर्फ एक-एक वोट, अपने ही वार्डों में नतीजे बने चर्चा का विषय

    नई दिल्ली ।राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव के नतीजों में दो वार्डों के परिणाम खास तौर पर चर्चा में हैं। राज्य के अलग-अलग निकायों में भारतीय जनता पार्टी के दो उम्मीदवारों को सिर्फ एक-एक वोट मिला। इनमें डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगरपालिका के वार्ड 13 से चुनाव लड़ने वाले कैलाशचंद और धौलपुर जिले की सैपऊ नगरपालिका के वार्ड 19 के उम्मीदवार लक्ष्मण कोली शामिल हैं।

    कैलाशचंद ने परबतसर नगरपालिका के वार्ड 13 से चुनाव लड़ा था। इस वार्ड में कांग्रेस उम्मीदवार हीना खानम ने 376 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवार राशिद खान को 195 वोट मिले। बीजेपी उम्मीदवार कैलाशचंद के खाते में केवल एक वोट आया।

    कैलाशचंद ने बताया कि वह परबतसर नगरपालिका के वार्ड 12 के मतदाता हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें वार्ड 13 से उम्मीदवार बनाया था। उनके मुताबिक उन्हें सिर्फ एक वोट मिला और वह भी संभवतः वार्ड 13 के किसी मतदाता ने दिया। कैलाशचंद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका अपना वोट वार्ड 12 में है, जहां वह मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं।

    दूसरी ओर, धौलपुर जिले की सैपऊ नगरपालिका के वार्ड 19 में बीजेपी उम्मीदवार लक्ष्मण कोली को भी सिर्फ एक वोट मिला। इस वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार अजय कुमार ने 108 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवार राजेश कुमार 69 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

    लक्ष्मण कोली के नतीजे को लेकर यह बात भी सामने आई कि उनके परिवार के कुछ सदस्य, जिनमें पत्नी, बेटा और बहू शामिल हैं, वार्ड 19 के मतदाता हैं। इसके बावजूद उनके खाते में सिर्फ एक वोट आया। हालांकि, मतदान की गोपनीयता के कारण यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि परिवार के किसी सदस्य ने उन्हें वोट नहीं दिया। मतदाता ने किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती।

    राजस्थान में इस बार 309 शहरी निकायों में चुनाव हुए थे। सोमवार को इनके नतीजे सामने आए। इन चुनावों में पार्षद के 10 हजार से अधिक पदों के लिए मतदान हुआ था। ऐसे में बीजेपी के दो उम्मीदवारों को केवल एक-एक वोट मिलने का मामला खास तौर पर चर्चा में आ गया।

    परबतसर नगरपालिका का परिणाम भी इस लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। यहां कुल 25 वार्ड हैं। कांग्रेस ने 13 वार्डों में जीत दर्ज कर साधारण बहुमत हासिल किया, जबकि बीजेपी 12 वार्डों में विजयी रही। कैलाशचंद का एक वोट वाला परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि राजस्थान में बीजेपी की सरकार है और इसके बावजूद पार्टी के उम्मीदवार को अपने चुनावी वार्ड में बेहद कम समर्थन मिला।

    दोनों मामलों में उपलब्ध नतीजे यह बताते हैं कि अलग-अलग वार्डों में उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर काफी बड़ा रहा। परबतसर में कांग्रेस की हीना खानम ने 376 वोट के साथ जीत हासिल की, जबकि सैपऊ में निर्दलीय अजय कुमार 108 वोट लेकर विजयी हुए। वहीं बीजेपी उम्मीदवारों के खाते में केवल एक-एक वोट दर्ज हुआ।

  • जौहर विवाद पर कुमार विश्वास ने स्वरा भास्कर को घेरा, कहा- फिल्म या कहानी राजस्थान के गौरवशाली इतिहास को मिटा नहीं सकती

    जौहर विवाद पर कुमार विश्वास ने स्वरा भास्कर को घेरा, कहा- फिल्म या कहानी राजस्थान के गौरवशाली इतिहास को मिटा नहीं सकती

    नई दिल्ली । फिल्म पद्मावत में जौहर के दृश्य को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की पुरानी टिप्पणी पर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इसी विवाद के बीच कवि कुमार विश्वास ने स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना ऐसे लोगों की आलोचना की, जो उनके अनुसार राजस्थान के इतिहास और संस्कृति को पर्याप्त रूप से जाने बिना उसकी व्याख्या करते हैं।

    स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत में रानी पद्मावती और उनके साथ जौहर करने वाली महिलाओं के संदर्भ में टिप्पणी की थी। उन्होंने जौहर के प्रसंग को बदसलूकी से जोड़ते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी थी। इसी बयान को लेकर राजपूत समाज और करणी सेना की ओर से विरोध की बात सामने आई है।

    विवाद के बीच कुमार विश्वास ने राजस्थान के इतिहास में दर्ज बलिदानों और गौरव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी फिल्म, कहानी या कुछ घंटों के कंटेंट के जरिए राजस्थान के इतिहास में दर्ज कुर्बानियों और गौरव को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोगों से अपील की कि केवल किसी की टिप्पणी पर नाराज होने के बजाय आने वाली पीढ़ियों को सही इतिहास बताना ज्यादा जरूरी है।

    कुमार विश्वास ने राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और वीरता का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान की मिट्टी से जुड़ी कुर्बानियों का महत्व किसी फिल्म या कहानी से प्रभावित नहीं हो सकता। उन्होंने इस संदर्भ में राजस्थान के गौरव और बलिदान को याद किया और कहा कि इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।

    उन्होंने लोगों को यह भी समझाने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति की टिप्पणी या किसी रचनात्मक प्रस्तुति पर लगातार प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी अगली पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराना अधिक महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, यदि लोग स्वयं ऐतिहासिक प्रसंगों को अपनी संतानों तक नहीं पहुंचाएंगे, तो भविष्य में इतिहास की समझ कमजोर हो सकती है।

    कुमार विश्वास ने ऐसे लोगों पर भी टिप्पणी की, जो उनके अनुसार देश के इतिहास और संस्कृति की व्याख्या करते हैं, लेकिन उन्होंने इतिहास को पर्याप्त रूप से नहीं पढ़ा या समझा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से नाराज होने के बजाय अपनी पीढ़ी को राजस्थान के इतिहास और उसकी परंपराओं के बारे में बताना चाहिए।

    उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि वह खुद अपने परिवार को ऐतिहासिक स्थानों पर लेकर जाते हैं और बच्चों को वहां के इतिहास के बारे में बताते हैं। उन्होंने हल्दीघाटी और वृंदावन जैसे स्थानों का उल्लेख किया और कहा कि वह अपने परिवार के साथ ऐसी जगहों पर जाकर इतिहास समझने की कोशिश करते हैं।

    कुमार विश्वास ने महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी निजता और सम्मान की लड़ाई को समझना चाहता है, तो उसे कुंभलगढ़ के उस छोटे से कक्ष को देखना चाहिए, जहां महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था।

    इस पूरे विवाद के बीच कुमार विश्वास का जोर इस बात पर रहा कि राजस्थान के इतिहास, बलिदान और गौरव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी फिल्म, कहानी या टिप्पणी से राजस्थान के इतिहास की ऐतिहासिक विरासत प्रभावित नहीं हो सकती।

  • ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ का पहला इम्तिहान आज, राजस्थान के 162 निकायों में मतदान शुरू

    ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ का पहला इम्तिहान आज, राजस्थान के 162 निकायों में मतदान शुरू


    नई दिल्ली। राजस्थान में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की अवधारणा के तहत नगरीय निकाय चुनाव का पहला चरण आज शुरू हो गया है। पहले चरण में 39 जिलों के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में वोट डाले जा रहे हैं। इनमें 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इस चरण में 20,623 प्रत्याशियों की चुनावी किस्मत का फैसला 57,52,278 मतदाता करेंगे।

    राज्य में कुल 309 नगरीय निकायों के चुनाव प्रस्तावित हैं। मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरों के जरिए वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की गई है।

    चार नगर निगमों में भी आज वोटिंग

    पहले चरण में अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा नगर निगमों के वार्डों में भी पार्षदों के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों के प्रमुख नगर निगमों में मतदान दूसरे चरण में कराया जाएगा।

    हालांकि जयपुर जिले की चौमूं, बगरू, शाहपुरा, चाकसू समेत 18 अन्य नगरीय निकायों में पहले चरण में ही मतदान हो रहा है।

    27 नगर परिषदों में मुकाबला

    पहले चरण में नागौर, ब्यावर, कोटपूतली, चूरू, सुजानगढ़, धौलपुर, सवाई माधोपुर, शाहपुरा, चौमूं, फतेहपुर, झुंझुनूं, जालोर, बारां, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, डीडवाना-कुचामन सिटी, करौली, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा, जैसलमेर और बाड़मेर समेत 27 नगर परिषदों के वार्डों में चुनाव हो रहे हैं।

    इसके अलावा 131 नगर पालिकाओं के वार्डों में भी पार्षद पद के लिए मतदान कराया जा रहा है। इनमें केकड़ी, पीसांगन, सरवाड़, नसीराबाद, सावर, तांतोटी, जायल, मूंडवा, बासनी, कुचेरा, निवाई, पीपलू, देवली, उनियारा, दूनी, विजयनगर, मसूदा, बीगोद, पावटा-प्रागपुरा, विराटनगर, नारायणपुर, बानसूर, सूरतगढ़, श्रीविजयनगर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना, नोहर, भादरा, संगरिया, टिब्बी, रावतसर, राजगढ़, रतननगर, छापर, भुसावर, रूपवास, राजाखेड़ा, मनियां, सैपऊ, बौंली और खंडार समेत कई निकाय शामिल हैं।

    जयपुर जिले के बगरू, चाकसू, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर, बस्सी, दूदू, जमवारामगढ़, कालाडेरा, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी और वाटिका नगर पालिकाओं में भी पहले चरण में मतदान हो रहा है।

    BJP के सामने शहरी किला बचाने की चुनौती

    इन चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दांव बड़ा है। दिसंबर 2023 में भजनलाल शर्मा सरकार के सत्ता संभालने के बाद शहरी मतदाताओं के बीच यह सरकार की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत कराए जा रहे इन चुनावों के नतीजों को राज्य सरकार के कामकाज और नीतियों के प्रति जनता की राय से जोड़कर भी देखा जाएगा।

    राजस्थान के नगरीय निकायों में भाजपा को पारंपरिक रूप से मजबूत माना जाता है। बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और भरतपुर जैसे शहरों में पार्टी के सामने अपने शहरी आधार को बनाए रखने की चुनौती है।

    भाजपा ने इस बार बड़ी संख्या में पुराने पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी के भीतर टिकट से नाराज नेताओं और निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में मैदान में उतरे बागियों को साधना संगठन के लिए चुनौती है। इसके साथ ही भितरघात रोकना भी अहम होगा।

    कांग्रेस के लिए खोई जमीन वापस पाने का मौका

    विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के लिए निकाय चुनाव शहरी इलाकों में अपना जनाधार मजबूत करने का अवसर हैं। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में पार्टी ने स्थानीय मुद्दों को चुनावी अभियान का आधार बनाया है।

    सफाई व्यवस्था, सड़क, बिजली और स्थानीय प्रशासन की कथित विफलताओं को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की है। ऐसे में नतीजे यह भी बताएंगे कि शहरी मतदाताओं के बीच कांग्रेस अपनी स्थिति कितनी मजबूत कर पाती है।

    58 लाख युवा वोटरों पर नजर

    इस चुनाव में युवा मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 18 से 25 वर्ष की आयु के करीब 21.30 लाख मतदाता हैं, जबकि 26 से 35 वर्ष के बीच करीब 36.60 लाख वोटर हैं। यानी 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 58 लाख मतदाता हैं।

    वहीं 18 से 29 वर्ष के Gen-Z वोटरों की संख्या करीब 35 लाख बताई गई है। कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए युवा वोटरों को अपने पक्ष में करना खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पहले चरण के मतदान के बाद नतीजे 14 सितंबर को सामने आएंगे। इसके साथ ही यह भी साफ होगा कि ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत हुए इस पहले प्रयोग में शहरी राजस्थान ने किस पार्टी के पक्ष में अपना भरोसा जताया।

  • पीएम मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक हर स्वतंत्रता दिवस पर बदला साफे का रंग और अंदाज

    पीएम मोदी की बंधेज पगड़ी ने खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक हर स्वतंत्रता दिवस पर बदला साफे का रंग और अंदाज

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। इस दौरान उनका पारंपरिक पहनावा एक बार फिर चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री ने लाल और पीले रंग की बंधेज पगड़ी पहनी, जिसके साथ सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट थी।

    प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस पर पहने जाने वाले साफे और पगड़ी की खास बात यह है कि हर वर्ष इसका रंग, डिजाइन और बांधने का अंदाज अलग दिखाई देता है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनकी पगड़ी एक अलग पहचान बन चुकी है।

    इस बार पहनी गई बंधेज पगड़ी गहरे लाल रंग की थी और उस पर सफेद रंग के छोटे-छोटे बिंदु बने थे। बंधेज राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक टाई-एंड-डाई कला से जुड़ी है। इसमें कपड़े को धागों से बांधकर अलग-अलग हिस्सों में रंग दिया जाता है, जिससे कपड़े पर खास तरह के बिंदु और पैटर्न उभरते हैं।

    बंधेज को राजस्थान और गुजरात में उत्सव, सम्मान और परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। इस तरह की पगड़ी विशेष अवसरों और समारोहों में भी पहनी जाती है। प्रधानमंत्री के इस परिधान को स्थानीय हस्तकला और पारंपरिक कपड़ा कला के संदर्भ में भी देखा गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल रंग की चमकदार राजस्थानी बंधेज पगड़ी पहनी थी। इसके अगले वर्ष उनकी पगड़ी में पीले रंग के साथ लाल और गहरे हरे रंग के क्रॉस-क्रॉस पैटर्न दिखाई दिए थे।

    2016 में उन्होंने गुलाबी और पीले रंग की टाई-डाई शैली वाली पगड़ी पहनी। 2017 में लाल रंग की पगड़ी उनके पहनावे का हिस्सा बनी। 2018 में उन्होंने भगवा रंग की पगड़ी पहनी थी, जबकि 2019 में लाल, पीले और हरे रंगों से सजी राजस्थानी पगड़ी नजर आई।

    2020 में प्रधानमंत्री ने केसरिया रंग की पगड़ी पहनी, जिस पर क्रीम रंग का प्रिंट दिखाई दिया। 2021 में उनकी पगड़ी केसरी और लाल रंग के पैटर्न वाली थी। उस समय हल्के नीले रंग की जैकेट के साथ उनका पहनावा भी चर्चा में रहा।

    2022 में प्रधानमंत्री तिरंगे रंगों वाली पगड़ी में नजर आए। इसके साथ उन्होंने नीले रंग की जैकेट पहनी थी। 2023 में उनकी पगड़ी में लाल, पीले, हरे और बैंगनी रंगों वाली बांधनी शैली दिखाई दी। 2024 में भगवा और हरे रंग की पगड़ी के साथ उन्होंने नीले रंग की सदरी पहनी थी।

    2025 में प्रधानमंत्री ने भगवा रंग की पगड़ी पहनी थी और उनके पहनावे में तिरंगे का प्रिंट भी शामिल था। इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर उनकी पगड़ी के रंग और डिजाइन हर वर्ष अलग रहे हैं।

    इस वर्ष की बंधेज पगड़ी में लाल रंग प्रमुख रहा। पारंपरिक बंधेज कला के इस्तेमाल ने एक बार फिर प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे को चर्चा में ला दिया। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पगड़ी ने उनके परिधान में पारंपरिक भारतीय शैली को प्रमुखता दी।

  • राजस्थान कांग्रेस में उभरे संगठनात्मक मतभेद, BAP नेताओं की एंट्री पर छिड़ा विवाद

    राजस्थान कांग्रेस में उभरे संगठनात्मक मतभेद, BAP नेताओं की एंट्री पर छिड़ा विवाद


    नई दिल्ली। पंजाब में गुटबाजी की चुनौती से जूझ रही कांग्रेस के सामने अब राजस्थान में भी संगठनात्मक मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के करीब 300 नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रदेश इकाई के भीतर नए विवाद ने जन्म ले लिया है। यह कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में आयोजित हुआ, जिस पर प्रदेश नेतृत्व ने अप्रसन्नता जताई है।

    BAP नेताओं की जॉइनिंग बनी विवाद की वजह
    जानकारी के अनुसार, पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में BAP नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अशोक गहलोत भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम की जानकारी प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को पहले से नहीं दी गई थी, जिसके चलते विवाद खड़ा हो गया।

    डोटासरा ने साधा परोक्ष निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि कोई अपनी व्यक्तिगत छवि बनाने के लिए काम कर रहा है तो उन्हें शुभकामनाएं, लेकिन उनकी प्राथमिकता केवल कांग्रेस पार्टी है। उन्होंने कहा कि उनकी निष्ठा हमेशा संगठन के प्रति रही है और वे किसी व्यक्ति विशेष की ब्रांडिंग के लिए काम नहीं करेंगे।

    मामला दिल्ली तक पहुंचने की चर्चा
    सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.सी. वेणुगोपाल का नाम भी शामिल है, से चर्चा की गई है। हालांकि, इस पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    महेंद्र मालवीय को लेकर भी टिप्पणी
    डोटासरा ने पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय का नाम लिए बिना कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़कर गए थे, उन्हें चुनाव में सफलता नहीं मिली और बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पार्टी में वापसी की। उन्होंने कहा कि पार्टी में लौटने वालों का स्वागत है, लेकिन यदि कोई कांग्रेस के हितों के खिलाफ काम करेगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    चार खेमों की चर्चा, कांग्रेस का इनकार
    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस एक बार फिर अलग-अलग गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। इन चर्चाओं में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के अलग-अलग प्रभाव क्षेत्रों का जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, पार्टी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। डोटासरा का कहना है कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और सभी नेता मिलकर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

  • राजस्थान में 24 हजार से अधिक सफाई कर्मचारी भर्ती, बिना परीक्षा लॉटरी से होगा चयन, 15 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन

    राजस्थान में 24 हजार से अधिक सफाई कर्मचारी भर्ती, बिना परीक्षा लॉटरी से होगा चयन, 15 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन


    नई दिल्ली ।
    राजस्थान सरकार ने राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में बड़े स्तर पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इस भर्ती अभियान के तहत राज्य के 183 नगरीय निकायों में 24 हजार से अधिक संविदा सफाई कर्मचारी पदों को भरा जाएगा। भर्ती की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा या साक्षात्कार से नहीं गुजरना होगा। पात्र उम्मीदवारों का चयन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने का प्रयास किया गया है।

    इस भर्ती के लिए किसी भी प्रकार की शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं रखी गई है। इसका उद्देश्य उन लोगों को भी रोजगार का अवसर उपलब्ध कराना है, जिन्होंने औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की है लेकिन सफाई कार्य का व्यावहारिक अनुभव रखते हैं। हालांकि, आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास कम से कम एक वर्ष का सफाई कार्य का अनुभव होना आवश्यक होगा। यह अनुभव लगातार या अलग-अलग अवधि में प्राप्त किया गया हो सकता है, लेकिन इसके समर्थन में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य रहेगा।

    भर्ती प्रक्रिया में संबंधित नगरीय निकाय में पहले से सफाई कार्य का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी निकाय में पर्याप्त पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं तो राजस्थान के अन्य नगरीय निकायों में कार्य कर चुके योग्य अभ्यर्थियों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक नगरीय निकाय के लिए अलग-अलग लॉटरी आयोजित की जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रिक्त पदों के अनुसार चयन सुनिश्चित किया जा सके।

    आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी का राजस्थान का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। इसके साथ ही उम्मीदवार का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी होगा ताकि वह सफाई कार्य की जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सके। भर्ती नियमों के अनुसार प्रत्येक अभ्यर्थी केवल 183 नगरीय निकायों में से किसी एक के लिए ही आवेदन कर सकेगा। एक से अधिक निकायों के लिए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 जनवरी 2027 को आधार मानकर की जाएगी। आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों को राज्य सरकार के प्रचलित नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी।

    भर्ती के लिए आवेदन शुल्क भी श्रेणी के अनुसार तय किया गया है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 600 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा, जबकि आरक्षित वर्ग और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए शुल्क 400 रुपये निर्धारित किया गया है। आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा और आवेदन तभी पूर्ण माना जाएगा जब निर्धारित शुल्क सफलतापूर्वक जमा हो जाएगा।

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 अगस्त 2026 से शुरू होगी। इच्छुक एवं पात्र उम्मीदवार निर्धारित भर्ती पोर्टल पर जाकर आवेदन पत्र भर सकेंगे। आवेदन के दौरान आवश्यक दस्तावेज, अनुभव प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी जानकारी अपलोड करनी होगी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने और शुल्क जमा करने के बाद आवेदन स्वीकार किया जाएगा। इस भर्ती अभियान के माध्यम से राज्य के नगरीय निकायों में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलने की उम्मीद है।

  • राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस

    राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस


    जयपुर। राजस्थान में होने वाले निकाय और पंचायत चुनावों से पहले कांग्रेस ने युवाओं को आगे बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घोषणा की कि पार्टी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में 50 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत टिकट देगी।

    पार्टी मुख्यालय में शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व का अवसर देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने टिकट के दावेदारों को यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि केवल आवेदन करने से टिकट की गारंटी नहीं होगी। उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय परिस्थितियों, संगठन की जरूरतों और जीत की संभावनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

    डोटासरा ने वार्ड बदलकर टिकट मांगने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाकर दावेदारी करने को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। टिकट वितरण पूरी तरह संगठनात्मक मानकों और स्थानीय समीकरणों के आधार पर होगा।

    राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों की अधिसूचना 23 सितंबर के आसपास जारी होने की संभावना है। मतदान 13 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच विभिन्न चरणों में कराया जा सकता है, जबकि मतगणना 12 नवंबर तक पूरी होने की उम्मीद है।

    वहीं, शहरी निकाय चुनावों की घोषणा 17 अगस्त के आसपास होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 6 और 9 सितंबर को मतदान तथा 11 सितंबर को मतगणना कराई जा सकती है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम चुनाव आयोग की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही तय होगा।

  • राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति

    राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति


    जोधपुर। राजस्थान की जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल जल्द एक अनोखे विवाह की साक्षी बनेगी। हत्या के अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो बंदी आपसी सहमति से विवाह बंधन में बंधेंगे। राजस्थान हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जेल प्रशासन ने विवाह की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    जानकारी के अनुसार, नागौर निवासी मूलाराम पड़ोसी की हत्या के मामले में दोषी है और 16 जनवरी 2017 से उम्रकैद की सजा काट रहा है। वर्तमान में वह मंडोर ओपन जेल में बंद है। वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है और फिलहाल 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर है।

    पुनर्वास के आधार पर मांगी गई थी अनुमति
    मूलाराम की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट में अस्थायी सजा निलंबन की याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि मूलाराम और सीमा दोनों अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं।

    मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी ने दलील दी कि विवाह से दोनों के पुनर्वास और सामाजिक सुधार की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में वे सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे। उन्होंने बंदियों के वैवाहिक और संतानोत्पत्ति संबंधी अधिकारों से जुड़े हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले का भी हवाला दिया।

    सरकार ने भी नहीं जताई आपत्ति
    राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि दोनों विवाह करना चाहते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि दोनों पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके हैं। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजकों ने कहा कि ओपन जेल के नियमों के तहत यदि दोनों विवाह करना चाहते हैं तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

    कोर्ट ने दिए विवाह संबंधी निर्देश
    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाह समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है और केवल दोषसिद्धि के आधार पर किसी बंदी को उसकी सहमति से विवाह करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने निर्देश दिया कि विवाह समारोह मंडोर ओपन जेल परिसर में ही आयोजित किया जाएगा। समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21-21 लोगों को शामिल होने की अनुमति होगी। विवाह संपन्न कराने के लिए एक पंडित भी मौजूद रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर मेहमानों की संख्या बढ़ाने का निर्णय जेल प्रशासन ले सकेगा।

    हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह की तिथि की सूचना पहले से जेल प्रशासन को देना अनिवार्य होगा, जबकि पूरे समारोह का खर्च मूलाराम वहन करेगा। अधिवक्ता कालूराम भाटी के अनुसार, यह विवाह 22 जुलाई को आयोजित किया जा सकता है।

  • चारधाम से लौटते वक्त मौत ने घेरा: 'बस छूट जाती तो पत्नी आज जिंदा होती', दौसा हादसे के पीड़ित की भावुक कहानी

    चारधाम से लौटते वक्त मौत ने घेरा: 'बस छूट जाती तो पत्नी आज जिंदा होती', दौसा हादसे के पीड़ित की भावुक कहानी


    मध्यप्रदेश । चारधाम यात्रा पूरी कर खुशियों के साथ घर लौट रहे इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रप्रकाश (चंदू) गुप्ता ने कभी नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा। 30 जून की रात राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण बस हादसे में उनकी पत्नी निर्मला गुप्ता की मौत हो गई। हादसे से कुछ घंटे पहले ही निर्मला ने मुस्कुराते हुए सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ लिखकर स्टेटस लगाया था। परिवार से बात हुई, भविष्य की योजनाएं बनीं, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरा परिवार बिखेर दिया।

    चंद्रप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि उनकी पत्नी पिछले तीन वर्षों से दोबारा चारधाम यात्रा पर जाने की जिद कर रही थीं। पहले भी दोनों यात्रा कर चुके थे, लेकिन निर्मला का कहना था कि अब वहां काफी बदलाव हो चुके हैं और एक बार फिर दर्शन करना चाहती हैं। यात्रा की तैयारी पूरी थी और ट्रेन की कन्फर्म टिकट भी मिल चुकी थी, लेकिन सुविधा को देखते हुए बस से जाने का फैसला किया गया। आज उन्हें सबसे ज्यादा यही बात सालती है कि अगर उस दिन बस नहीं पकड़ी होती तो शायद उनकी पत्नी आज उनके साथ होती।

    हरिद्वार से लौटते समय बस पकड़ने के लिए दोनों ने काफी मशक्कत की। पहले गलत बस स्टैंड पहुंचे, फिर सामान उठाकर कई सौ मीटर पैदल चलना पड़ा। कई बार बस संचालक से संपर्क किया और आखिरकार इंदौर जाने वाली बस मिल गई। उस समय उन्हें लगा कि बस छूटने से बच गए, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही बस निर्मला की आखिरी यात्रा साबित होगी।

    बस में बैठने के बाद निर्मला बेहद खुश थीं। उन्होंने बच्चों से फोन पर बात की और सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ का स्टेटस लगाया। इंदौर लौटने के बाद विदिशा, वृंदावन, सांवरिया सेठ और कुलदेवी के दर्शन की भी योजना बना ली गई थी। परिवार के साथ आने वाले दिनों की बातें हो रही थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

    रात करीब ढाई बजे तेज धमाके के साथ बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऊपर की बर्थ पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े और कुछ ही पलों में बस में अफरा-तफरी मच गई। चंद्रप्रकाश बताते हैं कि उनकी पत्नी खिड़की की तरफ सो रही थीं और उसी दिशा से ट्रेलर बस के अंदर तक घुस आया। उन्होंने कई बार पत्नी को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

    उन्होंने किसी तरह पत्नी का फंसा हुआ पैर निकाला और उन्हें बाहर लाने की कोशिश की, लेकिन तभी किसी ने उन्हें जबरदस्ती बस से बाहर खींच लिया। कुछ ही क्षणों में बस आग की लपटों में घिर गई। वे दोबारा पत्नी को बचाने दौड़े, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि अंदर जाना असंभव हो गया। उनकी आंखों के सामने ड्राइवर भी स्टीयरिंग में फंसा रह गया और जिंदा जल गया।

    चंद्रप्रकाश कहते हैं कि हादसे के बाद के वे सात-आठ मिनट उनकी पूरी जिंदगी बदल देने वाले थे। मोबाइल, सामान और जीवनसाथी—सब कुछ एक साथ छिन गया। सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की रही कि आसपास मौजूद कई लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन मदद के लिए बहुत कम लोग आगे आए। आखिरकार एक युवक ने उन्हें अपना मोबाइल दिया, जिससे उन्होंने बेटे को फोन कर सिर्फ इतना कहा—”बहुत बड़ा हादसा हो गया है।”

    करीब 44 वर्षों तक साथ निभाने वाली निर्मला गुप्ता को याद करते हुए उनकी आंखें भर आती हैं। वे बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की हर जिम्मेदारी उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाई। तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और जीवन में आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा योगदान था। सरल स्वभाव, सादगी और परिवार के प्रति समर्पण ही उनकी पहचान थी।

    आज चंद्रप्रकाश गुप्ता के लिए चारधाम यात्रा की यादें आस्था से ज्यादा एक ऐसे दर्द की कहानी बन चुकी हैं, जिसने कुछ ही मिनटों में उनका पूरा संसार बदल दिया। उनके शब्दों में, “हम घर लौट रहे थे… लेकिन एक पल में सब खत्म हो गया।”