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  • राजस्थान: सरकारी नौकरी के लिए आयुषी ने रची साजिश, भाई को जमीन का दिया लालच, बोलीं- बस..मां को मरवा दे

    राजस्थान: सरकारी नौकरी के लिए आयुषी ने रची साजिश, भाई को जमीन का दिया लालच, बोलीं- बस..मां को मरवा दे


    जयपुर । राजस्थान में जयपुर के एयरपोर्ट कॉलोनी में ढाई साल पहले कोर्ट में एलडीसी विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने घर बनाया था जिसमें पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से कमज़ोर बेटे के साथ रहता था. एक साल पहले विजय शर्मा की मौत हो जाती है. तब बेटी आयुषी शर्मा ने 12 th पास किया था. जब पिता की जगह अनुकंपा पर नौकरी करने की बारी आई तो बेटी ने कहा कि मुझे नौकरी दे दो. मां तैयार भी हो गई. लेकिन निरज शर्मा का भाई और आयुषी का मामा भी अपने जीजा जी के साथ लोअर कोर्ट में एलडीसी था उसने बहन को कहा कि तुम भी पढ़ी लिखी हो. तुम्हारी जिंदगी पड़ी है और 16 साल का बेटा मानसिक दिव्यांग है उसकी देख भाल कौन करेगा. बेटी को पढ़ा लिखा कर लायक बना देंगे. मां ने दिव्यांग बेटे के खातिर पति की जगह नौकरी कर ली.

    चचेरे भाई के साथ रहने लगी आयुषी
    इससे नाराज होकर 24 साल की बेटी आयुषी पिता के कल्याण कॉलोनी स्थित पुराने घर में जाकर रहने लगी और अपने ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में एडमिशन ले लिया. दोनों चचेरे भाई बहन साथ रहने लगे. उसी दौरान आयुषी ने कहा कि मुझे अपनी मां को मारना है. अगर तुम मेरी मदद करोगे तो आगरा रोड की पांच करोड़ की पांच बीघा जमीन और भरतपुर के पांच करोड़ की चार बीघा जमीन तुझे दे दूंगी. मुझे मां के मरने के बाद नौकरी मिल जाएगी और जयपुर का दोनों घर मेरे पास हैं. डील तय होने के बाद दोनों ने निरज शर्मा के जेठ और बलराम के पिता मोहन को यह बात बताई.

    मां को घर से बाहर लाने के लिए टोटके
    आयुषी ने प्लान बनाया कि मां को गाड़ी से कुचलकर मार देंगे और हादसे का रूप दे देंगे. इसके बाद निरज शर्मा के जेठ मोहन शर्मा ने भरतपुर में हेमंत शर्मा से संपर्क साधा. एक महीने पहले हेमंत ने थार गाड़ी से निरज को घर के बाहर कुचलने की कोशिश की मगर निरज बच गई. मगर उसे शक हो गया था. उसने यह बात अपने भाई को बताई और घर से निकलना बंद कर दिया. उसके बाद मां को घर से निकालने के लिए आयुषी ने नए नए टोना टोटके के तरीके अपनाना शुरू किया. निंबू – मिर्चा और लाल रंग फेंकना शुरू कर दिया. निरज समझ गई थी खतरा है तो उसने पूरे घर में जाली लगाकर बाहर चार सीसीटीवी कैमरे लगा दिए थे.

    सुपारी किलर को दिए 7 लाख
    आयुषी को मां को मारने की जल्दी थी उसने फिर से अपने ताऊ को कहा प्लान बनाओ. ताउ मोहन शर्मा ने भरतपुर के रूपावास के हेमंत शर्मा से संपर्क किया. हेमंत ने उनको प्लान दिया और उसके बदले 7 लाख रूपए मांगे. फिर हेमंत ने हरियाणा नंबर का स्कॉर्पियो भरतपुर से 35 हजार में किराए पर ली और निरजा को कुचलने के लिए आकाश शर्मा और अरविंद शर्मा को हायर किया. निरज के रैकी के लिए रोहित और मोहित को हायर किया गया.

    मामा से रोते हुए बोली- मां मर गई है
    4 जुलाई को जब निरज अपने बेटे को लेकर फिजियोथैरेपिस्ट के यहां गई थी तो बेटी ने उसे जरूरी काम से घर आने के लिए कहा. निरज जब घर लौट रही थी तो 60 फीट पर रोड पर मोटरसाइकिल पर बैठे मोहित और रोहित ने इंतज़ार कर रहे स्कॉर्पियो में बैठे आकाश को इशारा किया. आकाश ने गाड़ी को सौ से ज्यादा की स्पीड से किनारे चल रही निरजा को टक्कर मारी जिससे वो 100 मीटर उछल कर गिरी और मौत हो गई. मां के मरने के बाद बेटी ने मामा को रोते हुए फोन किया कि मां का एक्सीडेंट हो गया और वो मर गई. ताउ तुरंत घर पहुंचा और शव को लेकर गांव रूपावास चले गए. मगर मामा को भांजी के हाव भाव को देखकर शक हुआ तो पुलिस से केवल इतना ही कहा कि एक्सीडेंट की जांच कर लो.

    पुलिस ने जब सीसीटीवी को खंगालना शुरू किया तो देखा निरज शर्मा तो सड़क पर बिल्कुल हीं किनारे चल रही थी और 60 फीट की चौड़ी सड़क पूरी खाली थी. पुलिस को शक गहराया तो आसपास के दूसरे सीसीटीवी खँगालना शुरू किया तो देख कि कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो काफी पहले से खड़ी थी. दो लड़के दो सड़कों पर खड़े थे.

    …रुके भी नहीं पास में मौजूद लड़के?
    हादसे के बाद दोनों लड़के निरजा के शव को देखे बिना सीधे निकल जाते हैं और आगे जाकर एक मोटरसाइकिल सवार के साथ बैठकर निकल जाते है. पुलिस सीसीटीवी तलाशती आगे बढ़ी तो क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो मिला. जब स्कॉर्पियो के मालिक को पकड़ा तो उसने हेमंत शर्मा को किराये पर देना बताया. फिर हेमंत शर्मा को पकड़ा तो उसने आयुषी के ताउ मोहन शर्मा का नाम बताया. इस बीच चचेरा भाई बलराम भाग गया. पुलिस जब गांव रूपावास पहुंची तो कानून के छात्र आयुषी ने पुलिस को धमकाना शुरू कर दिया. फिर पुलिस ने भरतपुर के सेवर थाने के पुलिसकर्मियों और गांव वालों की मदद से आयुषी को उसके ताई के साथ थाने तक ये कहकर लाए कि बयान लेकर छोड़ देंगे. फिर ताई को घर भेजकर सीधे जयपुर लेकर आए जहाँ आरोपियों के सामने देख आयुषी ने सब क़ुबूल कर लिया.आयुषी को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है . पुलिस को उल्टे सीधे जवाब देती है. आजतक के कैमरे पर हमने उससे बहुत पूछना चाहा लेकिन बेहद शातिर आयुषी ने कुछ नहीं बोला.

  • प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलें और ऐतिहासिक धरोहरें, फैमिली वेकेशन के लिए माउंट आबू की ये जगहें हैं बेहतरीन विकल्प

    प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलें और ऐतिहासिक धरोहरें, फैमिली वेकेशन के लिए माउंट आबू की ये जगहें हैं बेहतरीन विकल्प

    नई दिल्ली । यदि आप परिवार के साथ शांत, प्राकृतिक और यादगार छुट्टियां बिताने की योजना बना रहे हैं तो राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू बेहतरीन विकल्प हो सकता है। अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा यह पर्यटन स्थल अपनी हरियाली, ठंडी जलवायु, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां हर उम्र के पर्यटकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है, जिससे पारिवारिक यात्रा सुखद और यादगार बन जाती है।

    माउंट आबू की सबसे लोकप्रिय जगहों में नक्की झील का नाम सबसे पहले आता है। चारों ओर पहाड़ियों से घिरी यह झील शांत वातावरण और मनमोहक दृश्यों के लिए जानी जाती है। यहां बोटिंग का आनंद लेने के साथ-साथ झील के किनारे शाम की सैर भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। आसपास मौजूद स्थानीय बाजार और पारंपरिक व्यंजनों की दुकानें भी यात्रा का अनुभव और बेहतर बना देती हैं।

    इतिहास और स्थापत्य कला में रुचि रखने वालों के लिए दिलवाड़ा जैन मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र है। संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी और उत्कृष्ट वास्तुकला इस मंदिर को देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में शामिल करती है। यहां की कलात्मक सुंदरता पर्यटकों को लंबे समय तक प्रभावित करती है।

    प्रकृति प्रेमियों के लिए गुरु शिखर एक ऐसा स्थान है, जहां से अरावली पर्वतमाला का विस्तृत और मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। यह अरावली की सबसे ऊंची चोटी है और यहां पहुंचकर बादलों के बीच फैले प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह स्थान बेहद लोकप्रिय माना जाता है।

    माउंट आबू का सनसेट पॉइंट भी पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल है। यहां शाम के समय डूबते सूरज का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। परिवार के साथ बैठकर सूर्यास्त का आनंद लेना और यादगार तस्वीरें लेना इस यात्रा को और खास बना देता है। इसी तरह टॉड रॉक अपनी अनोखी प्राकृतिक आकृति के कारण पर्यटकों के बीच विशेष पहचान रखता है। यहां तक पहुंचने के लिए हल्की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन ऊपर से दिखाई देने वाला नक्की झील का दृश्य पूरे सफर की थकान दूर कर देता है।

    यदि आप भीड़भाड़ से दूर कुछ समय शांति के बीच बिताना चाहते हैं तो पीस पार्क एक आदर्श स्थान है। हरियाली से घिरा यह पार्क ध्यान, विश्राम और परिवार के साथ सुकून भरे पल बिताने के लिए उपयुक्त माना जाता है। साफ-सुथरा वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य यहां आने वाले पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करता है।

    माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य भी इस पर्यटन स्थल का प्रमुख आकर्षण है। यहां विभिन्न प्रकार के वन्यजीव, पक्षी और दुर्लभ वनस्पतियां देखने को मिलती हैं। प्रकृति और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोगों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी यह स्थान ज्ञान और रोमांच से भरपूर अनुभव देता है।

    माउंट आबू की यात्रा प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है। यदि यात्रा की सही योजना बनाकर इन प्रमुख स्थानों को अपने कार्यक्रम में शामिल किया जाए तो परिवार के साथ बिताया गया हर पल यादगार बन सकता है और छुट्टियों का आनंद कई गुना बढ़ जाता है।

  • बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च

    बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम शुरू होते ही राजस्थान का उदयपुर अपनी अलग ही खूबसूरती में नजर आता है। झीलों से घिरा यह ऐतिहासिक शहर मानसून के दौरान हरियाली से ढक जाता है और अरावली की पहाड़ियां बादलों की चादर ओढ़ लेती हैं। पानी से लबालब भरी झीलें और शाही महलों का नजारा इस शहर को देश के सबसे खूबसूरत मानसून पर्यटन स्थलों में शामिल कर देता है। यदि आप एक सप्ताह की यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं तो उदयपुर बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

    यात्रा के पहले दिन सिटी पैलेस और लेक पिछोला की सैर करें। शाम को बोट राइड का आनंद लें और झील किनारे स्थानीय भोजन का स्वाद लें।

    दूसरे दिन फतेह सागर झील, सहेलियों की बाड़ी और स्थानीय बाजारों की सैर करें। मानसून के दौरान यहां का वातावरण बेहद सुहावना रहता है।

    तीसरे दिन सज्जनगढ़ पैलेस जाएं जिसे मानसून पैलेस भी कहा जाता है। यहां से पूरे शहर और झीलों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। बारिश के मौसम में यह स्थान फोटोग्राफी के लिए सबसे पसंदीदा माना जाता है।

    चौथे दिन एकलिंगजी मंदिर और नाथद्वारा मंदिर का धार्मिक भ्रमण किया जा सकता है। दोनों स्थल उदयपुर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

    पांचवें दिन बागोर की हवेली और स्थानीय संग्रहालय देखें। शाम को पारंपरिक राजस्थानी लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम यात्रा को और यादगार बना देंगे।

    छठे दिन आसपास की अरावली पहाड़ियों और प्राकृतिक स्थलों की सैर करें। बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और शांत वातावरण प्रकृति प्रेमियों को खूब आकर्षित करता है।

    सातवें दिन स्थानीय हस्तशिल्प बाजारों से राजस्थानी कला वस्तुएं कपड़े और स्मृति चिह्न खरीदकर अपनी यात्रा का समापन करें।

    अनुमानित खर्च
    आने जाने का यात्रा खर्च लगभग 4000 से 10000 रुपये (शहर और परिवहन के अनुसार)
    होटल का खर्च प्रति रात लगभग 2000 से 5000 रुपये
    भोजन पर प्रतिदिन लगभग 800 से 1500 रुपये
    स्थानीय घूमने और प्रवेश शुल्क लगभग 3000 से 5000 रुपये
    कुल सात दिन का औसत बजट प्रति व्यक्ति लगभग 25000 से 45000 रुपये हो सकता है।

    मानसून के दौरान यात्रा करते समय छाता या रेनकोट साथ रखें। फिसलन वाले स्थानों पर सावधानी बरतें और मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। बारिश के मौसम में उदयपुर की झीलें, महल और हरियाली मिलकर ऐसा अनुभव देती हैं जो लंबे समय तक याद रहता है।

  • राजस्थान को ₹1.05 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, पीएम मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज-2 का किया शिलान्यास

    राजस्थान को ₹1.05 लाख करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, पीएम मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज-2 का किया शिलान्यास

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान को ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की सौगात देते हुए राज्य के बुनियादी ढांचे को नई गति देने का संदेश दिया। बालोतरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण किया। इन परियोजनाओं में ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर, जयपुर मेट्रो फेज-2, सौर ऊर्जा संयंत्र और सड़क अवसंरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं।

    प्रधानमंत्री ने बालोतरा के पचपदरा में विकसित देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर का उद्घाटन करते हुए इसे भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अत्याधुनिक तकनीक से विकसित यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस परियोजना के माध्यम से रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन की सुविधाओं को एक ही परिसर में विकसित किया गया है।

    उन्होंने कहा कि इस प्रकार की औद्योगिक परियोजनाएं न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देंगी बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार और सहायक उद्योगों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेंगी। सरकार का लक्ष्य आधुनिक औद्योगिक ढांचा तैयार करना है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण का भी शिलान्यास किया। इस परियोजना के तहत लगभग 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद मौजूदा मेट्रो नेटवर्क के साथ जयपुर मेट्रो की कुल लंबाई 50 किलोमीटर से अधिक हो जाएगी। नई लाइन शहर के प्रमुख औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि मेट्रो विस्तार से शहर में यातायात का दबाव कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे दैनिक यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और निवेश गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री ने राजस्थान में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे विस्तार का भी उल्लेख किया और कहा कि राज्य हरित ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। इस अवसर पर बीकानेर में स्थापित बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों को राष्ट्र को समर्पित किया गया। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूत करेंगी।

    इसके अलावा जोधपुर क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का भी उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों में चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधारभूत संरचना, ऊर्जा, परिवहन और रोजगार से जुड़ी ये परियोजनाएं राजस्थान के समग्र विकास को नई दिशा देंगी तथा राज्य को औद्योगिक, आर्थिक और हरित विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • ‘पेपर लीक नहीं, सिर्फ कंप्रोमाइज हुआ था’, घनश्याम तिवाड़ी के बयान से नई बहस, धर्मेंद्र प्रधान को बताया बधाई का पात्र

    ‘पेपर लीक नहीं, सिर्फ कंप्रोमाइज हुआ था’, घनश्याम तिवाड़ी के बयान से नई बहस, धर्मेंद्र प्रधान को बताया बधाई का पात्र

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी का एक बयान राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। देशभर में परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच तिवाड़ी ने दावा किया कि संबंधित परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ था, बल्कि वह केवल “कंप्रोमाइज” हुआ था। उनके इस बयान ने परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    तिवाड़ी ने कहा कि किसी परीक्षा को पेपर लीक तभी माना जा सकता है जब प्रश्नपत्र के सभी या अधिकांश प्रश्न परीक्षा से पहले पूरी तरह बाहर आ जाएं और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों तक पहुंच जाएं। उनके अनुसार संबंधित मामले में ऐसी स्थिति नहीं थी। उन्होंने कहा कि कुछ विद्यार्थियों द्वारा कुछ प्रश्नों को याद करके दूसरे स्थानों तक पहुंचाने की जानकारी सामने आई थी, जिसे पेपर लीक की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनके मुताबिक यह स्थिति पेपर के कंप्रोमाइज होने की थी, न कि पूर्ण रूप से लीक होने की।

    बीजेपी सांसद ने इस पूरे मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए, सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की। उनके अनुसार परीक्षा को रद्द करने, दोबारा आयोजन सुनिश्चित करने और अभ्यर्थियों को राहत देने जैसे कदम सरकार की जवाबदेही को दर्शाते हैं। तिवाड़ी ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में संबंधित मंत्री की आलोचना के बजाय उनकी तत्परता की सराहना की जानी चाहिए।

    नीट विवाद को लेकर विपक्ष द्वारा लगातार सरकार पर हमले किए जा रहे हैं। इसी संदर्भ में तिवाड़ी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्र संवाद कार्यक्रम पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस मामले को लेकर राजनीतिक अभियान चलाया जा रहा है, उसके तथ्यों को पहले पूरी तरह समझना आवश्यक है। उनका मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक मंचों की बजाय संस्थागत और प्रशासनिक स्तर पर अधिक गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    तिवाड़ी ने राजस्थान की राजनीति का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान राज्य में कई भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए थे, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है और इसी दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा संबंधी मामलों पर दिए गए ऐसे बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने रह सकते हैं। एक ओर विपक्ष परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को पर्याप्त और प्रभावी बता रहा है। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें अब उन सुधारात्मक उपायों पर टिकी हैं, जिनसे भविष्य में किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल न उठें।

    नीट विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की परीक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों की रणनीतियां छात्रों और युवाओं के बीच व्यापक चर्चा का विषय बनी रह सकती हैं।

  • राजस्थान में रेलवे विकास को मिली रिकॉर्ड रफ्तार, 600 करोड़ से 10,228 करोड़ पहुंचा बजट, स्टेशनों और कनेक्टिविटी पर बड़ा फोकस

    राजस्थान में रेलवे विकास को मिली रिकॉर्ड रफ्तार, 600 करोड़ से 10,228 करोड़ पहुंचा बजट, स्टेशनों और कनेक्टिविटी पर बड़ा फोकस

    नई दिल्ली । राजस्थान में रेलवे और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर केंद्र सरकार ने बड़े निवेश और नई परियोजनाओं पर जोर देने की बात कही है। राज्य में रेलवे सुविधाओं के विस्तार, स्टेशनों के आधुनिकीकरण और सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी बल्कि आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी राज्य को लाभ होगा।

    राजस्थान देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है और यहां रेलवे नेटवर्क का विस्तार लंबे समय से विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता रहा है। सरकार के अनुसार पिछले एक दशक में रेलवे क्षेत्र के लिए बजट आवंटन में कई गुना वृद्धि हुई है। इसका असर नई रेल परियोजनाओं, ट्रैक उन्नयन, स्टेशन विकास और यात्री सुविधाओं के विस्तार के रूप में दिखाई दे रहा है।

    राज्य के सैकड़ों रेलवे स्टेशनों पर विभिन्न स्तरों पर आधुनिकीकरण का कार्य चल रहा है। कई स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाने, लंबाई विस्तार, यात्री प्रतीक्षालय, शेड और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम तेज गति से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।

    रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यक्रम के तहत राजस्थान के कई प्रमुख और मध्यम श्रेणी के स्टेशनों को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इन स्टेशनों को आधुनिक डिज़ाइन, बेहतर यात्री सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं से लैस करने की योजना पर काम जारी है। इससे रेलवे परिसरों का स्वरूप बदलने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    रेल सेवाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न शहरों को जोड़ने वाली नई ट्रेनों के संचालन और मौजूदा सेवाओं के विस्तार से यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बढ़ती यात्रा मांग को देखते हुए कुछ महत्वपूर्ण रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिल सके।

    राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर भी सरकार विशेष रणनीति पर काम कर रही है। सीमा से जुड़े इलाकों में बेहतर रेलवे और परिवहन नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे स्थानीय निवासियों को लाभ मिलने के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि से भी क्षेत्र की मजबूती बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत बुनियादी ढांचा आर्थिक गतिविधियों और क्षेत्रीय विकास को गति देता है।

    रेलवे विकास के साथ-साथ तकनीकी क्षेत्र में भी राजस्थान को नई पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान और प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। इससे युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल प्राप्त करने और भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार होने में मदद मिलेगी।

    डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के तहत डेटा सेंटर और तकनीकी निवेश को भी बढ़ावा देने की योजना है। इससे राजस्थान में तकनीकी उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा और नए निवेश आकर्षित होने की संभावना बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे, डिजिटल तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे में समानांतर निवेश राज्य के समग्र विकास को नई दिशा दे सकता है।

    आने वाले वर्षों में यदि घोषित परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी होती हैं तो राजस्थान परिवहन, तकनीक और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। बढ़ता निवेश, आधुनिक सुविधाएं और नई तकनीकों पर फोकस राज्य के विकास मॉडल को नई गति देने की क्षमता रखते हैं।

  • एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट

    एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट


    नई दिल्ली। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से पहले 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है, लेकिन इसके बावजूद देश में मौसम का मिजाज चिंताजनक बना हुआ है। अमेरिकी एजेंसी NOAA की रिपोर्ट के अनुसार इस साल सुपर अल-नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे मानसून कमजोर रह सकता है और देश के कई हिस्सों में सूखा व भीषण गर्मी बढ़ सकती है।

    अल-नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से मानसूनी हवाओं की दिशा प्रभावित होती है, जिससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होने और तापमान बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण इस बार बारिश सामान्य से कम और गर्मी अधिक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून केरल से 1 जून के बजाय 26 मई के आसपास प्रवेश कर सकता है, लेकिन इसके बाद अलग-अलग राज्यों में इसकी गति अलग-अलग रहेगी। अनुमान के अनुसार राजस्थान में 20 जून, मध्य प्रदेश में 12 जून, उत्तर प्रदेश में 18 जून और बिहार में 8 से 10 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है।

    फिलहाल देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर जारी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और विदर्भ में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कई इलाकों में रात के समय भी लू चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश के भोपाल में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे सड़कों का डामर तक पिघलने की स्थिति बन गई। वहीं राजस्थान के फलौदी में 44.8 डिग्री और महाराष्ट्र के अमरावती में 45.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान के अलर्ट भी जारी किए हैं। झारखंड में ऑरेंज अलर्ट, बिहार और हरियाणा के कुछ जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी है, जबकि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

    वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में हीटवेव का असर अगले एक सप्ताह तक जारी रहने की आशंका है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
     

  • Rajasthan: 900 करोड़ के जल जीवv मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार

    Rajasthan: 900 करोड़ के जल जीवv मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission- JJM) घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी (Mahesh Joshi) को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 900 करोड़ रुपए के कथित घोटाले में यह कार्रवाई की गई है। आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार कर रिश्वत ली थी।

    इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी महेश जोशी को इसी मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की और न ही कोई पैसा लिया। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें 3 दिसंबर 2025 को जमानत मिली थी।


    22 अधिकारियों समेत दर्ज हुई थी FIR

    ACB ने इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इनमें जल जीवन मिशन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर टेंडर जारी कर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया गया।


    ईमेल आईडी से मिला बड़ा सुराग

    ACB को जांच के दौरान कुछ संदिग्ध ईमेल आईडी से महत्वपूर्ण लीड मिली थी। इन्हीं के आधार पर अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत का खुलासा हुआ। अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।


    सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के बाद कार्रवाई

    इससे पहले 9 अप्रैल को जलदाय विभाग के पूर्व ACS सुबोध अग्रवाल को भी ACB ने गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान महेश जोशी की भूमिका को लेकर उनसे पूछताछ की गई थी। अब ACB ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए पूर्व मंत्री तक पहुंच बनाई है।

  • आंधी-बारिश का कहर: यूपी-बिहार में 31 की मौत, दिल्ली में ओले; कई राज्यों में मौसम ने बदला मिजाज

    आंधी-बारिश का कहर: यूपी-बिहार में 31 की मौत, दिल्ली में ओले; कई राज्यों में मौसम ने बदला मिजाज



    नई दिल्ली। देशभर में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। उत्तर प्रदेश और बिहार में आंधी, बारिश और बिजली गिरने से पिछले 24 घंटे में 31 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। वहीं दिल्ली में मंगलवार को ओलावृष्टि हुई, जिससे गर्मी से राहत मिली लेकिन जनजीवन प्रभावित हुआ।

    यूपी-बिहार में सबसे ज्यादा असर
    उत्तर प्रदेश में तेज आंधी-बारिश के चलते 8 लोगों की मौत हो गई। पीलीभीत में ईंट-भट्ठे की ऊंची चिमनी गिरने से बड़ा हादसा हुआ।
    वहीं बिहार में 22 जिलों में खराब मौसम का असर देखने को मिला, जहां बिजली गिरने से 7 बच्चों समेत 23 लोगों की जान चली गई।

    हरियाणा-राजस्थान में तबाही और राहत
    हरियाणा में तेज तूफान के कारण 15 हजार से ज्यादा पेड़ उखड़ गए, जिससे कई इलाकों में यातायात बाधित हुआ।
    वहीं राजस्थान में तापमान में 8 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

    पहाड़ों में ठंड बढ़ी
    हिमाचल प्रदेश के सोलन में तापमान गिरकर 4.8°C तक पहुंच गया, जो मई महीने के लिए असामान्य रूप से कम है।

    क्यों बदला मौसम?
    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बने सिस्टम और दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक बनी ट्रफ लाइन के कारण देश के बड़े हिस्से में बारिश और आंधी का असर देखने को मिल रहा है।

    अगले 48 घंटे का अलर्ट
    मौसम विभाग ने कई राज्यों में चेतावनी जारी की है। 
    पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में तेज आंधी-बारिश।
    बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बिजली गिरने का खतरा।
    असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश की आशंका।

    मध्य प्रदेश में भी असर
    मध्य प्रदेश में भी मौसम बदला हुआ है। भोपाल समेत 39 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे गर्मी के बीच राहत और चुनौती दोनों बनी हुई है।
    कुल मिलाकर, देशभर में मौसम का यह बदला रूप राहत और आफत दोनों लेकर आया है। जहां एक तरफ तापमान में गिरावट से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर आंधी-बिजली ने जनजीवन पर बड़ा असर डाला है।

  • Rajasthan: सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 5 बच्चों की मौत…

    Rajasthan: सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 5 बच्चों की मौत…


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के सलूम्बर जिले (Salumber district) के 2 गांवों में रहस्यमयी बीमारी (Mysterious Disease) से 5 बच्चों की मौत हो गई है। इसको लेकर सूबे के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) के निर्देश पर उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज और जयपुर से विशेषज्ञों की टीमें जांच के लिए भेजी गई हैं। मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की कड़ी निगरानी करने के आदेश दिए हैं। बुखार के लक्षणों वाले बच्चों की सघन स्क्रीनिंग करने को कहा गया है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से पांच बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। इसको लेकर राजस्थान सरकार की ओर से जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को वस्तुस्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बुखार के लक्षण वाले बच्चों की सघन मेडिकल जांच कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।


    मांगी रिपोर्ट

    रहस्यमय बीमारी के फैलने की बात सामने आने पर राजस्थान सरकार ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित कर गहन जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि सलूम्बर में बच्चों की मौत का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तत्काल अधिकारियों को वस्तुस्थिति पता करने को कहा है।


    भेजी विशेषज्ञों की टीम

    सीएम ने अधिकारियों से मौत की वजहों का पता लगाने के साथ ही बीमारी की रोकथाम के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यही नहीं राज्य का स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया है। उसने तत्काल प्रभाव से आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित की है। साथ ही टीमों को बीमारी से प्रभावित गांवों में भेजा है।


    बच्चों की मौत का कारण पता करेंगी

    विशेषज्ञों की ये टीमें बच्चों की मौत का कारण पता करेंगी। साथ ही बीमारी से बचाव के संबंध में भी जरूरी कार्यवाही सुनिश्चित करेंगी। स्वास्थ्य निदेशालय, जयपुर से भी एक टीम भेजी गई है। मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने भी सोमवार रात को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की पूरी जानकारी ली।


    रोकथाम के उपाय लागू करने के निर्देश

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन के साथ अन्य अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा है। साथ ही मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए एंटीलार्वा, सोर्स रिडक्शन, फोगिंग के साथ अन्य रोकथाम के उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।


    टीमें तैनात करने के आदेश

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सलूम्बर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित गांवों और आस-पास के क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें तैनात करें। यही नहीं बुखार के लक्षण वाले बच्चों की गहन जांच सुनिश्चित करें। किसी भी बच्चे में लक्षण मिलें तो तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं। गंभीर बीमार बच्चों को तत्काल जिला चिकित्सालय या मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में रेफर करें।