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  • रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर कपूर ने किया ध्यान योग और शास्त्रों का गहन अध्ययन

    रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर कपूर ने किया ध्यान योग और शास्त्रों का गहन अध्ययन


    नई दिल्ली। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म का ट्रेलर सैन डिएगो कॉमिक कॉन में प्रदर्शित किया गया जहां अभिनेता रणबीर कपूर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम के किरदार को निभाने के लिए उन्होंने करीब दो वर्षों तक विशेष तैयारी की। उन्होंने कहा कि किसी भी पौराणिक चरित्र को निभाना केवल अभिनय का विषय नहीं होता बल्कि उसके विचारों आदर्शों और जीवन दर्शन को आत्मसात करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

    रणबीर कपूर ने कहा कि किसी एक्शन फिल्म या सामान्य किरदार के लिए शरीर बनाना डांस सीखना या नई तकनीक अपनाना अपेक्षाकृत आसान होता है लेकिन भगवान श्रीराम जैसा चरित्र निभाने के लिए मन और विचारों को भी उसी दिशा में ढालना जरूरी था। उन्होंने महसूस किया कि यदि श्रीराम के आदर्शों को समझे बिना केवल बाहरी रूप अपनाया जाए तो यह किरदार अधूरा रह जाएगा।

    अभिनेता ने बताया कि उन्होंने इस भूमिका के लिए नियमित योग और ध्यान का अभ्यास किया। उनके साथ एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी रहे जिन्होंने घंटों तक उन्हें ध्यान कराया और श्रीराम के जीवन मूल्यों तथा शिक्षाओं को विस्तार से समझाया। रणबीर ने कहा कि इन सत्रों ने उन्हें केवल अभिनय के स्तर पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी काफी बदल दिया। उन्होंने धैर्य संयम करुणा और कर्तव्य जैसे मूल्यों को गहराई से समझने की कोशिश की।

    रणबीर कपूर ने यह भी बताया कि उन्होंने इस दौरान अनेक धार्मिक ग्रंथों और विभिन्न विद्वानों की व्याख्याओं का अध्ययन किया। उन्होंने कई विशेषज्ञों से मुलाकात कर भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व को अलग अलग दृष्टिकोण से समझा ताकि पर्दे पर उनका अभिनय स्वाभाविक और प्रभावशाली दिखाई दे। उनके अनुसार भगवान श्रीराम का चरित्र केवल एक राजा या योद्धा का नहीं बल्कि आदर्श पुत्र आदर्श भाई आदर्श पति और आदर्श शासक का भी प्रतीक है।

    उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी कोशिश यही रही कि आठ साल के बच्चे से लेकर अस्सी वर्ष के बुजुर्ग तक हर दर्शक उनके अभिनय में भगवान श्रीराम की सहजता और मर्यादा महसूस कर सके। यही कारण है कि उन्होंने इस भूमिका के लिए मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी को सबसे अधिक महत्व दिया। रणबीर का मानना है कि ऐसे किरदार निभाने वाले कलाकार के भीतर भी विनम्रता और सादगी होना आवश्यक है।

    सैन डिएगो कॉमिक कॉन में फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर भी ट्रेलर की खूब चर्चा हो रही है और प्रशंसक फिल्म के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस मौके पर फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा निर्देशक नितेश तिवारी और अभिनेता यश भी मौजूद रहे।

    रामायण दो भागों में रिलीज होगी। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा सनी देओल हनुमान रवि दुबे लक्ष्मण और अरुण गोविल राजा दशरथ के किरदार में दिखाई देंगे। भव्य विजुअल इफेक्ट्स विशाल सेट और दमदार स्टारकास्ट के कारण यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक मानी जा रही है। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

  • रोशनी पड़ते ही सोने सा चमकने लगता है यह अनोखा पौधा जानिए श्रीलंका की अशोक वाटिका का रहस्य और वैज्ञानिक वजह

    रोशनी पड़ते ही सोने सा चमकने लगता है यह अनोखा पौधा जानिए श्रीलंका की अशोक वाटिका का रहस्य और वैज्ञानिक वजह


    नई दिल्ली । रामायण से जुड़े स्थलों और उनसे जुड़ी कथाओं को लेकर लोगों में हमेशा गहरी आस्था और जिज्ञासा रही है। श्रीलंका का नाम आते ही रावण माता सीता और अशोक वाटिका की स्मृतियां ताजा हो जाती हैं। माना जाता है कि यही वह स्थान था जहां रावण ने माता सीता को रखा था। आज भी श्रीलंका के मध्य पर्वतीय क्षेत्र में स्थित नुवारा एलिया के आसपास कई ऐसे स्थान हैं जिन्हें स्थानीय परंपराओं में रामायण से जोड़ा जाता है। इन्हीं स्थानों में एक ऐसा दुर्लभ पौधा भी चर्चा का विषय बना हुआ है जिसकी पत्तियां प्रकाश पड़ते ही सुनहरे रंग की तरह चमकने लगती हैं।

    यह पौधा सामान्य परिस्थितियों में किसी साधारण वनस्पति जैसा ही दिखाई देता है लेकिन जैसे ही इस पर सूर्य की किरणें या तेज रोशनी पड़ती है इसकी पत्तियां सुनहरी आभा बिखेरने लगती हैं। घने जंगल या हल्के अंधेरे में इसकी चमक और अधिक स्पष्ट दिखाई देती है जिससे इसे देखने वाले लोग पहली नजर में चकित रह जाते हैं। यही विशेषता इसे दुनिया के अलग अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती है।

    स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह पौधा रामायण काल की वनस्पतियों का अवशेष है और इसका संबंध अशोक वाटिका से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं से है। कई श्रद्धालु इसे दिव्य वनस्पति मानते हैं और इसकी चमक को आध्यात्मिक महत्व से जोड़ते हैं। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं की स्वतंत्र ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    दूसरी ओर वनस्पति वैज्ञानिक इस पौधे की चमक को प्राकृतिक संरचना का परिणाम मानते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी पत्तियों की सतह पर मौजूद सूक्ष्म कोशिकीय संरचना और प्राकृतिक रंजक प्रकाश को विशेष तरीके से परावर्तित करते हैं। इसी कारण सूर्य का प्रकाश पड़ने पर पत्तियां सुनहरी दिखाई देती हैं। इसे प्रकाश परावर्तन की एक प्राकृतिक प्रक्रिया माना जाता है जो कुछ अन्य दुर्लभ पौधों में भी अलग अलग रूप में देखने को मिलती है।

    श्रीलंका का यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां अनेक दुर्लभ औषधीय पौधे और वनस्पतियां पाई जाती हैं जिन पर लगातार शोध किए जा रहे हैं। कई वनस्पतियां ऐसी हैं जो भारत में बहुत कम या बिल्कुल नहीं मिलतीं। यही कारण है कि दुनिया भर के शोधकर्ता यहां की वनस्पति संपदा का अध्ययन करने पहुंचते हैं।

    रामायण से जुड़े स्थलों की ऐतिहासिकता और उनसे संबंधित वनस्पतियों को लेकर अलग अलग मत हैं। आस्था रखने वाले लोग इन्हें पौराणिक इतिहास का हिस्सा मानते हैं जबकि वैज्ञानिक इनके प्राकृतिक गुणों का अध्ययन कर रहे हैं। फिलहाल इस बात का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है कि यह विशेष पौधा वास्तव में रामायण काल का ही है। फिर भी इसकी अनोखी चमक और स्थानीय परंपराओं से जुड़ाव इसे बेहद रोचक और आकर्षक बनाता है।

    आस्था और विज्ञान के इस अनूठे संगम ने श्रीलंका के इस रहस्यमयी पौधे को दुनिया भर में विशेष पहचान दिलाई है। यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ साथ प्रकृति और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी एक खास आकर्षण बना हुआ है।

  • रामायण के मेगा इवेंट में सितारों का महाकुंभ रणबीर बने राम साई बनीं सीता यश के रावण अवतार ने बढ़ाया रोमांच

    रामायण के मेगा इवेंट में सितारों का महाकुंभ रणबीर बने राम साई बनीं सीता यश के रावण अवतार ने बढ़ाया रोमांच


    नई दिल्ली । बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण की रिलीज से पहले दिल्ली में आयोजित भव्य रेड कारपेट इवेंट ने दर्शकों के उत्साह को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की इस महत्वाकांक्षी फिल्म का ट्रेलर पहली बार बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया गया जहां पूरी स्टारकास्ट ने अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल अरुण गोविल रवि दुबे और कई अन्य कलाकारों ने मंच पर फिल्म से जुड़े अनुभव साझा किए और बताया कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए कितना खास है।

    कार्यक्रम की शुरुआत ट्रेलर प्रदर्शन के साथ हुई जिसके बाद सबसे पहले रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच संभाला। पारंपरिक भारतीय परिधान में पहुंचे दोनों कलाकारों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। निर्देशक नितेश तिवारी ने बताया कि उन्होंने इन दोनों कलाकारों को केवल अभिनय क्षमता के आधार पर नहीं चुना बल्कि उनकी आंखों में उन्हें राम और सीता का व्यक्तित्व दिखाई देता था। उनका कहना था कि इन किरदारों के लिए वह किसी और की कल्पना नहीं कर सकते थे।

    निर्माता नमित मल्होत्रा ने फिल्म की परिकल्पना और निर्माण यात्रा पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी विश्व स्तर पर विजुअल इफेक्ट्स के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी है लेकिन अब समय आ गया था कि भारतीय संस्कृति की सबसे महान कथा को उसी भव्यता के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। इसी सोच के साथ रामायण पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया गया ताकि भारतीय विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सके।

    निर्देशक नितेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि फिल्म की मूल कथा और भावनाओं से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से दर्शकों को रामायण का ऐसा अनुभव मिलेगा जो पहले कभी बड़े पर्दे पर नहीं देखा गया। उन्होंने संकेत दिया कि लंका दहन किशकिंधा और अन्य महत्वपूर्ण दृश्यों को अत्यंत भव्य रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    कार्यक्रम में अभिनेता अरुण गोविल ने भी भावुक कर देने वाला अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब रामानंद सागर की रामायण बन रही थी तब शुरुआत में उन्हें भगवान राम की भूमिका नहीं मिली थी लेकिन बाद में वही किरदार उनकी पहचान बन गया। इस फिल्म में वह राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं और उन्होंने कहा कि इस सेट पर काम करते समय उन्हें हमेशा आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हुआ।

    रणबीर कपूर ने मंच से अरुण गोविल के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि बचपन से उन्होंने उन्हें भगवान राम के रूप में देखा है और यदि वह उनके अभिनय का थोड़ा सा भी अंश अपने किरदार में ला सके तो यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं साई पल्लवी ने कहा कि उन्होंने इस भूमिका को स्वीकार करने से पहले माता सीता से प्रार्थना की कि उन्हें इस दिव्य चरित्र को निभाने की शक्ति मिले।

    रवि दुबे ने लक्ष्मण की भूमिका मिलने को अपना सौभाग्य बताया जबकि साउथ सुपरस्टार यश ने रावण का किरदार निभाने का अवसर मिलने पर मेकर्स का आभार व्यक्त किया। उनकी एंट्री पर दर्शकों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। वहीं सनी देओल के मंच पर आते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फिल्म हर भारतीय तक पहुंचेगी और दर्शकों का भरपूर प्यार हासिल करेगी।

    कार्यक्रम में कवि कुमार विश्वास ने भगवान राम की कथा का महत्व बताया जबकि सितार वादक ऋषभ शर्मा की भक्तिमय प्रस्तुति ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। कार्यक्रम के अंत में ट्रेलर को एक बार फिर प्रदर्शित किया गया जिसे दर्शकों ने उत्साह के साथ देखा। इस भव्य आयोजन ने साफ कर दिया कि रामायण केवल एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था को आधुनिक तकनीक के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का एक विशाल प्रयास है।

  • 'रामायण' ट्रेलर लॉन्च से पहले रणबीर कपूर की तबीयत बिगड़ी, आंखों के संक्रमण के बावजूद इवेंट में होंगे शामिल

    'रामायण' ट्रेलर लॉन्च से पहले रणबीर कपूर की तबीयत बिगड़ी, आंखों के संक्रमण के बावजूद इवेंट में होंगे शामिल

    नई दिल्ली । अभिनेता रणबीर कपूर की तबीयत को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह इन दिनों कंजंक्टिवाइटिस यानी आंखों के संक्रमण से जूझ रहे हैं। यह खबर ऐसे समय आई है जब उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ के मेगा ट्रेलर लॉन्च की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बावजूद रणबीर के निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    बताया जा रहा है कि फिल्म का भव्य ट्रेलर लॉन्च नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की गई है, जिसमें फिल्म से जुड़े प्रमुख कलाकारों और निर्माताओं की मौजूदगी रहने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणबीर कपूर भी अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद इस आयोजन में शामिल होकर अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता निभाने का फैसला कर चुके हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, आंखों के संक्रमण की शुरुआत सबसे पहले रणबीर कपूर की बेटी राहा को हुई थी। बाद में यह संक्रमण रणबीर तक भी पहुंच गया। हालांकि उनकी स्थिति गंभीर नहीं बताई जा रही है, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान संक्रमण को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    ‘रामायण: पार्ट 1’ इस समय हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं। लंबे समय से इस फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है और ट्रेलर लॉन्च को भी एक बड़े सिनेमाई आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। इसी वजह से रणबीर की तबीयत से जुड़ी खबर ने प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    फिल्म के ट्रेलर को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से ‘यू’ सर्टिफिकेट मिल चुका है। इसका अर्थ है कि ट्रेलर सभी आयु वर्ग के दर्शकों के लिए उपयुक्त माना गया है। जानकारी के अनुसार, ट्रेलर के दो अलग-अलग संस्करण प्रमाणन के लिए भेजे गए थे, जिनकी अवधि लगभग चार मिनट के आसपास है। माना जा रहा है कि इनमें से एक संस्करण सिनेमाघरों में भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं, जबकि इसका निर्माण नमित मल्होत्रा के नेतृत्व में किया जा रहा है। ट्रेलर लॉन्च समारोह में फिल्म की प्रमुख स्टारकास्ट के शामिल होने की संभावना है। हालांकि फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे यश और हनुमान के किरदार में नजर आने वाले सनी देओल की उपस्थिति को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    ‘रामायण’ को दो भागों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है। पहला भाग दिवाली 2026 के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज होगा, जबकि दूसरा भाग दिवाली 2027 में दर्शकों के सामने आएगा। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों में काफी उत्साह बना हुआ है। अब सभी की नजर ट्रेलर लॉन्च और रणबीर कपूर की उपस्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि यह आयोजन फिल्म के प्रचार अभियान का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

  • 'रामायण' की पहली झलक का इंतजार खत्म, 24 जुलाई को दुनिया भर में रिलीज होगा ट्रेलर, भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार फिल्म

    'रामायण' की पहली झलक का इंतजार खत्म, 24 जुलाई को दुनिया भर में रिलीज होगा ट्रेलर, भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार फिल्म


    नई दिल्ली । निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसकी कहानी, कलाकारों और निर्माण स्तर को लेकर चर्चाएं बनी हुई हैं। अब दर्शकों के लंबे इंतजार पर विराम लगाते हुए मेकर्स ने फिल्म के पहले भाग के ट्रेलर की रिलीज तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके अनुसार ‘रामायण पार्ट-1’ का ट्रेलर 24 जुलाई 2026 को दुनिया भर में एक साथ रिलीज किया जाएगा।

    मेकर्स ने सोशल मीडिया पर फिल्म का नया पोस्टर साझा करते हुए ट्रेलर लॉन्च की जानकारी दी। पोस्टर में भगवान राम और माता सीता के वनवास काल से पहले की झलक दिखाई गई है, जिसने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। पोस्ट के साथ यह भी बताया गया कि फिल्म का ट्रेलर वैश्विक स्तर पर एक साथ रिलीज किया जाएगा, जिससे दुनिया भर के दर्शक एक ही समय पर इसकी पहली विस्तृत झलक देख सकेंगे।

    ‘रामायण’ को भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिना जा रहा है। फिल्म दो भागों में रिलीज होगी, जिसमें पहले भाग में भगवान राम और माता सीता के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रस्तुत किया जाएगा। मेकर्स का उद्देश्य इस पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक, भव्य विजुअल इफेक्ट्स और बड़े पैमाने के निर्माण के साथ दर्शकों के सामने पेश करना है, ताकि इसे वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिल सके।

    फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। भगवान राम की भूमिका में रणबीर कपूर नजर आएंगे, जबकि माता सीता का किरदार साई पल्लवी निभा रही हैं। रावण की भूमिका में अभिनेता यश दिखाई देंगे। वहीं, सनी देओल को भगवान हनुमान और रवि दुबे को लक्ष्मण की भूमिका में देखा जाएगा। अलग-अलग फिल्म उद्योगों के प्रमुख कलाकारों को एक साथ लाने की वजह से भी यह परियोजना लगातार चर्चा में बनी हुई है।

    निर्देशक नितेश तिवारी इस फिल्म को बड़े पैमाने पर तैयार कर रहे हैं। निर्माण से जुड़े दावों के अनुसार दोनों भागों पर कुल मिलाकर लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो ‘रामायण’ भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म परियोजना बन सकती है। बड़े बजट के साथ-साथ फिल्म में अत्याधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय स्तर के विजुअल इफेक्ट्स और विशाल सेटों का उपयोग किए जाने की भी जानकारी सामने आ चुकी है।

    फिल्म की घोषणा के बाद से दर्शकों के बीच इसके हर अपडेट को लेकर विशेष उत्सुकता बनी हुई है। अब ट्रेलर रिलीज की तारीख सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। फिल्म प्रेमियों को उम्मीद है कि ट्रेलर में कहानी, किरदारों के लुक और तकनीकी स्तर की पहली विस्तृत झलक देखने को मिलेगी। आने वाले दिनों में ट्रेलर रिलीज के साथ फिल्म के प्रचार अभियान को भी गति मिलने की संभावना है। ऐसे में 24 जुलाई को रिलीज होने वाला ट्रेलर इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के प्रति दर्शकों की उम्मीदों को और स्पष्ट करेगा तथा इसकी रिलीज से पहले उत्साह को नई ऊंचाई देगा।

  • आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

    आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा प्रेमियों के बीच आगामी फिल्मों को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आईएमडीबी द्वारा जारी की गई साल 2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों की हालिया सूची में देखने को मिला है। इस प्रतिष्ठित सूची में अभिनेता रणबीर कपूर की मुख्य भूमिका वाली पौराणिक फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ ने अन्य सभी बड़ी और बहुप्रतीक्षित फिल्मों को पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों ने शानदार सफलता दर्ज की है, जिसके बाद अब साल के उत्तरार्ध में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्मों पर दर्शकों की निगाहें टिकी हुई हैं। आईएमडीबी की यह रैंकिंग दर्शाती है कि आगामी महीनों में पौराणिक कथाओं, स्पाई थ्रिलर, एक्शन और ड्रामा शैलियों के बीच कड़ा मुकाबला होने वाला है, जिसमें फिलहाल ‘रामायण’ सबसे आगे चल रही है।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों और समीक्षकों के बीच जबरदस्त चर्चा है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के मुख्य किरदार को जीवंत कर रहे हैं, जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी। इस फिल्म की स्टार कास्ट को लेकर भी खासा उत्साह है, जिसमें कन्नड़ सुपरस्टार यश रावण के रूप में, सनी देओल हनुमान की भूमिका में और टीवी व फिल्म अभिनेता रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा कर रहे हैं, जबकि यश भी इसके सह-निर्माता के रूप में जुड़े हुए हैं। यह फिल्म इस साल दिवाली के बड़े त्योहार पर सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके चलते इसे इस साल की सबसे बड़ी रिलीज माना जा रहा है।

    आईएमडीबी की इस सूची में दूसरे पायदान पर यशराज फिल्म्स के बैनर तले बन रही स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ ने अपनी जगह बनाई है। शिव रवैल द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में एक्शन करती नजर आएंगी। इनके साथ ही फिल्म में बॉबी देओल और अनिल कपूर भी महत्वपूर्ण किरदारों में शामिल हैं, जो फिल्म के आकर्षण को और बढ़ाते हैं। इस बहुप्रतीक्षित सूची में तीसरा स्थान कन्नड़ अभिनेता यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ को मिला है, जिसका निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

    सूची के चौथे स्थान पर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ का कब्जा है, जिसका निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। इस फिल्म में शाहरुख खान के साथ दीपिका पादुकोण और सुहाना खान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिससे यह फिल्म साल के अंत में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। इसके बाद पांचवें स्थान पर टी-सीरीज और देवगन फिल्म्स के संयुक्त निर्माण में बनी कॉमेडी फ्रैंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ शामिल है, जिसमें अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    सूची में ओटीटी प्लेटफॉर्म की बेहद लोकप्रिय सीरीज के सिनेमाई रूपांतरण ‘मिर्जापुर द मूवी’ को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला है, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल, जितेंद्र कुमार और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार बड़े पर्दे पर धमाल मचाने आ रहे हैं। इसके साथ ही श्रद्धा कपूर की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘इथा’ भी इस सूची का हिस्सा बनी है, जिसका निर्देशन लक्ष्मण उत्तेकर कर रहे हैं। आगामी महीनों में होने वाली इन बड़ी रिलीज से स्पष्ट है कि भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए साल 2026 का दूसरा भाग व्यावसायिक और रचनात्मक दोनों ही दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक होने वाला है।

  • घर में धार्मिक ग्रंथ रखने से पहले जान लें वास्तु के ये अहम नियम सही दिशा बदल सकती है जीवन की सकारात्मक ऊर्जा

    घर में धार्मिक ग्रंथ रखने से पहले जान लें वास्तु के ये अहम नियम सही दिशा बदल सकती है जीवन की सकारात्मक ऊर्जा


    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में रामायण भगवत गीता हनुमान चालीसा और अन्य धार्मिक ग्रंथों को केवल पुस्तक नहीं बल्कि आस्था और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इन्हें घर में सम्मानपूर्वक रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इन पवित्र ग्रंथों को सही दिशा और उचित स्थान पर रखा जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार के सदस्यों के जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार धार्मिक ग्रंथों को रखने के लिए घर की पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। पूर्व दिशा को ज्ञान प्रकाश और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है क्योंकि इसी दिशा से सूर्य का उदय होता है। वहीं यदि घर में पूजा का स्थान बनाया गया है तो उसका सबसे उपयुक्त स्थान ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा माना जाता है। ऐसे में धार्मिक पुस्तकों को भी पूजा स्थल के आसपास सम्मानपूर्वक रखना शुभ माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों को रखते समय इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भगवान की मूर्ति या तस्वीर के बाईं ओर रखा जाए। कई लोग सुविधा के लिए इन्हें मंदिर की शेल्फ या मंदिर के ऊपर रख देते हैं लेकिन वास्तु के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। इन पुस्तकों के लिए अलग स्थान या अलग शेल्फ बनाना अधिक शुभ माना जाता है ताकि उनका सम्मान बना रहे।

    वास्तु शास्त्र यह भी कहता है कि धार्मिक ग्रंथों को कभी भी ऐसी जगह नहीं रखना चाहिए जहां गंदगी रहती हो या जहां उनका अनादर होने की संभावना हो। बेडरूम में भी इन पवित्र पुस्तकों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से इन्हें दूसरे कमरे में रखना पड़े तो साफ सुथरी और शांत जगह का चयन करना चाहिए।

    एक और महत्वपूर्ण नियम यह है कि धार्मिक पुस्तकों को एक दूसरे के ऊपर ढेर बनाकर नहीं रखना चाहिए। प्रत्येक पुस्तक को अलग स्थान देना चाहिए ताकि उनका सम्मान बना रहे। साथ ही इन पुस्तकों को खड़ी अवस्था में रखने के बजाय समतल स्थिति में रखना बेहतर माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें लाल या पीले रंग के स्वच्छ कपड़े में लपेटकर रखने की परंपरा भी बताई गई है। लाल और पीला रंग शुभता तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं काले या नीले रंग के कपड़े में धार्मिक ग्रंथों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इन छोटे छोटे वास्तु नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक ग्रंथों का सम्मान बना रहता है बल्कि घर का वातावरण भी सकारात्मक और शांत बना रहता है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं। इनका पालन व्यक्ति अपनी आस्था और श्रद्धा के अनुसार कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पवित्र ग्रंथों को हमेशा स्वच्छता सम्मान और श्रद्धा के साथ रखा जाए क्योंकि यही उनकी वास्तविक मर्यादा मानी जाती है।

  • दर्शकों की बदलती पसंद: कंटेंट, संस्कृति और भव्यता का नया संगम रच रहा सिनेमा

    दर्शकों की बदलती पसंद: कंटेंट, संस्कृति और भव्यता का नया संगम रच रहा सिनेमा


    नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में दर्शकों की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां दर्शक सिर्फ मनोरंजन के लिए कॉमेडी या एक्शन फिल्में देखते थे, वहीं अब वे ऐसी कहानियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो दिल को छू जाएं और लंबे समय तक याद रहें। अब फिल्मों में इमोशन, गहराई और सच्चाई की मांग बढ़ गई है। यही कारण है कि फिल्म इंडस्ट्री भी अब कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों पर ज्यादा फोकस कर रही है, जहां कहानी और प्रस्तुति को प्राथमिकता दी जा रही है।
    माइथोलॉजी और लोककथाएं भारतीय समाज का अहम हिस्सा रही हैं। इन कहानियों में हमारी संस्कृति, परंपराएं और आस्था की झलक मिलती है। जब इन्हें आधुनिक अंदाज में फिल्मों या वेब सीरीज के जरिए पेश किया जाता है, तो दर्शकों के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनता है। यही वजह है कि आजकल फिल्ममेकर्स इन विषयों को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
    इस ट्रेंड को मजबूत करने में Kantara का बड़ा योगदान रहा है। Rishab Shetty की इस फिल्म ने दिखाया कि जड़ों से जुड़ी सच्ची कहानी भाषा की सीमाओं को पार कर सकती है। फिल्म में लोकदेवता, परंपरा और प्रकृति के रिश्ते को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे पूरे देश के दर्शकों ने सराहा। इसकी सफलता ने फिल्म इंडस्ट्री का नजरिया बदल दिया और कंटेंट की ताकत को फिर साबित किया।इसी सफलता के बाद फिल्ममेकर्स का भरोसा मजबूत हुआ है और अब वे बड़े सितारों के बजाय दमदार कहानियों पर ध्यान दे रहे हैं। पौराणिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित कई नई फिल्में और वेब सीरीज बन रही हैं, जिनमें सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों और समाज की सच्चाई को भी दिखाया जा रहा है। दर्शकों को यही ईमानदारी पसंद आ रही है।
    इसी कड़ी में Ramayana जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम चल रहा है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। इसे भव्य सेट्स, आधुनिक वीएफएक्स और नई तकनीक के साथ पेश करने की तैयारी है, ताकि हर वर्ग के दर्शकों को एक अलग और यादगार अनुभव मिल सके।
    आज के दौर में फिल्मों की भव्यता भी दर्शकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रही है। इंटरनेशनल स्तर के विजुअल्स, शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक और दमदार प्रेजेंटेशन से फिल्म का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, केवल भव्यता ही काफी नहीं होतीकहानी में भावनात्मक गहराई और सच्चाई भी उतनी ही जरूरी है, तभी फिल्म दिलों में जगह बना पाती है।
    अब माइथोलॉजी फिल्मों का क्रेज युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। पहले जहां इन्हें सिर्फ बड़े उम्र के लोगों तक सीमित माना जाता था, वहीं अब युवा भी इन कहानियों को पसंद कर रहे हैं। नए अंदाज, तेज रफ्तार कहानी और हाई-क्वालिटी विजुअल्स के कारण उन्हें इसमें एक्शन, ड्रामा और इमोशन का बेहतरीन मिश्रण मिलता है।
    इस बदलाव में OTT platforms का भी बड़ा योगदान है। ओटीटी ने फिल्ममेकर्स को ज्यादा स्वतंत्रता दी है, जिससे वे अपनी कहानियों को विस्तार से दिखा पा रहे हैं। खासकर पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां वेब सीरीज के रूप में दर्शकों तक बेहतर तरीके से पहुंच रही हैं। धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली इन कहानियों से दर्शकों का जुड़ाव भी मजबूत होता है।
    कुल मिलाकर, दर्शकों की बदलती पसंद ने फिल्म इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी है, जहां कंटेंट, संस्कृति और भव्यता का संतुलन बनाकर ऐसी कहानियां पेश की जा रही हैं, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक यादगार अनुभव बन जाती हैं।
  • हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी

    हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी


    नई दिल्ली। मंगलवाल का दिन हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन व्रत रहने से आपके ऊपर उनकी कृपा बानी रहती है। कहा जाता हैं कि, बचपन से ही हनुमान जी को कई सिद्धियां और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त थीं। उनके पास असीम शक्तियां थीं। वे पहाड़ उठा सकते थे, समुद्र लांघ सकते थे और सूरज को निगल सकते थे।लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि वो अपनी शक्तियां को ही भूल गए तो चलिए इससे जुड़ी कथा जानते हैं।

    हनुमान जी को मिला था ऐसा श्राप
    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली, तेजस्वी और चंचल स्वभाव के थे। वे अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग खेल-खेल में ही करने लगते थे। कभी वे ऋषि-मुनियों के आश्रमों में पहुंच जाते, तो कभी उनकी साधना में बाधा डालते।

    एक बार कई महान ऋषि-मुनि वन में तपस्या कर रहे थे। तभी बाल स्वरूप हनुमान जी वहां पहुंचे और अपनी चंचलता के कारण उन्होंने ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया।ऋषियों ने पहले तो उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने, तब उन्हें क्रोध आ गया।तब ऋषियों ने हनुमान जी को श्राप दिया कि वे अपनी सारी दिव्य शक्तियों को भूल जाएंगे।

    श्राप का ये था तोड़
    यह श्राप पूर्ण रूप से दंड देने के लिए नहीं था, बल्कि उनके हित में ही था। ऋषियों ने यह भी कहा कि जब कोई उन्हें उनकी शक्तियों की याद दिलाएगा, तब वे पुनः अपनी शक्ति को पहचान लेंगे और उसका उपयोग धर्म के कार्यों में करेंगे।

    नारद मुनि और जामवंत ने याद दिलाई थी शक्तियां
    जब भगवान राम की सेवा का समय आया और सीता माता की खोज के लिए समुद्र पार करना था, तब हनुमान जी अपनी शक्ति को भूल चुके थे। उस समय नारद मुनि और जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। तभी हनुमान जी को अपनी अपार शक्ति का बोध हुआ और उन्होंने विशाल रूप धारण कर समुद्र लांघ लिया। इसके बाद उन्होंने राम भगवान की।

  • सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल

    सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में रामायण केवल एक कहानी नहीं बल्कि भावनाओं आस्था और सांस्कृतिक पहचान का आधार रही है यही कारण है कि सिनेमा की शुरुआत से लेकर आज के आधुनिक दौर तक यह महाकाव्य लगातार नए रूपों में दर्शकों के सामने आता रहा है और हर बार उतनी ही गहराई से लोगों के दिलों को छूता है

    इस सफर की शुरुआत साल 1917 में हुई जब दादासाहेब फाल्के ने मूक फिल्म लंका दहन बनाई उस दौर में तकनीक सीमित थी लेकिन आस्था असीम थी इस फिल्म में अण्णा सालुंके ने राम और सीता दोनों की भूमिका निभाई जो अपने आप में अनोखा प्रयोग था यह फिल्म भारतीय सिनेमा की शुरुआती सफलताओं में शामिल हुई और इसने पौराणिक कथाओं को परदे पर लाने की परंपरा शुरू की

    इसके बाद दशकों तक इस महागाथा पर फिल्में बनती रहीं राम राज्य जैसी फिल्में अपने समय की बड़ी हिट साबित हुईं जबकि संपूर्ण रामायण ने पूरी कथा को विस्तार से दिखाने की कोशिश की आगे चलकर रामायण द लीजेंड ऑफ प्रिंस रामा जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की एनीमेशन फिल्म ने इस कहानी को वैश्विक पहचान दिलाई वहीं हनुमान बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई

    अगर कुल आंकड़ों की बात करें तो मुख्य कथा पर लगभग पचास फिल्में बन चुकी हैं जबकि अलग अलग पात्रों और घटनाओं को जोड़कर यह संख्या साठ से ज्यादा हो जाती है एनीमेशन और लघु फिल्मों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब दो सौ तक पहुंचता है जो इस बात का प्रमाण है कि हर दौर इस कथा को अपने तरीके से जीना चाहता है

    टीवी की दुनिया में रामानंद सागर की रामायण ने इतिहास रच दिया अरुण गोविल दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी द्वारा निभाए गए किरदार इतने लोकप्रिय हुए कि दर्शकों ने उन्हें पूजनीय मान लिया 1987 से 1988 के बीच प्रसारित इस शो के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और 2020 में दोबारा प्रसारण के समय भी इसने रिकॉर्ड तोड़ दिए

    इसके बाद भी कई टीवी शोज आए जैसे सीता के राम और श्रीमद रामायण कुल मिलाकर हिंदी में कई बड़े और छोटे संस्करण बनाए जा चुके हैं जो इस कथा की निरंतर लोकप्रियता को दर्शाते हैं

    अब एक बार फिर यह महाकाव्य बड़े स्तर पर लौट रहा है निर्देशक नितेश तिवारी की नई फिल्म रामायण में रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल जैसे बड़े कलाकार नजर आएंगे इसे वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी है और इसका पहला भाग दिवाली 2026 में रिलीज होगा

    असल में रामायण की शक्ति इसकी कालातीतता में है इसमें त्याग कर्तव्य प्रेम और धर्म जैसे जीवन के मूल मूल्य समाहित हैं यही वजह है कि तकनीक बदलती है माध्यम बदलते हैं लेकिन यह कथा हर पीढ़ी के लिए नई बनी रहती है और आगे भी यूं ही प्रेरणा देती रहेगी