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  • रीवा में इकलौते बेटे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टरों पर ओवरडोज दवा देने का लगाया आरोप

    रीवा में इकलौते बेटे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने डॉक्टरों पर ओवरडोज दवा देने का लगाया आरोप

    मध्य प्रदेश: के रीवा में एक युवक की मौत के बाद अस्पताल में परिजनों ने हंगामा किया। मृतक परिवार का इकलौता बेटा बताया जा रहा है। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों पर अधिक मात्रा में दवा देने की बात कही। बेटे की मौत से परिवार में शोक का माहौल है। अस्पताल में हुए हंगामे के दौरान परिजनों ने इलाज के तरीके पर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप

    परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान मरीज को दवा की अधिक मात्रा दी गई, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल में नाराजगी जताई। परिवार का कहना है कि बेटे की मौत से उन्हें गहरा सदमा पहुंचा है। हालांकि, दवा की मात्रा, मरीज की स्थिति और मौत के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

    अस्पताल में हंगामे के बाद मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मरीज को किस बीमारी के कारण भर्ती कराया गया था, उसका इलाज किस तरह किया जा रहा था और उसकी हालत में गिरावट कब आई। इन तथ्यों की जानकारी और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही उपचार में किसी तरह की लापरवाही के आरोपों की पुष्टि हो सकती है।

    मौत के कारणों की जांच जरूरी

    इस तरह के मामले में मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, दी गई दवाओं की मात्रा, चिकित्सकीय निगरानी और मौत से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती हैं। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा जरूरी होगी। केवल आरोपों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मरीज की मौत ओवरडोज के कारण हुई।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मृतक की उम्र, अस्पताल का नाम, भर्ती होने की तारीख, इलाज करने वाले डॉक्टरों का पक्ष और पुलिस की कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है। इन जानकारियों के बिना घटना के पूरे क्रम और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं पर निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है।

    मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। जांच में यह सामने आ सकेगा कि मरीज को कौन-सी दवाएं दी गई थीं और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। परिजनों के आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

  • रीवा में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, ससुराल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर पति पर हत्या का आरोप..

    रीवा में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, ससुराल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर पति पर हत्या का आरोप..

    मध्य प्रदेश के रीवा में एक नवविवाहिता की गंभीर चोटों के चलते उपचार के दौरान मौत हो गई। महिला को गंभीर हालत में संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उसके शरीर पर कई जगह धारदार हथियार से किए गए वार के निशान मिले हैं। मृतका की मां ने अपने दामाद पर बेटी की हत्या करने का आरोप लगाया है।

    मृतका की पहचान काजल साकेत के रूप में हुई है। उसका मायका मझगवां में बताया गया है। परिजनों के अनुसार काजल का विवाह 18 अप्रैल 2025 को मैहर जिले के मिरगौती निवासी राजेंद्र साकेत के साथ हुआ था। शनिवार सुबह करीब 11 बजे काजल को उसके मिरगौती स्थित ससुराल पहुंचाया गया था।

    परिजनों का कहना है कि ससुराल पहुंचने के कुछ ही समय बाद काजल का मोबाइल फोन बंद हो गया। इससे मायके पक्ष को चिंता हुई और उन्हें किसी अनहोनी की आशंका होने लगी। कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति के माध्यम से परिजनों को जानकारी मिली कि काजल के साथ गंभीर मारपीट हुई है और उसे इलाज के लिए रीवा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    जानकारी मिलने के बाद काजल की मां अनूपा साकेत अस्पताल पहुंचीं। वहां उन्होंने बेटी को गंभीर हालत में देखा। परिजनों के अनुसार काजल के सिर पर गंभीर चोट थी। इसके अलावा नाक, दोनों हाथों, पैरों, कंधे और पेट सहित शरीर के कई हिस्सों पर धारदार हथियार से वार के निशान मिले।

    गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण काजल की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। अस्पताल में चिकित्सकीय उपचार के दौरान कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में भी लोगों की भीड़ जुट गई।

    मृतका की मां ने आरोप लगाया है कि उसके पति राजेंद्र साकेत ने विवाद के बाद धारदार हथियार से काजल पर हमला किया। मायके पक्ष का कहना है कि घटना के बाद ससुराल पक्ष ने उन्हें तत्काल जानकारी नहीं दी और उन्हें दूसरे व्यक्ति के माध्यम से बेटी के अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिली।

    घटना की सूचना मिलने के बाद अस्पताल चौकी पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और मर्ग कायम किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवाया गया। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाने और घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।

    चूंकि घटना मैहर जिले के मिरगौती क्षेत्र से संबंधित बताई जा रही है, इसलिए मामले की जांच में संबंधित थाना पुलिस के साथ समन्वय किया जा रहा है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    पुलिस की जांच में मृतका के मायके पक्ष के बयान, चोटों की प्रकृति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल हत्या के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। मामले में आरोपी पति समेत संबंधित लोगों से पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।

  • रीवा में तालाब में नहाते समय 22 वर्षीय युवक डूबा, कई घंटे की तलाश के बाद मिला शव, गांव में पसरा मातम

    रीवा में तालाब में नहाते समय 22 वर्षीय युवक डूबा, कई घंटे की तलाश के बाद मिला शव, गांव में पसरा मातम

    मध्य प्रदेश: के रीवा जिले में तालाब में नहाने के दौरान एक युवक की डूबने से मौत हो गई। हादसा पनवार थाना क्षेत्र के देवरी गांव में हुआ, जहां 22 वर्षीय रामेश्वर कोल दोपहर के समय गांव के पास स्थित तालाब में नहाने गया था। नहाते समय वह अचानक गहरे पानी में चला गया और देखते ही देखते पानी में डूब गया।

    घटना के समय तालाब के आसपास मौजूद लोगों ने युवक को पानी में डूबते देखा। उन्होंने तत्काल उसके परिजनों और गांव के अन्य लोगों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तालाब के पास पहुंच गए। इसके बाद युवक की तलाश शुरू की गई।

    ग्रामीणों ने काफी देर तक तालाब में अलग अलग स्थानों पर युवक को खोजने का प्रयास किया। पानी की गहराई अधिक होने के कारण तलाश में परेशानी सामने आई। लगातार कोशिशों के बावजूद शुरुआती दौर में युवक का कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद घटना की जानकारी पनवार पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलने पर पनवार थाना प्रभारी कन्हैया सिंह बघेल पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में ग्रामीणों ने दोबारा तालाब में युवक की तलाश शुरू की। कई घंटे तक चले प्रयास के बाद आखिरकार रामेश्वर कोल का शव तालाब से बरामद कर लिया गया।

    शव मिलने की जानकारी जैसे ही परिवार के लोगों को हुई, वहां चीख पुकार मच गई। युवक की अचानक मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। हादसे की खबर गांव में फैलने के बाद पूरे देवरी क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। ग्रामीण भी घटना से दुखी नजर आए।

    बताया गया कि रामेश्वर कोल गांव का रहने वाला था और सामान्य रूप से तालाब में नहाने के लिए गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में पहुंच गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार पानी की गहराई अधिक होने के कारण वह खुद को संभाल नहीं सका और डूब गया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल उसकी तलाश शुरू की, लेकिन सफलता कई घंटे बाद मिली।

    पुलिस ने युवक के शव को आवश्यक कार्रवाई के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जवा भेज दिया। यहां शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस ने घटना से संबंधित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर गांवों में स्थित तालाबों और जलाशयों में नहाने के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बारिश के मौसम में तालाबों और अन्य जलस्रोतों में पानी का स्तर बढ़ने के साथ गहराई और फिसलन का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे स्थानों पर सावधानी नहीं बरतने की स्थिति में हादसे की आशंका बनी रहती है।

    देवरी गांव में हुए इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भी शोक है। ग्रामीणों का कहना है कि युवक की मौत से परिवार को बड़ा सदमा लगा है। पुलिस की कार्रवाई के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस ने शव बरामद कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • रीवा के संजय गांधी अस्पताल में अर्चना की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए

    रीवा के संजय गांधी अस्पताल में अर्चना की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए

    रीवा: के संजय गांधी अस्पताल में मरीज के इलाज और देखरेख को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। सतना निवासी अर्चना गुप्ता के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ दिनों बाद अर्चना की हालत अचानक बिगड़ गई और उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई।

    जानकारी के मुताबिक, अर्चना गुप्ता 30 अगस्त को स्कूटी हादसे के बाद संजय गांधी अस्पताल में भर्ती हुई थीं। परिजनों का दावा है कि भर्ती के समय वह बातचीत कर रही थीं और उनकी हालत सामान्य थी। परिवार के अनुसार, शुरुआती दिनों के बाद उनकी तबीयत अचानक खराब होने लगी। इसके बाद मरीज की स्थिति को लेकर परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज और देखरेख में कथित लापरवाही के कारण अर्चना के शरीर में कीड़े पड़ने जैसी स्थिति बन गई। परिवार का कहना है कि मरीज की हालत देखकर वे उसे बेहतर इलाज के लिए किसी दूसरे अस्पताल में ले जाना चाहते थे, लेकिन उनके अनुसार डॉक्टरों ने मरीज को रेफर करने की अनुमति नहीं दी।

    मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब परिजन मरीज की स्थिति का वीडियो बनाने के लिए आईसीयू पहुंचे। परिवार का आरोप है कि वहां मौजूद एक डॉक्टर ने उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। इसके बाद अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति बनी और परिजनों ने हंगामा करते हुए जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    फिलहाल अर्चना गुप्ता को संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू नंबर दो में भर्ती बताया जा रहा है। उनकी बेटी नैंसी गुप्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान हुई घटनाओं की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    संजय गांधी अस्पताल में हाल के दिनों में सामने आए अन्य मामलों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पिछले दो सप्ताह के दौरान कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया था। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए थे और मामले में अस्पताल के डॉक्टरों तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी।

    इसके बाद अस्पताल में एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने का मामला भी सामने आया था। इस घटना को लेकर परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इसी अवधि में एक युवक ने आरोप लगाया था कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचने पर उसे कथित तौर पर एंटी रेबीज के बजाय एंटी वेनम इंजेक्शन लगा दिया गया।

    हालांकि अर्चना गुप्ता के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। प्रबंधन के अनुसार मरीज का इलाज चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रख रही है।

    अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इलाज में लापरवाही हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है। ऐसे में अर्चना गुप्ता के मामले में जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और किसी की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

  • रीवा में दिग्विजय सिंह ने संजय गांधी अस्पताल मामले पर किया प्रदर्शन, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग

    रीवा में दिग्विजय सिंह ने संजय गांधी अस्पताल मामले पर किया प्रदर्शन, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग


    मध्य प्रदेश:
    के रीवा में कांग्रेस की ओर से आयोजित धरने में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह शामिल हुए। यह प्रदर्शन संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के विरोध में आयोजित किया गया था। धरने के दौरान दिग्विजय सिंह ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।

    दिग्विजय सिंह देर रात रीवा पहुंचे और जयस्तंभ चौराहे पर चल रहे कांग्रेस के धरने में शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री को इस मामले के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाएगा तो फिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

    उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री अपने गृह जिले रीवा में भी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को बेहतर नहीं कर पा रहे हैं। उनके मुताबिक, जिस अस्पताल को क्षेत्र की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था माना जाता है, वहां लगातार गंभीर घटनाएं सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

    संजय गांधी अस्पताल को लेकर उन्होंने कई मुद्दे उठाए। दिग्विजय सिंह ने अस्पताल में कथित तौर पर जीवित व्यक्ति के पोस्टमार्टम की कोशिश के पुराने मामले का उल्लेख करते हुए मौजूदा घटना से इसे जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक ओर ऐसी गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आते हैं और दूसरी ओर प्रसूता तथा नवजात की मौत जैसी घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं।

    दिग्विजय सिंह ने अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या स्वास्थ्य विभाग में हुई भर्तियों और प्रशिक्षण व्यवस्था में रही खामियों का असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने नर्सिंग भर्तियों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए सरकार से व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और इस दौरान नर्सिंग क्षेत्र में कई विवाद सामने आए हैं। उनके अनुसार, भर्ती प्रक्रिया और स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा नहीं होने से गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि उनके लगाए आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब इस घटनाक्रम में सामने नहीं आया है।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि मरीजों और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए है। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

    इस बीच कल्पना मिश्रा के पिता भी रीवा के सिरमौर चौराहे पर अलग से धरने पर बैठे हैं। बेटी और नवजात की मौत के मामले में परिवार की ओर से जवाबदेही और न्याय की मांग की जा रही है। दो अलग-अलग स्थानों पर चल रहे धरनों के कारण यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

    रीवा में सामने आए इस घटनाक्रम ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, चिकित्सकीय निगरानी और नर्सिंग व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। अब मामले में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई और अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, मौत के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की स्पष्टता जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही सामने आएगी।

  • रीवा में बेकाबू बल्कर ने बस को मारी जोरदार टक्कर, पांच की मौत और 20 से अधिक घायल

    रीवा में बेकाबू बल्कर ने बस को मारी जोरदार टक्कर, पांच की मौत और 20 से अधिक घायल

    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 39 पर बुधवार शाम तेज रफ्तार बल्कर ने यात्रियों से भरी बस को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 से अधिक यात्री घायल हो गए, जिनमें तीन की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हादसे पर दुख व्यक्त कर मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।

    पुलिस के अनुसार, हादसा गुढ़ थाना क्षेत्र में बदवार बस स्टैंड के पास बुधवार शाम करीब 5 बजे हुआ। रीवा से सीधी जा रही पवन ट्रेवल्स की बस क्रमांक एमपी 19-पी 1501 को सीधी से रीवा की ओर आ रहे बल्कर (क्रमांक एनएल 01 एआई 9213) ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बल्कर पलट गया, जबकि बस सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। हादसे के वक्त बस में करीब 30 यात्री सवार थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बस में फंसे यात्रियों और अन्य घायलों को बाहर निकाला गया।

    जानकारी मिलते ही रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक गुरु करण सिंह मौके पर पहुंचे, साथ ही रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा एवं सीधी सांसद राजेश मिश्रा मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने खबर लिखे जाने तक हादसे में पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 20 से अधिक यात्रियों के घायल होने की जानकारी दी है। गंभीर घायलों को उपचार के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुढ़ में जारी है। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इनमें एक 6 साल का मासूम बच्चा भी शामिल है।अस्पताल में चिकित्सकों की टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के समय बारिश हो रही थी। सड़क पर काफी फिसलन थी। बल्कर तेज रफ्तार में था। फिसलन के कारण ड्राइवर वाहन को कंट्रोल नहीं कर पाया और बस को टक्कर मार दी। घायल यात्री पुनीत शुक्ला (30) निवासी ग्राम बघोर (जिला सीधी) ने बताया कि बस में करीब 25 से 30 यात्री सवार थे। बल्कर अचानक अपनी साइड छोड़कर विपरीत दिशा में आ गया और बस को सामने से टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे प्रशासन और पुलिस की टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के बाद रीवा-सीधी मार्ग पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। प्रशासन की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं।

    रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। हादसे के बाद एक तीन साल की एक बच्ची लापता है। उसकी मां हादसे में घायल हुई है और फिलहाल वह कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। कलेक्टर के अनुसार, आशंका है कि बच्ची गड्ढे में दबी हो सकती है। गड्ढा ज्यादा गहरा नहीं है, लेकिन उसमें दलदल है। रेस्क्यू टीम बच्ची की तलाश में जुटी है। फिलहाल बच्ची के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के लापता होने की जानकारी नहीं है।

    इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर दुख जताया है और दिवंगतों की आत्मा को शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स के माध्यम से मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा घायलों को 1-1 लाख रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज और राहत-बचाव कार्य की निगरानी की जा रही है।

    वहीं, पुलिस प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर बल्कर के विपरीत दिशा में आने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। बस के परमिट सहित वाहन से जुड़े अन्य दस्तावेज और बिंदुओं की भी प्रशासन द्वारा जांच की जा रही है। 
  • विंध्य में बाढ़ से बिगड़े हालात, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर; सतना-रीवा में स्कूल बंद

    विंध्य में बाढ़ से बिगड़े हालात, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर; सतना-रीवा में स्कूल बंद


    रीवा।
    मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मानसूनी सिस्टम के चलते लगातार हो रही बारिश ने विंध्य क्षेत्र में हालात बिगाड़ दिए हैं। रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, सिंगरौली और शहडोल संभाग के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    सबसे ज्यादा असर सतना और चित्रकूट में दिखाई दे रहा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रामघाट इलाके में करीब 400 दुकानें और 20 से 25 होटल पानी की चपेट में आ गए हैं। वहीं, रीवा जिले में बिहार और टमस नदियों के बढ़े जलस्तर के साथ तराई क्षेत्र में बेलन नदी भी उफान पर है।

    बांधों के गेट खुलने से बढ़ा पानी का बहाव

    लगातार बारिश के बीच बांधों से छोड़े जा रहे पानी ने भी स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। बाणसागर बांध के आठ गेट खोले जाने के बाद सोन नदी के बहाव में तेजी आई है। इससे नदी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

    बेलन नदी पर बने बांध के गेट भी खोल दिए गए हैं। इसके अलावा टमस नदी पर स्थित बकिया बैराज डैम के गेट खोले जाने से तराई क्षेत्र के गांवों में पानी का दबाव बढ़ गया है। लगातार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।

    चित्रकूट में रामघाट की दुकानें और होटल डूबे

    चित्रकूट में लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रामघाट क्षेत्र में पानी भरने से करीब 400 दुकानें और 20 से 25 होटल प्रभावित हुए हैं।

    जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों और कारोबारियों के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

    सतना, रीवा और मैहर में स्कूल-कॉलेज बंद

    लगातार बारिश और बिगड़ते हालात को देखते हुए सतना, रीवा और मैहर जिलों में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ियों को 2 और 3 सितंबर को बंद रखने का फैसला लिया गया है। अगले दो दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

    अगले दो दिन भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मानसूनी सिस्टम का प्रभाव अभी बना हुआ है। इसके चलते रीवा सहित पूरे विंध्य और आसपास के क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है।

    छतरपुर, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज और सिंगरौली में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सिस्टम का प्रभाव ज्यादा रहने के कारण सतना, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    निचले इलाकों में बढ़ सकता है खतरा

    मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लगातार बारिश होने पर नदियों और नालों का जलस्तर और बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर होने की आशंका है। चित्रकूट में मंदाकिनी का बढ़ा जलस्तर पहले ही हालात को चुनौतीपूर्ण बना चुका है।

    अगले 24 से 48 घंटे विंध्य और मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए अहम माने जा रहे हैं। यदि बारिश का जोर बरकरार रहता है तो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है।

  • रक्षाबंधन पर भोपाल-रीवा यात्रियों को राहत, 25 से 31 अगस्त तक चलेंगी विशेष ट्रेनें और वंदे भारत में बढ़े कोच

    रक्षाबंधन पर भोपाल-रीवा यात्रियों को राहत, 25 से 31 अगस्त तक चलेंगी विशेष ट्रेनें और वंदे भारत में बढ़े कोच

    भोपाल:  रक्षाबंधन के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मध्य प्रदेश में रेलवे ने अतिरिक्त यात्री सुविधाओं की तैयारी की है। भोपाल और रीवा के बीच 25 से 31 अगस्त तक अलग-अलग तारीखों में विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही रीवा और रानी कमलापति के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में भी यात्रियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई गई है।

    रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, त्योहार के दौरान भोपाल-रीवा रेल मार्ग पर अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। गाड़ी संख्या 02155 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 25 अगस्त की रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी।

    इसकी वापसी सेवा गाड़ी संख्या 02156 के रूप में 26 अगस्त को शाम 6 बजकर 35 मिनट पर रीवा से रवाना होगी। ट्रेन अगले दिन सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर भोपाल पहुंचेगी। इससे त्योहार के दौरान दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    इसके अलावा गाड़ी संख्या 02189 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 26 और 27 अगस्त को संचालित की जाएगी। यह ट्रेन दोनों तारीखों में रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी। इसकी वापसी सेवा गाड़ी संख्या 02190 के रूप में 27 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर रीवा से चलेगी और रात 9 बजे भोपाल पहुंचेगी।

    रक्षाबंधन के बाद 29 और 30 अगस्त को भी यात्रियों के लिए विशेष रेल सुविधा उपलब्ध रहेगी। गाड़ी संख्या 02154 रीवा से 29 अगस्त को शाम 6 बजकर 35 मिनट पर रवाना होकर अगले दिन सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर भोपाल पहुंचेगी। वहीं गाड़ी संख्या 02180 भी 30 अगस्त को रीवा से भोपाल के लिए संचालित होगी।

    इसके बाद गाड़ी संख्या 02179 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 31 अगस्त की रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी। इन विशेष ट्रेनों के संचालन से त्योहार के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    विशेष ट्रेनों का मार्ग विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, मैहर और सतना से होकर रहेगा। इससे केवल भोपाल और रीवा के यात्रियों को ही नहीं, बल्कि मार्ग में आने वाले कई शहरों और कस्बों के यात्रियों को भी अतिरिक्त रेल सुविधा मिल सकेगी।

    इसके अलावा रीवा-रानी कमलापति-रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस में भी यात्रियों की सुविधा के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। 7 अगस्त से 24 अक्टूबर 2026 तक इस ट्रेन में 8 की जगह 16 कोच वाली रेक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    कोच की संख्या दोगुनी किए जाने से ट्रेन में उपलब्ध सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे त्योहारी सीजन में आरक्षित टिकट की मांग पूरी करने और यात्रियों को अतिरिक्त सीट उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले ट्रेन के समय और ठहराव की जानकारी की पुष्टि करने की अपील की है। यात्रियों को स्टेशन, रेलवे की हेल्पलाइन 139 और रेल ऐप के माध्यम से ताजा जानकारी लेने की सलाह दी गई है। त्योहार के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों और बढ़ी हुई क्षमता से भोपाल-रीवा मार्ग पर यात्रियों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है।

  • आजादी के 80वें पर्व पर स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का निधन, रीवा में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

    आजादी के 80वें पर्व पर स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का निधन, रीवा में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

    मध्य प्रदेश: के रीवा जिले में स्वतंत्रता दिवस का दिन एक ओर देशभक्ति के उत्सव और दूसरी ओर एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की अंतिम विदाई का गवाह बना। जवा तहसील के डोरी-भितरी गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का 15 अगस्त 2026 को निधन हो गया। जिस दिन देश आजादी का 80वां पर्व मना रहा था, उसी दिन गांव ने उस सेनानी को अंतिम विदाई दी, जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए जेल की सजा भुगती थी।

    जवाहर सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1932 के राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें छह महीने के कारावास की सजा हुई थी। इसके साथ ही उन पर 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य चरणों में भी योगदान दिया और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तथा नमक आंदोलन से जुड़े रहे।

    स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल जाने और आर्थिक दंड भुगतने के बावजूद जवाहर सिंह की देश के प्रति प्रतिबद्धता कम नहीं हुई। आजादी के बाद भी उन्होंने सामाजिक जीवन में अपनी जिम्मेदारियों को महत्व दिया और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों और उसके मूल्यों के बारे में बताते रहे।

    उनके परिवार के अनुसार, जवाहर सिंह स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को अपने बच्चों और पोतों तक पहुंचाते रहे। उनका मानना था कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि देश को स्वतंत्रता आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए अनेक लोगों ने संघर्ष, त्याग और कठिनाइयों का सामना किया था।

    स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मिलने वाली सम्मान निधि को लेकर भी जवाहर सिंह की सोच अलग रही। बताया जाता है कि उन्होंने शुरुआती दौर में सम्मान निधि लेने से इनकार कर दिया था। उनका विचार था कि शासन की राशि का उपयोग जनहित और देशहित के कार्यों में किया जाना चाहिए। बाद में उन्होंने इस उम्मीद के साथ सम्मान निधि स्वीकार की कि उनके परिवार को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के रूप में सम्मान और पहचान मिलती रहे।

    जवाहर सिंह के तीन पुत्र कमल नारायण सिंह, कमलाकर सिंह और प्रभाकर सिंह हैं। परिवार ने उनके जीवन से जुड़े स्वतंत्रता आंदोलन के अनुभवों और मूल्यों को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके निधन के बाद परिवार के साथ क्षेत्र के लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    15 अगस्त को उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया राजकीय सम्मान के साथ पूरी की गई। अंतिम यात्रा में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों ने पुष्पचक्र और पुष्प अर्पित कर स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पुलिस जवानों की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी।

    अंतिम संस्कार में सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, राज्यसभा सांसद राजमणि सिंह पटेल, युवराज घनश्याम सिंह बसरेही, संचार निर्माण समिति अध्यक्ष प्रवल पाण्डेय, जवा तहसीलदार राजेश शुक्ला और अतरैला थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। जवाहर सिंह के बड़े पुत्र कमल नारायण सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    जवाहर सिंह के अंतिम संस्कार में हजारों ग्रामीणों के शामिल होने की बात सामने आई। लोगों ने उनकी पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए और अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। स्वतंत्रता दिवस के दिन गांव में तिरंगे और देशभक्ति के वातावरण के बीच शोक का माहौल भी दिखाई दिया।

    जवाहर सिंह का सार्वजनिक जीवन में भी क्षेत्र के कई प्रमुख लोगों से संपर्क रहा। बताया जाता है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी उनका संपर्क रहा था। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी और सामाजिक जीवन में सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई।

    जवाहर सिंह की अंतिम विदाई उस पीढ़ी को सम्मान देने का अवसर भी बनी, जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा संघर्ष में बिताया। 15 अगस्त को जब देश आजादी का उत्सव मना रहा था, उसी दिन रीवा के डोरी-भितरी गांव ने एक स्वतंत्रता सेनानी को अंतिम सलामी देकर उनके योगदान को याद किया।

  • MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर समेत 52 जिलों में बूंदाबांदी के आसार

    MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर समेत 52 जिलों में बूंदाबांदी के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी के बीच शनिवार को पन्ना, सतना और रीवा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इन तीनों जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत प्रदेश के 52 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है।

    IMD के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 16.8 इंच (426.6 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 21 इंच (533.6 मिमी) पानी गिरना चाहिए था। इस तरह प्रदेश में 4.2 इंच यानी 20% बारिश कम हुई है। सीजन में अब तक हुई बारिश सामान्य कोटे की आधी भी नहीं है। प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है।

    दतिया में 24 घंटे में 3.5 इंच बारिश
    शुक्रवार को दतिया में बारिश ने जोरदार दस्तक दी। यहां सुबह महज 4 घंटे में करीब 1.57 इंच (40 मिमी) बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि 24 घंटे में कुल 3.5 इंच पानी बरसा। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया, जिसके बाद स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी।

    भांडेर और सेवढ़ा ब्लॉक में कक्षा 8वीं से ऊपर के स्कूलों को लेकर फैसला स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर संस्था प्रमुखों पर छोड़ दिया गया है। रायसेन में भी शुक्रवार सुबह करीब 15 मिनट तेज बारिश हुई। इसके बाद रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा, जिससे कई सड़कों पर पानी भर गया।

    सीधी में सोन नदी के पुल पर पानी, 40 गांवों का संपर्क प्रभावित
    सीधी जिले के भंवरसेन घाट पर शुक्रवार सुबह हुई तेज बारिश के बाद सोन नदी के पुल पर पानी भर गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुल को बंद कर दिया गया, जिससे करीब 40 गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट गया।

    भंवरसेन पहाड़ी से मिट्टी और पत्थर भी खिसककर सड़क पर आ रहे हैं। इससे मार्ग पर हादसे का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा खरगोन, सतना, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और रायसेन समेत कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

    पूर्वी MP में 23% कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में अब तक 23% कम बारिश हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला औसत से आगे नहीं है।

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 5% से 48% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से में भी बारिश का आंकड़ा माइनस में
    भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग वाले पश्चिमी हिस्से में भी औसत से 17% कम बारिश हुई है। आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 6 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिस्से के सिर्फ ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन में अब तक औसत से ज्यादा बारिश हुई है। बाकी अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।