Tag: road safety

  • चेकिंग से बचने की कोशिश पड़ी भारी, नशे में कार दौड़ा रहे युवक की गाड़ी पेड़ से भिड़ी, पुलिस ने हिरासत में लिया

    चेकिंग से बचने की कोशिश पड़ी भारी, नशे में कार दौड़ा रहे युवक की गाड़ी पेड़ से भिड़ी, पुलिस ने हिरासत में लिया


    इंदौर । इंदौर में पुलिस की चेकिंग से बचने की कोशिश एक कार चालक को भारी पड़ गई। कनाडिया थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात पुलिस की नाकेबंदी देखकर नशे में धुत कार चालक ने अचानक यू-टर्न ले लिया। वह चेकिंग पॉइंट से करीब 300 मीटर पहले तेज रफ्तार में गाड़ी मोड़ने लगा। इसी दौरान कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और दोनों एयरबैग खुल गए। गनीमत रही कि एयरबैग खुलने से चालक को गंभीर चोट नहीं आई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे कार से बाहर निकाला और हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और शराब के नशे में ड्राइविंग करने के मामले दर्ज किए हैं।

    पुलिस के मुताबिक शनिवार देर रात बायपास पर केटू होटल के पास ब्रिज के नीचे वाहनों की जांच के लिए चेकिंग पॉइंट बनाया गया था। यहां पुलिसकर्मी बैरिकेड्स लगाकर आने जाने वाले वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान राऊ निवासी हुजैफा पिता अब्दुल कय्यूब अपनी कार लेकर वहां पहुंचा। सामने पुलिस की चेकिंग और बैरिकेड्स देखकर वह घबरा गया। पुलिस के मुताबिक पकड़े जाने से बचने के लिए उसने चेकिंग स्थल तक पहुंचने के बजाय करीब 300 मीटर पहले ही कार को अचानक मोड़ दिया।

    तेज रफ्तार में अचानक यू-टर्न लेने के कारण चालक कार पर नियंत्रण नहीं रख सका। गाड़ी सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई। टक्कर के बाद कार के एयरबैग खुल गए। इससे चालक को गंभीर चोट लगने से बचाव हुआ। दुर्घटना की आवाज सुनकर और कार को टकराते देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने चालक को बाहर निकाला और उससे पूछताछ की। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान चालक के शराब के नशे में होने की बात सामने आई। इसके बाद उसके परिजनों को भी घटना की सूचना दी गई।

    पुलिस ने हुजैफा के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और शराब के नशे में गाड़ी चलाने से संबंधित बीएनएस की विभिन्न धाराओं में दो अलग-अलग अपराध दर्ज किए हैं। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए अचानक दिशा बदलना न केवल चालक के लिए खतरनाक साबित हो सकता है बल्कि सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की जान भी जोखिम में डाल सकता है। इस घटना में एयरबैग खुलने से चालक की जान बच गई लेकिन कार की हालत देखकर टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    इधर शहर के विजयनगर थाना क्षेत्र में भी रविवार अलसुबह सड़क हादसा हुआ। रेडिसन चौराहे पर दो कारों के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों कारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हालांकि पुलिस के मुताबिक इस दुर्घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई। हादसे के बाद एक कार में सवार युवक और युवती अपनी गाड़ी मौके पर छोड़कर चले गए। पुलिस अब इस मामले में भी जानकारी जुटा रही है और दोनों घटनाओं में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

    लगातार हो रहे ऐसे हादसे एक बार फिर तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाने के खतरों को सामने लाते हैं। यातायात नियमों का पालन करना और शराब पीने के बाद वाहन न चलाना सड़क पर अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

  • इंदौर के 4 बड़े चौराहों पर बदलेगा ट्रैफिक का पूरा सिस्टम, लेफ्ट टर्न रहेगा फ्री और रॉन्ग साइड चलने वालों पर लगेगी रोक

    इंदौर के 4 बड़े चौराहों पर बदलेगा ट्रैफिक का पूरा सिस्टम, लेफ्ट टर्न रहेगा फ्री और रॉन्ग साइड चलने वालों पर लगेगी रोक


    इंदौर । इंदौर शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अब चार प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक का नया पैटर्न लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाईकोर्ट की ओर से गठित समिति ने शहर के रसोमा चौराहा एलआईजी चौराहा लेंटर्न चौराहा और हुकुमचंद घंटाघर चौराहे को टेस्ट प्रोजेक्ट के लिए चुना है। इन स्थानों पर लेफ्ट टर्न को पूरी तरह फ्री रखने और रॉन्ग साइड से आने वाले वाहनों पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही यातायात की रफ्तार में बाधा बनने वाले स्पीड ब्रेकर भी हटाए जा रहे हैं। समिति का मानना है कि इन बदलावों से चौराहों पर वाहनों की आवाजाही आसान होगी और बार बार लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सकती है।

    शनिवार को हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और प्रमुख चौराहों पर लगने वाले जाम की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने माना कि कई चौराहों पर लेफ्ट टर्न की ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इसकी वजह से दूसरे रास्तों से निकलने वाले वाहन भी फंस जाते हैं और पूरे चौराहे पर यातायात प्रभावित होता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए चार स्थानों पर नई व्यवस्था का परीक्षण करने का निर्णय लिया गया।

    अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी के मुताबिक इन चारों चौराहों पर लेफ्ट टर्न की ओर सबसे ज्यादा जाम की स्थिति बनती है। इसलिए इस रास्ते को बाधा मुक्त रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए रॉन्ग साइड से आने वाले वाहनों को रोकना जरूरी माना गया है। कई बार वाहन चालक कम दूरी तय करने या जल्दी निकलने के चक्कर में गलत दिशा से वाहन ले आते हैं। इससे सामने से आने वाले वाहनों का रास्ता बाधित होता है और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे वाहनों पर नियंत्रण किया जाएगा ताकि चौराहों पर यातायात व्यवस्थित तरीके से चल सके।

    समिति ने चौराहों पर लगे स्पीड ब्रेकर को भी जाम की एक वजह माना है। इनके कारण वाहनों की गति अचानक कम होती है और पीछे चल रहे वाहनों की कतार बढ़ने लगती है। ऐसे में चयनित स्थानों पर स्पीड ब्रेकर हटाने का काम भी किया जा रहा है। हालांकि यह पूरा प्रयोग फिलहाल परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। समिति इसके परिणामों पर नजर रखेगी और यह आकलन करेगी कि नई व्यवस्था से वास्तव में जाम कम हो रहा है या नहीं। यदि चारों चौराहों पर इसका सकारात्मक असर दिखाई देता है तो शहर के दूसरे प्रमुख चौराहों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।

    बैठक में यातायात सुधार के पुराने प्रयासों की समीक्षा करने पर भी सहमति बनी। इसके लिए हाईकोर्ट की ओर से पहले गठित समिति की रिपोर्ट मंगाई गई है। वर्तमान समिति उस रिपोर्ट में दिए गए सुझावों और उन पर हुई कार्रवाई का आकलन करेगी। इसके अलावा शहर में हर महीने यातायात जागरूकता अभियान चलाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी आदतों पर रोक लगाना है।

    समिति में अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी के साथ शासकीय अधिवक्ता डॉ. अमित भाटिया कलेक्टर शिवम वर्मा नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल इंदौर स्मार्ट सिटी के सीईओ डीसीपी ट्रैफिक और आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियर अंशुल अग्रवाल शामिल हैं। समिति की अगली बैठक 10 नवंबर को होगी। वहीं इंदौर की यातायात व्यवस्था से जुड़ी याचिकाओं पर हाईकोर्ट में 30 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान समिति शहर में किए जा रहे सुधारों और चार चौराहों पर शुरू किए गए टेस्ट प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश कर सकती है। अब इन बदलावों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वाहन चालक नियमों का कितना पालन करते हैं और प्रशासन नई व्यवस्था को कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है।

  • इंदौर आ रहे दो ब्रांच मैनेजरों की दर्दनाक मौत, साथियों का इंतजार करते समय तेज रफ्तार क्रेन ने मारी टक्कर

    इंदौर आ रहे दो ब्रांच मैनेजरों की दर्दनाक मौत, साथियों का इंतजार करते समय तेज रफ्तार क्रेन ने मारी टक्कर


    इंदौर । इंदौर में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गई। दोनों युवक एक फाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत थे और झाबुआ से इंदौर में आयोजित मीटिंग में शामिल होने के लिए निकले थे। एयरपोर्ट रोड पर नावदापंथ ब्रिज के पास रात करीब 9 बजे तेज रफ्तार क्रेन वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। घटना की खबर मिलते ही कंपनी के कर्मचारियों और साथियों में शोक छा गया।

    जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को फाइनेंस कंपनी के चार कर्मचारी दो बाइकों पर सवार होकर झाबुआ से इंदौर आ रहे थे। सभी को कंपनी की मीटिंग में शामिल होना था। रास्ते में दूसरी बाइक पर सवार उनके दो साथी कुछ पीछे रह गए। इसके बाद आगे चल रहे दोनों युवकों ने अपनी बाइक रोक दी और साथियों का इंतजार करने लगे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रहे क्रेन वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि दोनों युवक सड़क पर गिरकर बुरी तरह घायल हो गए।

    हादसे के वक्त पीछे आ रहे दोनों साथियों ने घटना को अपनी आंखों से देखा। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों की मदद करने में जुट गए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। हालांकि गंभीर चोटों के चलते दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने साथ आए कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया।

    मृतकों की पहचान रोहित मीणा निवासी सुगांव और नौशाद निवासी शाजापुर जिले के करई के पास स्थित एक गांव के रूप में हुई है। दोनों फाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे। शनिवार दोपहर दोनों के शवों का अलग-अलग अस्पतालों में पोस्टमार्टम कराया गया। रोहित का शव एमवाय अस्पताल भेजा गया था जबकि नौशाद का शव जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखा गया।

    कंपनी में उनके साथ काम करने वाले राहुल ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद वे चंदन नगर थाने पहुंचे। इसके बाद अस्पताल जाकर साथियों के बारे में जानकारी ली। घटना की खबर फैलने पर कंपनी के अन्य कर्मचारी भी अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में अपने साथियों को खोने का दुख कर्मचारियों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।

    दोनों युवक काम के सिलसिले में इंदौर आ रहे थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि रास्ते में साथियों का इंतजार करने के दौरान यह हादसा हो जाएगा। एक ही कंपनी में काम करने वाले चार कर्मचारी साथ निकले थे लेकिन इस सफर का अंत दो परिवारों के लिए बेहद दुखद साबित हुआ।

    फिलहाल पुलिस हादसे से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्रेन वाहन किस गति से आ रहा था और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है।

  • इंदौर बायपास की बदहाली पर 27 अक्टूबर को फिर सुनवाई, NHAI ने पेश की तस्वीरें, हाईकोर्ट ने मांगी जमीनी हकीकत

    इंदौर बायपास की बदहाली पर 27 अक्टूबर को फिर सुनवाई, NHAI ने पेश की तस्वीरें, हाईकोर्ट ने मांगी जमीनी हकीकत


    इंदौर। इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने अदालत में तस्वीरें पेश करते हुए दावा किया कि बायपास पर मौजूद गड्ढों को भर दिया गया है और अब वहां पहले जैसी समस्या नहीं है। हालांकि सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर याचिकाकर्ता की ओर से पहले भी सवाल उठाए गए थे। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को मौके पर जाकर सड़क का निरीक्षण करने और वास्तविक स्थिति से अदालत को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डबल बेंच में हुई। अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान NHAI से यह बताने को कहा था कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद बायपास की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
    इंदौर-देवास बायपास की बदहाली को लेकर मातृ फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2021 में जनहित याचिका दायर की गई थी। एडवोकेट अमेय बजाज के माध्यम से दायर इस याचिका में सड़क की खराब स्थिति और वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार बायपास पर बड़े-बड़े गड्ढे और खराब सर्विस रोड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। इसके अलावा खुले ड्रेनेज और जलभराव की समस्या भी सामने रखी गई है। कुछ स्थानों पर स्ट्रीट लाइट खराब या बंद होने का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि इससे रात के समय वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। याचिका में दुर्घटना संभावित स्थानों और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है।
    तीन दिन पहले हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि बायपास की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि गड्ढे में गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। उनका कहना था कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं होने के कारण सड़क पर हादसों का खतरा बना हुआ है। हालांकि NHAI ने शुक्रवार को तस्वीरें पेश कर दावा किया कि गड्ढों को भरने का काम पूरा कर लिया गया है और समस्या दूर हो चुकी है। अब अदालत के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता मौके पर जाकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखेंगे। उनका निरीक्षण और उसके आधार पर अदालत में दी जाने वाली जानकारी अगली सुनवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
    इस मामले में सड़क सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन भी प्रमुख मुद्दा है। याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग और अवैध ढाबों के साथ व्यावसायिक अतिक्रमण पर नियंत्रण की मांग की गई है। इसके अलावा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां चेतावनी संकेतक लगाने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। प्रकाश व्यवस्था बेहतर बनाने और यातायात की निगरानी मजबूत करने की जरूरत भी उठाई गई है। आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करना भी याचिका में उठाए गए मुद्दों में शामिल है।
    अब 27 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में बायपास की मौजूदा हालत और सुधार कार्यों को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। NHAI के दावे और याचिकाकर्ता के मौके पर किए जाने वाले निरीक्षण के बाद अदालत के सामने सड़क की वास्तविक स्थिति से जुड़ी जानकारी आएगी। ऐसे में इंदौर-देवास बायपास से गुजरने वाले वाहन चालकों की नजर अब अगली सुनवाई पर रहेगी।

  • हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम

    हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी लगातार हादसों की वजह बन रही है। बुधवार रात सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां सड़क पर बैठे बैल से बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार 38 वर्षीय विकास भार्गव गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में बैल की भी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक खेड़ापति कॉलोनी शिवपुरी निवासी विकास भार्गव बुधवार को किसी काम से बाइक लेकर ग्वालियर गए थे। रात करीब 8 बजे वह ग्वालियर से शिवपुरी वापस लौट रहे थे। इसी दौरान मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास सड़क पर एक बैल बैठा हुआ था। अंधेरा होने के कारण बाइक सवार को सड़क पर बैठे बैल का अंदाजा नहीं हो सका और बाइक सीधे उससे जा टकराई। प्रत्यक्ष तौर पर टक्कर बेहद तेज बताई जा रही है।

    हादसे के बाद विकास सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। हाईवे एंबुलेंस की मदद से घायल विकास भार्गव को मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने विकास को मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में भी मातम पसर गया।

    यह हादसा ऐसे समय हुआ जब इसी दिन शिवपुरी जिले में गौवंश से जुड़ा एक और गंभीर सड़क हादसा सामने आया था। सतनबाड़ा थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर सुबह एक कार सड़क पर मौजूद गौवंश से टकरा गई थी। बताया गया कि कार में उत्तर प्रदेश के दो लोग सवार थे। हादसे के दौरान सड़क पर मौजूद आठ गौवंश में से छह की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गए। टक्कर के बाद कार में सवार दोनों लोग वाहन के भीतर फंस गए थे जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।

    बुधवार सुबह हुए इस हादसे के कुछ घंटे बाद रात में सुभाषपुरा इलाके में बैल से बाइक की टक्कर ने एक और जान ले ली। एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर रात के समय हाईवे पर बैठे या अचानक सड़क पर आ जाने वाले गौवंश वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

    प्रशासन की ओर से सड़कों पर बैठे गौवंश को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हाईवे और प्रमुख सड़कों पर बड़ी संख्या में गौवंश नजर आने की बात सामने आ रही है। लगातार हो रहे हादसों में कई गौवंश की भी मौत हो चुकी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार ऐसी घटनाओं में अब तक करीब आधा सैकड़ा गौवंश की मौत होने की बात कही जा रही है। विकास भार्गव की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क पर बैठे गौवंश को हटाने के लिए जारी आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन कब होगा।

  • बैरसिया रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने ली मैकेनिक की जान, पीछे से टक्कर के बाद दो ट्रकों के बीच फंसे प्यारे मियां

    बैरसिया रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने ली मैकेनिक की जान, पीछे से टक्कर के बाद दो ट्रकों के बीच फंसे प्यारे मियां


    भोपाल । भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 54 वर्षीय फोर व्हील मैकेनिक की मौत हो गई। प्यारे मियां रोज की तरह अपने परिवार के साथ लांबाखेड़ा स्थित घर पर थे और रात करीब 8 बजे दूध लेने के लिए चौरसिया ढाबे की तरफ निकले थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि घर से कुछ दूरी पर हुआ एक सड़क हादसा उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। ढाबे के पास पहुंचते ही पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वे संभल भी नहीं सके और ट्रक के आगे बढ़ने के साथ ही सामने खड़े दूसरे ट्रक की चपेट में आ गए।

    बताया जा रहा है कि सड़क पर पहले से एक ट्रक खड़ा हुआ था। पीछे से आ रहे ट्रक ने प्यारे मियां को टक्कर मारने के बाद आगे खड़े ट्रक को भी टक्कर मार दी। इस दौरान प्यारे मियां दोनों भारी वाहनों के बीच फंस गए। हादसा इतना भीषण था कि उन्हें बचने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। हादसे की जानकारी तत्काल पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही ईंटखेड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। प्यारे मियां के अचानक चले जाने से परिजन सदमे में हैं।

    पुलिस के मुताबिक हादसे के बाद ट्रक चालक मौके पर वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस अब ट्रक को कब्जे में लेकर चालक की तलाश कर रही है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ के साथ हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रक की रफ्तार कितनी थी और सड़क पर खड़े दूसरे ट्रक की स्थिति क्या थी।

    बैरसिया रोड और आसपास के इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में सड़क पर खड़े वाहनों और तेज रफ्तार ट्रकों के कारण हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात के समय सड़क पर पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने और वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी नहीं होने की स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है इसका दर्दनाक उदाहरण यह हादसा बन गया है।

    फिलहाल ईंटखेड़ी थाना पुलिस फरार ट्रक चालक की तलाश में जुटी है। पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद प्यारे मियां का शव परिजनों को सौंप दिया गया है। परिवार के लिए यह हादसा अचानक आई ऐसी त्रासदी है जिसने कुछ ही देर में एक सामान्य रात को मातम में बदल दिया।

  • एमपी की सड़कों पर मौत की रफ्तार, रोज 142 हादसे और 40 मौतें, जानलेवा दुर्घटनाओं में देश में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश

    एमपी की सड़कों पर मौत की रफ्तार, रोज 142 हादसे और 40 मौतें, जानलेवा दुर्घटनाओं में देश में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार लगातार लोगों की जान ले रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत ताजा आंकड़ों ने राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में हर दिन औसतन 142 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें करीब 40 लोगों की मौत हो जाती है। सड़क हादसों की गंभीरता के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है और जानलेवा दुर्घटनाओं के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि 2025 में कुल सड़क दुर्घटनाओं की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत नहीं मिली, क्योंकि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। यह दर्शाता है कि दुर्घटनाओं की संख्या कम होने के बावजूद उनकी गंभीरता और घातक प्रभाव बढ़ा है।

    देश के अन्य राज्यों से तुलना करें तो तमिलनाडु में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में हादसों की संख्या अधिक होने के बावजूद प्रतिदिन औसतन 40 लोगों की मौत दर्ज की गई है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।

    बढ़ती दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार 4E रणनीति पर काम कर रही हैं। इसका पहला हिस्सा एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसके तहत ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और विभिन्न जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित वाहन चलाने और यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर उन्हें सुधारा जा रहा है। नए और पुराने राजमार्गों का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। साथ ही वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग सिस्टम, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। वाहन सुरक्षा के लिए भारत एनकैप (Bharat NCAP) क्रैश टेस्ट रेटिंग भी लागू की गई है।

    तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

    चौथा महत्वपूर्ण हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक कर दिया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों को कम करने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना जैसी आदतों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। जब तक यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में अपेक्षित कमी लाना चुनौती बना रहेगा।

  • सड़क सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट, मध्य प्रदेश में हादसे कम हुए लेकिन मौतें बढ़ीं, लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े

    सड़क सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट, मध्य प्रदेश में हादसे कम हुए लेकिन मौतें बढ़ीं, लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार अब लगातार जानलेवा साबित हो रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश ताजा आंकड़ों ने राज्य में सड़क सुरक्षा की चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में हर दिन औसतन 142 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें करीब 40 लोगों की जान चली जाती है। यही वजह है कि सड़क हादसों के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया है और जानलेवा दुर्घटनाओं को लेकर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

    रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क दुर्घटनाओं और मौतों दोनों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि वर्ष 2025 में कुल सड़क हादसों की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत की बात नहीं है, क्योंकि दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। इसका सीधा मतलब है कि हादसों की संख्या भले कम हुई हो, लेकिन वे पहले से कहीं अधिक घातक साबित हो रहे हैं।

    देशव्यापी आंकड़ों पर नजर डालें तो सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में तमिलनाडु पहले स्थान पर है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे अधिक लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में प्रतिदिन होने वाले हादसों की संख्या उत्तर प्रदेश से अधिक है, लेकिन मौतों का औसत 40 प्रतिदिन दर्ज किया गया है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती को उजागर करती है।

    बढ़ते हादसों और मौतों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 4E रणनीति पर काम तेज किया है। इसके तहत पहला कदम एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसमें ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना, सड़क सुरक्षा अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग की आदत विकसित हो।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर सुधार किया जा रहा है। नए और पुराने हाईवे का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। वहीं वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। साथ ही भारत एनकैप क्रैश टेस्ट रेटिंग व्यवस्था भी लागू की गई है।

    तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है।

    चौथा और सबसे अहम हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर चोट पर मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी पर प्रभावी नियंत्रण के साथ सड़क सुरक्षा के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना भी जरूरी है। तभी मध्य प्रदेश समेत देशभर में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

  • जमोनिया रोड पर भीषण सड़क हादसा दो मोटरसाइकिलों की जोरदार टक्कर में दो युवकों ने तोड़ा दम

    जमोनिया रोड पर भीषण सड़क हादसा दो मोटरसाइकिलों की जोरदार टक्कर में दो युवकों ने तोड़ा दम


    सीहोर । सीहोर जिले में रविवार रात एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। जमोनिया रोड स्थित ऋषभ वाटिका के सामने दो तेज रफ्तार मोटरसाइकिलों की आमने सामने हुई जोरदार टक्कर में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइकें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और दोनों सवारों को संभलने का कोई मौका नहीं मिला। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए।

    हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान शेरपुर निवासी 30 वर्षीय अकबर खान पुत्र बसारत खान और जमोनिया निवासी 20 वर्षीय रितेश पुत्र लक्ष्मीनारायण भिलाला के रूप में हुई है। दोनों युवक अपनी अपनी मोटरसाइकिल से विपरीत दिशा से आ रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों वाहन तेज गति में थे। अचानक आमने सामने आने के बाद दोनों चालक बाइक पर नियंत्रण नहीं रख सके और भीषण टक्कर हो गई। टक्कर का असर इतना जबरदस्त था कि दोनों युवकों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

    हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी। मंडी थाना पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित करते हुए शवों को कब्जे में लिया। इसके बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त मोटरसाइकिलों को भी जब्त कर लिया है और घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं।

    मंडी थाना प्रभारी सुनील मेहर ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसे की मुख्य वजह तेज रफ्तार थी या फिर किसी अन्य कारण से यह दुर्घटना हुई। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    इस दर्दनाक हादसे के बाद दोनों मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। एक पल की लापरवाही और तेज रफ्तार ने दो युवाओं की जिंदगी खत्म कर दी। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार वाहन चालकों को निर्धारित गति सीमा का पालन करने और सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की सलाह देते हैं। पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि तेज रफ्तार से बचें और यातायात नियमों का पालन करें ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

  • कानपुर में दर्दनाक हादसा कंटेनर ने ट्रैफिक सिपाहियों को कुचला एक की मौत ड्राइवर भी मरा

    कानपुर में दर्दनाक हादसा कंटेनर ने ट्रैफिक सिपाहियों को कुचला एक की मौत ड्राइवर भी मरा


    उत्तरप्रदेश। कानपुर में सोमवार तड़के बर्रा एलिवेटेड रोड पर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। ड्यूटी पर तैनात दो ट्रैफिक सिपाही जब एक ट्रक को रोककर उसके दस्तावेजों की जांच कर रहे थे, तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक कंटेनर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर अफरा तफरी मच गई और कुछ ही पलों में हालात बेकाबू हो गए।

    जानकारी के अनुसार ट्रैफिक कांस्टेबल जितेंद्र कुमार और राकेश कुमार नौबस्ता चौराहे पर ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान झारखंड नंबर का एक खाली ट्रक पनकी प्लांट की ओर जा रहा था। शक के आधार पर दोनों सिपाहियों ने ट्रक को रोका और चालक को नीचे उतारकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। वे ट्रक के पीछे खड़े होकर पूछताछ कर ही रहे थे कि तभी पीछे से तेज रफ्तार कंटेनर आया और ट्रक को जोरदार टक्कर मार दी।

    हादसे के बाद कंटेनर लगभग 50 मीटर तक वाहन को घसीटता हुआ ले गया। इस दौरान दोनों सिपाही और ट्रक चालक उसकी चपेट में आ गए। हादसे में कांस्टेबल जितेंद्र कुमार की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे सिपाही राकेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ट्रक चालक रितेश कुमार यादव की भी इस हादसे में मौत हो गई।

    जितेंद्र कुमार 2018 बैच के सिपाही थे और आगरा के रहने वाले थे। उनकी शादी 2020 में हुई थी और उनकी एक ढाई साल की बेटी भी है। इस घटना ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं घायल सिपाही राकेश कुमार का इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। हादसे के बाद एलिवेटेड रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा और लंबा जाम लग गया।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसा तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कंटेनर चालक की पहचान तथा उसकी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया जारी है।

    यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की रफ्तार पर सवाल खड़े करती है। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।