Tag: Samajwadi Party

  • संजय निषाद ने अखिलेश यादव के 100 विधायक ऑफर पर साधा निशाना, कहा- भाड़े के पहलवानों से अखाड़ा नहीं जीत सकते

    संजय निषाद ने अखिलेश यादव के 100 विधायक ऑफर पर साधा निशाना, कहा- भाड़े के पहलवानों से अखाड़ा नहीं जीत सकते


    नई दिल्ली । भदोही से जारी राजनीतिक बयानबाजी में यूपी के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 100 विधायक लाकर मुख्यमंत्री बनने के ऑफर पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि सपा नेतृत्व खुद को कमजोर मान रहा है और दूसरों के सहारे सत्ता में आने का सपना देख रहा है। संजय निषाद ने तंज कसते हुए कहा “भाड़े के पहलवानों से अखाड़ा नहीं जीत सकते।

    भदोही में निषाद पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान मीडिया से बात करते हुए संजय निषाद ने साफ किया कि सपा का यह बयान ही साबित करता है कि उनके पास सरकार बनाने की ताकत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि PDA संकट में है और यदि यह स्थिति बनी रही तो 2027 के चुनाव में सपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। संजय निषाद ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि वे असली पहलवान तैयार करते थे और संगठन को जमीन पर खड़ा करते थे जबकि आज अखिलेश यादव केवल ‘भाड़े के पहलवानों’ के सहारे सत्ता हासिल करना चाहते हैं।

    संजय निषाद ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पूरे सनातन समाज के पूज्यनीय हैं और उनके साथ किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने न्याय प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि कानून अपना काम करेगा और निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी। साथ ही उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की भी मांग की।

    संजय निषाद की यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। उनका कहना है कि सपा का यह ऑफर केवल हवा में बातें करने जैसा है और सत्ता हासिल करने के लिए असली संगठन और जमीन पर संघर्ष जरूरी है। उनका निशाना स्पष्ट रूप से यह दिखाता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और गठबंधन की ताकत पर सवाल उठ रहे हैं।

    उल्लेखनीय है कि इस बयान के बीच शंकराचार्य विवाद भी गर्म बना हुआ है जिसमें बालकों की शिखा खींचने और गिरफ्तारी का मुद्दा शामिल है। संजय निषाद ने कहा कि इस घटना से समाज आहत है लेकिन कानून सच्चाई सामने लाएगा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित होगी। यूपी की सियासी हलचल में यह बयान और विवाद दोनों ही चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

  • UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र

    UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR के दौरान फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे गैर-कानूनी तरीके से वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन कर रहे हैं.

    1 फरवरी और 2 फरवरी को जारी बयानों में कन्नौज सांसद ने आरोप लगाया कि PDA और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम हटाने के लिए नकली दस्तखत के साथ फॉर्म-7 के आवेदन जमा किए जा रहे हैं. उन्होंने इस मुद्दे को एक बड़ा धोखा बताया, न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की और वोटर्स से मतदाता लिस्ट में अपने नाम वेरिफाई करने को कहा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों से भी संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई करने की अपील की.अखिलेश ने कहा कि नामों को गलत तरीके से हटाने में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए. लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी को इस मुद्दे पर मिला अखिलेश यादव का साथ, जमकर हुआ हंगामा

    किस ओर इशारा कर रहे यूपी एसआईआर के आंकड़े?

    इन आरोपों के बीच, 6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच फॉर्म-7 जमा करने का दिन-वार डेटा दिखाता है कि पूरे महीने में नाम हटाने और आपत्ति के आवेदनों में कैसे बढ़ोतरी हुई. 6, 7, और 8 जनवरी को कोई फॉर्म दर्ज नहीं किया गया. 9 जनवरी को 175 आवेदनों के साथ शुरू हुई, जबकि 10 जनवरी को कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं हुई. 11 जनवरी को 2,236 नए आवेदनों के साथ इसमें अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके बाद 12 जनवरी (677), 13 जनवरी (734), 14 जनवरी (736), 15 जनवरी (889), और 16 जनवरी (906) फॉर्म जमा हुए.

    महीने के दूसरे आधे हिस्से में यह गति और तेज हो गई. 17 जनवरी को 1,970 नए आवेदन दाखिल किए गए, इसके बाद 18 जनवरी को 3,865 आवेदन आए. 19 जनवरी से रोज़ाना के आंकड़े ज़्यादा रहे: 19 जनवरी (2,674), 20 जनवरी (2,670), 21 जनवरी (2,848), 22 जनवरी (2,787), 23 जनवरी (2,318), 24 जनवरी (2,861), 25 जनवरी (2,797), और 26 जनवरी (2,947). आखिरी दिनों में और बढ़ोतरी देखी गई-27 जनवरी (3,317), 28 जनवरी (3,424), 29 जनवरी (3,551), 30 जनवरी (4,288), और 31 जनवरी (8,503), जो एक दिन में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी थी. 31 जनवरी तक कुल मिलाकर 57,173 फॉर्म-7 एप्लीकेशन जमा हो चुके थे.

    क्या है फॉर्म 7?

    फॉर्म 7 भारत के चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया आवेदन पत्र है जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट से किसी का नाम हटाने या वोटर लिस्ट में किसी का नाम शामिल करने पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है. इसे तब भरा जाता है जब अमुक लगता है कि किसी मतदाता का नाम लिस्ट में नहीं होना चाहिए. ऐसा तब हो सकता है जब मतदाता की मौत हो गई हो, वह हमेशा के लिए दूसरी जगह चला गया हो, उसका नाम दो बार दर्ज हो, या वह किसी और वजह से बतौर मतदाता पंजीकृत होने के योग्य न हो. कोई मतदाता, सूची से अपना नाम हटवाने के लिए भी फॉर्म 7 का इस्तेमाल कर सकता है.

  • मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है

    मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष अबू आजमी ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे पर विवादित टिप्पणी की है। अबू आजमी ने राणे को बौना मंत्री और नेपाली बताते हुए धमकी दी कि अगर उन्हें ताकत मिले तो वह नितेश राणे की जुबान काट देंगे। अबू आजमी का यह बयान नितेश राणे के हालिया हिंदुत्व से जुड़ी टिप्पणियों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयानबाजी पर आया है। आजमी ने राणे के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा यह बौना मंत्री बोलता है कि मस्जिद में घुसकर मुसलमानों को मारूंगा। क्या हम हिंजड़े हैं क्या हमें मारेगा तू उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके पास शक्ति हो तो वह इस बौने मंत्री की जुबान काट डालेंगे और उसे सबक सिखाएंगे।

    नितेश राणे के बयान पर प्रतिक्रिया

    नितेश राणे के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर दिए गए बयान के बाद यह विवाद उठ खड़ा है। राणे ने कहा था कि वह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के लिए काम कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के धर्मनिरपेक्षता या ध्रुवीकरण के लिए नहीं। उन्होंने विशेष रूप से रामनवमी या हनुमान जयंती जैसे धार्मिक जुलूसों में पत्थरबाजी की घटनाओं पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जब ईद और मुहर्रम शांतिपूर्वक मनाए जा सकते हैं, तो रामनवमी या हनुमान जयंती पर ऐसा क्यों होता है। राणे ने कहा था कि उनका किसी खास समुदाय से विरोध नहीं है, लेकिन जो लोग जिहाद करना चाहते हैं, उनके खिलाफ उनकी आपत्ति स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए।

    अबू आजमी की कड़ी प्रतिक्रिया

    अबू आजमी ने नितेश राणे के इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि राणे का यह बयान मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ है। उन्होंने सवाल किया कि अगर राणे इतना बहादुर हैं तो क्यों नहीं मस्जिद में जाकर दिखाते हैं कि वह क्या कर सकते हैं। आजमी ने यह भी कहा कि राणे जैसे लोग यह कहते हैं कि अगर देश में रहना है तो वंदे मातरम बोलना होगा, लेकिन वह यह नहीं समझते कि हमें राम नवमी के दिन पानी लेकर खड़ा रहने का गर्व है।

    सपा नेता की भाषा पर सवाल


    आजमी का बयान, जो कि भारतीय राजनीति में एक नई कड़ी विवाद को जन्म दे सकता है, कई लोगों को आपत्ति दे रहा है। उनकी भाषा और बयानों में हिंसा की ओर इशारा करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे असहिष्णुता की ओर बढ़ने वाला कदम बताया है।

  • तुर्कमान गेट बवाल में सपा सांसद का नाम उछला, मोहिबुल्लाह नदवी बोले– हिंसा नहीं, शांति के लिए गया था

    तुर्कमान गेट बवाल में सपा सांसद का नाम उछला, मोहिबुल्लाह नदवी बोले– हिंसा नहीं, शांति के लिए गया था


    नई दिल्ली। बीतीरात दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुए बवाल मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम आया है। पुलिस उनसे पत्थरबाजी के इस मामले में पूछताछ करेगी। मोहिबुल्लाह नदवी कहा कि मेरी जानकारी में हाईकोर्ट का ऐसा कोई ऑर्डर नहीं है, जिसमें अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया हो। अभी बात ही चल रही थी कि कितना मस्जिद का एरिया है और कितना अतिक्रमण हुआ है। या अतिक्रमण नहीं भी हुआ है।
    इसी दरमियान रात में मुझे खबर मिली कि मस्जिद को घेर लिया गया है।

    बवाल वाली जगह क्यों पहुंचे थे सपा सांसद?
    सपा सांसद ने आगे कहा, ‘इससे पहले महरौली में एक मस्जिद रातोंरात गायब कर दी गई थी। उसके लिए मैंने संसद में भी आवाज उठाई थी। तुर्कमान गेट वाली खबर मैंने सुनी तो सोचा कि लोग कहीं बेकाबू ना हो जाएं, इसलिए मैं मौके पर पहुंचा था। मैं जब वहां गया तो लोगों से अपील की कि अपने-अपने घरों में जाएं। एक वीडियो भी हैं, जिसमें मैं लोगों से शांत रहने के लिए कह रहा हूं।’

    फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पत्थरबाजी क्यों?
    गौरतलब है कि मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात दिल्ली पुलिस और MCD की टीम, तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुए अवैध निर्माण को तोड़ने पहुंची थी।

    तभी मौके पर उन्मादियों की भीड़ पहुंच गई और उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी।

    दिल्ली पुलिस ने 5 लोगों पर की FIR
    पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। अबतक 5 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए दंगाइयों की पहचान करने में जुटी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि जब इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी, उस वक्त अफवाह फैला दी गई कि मस्जिद को तोड़ा जा रहा है।

    यही बोलकर लोगों को जमा किया गया और फिर बवाल हो गया।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। वहीं, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का कहना है कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा और न ही किसी को हिंसा के लिए उकसाया। उनका दावा है कि वे सिर्फ शांति बनाए रखने और हालात को काबू में रखने के उद्देश्य से वहां पहुंचे थे। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।