नई दिल्ली । Sankashti Chaturthi 2026: सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व माना गया है जो कि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है. इस दिन भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन किया जाता है और कहते हैं कि गणपति जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन से सभी संकटों को दूर करते हैं. फाल्गुन माह और फरवरी का महीना शुरू होने वाला है, ऐसे में आइए जानते हैं फाल्गुन में कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 डेट
बता दें कि फाल्गुन में आने वाले संकष्टी चतुर्थी व्रत को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी और 6 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत 5 फरवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा.क्या आपको छोटी-छोटी बात पर आता है गुस्सा! तो कुंडली का ये ग्रह कर रहा है परेशान, जानिए इससे बचने के उपाय
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सुबह 5 बजकर 22 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 15 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा. इसके अलावा शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 7 बजकर 7 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. यदि इन मुहूर्त में पूजा न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त को भी शुभ जाता है और 5 फरवरी को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और मंदिर को स्वच्छ करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें और एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें. फिर गणेश जी को सिंदूर, चंदन, अक्षत, फल, फूल और दूर्वा अर्पित करें. इसके बाद घी का दीपक जलाएं और मोदक का भोग लगाएं. फिर संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़े व गणेश जी की आरती करें. इसके बाद दिनभर फलाहार करें और रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें. इस व्रत को रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
