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  • तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच कई देशों में आपातकालीन तैयारी पर जोर, नागरिकों को जरूरी सामान जुटाने की सलाह

    तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच कई देशों में आपातकालीन तैयारी पर जोर, नागरिकों को जरूरी सामान जुटाने की सलाह


    नई दिल्ली ।
    दुनिया के कई देशों में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए नागरिकों को पहले से तैयार रहने की सलाह दी जा रही है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और यूरोप के कई देशों ने लोगों से घरों में पर्याप्त भोजन, पीने का पानी, जरूरी दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं रखने पर जोर दिया है। इन तैयारियों का उद्देश्य किसी संकट के दौरान सामान्य आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने पर लोगों को शुरुआती दिनों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    जर्मनी, नॉर्वे, फिनलैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, आयरलैंड, स्वीडन, चेकिया और लिथुआनिया सहित कई देशों में आपातकालीन तैयारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। यूरोपीय संघ भी संकट प्रबंधन और नागरिकों की तैयारी को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। सरकारों की इन सलाहों में प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ साइबर हमले, बिजली संकट और संभावित सैन्य संघर्ष जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।

    अलग-अलग देशों में जरूरी सामान जमा रखने की अवधि को लेकर अलग-अलग सुझाव दिए गए हैं। कुछ देशों में कम से कम तीन दिन की जरूरतों के लिए तैयारी करने को कहा गया है, जबकि अन्य जगहों पर सात से दस दिनों तक का भोजन, पानी और दवाएं उपलब्ध रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि किसी आपात स्थिति में बाजार, परिवहन या अन्य आपूर्ति सेवाएं प्रभावित होने पर परिवारों को तत्काल परेशानी का सामना न करना पड़े।

    अमेरिका में भी आपातकालीन तैयारियों को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, सैन्य ठिकानों को 90 दिनों तक बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता कम रखते हुए काम करने में सक्षम बनाने की योजना का उल्लेख नागरिकों के लिए 90 दिनों का राशन जमा करने के निर्देश के रूप में नहीं किया जा सकता। सैन्य प्रतिष्ठानों की यह तैयारी रक्षा व्यवस्था से संबंधित है और इसे आम नागरिकों के लिए जारी किसी समान निर्देश से अलग समझना जरूरी है।

    ब्रिटेन ने अपने ‘बी रेडी’ अभियान के माध्यम से नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए जरूरी सामान तैयार रखने की सलाह दी है। इस तैयारी में पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, आवश्यक दवाएं, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियां, रेडियो, पावर बैंक और कुछ नकदी शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह है कि बिजली, संचार या अन्य सार्वजनिक सेवाएं बाधित होने की स्थिति में लोग कुछ समय तक अपनी बुनियादी जरूरतें खुद पूरी कर सकें।

    जापान में भी आपदा प्रबंधन और नागरिकों की तैयारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। भूकंप की आशंका और उसके बाद बिजली, पानी तथा परिवहन सेवाओं में संभावित रुकावट को ध्यान में रखते हुए लोगों को कम से कम तीन दिन और संभव हो तो एक सप्ताह तक के जरूरी सामान का इंतजाम रखने की सलाह दी जाती है। जापान में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए ऐसी तैयारियों को नागरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    इन देशों में बढ़ती सतर्कता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तीसरे विश्व युद्ध को लेकर दिए गए बयान ने भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चर्चाओं को ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, विभिन्न देशों की ओर से जारी आपातकालीन तैयारियों की सलाह को सीधे तौर पर विश्व युद्ध की शुरुआत या किसी निश्चित सैन्य टकराव का संकेत नहीं माना जा सकता। इन निर्देशों का दायरा प्राकृतिक आपदाओं से लेकर तकनीकी और सुरक्षा संबंधी संकटों तक फैला हुआ है।

    सरकारों की चिंता केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। बाढ़, भीषण मौसम, भूकंप, लंबे समय तक बिजली गुल रहने, इंटरनेट सेवाओं में रुकावट और साइबर हमलों जैसी घटनाएं भी जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में खाद्य सामग्री की आपूर्ति, पेयजल उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं और संचार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। पहले से जरूरी सामान रखने से परिवारों को संकट के शुरुआती दौर में राहत मिल सकती है।

    आपातकालीन तैयारी को लेकर अलग-अलग देशों के निर्देशों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अंतर है। इसलिए नागरिकों को अपने देश और क्षेत्र में जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक तैयारी करने की सलाह दी जाती है। कुल मिलाकर, कई देशों में नागरिक सुरक्षा को लेकर बढ़ता जोर इस बात को दर्शाता है कि सरकारें अब केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने के बजाय लोगों को पहले से तैयार करने पर भी ध्यान दे रही हैं।

  • मुंबई की मेयर को धमकी भरा ईमेल, दिलजीत दोसांझ के 27 नवंबर के कॉन्सर्ट और अमिताभ बच्चन का भी जिक्र

    मुंबई की मेयर को धमकी भरा ईमेल, दिलजीत दोसांझ के 27 नवंबर के कॉन्सर्ट और अमिताभ बच्चन का भी जिक्र

    नई दिल्ली । मुंबई की मेयर को शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को एक धमकी भरा ईमेल मिला। इस ईमेल में मेयर के कार्यालय को निशाना बनाने की धमकी दी गई है। इसके अलावा पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के मुंबई में होने वाले संगीत कार्यक्रम और बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन का भी उल्लेख किया गया है। ईमेल में इन तीनों को निशाना बनाने की बात सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। फिलहाल धमकी भेजने वाले की पहचान और ईमेल की विश्वसनीयता के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    ईमेल में दिलजीत दोसांझ के इंडिया टूर के तहत मुंबई में आयोजित होने वाले कार्यक्रम का विशेष रूप से जिक्र किया गया है। यह कॉन्सर्ट 27 नवंबर 2026 को महालक्ष्मी रेसकोर्स में प्रस्तावित है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रशंसकों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए धमकी का मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि धमकी के बाद आयोजकों या संबंधित अधिकारियों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं।

    ईमेल में अमिताभ बच्चन को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है। इस तरह एक ही संदेश में मेयर के कार्यालय, संगीत कार्यक्रम और फिल्म अभिनेता का नाम आने से मामले की गंभीरता बढ़ गई है। लेकिन धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह के बारे में कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी तरह यह भी स्पष्ट नहीं है कि ईमेल में किए गए दावों की जांच में अब तक क्या निष्कर्ष सामने आए हैं।

    दिल्ली में दिलजीत के कार्यक्रम को नहीं मिली अनुमति

    मुंबई में धमकी भरे ईमेल का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब इससे एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने दिलजीत दोसांझ के प्रस्तावित संगीत कार्यक्रम को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। यह कार्यक्रम 30 अक्टूबर को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित होना था। पुलिस ने विशेष खतरे से जुड़ी जानकारी, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी।

    दिल्ली पुलिस के दक्षिणी जिले के उपायुक्त अनंत मित्तल ने 21 अक्टूबर को कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध करने वाली कंपनी के निदेशक अनिल मखीजा को पत्र लिखकर निर्णय की जानकारी दी थी। पत्र में कहा गया कि सुरक्षा से जुड़ी विशेष सूचनाओं, त्योहारों के दौरान पुलिस की अन्य जिम्मेदारियों और कानून-व्यवस्था संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए कार्यक्रम की मंजूरी देना संभव नहीं है। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना भी सुरक्षा प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण थी।

    भारत दौरे में सात शहरों का कार्यक्रम था प्रस्तावित

    दिल्ली में होने वाला संगीत कार्यक्रम दिलजीत दोसांझ के ‘ऑरा वर्ल्ड टूर’ के भारत चरण की शुरुआत करने वाला था। इसके बाद गायक के इंदौर, अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ और चंडीगढ़ में कार्यक्रम प्रस्तावित थे। इस तरह भारत दौरे में दिल्ली के बाद छह अन्य शहर शामिल थे।

    दिलजीत दोसांझ इससे पहले अपने विश्व दौरे के तहत उत्तर अमेरिका, यूरोप के कई देशों और ऑस्ट्रेलिया में प्रस्तुतियां दे चुके हैं। मुंबई में 27 नवंबर को होने वाले कॉन्सर्ट को लेकर धमकी भरा ईमेल सामने आने से अब कार्यक्रम की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित हो गया है। हालांकि, ईमेल और कार्यक्रम के बीच सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की स्थिति को लेकर अभी अतिरिक्त पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    फिलहाल इस मामले में धमकी की विश्वसनीयता, भेजने वाले की पहचान और संभावित सुरक्षा कदमों से जुड़े विवरण सामने आने बाकी हैं। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

  • UPI PIN डालते ही कैसे पहुंचते हैं दूसरे खाते में पैसे, जानें यूपीआई पेमेंट का पूरा तरीका..

    UPI PIN डालते ही कैसे पहुंचते हैं दूसरे खाते में पैसे, जानें यूपीआई पेमेंट का पूरा तरीका..

    नई दिल्ली । आज के डिजिटल दौर में पैसे भेजने और भुगतान करने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। दुकानों पर खरीदारी करने, बिजली का बिल भरने, ऑनलाइन सामान खरीदने या किसी परिचित को रकम भेजने जैसे काम अब मोबाइल के जरिए कुछ ही सेकंड में पूरे हो जाते हैं। Google Pay, PhonePe, Paytm और BHIM जैसे ऐप के माध्यम से लोग सीधे अपने बैंक खाते से भुगतान कर सकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यूपीआई पिन डालते ही एक खाते से पैसे कटकर दूसरे खाते में कैसे पहुंच जाते हैं? इसके पीछे बैंकिंग व्यवस्था और डिजिटल भुगतान नेटवर्क की एक निर्धारित प्रक्रिया काम करती है।

    यूपीआई एक डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने विकसित किया है। इसकी मदद से दो बैंक खातों के बीच तुरंत धनराशि ट्रांसफर की जा सकती है। इस व्यवस्था में हर बार बैंक खाता संख्या या आईएफएससी कोड दर्ज करना जरूरी नहीं होता। उपयोगकर्ता यूपीआई आईडी, पंजीकृत मोबाइल नंबर या क्यूआर कोड के माध्यम से भी भुगतान कर सकते हैं। इससे लेनदेन की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाती है।

    मान लीजिए कि आपको किसी दुकानदार को 500 रुपये देने हैं। इसके लिए आप अपने मोबाइल में यूपीआई ऐप खोलते हैं और दुकानदार का क्यूआर कोड स्कैन करते हैं। इसके बाद भुगतान की जाने वाली रकम दर्ज करके आगे बढ़ते हैं। लेनदेन को अधिकृत करने के लिए आपको अपना यूपीआई पिन डालना होता है। पिन दर्ज करने के बाद ऐप भुगतान का अनुरोध संबंधित बैंकिंग प्रणाली तक पहुंचाता है। इसके बाद यूपीआई नेटवर्क इस अनुरोध को लेनदेन में शामिल बैंकों के बीच आगे बढ़ाता है।

    सबसे पहले भुगतान करने वाले व्यक्ति का बैंक जरूरी जांच करता है। इसमें यूपीआई पिन का सत्यापन और खाते में उपलब्ध राशि की जांच शामिल होती है। यदि पिन सही है, खाते में पर्याप्त बैलेंस है और अन्य आवश्यक जांच पूरी हो जाती हैं, तो बैंक भुगतान को मंजूरी देकर खाते से 500 रुपये काट लेता है। यदि पिन गलत हो या खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध न हो, तो लेनदेन असफल हो सकता है।

    इसके बाद यूपीआई नेटवर्क प्राप्तकर्ता के बैंक तक भुगतान से जुड़ी जानकारी पहुंचाता है। प्राप्तकर्ता बैंक संबंधित खाते में निर्धारित रकम जमा कर देता है। इस तरह भुगतान करने वाले व्यक्ति के खाते से पैसे निकलकर दूसरे व्यक्ति के खाते में पहुंच जाते हैं। पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होती है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में लेनदेन कुछ ही सेकंड में पूरा हो जाता है। हालांकि, ग्राहक के खाते में राशि दिखने और बैंकों के बीच लेनदेन का अंतिम निपटान होने की प्रक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं।

    यूपीआई भुगतान में पिन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह भुगतान करने वाले व्यक्ति की पहचान और लेनदेन को अधिकृत करने में मदद करता है। इसलिए अपना यूपीआई पिन किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। मोबाइल या यूपीआई ऐप तक किसी की पहुंच होने मात्र से वह सामान्य भुगतान पूरा नहीं कर सकता, लेकिन पिन साझा करने या धोखाधड़ी के कारण जोखिम बढ़ सकता है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि यूपीआई पिन का इस्तेमाल पैसे भेजने या भुगतान करने के लिए किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। यदि कोई व्यक्ति रकम भेजने के नाम पर आपसे पिन डालने को कहता है, तो सावधान रहें। अनजान भुगतान अनुरोधों को स्वीकार करने से पहले उनकी जांच करें और किसी भी स्थिति में अपना पिन या गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें।

  • टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा, बॉडीगार्ड के साथ पुलिसकर्मी तैनात, तीन आरोपी गिरफ्तार

    टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा, बॉडीगार्ड के साथ पुलिसकर्मी तैनात, तीन आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मुंबई पुलिस ने अभिनेता की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड के साथ पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया है। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अभिनेता को निशाना बनाने के पीछे क्या वजह थी और इस घटना में किन लोगों की भूमिका रही है।

    फायरिंग की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलाव के तहत टाइगर श्रॉफ के साथ निजी सुरक्षा कर्मियों के अलावा पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। उनके नजदीकी पुलिस थाने से एक अधिकारी और कुछ जवानों को सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अभिनेता को किस स्तर की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। जांच अधिकारी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि फायरिंग के पीछे लोगों के बीच डर पैदा करने और अभिनेता से पैसे वसूलने की कोशिश हो सकती है। जांच के दौरान लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की संभावित भूमिका का पहलू भी सामने आया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हमले के उद्देश्य या किसी गिरोह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ ही घटना के पीछे की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

    इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, तीनों को सोमवार सुबह राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन से पकड़ा गया। पुलिस ने करीब 15 मिनट तक चले अभियान के बाद उन्हें हिरासत में लिया। उस समय तीनों पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के सामान्य श्रेणी के डिब्बे में सफर कर रहे थे। ट्रेन सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर कोटा स्टेशन पहुंची थी।

    कोटा की पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के बेगूसराय निवासी ऋतिक उर्फ रोशन और हरियाणा के सोनीपत निवासी रेहान शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी में तीसरे आरोपी की पहचान का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। पुलिस गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से पूछताछ और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

    जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि फायरिंग की योजना कैसे बनाई गई और आरोपियों के बीच क्या संपर्क था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना को अंजाम देने के पीछे आर्थिक मांग, धमकी या किसी अन्य कारण की भूमिका रही है या नहीं। फिलहाल इन संभावनाओं को जांच के स्तर पर देखा जा रहा है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस सभी संबंधित साक्ष्यों और आरोपियों से मिली जानकारी का परीक्षण कर रही है।

    टाइगर श्रॉफ की सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद अब मामले की जांच और आरोपियों से पूछताछ पर ध्यान केंद्रित है। पुलिस यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग की घटना में गिरफ्तार लोगों की क्या भूमिका थी और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था। हमले के कारणों, संभावित साजिश और अन्य संबंधित लोगों के बारे में स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • मिलान में हिंसा की आशंका से लग्जरी स्टोर बंद, सुरक्षा के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की तैयारी

    मिलान में हिंसा की आशंका से लग्जरी स्टोर बंद, सुरक्षा के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की तैयारी

    नई दिल्ली । इटली के प्रमुख शहर मिलान में सप्ताहांत के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की तैयारी की गई है। उप प्रधानमंत्री मातेओ साल्विनी ने शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की घोषणा की है। हिंसा दोबारा भड़कने की आशंका के बीच शहर के प्रमुख लग्जरी शॉपिंग क्षेत्रों में कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान समय से पहले बंद कर दिए। कुछ दुकानों ने शोकेस से महंगे उत्पाद भी हटा लिए हैं।

    मिलान में शनिवार को शुरू हुआ प्रदर्शन शुरुआती दौर में शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में कई इलाकों में स्थिति बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। कुछ लोगों ने कूड़ेदानों में आग लगाई और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। इस दौरान दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए।

    साल्विनी ने सोमवार को अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की जानकारी देते हुए कहा कि मिलान में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया जाएगा। मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में सुरक्षा उपायों के व्यापक पैकेज के तहत इस प्रस्ताव को शामिल किए जाने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य शहर में शांति बहाल करना और संभावित हिंसक घटनाओं को रोकना है।

    मिलान इटली का प्रमुख वित्तीय और फैशन केंद्र है। यहां के प्रसिद्ध वाया मोंटेनापोलियोने क्षेत्र में शैनल, टिफनी और दिओर जैसे अंतरराष्ट्रीय लग्जरी ब्रांडों के स्टोर स्थित हैं। सप्ताहांत की घटनाओं के बाद कारोबारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोमवार को कई दुकानों ने सामान्य समय से पहले शटर गिरा दिए। कुछ प्रतिष्ठानों ने अपनी खिड़कियों को लकड़ी और गत्ते से ढक दिया, जबकि अन्य दुकानदारों ने महंगे सामान को शोकेस से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर रख दिया।

    हिंसा के बाद पुलिस ने शहर के प्रमुख हिस्सों में गश्त बढ़ा दी है। रविवार को हुई कार्रवाई के दौरान 271 युवाओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें से 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में 23 नाबालिग और 13 विदेशी नागरिक शामिल थे। इसके अतिरिक्त 28 लोगों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट दर्ज की गई। इन आंकड़ों के बीच गिरफ्तार लोगों की श्रेणियों में संभावित ओवरलैप को लेकर अलग-अलग संख्या को जोड़कर कुल संख्या निर्धारित नहीं की जा सकती।

    प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा की है। उन्होंने सोमवार को मंत्रियों और सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति पर चर्चा की। सरकार विशेष रूप से नाबालिगों से जुड़ी हिंसक गतिविधियों और युवा गिरोहों पर नियंत्रण के उपायों पर विचार कर रही है। मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार, नाबालिगों को एहतियातन हिरासत में रखने की अवधि बढ़ाने के विकल्प पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    मिलान के अलावा उत्तरी इटली के बोलोन्या, ब्रेसिया, बर्गामो और ट्यूरिन जैसे शहरों में भी प्रदर्शनों के दौरान झड़पें हुईं। शनिवार को हुई घटनाओं के सिलसिले में इन इलाकों में 28 प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई थी। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद सरकार सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने और हिंसा पर अंकुश लगाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

  • दिल्ली विधानसभा में बम धमकियों के बाद सुरक्षा सख्त, आठ वॉच टावर बनेंगे, सीआरपीएफ की गश्त और वाहन जांच व्यवस्था होगी मजबूत

    दिल्ली विधानसभा में बम धमकियों के बाद सुरक्षा सख्त, आठ वॉच टावर बनेंगे, सीआरपीएफ की गश्त और वाहन जांच व्यवस्था होगी मजबूत

    नई दिल्ली । दिल्ली विधानसभा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर नए इंतजाम किए जा रहे हैं। बम धमकियों और सुरक्षा संबंधी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए परिसर में आठ वॉच टावर बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही वाहनों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के लिए अलग गश्ती मार्ग और आगंतुकों की डिजिटल पहचान जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को सुरक्षा मजबूत करने के लिए चल रहे कार्यों की जानकारी दी।

    विधानसभा परिसर के सामने, पीछे और अन्य संवेदनशील स्थानों पर आठ वॉच टावर स्थापित किए जा रहे हैं। इन टावरों पर सीआरपीएफ के जवान तैनात रहेंगे, जिससे परिसर के अलग-अलग हिस्सों पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। अधिकारियों की योजना के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि परिसर की सीमा और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी अधिक प्रभावी हो सके। आठ वॉच टावरों में से एक का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि बाकी टावरों का काम जारी है।

    परिसर की सीमा पर एक छोर से दूसरे छोर तक गश्त करने के लिए सीआरपीएफ के जवानों के वास्ते अलग मार्ग भी बनाया जा रहा है। इस मार्ग का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके तैयार होने से सुरक्षा कर्मियों को परिसर के बाहरी हिस्सों में नियमित गश्त करने के लिए निर्धारित रास्ता मिलेगा। वॉच टावरों और गश्ती मार्ग को सुरक्षा व्यवस्था के नए ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    वाहनों की जांच को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विधानसभा के गेट नंबर दो और पांच पर अंडर व्हीकल सर्विलांस सिस्टम (यूवीएसएस) लगाए गए हैं। इस तकनीक के माध्यम से वाहनों की जांच की जा सकेगी। साथ ही संदिग्ध वाहनों और फर्जी नंबर प्लेट वाले वाहनों की पहचान करने में भी सहायता मिलेगी। इससे विधानसभा परिसर में प्रवेश करने वाले वाहनों की निगरानी को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

    गेट नंबर एक पर फोटो पहचान की सुविधा वाले फ्लैप बैरियर लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक का इस्तेमाल वाहनों की पहचान करने और उनकी आवाजाही का रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाएगा। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य परिसर में आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रखना और प्रवेश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। गेट नंबर एक से पांच तक स्वचालित स्लाइडिंग दरवाजे लगाने का काम भी किया जा रहा है।

    विधानसभा परिसर में फिलहाल करीब 120 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए ऐसे स्थानों की पहचान करने को दिल्ली पुलिस से कहा गया है, जहां अंधेरा रहता है या सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त निगरानी की आवश्यकता है। इन स्थानों की पहचान के बाद वहां सुरक्षा संबंधी जरूरतों के अनुसार कदम उठाए जा सकेंगे।

    आगंतुकों के प्रवेश की प्रक्रिया में भी डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। विधानसभा के रिसेप्शन पर आने वाले लोगों की फोटो पहचान दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही उनकी आवश्यक जानकारी और विधानसभा आने का उद्देश्य भी रिकॉर्ड किया जाएगा। इस तरह सुरक्षा व्यवस्था में प्रवेश से लेकर परिसर के भीतर निगरानी तक कई स्तरों पर बदलाव किए जा रहे हैं। वॉच टावर, वाहन जांच प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे, गश्ती मार्ग और डिजिटल पहचान के जरिए विधानसभा परिसर की सुरक्षा को अधिक मजबूत बनाने की तैयारी है।

  • सलमान खान, बाबा सिद्दीकी और रोहित शेट्टी के बाद टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा और मुंबई की कानून-व्यवस्था पर सवाल

    सलमान खान, बाबा सिद्दीकी और रोहित शेट्टी के बाद टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा और मुंबई की कानून-व्यवस्था पर सवाल


    नई दिल्ली । मुंबई को सपनों की नगरी कहा जाता है। देशभर से लोग यहां अपनी किस्मत आजमाने आते हैं और बॉलीवुड के सितारे लाखों लोगों के दिलों पर राज करते हैं। लेकिन जब फिल्मी हस्तियों के घरों के बाहर गोलियां चलने लगें, उन्हें धमकियां मिलने लगें और चर्चित लोगों की हत्या हो जाए, तो मामला केवल सितारों की निजी सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। इससे महानगर की कानून-व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते हौसले पर भी सवाल खड़े होते हैं। हाल के वर्षों में मुंबई में फिल्म जगत से जुड़े लोगों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं। अब अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी ने इस चिंता को एक बार फिर बढ़ा दिया है।

    18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना सामने आई। बताया गया कि अभिनेता फुटबॉल मैच खेलने के बाद लौट रहे थे, तभी उनकी कार को निशाना बनाया गया। इस घटना में टाइगर सुरक्षित रहे, हालांकि उनके ड्राइवर और अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। इस दावे में सलमान खान से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की धमकी भी दी गई। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकेगा।

    सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग

    फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ऐसी घटनाओं में सबसे चर्चित मामला 14 अप्रैल 2024 का है। उस दिन मुंबई के बांद्रा स्थित सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर बाइक सवार दो हमलावरों ने गोलियां चलाई थीं। पुलिस की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े कथित सदस्यों की भूमिका सामने आई। जांच के अनुसार, इस वारदात को विक्की गुप्ता और सागर पाल ने अंजाम दिया था। सलमान खान को इससे पहले भी धमकियां मिलती रही थीं। उनके घर के बाहर हुई गोलीबारी ने फिल्म उद्योग में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी।

    बाबा सिद्दीकी की हत्या से बढ़ी चिंता
    12 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता बाबा सिद्दीकी की मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाबा सिद्दीकी को सलमान खान का करीबी माना जाता था। इस हत्याकांड के बाद पुलिस की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों के नाम सामने आए और मामले में गिरफ्तारियां भी हुईं। जांच में यह आरोप सामने आया कि सलमान खान से बाबा सिद्दीकी की नजदीकी उन्हें निशाना बनाए जाने की वजहों में से एक हो सकती थी। इस घटना ने राजनीतिक और फिल्मी जगत में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।

    रोहित शेट्टी के घर के बाहर भी हुई थी गोलीबारी
    31 जनवरी और 1 फरवरी 2026 की दरमियानी रात मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर भी फायरिंग हुई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर शुभम लोनकर और आरजू बिश्नोई नाम के लोगों ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। पोस्ट में रोहित शेट्टी को पहले संदेश भेजे जाने और उनकी बात नहीं मानने पर हमले की बात कही गई थी।

    जांच के अनुसार, आरोपी ने रोहित शेट्टी के घर से कुछ दूरी पर बाइक खड़ी की और पैदल शेट्टी टावर तक पहुंचा। इसके बाद इमारत की ओर कई राउंड फायरिंग कर वह मौके से फरार हो गया। इस वारदात ने एक बार फिर फिल्मी हस्तियों के घरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

    बॉलीवुड में दबदबा कायम करने की आशंका
    इन घटनाओं में बार-बार लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आने से पुलिस की जांच और गिरोह के कथित मकसद पर चर्चा तेज हुई है। पुलिस की जांच और दाखिल चार्जशीट में यह पहलू सामने आया है कि चर्चित हस्तियों को निशाना बनाकर गिरोह फिल्म उद्योग में भय और दबदबा कायम करने की कोशिश कर सकता है। ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य कथित तौर पर रंगदारी और दूसरी अवैध गतिविधियों के लिए दबाव बनाना भी हो सकता है।

    हालांकि, हर घटना में आरोपों, सोशल मीडिया पर किए गए दावों और जांच से स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में भी हमले की वजह, हमलावरों की पहचान और गिरोह की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएंगे। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा के साथ-साथ मुंबई में कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान जयपुर डायवर्ट, हाईजैक अलर्ट के बाद विमान की सुरक्षा जांच शुरू

    फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान जयपुर डायवर्ट, हाईजैक अलर्ट के बाद विमान की सुरक्षा जांच शुरू

    नई दिल्ली ।फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को बुधवार, 14 अक्टूबर की सुबह सुरक्षा अलर्ट मिलने के बाद जयपुर में आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। विमान में कथित हाईजैक खतरे से संबंधित संकेत मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। एहतियात के तौर पर विमान को दिल्ली ले जाने के बजाय जयपुर की ओर मोड़ दिया गया। वहां सुरक्षित उतरने के बाद विमान को जांच के लिए अलग निर्धारित स्थान पर ले जाया गया।

    यह उड़ान एआई-2030 फ्रैंकफर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब पहुंचने के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को सुरक्षा से जुड़ा अलर्ट मिला। इसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। अधिकारियों ने विमान को जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारने का निर्णय लिया। लैंडिंग के बाद विमान को आइसोलेशन बे में रखा गया, ताकि सुरक्षा संबंधी जांच की जा सके।

    उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सुबह करीब 9 बजे कुछ सेकंड के लिए इमरजेंसी सिग्नल मिला था। इसके लगभग 10 मिनट बाद, सुबह 9:10 बजे, विमान को जयपुर की ओर मोड़ने का फैसला किया गया। इसके बाद विमान ने करीब 9:45 बजे जयपुर हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। अलर्ट मिलने से लेकर विमान के उतरने तक सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दी गई।

    बताया गया कि विमान से कथित तौर पर 7500 कोड का सिग्नल प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में इस कोड का इस्तेमाल संभावित हाईजैकिंग या विमान में अवैध हस्तक्षेप की स्थिति का संकेत देने के लिए किया जाता है। इसके जरिए पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल को गोपनीय तरीके से ऐसी स्थिति की जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि विमान से यह संकेत किस परिस्थिति में प्रसारित हुआ और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।

    जयपुर में विमान के उतरने के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने उसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी। विमान को अलग स्थान पर रखने के बाद यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई कि कहीं उसमें कोई संदिग्ध वस्तु या सुरक्षा से जुड़ी गतिविधि तो नहीं है। शुरुआती जानकारी में किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई थी। इसके बावजूद जांच जारी रखी गई, ताकि अलर्ट से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा सके।

    विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालकर हवाई अड्डे के निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया गया। घटना में किसी के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली। हालांकि, अचानक विमान का मार्ग बदलने और सुरक्षा अलर्ट की जानकारी सामने आने से यात्रियों के बीच कुछ समय के लिए चिंता की स्थिति बनी। सुरक्षा एजेंसियों और हवाई अड्डा प्रशासन ने इस दौरान स्थिति को नियंत्रित रखा।

    फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि हाईजैक अलर्ट किस वजह से सक्रिय हुआ। जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि सिग्नल किसी तकनीकी गड़बड़ी, गलत संकेत या किसी अन्य कारण से प्रसारित हुआ था। घटना के समय तक एयर इंडिया और जयपुर हवाई अड्डा प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही अलर्ट के कारण और पूरे घटनाक्रम से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • सरकार अगले महीने एआई नियमों पर जारी करेगी परामर्श पत्र, डीपफेक और सुरक्षित तकनीकी इस्तेमाल पर रहेगा मुख्य फोकस

    सरकार अगले महीने एआई नियमों पर जारी करेगी परामर्श पत्र, डीपफेक और सुरक्षित तकनीकी इस्तेमाल पर रहेगा मुख्य फोकस

    नई दिल्ली ।केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार अगले महीने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े नियमों पर एक परामर्श पत्र जारी करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य एआई के सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना और तेजी से बढ़ रहे डीपफेक के खतरे से निपटना होगा। सरकार की ओर से एआई के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा को नियमन का प्रमुख आधार बनाने की बात कही गई है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि वह विभाग से एआई नियमन को लेकर एक चर्चा पत्र तैयार करने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज का प्रमुख फोकस सुरक्षा पर होना चाहिए। उनके मुताबिक, एआई के इस्तेमाल से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा है और इसे गंभीरता से संबोधित करने की जरूरत है। उन्होंने डीपफेक को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इससे समाज में गंभीर दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोग कई बार डीपफेक सामग्री को वास्तविक मान लेते हैं। इससे गलत धारणाएं बन सकती हैं और लोग भ्रामक जानकारी के आधार पर फैसले ले सकते हैं। प्रस्तावित परामर्श पत्र केवल एआई के नियमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कौशल विकास और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर होगा कि एआई तकनीक के विस्तार के दौरान कोई भी पीछे न छूटे।

    वैष्णव ने कहा कि एआई से जुड़े नियामक ढांचे में मानव हित सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीक और नियमन दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी होगा। उन्होंने इसे टेक्नो-लीगल समाधान की जरूरत बताया और कहा कि इस प्रक्रिया में उद्योग, विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों की भागीदारी भी आवश्यक है।

    मंत्री ने एआई से जुड़े जोखिमों, साइबर हमलों और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में उद्योग जगत की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। सरकार पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है, जिसमें सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई इस्तेमाल के लिए ढांचा दिया गया है। इन दिशा-निर्देशों में भ्रामक सूचना, डीपफेक, एल्गोरिदमिक पक्षपात और एआई से होने वाले संभावित सामाजिक नुकसान को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया गया है।

    दिशा-निर्देशों में एआई से जुड़ी कानूनी खामियों की पहचान, जवाबदेही, डेटा संरक्षण, कॉपीराइट, कंटेंट प्रमाणीकरण और जनरेटिव एआई के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की समीक्षा की सिफारिश की गई है। इसके अलावा एआई गवर्नेंस और इकोनॉमिक ग्रुप, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी तथा एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया है। सरकार इंडिया एआई मिशन के तहत सेफ एंड ट्रस्टेड एआई पहल पर भी काम कर रही है, जिसमें डीपफेक पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित एआई, एल्गोरिदमिक पक्षपात कम करने और एआई जोखिम मूल्यांकन से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली पुलिस को सख्त हिदायत, रात 10 बजे भी महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करें

    सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली पुलिस को सख्त हिदायत, रात 10 बजे भी महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करें

    नई दिल्ली ।देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। हाल में स्लीपर बस और दक्षिण दिल्ली के एक पार्क में हुई बलात्कार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए अदालत ने पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पुलिस को जमीनी स्तर पर ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जिसमें यौन अपराध करने की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों के मन में कानून का डर हो और महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि अपराधियों के मन में ऐसा सख्त खौफ पैदा किया जाए कि वे इस तरह के अपराध को दोबारा करने के बारे में सोचने से भी डरें। अदालत ने कहा कि जब तक असामाजिक तत्वों को यह भरोसा नहीं होगा कि ऐसे अपराध करने पर उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, तब तक राजधानी की स्थिति में सुधार मुश्किल है। कोर्ट ने पुलिस से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि आने वाले हफ्तों में ऐसी कोई वीभत्स घटना दोबारा न हो।

    दक्षिण दिल्ली के एक पार्क में हुए गैंगरेप मामले को लेकर भी अदालत ने पुलिस से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि घटना से पहले स्थानीय लोगों ने पुलिस को असामाजिक तत्वों के बारे में चेतावनी दी थी। ऐसे में अदालत ने सवाल उठाया कि समय रहते उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली में एक वॉर रूम बनाने के संबंध में भी जानकारी मांगी और सुरक्षा व्यवस्था को इस स्तर तक मजबूत करने को कहा कि रात 10 बजे सड़क पर चलने वाली महिला भी खुद को सुरक्षित महसूस करे।

    अदालत ने यौन अपराधों से जुड़े संदिग्धों पर निगरानी के लिए यौन अपराधियों के राष्ट्रीय डेटाबेस के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया। इसके अलावा दिल्ली में मौजूद हजारों अनधिकृत खाने-पीने की जगहों का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत के अनुसार, ऐसी जगहों पर अवैध रूप से शराब परोसे जाने और असामाजिक तत्वों के जमा होने की बात सामने आती है। कोर्ट ने इस व्यवस्था पर भी पुलिस का ध्यान आकर्षित किया और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कार्रवाई पर जोर दिया।

    जस्टिस पारदीवाला ने वर्ष 2012 के निर्भया मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस वीभत्स घटना से पहले भी दोषियों ने ऐसी ही जगहों पर खान-पान किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों के आसपास मंडराने वाले मनचलों और शोहदों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। अदालत के निर्देशों का मुख्य जोर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस की जमीनी कार्रवाई मजबूत करने, सुरक्षा चूक रोकने और यौन अपराधों की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों के बीच कानून का प्रभावी डर पैदा करने पर रहा।