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  • कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक से बढ़ा विवाद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ी तनातनी

    कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक से बढ़ा विवाद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ी तनातनी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एयरपोर्ट परिसर स्थित गौरीपुर मस्जिद को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने मस्जिद में जुमे की नमाज पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है तथा पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है।

    प्रशासन के अनुसार, एयरपोर्ट परिसर में स्थित इस मस्जिद के आसपास अगले कुछ दिनों तक निर्माण और सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाने हैं। अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद दो रनवे के बीच स्थित होने के कारण यहां लोगों की आवाजाही से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है। इसी वजह से सीमित अवधि के लिए नमाज के लिए लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला पूरी तरह सुरक्षा और संचालन संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    मस्जिद को स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि मस्जिद प्रबंधन के कुछ सदस्य इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत के पक्ष में हैं और किसी सहमति वाले समाधान की संभावना तलाश रहे हैं। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध जताया है और मस्जिद को उसके वर्तमान स्थान पर बनाए रखने की मांग की है। इसी मतभेद के कारण विवाद और अधिक बढ़ गया है।

    इस बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े नेता सिद्दिकुल्लाह चौधरी ने पहले मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत जारी है, तब नमाज पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं थी। बाद में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात के लिए जाने की जानकारी दी। उनके बयान के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी तथा पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी।

    स्थानीय पुलिस ने मस्जिद से जुड़े धार्मिक प्रतिनिधियों को सूचित किया कि क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू है और फिलहाल मस्जिद में सामूहिक नमाज की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद कुछ स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों ने वैकल्पिक स्थान पर नमाज अदा करने की बात कही। इसके बावजूद प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क बना हुआ है।

    एयरपोर्ट परिसर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों, गलियों और प्रवेश बिंदुओं पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान भी लगातार निगरानी कर रहे हैं। आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी रह सके।

    फिलहाल प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और एयरपोर्ट संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकना है। दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े पक्षों और प्रशासन के बीच बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संवाद के जरिए इस विवाद का शांतिपूर्ण और सर्वसम्मत समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास, वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर हटाया बोर्ड

    छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास, वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर हटाया बोर्ड

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे में स्थित ऐतिहासिक और प्रमुख पर्यटन स्थल सिंहगढ़ किले में सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने की एक गंभीर कोशिश का मामला सामने आया है। कुछ अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा किले के मुख्य प्रवेश मार्ग के समीप एक बेहद संवेदनशील और विवादित पोस्टर लगा दिया गया, जिसमें एक विशेष समुदाय के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। जैसे ही यह मामला स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के संज्ञान में आया, तुरंत त्वरित कार्रवाई की गई। राज्य के वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए उस विवादित पोस्टर को तत्काल प्रभाव से वहां से हटा दिया। हालांकि इस घटना के संबंध में पुलिस को अभी तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने स्वतः ही इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

    वन विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार सुबह की है जब पार्किंग क्षेत्र के बिल्कुल समीप किले के प्रवेश द्वार पर लगे एक पुराने लोहे के बोर्ड पर यह छपा हुआ पोस्टर चिपका हुआ देखा गया। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुबह के समय गश्त के दौरान जैसे ही यह आपत्तिजनक पोस्टर दिखाई दिया, उसे तुरंत हटाकर जब्त कर लिया गया। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, किसी अज्ञात असामाजिक तत्व ने तड़के अंधेरे का फायदा उठाकर इस कृत्य को अंजाम दिया और प्रिंटेड पोस्टर को वहां चिपकाकर मौके से फरार हो गया। मराठी भाषा में लिखे गए इस पोस्टर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि पोस्टर के निचले हिस्से में आधिकारिक भाषा का प्रयोग करते हुए आदेशानुसार शब्द लिखा गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने अंदेशा व्यक्त किया है कि शरारती तत्वों ने जानबूझकर इस शब्द का इस्तेमाल किया ताकि आम जनता और वहां आने वाले पर्यटकों के बीच यह गलत संदेश और भ्रम फैलाया जा सके कि यह प्रतिबंध सरकार या किसी अधिकृत सरकारी विभाग द्वारा लागू किया गया है। वर्तमान में सिंहगढ़ किला और उसके आसपास का पूरा विस्तृत वन क्षेत्र राज्य के वन विभाग के प्रशासनिक और कानूनी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है और यहां किसी भी प्रकार का प्रतिबंध पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

    ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सिंहगढ़ का किला मध्यकालीन भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली पहाड़ी किला माना जाता है। यह स्थल छत्रपति शिवाजी महाराज के समृद्ध इतिहास और प्रसिद्ध सिंहगढ़ की ऐतिहासिक लड़ाई का गवाह रहा है, जिसके कारण महाराष्ट्र के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में इसकी गिनती होती है। पुणे ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही किसी संगठन ने इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन सामाजिक शांति और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली इस हरकत को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। किले की तरफ जाने वाले सभी पहाड़ी रास्तों, चेकपोस्ट और मुख्य प्रवेश मार्गों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की गहनता से जांच की जा रही है ताकि संदिग्धों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

  • दमिश्क में राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे के दौरान दो धमाकों से मची अफरातफरी, सुरक्षा घेरे के बीच सीरिया में फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल

    दमिश्क में राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे के दौरान दो धमाकों से मची अफरातफरी, सुरक्षा घेरे के बीच सीरिया में फिर उठे सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सीरिया यात्रा के दौरान राजधानी दमिश्क में हुए दो विस्फोटों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। ये विस्फोट उस इलाके में हुए जहां राष्ट्रपति मैक्रों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी। घटना ऐसे समय हुई जब उनका आधिकारिक कार्यक्रम जारी था और वे विभिन्न बैठकों में हिस्सा ले रहे थे। विस्फोटों के बावजूद उनका निर्धारित दौरा जारी रहा तथा उन्होंने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल शारा से तय कार्यक्रम के अनुसार मुलाकात भी की।

    जानकारी के अनुसार विस्फोट दमिश्क के व्यस्त प्रशासनिक क्षेत्र में हुए, जहां कई सरकारी कार्यालय, राष्ट्रीय संग्रहालय और प्रमुख होटल स्थित हैं। पहला विस्फोट उस समय हुआ जब राष्ट्रपति मैक्रों का काफिला एक आधिकारिक बैठक के लिए राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ रहा था। इसके कुछ समय बाद उसी इलाके में दूसरा विस्फोट हुआ। घटनास्थल पर मौजूद लोगों में अफरातफरी फैल गई और सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल पूरे क्षेत्र को घेर लिया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए हैं। दूसरे विस्फोट के समय एक एंबुलेंस के आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जिससे घायलों की संख्या बढ़ गई। राहत एवं बचाव दल ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।

    घटना के बाद भी राष्ट्रपति मैक्रों के आधिकारिक कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल शारा के साथ निर्धारित बैठक की, जिसमें दोनों देशों के संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। इस मुलाकात को विशेष महत्व इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद मैक्रों सीरिया का दौरा करने वाले पहले यूरोपीय नेता हैं। उनकी यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति या उनके दल ने विस्फोटों की आवाज नहीं सुनी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार उनका काफिला घटनास्थल से आगे निकल चुका था और विस्फोट उसके बाद हुए। दूसरी ओर सीरियाई प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ विस्फोटों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में जुटी हैं।

    सीरिया के आंतरिक सुरक्षा विभाग ने इलाके को पूरी तरह सील कर दिया है और जांच एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि घटना की विस्तृत जांच के बाद ही विस्फोटों के कारणों और जिम्मेदार तत्वों के बारे में आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। फिलहाल किसी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सीरिया की सुरक्षा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। लंबे समय से संघर्ष और अस्थिरता का सामना कर रहे देश में विदेशी नेताओं की यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था हमेशा चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में मैक्रों की यात्रा के दौरान हुए ये विस्फोट सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर परीक्षा साबित हुए हैं। हालांकि फ्रांसीसी और सीरियाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कूटनीतिक कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार जारी रहेंगे और दोनों देशों के बीच वार्ता पर इस घटना का तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

  • ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, बेटों की मौजूदगी के बीच सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की गैरहाजिरी पर तेज हुई चर्चाएं

    ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, बेटों की मौजूदगी के बीच सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की गैरहाजिरी पर तेज हुई चर्चाएं

    नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को शनिवार को तेहरान में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार में देश के शीर्ष राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक नेतृत्व की मौजूदगी रही, जबकि सबसे अधिक चर्चा मौजूदा सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की सार्वजनिक गैरमौजूदगी को लेकर हुई। सुरक्षा कारणों के चलते उनके समारोह में खुलकर शामिल न होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

    अंतिम नमाज के दौरान अली खामेनेई के परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे। उनके बेटों मसूद, मेयसाम और मुस्तफा ने अंतिम रस्मों में हिस्सा लिया और अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, देश के कई वरिष्ठ अधिकारी और धार्मिक नेता भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। समारोह के दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी अपने पूर्व सर्वोच्च नेता को अंतिम विदाई दी।

    ईरानी प्रशासन के अनुसार, अंतिम नमाज का नेतृत्व वरिष्ठ धार्मिक नेता आयतुल्ला जाफर सोभानी ने किया। उनके साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसनी एजेई तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी सहित कई प्रमुख सैन्य अधिकारी भी समारोह का हिस्सा बने।

  • बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    नई दिल्ली । बिहार की सियासत में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा चाक-चौबंद करने का आदेश जारी किया है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ नेताओं की ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों नेताओं को राज्य सरकार की ओर से पुनः बुलेटप्रूफ गाड़ियां भी उपलब्ध करा दी गई हैं, जिससे इस मुद्दे पर जारी गतिरोध के फिलहाल थमने के आसार हैं।

    इस पूरे प्रशासनिक विवाद की शुरुआत कुछ समय पहले हुई थी, जब बिहार सरकार के गृह विभाग ने वीआईपी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा की थी। इस समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली ‘Z+’ श्रेणी की सुरक्षा को हटाने का निर्णय लिया था। सरकार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में अचानक उबाल आ गया था और विपक्षी खेमे ने इस फैसले को लेकर सत्तापक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राष्ट्रीय जनता दल ने इस प्रशासनिक कटौती को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया था।

    सुरक्षा में की गई इस कटौती के विरोध में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने एक कड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपनी बची हुई शेष सरकारी सुरक्षा को भी प्रशासन को वापस लौटा दिया था। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी सुरक्षा सरेंडर किए जाने की घटना ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी थी। राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि सत्तापक्ष जानबूझकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है और उनके जीवन को खतरे में डालने का प्रयास किया जा रहा है।

    यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। तेजस्वी यादव ने सरकार के इस फैसले को विपक्ष के साथ किया जाने वाला खुला भेदभाव करार दिया था और एकजुटता दिखाते हुए अपनी स्वयं की सरकारी सुरक्षा भी प्रशासन को वापस सौंप दी थी। एक साथ तीन शीर्ष नेताओं द्वारा सुरक्षा लौटाए जाने के बाद सरकार चौतरफा दबाव में आ गई थी और इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर नए सिरे से विचार करना अनिवार्य हो गया था।

    विपक्ष के इस कड़े और आक्रामक रुख को देखते हुए आखिरकार बिहार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने पुराने फैसले की समीक्षा करनी पड़ी। सरकार के नए आदेश के तहत अब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को न सिर्फ ‘Z’ श्रेणी की कड़े घेरे वाली सुरक्षा वापस मिल गई है, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक बुलेटप्रूफ वाहन भी उनके काफिले में दोबारा शामिल कर दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद राजद कैंप में इसे विपक्ष की नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने इस विवाद को और अधिक लंबा न खींचना ही उचित समझा। हालांकि सुरक्षा बहाली के इस नए फैसले के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच जारी बयानबाजी और टकराव पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।

  • सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार

    सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सोनमर्ग अटल टनल के समीप शुक्रवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में वाहन में सवार छह जवान घायल हो गए। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीम मौके पर पहुंची तथा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। इसके बाद सभी घायल जवानों को आगे की चिकित्सकीय देखभाल के लिए निकटवर्ती सीआरपीएफ कैंप भेज दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सीआरपीएफ का वाहन श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर नियमित आवाजाही के दौरान सोनमर्ग सुरंग के पास सड़क से फिसलकर पलट गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसा सड़क की स्थिति, मौसम अथवा किसी तकनीकी कारण से हुआ। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।

    हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया गया। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से घायलों को बिना किसी देरी के चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। चिकित्सकों की निगरानी में सभी जवानों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी भी जवान को गंभीर जीवन-घातक चोट नहीं आई है, हालांकि सभी का आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किया जा रहा है।

    श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग रणनीतिक दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में गिना जाता है। इसी मार्ग के जरिए लद्दाख क्षेत्र तक सैन्य और नागरिक आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। सोनमर्ग अटल टनल के आसपास का इलाका भी सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस मार्ग पर सुरक्षा बलों की नियमित आवाजाही बनी रहती है और वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाती है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सीआरपीएफ ने वर्ष 2026 की पहली छमाही में अभियानों के दौरान उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में बल को किसी भी अभियान के दौरान जवानों की शहादत का सामना नहीं करना पड़ा। लगातार चल रहे आतंकवाद-रोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों के बीच यह उपलब्धि सुरक्षा बल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में आए सुधार के बाद अभियान संबंधी हताहतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

    देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बलों में शामिल सीआरपीएफ के जिम्मे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियान, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान, पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियान तथा विभिन्न राज्यों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण दायित्व हैं। ऐसे में जवानों की सुरक्षित आवाजाही और परिचालन क्षमता बनाए रखना बल की प्राथमिकताओं में शामिल है। सोनमर्ग के निकट हुई यह दुर्घटना सुरक्षा संचालन के दौरान सड़क सुरक्षा और वाहन संचालन से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित करती है। फिलहाल घायल सभी जवानों का उपचार जारी है और संबंधित एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच में जुटी हैं।

  • 'सिकंदर' के सेट पर फिजियोथेरेपी और भारी सुरक्षा घेरे के बीच काम होने का हुआ प्रामाणिक खुलासा

    'सिकंदर' के सेट पर फिजियोथेरेपी और भारी सुरक्षा घेरे के बीच काम होने का हुआ प्रामाणिक खुलासा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत के शीर्ष अभिनेताओं में शुमार सलमान खान के पेशेवर जीवन और उनकी कार्यशैली को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है। अभिनेता विशाल वशिष्ठ ने फिल्म ‘सिकंदर’ के निर्माण के दौरान सेट पर बने वास्तविक हालातों को साझा करते हुए बताया कि सुपरस्टार सलमान खान ने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों, मानसिक तनाव और असहनीय शारीरिक दर्द के बावजूद इस फिल्म के फिल्मांकन को पूरा किया था। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब इस फिल्म के निर्माण और अभिनेता की सेट पर उपस्थिति को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही थीं। सह-कलाकार के इस बयान ने अभिनेता के काम के प्रति उनके गहरे समर्पण और उच्च व्यावसायिक प्रतिबद्धता को मजबूती से रेखांकित किया है।

    इस फिल्म के निर्माण का दौर अभिनेता के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के लिहाज से बेहद संवेदनशील और अत्यंत कठिन माना जा रहा था। साल 2024 में अपने बेहद करीबी मित्र और अनुभवी राजनेता बाबा सिद्दीकी की अचानक हुई हत्या के बाद सलमान खान गहरे मानसिक आघात और भावनात्मक संकट से गुजर रहे थे। इसके साथ ही, लगातार मिल रही सुरक्षा धमकियों के कारण उनके इर्द-गिर्द सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा करना पड़ा था। इस प्रकार के भारी सुरक्षा घेरे, मानसिक तनाव और हर पल बने रहने वाले जान के खतरे के बीच सेट पर आकर काम करना पूरी टीम और स्वयं अभिनेता के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य बन चुका था।

    मानसिक और बाहरी दबावों के अलावा अभिनेता उस समय गंभीर शारीरिक समस्याओं और असहनीय कष्ट से भी जूझ रहे थे। फिल्म के मुख्य दृश्यों के फिल्मांकन के दौरान सलमान खान की पसली में गंभीर चोट आई थी, जिससे उन्हें उठने-बैठने, झुकने और सामान्य रूप से चलने में भी तीव्र दर्द का सामना करना पड़ रहा था। सेट पर मौजूद रहे सह-कलाकारों के अनुसार, यह कोई बनाई हुई कहानी नहीं थी बल्कि पूरी टीम ने इस दर्द को बेहद करीब से महसूस किया था। अभिनेता जैसे-तैसे बेहद धीमी गति से चलकर कैमरे के सामने अपने दृश्यों को पूरा करते थे और निर्देशक के कट बोलते ही तुरंत अपनी फिजियोथेरेपी प्रक्रिया के लिए चले जाते थे।

    इस भीषण शारीरिक कष्ट के बावजूद फिल्म की कहानी की मांग के अनुसार उन्हें लगातार भारी एक्शन दृश्यों की शूटिंग करनी पड़ी थी, जिसे उन्होंने बिना किसी शिकायत के पूरा किया। विशाल वशिष्ठ ने अभिनेता की प्रशंसा करते हुए कहा कि मनोरंजन उद्योग में इतने लंबे समय तक रहने और शीर्ष मुकाम पर होने के बाद भी उनका ऐसा समर्पण देखना किसी भी कलाकार के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। सेट के बाहर उनके जीवन में क्या खतरनाक उथल-पुथल चल रही थी, इसका नकारात्मक प्रभाव उन्होंने कभी भी अपने काम की गति और सेट के माहौल पर नहीं पड़ने दिया।

    यह प्रामाणिक बयान हाल ही में निर्देशक एआर मुरुगाडोस के उन कथनों के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसमें उन्होंने फिल्म के कठिन शेड्यूल और शूटिंग के समय में किए गए बड़े बदलावों का जिक्र किया था। आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के कारण कई बार दिन के शेड्यूल को रात में बदलना पड़ा था, जिससे क्रू को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। सह-कलाकार के इस नए वक्तव्य ने साफ कर दिया है कि समय में हुए वे बदलाव किसी लापरवाही का परिणाम नहीं बल्कि अभिनेता की गंभीर चिकित्सीय स्थिति और सुरक्षा कारणों की अनिवार्य आवश्यकता थे।

  • पुतिन की सुरक्षा पर हाईटेक पहरा, एआई ट्रैकिंग की आशंका के बीच बढ़ाई गई गोपनीयता

    पुतिन की सुरक्षा पर हाईटेक पहरा, एआई ट्रैकिंग की आशंका के बीच बढ़ाई गई गोपनीयता

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल निगरानी तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। आधुनिक तकनीक के माध्यम से संभावित ट्रैकिंग, निगरानी और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए क्रेमलिन ने कई अतिरिक्त सावधानियां लागू की हैं। इन कदमों को वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा परिदृश्य और हाईटेक खतरों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रूस की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वर्तमान समय में एआई आधारित विश्लेषण प्रणालियां विशाल मात्रा में उपलब्ध डिजिटल डेटा का बेहद कम समय में अध्ययन कर सकती हैं। सीसीटीवी फुटेज, सार्वजनिक गतिविधियों, यात्रा पैटर्न और अन्य डिजिटल संकेतों के आधार पर किसी भी महत्वपूर्ण व्यक्ति की गतिविधियों का आकलन करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी जोखिमों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

    जानकारों के अनुसार राष्ट्रपति से जुड़े कई संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी प्रणालियों की समीक्षा की गई है। कुछ स्थानों पर डिजिटल नेटवर्क को सीमित करने तथा सुरक्षा ढांचे को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाए गए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की साइबर घुसपैठ या डेटा विश्लेषण के माध्यम से संवेदनशील जानकारी तक पहुंच न बनाई जा सके।

    राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सुरक्षा कारणों से उनके आवागमन, संचार माध्यमों और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को लेकर अधिक सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि किसी भी उच्च पदस्थ व्यक्ति की जानकारी तक पहुंच उसके आसपास मौजूद लोगों के माध्यम से भी संभव हो सकती है, इसलिए संपूर्ण सुरक्षा श्रृंखला को मजबूत करना आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां अब केवल पारंपरिक खतरों तक सीमित नहीं रह गई हैं। पहले जहां सुरक्षा का केंद्र भौतिक हमलों, जासूसी गतिविधियों या सैन्य जोखिमों पर होता था, वहीं अब डेटा, एल्गोरिदम और डिजिटल विश्लेषण भी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। एआई आधारित प्रणालियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं को जोड़कर व्यवहारिक पैटर्न और संभावित गतिविधियों का अनुमान लगाने में सक्षम होती जा रही हैं।

    हाल के वर्षों में दुनिया के कई देशों ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल गोपनीयता को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख स्तंभों में शामिल किया है। रूस भी इसी दिशा में अपने सुरक्षा ढांचे को लगातार अपडेट कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में उच्च पदस्थ नेताओं की सुरक्षा केवल हथियारबंद सुरक्षा कर्मियों या सुरक्षित परिसरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल डेटा की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार एआई, सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन तकनीक और साइबर इंटेलिजेंस ने सुरक्षा की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में विश्व की प्रमुख शक्तियां अपने नेतृत्व, सैन्य प्रतिष्ठानों और संवेदनशील ढांचों की सुरक्षा के लिए नई रणनीतियां विकसित कर रही हैं। रूस द्वारा उठाए गए हालिया कदम इसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

  • Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी

    Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav ) और राबड़ी देवी (Rabri Devi) की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. दोनों नेताओं को पहले Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन अब उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी गई है. वहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की Y+ कैटेगरी की सुरक्षा पहले की तरह जारी रहेगी. जानकारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहले उन्हें सुरक्षा खतरों को देखते हुए Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, हाउस गार्ड और एस्कॉर्ट वाहन शामिल होते थे।

    हालांकि वर्तमान सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी शख्स की सुरक्षा उसके मौजूदा संवैधानिक पद और उपलब्ध खुफिया इनपुट के आधार पर तय की जाती है. चूंकि दोनों नेता लंबे समय से किसी सक्रिय प्रशासनिक या संवैधानिक पद पर नहीं हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

    दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की Y+ श्रेणी की सुरक्षा को बरकरार रखा गया है. सुरक्षा समिति का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होता है. इसके अलावा उनकी लगातार राजनीतिक गतिविधियों, जनसभाओं और दौरों को देखते हुए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने का फैसला लिया गया है.

    पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी कटौती की गई है. पहले उन्हें Y कैटेगरी की सुरक्षा मिलती थी, लेकिन अब उन्हें केवल एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी यानी अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाएगा. सुरक्षा में यह बदलाव मंत्री पद छोड़ने के बाद लागू होने वाले नियमों के तहत किया गया है।


    राजश्री यादव की सुरक्षा के लिए एक बॉडीगार्ड की तैनाती

    लालू यादव की बड़ी बेटी और सांसद मीसा भारती को अब तीन सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा कवर मिलेगा. यह व्यवस्था सांसदों के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तय की गई है. वहीं तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव को एक सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराया जाएगा. राजश्री का कोई राजनीतिक या संवैधानिक पद नहीं है, लेकिन परिवार की सार्वजनिक गतिविधियों और व्यक्तिगत सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक अंगरक्षक दिया गया है. इस तरह लालू परिवार के विभिन्न सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था को उनके वर्तमान पद और सुरक्षा मानकों के अनुरूप पुनर्गठित किया गया है।

  • दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का बड़ा ऑपरेशन, आतंकी हमले की साजिश विफल, जांच एजेंसियां अलर्ट

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का बड़ा ऑपरेशन, आतंकी हमले की साजिश विफल, जांच एजेंसियां अलर्ट

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को समय रहते नाकाम करते हुए महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसमें कथित रूप से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़े नेटवर्क और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन वाले एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई के तहत दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से हथियार, हैंड ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री बरामद होने की पुष्टि की गई है। यह गिरफ्तारी कई दिनों की निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर की गई है, जिसके बाद राजधानी के विभिन्न इलाकों में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया गया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्ध लंबे समय से एक संगठित नेटवर्क के तहत सक्रिय थे और दिल्ली में बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इस कथित साजिश में मंत्रालयों, सुरक्षा बलों के प्रतिष्ठानों, संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई है। अगर यह योजना सफल होती तो राजधानी में गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो सकता था, हालांकि समय रहते कार्रवाई होने से संभावित खतरे को टाल दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों और डिजिटल संपर्कों की जानकारी मिल रही थी, जिसके बाद तकनीकी निगरानी और खुफिया नेटवर्क को सक्रिय किया गया। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध लेन-देन और ऑनलाइन संचार के संकेत मिले, जिनके आधार पर इस पूरे मॉड्यूल तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    बरामद हथियारों और विस्फोटक सामग्री की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इनका उपयोग किस प्रकार की संभावित गतिविधियों के लिए किया जाना था। इसके साथ ही जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपियों को किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया गया और उनके संपर्क किन अंतरराष्ट्रीय या घरेलू नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक डाटा की जांच भी की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की संरचना को समझा जा सके।

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी जांच में शामिल हो गई हैं और विभिन्न पहलुओं पर संयुक्त रूप से काम किया जा रहा है। विशेष रूप से वित्तीय लेन-देन, विदेशी संपर्कों और डिजिटल फंडिंग के स्रोतों की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक संकेतों के अनुसार कुछ संदिग्ध लिंक पाकिस्तान आधारित नेटवर्क और मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

    दिल्ली जैसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में इस तरह की साजिश का सामने आना एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। राजधानी में मौजूद संवेदनशील संस्थानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की पहचान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।