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  • राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में भारत को अपनी रक्षा विनिर्माण क्षमता मजबूत करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करना होगा। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को रणनीतिक स्वायत्तता से जोड़ते हुए कहा कि देश में जिस चीज का निर्माण संभव है, उसे घरेलू स्तर पर तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।

    राजधानी में आयोजित रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सोच स्पष्ट है कि जो वस्तु देश में बनाई जा सकती है, उसके लिए आयात पर निर्भरता कम की जाए। उन्होंने कहा कि चिप से लेकर जहाजों तक और छोटे स्क्रू से लेकर पूरी हथियार प्रणालियों तक घरेलू उत्पादन की क्षमता विकसित करना भारत को रणनीतिक रूप से अधिक सक्षम बनाएगा।

    रक्षा मंत्री ने स्वदेशी डिजाइन, नवाचार और देश की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने को भविष्य की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला के अहम हिस्सों का निर्माण देश में करने और उन पर नियंत्रण रखने से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी तथा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटेगी।

    सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लंबी अवधि की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल करना और पूरे विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार ने घरेलू रक्षा उद्योग को गति देने के लिए कई संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधार किए हैं।

    रक्षा मंत्री ने युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह दूरसंचार तकनीक 2जी से 5जी तक पहुंची, उसी तरह युद्ध भी तकनीक के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। आधुनिक संघर्षों में तकनीकी क्षमता सैन्य अभियानों और उनके परिणामों को तेजी से प्रभावित कर रही है।

    उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियां और साइबर सुरक्षा अब आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन रही हैं। भारत इन क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ रक्षा नवाचार के लिए जरूरी नीतिगत ढांचे को भी मजबूत कर रहा है।

    सिंह के अनुसार, भारत संपर्क आधारित और गैर-संपर्क युद्ध के साथ-साथ काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक सैन्य अभियानों से निपटने की क्षमता बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि रणनीतिक जरूरतों के समय निर्भरता कम रहे।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र कई क्षेत्रों में फैले होंगे और उनमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी। अत्याधुनिक तकनीकों में बढ़त हासिल करने वाले देशों के पास बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम साधन होंगे।

    रक्षा मंत्री ने देश के युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवा भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और स्वायत्त प्रणालियों जैसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक युवा केवल भविष्य की नौकरियों के लिए तैयारी नहीं कर रहे, बल्कि देश की भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए तकनीक विकसित करने में भी योगदान दे रहे हैं।

  • नेपाल में भारतीय विमानों की सुरक्षा पर सवाल…. काठमांडू एयरपोर्ट पर 26 साल से यात्रियों की खुद जांच करता है भारत

    नेपाल में भारतीय विमानों की सुरक्षा पर सवाल…. काठमांडू एयरपोर्ट पर 26 साल से यात्रियों की खुद जांच करता है भारत


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) के काठमांडू (Kathmandu) स्थित त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Tribhuvan International Airport) से उड़ान भरने वाले भारतीय विमानों (Indian aircraft) की सुरक्षा व्यवस्था पिछले 26 सालों से भारत खुद संभाव रहा है। नेपाल में इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल दिसंबर 1999 में कंधार हाईजैक (फ्लाइट IC814) के बाद शुरू हुई एक ‘अस्थायी’ व्यवस्था आज स्थायी रूप ले चुकी है जिसके तहत भारतीय सुरक्षाकर्मी नेपाल की धरती पर यात्रियों और उनके सामान की अतिरिक्त तलाशी लेते हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया से नेपाली एजेंसियों को दूर रखा जाता है और नेपाल के किसी भी मंत्रालय यानि गृह या नागरिक उड्डयन के पास इस विदेशी सुरक्षा तैनाती को वैध ठहराने वाला कोई भी दस्तावेज नहीं है। यह स्थिति अब नेपाल की संप्रभुता और दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को लेकर एक नई बहस छेड़ रही है। काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भारतीय रजिस्टर्ड विमान में उड़ान भरने वाले किसी भी यात्री को विमान में चढ़ने से ठीक पहले एक अतिरिक्त सुरक्षा जांच से गुज़रना पड़ता है।


    काठमांडू एयरपोर्ट पर 26 साल से क्यों खुद जांच करता है भारत?

    काठमांडू पोस्ट के मुताबिक एयरपोर्ट एप्रन पर एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बने स्क्रीनिंग पॉइंट पर जहां भारतीय सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं वहां यात्रियों की तलाशी ली जाती है और उनके सामान की अच्छी तरह से हाथ से जांच की जाती है। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है और न ही यह कोई नई बात है। लेकिन पच्चीस साल से ज्यादा समय बीतने के बाद यह अब विमान में चढ़ने की प्रक्रिया का ही एक हिस्सा बन गया है।

    पोस्ट को नेपाल के सिविल एविएशन अथॉरिटी के एक अधिकारी ने बताया है कि एयर इंडिया और इंडिगो दोनों ही त्रिभुवन में तीन शिफ्ट में भारतीय स्टाफ तैनात करते हैं। एक उड़ान के लिए काम करने वाले 12 से 15 लोगों में से छह से आठ भारतीय कर्मचारी एप्रन पर तैनात होते हैं। वे सुरक्षाकर्मियों वाले भारी जूते पहनते हैं। यात्रियों को एक-एक करके चारों तरफ से घिरी हुई ट्रॉली में भेजा जाता है जहां भारतीय स्टाफ उनके शरीर और उनके हैंड बैगेज की तलाशी लेते हैं।

    उन्होंने कहा कि नेपाली स्टाफ मदद तो करते हैं लेकिन उन्हें असल तलाशी प्रक्रिया से दूर रखा जाता है। अधिकारी ने कहा ‘भारत जाने वाली उड़ानों के लिए एप्रन एरिया में मुख्य ड्यूटी में नेपाली स्टाफ को कोई भूमिका नहीं दी जाती है।’ इस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर स्टाफिंग और तलाशी के बारे में जानकारी दी।


    नेपाली अधिकारियों को सुरक्षा जांच से क्यों रखा जाता है दूर?

    उन्होंने कहा कि कोई भी नेपाली एजेंसी ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिखा सकती जिससे मूल रूप से इसकी मंजूरी मिली हो। पोस्ट ने बताया है कि नेपाली मीडिया ऑउटलेट ‘कांतिपुर’ ने संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से कई बार पूछा कि क्या वे संबंधित रिकॉर्ड ढूंढ सकते हैं। हर बार उन्होंने इस सवाल के लिए किसी दूसरी एजेंसी का जिक्र किया। कंधार विमान अपहरण मामले के बाद ये प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन नेपाल ने इसको लेकर कभी लिखित सहमति नहीं दी।

    पोस्ट ने लिखा है कि नेपाल की संप्रभुता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं लेकिन किसी भी सरकार ने इस व्यवस्था की समीक्षा करने की कोशिश नहीं की। पोस्ट का कहना है कि भारत ने बार-बार और ज्यादा सुविधाओं की मांग की है जिसमें काठमांडू से जाने वाली अपनी उड़ानों में स्काई मार्शल तैनात करने की अनुमति भी शामिल है। नेपाली अधिकारियों ने हर बार इस मांग को ठुकरा दिया है या चुपचाप टाल दिया है।


    कंधार कांड के बाद नेपाल ने दी थी भारत को यह इजाजत

    पोस्ट के मुताबिक कई अधिकारियों, राजनयिकों और विदेश मंत्रियों ने ‘कांतिपुर’ को बताया कि नेपाल ने इस व्यवस्था को हटाने के लिए कभी कोई औपचारिक प्रयास या राजनयिक पत्राचार नहीं किया। पोस्ट से बात करते हुए भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि भारत ने नेपाल के विदेश मंत्री स्तर की यात्रा के दौरान यह प्रस्ताव रखा था लेकिन इसे ठुकरा दिया गया था। उनके अनुसार इसके बजाय नेपाल ने भारतीय अधिकारियों को अलग से सुरक्षा स्क्रीनिंग करने की इजाजत देने के लिए मौखिक सहमति दी थी। वे कहते हैं कि उस सहमति में असल में क्या शामिल था इस पर और बारीकी से विचार करने की ज़रूरत है।

  • दिल्ली में गैंगरेप और अपराध की घटनाओं पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मानी प्रशासनिक कमी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दिया आश्वासन

    दिल्ली में गैंगरेप और अपराध की घटनाओं पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मानी प्रशासनिक कमी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दिया आश्वासन

    नई दिल्ली ।दिल्ली में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हुई गंभीर आपराधिक घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासनिक स्तर पर हुई कमियों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से प्रशासन को सबक मिला है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी आपराधिक घटना को रोकने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और निगरानी जरूरी है।

    चलती बस में 16 वर्षीय लड़की के साथ गैंगरेप की घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने माना कि संबंधित बस की जांच नहीं हो पाई थी। उनसे पूछा गया था कि वर्ष 2012 के निर्भया कांड के बाद भी करीब 47 किलोमीटर तक चलने वाली बस कई चेकपॉइंट से गुजरती रही, लेकिन उसकी जांच क्यों नहीं की गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में निश्चित रूप से गलती हुई और बस की जांच नहीं की गई थी। घटना के बाद सभी संबंधित एजेंसियों को यह एहसास हुआ कि किसी भी बस को बिना जांच के आगे नहीं जाने दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मामले में 11 चालान काटे गए हैं।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, निजी एजेंसियों के ड्राइवर और कंडक्टर सहित बसों से जुड़े कर्मचारियों के पुलिस रिकॉर्ड और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले किसी व्यक्ति को स्कूल बस, निजी बस या सरकारी बस चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में महिलाओं और बेटियों के साथ होने वाली हर घटना सरकार के लिए चिंता का विषय है। सरकार का प्रयास ऐसी घटनाओं को रोकना है और प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस बल बेहतर परिणाम देने के लक्ष्य के साथ काम करते हैं, लेकिन एक भी आपराधिक घटना होना चिंता का विषय है।

    दक्षिण दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से गैंगरेप की घटना के बाद उठे सुरक्षा संबंधी सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और व्यवस्था में क्या सुधार जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली के डार्क स्पॉट को सुरक्षित करने के निर्देश संबंधित एजेंसियों को दिए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद करीब एक लाख नई स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। उनके अनुसार, ये लाइटें सेंसर से जुड़ी हैं और खराब होने पर कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलता है, जिसके बाद संबंधित एजेंसी को उन्हें ठीक करने के लिए भेजा जाता है।

    सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामले पर मुख्यमंत्री ने सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की मौजूदा व्यवस्थाएं कई वर्षों में विकसित हुई हैं और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

    PG रजिस्ट्रेशन के सवाल पर मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद करीब डेढ़ साल का समय हुआ है और यह भी देखा जाना चाहिए कि उनसे पहले ऐसी व्यवस्थाएं क्यों नहीं बनाई गईं।

    मुख्यमंत्री ने दिल्ली में SDRF का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी विशेष व्यवस्था नहीं थी, जबकि आपदा या आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव के लिए इसकी जरूरत होती है। उनके मुताबिक अब दिल्ली के पास अपनी SDRF है और इसका इस्तेमाल आपात परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए किया जा सकता है।

  • एमपी पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में वर्दी वाली रील और AI पर दस्तावेज अपलोड करने को लेकर सख्त निर्देश जारी

    एमपी पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में वर्दी वाली रील और AI पर दस्तावेज अपलोड करने को लेकर सख्त निर्देश जारी

    मध्य प्रदेश: पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। 24 बिंदुओं वाली इस नीति में वर्दी में रील, संवेदनशील जानकारी साझा करने, सरकारी दस्तावेजों को AI टूल्स पर अपलोड करने और सोशल मीडिया से कमाई सहित कई गतिविधियों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया उपयोग में अनुशासन, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    नई गाइडलाइन के अनुसार पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अथवा ड्यूटी के बाद वर्दी में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। अशोभनीय वेशभूषा में भी ऐसी सामग्री साझा करने पर रोक रहेगी। पहले से मौजूद अनुचित सामग्री को हटाने और भविष्य में निर्देशों का पालन करने के लिए भी कहा गया है।

    पुलिसकर्मियों को सरकारी दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे दस्तावेजों को स्कैन, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा सकेगा। खास तौर पर गोपनीय और सुरक्षा से जुड़ी सरकारी जानकारी को ChatGPT, Gemini जैसे AI टूल्स पर अपलोड करने से भी स्पष्ट रूप से मना किया गया है।

    संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को अपनी जिम्मेदारी, काम की प्रकृति और तैनाती वाले स्थान की जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करने को कहा गया है। ऐसे स्थानों पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय लोकेशन और जियो टैगिंग जैसी सुविधाएं बंद रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग की आशंका कम हो।

    नई नीति में सोशल मीडिया से होने वाली कमाई को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। सरकार की पूर्व अनुमति के बिना पुलिसकर्मी अपने, आश्रितों या परिजनों के नाम से बनाए गए खातों के माध्यम से पेड प्रमोशन या मॉनेटाइजेशन नहीं करा सकेंगे। व्यक्तिगत व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा के प्रचार पर भी प्रतिबंध रहेगा। सोशल मीडिया से हुई किसी आय का विवरण निर्देश जारी होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर विभाग को देना होगा।

    दुर्भावनापूर्ण, अश्लील या जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव दिखाने वाली सामग्री पोस्ट करने पर भी रोक लगाई गई है। ऐसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने से भी बचने को कहा गया है। विशिष्ट और अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के दौरान महत्वपूर्ण स्थानों के फोटो या सेल्फी साझा करना प्रतिबंधित रहेगा। हथियारों के प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और अन्य संवेदनशील कार्रवाई के फोटो या वीडियो पोस्ट या लाइव नहीं किए जा सकेंगे।

    किसी शिकायत, जांच या विवेचना के दौरान पीड़ित, साक्षी, आवेदक, आरोपी अथवा अन्य संबंधित लोगों के फोटो और वीडियो साझा करने पर भी रोक है। आवश्यक परिस्थितियों में अनुमति के बाद और पहचान छिपाकर ही सामग्री साझा की जा सकेगी। जारी जांच या अदालत में लंबित मामलों से जुड़ी ऐसी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाएगी, जिससे जांच या अभियोजन प्रभावित हो।

    महिला और बालिका से जुड़े यौन अपराधों के पीड़ितों तथा कानून के संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों की पहचान उजागर करने वाली सामग्री साझा नहीं की जा सकेगी। न्यायालय के निर्देशों या फैसलों पर ऐसी टिप्पणी से भी बचना होगा, जिससे अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो।

    गाइडलाइन में संदिग्ध या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ सोशल मीडिया पर मित्रता, फॉलो या सहयोग से बचने को कहा गया है। पुलिस यूनिफॉर्म, वाहन और सरकारी हथियारों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए करने पर भी रोक रहेगी। सरकारी नीतियों, विभागीय कार्यप्रणाली या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पद की गरिमा के विपरीत टिप्पणियां करने की अनुमति नहीं होगी।

    पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के अनावश्यक व्यक्तिगत इस्तेमाल से भी बचना होगा। पुलिस की रणनीति, फील्ड क्राफ्ट, जांच तकनीक और कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति साझा नहीं की जा सकेगी। सेवा संबंधी शिकायतों के लिए सोशल मीडिया को माध्यम बनाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष शिकायत रखने को कहा गया है।

    निर्देशों को थाना स्तर से लेकर पुलिस मुख्यालय, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य इकाइयों में कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से पढ़कर सुनाने के निर्देश दिए गए हैं। जानबूझकर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

  • सोमनाथ मंदिर और भाजपा कार्यालयों को बम धमकी, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का भी ईमेल में जिक्र, गुजरात में सुरक्षा बढ़ी

    सोमनाथ मंदिर और भाजपा कार्यालयों को बम धमकी, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का भी ईमेल में जिक्र, गुजरात में सुरक्षा बढ़ी

    नई दिल्ली ।गुजरात में प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर, अहमदाबाद के खानपुर स्थित भाजपा कार्यालय, गांधीनगर के कोबा स्थित भाजपा मुख्यालय और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। धमकी एक ईमेल के जरिए दी गई, जिसमें राज्य की कई महत्वपूर्ण जगहों पर बम लगाए जाने का दावा किया गया था। सूचना मिलने के बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग और बम निरोधक दस्ते ने तत्काल सुरक्षा जांच शुरू की।

    धमकी की जानकारी मिलते ही अहमदाबाद के खानपुर स्थित भाजपा के पुराने कार्यालय में सुरक्षा टीमों ने पहुंचकर पूरे परिसर की तलाशी ली। किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौके पर तैनात की गईं। जांच के दौरान स्थानीय भाजपा नेता और अन्य संबंधित अधिकारी भी वहां मौजूद रहे।

    गांधीनगर के कोबा स्थित भाजपा मुख्यालय श्री कमलम की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। इसके अलावा सोमनाथ मंदिर परिसर में भी विशेष सतर्कता बरतते हुए तलाशी अभियान चलाया गया। संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।

    शुरुआती जांच में सामने आया है कि धमकी वाले ईमेल में धार्मिक स्थलों और राजनीतिक नेताओं के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य के पुलिसकर्मियों और देश की खुफिया एजेंसी रॉ का भी उल्लेख किया गया है। ईमेल में आपत्तिजनक और देश विरोधी नारे लिखे होने की बात भी सामने आई है।

    अहमदाबाद के खानपुर स्थित भाजपा कार्यालय को मिली धमकी की सूचना सुबह करीब 9 बजे सामने आई। इसके बाद बम निरोधक दस्ते ने पूरे परिसर की बारीकी से जांच की। तलाशी के दौरान किसी तरह की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार जांच के बाद फिलहाल स्थिति सामान्य है।

    धमकी भरे ईमेल को लेकर साइबर क्राइम टीम भी सक्रिय हो गई है। जांच एजेंसियां ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के प्रयास में जुटी हैं। इसके लिए ईमेल से जुड़े तकनीकी विवरण और आईपी एड्रेस की जांच की जा रही है, ताकि संदेश के स्रोत का पता लगाया जा सके।

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि धमकी के पीछे वास्तविक सुरक्षा खतरा था या किसी ने दहशत पैदा करने के उद्देश्य से ईमेल भेजा। इसके साथ ही ईमेल में जिन स्थानों और व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, उनकी सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।

    फिलहाल सोमनाथ मंदिर, अहमदाबाद और गांधीनगर स्थित भाजपा कार्यालयों सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। बम निरोधक दस्ते और पुलिस की तलाशी में अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। मामले की जांच जारी है और ईमेल भेजने वाले की पहचान सामने आने के बाद धमकी के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शनिवार को अपना वीकेंड प्रवास बीच में छोड़कर व्हाइट हाउस लौट आए। वह मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड से रविवार को वापस आने वाले थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही वॉशिंगटन पहुंच गए। ट्रंप की अचानक वापसी के पीछे प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।

    ट्रंप की वापसी ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान की ओर से कहा गया है कि इन शर्तों को मध्यस्थ कतर के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जा चुका है।

    ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने बताया कि तेहरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। ईरान की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि उसकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो वह निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है।

    ईरान की ओर से रखी गई शर्तों और चेतावनी के बीच पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर अमेरिका ने भी सतर्कता बढ़ाई है। अमेरिकी राजनयिक मिशनों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया गया है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को बदलती परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    सऊदी अरब और हूती समूह के बीच जारी सैन्य गतिविधियों ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है। हूती समूह ईरान समर्थित है और सऊदी अरब के खिलाफ पहले भी सैन्य कार्रवाई कर चुका है। इनमें नागरिक हवाई अड्डों को निशाना बनाने वाली घटनाएं भी शामिल रही हैं।

    अमेरिकी सुरक्षा चेतावनी में कहा गया है कि ईरान और उसके समर्थक समूह मध्य पूर्व के बाहर भी अमेरिकी हितों या अमेरिका और उसके नागरिकों से जुड़े स्थानों को निशाना बना सकते हैं। इस वजह से अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों और नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी चेतावनी में यात्रा को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। क्षेत्र से आने-जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को हवाई अड्डों और एयरलाइंस के संचालन से संबंधित जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। सुरक्षा स्थिति में बदलाव होने पर उड़ानों और यात्रा कार्यक्रमों में भी असर पड़ सकता है।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का कैंप डेविड से निर्धारित समय से एक दिन पहले व्हाइट हाउस लौटना महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उनकी वापसी का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ईरान की ओर से एक तरफ बातचीत के लिए शर्तें सामने रखी गई हैं, जबकि दूसरी तरफ मांगें पूरी नहीं होने पर निर्णायक युद्ध की चेतावनी दी गई है। ऐसे में अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया और ईरान के रुख पर क्षेत्रीय हालात की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

    फिलहाल पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां, अमेरिकी सुरक्षा अलर्ट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव चिंता का प्रमुख विषय बना हुआ है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा और यात्रा संबंधी सावधानियां बढ़ा दी गई हैं।

  • उधमपुर में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, दो आतंकियों का एनकाउंटर, पाकिस्तानी होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका

    उधमपुर में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, दो आतंकियों का एनकाउंटर, पाकिस्तानी होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका


    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। जिले के ब्रत्तल इलाके में 16 और 17 सितंबर की दरम्यानी रात चलाए गए अभियान के दौरान दो आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने लक्षित अभियान शुरू किया था। ऑपरेशन के दौरान दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें दोनों आतंकी मारे गए।

    यह कार्रवाई मजालता क्षेत्र में की गई। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को खराब मौसम, कम विजिबिलिटी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। रात के समय इलाके में तलाशी और अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सुरक्षा बलों ने परिस्थितियों के बीच ऑपरेशन जारी रखा। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान भी चलाया गया, जिसमें हथियार और गोला-बारूद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    मारे गए दोनों आतंकियों की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। शुरुआती आशंका है कि दोनों पाकिस्तान के नागरिक हो सकते हैं। इसके साथ ही उनके कश्मीर टाइगर्स या जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, उनकी पहचान और किसी आतंकी संगठन से उनके संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों और अन्य सुरागों के आधार पर दोनों की पहचान तथा उनके नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    उधमपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। सुरक्षाबलों की ओर से अभियान के दौरान सामने आए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। खासतौर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दोनों आतंकी इलाके में कब पहुंचे थे और क्या उनके साथ कोई अन्य सहयोगी या स्थानीय संपर्क भी मौजूद था।

    इससे पहले 15 सितंबर को राजौरी में भी सुरक्षाबलों ने आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। पीर पंजाल क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क का खुलासा करते हुए जाकिर हुसैन, मोहम्मद आजम और मोहम्मद मुश्ताक को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई को क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उसके सहयोगी तंत्र के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना गया।

    जम्मू-कश्मीर में इस साल अब तक 15 आतंकी घटनाओं की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं में 15 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई है, जबकि दो सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। इसके अलावा तीन नागरिकों की भी मौत हुई है। उधमपुर जिले में इस वर्ष सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच दो बार मुठभेड़ हो चुकी है। ताजा ऑपरेशन में दो आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में निगरानी और तलाशी गतिविधियां जारी रखी हैं।

  • कैबिनेट ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने को मंजूरी दी

    कैबिनेट ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने को मंजूरी दी

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकेगा। इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार की स्थिति में बदलाव आया है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा ईपीएफओ सीमा के करीब पहुंची है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन स्तर के अनुरूप करने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अनिवार्य कवरेज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

    मौजूदा व्यवस्था के तहत 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इससे ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से बाहर रह जाता था। नई व्यवस्था में 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    वेतन सीमा बढ़ने के बाद कर्मचारियों को तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से लाभ मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत नियमित बचत की व्यवस्था होगी। कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। वहीं कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके साथ पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान की व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों के लिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।

    इस फैसले से सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। अगले पांच वर्षों में इस निर्णय पर करीब 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा की गई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।

    वर्तमान में ईपीएफओ के तहत करीब 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी है। ईपीएफओ की वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं।

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    नई दिल्ली ।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकेगा। इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार की स्थिति में बदलाव आया है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा ईपीएफओ सीमा के करीब पहुंची है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन स्तर के अनुरूप करने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अनिवार्य कवरेज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

    मौजूदा व्यवस्था के तहत 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इससे ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से बाहर रह जाता था। नई व्यवस्था में 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    वेतन सीमा बढ़ने के बाद कर्मचारियों को तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से लाभ मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत नियमित बचत की व्यवस्था होगी। कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। वहीं कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके साथ पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान की व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों के लिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।

    इस फैसले से सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। अगले पांच वर्षों में इस निर्णय पर करीब 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा की गई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।

    वर्तमान में ईपीएफओ के तहत करीब 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी है। ईपीएफओ की वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी सुरक्षा चूक, बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस तीन इटालियन नागरिक म्यूनिख रवाना, एयर इंडिया को नोटिस

    दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी सुरक्षा चूक, बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस तीन इटालियन नागरिक म्यूनिख रवाना, एयर इंडिया को नोटिस

    नई दिल्ली ।दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चूक का मामला सामने आया है। तीन इटालियन नागरिक बिना दिल्ली में अनिवार्य डिपार्चर इमिग्रेशन कराए ही विदेश रवाना हो गए। तीनों यात्री दिल्ली से म्यूनिख जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सवार हुए। मामले के सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और संबंधित व्यवस्थाओं की जांच शुरू कर दी गई है।

    मामला 3 और 4 सितंबर की दरमियानी रात का बताया गया है। तीनों इटालियन नागरिक अमृतसर से एयर इंडिया की हब-एंड-स्पोक उड़ान AI-1115 से दिल्ली पहुंचे थे। यह विमान रात करीब 12:50 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा। दिल्ली पहुंचने के बाद तीनों यात्रियों को डोमेस्टिक बोर्डिंग पास जारी किया गया था।

    इसके बावजूद यात्रियों को गलत तरीके से इंटरनेशनल ट्रांसफर क्षेत्र में पहुंचा दिया गया। वहां से वे सीधे अंतरराष्ट्रीय डिपार्चर जोन तक पहुंच गए। इसके बाद 4 सितंबर की तड़के करीब 1:45 बजे तीनों लुफ्थांसा की उड़ान LH-763 से म्यूनिख के लिए रवाना हो गए। खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने दिल्ली में डिपार्चर इमिग्रेशन क्लीयरेंस नहीं कराया।

    मामले में सबसे बड़ा सवाल एयरपोर्ट पर लागू मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP को लेकर उठ रहा है। यात्रियों के पास डोमेस्टिक बोर्डिंग पास होने के बावजूद वे इंटरनेशनल डिपार्चर क्षेत्र तक कैसे पहुंच गए और उन्हें वहां जाने से रोकने वाली व्यवस्था ने काम क्यों नहीं किया, इसकी जांच की जा रही है।

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन से संबंधित SOP में पांच व्यवस्थाओं के कथित उल्लंघन को चिन्हित किया है। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग रखना, केवल ‘I’ बोर्डिंग पास वाले यात्रियों को इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर डेस्क तक जाने की अनुमति देना और हब तथा स्पोक एयरपोर्ट पर चौबीसों घंटे नोडल अधिकारी एवं मॉनिटरिंग टीम की व्यवस्था शामिल है।

    मंत्रालय के अनुसार इस मामले में यात्रियों की निगरानी और उन्हें निर्धारित मार्ग से भेजने की व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं कर सकी। इसी वजह से तीन यात्री उस प्रक्रिया को पार कर अंतरराष्ट्रीय उड़ान तक पहुंच गए, जिसे उनके लिए लागू नहीं होना चाहिए था।

    घटना को गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया से जवाब मांगा है। एयरलाइन को कारण बताओ नोटिस जारी कर मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यात्रियों के गलत मार्ग से इंटरनेशनल डिपार्चर तक पहुंचने के पीछे किस स्तर पर चूक हुई।

    मामले में गृह मंत्रालय ने भी गंभीरता दिखाई है। गृह मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की मंगलवार शाम एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में घटना से जुड़े सुरक्षा और इमिग्रेशन पहलुओं पर चर्चा किए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि तीनों यात्रियों को घरेलू बोर्डिंग पास के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में एयरलाइन स्टाफ की लापरवाही थी या एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षा और संबंधित एजेंसियों की व्यवस्था में कमी रही।

    मामला सामने आने के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की आवाजाही, बोर्डिंग पास की जांच और घरेलू से अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और आगे ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, कहा- 15 साल में बसाया घर, फिर बेघर मत होने दो

    कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, कहा- 15 साल में बसाया घर, फिर बेघर मत होने दो

    नई दिल्ली। कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PM पैकेज) के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। लगातार मिल रही धमकियों के बीच कर्मचारियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर तत्काल सुरक्षा कदम उठाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे करीब 15 साल से घाटी में अपने जीवन को दोबारा बसाने की कोशिश कर रहे हैं और अब उन्हें फिर से विस्थापन की ओर धकेले जाने का डर सताने लगा है।

    ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने चिट्ठी के माध्यम से कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि भले ही ऊपर से हालात सामान्य दिखाई देते हों, लेकिन जमीन पर डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। कई परिवार अपनी सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं।

    कर्मचारियों ने कहा है कि हाल के दिनों में सामने आई हर धमकी उन्हें 1990 के दशक की घटनाओं की याद दिलाती है। उस दौर में धमकी भरे पत्र और नोटिस डर का माहौल बनाने के शुरुआती संकेत बने थे। इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। अब दोबारा धमकी भरे पत्र सामने आने से कर्मचारियों के बीच पुराने भय की स्थिति बन रही है।

    पिछले कुछ हफ्तों के दौरान PM पैकेज के तहत घाटी में तैनात कर्मचारियों को लगातार धमकियां मिलने की बात सामने आई है। कई पत्रों में उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने की चेतावनी दी गई है और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इन मामलों में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है।

    कर्मचारियों की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब उनका निजी डेटा ऑनलाइन लीक होने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे घाटी में रह रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है।

    कर्मचारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, जहां ट्रांजिट कॉलोनियां बनाई गई हैं, वहां भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों ने आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और उसे मजबूत करने की मांग की है।

    अमित शाह को लिखी चिट्ठी में धमकियों की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। कर्मचारियों ने PM पैकेज के तहत काम कर रहे लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। साथ ही ऐसा प्रभावी सिस्टम बनाने की मांग की गई है, जिसके जरिए किसी कर्मचारी को धमकी मिलने पर वह तुरंत शिकायत दर्ज करा सके और समय पर सुरक्षा सहायता मिल सके।

    कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे कश्मीर घाटी छोड़ना नहीं चाहते। उनका कहना है कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने उस जीवन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है, जो कई दशक पहले उजड़ गया था। वर्ष 2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों ने एक बार फिर उनकी सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न किया जाए। वे कश्मीर में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल चाहते हैं।