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  • 5 अक्टूबर को खुलेगा शेयर बाजार, क्या फिर आएगी तेजी या जारी रहेगी गिरावट, Nifty Sensex पर इन बड़े संकेतों का असर

    5 अक्टूबर को खुलेगा शेयर बाजार, क्या फिर आएगी तेजी या जारी रहेगी गिरावट, Nifty Sensex पर इन बड़े संकेतों का असर


    नई दिल्ली। 5 अक्टूबर 2026 सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार फिर से शुरू होगा। गांधी जयंती के कारण 2 अक्टूबर को NSE और BSE बंद रहे थे और इसके बाद शनिवार तथा रविवार का अवकाश रहा। ऐसे में निवेशकों की नजर सोमवार के कारोबारी सत्र पर रहेगी। बाजार के लिए पिछला सप्ताह काफी चुनौतीपूर्ण रहा है क्योंकि लगातार बिकवाली के दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी बनी रही। 1 अक्टूबर को सेंसेक्स 570.59 अंक गिरकर 71909.70 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 198.50 अंक की गिरावट के साथ 22421.95 पर पहुंच गया।

    5 अक्टूबर को बाजार खुलने से पहले निवेशकों के सामने कई बड़े संकेत मौजूद हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार की धारणा पर दबाव बना रही है। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। सितंबर के डेरिवेटिव कारोबार में निफ्टी में करीब 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और बाजार में तेजी वाले दांव कमजोर हुए हैं। ऐसे माहौल में सोमवार को शुरुआती कारोबार में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विशेषज्ञों की नजर निफ्टी के 22000 से 22200 के क्षेत्र पर रहेगी। इसे महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 22500 से 22600 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर देखा जा रहा है। अगर निफ्टी इन स्तरों के ऊपर मजबूती कायम करता है तो बाजार में कुछ राहत की उम्मीद बन सकती है। दूसरी तरफ कमजोरी बढ़ने पर 22000 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    अक्टूबर का पहला सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चलेगी और 7 अक्टूबर को नीतिगत फैसले की घोषणा होगी। इसके अलावा कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों का सीजन भी शुरू होने वाला है। TCS 8 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इन घटनाओं का असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

    बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने भारतीय शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिल रहा है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे किसी एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें।

    कुल मिलाकर 5 अक्टूबर को बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ कच्चे तेल की कीमतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों बॉन्ड यील्ड RBI की बैठक और आगामी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। मौजूदा माहौल में जोखिम को समझकर और अपनी निवेश रणनीति के अनुसार ही कदम उठाना बेहतर रहेगा। यह जानकारी बाजार विश्लेषण के लिए है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

  • 25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर

    25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर


    नई दिल्ली। 25 सितंबर 2026 शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। इससे एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को घरेलू बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान Sensex और Nifty दोनों दबाव में रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।

    24 सितंबर की सुबह Sensex करीब 576 अंक की गिरावट के साथ 74251 के आसपास कारोबार कर रहा था जबकि Nifty 23245 के स्तर तक फिसल गया था। बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख शेयरों और सेक्टर पर देखने को मिला। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी दबाव रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार पूंजीकरण में शुरुआती कारोबार के दौरान 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई थी।

    अब 25 सितंबर को बाजार की दिशा तय करने में Nifty के अहम तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बाजार विश्लेषण के अनुसार 23200 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा रहा है। यदि Nifty इस स्तर के नीचे टिकता है तो 23100 से 23000 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 23500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    बाजार की चाल पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर भी बना रह सकता है। 24 सितंबर को अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.1 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई थी जो 2007 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया। बढ़ती यील्ड के कारण निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर नए अनुमान बन रहे हैं। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमत भी निवेशकों के लिए अहम संकेत रहेगी। Brent crude 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से बाजार में तेल की हर बड़ी चाल पर नजर बनी रहेगी।

    इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। 23 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक भी खरीदार रहे थे। ऐसे में 25 सितंबर को अगर संस्थागत निवेश का रुख बदलता है तो बाजार की चाल पर उसका असर दिखाई दे सकता है।

    निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में तेजी या गिरावट को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय प्रमुख तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। खासतौर पर Nifty का 23200 के आसपास व्यवहार और 23500 के स्तर की ओर उसकी चाल बाजार की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर

    शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी। 17 सितंबर के कारोबारी सत्र में बाजार ने काफी उतार चढ़ाव के बीच लगभग सपाट रुख दिखाया था। कारोबारी दिन के अंत में Nifty 50 करीब 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23270.60 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74314.59 पर रहा। बाजार में हाल की गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखाई दी लेकिन निवेशकों का रुख पूरी तरह से जोखिम लेने वाला नहीं रहा।

    18 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का रह सकता है। फेड ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है और ब्याज दर का दायरा 3.75 से 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना का संकेत दिया गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दुनियाभर के बाजारों में निवेशकों की नजर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर बनी हुई है। भारतीय बाजार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ सकता है।

    रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेगी। 17 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.93 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 96 के स्तर के पार भी गया था लेकिन बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। Reuters के मुताबिक संभावित RBI हस्तक्षेप और पोर्टफोलियो निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिला। ऐसे में 18 सितंबर को डॉलर इंडेक्स और रुपये की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

    कच्चा तेल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा। 17 सितंबर को Brent crude करीब 104.8 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और आयात बिल से जुड़े दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर बाजार के अलग अलग सेक्टर पर दिखाई दे सकता है।

    सेक्टर के लिहाज से 17 सितंबर को ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। वहीं व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने मजबूती दिखाई। Business Standard के अनुसार कारोबारी सत्र के दौरान Nifty Metal में भी बढ़त रही और बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी रही।

    18 सितंबर को निवेशकों की नजर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी। 17 सितंबर से पहले उपलब्ध आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही थी। इस खींचतान के बीच Nifty और Sensex में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए बाजार की चाल को केवल एक संकेत के आधार पर समझने के बजाय वैश्विक बाजार रुपये कच्चे तेल विदेशी निवेश और अमेरिकी ब्याज दरों को साथ देखकर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • 17 सितंबर को कैसा रहेगा शेयर बाजार Nifty 23200 के ऊपर बंद Sensex में भी जोरदार रिकवरी

    17 सितंबर को कैसा रहेगा शेयर बाजार Nifty 23200 के ऊपर बंद Sensex में भी जोरदार रिकवरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 17 सितंबर को कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहने वाली है। इससे पहले 16 सितंबर को बाजार ने लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद राहत की सांस ली। बुधवार को Sensex 332.63 अंक की बढ़त के साथ 74336.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Nifty 99 अंक चढ़कर 23217.60 पर पहुंच गया। बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी तथा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट से भी सेंटीमेंट को सहारा मिला।

    अब 17 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगा। 16 सितंबर को भारतीय बाजार बंद होने के बाद फेड का फैसला सामने आना था इसलिए इसका असर अगले कारोबारी सत्र में दिखाई दे सकता है। वैश्विक बाजारों में निवेशक फेड के फैसले के साथ उसकी आगे की मौद्रिक नीति को लेकर टिप्पणी पर भी नजर रखेंगे। ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख रहने पर उभरते बाजारों से विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है जबकि नरम संकेत मिलने पर बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।

    कच्चा तेल भी 17 सितंबर के कारोबार के लिए बड़ा संकेत रहेगा। 16 सितंबर को Brent crude करीब 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर था। हाल के दिनों में तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई और व्यापार घाटे से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में तेल की कीमतों में आगे की चाल का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। 15 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 2978 करोड़ रुपए की निकासी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक 2686 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे। लगातार विदेशी बिकवाली की स्थिति बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकती है।

    तकनीकी स्तर पर भी Nifty के लिए 23200 का स्तर चर्चा में रहेगा। 16 सितंबर को Nifty इसी स्तर के ऊपर बंद हुआ है। कारोबार के दौरान यह 23116.10 के निचले स्तर तक गया था लेकिन बाद में खरीदारी लौटने से 23284.75 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा। ऐसे में 17 सितंबर को बाजार में शुरुआती चाल के बाद निवेशकों की नजर यह देखने पर होगी कि Nifty अपनी बढ़त को बनाए रखता है या फिर ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलती है।

    सेक्टोरल स्तर पर बैंक और FMCG शेयरों में बुधवार को मजबूती देखने को मिली जबकि IT और फार्मा शेयर दबाव में रहे। SBI HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों ने Nifty को सहारा दिया। 17 सितंबर को भी इन प्रमुख सेक्टरों की गतिविधियां बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    इसके अलावा 17 सितंबर से NSE का बहुप्रतीक्षित IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। NSE IPO का प्राइस बैंड 1700 से 1785 रुपए प्रति शेयर रखा गया है और यह इश्यू 21 सितंबर तक खुला रहेगा। इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है। प्राथमिक बाजार में इस बड़े इश्यू को लेकर निवेशकों की सक्रियता का असर सेकेंडरी मार्केट की liquidity पर भी नजर आने वाला विषय रहेगा।

    कुल मिलाकर 17 सितंबर को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान अमेरिकी फेड का फैसला कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की खरीदारी और Nifty के प्रमुख तकनीकी स्तर सबसे अहम संकेत रहेंगे। बाजार में तेजी के बाद भी उतार चढ़ाव बना रह सकता है इसलिए निवेशकों के लिए किसी भी दिशा में कदम उठाने से पहले बाजार की चाल और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • बाजार की तेजी पर फिर लगा ब्रेक सेंसेक्स 76,934 के करीब निफ्टी 0.48 प्रतिशत नीचे निवेशकों की नजर अब ग्लोबल संकेतों पर

    बाजार की तेजी पर फिर लगा ब्रेक सेंसेक्स 76,934 के करीब निफ्टी 0.48 प्रतिशत नीचे निवेशकों की नजर अब ग्लोबल संकेतों पर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली और कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला। इसके अलावा मेटल पीएसयू बैंक और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव भी बाजार की कमजोरी की बड़ी वजह बना। कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 539.35 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,933.59 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 116.90 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और यह 24,090.85 के स्तर पर बंद हुआ।

    व्यापक बाजार की बात करें तो यहां भी कारोबारी धारणा पूरी तरह मजबूत नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.10 प्रतिशत जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.13 प्रतिशत की गिरावट रही। हालांकि बड़ी कंपनियों के मुकाबले व्यापक बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का एक वर्ग अभी भी घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के अवसर तलाश रहा है।

    सेक्टरवार कारोबार में सीमेंट कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। निफ्टी सीमेंट इंडेक्स 1.33 प्रतिशत टूट गया। इसके बाद निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.94 प्रतिशत निफ्टी मेटल में 0.86 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मीडिया सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा हेल्थकेयर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और प्राइवेट बैंक इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार की गिरावट के बीच कुछ सहारा दिया।

    निफ्टी 50 के शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज कोटक महिंद्रा बैंक अदाणी पोर्ट्स सिप्ला और बीईएल प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके विपरीत हिंडाल्को एचडीएफसी बैंक महिंद्रा एंड महिंद्रा श्रीराम फाइनेंस ग्रासिम इंडस्ट्रीज एचसीएल टेक भारती एयरटेल और रिलायंस जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को और बढ़ाया।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक एक्सपायरी से जुड़ी उठापटक और मिडिल ईस्ट में किसी बड़ी कूटनीतिक सफलता का अभाव फिलहाल बाजार को एक सीमित दायरे में रख रहा है। हालांकि कंपनियों की कमाई के अनुमानों में ऊर्जा की ऊंची कीमतों के असर को काफी हद तक शामिल किया जा चुका है। हाल में कच्चे तेल की कीमतों और लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड में आई नरमी से महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत की उम्मीद भी बनी हुई है। अगर ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आती है तो इसका असर कंपनियों की लागत और भविष्य की कमाई पर सकारात्मक पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का निवेश और कंपनियों की कमाई में बनी मजबूती भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। खासकर मिडकैप कंपनियों के कई सेक्टर वैश्विक अनिश्चितताओं से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं और घरेलू मांग का फायदा उठा रहे हैं। यही वजह है कि बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल सम्मेलन में होने वाले भाषण पर भी रहेगी। निवेशक उनके भाषण से महंगाई ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के भविष्य को लेकर संकेत तलाशेंगे। इन संकेतों का असर वैश्विक जोखिम धारणा और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम भी दलाल स्ट्रीट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

  • Stock Market Outlook 24 August: बाजार में दिख सकता है उतार-चढ़ाव, Nifty के इन स्तरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

    Stock Market Outlook 24 August: बाजार में दिख सकता है उतार-चढ़ाव, Nifty के इन स्तरों पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली। 24 अगस्त शेयर बाजार: Nifty-Sensex में बन रहा रिकवरी का संकेत, जानें सपोर्ट-रेजिस्टेंस और आज की बाजार रणनीति
    24 अगस्त 2026 यानी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत निवेशकों के लिए अहम रहने वाली है। पिछले कारोबारी सप्ताह में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला और Nifty 50 शुक्रवार को 24252 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में Nifty करीब 0.47 प्रतिशत कमजोर रहा हालांकि अंतिम कारोबारी सत्र में इंडेक्स ने मामूली बढ़त के साथ सप्ताह का अंत किया। बाजार में फिलहाल तेजी और कमजोरी के बीच संतुलन की स्थिति दिखाई दे रही है। ऐसे में सोमवार को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी।

    तकनीकी नजरिए से देखें तो Nifty के लिए 24000 के आसपास का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके ऊपर बने रहने पर बाजार में रिकवरी की कोशिश जारी रह सकती है। वहीं 24400 के आसपास मजबूत प्रतिरोध देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार 24400 के ऊपर टिकाऊ तेजी आने पर बाजार में और मजबूती का संकेत मिल सकता है जबकि 24000 के नीचे फिसलने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। कुछ तकनीकी अनुमानों में 24092 और 23993 को भी नजदीकी सपोर्ट जोन माना गया है जबकि 24412 और 24511 प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर बताए गए हैं।

    बैंकिंग शेयरों की बात करें तो शुक्रवार को Bank Nifty में करीब 0.46 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई और इंडेक्स 57761.95 के स्तर पर बंद हुआ। बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है। ऐसे में सोमवार को Bank Nifty की चाल भी पूरे बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती है। हालांकि तेजी के बीच ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली से इनकार नहीं किया जा सकता।

    विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। 21 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII नकद बाजार में करीब 542.71 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 2124.14 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को सहारा दे रहे हैं लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी बाजार की तेजी के सामने चुनौती बनी हुई है।

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और भू राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं। हाल की बाजार रिपोर्टों में भी तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय तनाव को निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बताया गया है। ऊंची तेल कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता बढ़ा सकती हैं और इससे बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है।

    इस बीच शुरुआती संकेतों में GIFT Nifty 24329 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया जो पिछले स्तर से करीब 0.18 प्रतिशत ऊपर था। इससे सोमवार को भारतीय बाजार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ होने की संभावना का संकेत मिलता है लेकिन GIFT Nifty का रुख केवल शुरुआती संकेत है और वास्तविक बाजार चाल वैश्विक तथा घरेलू घटनाक्रम के अनुसार बदल सकती है।

    कुल मिलाकर 24 अगस्त को बाजार का रुख फिलहाल साइडवेज से हल्का सकारात्मक नजर आ रहा है लेकिन निवेशकों को जल्दबाजी में ट्रेड लेने से बचना चाहिए। Nifty में 24000 का स्तर कमजोरी की स्थिति में महत्वपूर्ण रहेगा जबकि 24400 के ऊपर मजबूती बाजार में नई तेजी का रास्ता खोल सकती है। निवेशकों को बाजार की चाल देखकर ही निर्णय लेना चाहिए और केवल अनुमान के आधार पर खरीदारी या बिक्री नहीं करनी चाहिए। यह सामान्य बाजार विश्लेषण है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

  • 17 अगस्त को शेयर बाजार में क्या होगा? Nifty-Sensex की दिशा तय करेंगे ये बड़े ट्रिगर, निवेशकों को रहना होगा सतर्क

    17 अगस्त को शेयर बाजार में क्या होगा? Nifty-Sensex की दिशा तय करेंगे ये बड़े ट्रिगर, निवेशकों को रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली । 17 अगस्त 2026 सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत सतर्क माहौल के बीच होने की संभावना है। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार कमजोर होकर बंद हुआ और Nifty 50 करीब 205 अंक की गिरावट के साथ 24366 के स्तर पर जबकि Sensex करीब 490 अंक टूटकर 78009.25 के स्तर पर बंद हुआ। लगातार कमजोर प्रदर्शन के बीच निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बाजार निचले स्तरों पर खरीदारी का सहारा लेता है या बिकवाली का दबाव और बढ़ता है।
    बाजार की चाल पर इस समय सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का पड़ रहा है। Reuters के मुताबिक शुक्रवार को Brent crude करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था और तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई रुपये और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि सोमवार के कारोबार में ऊर्जा कीमतों से जुड़ी खबरें बाजार के लिए महत्वपूर्ण ट्रिगर बनी रहेंगी। 
    तकनीकी नजरिए से Nifty के लिए 24250 से 24200 का क्षेत्र अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि इंडेक्स इस स्तर के नीचे फिसलता है तो बाजार में बिकवाली और तेज हो सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 24500 से 24550 का क्षेत्र तत्काल चुनौती बना हुआ है। इस जोन के ऊपर मजबूती से टिकने पर बाजार में राहत की खरीदारी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति में किसी एक दिशा में तेजी से दांव लगाने के बजाय प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। 
    Bank Nifty के लिए भी 58000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंकिंग शेयरों में यदि खरीदारी लौटती है तो इंडेक्स को मजबूती मिल सकती है लेकिन कमजोर वैश्विक संकेत और बढ़ती बॉन्ड यील्ड दबाव बनाए रख सकते हैं। पिछले सप्ताह वित्तीय क्षेत्र में भी कमजोरी देखने को मिली थी। ऐसे में सोमवार को बैंकिंग और वित्तीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

    इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। पिछले सप्ताह वैश्विक जोखिमों और तेल की कीमतों के दबाव के बीच निवेशकों का रुख सावधान रहा। घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर भी अलग अलग शेयरों में दिखाई दे सकता है। ऐसे में पूरे बाजार की बजाय मजबूत नतीजों और बेहतर कारोबार वाली कंपनियों पर निवेशकों का फोकस रह सकता है। 

    हालांकि बाजार में कमजोरी के बावजूद लंबी अवधि को लेकर कुछ विशेषज्ञ भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार Carnelian Asset Management का मानना है कि कॉरपोरेट आय में सुधार और वैश्विक निवेश धारणा में बदलाव से भारतीय इक्विटी बाजार में 2027 तक रिकवरी की संभावना बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा उतार चढ़ाव को केवल तत्काल गिरावट के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त को बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। Nifty के लिए 24200 के आसपास का सपोर्ट और 24500 से 24550 का जोन अहम रहेगा जबकि Sensex की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी पर निर्भर करेगी। निवेशकों को बाजार की चाल देखकर ही निर्णय लेना चाहिए और केवल एक दिन के उतार चढ़ाव के आधार पर जल्दबाजी में निवेश या बिकवाली से बचना बेहतर होगा। यह बाजार विश्लेषण सामान्य जानकारी के लिए है और निवेश की सलाह नहीं है।

  • 3 जुलाई का शेयर बाजार अपडेट बाजार में रहेगा उतार चढ़ाव या बनेगा नया रिकॉर्ड निवेश से पहले पढ़ें पूरी रिपोर्ट

    3 जुलाई का शेयर बाजार अपडेट बाजार में रहेगा उतार चढ़ाव या बनेगा नया रिकॉर्ड निवेश से पहले पढ़ें पूरी रिपोर्ट


    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में 3 जुलाई का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों कच्चे तेल की कीमतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी हुई है। ऐसे में आज का कारोबार भी काफी हलचल भरा रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत हल्की बढ़त या सीमित उतार चढ़ाव के साथ हो सकती है। यदि विदेशी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बैंकिंग आईटी ऑटो और कैपिटल गुड्स सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी नकारात्मक खबर का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की खरीद बिक्री अहम भूमिका निभाएगी। यदि विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है जबकि बिकवाली बढ़ने पर मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिल सकता है।

    आईटी सेक्टर पर निवेशकों की विशेष नजर बनी रहेगी क्योंकि आने वाले दिनों में बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे सामने आने वाले हैं। इसके अलावा बैंकिंग शेयरों में भी गतिविधि तेज रहने की उम्मीद है। यदि ब्याज दरों को लेकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो वित्तीय शेयरों को समर्थन मिल सकता है।

    ऑटो सेक्टर में मासिक बिक्री के आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। अच्छी बिक्री दर्ज करने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर भी रक्षात्मक निवेश के लिहाज से आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

    ऊर्जा और तेल गैस कंपनियों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव का सीधा असर इन कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और कई सेक्टर्स को राहत मिल सकती है।

    विशेषज्ञ फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है। इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए आज का सत्र अवसरों के साथ जोखिम भी लेकर आ सकता है इसलिए स्टॉप लॉस का पालन करना जरूरी रहेगा।

    बाजार की चाल पर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों वैश्विक महंगाई की स्थिति डॉलर इंडेक्स और एशियाई बाजारों के प्रदर्शन का भी प्रभाव रहेगा। यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक रहते हैं तो भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि किसी भी अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से बाजार में अचानक उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर 3 जुलाई का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। समझदारी से निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बाजार में अच्छे अवसर बन सकते हैं जबकि बिना रणनीति के निवेश करने वालों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।

  • शानदार शुरुआत के बाद शेयर बाजार में बिकवाली, IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

    शानदार शुरुआत के बाद शेयर बाजार में बिकवाली, IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की, लेकिन कारोबार के अंतिम चरण में तेज बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों की मुनाफावसूली, आईटी और ऑटो शेयरों में कमजोरी तथा बाजार में बढ़ी अस्थिरता ने दिनभर की बढ़त को पूरी तरह खत्म कर दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,728.37 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 109.75 अंक यानी 0.46 प्रतिशत टूटकर 23,946.25 अंक पर आ गया। दिनभर के कारोबार में गिरावट वाले शेयरों की संख्या बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों से अधिक रही, जिससे बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत मिला।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में लगातार तेजी देखने को मिली थी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और विदेशी निवेशकों की संभावित खरीदारी से बाजार पहले ही ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका था। ऐसे में निवेशकों ने ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली करना उचित समझा, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।

    दिन की गिरावट में आईटी और ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जबकि ऑटो सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में खरीदारी का रुख बना रहा, लेकिन यह तेजी पूरे बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,100 से 24,250 अंक का दायरा फिलहाल मजबूत प्रतिरोध स्तर बना हुआ है। बाजार इस स्तर को पार करने में सफल नहीं हो सका, जिसके बाद बिकवाली तेज हो गई। अब 24,000 और 23,800 अंक के स्तर को निकट भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।

    इस दौरान बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX भी करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 13.88 के आसपास पहुंच गया। आमतौर पर VIX में बढ़ोतरी आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देती है। यही वजह रही कि कई निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए अपने निवेश में मुनाफावसूली की।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी 24,100 के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर बनी रहेगी।

  • वैश्विक तनाव का घरेलू बाजार पर असर, ऑयल-गैस शेयरों में बिकवाली से शुरुआती कारोबार रहा सुस्त

    वैश्विक तनाव का घरेलू बाजार पर असर, ऑयल-गैस शेयरों में बिकवाली से शुरुआती कारोबार रहा सुस्त


    नई दिल्ली । कमजोर वैश्विक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनावपूर्ण माहौल के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने सपाट शुरुआत की। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल दिखाई दिया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ तौर पर नजर आया। शुरुआती कारोबार में बाजार सीमित दायरे में चलता दिखाई दिया और कई प्रमुख सेक्टर दबाव में कारोबार करते रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियां फिलहाल निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रही हैं और इसी कारण घरेलू बाजार में भी सतर्कता का रुख देखने को मिल रहा है।

    शुरुआती कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हल्की गिरावट के साथ खुले। सेंसेक्स में गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी दबाव में नजर आया। बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर सबसे अधिक दबाव ऑयल और गैस क्षेत्र के शेयरों की ओर से दिखाई दिया। इस क्षेत्र में बिकवाली के चलते निवेशकों का रुझान कमजोर रहा। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो, प्राइवेट बैंकिंग, रियल्टी, मेटल और वित्तीय सेवाओं से जुड़े सेक्टरों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी दर्ज की गई।

    हालांकि बाजार की पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। कुछ सेक्टरों ने सीमित स्तर पर बाजार को सहारा देने की कोशिश की। मीडिया, रक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े शेयरों में मजबूती दिखाई दी। टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। चुनिंदा बड़ी कंपनियों में भी तेजी देखने को मिली, जिससे बाजार में गिरावट अधिक गहरी नहीं हो सकी। इससे यह संकेत भी मिला कि निवेशक पूरी तरह सतर्क जरूर हैं, लेकिन चुनिंदा क्षेत्रों में अवसर तलाशने की रणनीति भी अपनाई जा रही है।

    लार्जकैप कंपनियों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार के इन दोनों वर्गों में खरीदारी का माहौल दिखाई दिया और सूचकांकों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार के कुछ हिस्सों में बना हुआ है। छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी से बाजार के भीतर अलग रुझान देखने को मिला।

    दूसरी ओर, वैश्विक बाजारों में भी मिश्रित स्थिति बनी रही। कई एशियाई बाजार दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि कुछ बाजारों में सीमित बढ़त दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और समुद्री क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ऊर्जा लागत और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि तेल की कीमतों में यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका प्रभाव विभिन्न सेक्टरों की लागत और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और आने वाले कारोबारी संकेतों पर टिकी हुई है।