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  • हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”

    हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मीडिया से बातचीत में सरमा ने दावा किया कि भाजपा में शामिल होने से पहले वे राहुल और प्रियंका की अंदरूनी लड़ाई के शिकार रहे।

    सरमा ने कहा, “गांधी परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के राजनीतिक फैसलों से यह साफ दिखता है कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि प्रियंका गांधी केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करें।

    उन्हें असम में भेजा गया, इसका यही मतलब है।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस में राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं और गुट के जरिए सत्ता बनाए रखना चाहते हैं, जबकि प्रियंका उस गुट का हिस्सा नहीं हैं। सरमा ने बताया, “मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा हूं, मुझे अंदर की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि प्रियंका को केरल की बजाय असम में जिम्मेदारी दी गई।”

    हिमंत सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद से लगातार कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार अब इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई राहुल और प्रियंका के बीच अंदरूनी मतभेद हैं, या यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    तेहरान। ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण भड़के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ (HRANA) ने रविवार सुबह बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 25 प्रांतों में 170 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं। एजेंसी के अनुसार, मरने वालों की संख्या कम से कम 15 पहुंच गई है और 580 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में अशांति पैदा करने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि दंगाइयों को उनके स्थान पर रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर इजरायल की ओर से ऐसा बयान सामने आया है, जिसे सुनकर खामनेई आग-बबूला हो जाएंगे।

    दरअसल, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर अन्य देशों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि इस सप्ताह इस्लामी गणराज्य के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान इजरायल ईरान के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता के साथ खड़ा है। नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि हम ईरानी जनता के संघर्ष तथा उनकी स्वतंत्रता, आजादी और न्याय की आकांक्षाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह बहुत संभव है कि हम ऐसे क्षण में खड़े हैं जब ईरानी लोग अपना भाग्य अपने हाथों में ले रहे हैं। बता दें कि ईरान में प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले रविवार को हुई थी, जब दुकानदारों ने आर्थिक समस्याओं को लेकर हड़ताल की थी। उस वक्त से इसका दायरा और आकार लगातार बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारी राजनीतिक मांगें भी उठा रहे हैं।
    जून 2025 में 12 दिनों का चला था युद्ध

    बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच पिछले साल जून में 12 दिनों तक युद्ध चला था, जब इजरायल ने ईरानी परमाणु सुविधाओं के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों पर हमलों की श्रृंखला शुरू की थी। यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य इस्लामी गणराज्य की परमाणु अनुसंधान और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना था। ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करके जवाब दिया। बाद में संघर्ष के दौरान अमेरिका ने इजरायल का साथ देते हुए ईरानी परमाणु स्थलों को निशाना बनाया, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई।

    रविवार को नेतन्याहू ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की और कहा कि उन्होंने इस सप्ताह अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ इस पर बातचीत की थी। नेतन्याहू ने कहा कि हमने शून्य संवर्धन के अपने साझा रुख को दोहराया तथा ईरान से 400 किलोग्राम संवर्धित सामग्री हटाने और उन स्थलों को सख्त तथा वास्तविक निगरानी के अधीन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • आईएएस संतोष वर्मा के बयान पर बवाल तेज 65 ब्राह्मण संगठन 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव करेंगे

    आईएएस संतोष वर्मा के बयान पर बवाल तेज 65 ब्राह्मण संगठन 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव करेंगे


    नई दिल्ली ।मध्यप्रदेश में आईएएस संतोष वर्मा द्वारा आरक्षण और ब्राह्मण समाज को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणी के बाद प्रदेशभर में बवाल मच गया है। 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन के दौरान संतोष वर्मा ने कहा था कि एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण तब तक देना चाहिए जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता।
    यह बयान फैलते ही प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। अब यह विवाद इतना बढ़ चुका है कि राज्य के 65 से अधिक ब्राह्मण संगठन एकजुट हो गए हैं और उन्होंने संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान किया है।

    क्या था संतोष वर्मा का विवादास्पद बयान

    संतोष वर्मा ने अपने बयान में यह दावा किया था कि एक परिवार के एक सदस्य को आरक्षण तब तक मिलना चाहिए जब तक किसी ब्राह्मण परिवार का बेटा किसी ब्राह्मण परिवार की बेटी से शादी नहीं करता। यह बयान तुरंत ही विवाद का कारण बन गया और प्रदेश भर में विरोध की लहर उठने लगी। सोशल मीडिया पर उनके इस बयान को लेकर जमकर आलोचना की गई और कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई।

    ब्राह्मण समाज का आक्रोश

    संतोष वर्मा के बयान ने मध्यप्रदेश के ब्राह्मण समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। प्रदेशभर के 65 से अधिक ब्राह्मण संगठनों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया है। इन संगठनों का कहना है कि संतोष वर्मा का बयान सामाजिक समरसता को नुकसान पहुँचाने वाला है और इससे ब्राह्मण समाज की प्रतिष्ठा पर बुरा असर पड़ा है। संगठनों ने इस बयान को जातिवाद और समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा देने वाला करार दिया है।

    ब्राह्मण संगठनों का कहना है कि जब तक संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सोमवार के बाद इन संगठनों ने आंदोलन की नई रणनीति तय करने की बात कही है। वहीं संतोष वर्मा का एक और बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा कितने संतोष वर्मा को मारोगे कितने को जलाओगे अब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा। इस बयान ने और भी आग में घी डालने का काम किया और ब्राह्मण संगठनों के विरोध को और तेज कर दिया।

    सरकार का रुख

    संतोष वर्मा के बयान को लेकर सरकार भी हरकत में आ गई है। 26 नवंबर को उन्हें नोटिस जारी किया गया जिसमें कहा गया कि उनका बयान सामाजिक समरसता को ठेस पहुँचाने वाला है और यह अखिल भारतीय सेवा नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आता है। नोटिस में वर्मा से 7 दिनों के भीतर जवाब माँगा गया था। हालांकि इसके बावजूद संतोष वर्मा के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है जिससे आंदोलन और बढ़ गया है।

    14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव

    अब तक के घटनाक्रम को देखते हुए प्रदेश के 65 ब्राह्मण संगठनों ने संयुक्त रूप से 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव करने का ऐलान किया है। इन संगठनों का कहना है कि इस घेराव के जरिए वे संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे और प्रदेश सरकार को यह संदेश देंगे कि ब्राह्मण समाज को अपमानित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजधानी भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन बड़े पैमाने पर होने की संभावना है और प्रशासन ने इस पर नजर रखना शुरू कर दिया है। पुलिस और प्रशासन सुरक्षा के मद्देनज़र अलर्ट मोड पर हैं।

    आईएएस संतोष वर्मा के बयान ने मध्यप्रदेश में विवाद को जन्म दिया है और अब यह केवल एक बयान का मुद्दा नहीं बल्कि समाज में जातिवाद और सामाजिक समरसता पर गहरा सवाल उठाने वाला बन चुका है। ब्राह्मण संगठनों का आक्रोश और मुख्यमंत्री आवास के घेराव की योजना से यह साफ है कि इस मुद्दे पर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बड़ा संघर्ष खड़ा हो सकता है। सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि उन्हें इस विवाद को शांत करने के लिए संतोष वर्मा पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।