Tag: Strait of Hormuz

  • ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन? ईरान, रूस और रेयर अर्थ पर टिकी दुनिया की नजर

    ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन? ईरान, रूस और रेयर अर्थ पर टिकी दुनिया की नजर



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान, रूस और रेयर अर्थ जैसे मुद्दों पर अमेरिका-चीन के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरे में ईरान से जुड़ा तेल व्यापार, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और चीन द्वारा रूस को दिए जा रहे समर्थन जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिका की नजर चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी है, जो वैश्विक तकनीकी उद्योग के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और अमेरिका के बीच यह बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी पड़ेगा। खासकर ईरान संकट और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे इस बैठक को और जटिल बना रहे हैं।

    भारत के दृष्टिकोण से यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और चीन दोनों ही उसकी रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा नीति पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डालते हैं। दोनों देशों के रिश्तों में किसी भी बदलाव का असर भारत की कूटनीति और क्षेत्रीय रणनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।

    कुल मिलाकर, ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के कई बड़े समीकरणों को प्रभावित करने वाला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

  • ट्रम्प का ईरान को बड़ा झटका, शांति प्रस्ताव खारिज; परमाणु शर्तों पर बढ़ा टकराव, होर्मुज में तनाव गहराया

    ट्रम्प का ईरान को बड़ा झटका, शांति प्रस्ताव खारिज; परमाणु शर्तों पर बढ़ा टकराव, होर्मुज में तनाव गहराया



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करते हुए कड़े रुख का संकेत दिया है। ट्रम्प ने साफ कहा कि ईरान की ओर से भेजा गया प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं है, जिससे क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल और बढ़ गई है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा था, जिसमें युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात शामिल थी। इसके जवाब में अमेरिका ने शर्त रखी कि ईरान को उच्च संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) अमेरिका को सौंपना होगा और लंबे समय तक परमाणु संवर्धन रोकना होगा।

    इस पूरे विवाद की जड़ ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी है, जहां अमेरिका और पश्चिमी देश इसे सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण ऊर्जा जरूरतों से जोड़कर देखता है। इसी टकराव के कारण दोनों देशों के बीच बातचीत बार-बार रुकती और शुरू होती रही है।

    तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात भी संवेदनशील बने हुए हैं, जहां वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। किसी भी टकराव का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कूटनीतिक गतिरोध के साथ-साथ क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और बयानबाजी भी तेज हो गई हैं, जिससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर यह स्थिति दिखाती है कि ईरान-अमेरिका संबंध एक बार फिर टकराव की दिशा में बढ़ रहे हैं, जहां बातचीत और दबाव की राजनीति दोनों साथ-साथ चल रही हैं और किसी भी फैसले का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा सकता है।

  • कतर के पास जहाज पर हमला: होर्मुज स्ट्रेट में आग से बढ़ा वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा

    कतर के पास जहाज पर हमला: होर्मुज स्ट्रेट में आग से बढ़ा वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा



    नई दिल्ली। कतर के तट के पास स्थित संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में एक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध प्रोजेक्टाइल टकराने से आग लग गई। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब खाड़ी क्षेत्र पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है।

    क्या है पूरा मामला?
    ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार एक बल्क कैरियर जहाज दोहा से लगभग 23 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में जा रहा था

    अचानक जहाज किसी अज्ञात वस्तु से टकराया,टक्कर के बाद जहाज में आग लग गई। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह हमला था, तकनीकी खराबी या कोई बाहरी टक्कर।

    क्यों बढ़ी चिंता?
    यह घटना होर्मुज स्ट्रेट जैसे दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग में हुई है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।हाल के समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैंईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर समुद्री मार्गों पर दिख रहा हैसुरक्षा कारणों से शिपिंग कंपनियों में चिंता बढ़ी है

    ऊर्जा बाजार पर असर का खतरा
    विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तनाव का सीधा असर तेल कीमतों पर पड़ता हैवैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का जोखिम बढ़ जाता हैबीमा और शिपिंग लागत में भी तेजी आने की संभावना रहती हैईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से टकराव। क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां बढ़ीं।हाल के महीनों में समुद्री सुरक्षा घटनाएं अधिक हुईं। खाड़ी क्षेत्र पहले से हाई अलर्ट पर है

    कतर के पास हुआ यह हादसा केवल एक जहाज दुर्घटना नहीं, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराते खतरे का संकेत है। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, इस्लामाबाद में नई बातचीत की तैयारी; न्यूक्लियर प्रोग्राम और होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, इस्लामाबाद में नई बातचीत की तैयारी; न्यूक्लियर प्रोग्राम और होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए अगले हफ्ते इस्लामाबाद में नई दौर की बातचीत हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश मध्यस्थों के जरिए एक 14-बिंदु ड्राफ्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और यूरेनियम भंडार जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें ईरान के जवाब का इंतजार है और अगर प्रगति हुई तो समझौते की दिशा आगे बढ़ सकती है।

    हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम या हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को रोकने के लिए किसी समझौते पर तैयार नहीं है। इससे दोनों देशों के बीच मतभेद और गहरे हो गए हैं।

    इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने 70 से ज्यादा जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने से रोका है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी दखल पर क्षेत्र में बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है।

    UAE ने भी दावा किया है कि ईरान ने उसके ऊपर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते तेल और सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

    रूस ने अमेरिका और बहरीन के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए उसे वापस लेने की मांग की है, जबकि चीन और अन्य देशों की स्थिति इस पूरे मामले में अलग-अलग नजर आ रही है।

  • होर्मुज स्ट्रेट संकट खत्म होने के करीब! अमेरिका-ईरान समझौते से भारत समेत दुनिया को मिल सकती है बड़ी राहत

    होर्मुज स्ट्रेट संकट खत्म होने के करीब! अमेरिका-ईरान समझौते से भारत समेत दुनिया को मिल सकती है बड़ी राहत


    नई दिल्ली। होरमुज़ जलसंधि में जारी तनाव अब कम होता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौते पर सहमति बन गई है, जिसके बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर से शुरू हो सकती है। इससे भारत  समेत दुनिया भर को तेल और गैस संकट से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को चरणबद्ध तरीके से हटाएगा, जबकि ईरान बदले में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलेगा। माना जा रहा है कि आने वाले घंटों में वहां फंसे सैकड़ों जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है।

    दुनिया भर में मचा था तेल और गैस संकट
    अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में पाबंदियां बढ़ा दी थीं। इसके कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी सप्लाई पर असर पड़ा। भारत समेत कई देशों में ऊर्जा संकट और महंगे ईंधन की चिंता बढ़ गई थी।होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है।

    ट्रंप ने भी दिए समझौते के संकेत
    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी हाल में संकेत दिए थे कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच वार्ता अच्छी रही है और संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है।

    फ्रांस ने भी की हस्तक्षेप की अपील
    इमैनुएल मैक्रों  ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से बातचीत के बाद सभी पक्षों से बिना शर्त नाकेबंदी हटाने की अपील की। फ्रांस ने समुद्री सुरक्षा और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बहुराष्ट्रीय मिशन का भी सुझाव दिया है।

    परमाणु समझौते पर भी बन सकती है बात
    रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने के साथ-साथ परमाणु संवर्धन और प्रतिबंधों को लेकर भी समझौते के करीब पहुंच गए हैं। अगर यह डील पूरी होती है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।

  • होर्मुज तनाव के बीच बड़ा भू-राजनीतिक टकराव: सऊदी ने अमेरिका को एयरस्पेस देने से किया इनकार, ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर लगा ब्रेक

    होर्मुज तनाव के बीच बड़ा भू-राजनीतिक टकराव: सऊदी ने अमेरिका को एयरस्पेस देने से किया इनकार, ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर लगा ब्रेक


    नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों के रिश्तों में खटास की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिका को अपना “प्रोजेक्ट फ्रीडम” अभियान अचानक रोकना पड़ा।

    4 मई को शुरू हुआ था अमेरिकी ऑपरेशन
    अमेरिका ने 4 मई को होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित करने के लिए “प्रोजेक्ट फ्रीडम” लॉन्च किया था। लेकिन महज एक दिन के भीतर ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे रोकने का आदेश दे दिया।ट्रम्प ने दावा किया था कि पाकिस्तान के अनुरोध पर यह ऑपरेशन रोका गया, लेकिन अब सामने आई रिपोर्ट्स में सऊदी अरब की नाराजगी को बड़ा कारण बताया जा रहा है।

    सऊदी के इनकार से बिगड़ा समीकरण
    एक न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व ने इस मिशन में शामिल अमेरिकी विमानों को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी। इससे पूरा ऑपरेशन प्रभावित हुआ।

    सूत्रों का कहना है कि ट्रम्प द्वारा बिना पूर्ण कूटनीतिक तैयारी के सोशल मीडिया पर इस मिशन की घोषणा करने से खाड़ी देशों में असहजता पैदा हो गई। इसके बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत भी हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई।

    सीमित सफलता के बाद ऑपरेशन बंद
    रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इस अभियान के तहत सिर्फ दो दिनों में तीन जहाजों को ही सुरक्षित पार करा सका, जिसके बाद ऑपरेशन रोकना पड़ा।

    ईरान-अमेरिका वार्ता और तनाव
    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच 14 सूत्रीय समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है, हालांकि अभी कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है।

    अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में होर्मुज मार्ग खोलने का प्रस्ताव भी रखा है, जिसका ईरान ने विरोध किया है।

    क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल
    चीन और ईरान के बीच बीजिंग में उच्च स्तरीय बैठक हुई

    चीन ने युद्ध रोकने की अपील करते हुए ईरान को समर्थन का भरोसा दिया

    अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश में जुटे हैं

    ट्रम्प का दावा और सख्त रुख
    राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो और बड़े हमले किए जा सकते हैं।

    होर्मुज में हमला, स्थिति और तनावपूर्ण
    फ्रांसीसी शिपिंग कंपनी CMA CGM ने बताया कि उनके एक कार्गो जहाज पर मिसाइल या ड्रोन हमला हुआ, जिसमें कई क्रू सदस्य घायल हुए हैं। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।होर्मुज स्ट्रेट में चल रहा यह विवाद अब सिर्फ सैन्य या कूटनीतिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, सऊदी अरब, ईरान और चीन जैसे बड़े खिलाड़ियों के बीच रणनीतिक टकराव में बदलता जा रहा है। 

  • होर्मुज में टेंशन हाई: फ्रांसीसी जहाज पर हमला, ट्रम्प ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोका; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

    होर्मुज में टेंशन हाई: फ्रांसीसी जहाज पर हमला, ट्रम्प ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोका; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक फ्रांसीसी कार्गो जहाज पर हमले ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। CMA CGM ने पुष्टि की है कि उसके ‘सैन एंटोनियो’ जहाज को पार करते समय मिसाइल या ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसमें कई क्रू मेंबर घायल हो गए और जहाज को नुकसान पहुंचा।

    दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक 
    कंपनी के अनुसार, घायल कर्मचारियों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर इलाज शुरू कर दिया गया है। इस घटना ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह इलाका दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है।
    ईरान ने इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे अपनी रणनीतिक बढ़त बताया है।
    इसी बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन को रोक दिया है। यह ऑपरेशन अमेरिका ने होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया था, लेकिन इसे अचानक बंद करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान ने इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे अपनी रणनीतिक बढ़त बताया है।

    पिछले 24 घंटों में हालात तेजी से बदले हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने नया प्रस्ताव पेश कर ईरान से हमले रोकने, माइंस हटाने और जहाजों से टोल वसूली बंद करने की मांग की है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात पर लगातार दूसरे दिन मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, हालांकि वहां के डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया।

    अमेरिका ने हालात को संभालने के लिए USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश वॉरशिप को भी होर्मुज भेजा था, लेकिन ऑपरेशन रुकने के बाद इसकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, फुजैराह हमले में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है।

    तनाव के बीच चीन ने साफ कहा है कि अब युद्ध को रोकना बेहद जरूरी है। चीन के अनुसार, इस संघर्ष का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है। साथ ही उसने ईरान के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी दोहराया है।दूसरी ओर, शहबाज शरीफ ने ट्रम्प के फैसले की तारीफ करते हुए इसे क्षेत्र में शांति की दिशा में सही कदम बताया है।

    कुल मिलाकर होर्मुज में बढ़ता तनाव अब वैश्विक संकट का रूप लेता दिख रहा है। एक तरफ सैन्य गतिविधियां तेज हो रही हैं, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक बयानबाजी भी चरम पर है। आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

  • UAE हमले पर भारत का कड़ा रुख: 3 भारतीय घायल, PM मोदी बोले- नागरिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं

    UAE हमले पर भारत का कड़ा रुख: 3 भारतीय घायल, PM मोदी बोले- नागरिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं



    नई दिल्ली। UAE के फुजैराह स्थित ऑयल पोर्ट और पेट्रोलियम सुविधाओं पर हुए हमले में 3 भारतीय नागरिकों के घायल होने के बाद भारत ने सख्त नाराजगी जताई है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि आम लोगों और जरूरी ढांचों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमला किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    क्या हुआ फुजैराह में?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, फुजैराह के इंडस्ट्रियल एरिया में ड्रोन और मिसाइल हमले के बाद पेट्रोलियम प्लांट में आग लग गई। इस घटना में तीन भारतीय घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है।

    भारत की दो टूक
    भारत ने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने और कूटनीति के रास्ते अपनाने की अपील की है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है, जिसे वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    UAE का दावा, ईरान पर आरोप
    UAE ने इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन हमलों को रोका गया। हालांकि ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    24 घंटे में बढ़ा तनाव, बड़े अपडेट्स
    ड्रोन प्लांट पर हमला
    फुजैराह के पेट्रोलियम प्लांट पर हमले के बाद भीषण आग लगी, 3 भारतीय घायल।

    ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ लॉन्च
    अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नई पहल शुरू की।

    दक्षिण कोरियाई जहाज पर अटैक
    दक्षिण कोरिया के जहाज पर हमले से आग लगी, कोई हताहत नहीं।

    जब्त जहाज पाकिस्तान को सौंपा
    अमेरिका ने जब्त ईरानी जहाज पाकिस्तान को सौंपा, जिसे बाद में ईरान भेजा गया।

    ईरान में फांसी
    ईरान में जासूसी के आरोप में तीन लोगों को फांसी दी गई।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर पूरी तरह सतर्क है।

  • ईरान-अमेरिका टकराव पर सस्पेंस गहराया: हमले के दावे पर नहीं लगी मुहर, दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं

    ईरान-अमेरिका टकराव पर सस्पेंस गहराया: हमले के दावे पर नहीं लगी मुहर, दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं


    नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच समुद्री टकराव को लेकर बड़ा सस्पेंस खड़ा हो गया है। ईरान ने जहां रणनीतिक जलमार्ग में कार्रवाई का दावा किया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने की बात कही है। इससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं और हालात अब भी धुंधले बने हुए हैं।

    सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह साफ नहीं हो पा रहा कि जमीनी स्तर पर वास्तव में क्या हुआ है और दोनों देशों के बीच टकराव किस स्तर तक पहुंच चुका है।

    इससे पहले ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी सेना इस रणनीतिक जलमार्ग में प्रवेश करती है तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह बयान उस वक्त आया था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।

    मौजूदा हालात में एक ओर ईरान के सख्त तेवर हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। दावों और हकीकत के बीच की दूरी ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा रहस्यमयी बना दिया है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस संवेदनशील टकराव पर टिकी हैं, जहां हर नया अपडेट हालात को और गंभीर बना सकता है।

  • होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत

    होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक युद्धपोत पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मिसाइल हमला किया है। ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जास्क के नजदीक अमेरिकी जहाज पर दो मिसाइलें दागी गईं, क्योंकि उसने रिवोल्यूशनरी गार्ड की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।

    इस घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और हालात फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरानी युद्धपोतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं।

    यह कथित हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” मिशन शुरू करने का ऐलान किया है। CENTCOM के मुताबिक इस ऑपरेशन में 15,000 सैनिक, 100 से ज्यादा एयर और सी प्लेटफॉर्म, युद्धपोत और ड्रोन शामिल हैं, जिनका मकसद होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है।

    अमेरिका ने समुद्री मार्गों के पास एक “उन्नत सुरक्षा क्षेत्र” भी बनाया है और जहाजों को ओमान के अधिकारियों के साथ समन्वय करने की सलाह दी है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि सामान्य रूट के आसपास से गुजरना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि वहां बारूदी सुरंगों की आशंका है।

    वहीं यूरोप ने इस मिशन से दूरी बना ली है। इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांस “प्रोजेक्ट फ्रीडम” में शामिल नहीं होगा और वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। उन्होंने इसे अस्पष्ट योजना बताते हुए यूरोप के अलग सुरक्षा समाधान पर जोर दिया।

    कुल मिलाकर, होर्मुज जैसे रणनीतिक मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह टकराव बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।