Tag: Strait of Hormuz

  • होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’

    होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसने की कोशिश करती है, तो उस पर सीधा हमला किया जाएगा।

    ईरान की संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया मुख्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह जलमार्ग उसकी निगरानी में है और किसी भी विदेशी सैन्य दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासतौर पर अमेरिकी सेना को “आक्रामक ताकत” बताते हुए कड़ा संदेश दिया गया है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम के मिशन का ऐलान किया है। इसके तहत अमेरिका होर्मुज में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने जा रहा है।

    अमेरिका का दावा है कि कई देशों ने मदद मांगी है, क्योंकि उनके जहाज इस अहम समुद्री रास्ते में फंसे हुए हैं। ट्रंप के मुताबिक, इन जहाजों का मौजूदा संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है और वे “निर्दोष” हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालना जरूरी है।

    CENTCOM के अनुसार 4 मई से शुरू होने वाले इस ऑपरेशन में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जहाज, 100 से ज्यादा विमान, ड्रोन और करीब 15,000 सैनिक शामिल होंगे। इसका मकसद व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री रास्ता सुनिश्चित करना है।

    हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि इस तरह की किसी भी सैन्य गतिविधि को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच सीधा टकराव बढ़ने की आशंका और गहरा गई है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े संकट का संकेत दे रहा है।

  • होर्मुज में टकराव चरम पर: ईरानी जहाज छोड़ा, US का रेस्क्यू मिशन शुरू, क्या बढ़ेगा युद्ध का खतरा?

    होर्मुज में टकराव चरम पर: ईरानी जहाज छोड़ा, US का रेस्क्यू मिशन शुरू, क्या बढ़ेगा युद्ध का खतरा?


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और चीन से जुड़ी घटनाओं ने वैश्विक राजनीति और समुद्री सुरक्षा को बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल ही में अमेरिका ने जब्त किए गए ईरानी जहाज ‘टूस्का’ को पाकिस्तान के हवाले कर दिया है, जिससे इस पूरे विवाद में नया मोड़ आ गया है। अब इस जहाज को उसके क्रू मेंबर्स के साथ ईरान भेजा जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब होर्मुज स्ट्रेट में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

    दरअसल, अमेरिका ने 21 अप्रैल को इस जहाज को उस वक्त कब्जे में लिया था, जब यह चीन से लौट रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि जहाज पर हथियार बनाने से जुड़ा सामान मौजूद था, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज करते हुए इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया था। अब जहाज की रिहाई को कई जानकार कूटनीतिक संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं।

    इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि कई देशों ने मदद मांगी है और अमेरिका इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सोमवार से ऑपरेशन शुरू करेगा। ट्रम्प ने यह भी साफ कर दिया कि अगर इस मिशन में ईरान ने कोई रुकावट डाली, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि, ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी नेवी ने होर्मुज में प्रवेश करने की कोशिश की, तो उस पर हमला किया जाएगा। IRGC के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने तो यहां तक कह दिया कि यह क्षेत्र अमेरिकी सेना की “कब्रगाह” बन सकता है।

    तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Strait of Hormuz में इस समय करीब 2,000 जहाज फंसे हुए हैं। इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, इन जहाजों पर करीब 20,000 नाविक मौजूद हैं, जो लगातार बिगड़ती स्थिति के बीच फंसे हुए हैं। खाने-पीने का सामान, ईंधन और जरूरी संसाधनों की कमी तेजी से बढ़ रही है।

    स्थिति को और जटिल बनाते हुए, हाल के दिनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। छोटे नावों के जरिए कार्गो शिप पर हमला किया गया, जबकि अब तक कम से कम 49 जहाज अपने रास्ते बदल चुके हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजार पर भी असर पड़ा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर 4.45 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं।

    इस पूरे संकट के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना ने एक ईरानी कंटेनर जहाज से 22 क्रू मेंबर्स को पाकिस्तान के हवाले किया है, जिन्हें बाद में ईरान भेजा जाएगा। इसे मानवीय पहल के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इससे तनाव पूरी तरह कम होता नजर नहीं आ रहा।

    उधर, वैश्विक कूटनीति भी तेजी से सक्रिय हो गई है। Xi Jinping और Donald Trump के बीच 14-15 मई को संभावित मुलाकात पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह बैठक पहले अप्रैल में होनी थी, लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण टाल दी गई थी। चीन इस बैठक को बेहद अहम मान रहा है, क्योंकि इससे दोनों महाशक्तियों के बीच लंबे समय के लिए स्थिर संबंध बन सकते हैं।

    हालांकि, चीन के लिए सबसे बड़ी चिंता भी होर्मुज ही है, जहां से वह अपनी करीब एक-तिहाई तेल और गैस की जरूरत पूरी करता है। अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट इस वक्त दुनिया का सबसे संवेदनशील फ्लैशपॉइंट बन चुका है, जहां एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध का कारण बन सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि कूटनीति हालात संभालती है या यह संकट और गहराता है।

  • ट्रंप-ईरान आमने-सामने: ‘गेंद अमेरिका के पाले में’, शांति प्रस्ताव के साथ तेहरान की दो टूक, युद्ध भी मंजूर

    ट्रंप-ईरान आमने-सामने: ‘गेंद अमेरिका के पाले में’, शांति प्रस्ताव के साथ तेहरान की दो टूक, युद्ध भी मंजूर


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्ते एक नए मोड़ पर पहुंच गए हैं। तेहरान ने जहां शांति की पहल करते हुए 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, वहीं सख्त लहजे में यह भी साफ कर दिया है कि अब फैसला वॉशिंगटन को करना है कूटनीति या टकराव। पाकिस्तान के जरिए भेजे गए इस प्रस्ताव को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और हालात फिर से टकराव की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।

    ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दो टूक कहा कि “गेंद अब अमेरिका के पाले में है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान ने शांति का रास्ता खोल दिया है, लेकिन अगर अमेरिका टकराव चाहता है तो ईरान भी हर स्थिति के लिए तैयार है। उनका कहना है कि देश अपने हितों और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ी तो जवाब भी उसी अंदाज में दिया जाएगा।

    दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताते हुए साफ संकेत दिए हैं कि इसे स्वीकार करना आसान नहीं होगा। ट्रंप ने कहा कि वह प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य होगा। उन्होंने ईरान पर पिछले कई दशकों के व्यवहार को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान ने अभी तक “पर्याप्त कीमत” नहीं चुकाई है।

    दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बार-बार विफल हो रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की कोशिशें भी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी हैं। अमेरिका का रुख साफ है कि वह तब तक युद्ध खत्म नहीं करेगा जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ठोस और विश्वसनीय नियंत्रण सुनिश्चित नहीं हो जाता। वहीं ईरान की प्राथमिकता है कि पहले युद्ध पूरी तरह खत्म हो, नाकेबंदी हटे और उसके बाद ही अन्य मुद्दों पर चर्चा हो।

    ईरान के 14 सूत्रीय प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल हैं। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नाकेबंदी हटाने, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, जब्त ईरानी संपत्तियों की रिहाई, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और भविष्य में हमले न करने की गारंटी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अलावा लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करने और होर्मुज में नया तंत्र लागू करने की बात भी कही गई है।

    इसी बीच अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को किसी भी रूप में भुगतान करती हैं, तो उन्हें कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस चेतावनी में नकद के साथ डिजिटल और अनौपचारिक लेन-देन भी शामिल हैं, जिससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    कुल मिलाकर, एक तरफ शांति प्रस्ताव है तो दूसरी ओर सख्त बयानबाजी—ऐसे में मिडिल ईस्ट का माहौल अभी भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात बातचीत की मेज तक पहुंचते हैं या फिर टकराव और गहराता है।

  • ईरान का ट्रंप को 14 सूत्रीय अल्टीमेटम: ‘युद्ध खत्म करो, प्रतिबंध हटाओ, मुआवजा दो’

    ईरान का ट्रंप को 14 सूत्रीय अल्टीमेटम: ‘युद्ध खत्म करो, प्रतिबंध हटाओ, मुआवजा दो’




    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज हो गई हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के 9 सूत्रीय शांति फ्रेमवर्क के जवाब में ईरान ने नया 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजकर साफ संकेत दिया है कि वह अपने शर्तों पर समझौता चाहता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचाए गए इस प्रस्ताव में तेहरान ने युद्ध खत्म करने से लेकर प्रतिबंध हटाने और मुआवजे तक की सख्त मांगें रख दी हैं, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ गई है।

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रस्ताव में सबसे अहम शर्त यह है कि अमेरिका सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत रोके, लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में युद्ध खत्म किया जाए और अमेरिकी सेना को वापस बुलाया जाए। इसके अलावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नई व्यवस्था बनाने, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने की भी बात कही गई है। ईरान ने साफ तौर पर आर्थिक प्रतिबंध खत्म करने, जब्त संपत्तियां लौटाने और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग भी शामिल की है।

    तेहरान ने अमेरिका के 2 महीने के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज करते हुए 30 दिन में सभी मुद्दों के समाधान की समयसीमा सुझाई है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दो टूक कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है या तो कूटनीति का रास्ता चुने या फिर टकराव के लिए तैयार रहे। उनका कहना है कि ईरान दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार है और अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

    वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने इस 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका इसकी समीक्षा कर रहा है, लेकिन इसे स्वीकार करना आसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान ने आक्रामक रुख जारी रखा तो सैन्य कार्रवाई दोबारा हो सकती है। ट्रंप के मुताबिक, “ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन नेतृत्व और शर्तों को लेकर स्पष्टता नहीं है।”

    इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि एक तरफ बातचीत के दरवाजे खुले हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध का खतरा अभी टला नहीं है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि अमेरिका और ईरान कूटनीति की राह पकड़ते हैं या फिर मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ता है।

  • हॉर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी कामयाबी: 45 हजार टन LPG लेकर ‘सर्व शक्ति’ ने तोड़ी नाकेबंदी

    हॉर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी कामयाबी: 45 हजार टन LPG लेकर ‘सर्व शक्ति’ ने तोड़ी नाकेबंदी


    नई दिल्ली। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और नाकेबंदी के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका-ईरान तनातनी के कारण जहां इस अहम समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है, वहीं भारत से जुड़ा एलपीजी टैंकर ‘सर्व शक्ति’ सफलतापूर्वक इस खतरनाक मार्ग को पार कर आगे बढ़ गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर संकट गहराता जा रहा है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए हर शिपमेंट बेहद अहम बन चुका है।

    मरीन ट्रैफिक डेटा के मुताबिक करीब 45 हजार टन एलपीजी लेकर चल रहा यह टैंकर ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीप के पास से तय मार्ग का पालन करते हुए ओमान की खाड़ी में दाखिल हुआ। जहाज पर 18 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद हैं और यह विशाखापत्तनम की ओर बढ़ रहा है। इस पूरे ऑपरेशन को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि अमेरिकी नाकेबंदी के बाद यह भारत से जुड़ा पहला बड़ा एलपीजी टैंकर है जिसने हॉर्मुज का रास्ता पार किया है।

    इस कार्गो को सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने खरीदा है, हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि इस शिपमेंट का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता है, क्योंकि मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने के कारण देश में एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है।

    दरअसल, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता है। ऐसे में हॉर्मुज जैसे संवेदनशील मार्ग पर रुकावट का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। हाल के दिनों में सप्लाई में कमी के चलते कई जगहों पर घबराहट, लंबी कतारें और सीमित वितरण जैसी स्थिति देखने को मिली। यही वजह है कि सरकार ने एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर ईरान से बातचीत तेज की और वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी शुरू कीं।

    बताया जा रहा है कि भारत अब तक इस संकट के बीच कम से कम आठ एलपीजी जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफल रहा है। साथ ही घरेलू उत्पादन को भी तेजी से बढ़ाया गया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के मुताबिक देश में उत्पादन बढ़ाकर करीब 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है, जबकि खपत को संतुलित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

    हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना तकनीकी रूप से भी चुनौतीपूर्ण होता है। सामान्य हालात में यह सफर 10 से 14 घंटे का होता है, लेकिन मौजूदा तनाव के बीच इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप, लोकेशन गड़बड़ी और सुरक्षा जोखिमों के कारण यह और जटिल हो गया है। कई जहाज ट्रैकिंग से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर तक बंद कर देते हैं।

    इन सभी चुनौतियों के बीच ‘सर्व शक्ति’ का सुरक्षित पारगमन न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए राहत भरी खबर है, बल्कि यह भी दिखाता है कि संकट के दौर में कूटनीति, रणनीति और लॉजिस्टिक्स के दम पर देश अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम है। आने वाले दिनों में हॉर्मुज की स्थिति कैसी रहती है, इस पर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • ट्रम्प की ईरान को सख्त चेतावनी: गलती की तो फिर सैन्य कार्रवाई, 14-पॉइंट प्रस्ताव पर संशय बरकरार

    ट्रम्प की ईरान को सख्त चेतावनी: गलती की तो फिर सैन्य कार्रवाई, 14-पॉइंट प्रस्ताव पर संशय बरकरार



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान किसी तरह की “गलती” करता है तो उस पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।ट्रम्प ने कहा कि मौजूदा स्थिति में अमेरिका मजबूत स्थिति में है, जबकि ईरान दबाव में दिख रहा है और बातचीत की ओर झुकाव बढ़ा है।

    पाकिस्तान की मध्यस्थता और 14-पॉइंट प्रस्ताव
    ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए ईरान की ओर से एक 14-पॉइंट प्रस्ताव अमेरिका को मिला है।उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव का विस्तृत ड्राफ्ट अभी समीक्षा में है, लेकिन शुरुआती संकेतों के आधार पर उन्हें नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगा।ट्रम्प के मुताबिक,ईरान ने पिछले कई दशकों में जो रवैया अपनाया है, उसकी अभी तक पूरी कीमत नहीं चुकाई गई है।

    क्या है ईरान का प्रस्ताव?
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का यह 14-पॉइंट प्रस्ताव अमेरिका के 9-पॉइंट प्लान के जवाब में तैयार किया गया है। इसमें कई प्रमुख शर्तें शामिल हैं
    30 दिनों के भीतर सभी विवादों का समाधान
    भविष्य में हमले न होने की गारंटी
    ईरान से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी
    फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई
    ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना
    युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा
    होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया मैकेनिज्म
    समुद्री नाकेबंदी खत्म करने की मांग
    परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत

    मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ा
    ईरान और अमेरिका के बीच तनाव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी हालात भी तेजी से बदल रहे हैं।
    ईरान ने अमेरिका के साथ फिर से युद्ध की आशंका जताई है और अपनी सेना को तैयार बताया है
    अमेरिका का दावा है कि पिछले कुछ हफ्तों में कई जहाजों ने ईरानी जलक्षेत्र से दूरी बनाई है
    ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया कानून लाने की तैयारी में है
    क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा है

    तेल और वैश्विक बाजार पर असर
    तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ की बैठक में उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्पादन में प्रतिदिन लगभग 1.88 लाख बैरल की बढ़ोतरी संभव है।वहीं UAE के OPEC से अलग होने के फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

    समुद्री रास्तों और सुरक्षा पर दबाव
    अमेरिका ने मिडिल ईस्ट देशों को 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी दी है
    इजराइल, कुवैत, कतर और UAE को एडवांस डिफेंस सिस्टम मिलेंगे
    ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में विदेशी जहाजों पर नियंत्रण बढ़ाने का संकेत दिया है
    एक ईरानी टैंकर के अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देने का दावा भी सामने आया है

    बढ़ता तनाव और अनिश्चित भविष्य
    ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस खींचतान में कूटनीति और टकराव दोनों समानांतर चलते दिखाई दे रहे हैं। जहां एक ओर बातचीत के प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य तैयारियां और सख्त बयानबाजी भी तेज हो गई है।डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी और ईरान के प्रस्ताव ने वैश्विक राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मामला बातचीत की ओर बढ़ता है या टकराव और गहराता है।
    ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि गलती होने पर सैन्य कार्रवाई हो सकती है और 14-पॉइंट प्रस्ताव पर भी उन्होंने संदेह जताया है।मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है

  • सुपर टैंकर सर्वशक्ति ने US नाकेबंदी के बीच पार किया होर्मुज…45 हजार टन LPG लेकर आ रहा भारत

    सुपर टैंकर सर्वशक्ति ने US नाकेबंदी के बीच पार किया होर्मुज…45 हजार टन LPG लेकर आ रहा भारत


    नई दिल्ली।
    देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर (LPG gas cylinder) की दिक्कत के बीच एक बड़ी राहत की खबर है। कम से कम 45 हजार टन एलपीजी लेकर भारत (India) का एक सुपर टैंकर ‘सर्वशक्ति’ (Super Tanker ‘Sarvashakti’) होर्मुज को पार कर गया है जो कि जल्द ही भारत पहुंच सकता है। आपको बता दें कि अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की सख्ती के बीच यह बड़ी सफलता है कि भारत से जुड़ा टैंकर इस रास्ते को पार करके आगे बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक कड़ी सुरक्षा के साथ यह टैंकर भारत के पोर्ट पर पहुंचेगा। इसका चालक दल भी भारतीय ही है।

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्गो शिप भारतीय कंपनियों को गैस उपलब्ध करवाने वाला है। हालांकि इस मामले में IOC ने कोई जवाब नहीं दिया है। इससे पहले देश गरिमा नाम का टैंकर तेल लेकर मुंबई पोर्ट पर पहुंचा था। बता दें कि इस्लामाबाद में वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज के आसपास नाकेबंदी कर दी थी। इसके बाद सैकड़ों जहाज होर्मुज के आसपास ही रुके हुए हैं।


    अमेरिका ने कंपनियों को चेताया

    ईरान से तनाव के बीच अमेरिका ने जहाजरानी कंपनियों से कहा है कि वे अगर होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान को किसी तरह का शुल्क देंगी तो उन्हे प्रतिबंधों का सामना करना पड़ जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के मध्य जारी टकराव के बीच अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) द्वारा शुक्रवार को दी गई चेतावनी ने दबाव और बढ़ा दिया है। आम तौर पर शांति के समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।


    ईरान ने बना दिया टोलबूथ

    ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने के बाद जहाजों पर हमले की धमकियां देकर और हमले करते हुए जलडमरूमध्य को सामान्य आवाजाही के लिए लगभग बंद कर दिया। बाद में, उसने कुछ जहाजों को अपनी तटरेखा के करीब वैकल्पिक मार्गों से मोड़कर सुरक्षित मार्ग प्रदान करना शुरू किया, और कई बार इस सेवा के लिए शुल्क भी वसूला। अमेरिका की प्रतिबंध चेतावनी का मुख्य केंद्र संबंधित टोलबूथ जैसी व्यवस्था है।

    ओएएफसी के अनुसार, भुगतान की मांगों में केवल नकद ही नहीं, बल्कि ‘डिजिटल परिसंपत्तियां, समायोजन, अनौपचारिक अदला-बदली, या अन्य प्रकार के वस्तु-आधारित भुगतान’ भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें परमार्थ दान और ईरानी दूतावासों में किए जाने वाले भुगतान भी शामिल हैं।

    अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद किए जाने के जवाब में अपनी ओर से एक नौसैनिक नाकाबंदी लागू की, जिससे किसी भी ईरानी तेल टैंकर को बाहर जाने से रोका गया और ईरान को उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए आवश्यक तेल राजस्व से वंचित कर दिया गया। अमेरिकी मध्य कमान ने कहा कि नाकाबंदी शुरू होने के बाद से 45 वाणिज्यिक जहाजों को वापस जाने को कहा गया है।

  • हाइपरसोनिक हमले की आशंका: क्या ईरान-अमेरिका टकराव नए मोड़ पर?

    हाइपरसोनिक हमले की आशंका: क्या ईरान-अमेरिका टकराव नए मोड़ पर?


    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव को लेकर गंभीर संकेत सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका पहली बार ईरान के खिलाफ हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है, जिससे हालात और भी विस्फोटक हो सकते हैं।

    सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को संभावित सैन्य विकल्पों की जानकारी दी है। व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक में एक ‘छोटा लेकिन बेहद प्रभावशाली’ हमले का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें ईरान के सैन्य ढांचे, मिसाइल सिस्टम और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की बात कही गई है।

    इस रणनीति में ‘डार्क ईगल’ जैसी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल हो सकता है। यह मिसाइल 3,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम मानी जाती है। इसके अलावा B-1B लांसर जैसे भारी बमवर्षक विमानों की तैनाती भी बढ़ाई जा रही है, जो इस तरह के हमलों को अंजाम देने में सक्षम हैं।

    तनाव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है। मुजतबा खामेनेई ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो उसका जवाब समुद्र में दिया जाएगा। वहीं तेल बाजार में भी इसका असर साफ दिख रहा है कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का संकेत है।

    इसी बीच इजराइल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं और गाजा जाने वाले सहायता जहाजों को भी रोका है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जो वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हाइपरसोनिक हथियारों का इस्तेमाल होता है, तो यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि युद्ध की प्रकृति में बड़ा बदलाव होगा। ऐसे हथियारों को रोकना बेहद मुश्किल होता है, जिससे जवाबी कार्रवाई का जोखिम भी बढ़ जाता है।

    कुल मिलाकर, हालात बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुके हैं। एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध में बदल सकती है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीति हावी होती है या फिर हथियारों की भाषा आगे बढ़ती है।

  • ईरान का ‘हार्ट अटैक’ हथियार! हूट टॉरपीडो से अमेरिका को चेतावनी, कितना खतरनाक है ये सीक्रेट वेपन?

    ईरान का ‘हार्ट अटैक’ हथियार! हूट टॉरपीडो से अमेरिका को चेतावनी, कितना खतरनाक है ये सीक्रेट वेपन?


    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते टकराव के बीच ईरान ने अपने एक कथित “खौफनाक हथियार” का संकेत देकर वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींच लिया है। ईरानी नौसेना के कमांडर Shahram Irani ने दावा किया है कि जल्द ही दुश्मन सेनाओं के खिलाफ ऐसा हथियार इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे उनके नेताओं तक को “हार्ट अटैक” जैसा डर महसूस हो सकता है।

    इस बयान के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि ईरान आखिर किस हथियार की बात कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह इशारा संभवतः ईरान के ‘हूट’ (Hoot) सुपर-कैविटेटिंग टॉरपीडो की ओर हो सकता है एक ऐसा अंडरवाटर हथियार जो अपनी रफ्तार और मारक क्षमता के लिए जाना जाता है।

    ‘हूट’ टॉरपीडो को लेकर कहा जाता है कि यह पारंपरिक टॉरपीडो से कई गुना तेज है। जहां सामान्य टॉरपीडो 60 से 100 किमी/घंटा की गति से चलते हैं, वहीं ईरान दावा करता है कि उसका हूट 300 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार पकड़ सकता है। इसकी खासियत है “सुपर-कैविटेशन” तकनीक, जिसमें टॉरपीडो अपने चारों ओर गैस का बुलबुला बनाता है, जिससे पानी का प्रतिरोध बेहद कम हो जाता है और यह तेज रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ता है।

    यह तकनीक सबसे पहले Russia ने अपने VA-111 Shkval टॉरपीडो में विकसित की थी। ईरान ने 2006 में हूट का परीक्षण किया था, लेकिन इसके बाद से इसकी क्षमताओं को लेकर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। यही कारण है कि इसे “सीक्रेट वेपन” के तौर पर पेश किया जाता है।

    हालांकि, इस हथियार की ताकत जितनी चर्चा में है, उसकी सीमाएं भी उतनी ही अहम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज गति के कारण इसे नियंत्रित करना मुश्किल होता है। गैस के बुलबुले और शोर के कारण यह आसानी से सोनार सिस्टम में भी पकड़ा जा सकता है। यानी यह हथियार बेहद तेज जरूर है, लेकिन पूरी तरह अचूक नहीं।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह अमेरिकी युद्धपोतों या एयरक्राफ्ट कैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है? United States के एयरक्राफ्ट कैरियर अत्याधुनिक सुरक्षा कवच, मल्टी-लेयर डिफेंस और हाई टेक रडार सिस्टम से लैस होते हैं। ऐसे में किसी एक टॉरपीडो से उन्हें डुबाना बेहद मुश्किल माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इस हथियार का इस्तेमाल करता भी है, तो उसका सबसे संभावित क्षेत्र Strait of Hormuz हो सकता है एक संकरा समुद्री मार्ग जहां जहाजों की आवाजाही सीमित रहती है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना आमतौर पर इस क्षेत्र से सुरक्षित दूरी बनाए रखती है।

    ईरान का “हार्ट अटैक हथियार” फिलहाल ज्यादा एक मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक संदेश नजर आता है, न कि तुरंत तबाही मचाने वाला गेम-चेंजर।फिर भी, मिडिल ईस्ट में बढ़ती बयानबाजी और सैन्य तैयारियों के बीच यह साफ है कि आने वाले समय में समुद्री युद्ध तकनीक और भी खतरनाक और जटिल हो सकती है।

  • होर्मुज में हाई अलर्ट: भारत का LNG जहाज दरवाजे पर, अमेरिका–ईरान तनातनी से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर खतरा

    होर्मुज में हाई अलर्ट: भारत का LNG जहाज दरवाजे पर, अमेरिका–ईरान तनातनी से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर खतरा


    नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिसे दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन कहा जाता है, एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। इसी बीच भारत से रवाना LNG जहाज Umm Al Ashtan इस संवेदनशील समुद्री मार्ग के करीब पहुंच चुका है। यह जहाज गुजरात के दाहेज पोर्ट से निकला है और यूएई के Das Island की ओर बढ़ रहा है, जहां से इसे तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लोड करनी है।

    हालात इसलिए ज्यादा गंभीर हैं क्योंकि यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे वैश्विक बाजारों और ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

    ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा है कि संभावित नौसैनिक नाकेबंदी दरअसल सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति है। उन्होंने साफ किया कि ईरान अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा और किसी भी आक्रामक कदम का जवाब देने के लिए तैयार है।

    दूसरी ओर, Donald Trump ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए दावा किया है कि हालिया सैन्य कार्रवाइयों ने ईरान की रक्षा क्षमता को काफी कमजोर कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और उसका मिसाइल उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान अब बातचीत के लिए तैयार दिख रहा है।

    इस तनावपूर्ण माहौल में Umm Al Ashtan का होर्मुज के पास पहुंचना एक अहम संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दर्शाता है कि यूएई के दास द्वीप से LNG उत्पादन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। यह द्वीप हर साल लगभग 6 मिलियन टन LNG उत्पादन करने की क्षमता रखता है, जो वैश्विक आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। Qatar जैसे बड़े LNG निर्यातक देशों के जहाज अभी भी सावधानी बरत रहे हैं। कई कार्गो शिप्स या तो इस क्षेत्र में रुके हुए हैं या वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहे हैं।

    इसी बीच कुछ राहत भरी खबरें भी सामने आई हैं। हाल के दिनों में चीन और जापान जाने वाले कुछ जहाज इस मार्ग से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन जोखिम बरकरार है।होर्मुज में बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो चुका है और अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यह महंगाई और सप्लाई चेन पर बड़ा असर डाल सकता है।

    भारत का LNG जहाज ऐसे समय इस हाई-रिस्क जोन में प्रवेश करने जा रहा है, जब मिडिल ईस्ट बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है।