Tag: Strait of Hormuz

  • सरकार ने एलपीजी सप्लाई पर दी अपडेट: 60% आयात, 90% होर्मुज स्ट्रेट से रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर, पैनिक बुकिंग से बचें

    सरकार ने एलपीजी सप्लाई पर दी अपडेट: 60% आयात, 90% होर्मुज स्ट्रेट से रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर, पैनिक बुकिंग से बचें



    नई दिल्ली। भारत सरकार ने गुरुवार को देश में गैस और कच्चे तेल की स्थिति को लेकर जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी जानकारी दी। सरकार ने कहा कि देश अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती है। मंत्रालयों ने जोर देकर कहा कि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन रोजाना करीब 50 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी हो रही है और पैनिक बुकिंग की वजह से सिलेंडर बुकिंग में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता संतोषजनक है। भारत रोजाना करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल का उपयोग करता है और दुनिया के चौथे सबसे बड़े रिफाइनर होने के कारण ईंधन की आपूर्ति स्थिर है। 9 मार्च को जारी आदेश के तहत सभी रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाया है, घरेलू उत्पादन 25% से बढ़कर 28% हो गया है। देशभर में लगभग 1 लाख रिटेल आउटलेट काम कर रहे हैं, जहां कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है।

    शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के 28 जहाज मौजूद हैं, जिनमें 778 भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें से 677 पश्चिमी होर्मुज स्ट्रेट में और 101 पूर्वी हिस्से में तैनात हैं। हाल ही में विदेशी झंडे वाले कुछ जहाजों पर हादसे हुए, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई, चार घायल और एक लापता है। सरकार सभी जहाजों और क्रू की सुरक्षा पर निगरानी रख रही है।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भारतीय दूतावास सक्रिय है। भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। दूतावास वीजा सुविधा के साथ अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमा पार करने में भी मदद कर रहा है।

    सरकार ने सप्लाई संकट के दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असुरक्षित होना, जो 167 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है और ईरान-जंग के कारण बंद हो गया। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% इसी रूट से गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से आयात करता है। दूसरा, कतर में LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद प्रोडक्शन रुका, जिससे भारत को गैस की सप्लाई घट गई। भारत अपनी जरूरत का करीब 40% LNG कतर से आयात करता है।

    इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर ने कहा कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग न करें। सरकार वैकल्पिक कार्गो आयात पर विचार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने की योजना बना रहे हैं। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।

    सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की प्राथमिकता के आधार पर जरूरतमंदों को सप्लाई सुनिश्चित करें।

    मुख्य बातें:

    भारत अपनी जरूरत का 60% LPG आयात करता है, 90% होर्मुज स्ट्रेट से आता है।

    रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवरी, पैनिक बुकिंग से बचें।

    एलपीजी उत्पादन बढ़कर 28% हुआ।

    ईंधन सप्लाई सुरक्षित, देशभर के पेट्रोल पंप सामान्य काम कर रहे हैं।

    ईरान में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए दूतावास मदद कर रहा है।

    सप्लाई संकट: होर्मुज स्ट्रेट असुरक्षित, कतर में LNG प्रोडक्शन रुका।

    वैकल्पिक आयात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संकट कम करने की कोशिशें।

  • ट्रम्प का दावा- ईरान की कमर तोड़ी, जंग जल्द खत्म होगी: हमलों से तबाह हुए सैन्य ठिकाने, तेल संकट से दुनिया में मचा हड़कंप

    ट्रम्प का दावा- ईरान की कमर तोड़ी, जंग जल्द खत्म होगी: हमलों से तबाह हुए सैन्य ठिकाने, तेल संकट से दुनिया में मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान उम्मीद से ज्यादा सफल रहा है और यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान में कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकाने तबाह हो चुके हैं और अब वहां हमला करने के लिए लगभग कुछ भी नहीं बचा है। ट्रम्प के मुताबिक शुरुआती सैन्य योजना करीब छह हफ्तों की थी, लेकिन अमेरिकी सेना ने तय समय से पहले ही कई बड़े लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।

    इधर युद्ध के असर से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी International Energy Agency (IEA) ने घोषणा की है कि उसके 32 सदस्य देश अपने आपातकालीन भंडार से करीब 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में जारी करेंगे। एजेंसी के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol के अनुसार यह फैसला तेल आपूर्ति में आई भारी बाधा को कम करने के लिए लिया गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद फारस की खाड़ी का अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है। बताया जा रहा है कि युद्ध के बाद इस मार्ग से तेल निर्यात पहले के मुकाबले 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।

    दूसरी ओर ईरान ने भी युद्ध के गंभीर मानवीय नुकसान का दावा किया है। ईरान के शिक्षा मंत्री Alireza Kazemi ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 206 छात्र और शिक्षक मारे गए हैं और 161 लोग घायल हुए हैं। वहीं मीनाब शहर के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए मिसाइल हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    युद्ध के कारण तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 21 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल की औसत कीमत 3.58 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि डीजल भी तेजी से महंगा हुआ है।

    इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ईरान के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे Strait of Hormuz को बंद भी कर सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों में सुरक्षा और कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। स्पेन ने इजराइल से अपना राजदूत वापस बुला लिया है, जबकि क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक असर वाला संकट बनता जा रहा है।

  • भारत ने दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में अमेरिका के लिए निभाई अहम भूमिका: राजदूत सर्जियो गोर

    भारत ने दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में अमेरिका के लिए निभाई अहम भूमिका: राजदूत सर्जियो गोर


    नई दिल्ली । अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में भारत की वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में तेल की कीमतें स्थिर रखने में अमेरिका का बहुत बड़ा साथी रहा है। गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह बात साझा करते हुए विशेष रूप से भारत की रूस से लगातार तेल खरीद को वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए जरूरी बताया।

    राजदूत गोर ने लिखा भारत तेल के सबसे बड़े कंज्यूमर और रिफाइनर में से एक है। अमेरिका और भारत के लिए मार्केट में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार भारत की नीति न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी गहरा असर डालती है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक तेल बाजार में ईरान संकट के चलते भारी अस्थिरता देखी जा रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित बंदी की वजह से तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में भारत की सक्रिय भूमिका और रूस से तेल खरीद की नीति को अमेरिका ने विशेष महत्व दिया है।

    व्हाइट हाउस ने पहले ही प्रेस बयान में कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट दी थी। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला राष्ट्रपति ट्रेजरी विभाग और नेशनल सिक्योरिटी टीम के संयुक्त विचार-विमर्श के बाद लिया गया। लेविट के अनुसार भारत में हमारे सहयोगी अच्छे रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।

    उन्होंने बताया कि ईरान संकट के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई में पैदा हुए अस्थायी अंतर को कम करने के मकसद से यह तत्कालीन उपाय किया गया। छूट मिलने से पहले ही भारत को शिपमेंट भेज दिए गए थे। व्हाइट हाउस का मानना है कि इस व्यवस्था से मास्को को आर्थिक रूप से कोई खास लाभ नहीं होगा।

    विश्लेषकों का कहना है कि भारत का यह कदम न केवल घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है बल्कि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने में भी मददगार साबित होता है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर और रिफाइनर है। ऐसे में देश की नीति और तेल खरीद की रणनीति वैश्विक स्तर पर भावनाओं और कीमतों को प्रभावित करती है।

    इस पूरे परिप्रेक्ष्य में अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग की नई चुनौतियों और अवसरों का संकेत मिलता है। वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता और ईरान-संबंधी संकट के बीच भारत की भूमिका और रणनीतिक महत्व बढ़ गया है। राजदूत गोर के बयान से यह भी साफ होता है कि अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद और सक्रिय साझेदार के रूप में देखता है जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

  • भोपाल में कमर्शियल गैस संकट: 2000 होटल-रेस्टोरेंट प्रभावित, घरेलू सिलेंडर अब 25 दिन में एक बार ही बुक होंगे

    भोपाल में कमर्शियल गैस संकट: 2000 होटल-रेस्टोरेंट प्रभावित, घरेलू सिलेंडर अब 25 दिन में एक बार ही बुक होंगे



    भोपाल। मध्य प्रदेश में ईरान-इजराइल युद्ध के असर के चलते एलपीजी सप्लाई संकट गहराने लगा है। मंगलवार को भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने तीनों तेल कंपनियों, फूड अफसर और गैस एजेंसियों के साथ मीटिंग बुलाई, जिसमें कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोकने के बाद शहर के 2000 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट में संकट की गंभीर स्थिति सामने आई।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार से ऑयल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी रोक दी है। इससे बड़े और छोटे होटल, रेस्टोरेंट और बार में भोजन बनाने और शादियों के आयोजन में परेशानी बढ़ गई है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स (बीसीसीआई) के अध्यक्ष गोविंद गोयल और मंत्री अजय देवनानी ने कलेक्टर से अपील की कि कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए, अन्यथा मार्च में होने वाली हजारों शादियों में खाना बनाने में दिक्कतें आएंगी।

    इधर, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग नियमों में बदलाव किया गया है। पहले 15 दिन में बुकिंग होती थी, अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही मिलेगा। इसके अलावा, बुकिंग केवल उसी रजिस्टर्ड नंबर पर ही OTP के जरिए हो पाएगी।

    मध्यप्रदेश में कुल सवा करोड़ से ज्यादा एलपीजी उपभोक्ता हैं। राजधानी भोपाल में प्रतिदिन लगभग 15 हजार सिलेंडर सप्लाई होते हैं, वहीं इंदौर में 25 हजार, जबलपुर में 20-25 हजार और ग्वालियर में 20 हजार सिलेंडर रोजाना वितरित किए जाते हैं। छोटे जिलों में भी 2 हजार सिलेंडर प्रतिदिन सप्लाई होते हैं।

    केंद्र सरकार ने गैस की सप्लाई और जमाखोरी रोकने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू किया है और एलपीजी को चार कैटेगरी में बांटा गया है:

    पूरी सप्लाई: घरेलू रसोई गैस (PNG) और CNG।

    खाद कारखाने: फैक्ट्रियों को 70% गैस उपलब्ध।

    बड़े उद्योग: आवश्यकतानुसार लगभग 80% गैस।

    छोटे बिजनेस और होटल: पुरानी खपत के हिसाब से 80% गैस।

    सरकार ने संकट से निपटने के लिए पांच अहम कदम उठाए हैं: हाई-लेवल कमेटी गठन, आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू, घरेलू सिलेंडर बुकिंग में बदलाव, OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य, तथा एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश।

    सप्लाई संकट के दो प्रमुख कारण हैं: पहला, फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले 167 किलोमीटर लंबे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना, जिससे भारत की 50% कच्चा तेल और 54% LNG सप्लाई प्रभावित हुई। दूसरा, कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद उत्पादन रोक दिया गया। भारत अपनी कुल LNG जरूरत का करीब 40% कतर से आयात करता है।

    इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर ने उपभोक्ताओं को पैनिक बुकिंग से बचने की सलाह दी और बताया कि सरकार वैकल्पिक सप्लाई विकल्प तलाश रही है। वहीं, G7 देश और रूस-अल्जीरिया से अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।

    साथ ही सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर अब ₹913 में मिलेगा, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹1883 हो गए हैं।

    मध्यप्रदेश के होटल-रेस्टोरेंट संचालक और छोटे व्यवसायों में तनाव बढ़ गया है, क्योंकि कमर्शियल गैस की सप्लाई रोकने से खाना बनाने और व्यापार चलाने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। सरकार की हाई-लेवल कमेटी और आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू होने के बाद ही हालात में सुधार की उम्मीद है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य  में तेल आपूर्ति को रोकने या बाधित करने की कोई भी कोशिश की गई तो अमेरिका इसका बेहद सख्त जवाब देगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज्यादा जोरदार कार्रवाई कर सकता है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सत्य सामाजिक पर पोस्ट किए गए संदेश में कहा कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले ठिकानों को नष्ट कर सकता है जिससे ईरान के लिए दोबारा व्यवस्थित होना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचेंगे।

    इससे पहले ट्रंप ने ट्रम्प नेशनल डोरल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक को खतरे में डालने की अनुमति किसी भी देश को नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है और किसी भी आतंकी सरकार को दुनिया की तेल आपूर्ति को बंधक बनाने की इजाजत नहीं देगा।

    ट्रंप ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मजबूत मौजूदगी है और जरूरत पड़ने पर समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन और सैन्य एस्कॉर्ट जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना के पास दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक और उपकरण हैं जिनकी मदद से समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे तेल टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने पर भी विचार कर रहा है ताकि समुद्री व्यापार बाधित न हो। ट्रंप के अनुसार यदि खतरा बढ़ता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश जहाजों को इस संकरे समुद्री मार्ग से सुरक्षित एस्कॉर्ट भी कर सकते हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि इस मार्ग का खुला रहना अमेरिका से ज्यादा एशिया और अन्य ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने खास तौर पर चीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह रास्ता कई देशों के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि उनकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी मार्ग से पूरी होती हैं।

    दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य  फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।

  • कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस संकट: होटल-रेस्टोरेंट बंद, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया

    कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस संकट: होटल-रेस्टोरेंट बंद, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया


    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर सैन्य कार्रवाई के कारण हॉर्मुज जलमार्ग पर गैस सप्लाई ठप होने से देश में कॉमर्शियल गैस की किल्लत पैदा हो गई है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति बन गई है।

    केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया है ताकि गैस की जमाखोरी और सप्लाई में असमानता रोकी जा सके।

    गैस सप्लाई की चार श्रेणियां
    पूरा स्टॉक: घरेलू रसोई गैस (PNG) और CNG वाहन गैस को पूरी तरह उपलब्ध कराया जाएगा।

    खाद उद्योग: खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को 70% गैस उपलब्ध होगी।

    बड़े उद्योग: नेशनल ग्रिड से जुड़े बड़े उद्योगों को 80% गैस मिलेगी।

    छोटे होटल और व्यवसाय: छोटे होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों को उनकी पुरानी खपत के अनुसार 80% गैस मिलेगी।

    राज्यों में सप्लाई की स्थिति
    उत्तर प्रदेश: लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी गैस नहीं मिल रही।

    महाराष्ट्र: मुंबई, पुणे और नागपुर में करीब 20% होटल और रेस्टोरेंट बंद। पुणे में गैस की कमी के कारण नगर निगम ने शवदाह गृह अस्थायी रूप से बंद किए।

    मध्य प्रदेश: भोपाल में 2000 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित, सिलेंडर की उपलब्धता कम।

    राजस्थान: होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज गार्डन संचालकों को परेशानी।

    कर्नाटक: बेंगलुरु में होटल बंद होने का खतरा, बुजुर्ग और छात्र प्रभावित।

    सरकार ने संकट निपटाने के लिए उठाए कदम
    हाई-लेवल कमेटी: पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की कमेटी बनाई।

    एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: जमाखोरी रोकने के लिए लागू।

    बुकिंग नियम बदलाव: एक सिलेंडर मिलने के बाद अगला 25 दिन बाद बुक हो सकेगा।

    OTP और बायोमेट्रिक: जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी पर कड़ी निगरानी।

    LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: अतिरिक्त उत्पादन घरेलू गैस के लिए।

    गैस संकट की मुख्य वजहें
    हॉर्मुज जलमार्ग पर बंदी: फारस की खाड़ी से अरब सागर तक फैले 167 किमी लंबे मार्ग से गैस और तेल का बड़ा हिस्सा आता है। ईरान युद्ध के कारण यह मार्ग असुरक्षित।

    एलएनजी उत्पादन में रुकावट: ईरान के ड्रोन हमले के बाद कतर के LNG प्लांट की सप्लाई प्रभावित, जिससे भारत की 40% LNG आयात प्रभावित।

    हालात कब सुधरेंगे?
    इंडियन ऑयल के के.एम. ठाकुर ने ग्राहकों को आश्वस्त किया कि घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग से बचें। सरकार वैकल्पिक सप्लाई विकल्पों पर काम कर रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर विचार कर रहे हैं।

    घरेलू गैस की कीमतें बढ़ीं
    सरकार ने डोमेस्टिक LPG सिलेंडर की कीमत ₹60 बढ़ा दी है। अब 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर दिल्ली में ₹913 में उपलब्ध है। 19 किलोग्राम कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब ₹1,883 है।

  • मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान की चेतावनी‘एक लीटर तेल भी नहीं जाने देंगे’, होर्मुज स्ट्रेट पर नई शर्त

    मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान की चेतावनी‘एक लीटर तेल भी नहीं जाने देंगे’, होर्मुज स्ट्रेट पर नई शर्त




    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष का आज 11वां दिन है और इसी बीच ईरान ने दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि अगर हमले जारी रहे तो वह एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नई शर्त भी रख दी है। ईरानी सेना का कहना है कि कुछ देशों के जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने दिया जाएगा और इसके लिए उन देशों को पहले अपने यहां से अमेरिका और इजराइल के राजदूतों को निकालना होगा।

    तो पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों से सुरक्षा शुल्क यानी सिक्योरिटी टैक्स वसूलने की योजना भी बना रहा है, खासकर उन देशों के जहाजों से जो अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं।

    इसी बीच युद्ध का असर क्षेत्र के दूसरे देशों पर भी दिखने लगा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR के अनुसार 2 मार्च से अब तक 80 हजार से ज्यादा सीरियाई नागरिक लेबनान से सीमा पार कर अपने देश वापस लौट चुके हैं। एजेंसी की प्रवक्ता सेलिन श्मिट ने बताया कि इजराइली हमलों के डर से कई परिवार जल्दबाजी में लेबनान छोड़कर लौटे हैं। अधिकांश लोग बिना सामान लिए ही निकल गए और फिलहाल अपने रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं। अभी तक इन लोगों ने आपातकालीन आश्रय की कोई आधिकारिक मांग दर्ज नहीं कराई है।

    युद्ध के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल युद्धविराम नहीं चाहता। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान पर हमला करने वालों को ऐसा जवाब दिया जाएगा कि वे दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करें। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को नहीं लगता कि अमेरिका और इजराइल से बातचीत करके यह युद्ध खत्म होगा। उनके मुताबिक ईरान उस स्थिति को खत्म करना चाहता है जिसमें पहले युद्ध होता है, फिर बातचीत और युद्धविराम होता है और कुछ समय बाद फिर से लड़ाई शुरू हो जाती है।

    दूसरी तरफ इराक ने भी इस संघर्ष से दूरी बनाने की कोशिश की है। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अमेरिका से साफ कहा है कि इराक की जमीन या उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमले के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत के दौरान कही। इराक का कहना है कि वह इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता और अपने क्षेत्र को किसी भी सैन्य टकराव से दूर रखना चाहता है।

    युद्ध के कारण एशिया के कई देशों में भी चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान के बाद अब थाईलैंड ने ईंधन बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया है। थाई सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के विदेश यात्रा पर भी रोक लगा दी है और ऊर्जा बचत के लिए अलग-अलग उपाय लागू किए हैं। पाकिस्तान में भी सरकार ने खर्च कम करने के लिए सरकारी दफ्तरों को हफ्ते में चार दिन खोलने और आधे कर्मचारियों को घर से काम करने का फैसला किया है। वहीं वियतनाम ने लोगों से ईंधन बचाने की अपील की है और बांग्लादेश ने ऊर्जा संकट को देखते हुए विश्वविद्यालय बंद कर दिए हैं तथा छुट्टियों की अवधि बढ़ा दी है।

    इस संघर्ष का पर्यावरण पर भी असर दिखने लगा है। पाकिस्तान के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि ईरान में हुए हवाई हमलों के बाद वहां से उठने वाला धुआं और प्रदूषण पाकिस्तान के पश्चिमी इलाकों तक पहुंच सकता है, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के तेल भंडारण ठिकानों पर हमलों के बाद कई शहरों के ऊपर घना काला धुआं छाया हुआ है और वहां सांस लेना मुश्किल हो गया है।

    दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने भी इस स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। कंपनी के सीईओ अमीन नासिर के अनुसार अगर युद्ध जारी रहता है और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं बल्कि शिपिंग, बीमा, हवाई यात्रा, खेती और ऑटोमोबाइल जैसे कई उद्योगों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा दुनिया में तेल का भंडार पहले ही पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर के आसपास है, इसलिए सप्लाई में किसी भी बड़ी रुकावट से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    इसी बीच तुर्किये ने भी अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और देश के दक्षिण-पूर्वी इलाके में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया गया है। तुर्किये का कहना है कि हाल की घटनाओं को देखते हुए उसकी सीमाओं और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत की जा रही है।

    उधर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना अब तक ईरान के 46 युद्धपोतों को डुबो चुकी है। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा यह ईरान तय करेगा और अगर हमले जारी रहे तो क्षेत्र से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।

    युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। मिस्र ने घरेलू ईंधन की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण तेल सप्लाई और समुद्री परिवहन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।

    कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है। तेल सप्लाई, शरणार्थी संकट, पर्यावरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था—इन सभी पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है और अगर हालात जल्द नहीं संभले तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

  • मिडिल ईस्ट जंग से बदला वैश्विक तेल समीकरण: रूस की चांदी, चीन को 400 अरब डॉलर का झटका

    मिडिल ईस्ट जंग से बदला वैश्विक तेल समीकरण: रूस की चांदी, चीन को 400 अरब डॉलर का झटका


    नई दिल्‍ली । मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के खतरे ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव ला दिया है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से आसमान छू रही हैं शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका गहराने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो दुनिया के कई हिस्सों में महंगाई और खाद्य संकट भी गहरा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा फायदा रूस को होता दिखाई दे रहा है जबकि चीन को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

    दरअसल ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगाने की आशंका और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल पर संकट गहराने के बाद कई देशों ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। इसका सीधा फायदा रूस को मिला है। यूक्रेन युद्ध के बाद जिन पश्चिमी देशों ने रूस के तेल पर प्रतिबंध लगा दिया था अब वही देश वैश्विक सप्लाई को स्थिर रखने के लिए रूसी तेल की ओर रुख कर रहे हैं।

    यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। उस समय रूस को अपने तेल पर भारी छूट देकर बाजार बनाए रखना पड़ा था। भारत और चीन जैसे देशों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए रूस से सस्ते दामों पर बड़ी मात्रा में तेल खरीदा। हालांकि बाद में अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत तक टैरिफ भी लगाया था। लेकिन अब मिडिल ईस्ट संकट के कारण हालात पूरी तरह बदल गए हैं।

    तेल की मांग बढ़ने के साथ ही रूस ने अपने कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट को भी कम कर दिया है। पहले रूसी तेल पर 10 से 13 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट मिल रही थी लेकिन अब इसे घटाकर 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। फरवरी में भारतीय कंपनी HPCL ने रूसी तेल के दो कार्गो 13 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर खरीदे थे लेकिन अब भारतीय रिफाइनरियों को इतनी बड़ी छूट मिलना मुश्किल माना जा रहा है। यही स्थिति अन्य देशों के साथ भी है। इससे साफ है कि बढ़ती मांग के कारण रूस का सरकारी खजाना तेजी से भर रहा है और उसका तेल फिर से वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति में आ गया है।

    दूसरी ओर इस युद्ध का सबसे बड़ा झटका चीन को लगा है। चीन लंबे समय से ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है और भारी छूट पर कच्चा तेल खरीदता रहा है। आंकड़ों के मुताबिक ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चीन ही खरीदता था। लेकिन युद्ध के बाद यह आपूर्ति लगभग ठप हो गई है जिससे चीन की ऊर्जा रणनीति को बड़ा झटका लगा है।

    इसके अलावा चीन और ईरान के बीच 2021 में हुई दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी भी संकट में पड़ती दिख रही है। इस समझौते के तहत चीन ने ईरान में इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 400 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था। लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई के कारण यह पूरा निवेश अब खतरे में पड़ गया है। नतीजतन चीन को एक साथ दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है—एक तरफ सस्ते तेल की आपूर्ति बंद हो गई है और दूसरी तरफ उसका विशाल निवेश भी फंसता नजर आ रहा है। इस तरह मिडिल ईस्ट की जंग ने वैश्विक तेल राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है जहां रूस को अप्रत्याशित फायदा मिल रहा है और चीन के लिए स्थिति लगातार मुश्किल होती जा रही है।

  • ग्लोबल एनर्जी वॉर में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका और सहयोगियों के लिए हॉर्मुज पूरी तरह 'ब्लॉक', भारत-चीन के लिए खुली रहेगी तेल की सप्लाई।

    ग्लोबल एनर्जी वॉर में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका और सहयोगियों के लिए हॉर्मुज पूरी तरह 'ब्लॉक', भारत-चीन के लिए खुली रहेगी तेल की सप्लाई।


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’IRGC ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया की ऊर्जा जीवनरेखा माना जाने वाला ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’Strait of Hormuz अब केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के माध्यम से दी गई यह चेतावनी सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बनाती है जो वर्तमान संघर्ष में ईरान के खिलाफ खड़े हैं। IRGC ने दो टूक कहा है कि यदि इन प्रतिबंधित देशों का कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निश्चित रूप से हमला करके नष्ट कर दिया जाएगा।

    हालाँकि, इस अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत इस सख्त नाकेबंदी के दायरे से बाहर है। बुधवार को जहाँ केवल चीनी जहाजों को अनुमति देने की बात कही गई थी, वहीं अब नए ऐलान के बाद यह साफ हो गया है कि भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के लिए यह रास्ता सुरक्षित रहेगा। तेहरान का यह रुख भारत के साथ उसके पुराने और विश्वसनीय संबंधों को दर्शाता है। भारतीय अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस छूट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक टल गया है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।

    ईरानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को जायज ठहराया है। उनका कहना है कि युद्धकाल में इस्लामिक गणराज्य ईरान को अपनी सीमाओं से लगे जलमार्गों पर नियंत्रण करने का पूरा अधिकार है। यह कठोर फैसला अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले शनिवार को शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान के जवाब में लिया गया है। गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। इसकी रणनीतिक अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फारस की खाड़ी के तमाम बंदरगाहों, जिनमें दुबई का जेबेल अली भी शामिल है, के लिए यह एकमात्र निकास मार्ग है।

    वर्तमान स्थिति की गंभीरता को समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों पर साफ देखा जा सकता है। कुवैत और दुबई के तटों के पास सैकड़ों टैंकर और कमर्शियल जहाज लंगर डाले खड़े हैं, जो इस नाकेबंदी के कारण आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इतिहास में यह पहली बार है जब हॉर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस तरह पूरी तरह बंद किया गया है। यहाँ तक कि 1980 के दशक के भीषण ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप नहीं हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी से भले ही एशिया-यूरोप के मुख्य मार्गों पर तुरंत असर न पड़े, लेकिन खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और बढ़ सकता है। फिलहाल, भारत के लिए हॉर्मुज का यह ‘खुला दरवाजा’ एक बड़ी कूटनीतिक जीत और आर्थिक राहत का संकेत है।

  • ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष चौथे दिन भी जारी, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा, खेल और तेल रूट भी प्रभावित

    ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष चौथे दिन भी जारी, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा, खेल और तेल रूट भी प्रभावित


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया से बड़ी खबर है, जहाँ एशियाई महिला फुटबॉल कप के उद्घाटन मैच में ईरानी महिला फुटबॉल टीम ने राष्ट्रगान नहीं गाया। खिलाड़ी लाइन में खड़ी रहीं, लेकिन चुप रहीं। कोच मारजियेह जाफरी मुस्कुराती रहीं। यह कदम हाल के अमेरिका और इजराइल के हमलों और ईरान के नेताओं की मौत के विरोध का प्रतीक माना जा रहा है। कप्तान जहरा घानबरी और कोच से खामेनेई की मौत पर सवाल किए गए, लेकिन उन्हें जवाब नहीं देने दिया गया।

    हार्मुज स्ट्रेट बंद: ईरान ने चेतावनी दी है कि इस रणनीतिक तेल रूट से गुजरने वाले जहाजों पर हमला किया जाएगा। भारत का करीब 50% तेल इसी मार्ग से आता है। अगर इस मार्ग को अवरुद्ध रखा गया, तो वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में तेजी आने की संभावना है और भारत सहित तेल आयातक देशों पर दबाव बढ़ सकता है।

    जंग का हाल: चार दिन में 787 लोग मारे गए हैं। 153 शहरों को निशाना बनाया गया और कुल 1,039 हमले हुए। यह जानकारी ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने दी। बढ़ता हिंसक संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन गया है।

    लेबनान में हिजबुल्लाह पर प्रतिबंध: राष्ट्रपति मिशेल औन ने घोषणा की कि हिजबुल्लाह को अपने हथियार सरकार को सौंपने होंगे। यह कदम लेबनान-इजराइल सीमा पर हालिया रॉकेट हमलों और बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया। उनका कहना है कि अब युद्ध और शांति का निर्णय केवल लेबनानी राज्य के हाथ में होगा।

    इजराइल पर ईरान का मिसाइल हमला: ईरान की मिसाइल ने इजराइल के सेंट्रल शहर पेटाह टिकवा को निशाना बनाया। मिसाइल के टुकड़े शहर में गिरे, जिससे कुछ नुकसान हुआ। इजराइली मीडिया के अनुसार यह हमला अमेरिका और इजराइल की ईरान विरोधी सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया।

    पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ईरान पर चल रही जंग पाकिस्तान के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर रही है। उन्होंने जायनिस्ट विचारधारा और इजराइल की गतिविधियों को मुस्लिम दुनिया में अस्थिरता का मुख्य कारण बताया। पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने भी कहा कि पाकिस्तान को ट्रम्प द्वारा बनाए “बोर्ड ऑफ पीस” से बाहर निकलना चाहिए।

    फ्रांस तैयार: विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा कि अगर फ्रांस के सहयोगी देशों को मदद की जरूरत पड़ी, तो फ्रांस रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। करीब 4 लाख फ्रांसीसी नागरिक प्रभावित देशों में मौजूद हैं, जिन्हें सुरक्षित लाने के लिए कमर्शियल और सैन्य उड़ानों की व्यवस्था की जाएगी।

    अंतरराष्ट्रीय असर: हार्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।