Tag: Strait of Hormuz

  • भारत के LPG और कच्चे तेल के टैंकरों ने पार किया होर्मुज… जल्द पहुंचेंगे बंदरगाह

    भारत के LPG और कच्चे तेल के टैंकरों ने पार किया होर्मुज… जल्द पहुंचेंगे बंदरगाह


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Israel and Iran War) की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद होने से भारत सहित कई देशों में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच अब भारत (India) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक UAE से दो LPG कैरियर और सऊदी अरब से एक कच्चे तेल का कैरियर भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके। वहीं नौसेना प्रमुख दिनेश त्रिपाठी ने बढ़ते हुए शिपिंग संकट के चलते ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के अपने आधिकारिक दौरे को रद्द कर दिया है।

    जानकारी के मुताबिक भारतीय झंडे वाले जहाज पाइन गैस और जग वसंत लगभग एक साथ ही चल रहे थे। दोनों जहाज सोमवार सुबह 6 बजे UAE के बंदरगाहों से भारत के लिए रवाना हुए। ईरान ने इन दोनों LPG जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मंजूरी भी दे दी है। वहीं ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन LPG जहाजों को 24 घंटे तक सुरक्षा दे रहे हैं।

    जहाज में कितना LPG?
    बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेस में बताया कि दोनों जहाज पर लगभग 92,000 टन एलपीजी है। उन्होंने कहा, ”यात्रा शुरू हो चुकी है।’’ शिपिंग मंत्रालय के अनुसार जग वसंत के 26 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है, जबकि पाइन गैस 28 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंच सकता है। इन जहाजों पर क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक भी सवार हैं।

    सऊदी से आ रहा तेल टैंकर
    इसके अलावा, MT Kallista नाम का एक कच्चे तेल का कैरियर सऊदी अरब के यान्बू बंदरगाह पर तेल भर रहा है और मंगलवार को जेद्दा बंदरगाह होते हुए भारत के पारादीप बंदरगाह के लिए रवाना होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के समन्वय से, पनामा के झंडे वाले यह जहाज भी अदन की खाड़ी से गुजरेगा और भारतीय नौसेना इसकी हिफाजत करेगी।

    भारतीय टैंकरों ने ईरान को दी फीस?
    भले ही रिपोर्ट्स में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा मोटी फीस लिए जाने की खबरें थीं, लेकिन भारत ने अपने LPG टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने के लिए ईरान को कोई पैसा नहीं दिया है। भारत में ईरानी दूतावास ने सोमवार को ऐसी रिपोर्टों का खंडन किया है।

    इस बीच केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना से कहा है कि वह भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास अपने कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जहाजों को तैनात करे। वहीं भारतीय झंडे वाले सभी जहाज़ों के कप्तानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि उन्हें बताया जा सके कि भारत संकट के समय उनके साथ खड़ा है।

    कितने टैंकर फंसे?
    बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध कुल मिलाकर लगभग 500 टैंकर जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रासायनिक/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान संभवत: सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से जाने की अनुमति दे सकता है।

  • युद्ध के लिए फंडिंग…. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज निकालने के 20 लाख डॉलर वसूल रहा ईरान

    युद्ध के लिए फंडिंग…. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज निकालने के 20 लाख डॉलर वसूल रहा ईरान


    तेहरान।
    अमेरिका और इजरायल (America and Israel) से युद्ध लड़ रहा ईरान (Iran) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर जहाजों से वसूली (Recovery Ships) कर रहा है। खबर है कि कुछ जहाजों को गुजरने देने के लिए लाखों डॉलर लिए जा रहे हैं। ईरान के एक सांसद ने ही ऐसा दावा किया है। इससे पहले ईरान ने धमकी दी थी कि अगर अमेरिका की तरफ से हमले किए जाते हैं, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।

    ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य, अलादीन ब्रूजेर्दी ने कहा कि यह कदम पहले ही लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा, ‘अब, चूंकि युद्ध की अपनी लागत होती है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हमें यह करना चाहिए और Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क लेना चाहिए।’

    ब्रूजेर्दी ने डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी का भी जिक्र किया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि यदि 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट को नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। इसके जवाब में ब्रूजेर्दी ने कहा कि इजरायल का ऊर्जा ढांचा भी ईरान की पहुंच में है और उसे ‘एक दिन के भीतर’ पूरी तरह तबाह किया जा सकता है।


    अमेरिका अलर्ट

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ अपनी ‘रेड लाइन्स’ पर अडिग हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लगभग नाकेबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को बंधक नहीं बनाने देंगे।


    ट्रंप ने कहा था 48 घंटे में होर्मुज खोले ईरान

    अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर ईरान ने 48 घंटों के अंदर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर नहीं खोला तो ईरान के बिजली संयंत्रों को पूरी तरह तबाह कर देंगे। ट्रंप का यह बयान शनिवार को दिए उनके बयान से उलट था। उन्होंने कहा था कि वह युद्ध को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन रविवार तड़के उन्होंने ईरान को नई धमकी दे डाली। ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी नौसैनिक और भारी लैंडिंग क्राफ्ट क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।

    आईजी मार्केट विश्लेषक टोनी साइकैमोर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी ने अब बाजारों पर 48 घंटे की अनिश्चितता का टिक टिक करता हुआ टाइम बम रख दिया है। यदि इस अल्टीमेटम को वापस नहीं लिया गया, तो हम सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों को ‘ब्लैक मंडे’ के रूप में गिरते हुए और तेल की कीमतों को काफी ऊंचे स्तर पर जाते हुए देखेंगे।


    बंद कर सकता है ईरान

    ईरान की सेना ने चेतावनी दी कि यदि ट्रंप देश के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाते हैं, तो वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर देंगे। सेना की ऑपरेशनल कमांड ‘खातम अल-अंबिया’ ने सरकारी टीवी द्वारा प्रसारित बयान में कहा, यदि ईरान के बिजली संयंत्रों के संबंध में अमेरिका की धमकियों पर अमल किया गया, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, और इसे तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक कि हमारे नष्ट किए गए बिजली संयंत्रों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता।

  • लंबे युद्ध की तैयारी….. फूड सप्लाई सुरक्षित करने में जुटा ईरान, खाद्यान  से भरे 6 जहाज होर्मुज से गुजरे

    लंबे युद्ध की तैयारी….. फूड सप्लाई सुरक्षित करने में जुटा ईरान, खाद्यान से भरे 6 जहाज होर्मुज से गुजरे


    तेहरान।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर ईरान (Iran) की सख्त पहरेदारी है। तेल वाले जहाजों को यहां से गुजरने की मनाही है। सिर्फ इक्का-दुक्का जहाज ही, ईरान की सहमति से इधर से जा रहे हैं। इस बीच ईरान ने कुछ और जहाजों को भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी है। यह कार्गो जहाज हैं, जिन पर खाद्यान्न और अन्य कृषि पदार्थ लदे हुए हैं। अमेरिका (America) के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान अपने देश में फूड सप्लाई को सुरक्षित रखना चाहता है। इसे इस तरह भी देखा जा रहा है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो ईरान में भुखमरी की हालत न पैदा होने पाए। यह सभी जहाज ग्रीक मैनेजमेंट की निगरानी वाले हैं। बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से बहुत कम जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे हैं। इसमें भी पश्चिम के जहाजों के लिए तो यह रास्ता लगभग बंद ही है। 11 मार्च को स्टार ग्वानेथ नाम का जहाज यहां से गुजर रहा था, जिस पर मिसाइल से हमले हुए थे।


    15 और 16 मार्च को गुजरे

    मरीन ट्रैकिंग डेटा के आंकड़ों के मुताबिक कम से कम छह जहाज, 15 और 16 मार्च के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे हैं। इन सभी ने उत्तरी खाड़ी के बेहद महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र, ईरान के इमाम खुमैनी बंदरगाह पर माल उतारा। एनालिस्ट फर्म केपलर के मुताबिक नौ मार्च के बाद से पोर्ट पर माल उतारने के बाद पांच अन्य जहाज भी होर्मुज से होकर गुजरे हैं। इन सभी ने वैकल्पिक शिपिंग लेन का उपयोग किया। इन जहाजों में से एक, गियाकोमेटी था, जिसमें कनाडाई सोयाबीन ले जाई गई। इसने शुक्रवार को खाड़ी में प्रवेश किया। इनके आने का उद्देश्य घरेलू खाद्य आपूर्ति को बनाए रखना दिखाई देता है। बता दें कि ईरान अपनी खाद्य जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खुद पैदा करता है। वहीं, अनाज और तेल बीजों के आयात पर निर्भर रहता है। इनका इस्तेमाल कुकिंग ऑयल और पशु चारे के लिए किया जाता है।


    अनाज स्टोर करने पर जोर

    ग्रेन कंसल्टेंसी सॉइकॉन के मैनेजिंग डायरेक्टर आंद्रे सिजोव के मुताबिक, ईरान हर साल करीब 1.5 मिलियन टन मक्के का उत्पादन करता है। वहीं, ब्राजील से 8 मिलियन से 10 मिलियन टन तक का आयात भी करता है। उन्होंने बताया कि कृषि इस देश के लिए एक बड़ी परेशानी है। वजह, यहां पर पानी की कमी के चलते उत्पादन ठीक नहीं रहता। यह किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। बता दें कि युद्ध से पहले ईरान ने करीब 4 मिलियन टन गेहूं का रणनीतिक भंडार तैयार कर लिया था। यह चार महीने तक उसकी घरेलू मांग को पूरा करने में सक्षम है। कृषि मंत्री गोलामरेजा नूरी गेजेलजेह ने हाल ही में कहा कि बेकरीज को लगभग दो महीने के आटे का आवंटन किया गया है। नागरिकों से अपील की गई है कि वह घबराकर खरीदारी न करें।

    गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी कर रखी है। बहुत ही सीमित संख्या में यहां से जहाजों का आना-जाना हो रहा है। होर्मुज को लेकर ईरान की सख्ती के चलते वैश्विक व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। गौरतलब है कि दुनिया के तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। अब यहां से सप्लाई बंद होने के चलते तेल और गैस की कीमतों में काफी ज्यादा इजाफा हो रहा है।

  • ब्रिटेन, फ्रांस समेत छह देश होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद को तैयार, कतर ने ईरान से की युद्ध रोकने की अपील

    ब्रिटेन, फ्रांस समेत छह देश होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद को तैयार, कतर ने ईरान से की युद्ध रोकने की अपील


    लंदन/मस्कट।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए मदद की पेशकश की है। इन देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में शामिल होने को तैयार हैं।

    साथ ही बयान में इन देशों ने ईरान के हालिया हमलों की निंदा की और उसे तुरंत रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने वाले देशों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि जरूरत पड़ने पर अन्य कदम भी उठाए जाएंगे, ताकि तेल सप्लाई पर असर कम किया जा सके।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है और तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

    कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने भी युद्ध तुरंत खत्म करने की अपील की। उन्होंने ईरान से अनुरोध किया कि वह अपने हमले रोके और संघर्ष को और न बढ़ाए।

    अल थानी ने विशेष रूप से रास लफ्फान गैस प्लांट पर हुए हमले का जिक्र किया और कहा कि इससे स्पष्ट है कि ईरान अब ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहा है, जो न केवल कतर बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों का असर दुनियाभर के लाखों लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि इससे ऊर्जा सप्लाई प्रभावित होगी।

    उल्लेखनीय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की कमजोरी से अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। संयुक्त बयान और कतर की चेतावनी इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत बढ़ गई है।

    इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि बड़े देशों की मदद और कतर की चेतावनी मिलकर क्षेत्रीय तनाव को कम कर सकती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में योगदान दे सकती है।

  • जंग के बीच भारत के लिए रवाना हुआ तेल टैंकर ‘जग लाडकी’, कच्चा तेल लेकर सुरक्षित निकला फुजैरा से

    जंग के बीच भारत के लिए रवाना हुआ तेल टैंकर ‘जग लाडकी’, कच्चा तेल लेकर सुरक्षित निकला फुजैरा से



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित रूप से रवाना हो गया है। सरकार ने रविवार को जानकारी दी कि हमले के बावजूद जहाज ने सफलतापूर्वक तेल लोड किया और भारत की ओर प्रस्थान कर गया।

    सरकार के मुताबिक यह जहाज करीब 80,800 टन मुर्बन कच्चा तेल लेकर भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे फुजैरा से निकला। जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह युद्ध प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला चौथा भारतीय ध्वज वाला जहाज है।

    हमले के दौरान कर रहा था तेल लोडिंग
    सरकारी जानकारी के अनुसार 14 मार्च 2026 को जब ‘जग लाडकी’ फुजैरा के सिंगल प्वाइंट मूरिंग पर कच्चा तेल लोड कर रहा था, उसी समय फुजैरा के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था। इसके बावजूद जहाज ने अपनी लोडिंग प्रक्रिया पूरी की और सुरक्षित तरीके से भारत के लिए रवाना हो गया।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित
    माना जा रहा है कि इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए अहम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह मार्ग खाड़ी देशों से तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है।

    दो गैस टैंकर भी पार कर चुके हैं क्षेत्र
    शनिवार को भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं। इन जहाजों में लगभग 92,712 टन एलपीजी लदा हुआ है। ‘शिवालिक’ 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा, जबकि ‘नंदा देवी’ 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे, जो क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे।

    कुल 28 जहाज फंसे थे क्षेत्र में
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में 24 जहाज और पूर्वी हिस्से में 4 जहाज फंसे हुए थे। पूर्वी हिस्से में फंसे जहाजों में भारतीय ध्वज वाला टैंकर ‘जग प्रकाश’ भी शामिल था। ‘जग प्रकाश’ ने शुक्रवार को इस मार्ग को पार कर लिया। यह जहाज ओमान के सोहार बंदरगाह से पेट्रोल लेकर तंजानिया के तांगा बंदरगाह की ओर रवाना हुआ है और इसके 21 मार्च तक वहां पहुंचने की उम्मीद है।

    भारतीय नाविक सुरक्षित
    सरकार ने बताया कि इस क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाज और नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और समुद्री गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज हैं, जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं।

    ऊर्जा जरूरतों पर असर
    भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और लगभग 60% एलपीजी आयात करता है। संघर्ष से पहले भारत के कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता था। वहीं गैस का लगभग 30% और एलपीजी का 85 से 90% हिस्सा सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से आयात किया जाता था।

    तनाव के चलते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कुछ कमी की भरपाई की है। वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति घटाई गई है और होटल व रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलने वाली एलपीजी में भी कटौती की गई है।

    सरकार की निगरानी जारी
    सरकार के अनुसार जहाजरानी महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर हालात पर लगातार नजर रख रहा है। नियंत्रण कक्ष सक्रिय होने के बाद अब तक नाविकों और उनके परिवारों से जुड़े करीब 2,995 फोन कॉल और 5,357 से अधिक ईमेल का जवाब दिया जा चुका है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से अब तक 276 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में भी मदद की गई है, जिनमें पिछले 24 घंटों में लौटे 23 नाविक शामिल हैं।

  • ईरान देगा भारतीय गैस टैंकरों को सुरक्षित मार्ग, नए सुप्रीम लीडर की गंभीर चोटों की खबरें

    ईरान देगा भारतीय गैस टैंकरों को सुरक्षित मार्ग, नए सुप्रीम लीडर की गंभीर चोटों की खबरें


    नई दिल्ली। ईरान ने दो भारतीय गैस टैंकरों को होरमुज़ जलसंधि से सुरक्षित गुजरने की अनुमति देने का दावा किया गया है। न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह कदम भारत में घरेलू गैस आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद करेगा। सूत्रों ने बताया कि ये टैंकर जल्द ही भारत की ओर रवाना होंगे।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एक कच्चे तेल का टैंकर पहले ही 1 मार्च के आसपास होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है और सऊदी अरब का तेल लेकर शनिवार तक भारत पहुंच सकता है। इससे भारतीय ऊर्जा बाजार में आपूर्ति सुचारु रहने की उम्मीद है।

    इससे पहले गुरुवार को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा था कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से दोस्ताना रिश्ते और आपसी भरोसा रहा है इसलिए ईरान होर्मुज स्ट्रेट में भारत के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करेगा।

    वहीं ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रिपोर्टें आई हैं। ब्रिटिश मीडिया सूरज की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल के हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के सीना विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके एक पैर को काटना पड़ा और लिवर को गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल का एक हिस्सा पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात है।

    मुजतबा खामेनेई को उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की 28 फरवरी को मृत्यु के बाद 9 मार्च को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया था। उनके घायल होने की खबरों ने ईरान की राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान के सुप्रीम लीडर की स्थिति गंभीर बनी रहती है तो फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अस्थिरता बढ़ सकती है। वहीं भारतीय टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिलने से घरेलू गैस आपूर्ति में अस्थायी राहत मिल सकती है।

  • ट्रंप का दावा: ईरान पर हमले में बड़ी सफलता, सैन्य क्षमताएं गंभीर रूप से प्रभावित

    ट्रंप का दावा: ईरान पर हमले में बड़ी सफलता, सैन्य क्षमताएं गंभीर रूप से प्रभावित


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान की बड़ी सफलता का दावा किया। जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए और बहुत बड़ी कामयाबियां हासिल की हैं। उनका कहना था कि इस अभियान से ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

    ट्रंप ने कहा ईरान की स्थिति अब बहुत कमजोर है। उनकी नौसेना वायुसेना और ज्यादातर सेना को हमने भारी क्षति पहुंचाई है। उनके बड़े खतरे हर तरह से खत्म हो गए हैं। उनके रडार और एंटी एयरक्राफ्ट हथियार बड़े पैमाने पर निष्क्रिय कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी बल इस संघर्ष में अब पहले कभी न देखी गई प्रभुत्व वाली स्थिति में हैं।

    राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि यह अभियान ईरान से उत्पन्न परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए चलाया जा रहा है। हमें मध्य पूर्व और पूरी दुनिया में मौजूद परमाणु खतरे को समाप्त करना था और हम इसे समाप्त कर रहे हैं उन्होंने कहा। हालांकि उन्होंने अभियान की समयसीमा नहीं बताई लेकिन जोर देकर कहा कि यह उम्मीद से कहीं तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है।

    ट्रंप ने इस संघर्ष के संभावित वैश्विक प्रभाव पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई का असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है लेकिन हालात सामान्य होने पर पेट्रोल और ऊर्जा से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में तेजी से कमी आएगी।

    साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और इजरायल के नेतृत्व से भी बातचीत हुई है। हालांकि उन्होंने इजरायल के दृष्टिकोण और अमेरिकी रणनीतिक लक्ष्यों में कुछ अंतर होने का संकेत दिया। उन्होंने कहा वह एक अलग देश हैं उनका नजरिया थोड़ा अलग हो सकता है।

    ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य बल की प्रशंसा करते हुए कहा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी ताकत दुनिया में कभी नहीं रही। उनके बयान ऐसे समय आए हैं जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इस मार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है जिससे किसी भी अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर तुरंत दिखाई देगा। ट्रंप के दावों और चेतावनियों ने पश्चिम एशिया की भू राजनीति को फिर से अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बना दिया है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

  • खार्ग द्वीप: ईरान की आर्थिक धड़कन, ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

    खार्ग द्वीप: ईरान की आर्थिक धड़कन, ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाई वैश्विक चिंता


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान का खर्ग द्वीप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। फारस की खाड़ी में स्थित यह छोटा सा द्वीप लंबे समय से ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में इस द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनका यह बयान वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में नई बहस पैदा कर गया है।

    खार्ग द्वीप ईरान के दक्षिण में बुशेहर तट से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित है। यह एक कोरल द्वीप है जिसकी समुद्री गहराई इतनी अधिक है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर भी यहां आसानी से लंगर डाल सकते हैं। 20वीं सदी के मध्य में ईरान ने इसे विशाल तेल निर्यात टर्मिनल के रूप में विकसित किया। पाइपलाइनों के माध्यम से देश के कई बड़े तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल यहां लाया जाता है और फिर टैंकरों के जरिए दुनिया भर में भेजा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से होकर गुजरता है।

    इतिहास में भी खार्ग द्वीप का महत्व कम नहीं रहा। प्राचीन फारसी साम्राज्यों के समय से यह समुद्री व्यापार का अहम केंद्र रहा। द्वीप पर चट्टानों में बने मकबरों और प्रारंभिक ईसाई मठों के अवशेष मिले हैं। मध्यकाल में यह फारस, भारत और बसरा के बीच व्यापारिक मार्ग का हिस्सा था। 18वीं सदी में डच ईस्ट इंडिया कंपनी और बाद में ब्रिटिश सेना ने भी यहां व्यापारिक चौकियां स्थापित की थीं।

    आधुनिक दौर में इस द्वीप का सबसे बड़ा परीक्षण ईरान इराक युद्ध 1980–1988 के दौरान हुआ, जब इराक ने कई बार यहां मौजूद तेल टर्मिनलों पर हमला किया। ऊर्जा इतिहासकार डैनियल येरगिन के अनुसार, “खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का ‘नर्व सिस्टम’ था; इस पर हमला करना सीधे उसकी आर्थिक जीवनरेखा पर वार करने जैसा था।

    हाल ही में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मध्य पूर्व के सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक अंजाम दिया और खार्ग द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने द्वीप के तेल ढांचे को नष्ट नहीं किया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि कोई पक्ष स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में बाधा डालता है, तो अमेरिकी प्रतिक्रिया हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खार्ग द्वीप पर किसी भी बड़े हमले का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। यह द्वीप वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा है। यहां की तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचने पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल पुथल मच सकती है। यही कारण है कि यह छोटा सा द्वीप लंबे समय से पश्चिम एशिया की भू राजनीति में रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

  • होर्मुज के खतरे के बीच सुरक्षित निकला भारत का LPG जहाज ‘शिवालिक’, ट्रम्प का दावा,ईरान के खार्ग आइलैंड पर सैन्य ठिकाने तबाह

    होर्मुज के खतरे के बीच सुरक्षित निकला भारत का LPG जहाज ‘शिवालिक’, ट्रम्प का दावा,ईरान के खार्ग आइलैंड पर सैन्य ठिकाने तबाह


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध का आज 15वां दिन है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारत की सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का एलपीजी टैंकर जहाज शिवालिक सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया है। जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली वेबसाइट मरीनट्रैफिक के अनुसार यह जहाज 7 मार्च को कतर से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था और शुक्रवार रात खतरनाक माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकल गया। इस जहाज की क्षमता करीब 55 हजार टन एलपीजी ढोने की है, इसलिए इसके सुरक्षित निकलने को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दूसरी ओर युद्ध के मोर्चे पर अमेरिका की ओर से बड़ा दावा किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के सबसे अहम तेल निर्यात केंद्र खार्ग आइलैंड पर मौजूद सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है। ट्रम्प ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान के तेल ढांचे को भी निशाना बना सकता है। खार्ग आइलैंड ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है क्योंकि देश के करीब 80 से 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है।

    इस बीच ईरान की राजनीति को लेकर भी चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और फिलहाल कोमा में हैं। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजराइल हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे और उन्हें तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि चोट इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों को उनका एक पैर काटना पड़ा और उनके लिवर को भी काफी नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के जिस हिस्से में उन्हें रखा गया है, वहां भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई है और पूरे इलाके को सील कर दिया गया है।

    वहीं ईरान ने भारत को लेकर एक नरम रुख भी दिखाया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने दो भारतीय एलपीजी टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है। इन टैंकरों के जल्द भारत की ओर रवाना होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो भारत में रसोई गैस की सप्लाई पर पड़ रहे दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इसके अलावा सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आने वाला एक टैंकर भी मार्च की शुरुआत में होर्मुज पार कर चुका है और शनिवार तक भारत पहुंच सकता है।

    हालांकि अमेरिका और इजराइल की लगातार दो हफ्तों से चल रही एयरस्ट्राइक के बावजूद ईरान की सरकार फिलहाल मजबूत नजर आ रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा हालात में ईरान की सत्ता के गिरने की संभावना बेहद कम है और सरकार अभी भी देश की जनता पर नियंत्रण बनाए हुए है।

    युद्ध के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजों की आवाजाही भी काफी कम हो गई है। लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के मुताबिक इस महीने अब तक केवल 77 जहाज ही इस रास्ते से गुजर पाए हैं। गौरतलब है कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती है, इसलिए यहां पैदा हुआ संकट पूरी दुनिया की ऊर्जा और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।

  • देश में LPG संकट, सिलेंडर कालाबाजारी और बुकिंग में उछाल: रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर, सरकार ने कहा- घबराएं नहीं

    देश में LPG संकट, सिलेंडर कालाबाजारी और बुकिंग में उछाल: रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर, सरकार ने कहा- घबराएं नहीं



    भोपाल । अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते पूरे देश में LPG सिलेंडर की किल्लत देखने को मिल रही है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं और घरेलू व कॉमर्शियल सिलेंडरों की कालाबाजारी बढ़ गई है।

    मध्य प्रदेश में कॉमर्शियल सिलेंडर 4 हजार में बिक रहा
    भोपाल के बरखेड़ा पठानी में खुलेआम देखा गया कि 1,918 रुपए वाला कॉमर्शियल सिलेंडर कालाबाजारी में ₹4,000 में बेचा जा रहा है। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया है, लेकिन कालाबाजारी पर असर नहीं पड़ा।

    बिहार और उत्तर प्रदेश में घरेलू सिलेंडर की कीमतें आसमान पर
    बिहार में 900 रुपए वाले घरेलू सिलेंडर ब्लैक मार्केट में 1,700-1,800 रुपए में बिक रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 950 रुपए वाला सिलेंडर 1,600 रुपए में तुरंत उपलब्ध हो रहा है। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर 3,500 रुपए तक पहुँच गया है।

    राजस्थान और उत्तराखंड में होटलों-रेस्टोरेंट्स की मुश्किलें बढ़ीं
    राजस्थान में चित्तौड़गढ़ और सवाई माधोपुर में रेस्टोरेंट बंद हो गए, जैसलमेर में 150 रिसॉर्ट्स बंद करने की तैयारी में हैं। कोटा में लकड़ी और कोयले की भट्टियों की मांग बढ़ गई।
    उत्तराखंड के देहरादून और हल्द्वानी में व्यावसायिक गैस की कमी के कारण होटल, ढाबा और ठेला संचालकों ने अपने मेन्यू के लगभग 70% आइटम हटा दिए हैं।

    सरकार का दावा- रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर, सप्लाई स्थिर
    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% LPG विदेशों से आयात करता है, जिसमें से 90% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है।
    सरकार ने भरोसा दिलाया कि रोजाना लगभग 50 लाख सिलेंडर डिलीवर किए जा रहे हैं और घरेलू उपभोक्ताओं को सप्लाई जारी है। घबराहट में बुकिंग बढ़ी है, जिसे नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकारों से लाभार्थियों की सूची तैयार करने को कहा गया है।

    इंडक्शन की मांग 50% बढ़ी
    जयपुर में औद्योगिक इंडक्शन की बिक्री पिछले महीने 2,500-3,000 यूनिट थी, जो अब 50% बढ़ गई है। होटल और रेस्टोरेंट भी इंडक्शन पर खाना बनाने लगे हैं, जिससे गैस की मांग और बढ़ गई है।

    सरकार ने उठाए कदम

    देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ लागू किया गया, कालाबाजारी पर नियंत्रण के लिए।

    घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जा रही है।

    राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि जरूरतमंदों की सूची तैयार की जाए।

    बुकिंग प्रक्रिया में बदलाव कर एक सिलेंडर डिलीवरी के बाद अगले 25 दिन में बुकिंग होगी।

    देशभर में घरेलू और व्यावसायिक गैस की सप्लाई पर निगरानी लगातार जारी है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि पैनिक बुकिंग से बचें और अधिकृत एजेंसियों से ही गैस लें।