Tag: Strait of Hormuz

  • ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा

    ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा


    तेहरान।
     ईरान ने अमेरिका  के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सख्त चेतावनी जारी की है। ईरानी नौसेना ने कहा है कि तेहरान की अनुमति के बिना इस अहम समुद्री मार्ग में प्रवेश करने वाले किसी भी पोत को नष्ट कर दिया जाएगा।

    रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना ने समुद्री मार्ग के आसपास मौजूद जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर स्पष्ट किया कि होर्मुज पार करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (सेपाह) की नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। चेतावनी में कहा गया कि बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले जहाज को “उड़ा दिया जाएगा।”

    The Wall Street Journal की रिपोर्ट में चालक दल द्वारा साझा किए गए ऑडियो का हवाला देते हुए बताया गया कि इस चेतावनी के बाद कई जहाज फिलहाल होर्मुज के आसपास रुके हुए हैं। फारस की खाड़ी के ऊपर युद्धक विमानों की तैनाती भी जारी बताई गई है।

    वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग
    ईरान और ओमान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग करीब 34 किलोमीटर चौड़ा है और खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।

    दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा
    डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हुए हैं, बशर्ते होर्मुज मार्ग “पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित” तरीके से खुला रहे। उन्होंने बताया कि यह फैसला शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के प्रस्ताव के बाद लिया गया।

    ईरान का संदेश—यह युद्ध का अंत नहीं

    दूसरी ओर, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने युद्धविराम को स्वीकार करते हुए कहा कि यह संघर्ष का अंत नहीं है। तेहरान ने चेतावनी दी कि यदि विरोधी पक्ष कोई गलती करता है तो “पूर्ण शक्ति” से जवाब दिया जाएगा।

    बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है। हालांकि, होर्मुज में बढ़ी सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और संवेदनशील बना हुआ है।

  • होर्मुज के जल्द खुलने की उम्मीद…जहाजों के निकलने पर ईरान के साथ ओमान भी वसूलेगा टोल

    होर्मुज के जल्द खुलने की उम्मीद…जहाजों के निकलने पर ईरान के साथ ओमान भी वसूलेगा टोल


    तेहरान।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जल्द ही खुलने के आसार हैं। सीजफायर (Ceasefire) के बाद ईरान (Iran) ने भी शर्तों पर सहमति जता दी है। अब यहां से तेल के जहाजों का गुजरना शुरू हो जाएगा। हालांकि, खबरें हैं कि इसके लिए मुल्कों को ईरान के साथ ओमान (Oman) को भी टोल टैक्स (Toll Tax) देना होगा। इसे लेकर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन कहा जा रहा है कि टैक्स की बात सीजफायर की शर्तों में शामिल है।

    क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि दो सप्ताह के सीजफायर प्लान में फीस की बात कही गई है। इसके तहत ईरान और ओमान दोनों ही मुल्क स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों से फीस वसूलेंगे। अधिकारी का कहना है कि ईरान इस रकम का इस्तेमाल मुल्क में दोबारा होने वाले निर्माण कार्यों के लिए करेगा। जबकि, यह साफ नहीं है कि ओमान राशि का किस तरह इस्तेमाल करेगा।


    अब तक फ्री था

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान और ईरान के जलक्षेत्र में आता है, लेकिन दुनिया इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग ही मानती थी। इसके चलते अब तक कोई भी देश जहाज निकलने के लिए टोल नहीं देता था।


    भारत भी दे रहा है फीस?

    बीते कुछ दिनों में शिवालिक, नंदा देवी, जग वसंद, पाइन गैस, ग्रीन सान्वी समेत कई जहाज भारत की ओर पहुंचे हैं। हालांकि, अब 16 भारतीय झंडे वाले जहाज स्ट्रेट पर अटके हुए हैं। अब तक यह साफ नहीं है कि भारत की तरफ से कोई फीस दी जा रही है या नहीं। वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्ट्रेट को पार करने के लिए शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है।’

    होर्मुज जलमार्ग ईरान की तरफ से बंद किए जाने के बाद यहां जहाजों का आवागमन करीब 95 प्रतिशत गिर गया था। बाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की तरफ से जारी बयान के अनुसार, चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी गई थी।


    बाब-अल-मंदेब पर भी मंडराया था खतरा

    एक दिन पहले ही ईरान ने चेतावनी दी थी कि मेरिका-इजरायल ने अगर सैन्य कार्रवाइयां जारी रखीं ,तो वह यमन में अपने हूती सहयोगियों के माध्यम से बाब-अल-मंदेब मार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा। ईरान की यह धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सख्त चेतावनी के तुरंत बाद आई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान शर्तों पर सहमत नहीं होता है तो ‘पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी’।

    ईरान ने कहा कि ‘अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है’ तो तेहरान हूतियों से मदद मांगेगा, ‘जो बाब-अल-मंदेब जलमार्ग को भी बंद कर देंगे’। हूती विद्रोहियों का यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। ये विद्रोही पहले भी इस बड़े जलमार्ग और उसके आसपास जहाजों पर अक्सर हमले करते रहे हैं, जो लाल सागर में समुद्री डकैती और उग्रवाद का प्रमुख कारण रहा है।

  • होर्मुज से भारत को राहत, ईरान ने दी सुरक्षित आवाजाही की गारंटी; भारत की भूमिका की भी सराहना

    होर्मुज से भारत को राहत, ईरान ने दी सुरक्षित आवाजाही की गारंटी; भारत की भूमिका की भी सराहना

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मोहम्मद फतहली ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत समेत मित्र देशों के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान ने विशेष इंतजाम किए हैं।
    हाल के दिनों में कई भारतीय पोत सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुके हैं।

    राजदूत ने स्पष्ट किया कि यह जलडमरूमध्य केवल उन देशों के लिए बंद है, जो ईरान के साथ युद्ध में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है और इसके प्रबंधन से जुड़े फैसले तेहरान और मस्कट के अधिकार क्षेत्र में हैं। ईरान ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

    भारत निभा सकता है अहम भूमिका

    राजदूत फतहली ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने में भारत प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

    उन्होंने बातचीत और संयम बरतने की भारत की अपील को जिम्मेदाराना बताते हुए उसकी सराहना की। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में भारत जैसे देशों का संतुलित रुख बेहद अहम है।

    उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि स्वतंत्र देश अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की निंदा करेंगे। ईरान ने दोहराया कि वह युद्ध नहीं चाहता और संघर्ष शुरू करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

    चाबहार परियोजना पर जोर

    राजदूत ने कहा कि चाबहार पोर्ट जैसे क्षेत्रीय प्रोजेक्ट एकतरफा प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होने चाहिए। यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ मध्य एशिया तक भारत की पहुंच मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस संबंध में ईरान लगातार भारतीय पक्ष के संपर्क में है।

    युद्ध से ईरान में बढ़ी एकजुटता

    फतहली के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के दौरान ईरानी जनता पहले से अधिक एकजुट हुई है और बाहरी दबाव के खिलाफ सरकार का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति में बदलाव उसके गलत आकलन को दर्शाता है।

    अमेरिका पर साधा निशाना

    राजदूत ने दावा किया कि अमेरिका तीन स्तरों—ईरान की नेतृत्व क्षमता, जनता और सैन्य शक्ति—के आकलन में असफल रहा है। उन्होंने उभरते मंच ब्रिक्स के महत्व पर भी जोर दिया और सदस्य देशों से जिम्मेदार रवैया अपनाने का आग्रह किया।

    ट्रंप और नेतन्याहू की बयानबाजी पर प्रतिक्रिया

    राजदूत ने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान की सभ्यता हजारों साल पुरानी है और वह किसी भी स्थिति में “पत्थर युग” में नहीं जाएगा। उन्होंने नागरिक ठिकानों पर हमलों को अमानवीय बताते हुए इसे हताशा का संकेत बताया।

    कुल मिलाकर, ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज से भारतीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी और क्षेत्रीय तनाव कम करने में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है।

  • LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज

    LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में एलपीजी (LPG) की कमी के बीच बड़ी राहत की खबर है। ईरान युद्ध के बीच होर्मुज (Hormuz) से भारत के 9वें टैंकर को निकले की इजाजत मिल गई है। ‘ग्रीन आशा’ नाम का भारतीय झंडे वाला यह पोत बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इससे पहले 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सांवी’ को होर्मुज से निकलने की इजाजत मिली थी। इससे 46 हजार टन एलपीजी भारत पहुंच रही है। इससे कहा जा सकता है कि जल्द ही भारत में एलपीजी की किल्लत दूर होने वाली है।


    एक और एलपीजी टैंकर कर रहा इंतजार

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत का एक और पोत ‘जग विक्रम’ अभी परमीशन का इंतजार कर रहा है। ये भी टैंकर होर्मुज से पहले ही रुककर इजाजत का इंतजार करते हैं। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इन्हें पास कराया जाता है। कच्चे तेल और एलपीजी वाले पोतों को प्राथमिकता दी जाती है। ईरान ने स्पष्ट कह दिया है कि भारत के टैंकरों को होर्मुज से निकलने की इजाजत दी जाएगी। इसके अलावा अमेरिका और इजरायल का साथ देने वाले देशों के लिए होर्मुज बंद माना जाए।

    इससे पहले BW TYR टैंकर मुंबई पहुंचा है। शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज के पास अभी 16 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से पांच शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। ओमान की खाड़ी , अदन की खाड़ी और लाल सागर में भी कुछ भारतीय जहाज मौजूद हैं।


    खाड़ी में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक

    खाड़ी इलाकों में भारतीय नाविकों की संख्या भी काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में भारत के कम से कम 20 हजार 500 नाविक हैं। इनमें से 504 नाविक ही भारतीय शिप पर हैं। 3 अप्रैल को अलग-अलग शिपिंग कंपनियों द्वारा 1130 नाविकों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत ईरान की सरकार के साथ कूटनीतिक वार्ता भी कर रहा है। ईरान का भी रुख भारत के प्रति बेहद नरम है।

    डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को होर्मुज खोलने के लिए चेतावनी दे रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि तेहरान में एक ‘भीषण हमले’ में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को ‘खत्म’ कर दिया गया है। उन्होने कहा कि अगर ईरान अब भी नहीं मानता है तो ऐसे अभियान चलते रहेंगे। उन्होंने कहा, “याद रखें जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दस दिन का समय दिया था। अब समय खत्म हो रहा है-48 घंटे बचे हैं, इसके बाद उन पर चौतरफा आफत बरसेगी।”

  • 48 घंटे में खोलो होर्मुज स्ट्रेट, डेडलाइन पार हुई बरपेगा कहर… ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी

    48 घंटे में खोलो होर्मुज स्ट्रेट, डेडलाइन पार हुई बरपेगा कहर… ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी


    वाशिंगटन।
    मिडिल ईस्ट (Middle East.) में तनाव चरम पर है. ईरान और अमेरिका (America) के बीच को भी पीछे हटने या झुकने को तैयार नहीं है. सीजफायर की कोशिशों के बीच लगातार हमले जारी है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खोलने की तय समय सीमा का पालन नहीं किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आक्रामक अंदाज में लिखा कि समय तेजी से खत्म हो रहा है. ईरान को समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए पहले ही समय दिया गया था, लेकिन अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं. यदि ये डेडलाइन पार हुई, तो ईरान पर अमेरिका कहर बनकर टूटेगा. हैरानी की बात ये है कि कुछ दिन पहले तक ट्रंप का रुख अपेक्षाकृत नरम दिखाई दे रहा था।

    उन्होंने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर उम्मीद जताई थी और समय सीमा को 10 दिन तक बढ़ाते हुए 6 अप्रैल तक का वक्त दिया था. यह कदम संकेत दे रहा था कि वाशिंगटन अभी भी कूटनीतिक रास्ता खुला रखना चाहता है. लेकिन अब उनके तेवर बदल चुके हैं. उन्होंने साफ संदेश दे दिया है कि धैर्य की सीमा खत्म होने के करीब है. इसके बाद भीषण हमले किए जाएंगे।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. इससे अमेरिका मुद्दे को सिर्फ क्षेत्रीय विवाद के तौर पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता से जुड़ा मामला मानता है.

    ट्रंप की बातों से साफ है कि अब यह मामला सिर्फ कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहा. 48 घंटे की चेतावनी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिन बेहद अहम होने वाले हैं. ईरान की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से हालात तेजी से बदल रहे हैं, उससे दोनों देशों के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच सकता है।

    28 फरवरी को जब डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का आगाज किया तब उनके इरादे बिल्कुल साफ थे. दोनों ईरान की मिसाइल शक्ति को मिट्टी में मिलाना चाहते थे. उसके परमाणु ख्वाबों पर हमेशा के लिए ताला जड़ना चाहते थे. लेकिन युद्ध के पांचवें हफ्ते तक आते-आते अमेरिकी प्रशासन के ये लक्ष्य किसी पहेली की तरह उलझ गए हैं।

    कभी ट्रंप आक्रामकता की बात करते हैं, तो कभी अपने ही पुराने बयानों का खंडन कर दुनिया को हैरत में डाल देते हैं. इस टकराव का सबसे विचित्र पहलू ट्रंप के विरोधाभासी बयान रहे हैं. युद्ध के शुरुआती हफ्तों में उन्होंने बड़े आत्मविश्वास से कहा था कि इस लड़ाई का तेल से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन कुछ ही समय बाद उनके सुर बदल गए. अब ईरान के तेल पर कब्जे की बात करते हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट पर भी वॉशिंगटन का रुख डगमगाता दिखता है. पहले ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के हटने पर दूसरे देश इसे खोल सकते हैं, लेकिन महज कुछ ही दिनों में उन्होंने जोर देकर कहा कि वो आसानी से खुद संभाल सकते हैं. कभी वे जंग खत्म होने का ऐलान करते हैं, तो कभी बुनियादी ढांचे पर हफ्तों तक बमबारी की चेतावनी देते हैं. यह अनिश्चितता वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का सबब बन गई है।

  • हम इकलौते देश, जिसने अपने नाविक खोये…. होर्मुज खुलवाने के लिए जुटे दुनियाभर के देश, भारत की दो टूक

    हम इकलौते देश, जिसने अपने नाविक खोये…. होर्मुज खुलवाने के लिए जुटे दुनियाभर के देश, भारत की दो टूक


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में तनाव की वजह से लंबे समय बंद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने को लेकर गुरुवार को अहम बैठक हुई। ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक में भारत (India) समेत कई देशों को न्योता दिया गया था। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी (Foreign Secretary Vikram Misri) वर्चुअल मीटिंग में शामिल हुए। इस दौरान, भारत ने दो टूक कहा कि हम इकलौते देश हैं, जिसने अपने नाविक खोए हैं। भारत ने इस बैठक में होर्मुज को खोलने की वकालत की।

    मिसरी गुरुवार को ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्चुअली शामिल हुए। इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। अमेरिका को इस बैठक में शामिल नहीं होना था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, “ब्रिटेन ने होर्मुज पर बातचीत के लिए कई देशों को आमंत्रित किया था, जिसमें भारत भी शामिल है।”

    उन्होंने दोहराया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, मुक्त और खुले समुद्री सुरक्षा का समर्थन करता है। जायसवाल ने कहा, “हम होर्मुज से सुरक्षित और मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने की मांग को प्राथमिकता के तौर पर लगातार उठाते रहे हैं।” ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक के नतीजों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस टीवी संबोधन के कुछ ही घंटों बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ अपने युद्ध के संदर्भ में कहा था कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा करना अन्य देशों की जिम्मेदारी है।

    इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई बैठक से तुरंत कोई बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद कम ही है। उन्होंने कहा कि इस स्ट्रेट से भारत के जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता पक्का करना अभी भी एक पेचीदा मामला बना हुआ है, और यह पक्का करने के लिए कि जहाज बारूदी सुरंगों वाले इस जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर सकें, ईरान की तरफ से करीबी तालमेल की जरूरत है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “जहां तक भारत की बात है, आप अच्छी तरह जानते हैं कि हम स्वतंत्र और खुले कमर्शियल शिपिंग के पक्ष में हैं, और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री सुरक्षा के पक्ष में हैं।” उन्होंने कहा, “हम प्राथमिकता के तौर पर होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और स्वतंत्र आवागमन सुनिश्चित करने की लगातार अपील कर रहे हैं।” ईरान द्वारा होर्मुज को लगभग बंद कर देने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। यह स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा शिपिंग मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का परिवहन होता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

  • किचन से बेडरूम तक पहुंचा जंग का असर, कंडोम सप्लाई पर मंडराया संकट

    किचन से बेडरूम तक पहुंचा जंग का असर, कंडोम सप्लाई पर मंडराया संकट


    नई दिल्ली। ईरान में जारी युद्ध का असर अब रोजमर्रा की जरूरतों से आगे बढ़कर बेडरूम तक पहुंचता दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हुई है, वहीं पेट्रोकेमिकल्स और लुब्रिकेंट्स की कमी ने कंडोम उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसका असर करीब 860 मिलियन डॉलर के भारतीय कंडोम उद्योग पर भी पड़ रहा है, जो हर साल 400 करोड़ से अधिक यूनिट का उत्पादन करता है।
    रॉ मटीरियल महंगा होने से निर्माण लागत बढ़ रही है। सरकारी कंपनी HLL Lifecare Limited, जो सालाना लगभग 221 करोड़ कंडोम बनाती है, भी इस संकट की जद में है। इसके अलावा Mankind Pharma Limited और Cupid Limited जैसी कंपनियां भी सप्लाई चेन में बाधा से जूझ रही हैं।
    कच्चे माल की कमी से बढ़ी परेशानी
    कंडोम निर्माण मुख्य रूप से सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया पर निर्भर करता है।
    सिलिकॉन ऑयल एक अहम लुब्रिकेट है, जिसकी मिडिल ईस्ट में कमी देखी जा रही है।
    अमोनिया कच्चे लेटेक्स को स्थिर रखने में जरूरी है और इसके दाम 40–50% तक बढ़ने की आशंका है।
    पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती कीमतों ने संकट और गहरा दिया है।
    उत्पादन पर असर की आशंका
    कर्नाटक ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के जतिश एन सेठ के मुताबिक, पेट्रोकेमिकल आधारित हर उत्पाद प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसाधनों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखना शुरू कर दिया है। 11 मार्च की अंतर-मंत्रालयीय बैठक में पेट्रोकेमिकल यूनिट्स के आवंटन में कटौती की संभावना जताई गई, जिससे कंडोम उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

    सप्लाई और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें
    उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पीवीसी फॉइल, एल्युमिनियम फॉइल और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कमी से ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो रहा है।

    लॉजिस्टिक्स में देरी और लागत बढ़ने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया दोनों के महंगे होने से उत्पादन और प्रभावित हो सकता है।

    फैमिली प्लानिंग पर भी असर की चिंता
    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। भारत में कंडोम कम मार्जिन पर बनाए जाते हैं, ताकि बड़ी आबादी को कम कीमत पर उपलब्ध हो सकें। कीमत बढ़ाने पर बिक्री घटने का जोखिम है। लंबे समय में इससे फैमिली प्लानिंग कार्यक्रमों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • वैश्विक व्यापार पर मंडराया खतरा: बाब-अल-मंदेब पर संकट, भारतीय नौसेना सतर्क

    वैश्विक व्यापार पर मंडराया खतरा: बाब-अल-मंदेब पर संकट, भारतीय नौसेना सतर्क


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में वेस्ट एशिया का बढ़ता संघर्ष अब वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी टकराव में अब हूती विद्रोही भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। हूतियों द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमलों ने इस संघर्ष को और व्यापक बना दिया है।

    पहले ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बाधित होने की आशंका से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है, और अब स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब पर भी संकट गहराने की संभावना जताई जा रही है। यह अहम समुद्री मार्ग रेड सी और अदन की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया के करीब 12 प्रतिशत व्यापार का रास्ता है।

    इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत तैनात किए गए हैं। एंटी-पायरेसी मिशन के तहत पहले से मौजूद निगरानी को अब और मजबूत किया गया है।

    भारतीय नौसेना इस समय कच्चे तेल और एलपीजी ले जाने वाले भारतीय टैंकरों को एस्कॉर्ट कर रही है ताकि उन्हें किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सके। आवश्यकता पड़ने पर भारतीय ध्वज वाले जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा देने की भी तैयारी है।

    हालांकि अभी तक हूती विद्रोहियों ने रेड सी में किसी बड़े जहाज को निशाना नहीं बनाया है, लेकिन हालात तेजी से बदल सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञ संजय कुलकर्णी का मानना है कि ईरान पर बढ़ते दबाव के चलते हूती इस रणनीतिक मार्ग को ‘वेपोनाइज’ कर सकते हैं, यानी इसे दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

    यदि ऐसा होता है, तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ेगा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। महंगाई बढ़ सकती है, उर्वरकों की कीमतों में इजाफा हो सकता है और निर्यात प्रभावित हो सकता है।

    जिबूती जैसे रणनीतिक स्थानों पर अमेरिका, चीन, जापान और फ्रांस की सैन्य मौजूदगी के कारण इस क्षेत्र को पूरी तरह बाधित करना आसान नहीं है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला भी नहीं है। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा है। एक प्रमुख मार्ग फारस की खाड़ी से होकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज, ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक जाता है, जबकि दूसरा मार्ग स्वेज नहर, रेड सी और अदन की खाड़ी के जरिए अरब सागर से जुड़ता है।

    यदि ये दोनों मार्ग प्रभावित होते हैं, तो जहाजों को केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से गुजरना पड़ेगा, जिससे समय और लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी होगी। भारत के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई, रूस और अमेरिका से आता है।

    कुल मिलाकर, वेस्ट एशिया में बढ़ता यह संघर्ष अब वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। आने वाले समय में स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

  • मिडिल ईस्ट संकटः कड़े पहरे के बीच होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG से भरा पोत.. क्या ईरान वसूल रहा टोल!

    मिडिल ईस्ट संकटः कड़े पहरे के बीच होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG से भरा पोत.. क्या ईरान वसूल रहा टोल!


    तेहरान।
    ईरान युद्ध (Iran War) के बीच दुनियाभर में ऊर्जा का बड़ा संकट (Energy Crisis) खड़ा हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस व्यापार होता है। अब कई देशों के जहाज इस रास्ते से निकल ही नहीं पा रहे हैं। ऐसे में दुनियाभर के तमाम देश तेल संकट से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान समेत कई देशों ने जनता के लिए नए-नए नियम निकाल दिए हैं। कई जगहों पर कार्य सप्ताह चार दिनों का कर दिया गया है। इसी बीच बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते हुए भारतीय ध्वज वाला पोत ‘जग वसंत’ 47,000 टन द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर गुजरात के जामनगर स्थित वडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है। ईरान ने साफ कहा है कि भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट में कोई प्रतिबंध नहीं है।


    होर्मुज से कितने शिप निकल पा रहे

    ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध अब दूसरे महीने में प्रवेश कर गया है। जहां युद्ध से पहले होर्मुज स्ट्रेट से रोज 100 जहाज निकल जाते थे, अब 3 से 4 जहाज ही निकल पा रहे हैं। इनमें में भारत के भी व्यापारिक जहाज होते हैं। ईरान ने अपने कुछ दोस्त देशों में भारत का भी नाम लिया है और इससे भारत को बड़ी राहत मिली है। ईरान ने कहा है कि भारत के झंडे वाले जहाजों को यहां नहीं रोका जाएगा।


    कौन से देशों को मिली है छूट

    शनिवार को भी दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी और BW Tyr और BW Elm के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। पिछले महीने होर्मुज स्ट्रेट से होकर कम से कम पांच जहाज भारत पहुंचे। इनमें पान गैस, जग वसंद, शिवालिक और नंदा देवी शिप शामिल हैं। इनमें एलपीजी और कच्चा तेल भारत पहुंचा है। ईरान ने भारत के साथ चीन, रूस, ईराक और पाकिस्तान को भी छूट दी है।

    गुरुवार को मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने एक पोस्ट में कहा था कि ईरानी विदेस मंत्री अब्बास अरागची ने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के लिए होर्मुज को खोल दिया है। इसके बाद थाईलैंड और मलेशिया ने भी दावा किया कि उसके लिए भी होर्मुज कोखोला गया है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि इजरायल और अमेरिका के सहयोगियों को यहां से नहीं गुजरने दिया जाएगा।


    क्या ईरान होर्मुज में वसूल रहा है टोल?

    ईरान की संसद ने इस बात का समर्थन किया है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों सो टोल वसूला जाए। इसको लेकर कानून फाइनल होने वाला है। इसके मुताबिक जहाजों की सुरक्षा के बदले ईरान टोल वसूल सकता है। दूसरे कॉरिडोर में भी जहाजों से एक शुल्क लिया जाता है। जानकारी के मुताबिक कुछ जहजों से शुल्क लिया जाने लगा है। होर्मुज के दोनों ओर जहाजों का जमावड़ा लग गया है। दोनों ओर करीब 2000 शिप हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

  • ट्रंप ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को कहा ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’, नोबेल न मिलने पर उठाए सवाल

    ट्रंप ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को कहा ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’, नोबेल न मिलने पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मियामी के फेना फोरम में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ईरान युद्ध और वैश्विक राजनीति को लेकर कई तीखे बयान दिए। खुद को एक बार फिर पीसमेकर बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, तो फिर यह किसी और को भी नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने क्यूबा को अगला निशाना भी बताया।

    ट्रंप ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह कमजोर कर दिया गया है और वहां की सरकार अब समझौते के लिए मजबूर है। अपने खास अंदाज में उन्होंने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ तक कह दिया।

    अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट अब ईरानी आतंक और न्यूक्लियर ब्लैकमेल से मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा, “मेरे नेतृत्व में अमेरिका इस कट्टरपंथी शासन से पैदा खतरे को खत्म कर रहा है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जरिए ईरान की ताकत को तोड़ा जा रहा है। हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, जिसे मैंने अपने पहले कार्यकाल में मजबूत किया। हमारे पास ऐसे हथियार हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 47 साल तक ईरान क्षेत्र का दबदबा बनाए हुए था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।”

    कासिम सुलेमानी का भी किया जिक्र

    ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराने की घटना का भी उल्लेख किया। जनवरी 2020 में बगदाद एयरपोर्ट पर अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी की मौत हुई थी। उस समय अमेरिका ने इसे अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया था।

    उन्होंने कहा, “यह मेरे कार्यकाल का अहम पल था। वह इतना प्रभावशाली था कि मुझे लगता है ईरान का नेतृत्व भी अंदर से राहत महसूस कर रहा था, हालांकि वे इसे स्वीकार नहीं करते। अब कोई उनसे सवाल करने वाला भी नहीं है। ईरान पर इतना दबाव है कि उसे बातचीत के लिए आना ही होगा। वे समझौते के लिए आग्रह कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ मेरा मतलब होर्मुज खोलना ही होगा। फेक न्यूज कहेगी कि यह गलती थी, लेकिन मैं बहुत कम गलती करता हूं।”

    ब्रिटेन और नाटो पर भी निशाना

    नाटो और ब्रिटेन को लेकर भी ट्रंप ने आलोचनात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यूके के प्रधानमंत्री से उन्होंने दो एयरक्राफ्ट कैरियर की मांग की थी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ट्रंप ने कहा, “वे छोटे हैं और ज्यादा तेज भी नहीं हैं, लेकिन हम उनका इस्तेमाल हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म के रूप में कर सकते हैं। मैंने पूछा कि क्या आप हमारी मदद करेंगे? जवाब मिला कि युद्ध खत्म होने के बाद मदद करेंगे। यही नाटो की हकीकत है। हम उनकी मदद करते हैं, लेकिन वे हमारे साथ खड़े नहीं होते।” उन्होंने यह भी कहा कि नाटो की तुलना में बहरीन और कुवैत ने ज्यादा सहयोग दिया है और मिडिल ईस्ट के सहयोगी देशों ने निराश नहीं किया।

    नोबेल पुरस्कार पर फिर दोहराया दावा

    ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी पहचान एक बड़े शांतिदूत के रूप में बने। उन्होंने कहा, “अगर मुझे शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, तो फिर किसी को नहीं मिलना चाहिए। मुझे यह नहीं मिला और मुझे इस पर हैरानी भी नहीं है।”

    मिसाइल हमलों पर भी किया दावा

    मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि हाल ही में उन पर 101 मिसाइलों से हमला किया गया था, लेकिन सभी को मार गिराया गया। उन्होंने कहा, “अब हम उनके ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। उनके पास एयर डिफेंस नहीं बचा है और हम आसानी से अपने टारगेट पर हमला कर रहे हैं। हमारे पास अभी 3,554 लक्ष्य बाकी हैं, जिन्हें जल्द खत्म किया जाएगा। आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।”