Tag: Strait of Hormuz

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज गुजरे तो लगा देंगे आग… ईरान ने जल मार्ग बंद कर जारी की चेतावनी

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज गुजरे तो लगा देंगे आग… ईरान ने जल मार्ग बंद कर जारी की चेतावनी


    तेहरान।
    अमेरिका और ईरान युद्ध (America and Iran War) अपने चरम पर है। अब खबर है कि ईरान ने अहम जल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) या होर्मुज जल डमरू मध्य बंद कर दिया है। इतना ही नहीं, चेतावनी भी जारी की गई है कि अगर कोई जहाज यहां से गुजरा तो आग लगा दी जाएगी। खास बात है कि यह मार्ग भारत (India) के लिए भी काफी अहम है और इसके बंद होने का असर पड़ सकता है। इधर, अमेरिका दावा कर रहा है कि अब तक उसने बड़ा हमला किया नहीं है। वहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा।

    रॉयटर्स ने ईरानी मीडिया की रिपोर्ट्स के हवाले से बताया, IRGC यानी ईरान रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि गुजरने वाले किसी भी जहाज को आग के हवाले कर दिया जाएगा। शनिवार को मार्ग बंद करने के ऐलान के बाद ईरान की तरफ से दी गई यह सबसे बड़ी धमकी है।


    चेतावनी

    कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने कहा, ‘स्ट्रेट (ऑफ होर्मुज) बंद कर दिया गया है। अगर कोई भी गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के हीरो और नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देगी।’ खास बात है कि दुनिया की तेल खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है।


    क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

    होर्मुज जलडमरू मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। इसे बंद करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम होंगे, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधित होगा और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।

    होर्मुज के भारत और दुनिया के लिए मायने
    भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह तेल ज्यादातर होर्मुज से होकर गुजरता है। मार्ग बाधित होने पर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर तुरंत असर पड़ेगा। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे महंगाई और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। साथ ही आयात बिल बढ़ने से चालू खाते का घाटा भी बढ़ता है।

    भारत के ईरान, सऊदी अरब और यूएई के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में संतुलित कूटनीति और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत के लिए अहम है। यदि यहां तनाव बढ़ने और जहाजों पर पाबंदी लगती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तुरंत उछाल आ जाएगा। इसका असर महंगाई, परिवहन लागत और वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ेगा।

    दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा एलएनजी इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

  • अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत पर पड़ सकता है असर, जानिए क्‍या-क्‍या होंगे प्रभावित?

    अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत पर पड़ सकता है असर, जानिए क्‍या-क्‍या होंगे प्रभावित?



    नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर सिर्फ इन देशों या Israel तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व के अन्य देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन पर भी इसके प्रभाव दिख रहे हैं। युद्ध के विस्तार की स्थिति में भारत पर इसका व्यापक आर्थिक असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि किस तरह सोना-चांदी, शेयर बाजार और बासमती चावल प्रभावित हो सकते हैं।

    क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल
    पूरा मध्य पूर्व क्षेत्र तेल का प्रमुख उत्पादक है और भारत कच्चे तेल के आयात पर पूरी तरह निर्भर है। हाल के महीनों में रूस की जगह सऊदी अरब से तेल खरीद बढ़ी थी, लेकिन युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

    शेयर बाजार पर दबाव
    अमेरिका-ईरान युद्ध की अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ रहा है। शुक्रवार को बाजार में गिरावट देखी गई, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोमवार को यह गिरावट जारी रह सकती है। वैश्विक तनाव हमेशा शेयर बाजार में भारी दबाव डालता है, और निवेशक सतर्क हो जाते हैं।

    सोने और चांदी की कीमतों में तेजी
    शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर रुख करते हैं। इससे सोने और चांदी की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार सोने का भाव 1,70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकता है।

    बासमती चावल के निर्यात पर असर
    भारत मध्य पूर्व के कई देशों को बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें ईरान भी शामिल है। युद्ध के कारण इस निर्यात पर असर पड़ सकता है, जिससे किसानों और निर्यातकों की आमदनी प्रभावित हो सकती है।

    डॉलर मजबूत, रुपये कमजोर
    तेल की बढ़ती कीमतों का असर डॉलर और रुपये पर भी पड़ेगा। डॉलर की मांग युद्ध के कारण बढ़ेगी, जिससे अमेरिकी मुद्रा और मजबूत होगी। वहीं, रुपये में गिरावट देखने को मिल सकती है।

    महंगाई पर दबाव
    क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे देश में महंगाई को बढ़ा सकती है। ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा होगा, जिससे आम नागरिक पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

    अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में संघर्ष जारी रहा, तो भारत की आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ताओं की जेब पर इसका असर लंबी अवधि तक महसूस होगा।